माइग्रेन लक्षण और उपचार


   कुछ दिनों से जया ने महसूस किया कि उसे तेज धूप से वापस आते हैं सर में एक तरफ दर्द का अनुभव होता है इसके अलावा बहुत बार तेज चलता टीवी भी उसके दर्द को बढ़ा देता है कई बार वह इतनी विचलित हो जाती है कि टीवी का रिमोट उठाकर टीवी म्यूट ही कर देती है…..आखिर जब उसकी सिर दर्द की समस्या बढ़ती गई और उसकी खीझ और झुंझलाहट बढ़ती ही गयी  तब उसने डॉक्टर से सलाह लेना मुनासिब समझा और डॉक्टर से मिलने के बाद उसे मालूम चला कि ये रोज़ रोज़ का उठने वाला दर्द माइग्रेन है…..

   माइग्रेन आज के समय में पाई जाने वाली एक ऐसी समस्या जिससे परेशान होने वाला इंसान ही उसकी तकलीफ समझ सकता है ।
    माइग्रेन एक ऐसा दर्द है जो सिर के आधे हिस्से में अमूमन पाया जाता है, लेकिन बहुत बार अपनी क्रिटिकल कंडीशन में यह पूरे सिर को भी अपने कब्जे में कर लेता है। माइग्रेन को बहुत जगह अधकपारी भी कहा जाता है।
      माइग्रेन एक तरह का हल्का अथवा कष्टदायक सिर का ऐसा दर्द है जिस में झनझनाहट वाला तेज दर्द रोगी को महसूस होता है, बहुत बार सिर के दर्द के साथ मतली उलटी आदि के लक्षण भी पाए जाते हैं। इसके साथ ही रोगी प्रकाश अथवा ध्वनि के प्रति भी अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है। तेज सूर्य की रोशनी अथवा तेज बजती हुई ध्वनियां सिर के दर्द को प्रभावित करती हैं ऐसे समय में किसी अंधेरे कमरे में शांति से लेटना या सोना आश्चर्यजनक रूप से सर के दर्द को कम कर देता है आइए जानते हैं माइग्रेन है क्या?
    इसके कारण लक्षण उपचार और  रोकथाम आदी।

माइग्रेन का दर्द एक ऐसा  दर्द है जो आपके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, यह आपके सामान्य दैनिक गतिविधियों को करने से आपको रोकता है। अक्सर यह दर्द लोगों को कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक बना रहता है ।
माइग्रेन का दर्द ऐसा दर्द है, जो बहुत बार एक periodic session  में यानी कुछ कुछ समय अंतराल के बाद आता है , और कई बार non-periodic भी होता है.. यानी बिना किसी तय समय के भी रोगी इससे व्यथित हो सकता है। माइग्रेन का दर्द सामान्यता 4 घंटों से तीन-चार दिन तक भी लगातार बना रह सकता है लेकिन यह बढ़ती अवधि व्याधि को बढ़ा  जाती है, और रोगी को बहुत ज्यादा तकलीफ में डाल देती है ।

माइग्रेन के मुख्य लक्षण:-
      आमतौर पर माइग्रेन का सबसे पहला और सर्व प्रमुख लक्षण सिर के एक और तीव्र शूल का होना है। सिर में किसी एक तरफ दाहिने या बाई और पूरे आधे हिस्से में अनियंत्रित और कष्टदायक दर्द होता है। कई बार यह सिर को पूरी तरह भी कवर करके हो सकता है। यह दर्द अमूमन झनझनाहट वाला होता है जो सिर को हिलाने से या सिर में हलचल उत्पन्न करने से बढ़ जाता है।
    आयुर्वेद में इसे अर्धावभेदक की भी संज्ञा दी गयी है।

