समिधा

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  • समिधा -33

      समिधा – 33        वरुण अपनी तैयारियों के लिए खाना निपटने के साथ ही भगिनी आश्रम की तरफ निकल गया।  आश्रम की महिलाएं खाने बैठीं थी । वहाँ की वरिष्ठ महिलाओं की खाने की पारी थी। पारो और बाकी कम उम्र की लड़कियां और महिलाएं खाना परोस रहीं थीं।  भोजन कक्ष के बाहर ही … “समिधा -33”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा- 32

      समिधा -32     ‘”कृष्ण क्या है? एक विचार! एक चिंतन! या एक संपूर्ण युगपुरुष! जिसने युगों के विचारों को बदल दिया। श्री कृष्ण के जीवन में जन्म से लेकर उनके जीवन काल तक हर पल कुछ न कुछ घटता रहा और वह जो भी घटता रहा वह श्री कृष्ण का स्वयं रचित कार्य था … “समिधा- 32”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -31

         समिधा – 31       भगिनी आश्रम एक तीन मंजिला आश्रम था, जिसमें बहुत बड़े बड़े हॉल एक ऊपर एक बने हुए थे। इनमें सबसे ऊपरी मंजिल पर कुछ कमरे और खुली छत थी। ये कमरे भगिनी आश्रम के सामान रखने के लिए उपयोग में लाइ जाती थीं। इन्हीं में एक कमरा चारु दीदी को … “समिधा -31”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा-30

       समिधा – 30     वरुण को मठ में आए लगभग आठ 9 महीने बीत चुके थे और अब उसका काम बदल चुका था। मठ में किस व्यक्ति को कितना समय हुआ है उसकी शिक्षा-दीक्षा क्या है इसके आधार पर कार्य विभाजित है बावजूद मठ में शुरुआती दिनों में हर एक व्यक्ति को सारे जरूरी … “समिधा-30”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा-29

    समिधा- 29     कितनी अजीब बात है! वही संसार है, वही हवा वही पानी सब कुछ भगवान में एक सा दिया है! सबको वही समय दिया है, लेकिन किसी का समय तो पंख लगाकर उड़ जाता है और किसी का काटे नहीं कटता।पारो के साथ भी यही हो रहा था। चाहे वह दिन दिन भर … “समिधा-29”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा-28

          ससुराल में पारो का समय कैसे बीत रहा था उसे खुद ख्याल नही था। इसी बीच एक बार लाली भी उससे मिलने आई। लाली पेट से थी और इसी कारण उसे पहले आने नही दिया गया था।   मांग भर लाल सिंदूर हाथ में शाखा पोला पहनी लाली पारो को अति सौभाग्यशाली दिख रही थी। … “समिधा-28”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा-27

       समिधा- 27     केदारनाथ त्रासदी को घटे सात महीने बीत चुके थे। जिन्होंने अपने अपनों को खोया था वो उस त्रासदी को इन सात महीनों में भी नही भूल पा रहे थे, यही हाल उनका भी था जिनके अपने इस त्रासदी से वापस लौट चुके थे।         वरुण मंदिर ट्रस्ट में स्थायी सदस्यता पा … “समिधा-27”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 26

        समिधा – 26       केदारनाथ त्रासदी घट चुकी थी बहुत बड़ी संख्या में उत्तराखंड में तबाही मची थी, बहुत से लोग अब भी गुम थे जिनके बारे में कोई जानकारी किसी को भी नहीं थी | बचाए गए लोगों को हरिद्वार दिल्ली तक पहुंचाया जा रहा था।       वरुण भी दिल्ली पहुंच चुका था……     … “समिधा – 26”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा-25

    समिधा -25   ठाकुर माँ को हैलीकॉप्टर में बैठा कर देव ने सुकून की गहरी सान्स ली, लेकिन ठाकुर माँ लगातार उसका नाम पुकारे जा रहीं थीं।    कई लोग सवार हो चुके थे, और बहुत से अब भी बाकी थे कि वो मज़बूत इमारत जो अब तक अपनी पूरी क्षमता से खड़ी थी भरभराकर गिर … “समिधा-25”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा- 24

       समिधा -24      वो औरत इतनी देर से लॉज में ऊपर नीचे हर जगह जाकर शायद अपने पति और बच्चे को ही ढूंढ रही थी। लेकिन इतनी भीड़ में कहीं भी उन दोनों का पता नही चला, परेशान हाल नीचे आकर सबसे पूछती आखिर वो अपना संयम खो बैठी…. “शादी के इतने सालों … “समिधा- 24”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -23

      समिधा -23 वरुण शंकराचार्य मंदिर के लिए धीमे से आगे बढ़ रहा था कि एक बालक भागता हुआ उसके पास चला आया। हाथ से एक ओर बैठे पंडित की ओर इशारा कर उसने वरुण को अपनी बात बता दी… ” भैया वहाँ वो जो पंडित जी बैठे हैं ना उनके पास अपना नाम पता … “समिधा -23”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -22

