जीवनसाथी पार्ट-2

अब तक आपने पढ़ा बाँसुरी पढ लिख कर मुम्बई में नौकरी करने लगती है और अपनी ऑफिस कुलीग माला और उसकी दोस्त पिंकी के  साथ एक फ्लैट में रहने लगती है, अब आगे…
डेढ़ साल से साथ रहते रहते तीनों में पक्की दोस्ती  के तार बंध चुके थे….
     माला का एक कॉलेज के जमाने का दोस्त था जो मुंबई में ही एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब किया करता था, दोनों लगभग पिछले सात-आठ सालों से एक-दूसरे को जानते थे पहचानते थे और एक दूसरे को पसंद करने लगे थे…… इसीलिए दोनों ने अपनी दोस्ती को कुछ और आगे बढ़ाने का निश्चय किया और शादी के बंधन में बन्धने का निर्णय ले लिया, दोनों के परिवार वालों की मीटिंग भी मुंबई मे माला लोगों के फ्लैट पर ही हुई और शादी पक्की हो गयी ।।
      बांसुरी दिमाग की धनी तो थी साथ ही वह अपने पिता पर बहुत बोझ भी नहीं बनना चाहती थी,, इसीलिए नौकरी लगते साथ ही उसने अलग से अपने पैसे जोड़ने शुरु कर दिये थे , जिन्हें वह अपनी शादी के समय अपने पिता को देना चाहती थी,, क्योंकि उसे पता था उसके समाज में बेटी का ब्याह करने में पिता की कमर झुक जाए करती है,, उसने अपनी बड़ी बहन की शादी के समय अपने पिता को बहुत हैरान-परेशान देखा था।।।
      इसीलिए नौकरी लगते साथ उसने अपनी खुद की शादी के लिए अलग से पैसे जोड़ना शुरू कर दिया था, वह काफी हद तक इसमें सफल भी हुई थी उसने एक ठीक-ठाक सी रकम जोड़ ली थी ।।
     बांसुरी के ऑफिस में है भास्कर काम किया करता था।।
     भास्कर भी ब्राह्मण था बांसुरी के समाज का था और बांसुरी के शहर का ही निवासी था,, वह भी नौकरी के कारण ही मुंबई रहा करता था।।
      बांसुरी और भास्कर की पहली मुलाकात उनके ऑफिस में ही हुई थी ,,बांसुरी का चयन भास्कर की टीम के लिए ही हुआ था भास्कर की टीम की रिपोर्टिंग के लिए ही बांसुरी लिखा करती थी, भास्कर पहली नजर में ही बांसुरी की मोहिनी मूरत और प्रतिभा से प्रभावित हो चुका था।।
      ऐसा नहीं था की भास्कर के हृदय की दुर्बलता से बांसुरी अनजान थी, एक बांसुरी ही  क्या पूरा ऑफिस भास्कर की भावनाओं से परिचित था।
    पहले पहले पीठ पीछे भास्कर की भावनाओं पर हंसी मजाक करने वाले लोग अब खुल्लम-खुल्ला भास्कर के सामने उसके मन की दुर्बलता के बारे में हंसी मजाक में प्रश्न उठाने लगे थे, शुरू में सब की बातों को हंसी मजाक में उड़ाने वाले भास्कर ने आखिर एक दिन बांसुरी को प्रपोज कर ही दिया।।

        बांसुरी के मन में अब तक किसी के भी प्रेम की बांसुरी नहीं बजी थी उसका कोरा मन अब भी अपने सपनों के राजकुमार के लिए रास्ता देख रहा था…..
माला– किसका इन्तजार है तुझे बंसी ?? इतना अच्छा रिश्ता है तुझे सोचना चाहिए इस बारे में ।।
पिंकी–किस बारे मे बात चल रही है भई ,ज़रा हम भी तो सुनें ,कौन सा रिश्ता आया है हमारी बंसी के लिये??
माला– तू ही समझा पिंकी !!
पिंकी– समझा देंगे पर पहले हम तो समझे माजरा क्या है??
