जीवनसाथी पार्ट-4

 जीवन साथी–4

       सगाई निपटते ही सारे मेहमान एक एक कर चले गये ,शाम गहरी ढ़ल चुकी थी,काम वाली रेखा को चाय चढ़ाने को बोल कर प्रमिला अपनी जेठानी के साथ सामान समेटने में लग गयी__
    ” बड़ी सुंदर अंगूठी पहनाई है ना जिज्जी!!”

  ” हाँ प्रमिला,,लाड़ो की सास ने भी चोखा हार पहनाया है,सगाई पर इतना मोटा सोना दे दिया तब तो शादी में खूब चढ़ाव चढ़ेगा!!”

  ” हाँ जिज्जी!! उम्मीद तो है,हमें भी और क्या चाहिए बस जैसे वीणा अपने घर में खुश है,बंसी भी खुश रहे ,बस भगवान से यही प्रार्थना है।

” दान दहेज क्या मांग रहे हैं प्रमिला, जब इतना चढ़ाव देंगे तो रक़म भी मोटी मांगी होगी??”

   ” नहीं जिज्जी अब तक ऐसी कोई बात नहीं हुई,, असल में लड़के की मां तो चाहती थी कि दान दहेज अच्छे से मिले उनका भी इकलौता लड़का है ,,लेकिन लड़का बहुत अच्छा निकला बिल्कुल ही अड़ गया कि उसे दहेज लेकर शादी नहीं करनी तो बस बात वहीं खत्म हो गई, फिर भी बंसी के पापा ने उसके लिए जो जोड़ रखा है वह तो उसे देंगे ही।”

    “बहुत पुण्य किए हैं प्रमिला तूने, वरना आज के जमाने में इतना अच्छा घर वर मिलना बहुत मुश्किल है,।”

   ” लड़कियां तो जिज्जी अपनी किस्मत लेकर ही पैदा होती हैं,, बंसी की किस्मत है कि ऐसा नेक लड़का और अच्छा घर उसे मिल गया, अरे देखो मैं बातों में लग गई और भूल ही गई कि बंसी को आज ही वापस निकलना है रात में 12:00 बजे उसकी ट्रेन है चलूं जिज्जी रसोई में उसके लिए पूड़ीयाँ  निकाल लूं।।”

  “आज ही काहे निकली जा रही है छोरी, कुछ तो हमाये संग भी रह लेती।”

   “कुछ बहुत जरूरी काम था जिज्जी, इसीलिए ज्यादा छुट्टी नहीं मिल पाई उसे।”

  प्रमिला झट वहां से उठ रसोई में घुस गई, जल्दी-जल्दी हाथ चलाते हुए उसने फटाफट एक तरफ उबले आलू में जीरे की छौंक लगाकर उन्हें तलने को रख दिया और दूसरी तरफ पूरी के लिए कड़ाही चढ़ा दी।।

     इधर अपने कमरे में बांसुरी अपना सामान बैग में सजा रही थी उसे चुपचाप अपने काम में लगे देख वीणा ने उससे पूछ ही लिया__
  ” क्या हुआ बंसी खुश नहीं लग रही हो अपनी सगाई से, कोई बात है क्या?? अगर मन में कुछ चल रहा है तो मुझे बता दो, तुम्हारी बड़ी बहन हूँ, बचपन से संग साथ खेले खाए हैं तुम्हारी रग रग से वाकिफ हूं।।

  ” नहीं दी ऐसी तो कोई बात नहीं।”

  “फिर ऐसी बुझी बुझी सी क्यों हो भला?? अरे अपनी सगाई में तो लड़की सबसे ज्यादा खुश होती है , और तुम जैसी लड़की जो खुद अपनी शादी के लिए पैसे जोड़ रही वहीं आज अपनी सगाई में इतनी चहक नहीं रही माजरा कुछ समझ नहीं आ रहा बंसी।”

   बांसुरी ने अपना सामान सूटकेस में डाला और वीणा  के गले में अपनी दोनों बाहें डाल कर उसके पास बैठ कर उस पर झूल गई__” मेरी प्यारी दीदी इतनी चिंता ना करो!! ऐसी कोई बात नहीं है तुम सबको छोड़कर वापस जाना पड़ रहा है ना इसीलिए मन थोड़ा खट्टा है।।

    सभी रात का खाना खाकर आपस में हंस बोल रहे थे कि तभी 11:00 बजे के आसपास भास्कर भी आ पहुंचा_
    बांसुरी की मां ने भास्कर को देखते ही अपने सिर से पल्ला लिया और उसे अंदर ले आई , भास्कर को बैठक में प्रवेश करते देख बांसुरी के पिता भी उठ खड़े हुए उन्होंने भास्कर का हाथ पकड़कर अपने पास की कुर्सी पर बिठाया और चाय का कप उनकी तरफ बढ़ा दिया __
           ” नहीं पापा जी चाय नहीं लूंगा, बस अभी खाना खाकर घर से निकला हूं, सुबह सगाई के चक्कर में लंच भी लेट हो गया था और इतना हैवी खा लिया था कि भूख ही नहीं लग रही थी इसीलिए डिनर इतना लेट हो गया अब कुछ नहीं लूंगा।”

   बांसुरी ने भास्कर और भास्कर ने बांसुरी को देखा दोनों एक दूसरे को देखकर आंखों ही आंखों में मुस्कुरा दिये __  तैयार हो बंसी ?? चलें स्टेशन के लिए निकलते हैं फिर , वरना लेट ना हो जाए, ट्रेन का डिपार्चर ठीक 12 बज कर 15 मिनट है।।”