माइग्रेन की कुछ अतिरिक्त लक्षण है मतली का होना उल्टी होना, ध्वनि तथा प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता होना। कुछ अन्य लक्षणों में है शरीर में और चेहरे पर पसीने का आना , मन में व्यग्रता का उत्पन्न होना, गर्म और ठंडा पता चलना।  कई बार माइग्रेन के लक्षण में पेट में दर्द भी होता है और जिसके बाद दस्त का भी अनुभव हो सकता है।
   हमारे देश में लगभग 5 में से 1 महिला तथा 15 में से एक पुरुष माइग्रेन के दर्द से पीड़ित होते हैं। माइग्रेन के लक्षण कई तरह के हो सकते हैं:-
पूर्वाभास युक्त माइग्रेन
पूर्वाभास रहित माइग्रेन
सिरदर्द रहित माइग्रेन के लक्षण और
सतत माइग्रेन के लक्षण…

बहुत बार रोगी इस बात को नहीं समझ पाते कि उन्हें डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए अमूमन सर के दर्द में किसी भी तरह का पेन किलर खा कर व्यक्ति अपना काम चला लेते हैं लेकिन इस तरह खाए जाने वाले पेन किलर के लेने के भी कुछ तरीके होते हैं।

     किसी भी तरह का पेन किलर 1 महीने में 10 दिन से ज्यादा की अवधि में नहीं लिया जाना चाहिए।
इससे ज्यादा लेने पर यह आपके लीवर और फिर किडनी पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।

     माइग्रेन के दर्द के साथ अगर आपको एक अथवा दोनों बाजू में झनझनाहट महसूस हो, दोनों में से किसी भी एक हाथ को उठाने में तकलीफ हो, चेहरे पर एक और लकवे के लक्षण दिखाई दें, आपकी जबान लड़खड़ाए अथवा स्पष्ट बोली ना निकले ,आंखों के आगे अंधेरा छाने लगे, आंखों में दोहरी दृष्टि दिखाई दे, सिर दर्द के साथ तेज बुखार आए या गर्दन में अकड़न हो, मन में तेज व्याकुलता हो, दौरा पड़े तो ऐसी सारी कंडीशन में आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह लक्षण सिर्फ माइग्रेन के नहीं माइग्रेन के साथ जुड़े मेनिनजाइटिस या स्ट्रोक के हो सकते हैं ऐसे लक्षणों को नकारना सही नहीं है यह लक्षण भविष्य में व्याधि की तीव्रता की ओर संकेत करते हैं।

आईये जानते हैं माइग्रेन होने के कारणों के बारे में:–

कारण:–
        1 ) — वैसे माइग्रेन के उत्पन्न होने के कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, कहा जा सकता है कि कारण अस्पष्ट हैं, परंतु जो मुख्य रूप से कारण समझ में आते हैं वह है मस्तिष्क में पाए जाने वाले रसायन वहां की नाड़ियों और रक्त कोशिकाओं में पाए जाने वाले कुछ परिवर्तन ही माइग्रेन के दर्द के कारण होते हैं।
    
   2) — इसके अलावा कुछ एक लोगों में वंशानुगत कारण भी देखे गए हैं ।
  
    3)–कुछ महिलाओं में माहवारी के पहले एस्ट्रोजन लेवल में बदलाव के कारण भी माइग्रेन का दर्द उत्पन्न होता है।

  4)–  इसके अलावा मानसिक तनाव

     5)–शारीरिक थकावट और

     6) —कुछ विशिष्ट प्रकार के आहार विहार पेय आदि भी माइग्रेन के दर्द का कारण बनते हैं।

पूर्वाभास युक्तलक्षण:–‘
               पूर्वाभास युक्त इस माइग्रेन के लक्षणों में सर्व प्रमुख लक्षण है दृष्टि संबंधी लक्षण, इसमें माइग्रेन का दर्द शुरू होने के पहले आंखों के सामने टिमटिमाते प्रकाश जैसी रेखाएं नजर आती हैं, कई बार कुछ टेढ़ी-मेढ़ी पैटर्न या फिर बिंदु दिखाई देते हैं।
   इसके अलावा चेहरे होठों और जीभ में सुई चुभने जैसी सिहरन महसूस होती है इन लक्षणों के साथ चक्कर का आना शरीर का बैलेंस बिगड़ना, बोलने में कठिनाई होना तथा कई बार बेहोशी छा जाना भी पूर्वाभास युक्त माइग्रेन के लक्षण है।