माला– हमारे बॉस भास्कर ने बांसुरी को शादी का प्रपोसल दिया है और मैडम इतने सही बंदे को भी लटका कर रखी हैं।
पिंकी– क्यों?? क्या बंसी ,क्या कह रही हैं माला ?? कहीं तुमने पहले ही कोई देख तो नही रखा??
बांसुरी– अरे नही !! ऐसा कुछ नही है ,बस भास्कर जी को देख कभी ऐसी फीलिंग ही नही आयी।।

माला– कैसी फीलिंग ??
बंसी — प्यार वाली फीलिंग !! ऐसी फीलिंग कि हाँ यही है वो बंदा जिसके लिये पूरी दुनिया छोड़ी जा सकती है, हाँ यही है वो जिसके लिये अपने जान से प्यारे माँ पापा को छोड़ कर उसका हाथ पकड़ कर जाया जा सकता है,,हाँ यही है वो जिसके भरोसे अपना मायका अपना घर छोड़ कर अनजान लोगों के घर यानी ससुराल जाया जा सकता है।।
माला– ओ मैडम फिल्मी!! ये सब काजोल के मुहँ से सुनो तो अच्छा लगता है और फिल्म डी डी एल जे जैसी सुपर डुपर हिट हो जाती है,पर ये असल जिन्दगी है कोई फिल्म नही।।
पिंकी– अच्छा बेटा,खुद तो अपनी पसंद का लड़का छाँट लिया शादी के लिये और अब इस बेचारी को सीख दे रही हो।।
माला– मैंने भी बड़ा सोच समझ कर ही सुनील से शादी का डिसीजन लिया है, कॉलेज के समय से जानती थी,ठीक-ठाक कमा लेता है मेरी कास्ट का है,और क्या चाहिए यार ,,हम लड़कियाँ ना बहुत ज्यादा ड्रीमी हो जाती है पर जिन्दगी ड्रीम्स से नही चलती ना।।
बांसुरी– माला सही कह रही है पिंकी!!,भास्कर भी इन सब गुणों मे अव्वल है,पर फिर भी जाने क्यों  मैं अपने मन को तैय्यार नही कर पा रही,उन्हें हाँ कहने को।।
पिंकी– बन्सी तुम ऐसा करो, मेरे भाई से शादी कर लो , बहुत सुंदर जोड़ी जमेगी तुम दोनों की।।
   माला ने पिंकी को घूर के देखा और वापस बांसुरी की तरफ हो ली…
माला– अच्छा तो बंसी तू मुझे एक कारण बता दे जिसके लिये तू भास्कर को रिजेक्ट कर सकती है।।
   बांसुरी ने असमर्थता से ना में सिर हिला दिया, 24 साल की उम्र हो चली थी उसकी,उसे अपने पिता की इस बात की चिंता भी थी कि उसके पापा अपने रिटायरमेंट के पहले पहले उसका ब्याह कर उसकी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थे ,,आखिर एक ना एक दिन उसे भी शादी तो करनी ही थी।
माला– देख बंसी ,भास्कर अच्छा कमाता है, अच्छा दिखता है ,तुम दोनों एक ही ऑफिस में हो इससे बढ़कर किसी लड़की को क्या चाहिए?? और सबसे बड़ी बात भास्कर दहेज के बिलकुल खिलाफ है।।
    यह सारी बातें ऐसी थी जिनसे कोई भी लड़की प्रभावित हो सकती थी,, भले ही भास्कर की छाप बांसुरी के हृदय पर अंकित नहीं हो पाई थी फिर भी प्रैक्टिकली सब कुछ सोच समझकर बांसुरी ने भी आखिर भास्कर को शादी के लिए हां कर ही दी थी।
    बांसुरी ने हाँ तो कह दी थी पर भास्कर के साथ कोर्टशिप के लिये उसका मन किसी तरह भी तैय्यार नही हो पाता था…..
