जीवनसाथी पार्ट -3

    जीवनसाथी– 3

  अब तक — भास्कर की पुणे ट्रंसफार की खबर पर भास्कर के कहने पर बांसुरी और भास्कर के घर वाले एक दूसरे से मिल कर सगाई की तारीख निश्चित कर देतें हैं, पर उसी तारीख पर माला अपने पति के साथ नीदरलैंड्स चली जाती है और पिंकी को भी अपने क्रैश कोर्स के कारण दिल्ली जाना पड़ जाता है जिसके कारण तीनों सहेलियों का सगाई में धमाल मचाने का सपना सपना ही रह जाता है, सगाई की तैय्यारियों के बाद जब बाँसुरी सगाई के लिये निकल रही होती है तभी पिंकी का फ़ोन आ जाता है…..आगे,

हेलो पिंकी!! हाँ बोलो क्या हुआ,अभी अचानक कैसे फोन किया,तुमने तो सुबह ही विश कर दिया था??”

” हाँ तो क्या हुआ, दुबारा विश नही कर सकती क्या??”

  ” अरे क्यों नही बिल्कुल कर सकती हो मेरी जान, तुम्हारा हक बनता है ।।”

  ” पक्का!! मेरा हक बनता है ना??”

  ” हाँ भई पक्का !! पूरा हक बनता है।”

  ” तो उसी हक के नाते कुछ कहना चाहती हूँ ।”

   ” पिंकी इतनी फॉर्मल क्यों हो रही हो,जो भी बात है आराम से बोलो,तुम्हारे लिये तो जान भी हाज़िर है।”

  ” जान नही चाहिए बंसी !! बस एक रिक्वेस्ट मान लेना मेरी।।”

” लो पहले ही मान ली तुम्हारी बात, अब बोलो क्या कहना चाहती थीं ….

  ” अरे अब पहेलियाँ ना बुझाओ,झट से बताओ क्या बात है,मेरी रिंग सेरेमनी आज ही है ,नीचे जाना है सब इन्तजार कर रहे और तुम यहाँ कौन बनेगा करोड़पति खेल रही हो मेरे साथ।”

  ” ओके तो सुनो,कुछ दिनो के लिये मेरे भाई हमारे साथ रह सकते हैं क्या??”

  ” तुम्हारे भाई?? कौन से भाई ? क्या हुआ अचानक ??”

” बता रही हूँ,सब कुछ बता रही हूँ बाबा …”

   “ज़रा जल्दी से बता दो ,मुझे सगाई भी आज ही करनी है।”

  ” अरे तुम्हारा भास्कर कहीं भाग नही जायेगा ,डोंट वरी!! अब सुनो मेरी बात , तुम हमारे राजा भैय्या को तो जानती ही हो , हमारा मतलब हमसे उनके किस्से तो सुने ही हैं ना !”

  ” हाँ तो?”

  ” तो ये बंसी, की राजा भैय्या का एक छोटा मोटा सा पंगा हो गया है , वो असल में अपने किसी दोस्त की शादी में रायपुर गये हुए थे,वहाँ शादी की पहली रात बैचलर पार्टी चल रही थी,वहीं पर कुछ लोगों ने किसी लड़की को छेड़ दिया अब तुम तो जानती हो, बड़े लोगों के दुश्मन भी बड़े-बड़े पैदा हो जाते हैं और जाने कहां कहां से प्रकट भी हो जाते हैं किसी ने हमारे खानदान से दुश्मनी का फायदा उठाते हुए भाई जी का नाम बता दिया अब ऐसा है कि उस पंगे के बाद से पुलिस सब तरफ भाई जी को ढूंढ रही है अगर वह वापस घर लौटते हैं तो पुलिस उन्हें तुरंत पकड़ कर जेल में डाल देगी वह किसी भी बड़े होटल या बड़े शहर में जाते हैं तो उन्हें तुरंत पकड़ लिया जाएगा,, उनका अकेले कहीं भी रहना इस वक्त ठीक नहीं है…. इसलिए घर से हमें फोन किया गया कि भैया जी हमारे साथ रुक जाएंगे बात बहुत बड़ी नहीं है लेकिन कहीं बात बिगड़ न जाए इसलिए कुछ दिनों के लिए भैया जी को हमारे साथ रहना पड़ेगा…
   तुम समझ रही हो ना हमारी बात को तो बताओ क्या तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं है इस बात से,, अगर भाई जी कुछ दिनों के लिये हमारे साथ रहते हैं तो??”