    समिधा-22            हरिद्वार से बस आगे निकल चुकी थी। पिछलीरात से होती बारिश अब भी नही रुकी थी ।   ऋषिकेश से जैसे जैसे बस आगे बढ़ती जा रही थी पहाड़ी रास्ता शुरू होता जा रहा था, एक तरफ बारिश से धुलते पहाड़ थे तो दूसरी तरफ गरजती गंगा बह रही थी। धूल भरा रास्ता बारिश … “समिधा -22”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -21

     वहीं मेरी मुक्ति है!!!      वही मेरा मोक्ष है!!!       वही मेरा निर्वाण……     उन पंडित की बातों को सुनते शर्मा जी ने उन्हें प्रणाम किया और गाड़ी को आगे बढ़ाने का इशारा कर दिया…..     कहीं उबड़ खाबड़ रास्ते तो कहीं लंबी चिकनी सड़क, कहीं ताल तलैय्या तो कहीं ऊसर पार करती बस आगे बढ़ती चली … “समिधा -21”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 20

      समिधा -20                        मैं देवज्योति टैगोर हूँ। अपनी दादी को दर्शन करवाने ले जा रहा हूँ। वो बुज़ुर्ग हैं ना इसलिए वहां सामने उनकी सुविधा वाली सीट पर उन्हें बैठाया है।” वरुण ने मुस्कुरा कर अपना हाथ आगे बढ़ा दिया… ” मैं वरुण सत्य की तलाश में केदारनाथ जा रहा हूँ। “   … “समिधा – 20”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 19

    समिधा -19    खत पढ़ कर वरुण के चेहरे पर आई मुस्कान कुछ चंद मिनटों में ही गायब हो गयी। जाने कौन है ये पारोमिता और जाने कहाँ की है ये ज़ोइता?     सिर्फ खत ही तो उसके पास पहुंचा था, न भेजने वाले का पता था न खत पहुंचने का ठिकाना लिखा था। ज़रूर … “समिधा – 19”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -18

      समिधा – 18       वाह रे भगवान तुम और तुम्हारा संसार !!अब तुम्हें पूरी तरह समझने आना ही पड़ेगा मुझे तुम्हारे रचे संसार को तज कर तुम्हारी शरण में…..     रोली की बिदाई के साथ ही घर भर को व्यस्त रहने का जो बहाना मिल गया था वो खत्म हो गया। वरुण को भी … “समिधा -18”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 17

         समिधा –17      पारो ने कादम्बरी को देखने के लिए अपने एक ओर निगाहें डाली तो उसकी नज़र पास बैठे वरुण पर पड़ गयी और उसे अचानक उस शाम मंदिर के बाहर मिली वो जोड़ी याद आ गयी। द्वारिकाधीश और सत्यभामा की जोड़ी!     पारो के चेहरे पर मुस्कान चली आयी… “आखिर सत्यभामा तो … “समिधा – 17”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा- 16

    समिधा –16        माँ से बात करने के बाद वरुण के मन का बहुत बड़ा बोझ हट चुका था।     वो शांत मन से मंदिर की ओर निकल गया….    हमारे देश की तरह वहाँ मंदिर सुबह शाम दोनो वक्त खुलता हो ऐसा नही था। उस मंदिर के पंडित मंदिर ट्रस्ट की तरफ से रखे … “समिधा- 16”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -15

    समिधा — 15        प्रखर के लिए मन में एक अलग सी आदर की भावना लिए देव वापस लौट आया।     उस चिट्ठी को टेबल पर रख देव अपनी शर्ट खोलने लगा कि पारो चली आयी।   पीछे से देव की कमीज पकड़ उसने उतारने में मदद करते हुए वहाँ क्या हुआ का हालचाल भी … “समिधा -15”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 14

      समिधा –14      अब तक आपने पढ़ा:-     वरुण को अपनी बीमारी के बारे में पता चलता है और उसके बाद अपनी एक दोस्त सारा की बातों से प्रभावित वरुण को धीरे धीरे अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों की बातों में रुचि जागने लगती है।   वो मंदिर,श्री कृष्ण, उनके भोग आदि की तरफ अपने झुकाव … “समिधा – 14”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा-13

       समिधा — 13       बातचीत चलती रही, सब अच्छा अच्छा सा ही लग रहा था, शाम होते होते लड़के वाले चले गए। घर की औरतों ने सुबह से बहुत सारा परिश्रम किया था। जिसको जो अच्छा बनाना आता था उसने वही बना कर परोस दिया था, एक तरह से होड़ सी मच गई थी … “समिधा-13”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा-12

       समिधा — १२       ढेर सारी शॉपिंग निपटने के बाद पूरा सामान सारा को सौंप कर अपनी तरफ गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए वरुण का सर इतनी जोर से घूम गया कि वो खुद को संभाल नही पाया और बेहोश होकर गिर पड़ा।   उसे दूसरों की मदद से गाड़ी में डाल कर सारा ने … “समिधा-12”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा- 11