पूर्वाभास रहित माइग्रेन:-
       इस प्रकार में माइग्रेन के लक्षण अचानक ही उत्पन्न होते हैं तेज प्रकाश में बाहर निकलने पर अथवा तेज ध्वनि सुनने पर इस तरह के लक्षण अपने आप बिना किसी पूर्वाभास के पैदा हो जातें हैं।

बिना लक्षणों का माइग्रेन :–
        बिना लक्षणों के माइग्रेन में बहुत बार सर में दर्द ना होने के बावजूद मतली या उल्टी होना तथा ध्वनि अथवा प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता होना जैसे लक्षण लिखे जाते हैं इनमें माइग्रेन का मुख्य लक्षण अर्थात सिर में दर्द होना नहीं पाया जाता।

सतत लक्षण:–
     इसमें व्यक्ति माइग्रेन के सारे लक्षणों से सतत बने रहने के कारण हमेशा तकलीफ की अवस्था महसूस करता है इसमें माइग्रेन के लक्षण तीन चार घंटों से लेकर तीन चार दिनों तक व्यक्ति में पाए जाते हैं तथा हफ्ते में दो से तीन बार माइग्रेन का अटैक व्यक्ति को झेलना पड़ता है इसलिए यह एक कष्टदायक स्थिति निर्मित हो जाती है।

माइग्रेन प्रेरक:-
      कुछ ऐसे कारण जिनसे माइग्रेन का दर्द उभरता है निम्नानुसार है:–
1) हार्मोनल — सामान्यता महिलाओं में माहवारी के पहले एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में बदलाव के कारण इस समय पर माइग्रेन का अटैक महसूस किया जाता है यह सामान्यतः महावारी के 2 दिन पूर्व से 3 दिन बाद तक होता है कई महिलाओं में मेनोपॉज के बाद इस तरह का माइग्रेन का दर्द स्वत ही समाप्त हो जाता है।

2) भावनात्मक– मानसिक तनाव उत्सुकता अत्यधिक स्ट्रेस या टेंशन मानसिक आघात उत्तेजना आदि कारण भावनात्मक ट्रिगर का कार्य करते हैं।

3) शारीरिक:– शरीर का आवश्यकता से अधिक कार्य करना शरीर की मांसपेशियों में थकान , नींद की कमी, शिफ्ट ड्यूटी के कारण नींद के समय में परिवर्तन होते रहना,  गलत मुद्राओं में बैठना- लेटना आदि, गर्दन तथा कंधों में होने वाला खिंचाव, लंबे विदेशी सफर के कारण उत्पन्न होने वाला जेट लेग।
   क्षमता से अधिक किया कठोर व्यायाम तथा शरीर में रक्त शर्करा की कमी अर्थात हाइपोग्लाइसीमिया की कंडीशन यह सारे कुछ शारीरिक कारण हैं जिनके कारण माइग्रेन का दर्द अनुभव होता है।

4)आहार– अनियमित और अपथ्य आहार का सेवन डिहाइड्रेशन अत्यधिक मदिरापान खाद्य योजना इरिन,  कैफीन का अत्यधिक प्रयोग चॉकलेट खट्टे फल पनीर इत्यादि के प्रयोग से भी बहुत सी महिलाओं और पुरुषों में माइग्रेन का दर्द उभरता है। हालांकि कई मायनो में डार्क चॉकलेट का सेवन बहुत बार माइग्रेन के रोगियों को आराम भी पहुंचाता है।

पर्यावरण:- व्यक्ति के आसपास का माहौल उसका पर्यावरण भी बहुत बार माइग्रेन के लक्षणों के तीव्रता और कमी का कारक होता है। अत्यधिक तेज प्रकाश अथवा गर्मी तेज ध्वनि कंप्यूटर स्क्रीन से निकलती टिमटिमाती रोशनी आसपास धूम्रपान के धुएं का होना अत्यधिक शोर का होना , तेज या तीखी गंध से भरा माहौल, बहुत घुटन भरा वातावरण जहां ऑक्सीजन की कमी हो ऐसे सब इस प्रकार के  कारक माइग्रेन के दर्द को बढ़ाते हैं।