   ” अरे नहीं मुझे क्या परेशानी होगी वैसे  माला भी आज नीदरलैंड्स के लिए निकल रही है तो ऐसे में हमारे पास जगह भी हो जाएगी बेडरूम में तुम और मैं रह जाएंगे और बाहर हॉल में तुम्हारे भैया रुक जाएंगे कोई परेशानी की बात नहीं है आराम से आ सकते हैं और रुक सकते हैं, बस इतनी सी बात थी जिसे इतना घुमा फिरा कर बता रही थी अरे इसमें क्या परेशानी वाली बात है जैसे अभी तक हम तीनों रहते थे तुम मैं और माला तो अब माला  की जगह तुम्हारे भाई रह लेंगे कुछ दिन ,,ठीक है!!तो अब मैं जाऊं ।।”

  ” थैंक यू सो मच बंसी !! तुम नही जानती ये बोल कर तुमने हमारे मन  का कितना बड़ा बोझ हल्का कर दिया,हम आज सुबह से ही बहुत परेशान थे।”

  ” अब तो तुम्हारी परेशानी दूर हो गयी ना,तो अब खुश हो जाओ और मुस्कुरा कर हमारी सगाई के नाम पर एक मिठाई खा लो हमारी तरफ से….अरे पर पिंकी तुम तो बॉम्बे मे हो नही ,और मैं कल रात बॉम्बे पहुंच जाऊंगी ,तुम्हारे भैय्या कब आ रहे हैं,तुम्हारे साथ ही आयेंगे क्या??”

  ” यही तो मुसीबत है बांसुरी,भाई की आज रात की ही ट्रेन है,वो भी कल ही बॉम्बे पहुंचेंगे।।
     हम पूरी कोशिश कर रहे कि हम कल शाम तक तुम लोगों के पहुंचने से पहले ही बॉम्बे पहुंच जायें,पर अगर  हम कल रात तक नही भी पहुँचे तो परसों सुबह सुबह हम पहुंच जायेंगे तुम चिंता मत करो बांसुरी हम तुम्हारे पहुंचने के पहले पहले पहुंच जाएंगे वैसे तुम्हारी ट्रेन कितने बजे तक पहुंचेगी मुंबई??”

  ” मेरी ट्रेन भी आज रात है 12:00 बजे के आसपास,, तो मैं मुंबई कल रात  पहुंच जाऊंगी, पिंकी तुम प्लीज किसी भी कंडीशन में मेरे पहुंचने के पहले पहले पहुंच जाना।”

  ” तुम निश्चिंत रहो बंसी, हम पहुंच जाएंगे!! तुम आराम से सगाई करके आओ,, हम मुंबई में तुम्हारा स्वागत करने के लिए तैयार रहेंगे, और सुनो मिठाई लेते आना,, भूल ना जाना और थोड़ी ज्यादा लेकर आना हमारे भैया बहुत मीठा खाते हैं।।”

  पिंकी की बात  पर बांसुरी हंसने लगी हंसते हुए उसने पिंकी से विदा ली और फोन रख कर अपनी दीदी के साथ नीचे चल दी__

  ” क्या कह रही थी तुम्हारी सहेली बड़ी घुस घुस कर बातें हो रही थी फोन पर?”

   ” कुछ खास नहीं जिज्जी,  कुछ दिन के लिए पिंकी का भाई भी हमारे साथ रहेगा, उसी के बारे में बता रही थी।””

   “क्यों क्यों रहेगा भई ? ऐसा क्या काम पड़ गया, और कहीं नहीं रह सकता क्या, रईस लोग हैं उन्हें क्या ज़रूरत पड़ गयी फ्लैट की?”

  “अरे जीजी अच्छा ही तो है अभी देखो माला चली गई तो अब 30,000 को मुझे और पिंकी को आधा-आधा बांटना पड़ेगा ,,अब कम से कम उसका भाई रहेगा तो वह दोनों भाई बहन मिलकर एक तिहाई किराया देंगे मेरे पैसे तो बच जाएंगे ना।।”

   बांसुरी जानती थी कि वीणा  को उसके तरीके से ही समझाया जा सकता है,, वीणा शुरू से ही थोड़ी लालची किस्म की थी इसीलिए पैसों की बोली ही उसे ज्यादा आसानी से समझ आती थी, उसे उसी की बोली में समझा कर बांसुरी ने उसके प्रश्नों से मुक्ति पाई और हॉल की तरफ आगे बढ़ गई…..

     हल्के बादामी लहंगे में गोरी चिट्टी  बांसुरी बहुत खिल रही थी ,अपने स्ट्रेट सीधे बालों को खुला छोड़े कानों में बड़े-बड़े कुंदन के झुमके पहने हुए अपने साधारण साजो सिंगार से बांसुरी ने वहाँ बैठे  सभी लोगों का मन मोह लिया था…..