       रोज़ सुबह और रात वो बांसुरी को वेक अप गुड मॉर्निंग और गुड नाईट फॉरवर्डेड मेसेज भेजा करता और बदले में बांसुरी से भी ऐसा करने की उम्मीद करता,पर बांसुरी फीकी इमोज़ी से ही अक्सर काम चला लिया करती।
    वो ऑफिस के लंच ब्रेक पर अक्सर बांसुरी के साथ अकेले ही खाना चाहता पर बांसुरी हमेशा माला को अपने साथ बनाये रखती।
    लेट नाईट लम्बी बातें करना चाहता पर वो हमेशा कोई ना कोई बहाना कर किनारे हो जाती ।।
   इसी सब के बीच भास्कर को कुछ समय के लिये अखबार की पुणे ब्रांच में लगभग साल भर के लिये ट्रांसफर दे दिया गया,जिस ट्रांसफर ऑर्डर को देख कर भास्कर दुखी था उसे ही देख कर जाने क्यों बांसुरी के दिल मे खुशी के लड्डू फूट रहे थे__
बांसुरी– कोई बात नही,कुछ थोड़े से दिनों की ही तो बात है ,बस पलक झपकते बीत जायेंगे।
भास्कर– हम्म ,वो तो है ,,काम इतना ज्यादा है वहाँ कि समय कब निकल जायेगा पता भी नही चलेगा,पर मैं सोच रहा था कि पुणे शिफ्ट होने के पहले हमारे घर वाले भी आपस मे मिल लेते तो अच्छा रहता।।

       आखिर भास्कर के प्रपोजल के बाद उसकी इस बात पर भी बांसुरी ने मोहर लगा दी…..
         बांसुरी ने जिद करके अपने मां बाबा को मुंबई अपने पास बुला लिया, पहले दो-तीन दिन गेटवे ऑफ इंडिया, सिद्धिविनायक मंदिर, हाजी अली की दरगाह महालक्ष्मी मंदिर और फिल्म सिटी घुमाने के बाद आखिर बांसुरी ने अपनी मां से भास्कर की बात छेड़ दी।।
    जनरेशन बदल चुका था मां भी आखिर  नई जनरेशन की मां थी, उन्होंने रात के खाने के बाद बांसुरी के पिता से धीमे से भास्कर और बांसुरी की चर्चा छेड़ दी ,बांसुरी के पिता को भी अपनी बिटिया के निर्णय और पसंद पर पूरा भरोसा था, उनके हाँ कहने पर प्रमिला ने अगले दिन भास्कर को घर पर मिलने के लिए बुला लिया।।
    लंबा चौड़ा सांवला सलोना सजीला भास्कर बांसुरी की मां और पापा को एक बार में ही बहुत जँच गया, खासकर जब उन्हें यह पता चला कि भास्कर भी उनके ही शहर का है तब तो उनकी खुशी देखते ही बन रही थी , आनन-फानन में ही सारी बातें तय हुई, बांसुरी  की मां ने तुरंत ही भास्कर से उसकी मां का नंबर लेकर उन्हें फोन भी मिला लिया दोनों ही परिवारों में बहुत आत्मीयता से सारी बातचीत हुई और इस मुलाकात के 15 दिन बाद ही दोनों की सगाई तय हो गई।।

   तीनों  सहेलियां बहुत खुश थी बस एक ही परेशानी की बात थी की बांसुरी की सगाई वाले दिन ही माला को नीदरलैंड्स निकलना था, लगभग 1 साल के लंबे प्रोजेक्ट पर सुनील को नीदरलैंड जाना था इसीलिए घरवालों के दबाव देने पर माला और सुनील की बहुत हड़बड़ी में शादी संपन्न हुई और बांसुरी की सगाई वाले दिन बांसुरी को सिर्फ फोन में ही बधाई दे कर माला अपने पति के साथ नीदरलैंड्स उड़ गई।।
      पिंकी भी अपने परीक्षाओं की व्यस्तता के कारण बाँसुरी की सगाई में नही जा पा रही थी।
      बांसुरी की सगाई में धमाल मचाने का तीनों का सपना अधूरा रह गया था।
*********
   सगाई वाले दिन सुबह से ही घर में चहल पहल थी, सभी इधर उधर भाग दौड़ में लगे थे, कोई किसी तरह की कमी नही चाहता था।