        समिधा 11 आप लोग चिंता न करें, गांव के बाहर एक  बाबा बैठते हैं , बूढ़े नीम के नीचे। सुना है देसी विदेसी सभी तरह की चुड़ैलों को पकड़ने में महारत है उन्हें। अगर माँ आप सब कहें तो मैं पारो को वहाँ से बंधवा लाऊं।”   सभी औरतों के चेहरे पर एक सी … “समिधा- 11”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -10

    समिधा 10        आरती समाप्त हो चुकी थी, पंडित जी ने आरती सामने रखी और चरणामृत वितरण करने लगे।  एक एक कर लोग आगे बढ़ते जा रहे थे और आरती लेकर वापस लौट रहे थे।प्रज्वल भी जाकर आरती लेकर माथे पर चंदन का तिलक लगाए वापस आ गया लेकिन वरुण हाथ जोड़े खड़ा ही रहा।    … “समिधा -10”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -9

      समिधा 9       पार्थो से बात होने के बाद देव के मन में भी यह विचार जाग गया कि घर पर बिना किसी से कहे पारो अगर प्राइवेट इम्तिहान दे ले तो घर पर किसी को कोई परेशानी नही होगी क्योंकि किसी को मालूम ही नही चलेगा।         देव के कदम तेज़ी से घर की … “समिधा -9”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -8

    समिधा 8     समिधा –8         सुबह वरुण की नींद बहुत देर से खुली। घर पर भी किसी ने उसे जगाने की ज़हमत नही उठायी। उसने समय देखा और हड़बड़ा कर उठ बैठा, तभी उसकी माँ उसके लिए चाय लिए चली आयी… ” उठ गया तू, ले चाय पी ले।”   “माँ आज तो बहुत … “समिधा -8”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 7

      समिधा –7             कालरात्रि बीत चुकी थी। बेटी के घर किया जाने वाला नेगचार पूजा पाठ निपटा कर पारो की बिदाई कर दी गयी।      एक माँ जितना कर सकती थी उससे कहीं ज्यादा बढ़ चढ़ कर किया था दुर्गा ने। उस पर घर के सभी का साथ भी था। इतने उत्साह से … “समिधा – 7”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 6

       समिधा 6         पारो के घर की रौनक देखते ही बन रही थी। कल पारो का ब्याह था , आज पारो के घर बूड़ो भात की रस्म के लिए तरह तरह के व्यंजन बन रहे थे।   आखिर कुंवारी कन्या का अपने घर का आखिरी भात ( भोजन)  था, इस रस्म के लिए ठाकुर … “समिधा – 6”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -5

        समिधा– 5    सीढियां उतरती पारो अब तक उन्हीं विचारों में मगन थी कि मंदिर के बाहर भीख मांगते बच्चों की टोली की हँसने खिलखिलाने की आवाज़ उस तक पहुंच गई….      ये वही बच्चे थे जिन्हें उसने सुबह मंदिर में प्रवेश के समय तेज़ धूप में इधर से उधर भागती गाडियों के साथ भागते … “समिधा -5”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -4

                   समिधा –4          देबज्योति के घर पर सभी को लड़की की तस्वीर बहुत पसंद आ गयी थी। देबज्योति के रिश्ते की भाभियां उसे छेड़े जा रहीं थीं।    आज उनके घर पंडित बुलाया गया था शादी की तारीख तय करने के लिए।    नियत समय पर पहुंचे पंडित जी अपनी आंखों पर चश्मा चढ़ाये … “समिधा -4”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा – 3

         समिधा –3        आमी चिनी गो चिनी तोमारे               ओगो बिदेशिनी            तुमि थाको शिन्धु पारे                ओगो बिदेशिनी….        आमी चिनी गो चिनी तोमारे…..     आंगन में रेडियो पर चलती रबिन्द्र संगीत की स्वरलहरी हवा में लहरा लहरा कर अलग ही मधुरता बिखेर रही थी, उसी के साथ सुर मिलाती पारो भी यूनिफार्म पहने अपनी चोटियों में … “समिधा – 3”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा -2

    समिधा                             समिधा   …………….        सुबह से ही रायचौधरी परिवार में हलचल सी मची हुई थी।   घर की सबसे बुज़ुर्ग सदस्या यानी पारो की दादी जिन्हें घर के सभी बच्चे नाती पोते ठाकुरमाँ बुलाया करते थे बड़े से आंगन के बीचों बीच बैठी रोहू साफ कर रही थी।   इतने बड़े परिवार में एक आध … “समिधा -2”पढ़ना जारी रखें

  • समिधा

    ”  समिधा “    यज्ञ , हवन में प्रयुक्त लकड़ियों को समिधा कहा जाता है। सूर्य की समिधा मदार होती है तो चंद्रमा की पलाश।   आहुति या हव्य तभी पूरी तरह से हवन को समर्पित हो पाता है जब समिधा सही पड़ी हो।   ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::                      समिधा           ” अब तुम एक साधारण मनुष्य … “समिधा”पढ़ना जारी रखें

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