भास्कर अपलक बांसुरी को आते हुए देख रहा था बांसुरी के थोड़ा करीब आते ही वह अपनी सीट से उठा और आगे बढ़कर बांसुरी का हाथ पकड़कर उसे धीरे-धीरे अपने साथ अपने सोफे तक लेकर आ गया।।
 
    एक किनारे पर बिछे सोफे पर बांसुरी और भास्कर को बैठाने के बाद नीचे बिछी गद्दी पर पंडित जी ने दोनों पक्षों के अभिभावकों को बैठाया और  पूजा शुरु कर दी ,,,तकरीबन 10 मिनट की पूजा अर्चना के बाद सभी पर जल छिड़ककर पंडित जी ने दोनों पक्ष की अंगूठियों को भी जल से सिंचित किया और हल्दी कुमकुम लगाने के बाद दोनों पक्ष की अंगूठियां बांसुरी और भास्कर की माओं के हाथ में रख दी।।।

   शुभ मुहूर्त पर भास्कर ने बांसुरी की उंगली में और बांसुरी ने भास्कर की उंगली में अंगूठी पहना दी दोनों पक्षों की तरफ से उन दोनों  पर फूलों की वर्षा होने लगी,, वीणा लपक कर चांदी की प्लेट में मिठाईयां सजा कर ले आई बांसुरी की मां ने प्लेट से मोतीचूर का लड्डू उठाया और भास्कर के मुंह में रख दिया, भास्कर ने लड्डू आधा काटा और आधा बांसुरी की तरफ बढ़ा दिया बांसुरी ने चुपके से लड्डू को अपने हाथ में पकड़ लिया और नीचे देखने लगी__

  बांसुरी की मां ने आंखों के इशारे से बांसुरी से उस लड्डू को ना खाने का कारण पूछा बांसुरी ने भी इशारों में ही कुछ नहीं कह दिया और चुपचाप वह लड्डू प्लेट में सरका दिया , यह सब अपनी आंखों से देखती भास्कर की मां ने आगे बढ़कर प्लेट में से एक दूसरी मिठाई उठाई और बांसुरी के मुंह में रख दी__      ”  क्यों बिटिया लड्डू नहीं भाते क्या तुम्हें??”

  “जी आंटी जी मैं मीठा कम खाती हूं।”

  ” चलो कोई बात नहीं तब तो जोड़ी अच्छी जमेगी हमारा बेटा भी मीठा कम खाता है, खूब नमकीन बनाना खिलाना खाना-पीना पर जिंदगी की गाड़ी चाशनी में डुबोकर ही चलाना तभी खुश रहोगे दोनों।।”

   अपनी होने वाली सास की बात सुनकर बांसुरी मुस्कुरा उठी उसने आगे बढ़ कर भास्कर की मां के पैर छू लिये और  पलट कर अपनी मां के पैर छूने चली गई।

  “हमारे यहां बेटियां अपने मां बाप के पैर नहीं छूती।”

   भास्कर की मां की इस बात पर बांसुरी की मां ने भी उनका समर्थन किया__

  ” जी समधन जी सही कह रही हैं आप!!! हमारे यहां भी बेटियों से हम पैर नहीं छुआते, यह  वीणा नहीं छूती, लेकिन बांसुरी मानती ही नहीं, कहती है जब जीवन देने वाले भगवान के हम पैर छूते हैं तो सब कुछ देने वाले माता पिता के पैर क्यों ना छुए?? अब इसे क्या समझाएं ,कैसे समझाएं कि बेटियां तो साक्षात लक्ष्मी का अवतार है, मां बाप तो कन्यादान करते हैं और कन्यादान के समय वर के पैर पूजते हैं, इसीलिए कन्याओं को अपने माता पिता के पैर नहीं छूने चाहिए पर कितना भी कुछ भी समझा लो हमारी बांसुरी करती वही है जो उसे सही लगता है।।”

  ” चलो जो भी हो जैसे भी हो कहती तो सही है तुम्हारी बिटिया आइए समधन जी अब थोड़ा पेट पूजा भी कर लेते हैं।।”

   बातों को वहीं विराम देते हुए बांसुरी की ताई ने वर पक्ष को भोजन के लिये आमंत्रित किया और सभी को बाहर गार्डन मे सजे शामियाने की ओर ले चली।।