औषधियां:– व्यक्ति द्वारा प्रयोग की जाने वाली नींद की गोलियां संयुक्त गर्भनिरोधक गोलियां अथवा हार्मोनल प्रतिस्थापन औषधियां यह कुछ इस तरह की औषधियां हैं जो माइग्रेन के दर्द को समय-समय पर बढ़ाती  रहती हैं।

निदान:–
     माइग्रेन के रोगी में माइग्रेन के कारण का सही प्रकार से पता लगाकर लक्षणों का उपचार किया जाए तो माइग्रेन को सही किया जा सकता है।
      वैसे माइग्रेन का कोई भी उपचार नहीं है सिर्फ माइग्रेन के लक्षणों को औषधियों और आहार-विहार के माध्यम से कम किया जा सकता है, अगर व्यक्ति उचित दिनचर्या के साथ पथ्य का पालन करें तो माइग्रेन से बहुत हद तक आराम मिल सकता है। अधिकतर डॉक्टर माइग्रेन के ट्रीटमेंट के लिए रोगी को एक माइग्रेन डायरी मेंटेन करने की सलाह देते हैं इसमें रोगी को एक डायरी बनाकर अपने दर्द  के कारण उनके लक्षण उनके समय को एक चार्ट में बनाना चाहिए।
   
     माइग्रेन डायरी में लिखी जाने वाली मुख्य बातें हैं।     

–तिथि,
–माइग्रेन के दर्द उठने का समय,
–माइग्रेन का दर्द जिस वक्त आरंभ हुआ उस समय रोगी क्या कर रहा था ?
–माइग्रेन का दर्द कितने समय तक महसूस किया गया?
— इस दर्द की अवधि में अनुभव के अन्य लक्षण क्या थे?
–और औषधि के प्रयोग से कितनी देर में माइग्रेन का दर्द शांत हुआ?
    
      माइग्रेन डायरी के नाम से जाने जाने वाली यह चिकित्सा पद्धति माइग्रेन के रोगियों में औषधियों के प्रयोग में चमत्कारी सफलता दिलवा रही है किसी भी तरह का कि दर्द निवारक औषधि प्रत्येक माह 10 दिन से अधिक नहीं दी जानी चाहिए।

उपचार :–
   माइग्रेन में मुख्य रूप से लाक्षणिक चिकित्सा की जाती है इसमें मुख्यता दर्द निवारक औषधियों का प्रयोग किया जाता है दर्द निवारक औषधियों में।  

  1) पैरासिटामोल
   2)एस्पिरिन या
   3)आइबूप्रोफेन

का प्रयोग किया जाता है।
    सामान्य दर्द निवारक औषधियों से यदि मरीज को आराम नहीं होता तब उसे टिपटोस  दिया जाता है टिपटोस औषधि सेवन के साथ कुछ एक उसके साइड इफेक्ट्स जुड़े हुए हैं जो रोगी दवा लेने के साथ ही महसूस कर सकता है टिपटोस के प्रयोग के साथ शरीर में गर्मी लगना, त्वचा में कसाव आना, झनझनाहट होना, चेहरे का तमतमाना तथा मांस पेशियों में भारीपन का अनुभव होता है ।
टिपटोस के अलावा दी जाने वाली दवाई एंटी सिकनेस टेबलेट होती हैं यह एक तरह से मितली या उल्टी को रोकने वाली दवाइयां होती हैं इन्हें एंटीमेटिक ड्रग कहा जाता है।
     दवाइयां गोली इंजेक्शन तथा नेजल स्प्रे इन तीनों रूपों में पाई जाती हैं।

दर्द निवारक औषधियों के अलावा एक्यूपंचर भी एक टेक्निक है, जिसके द्वारा कई चिकित्सक माइग्रेन के लक्षणों की चिकित्सा करते हैं ।
         NICE द्वारा एक्यूपंक्चर की विधि को भी माइग्रेन के उपचार के लिए प्रस्तावित किया गया है…. इसमें 5 से 8 सप्ताह तक 10– 10 के सत्र में एक्यूपंक्चर द्वारा बिना किसी औषधि के प्रयोग से माइग्रेन का इलाज किया जाता है।

ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन इस पद्धति को टीएमएस भी कहा जाता है….NICE  के द्वारा प्रस्तावित इस पद्धति में मुख्यतः  माइग्रेन के रोगियों में माथे पर सिर के दोनों तरफ मैग्नेटिक बेल्ट लगाकर ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन दिया जाता है जिससे पूरी तरह अथवा जड़ से तो नहीं लेकिन माइग्रेन के लक्षणों में बहुत राहत अनुभव करते हैं सीएमएस की यह विधि गर्भवती माताओं और शिशु वती माताओं जो कि अभी बच्चों को दूध पिलाते हैं मैं नहीं प्रयोग की जाती।

आयुर्वेद उपचार:-
      आयुर्वेद में माइग्रेन के उपचार के लिए औषधियों और कुछ टॉनिक के साथ पंचकर्म चिकित्सा पद्धति का भी वर्णन है।
    प्रयोग की जाने वाली औषधियों में प्रमुख हैं:–
  1) शिर:शूलादिवज्र रस
   2) पथ्यादी काढा
    3) मान्स्यादी क्वाथ
    4) ब्राम्हि रसायन।
   5) शंखपुष्पी आसव
    6) मधुकारिश्ट
    7) पथ्यादी मोदक आदी

इसके अलावा पंचकर्म में:–

  1) अणु तैल नस्य
  2) तक्र धारा
   3) दुग्धधारा
   4) तृफला से शिरो धारा।

उपचार किसी भी पद्धति से किया जाए माइग्रेन के रोगियों के लिए उपचार के दौरान यह अवश्य करना है कि उन्हें अंधेरे कमरे में कुछ देर आराम करने दिया जाए पथ्य आहार के सेवन के साथ अपथ्य को त्यागकर कर अगर वह कुछ देर के लिए अंधेरे कमरे में लेटे आंख बंद करके तो उन्हे माइग्रेन के लक्षण में आराम मिलता है। कई ऐसी ऐसी औषधियां हैं जिन्हें उचित मात्रा में ही प्रयोग किया जाना चाहिए जैसे एस्पिरिन 16 वर्ष से कम उम्र के बालकों में नहीं प्रयोग की जा सकती ।
   इसी तरह पेरासिटामोल को भी बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग करने से लीवर पर उसका असर पड़ता है आइबूप्रोफेन के साथ भी यही बात है। इसलिए माइग्रेन के शुरुआती लक्षण में बहुत हल्के दर्द निवारक जैसे पेरासिटामोल से ही रोगियों के लक्षणों के इलाज की शुरुआत करते हैं…

  माइग्रेन एक ऐसी तकलीफ है जो आपकी रोजमर्रा के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर जाती है। इसलिए आवश्यक है कि इसके शुरुआती लक्षणों में ही इसे पहचान कर इसके कारणों और लक्षणों का समुचित उपाय किया जाए तथा माइग्रेन से मुक्ति पाई जाए।अपर्णा

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

3 विचार “माइग्रेन लक्षण और उपचार” पर

  1. मुझे तेज गंध और घुटनभर माहौल में होता है इसलिए मैं ना तो बंद गाड़ी में बैठ पाती हूं और ना ही एसी रूम में। पर यह बस इन कारणों से ही होता है वरना नहीं और पेनकिलर से ठीक भी हो जाता है।

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  2. Mere husband ko cluster migrain hai.. jo saal mein ek baar Ata hai pure 1 se 1.5 mahine ke liye … jaydatar August ya September mein.. har saal aaye aisa jarur nahi hai… peeche saal 2 nuro doctors ko dikhaya 2 ayurvedic ko par koi fayda nahi hua dard bhaiya gya.. fir homeopathy se fayda hua.. Unhein ye migrain 12 saalon se hai.. aur jab bhi hota hai tabhi unki halat buri ho jaati hai.. apni shop par bhi nahi ja paate.. apne personal experience se kah sakti hu ki ye bhut hi buri bimari hai..

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