    वर और वरपक्ष के स्वभाव और सद्भाव की इतनी चर्चा थी कि आस पड़ोस के जिन लोगों का सगाई मे आना बहुत ज़रूरी नही था, वो भी वर को एक झलक देखने जुट गये थे।
    पूरा घर दुल्हन की तरह सजा था,और मेहमानों से खचाखच  भरा था,बांसुरी की ताई एक हफ्ते पहले ही सगाई की तैय्यारियों के लिये आ धमकी थी, और पूरे तन मन से सगाई को बांसुरी के जीवन का स्वर्णिम दिन बनाने को जुझी पड़ी थीं।
      सगाई वाले दिन भी वो सुबह से सबको हाथ नचा नचा कर सलीके से काम करने की सलाह देती फिर रही थीं कि प्रमिला ने आकर उन्हें तैय्यार होने भेज दिया।।
    अपने तय समय पर दो इनोवा गाड़ियों मे भर कर भास्कर और उसके घर वाले बांसुरी के घर पहुंच गये।।
     भारी भरकम रेशमी सिल्क की साड़ियों मे लसर फसर करती चार औरतें एक के पीछे एक उतर कर मुस्कुराती हुई अन्दर दाखिल हो गयी, उनमें सबसे लम्बी चौड़ी महिला ही भास्कर की माँ थी, एक और लम्बी तगड़ी सी खूब गोरे रंग वाली उसकी बुआ थी और बाकी दोनों भास्कर की मौसियां थी।।
    महिलाओं के बाद उनके जोड़ीदार पुरूष उतरे और उनके बाद दूल्हा और उसके कुछ रिश्ते के भाई बंधु जिन्हें लाया ही इसलिये गया था कि फल और मिठाइयों की टोकरियां संभाल लें।।
      सबके अपनी अपनी जगह स्थान ग्रहण कर लेने के बाद बाँसुरी को भी हॉल मे लेकर आने का फरमान ज़ारी कर दिया गया….
      वीणा बांसुरी को बुलाने आयी ही थी कि बांसुरी का फोन घनघना उठा__
  ” बस वीणा दी, मै अभी आई , तुम चलो नीचे।”
  ” अरे ऐसे कैसे अकेली चली जाऊँ, होने वाली दुल्हन अकेले थोड़े ना महमानों के सामने चली जायेगी , सगाई होनी है तुम्हारी, तुम्हे वहाँ ले जाने का एक कायदा है सलीका है।।”
  ” ठीक है ठीक है,फिर बैठो ,मैं ज़रा पिंकी का फोन अटैंड कर लूँ ।”
  ” अब ये पिंकी को भी इसी वक्त फोन घनघनाना था, पूरा दिन इसे समय नही मिला ना!!”
  ” वीणा दी नाराज़ मत हो,पिंकी बिना किसी काम के फालतू गप्पे मारने वालों में से नही है,कुछ काम होगा इसिलिए उसने फोन किया है,चलो अब मैं उठा लूँ वर्ना दुसरी बार भी कॉल डिसकनेक्ट हो जायेगी।।”
    वीणा को बैठा कर बांसुरी ने जल्दी से फोन उठाया,दूसरी तरफ से पिंकी की आवाज काफी घबराई हुई सी लगी__
  ” हेलो पिंकी!! हाँ बोलो क्या हुआ,अभी अचानक कैसे फोन किया,तुमने तो सुबह ही विश कर दिया था??”
” हाँ तो क्या हुआ, दुबारा विश नही कर सकती क्या??”
  ” अरे क्यों नही बिल्कुल कर सकती हो मेरी जान, तुम्हारा हक बनता है ।।”
  ” पक्का!! मेरा हक बनता है ना??”
  ” हाँ भई पक्का !! पूरा हक बनता है।”
  ” तो उसी हक के नाते कुछ कहना चाहती हूँ ।”
   ” पिंकी इतनी फॉर्मल क्यों हो रही हो,जो भी बात है आराम से बोलो,तुम्हारे लिये तो जान भी हाज़िर है।”
  ” जान नही चाहिए बंसी !! बस एक रिक्वेस्ट मान लेना मेरी।।”
” लो पहले ही मान ली तुम्हारी बात, अब बोलो क्या कहना चाहती थीं ….
क्रमशः

अभी तक कहानी का पात्र परिचय हो रहा था, असली कहानी अगले भाग से शुरु हो जायेगी।।
aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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