   भास्कर के माता-पिता बुआ जी फूफा जी के साथ आगे चले गए उनके पीछे भास्कर की मौसी भास्कर और बांसुरी को साथ लिए बाहर शामियाने में चली आई बांसुरी के पिता जी ताऊ जी ताऊ जी के बेटे और बाकी सभी परिवार के सदस्य दौड़ दौड़ कर भास्कर के घरवालों की आवभगत में लगे हुए थे वह वर पक्ष के किसी भी सदस्य  को किसी भी तरह का कोई शिकायत का मौका नहीं देना चाहते थे।।
    वर पक्ष अपनी-अपनी प्लेट सजाए खाने में मशगूल था और वधू पक्ष के लोग दौड़ दौड़ कर उनकी प्लेट में कुछ ना कुछ परोसने में लगे हुए थे इस सुंदर सुखद माहौल में बांसुरी अपने विचारों में खोई थी उसका ध्यान बिल्कुल भी अपनी प्लेट पर नहीं था और भास्कर पूरी तरह से बांसुरी में खोया हुआ था उसने धीरे से बांसुरी के कान के पास जाकर पूछा__” क्या हुआ कुछ परेशान लग रही हो ।।”
      बांसुरी अपने ख्यालों से बाहर आई, उसने भास्कर को देख कर मुस्कुरा कर आंखें नीचे कर लीं और ना में सर हिला दिया,,  भास्कर ने अपनी प्लेट से एक निवाला उठाया और बांसुरी की तरफ बढ़ा दिया बांसुरी ना नहीं कर पाई उसने चुपचाप खा लिया और वापस अपनी प्लेट और चम्मच से खेलने लगी।।
   
   पता नहीं पिंकी का भाई कैसा होगा कौन होगा और कितने दिन उनके घर पर टिका रहेगा, वह तो खुश थी की इतने दिनों बाद उसे एकांत मिल रहा था, और इसी एकान्त की ही तो वो अभिलाषिनी थी, इस अकेलेपन का फायदा उठा कर वह काफी कुछ लिखना चाहती थी  अपने दिमाग में पल रहे सैकड़ों प्लॉटस् को पन्नों पर उतारना चाहती थी, अपने बोरिंग जॉब के ढर्रे से हटकर कुछ नया क्रिएटिव रचना चाहती थी, कि पिंकी ने यह धमाका कर दिया।।

     ” सुनो बांसुरी!! रात में तुम्हें स्टेशन छोड़ने मैं आ जाऊँगा ।।”
     बाँसुरी को अपने ध्यान में मगन देख भास्कर ने चुपके से उसके कान मे जाकर कहा,बांसुरी चौंक कर भास्कर की तरफ देखने लगी__
   ” अरे नही आप क्यों परेशान होंगे,पापा मुझे छोड़ने चले जायेंगे।”

   ” यार अब तो हमारी सगाई भी हो गयी,अब भी इतनी फोर्मैलिटी क्यों, तुम्हें तो खुद आगे बढ़ कर मुझसे कहना था कि मैं तुम्हें स्टेशन छोड़ आऊँ।”

  ” अरे नही फ़ॉरमैलिटी वाली बात नही, पर रात बहुत हो जायेगी ना , इसिलिए कहा कि आपको परेशानी होगी।।”

   ” डोंट वरी!! मुझे कोई परेशानी नही होगी,और सुनो ट्रेन में जाना है तुम्हें वो भी अकेले तो कुछ ढंग के कपड़े पहन कर जाना ।।”

   भास्कर की बात सुन बांसुरी आश्चर्य से उसे देखने लगी __” ढंग के कपड़े मतलब?? क्या मैं ढंग के कपड़े नही पहनती??”

  ” पहनती हो बाबा!! मेरा मतलब था, अब सगाई हो गयी है तो अब जीन्स वगैरह अवॉइड करो तो अच्छा रहेगा, कुछ सोबर कुर्ती डाल लेना, क्या दिक्कत है?”

   हाँ में सर हिला कर बांसुरी फिर कहीं खो गयी

  ” क्या सोच रही हो?? कुछ कहना चाहती हो क्या?

  बाँसुरी ने एक नज़र भास्कर को देखा, और ना में सर हिला कर नीचे देखने लगी, सगाई वाले दिन ही उसे अपने होने वाले पति से यह बताना कि कोई अनजान लड़का कुछ दिनों के लिये उसके फ्लैट पर उसके और पिंकी के साथ रहने वाला है बताने में संकोच होने लगा।।

  ” सोचती बहुत हो तुम बांसुरी, खैर रात में समय से तैय्यार हो जाना, मैं आ जाऊंगा।”

क्रमशः

aparna…

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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