   “हां बस अभी आई” बोलकर बांसुरी भीतर अपने कमरे में चली गई उसके पीछे पीछे उसकी मां और वीणा भी चले गए,, बाहर भास्कर और भास्कर के ससुर जी बैठ कर इधर-उधर की बातें करते रहे,, और अंदर बांसुरी के पहले से भरे सूटकेस में उसकी मां तरह-तरह के खाने पीने की सामग्रियां ठूंस ठूंस कर भरती गई।।
 
    भास्कर को ज़िद कर के जबरदस्ती मावा बाटी खिला कर भी प्रमिला का मन नही भरा तो उनकी ज़िद पूरी करने आखिर भास्कर ने कॉफ़ी भी साथ ही गटक ली और बाँसुरी को लिये स्टेशन को निकल गया।।
      पहले भास्कर भी इसी ट्रेन से बांसुरी के साथ मुम्बई तक जाने वाला था,वहाँ से कैब लेकर पुणे निकल जाता,पर इसी बीच उसकी माँ ने कुलदेवी पूजा के लिये उनके पैतृक गृह नगर जाने का प्रोग्राम बना लिया जिसके कारण भास्कर अब 2 दिन बाद की आज़ाद हिन्द से पुणे पहुंचने वाला था।।

   स्टेशन के बाहर अपनी कार पार्क कर भास्कर और बांसुरी प्लेटफॉर्म पर पहुँचे तब तक ट्रेन आकर लग चुकी थी,गप शप के चक्कर में घर से निकलते में थोड़ी देर हो गयी,रही सही कसर रास्ते पर मिलने वाले ट्रक के ट्रैफिक ने पूरा कर दिया।।
    भागते दौड़ते दोनों प्लेटफॉर्म पर पहुँचे ही थे कि गाड़ी का सिग्नल हो गया,भास्कर ने जल्दी से ए सी फ़र्स्ट क्लास के कूपे का दरवाजा खोला और केबिन के अन्दर फटाफट बांसुरी का सामान रखा और एक बार उसे भर नज़र देख ट्रेन से नीचे उतर गया।।
     सीट पर अपना पर्स छोड़ भास्कर के पीछे बांसुरी भी दरवाज़े तक चली आयी, दरवाजे की रॉड एक हाथ से थामे बांसुरी दूसरे हाथ से भास्कर को बाय करती रही, मन से उसने चाहा कि एक बार भास्कर को पुकार कर कह दे __” जल्दी आ जाना भास्कर!!” पर जाने क्यों शब्द उसके गले मे ही अटक कर रह गये।।

   “अपना ध्यान रखना बंसी !! मैं जल्दी आ जाऊंगा।”

   भास्कर की बात पर मुस्कुरा कर बांसुरी ने हाँ में सर हिला दिया,धीरे धीरे रफ्तार पकड़ती ट्रेन प्लेटफॉर्म छोड़ काफी आगे निकल गयी,तब बांसुरी भी वापस अपने केबिन में आ गयी।।

    ए सी फ़र्स्ट क्लास के कूपे में केबिन ए सबसे किनारे होने के कारण उसमें सिर्फ दो ही बर्थ थीं,एक ऊपर एक नीचे,, ऊपर की बर्थ में पहले ही कोई सोया हुआ था,जाहिर सी बात थी रात के बारह बजे ट्रेन के कूपे में जागेगा भी कौन?? बांसुरी की सीट नीचे वाली थी,पर आश्चर्य की बात थी कि उसके आने के पहले ही किसी ने उस पर बैडरोल बिछाया हुआ था।
    चादर बिल्कुल साफ सुथरी फ्रेश बिछी सी लग रही थी ,जैसे अब तक कोई उस पर ना बैठा हो ,इसका मतलब उससे पहले सहयात्री की भी नही होनी चाहिए ,यही सब सोच कर उसने बैड को खिसकाने की जगह उसी पर अपना आसन जमा लिया, सामान को सही ढंग से व्यवस्थित करने के बाद वो लेटने जा ही रही थी कि केबिन का दरवाज़ा खोल एक छै फुटिया गहरी घनी दाढ़ी-मूंछ वाला बंदा सामने खड़ा हो गया,,बहुत लम्बे घने कंधे तक के बाल और घनी दाढ़ी उसे बिल्कुल के जी एफ के नायक का सा रूप दे रही थी__” एक्सक्यूज़ मी”
    अपनी गहरी सी आवाज मे उसने बांसुरी से कहा

   ” येस!हाऊ कैन आई हैल्प यू??”

   ” मैम शायद आप मेरी सीट पर हैं”

   ” वॉट?? इम्पॉसिबल!!!ये सीट तो मेरी है , कूप ए में सीट नम्बर 18

     ” हां कह तो आप सही रही हैं यह कूप ए में सीट नंबर 18 ही है।”

    उस लड़के ने अपने मोबाइल को खोला और उसमें अपनी रिजर्वेशन टिकट को चेक करने लगा अच्छे से दो बार देखने के बाद उसने अपना मोबाइल स्क्रीन बांसुरी के सामने कर दिया।।

” ओके !! लेट मी चेक !! “
बांसुरी ने अपने पर्स से अपना रिजर्वेशन टिकट निकाला और उसे जांचने लगी।

  ” यह देखिए यह मेरा टिकट है इसी डिब्बे में यही सीट मुझे भी रिजर्व की गई है।”

  सामने खड़े व्यक्ति ने बांसुरी के हाथ से टिकट ले ली और उसे ध्यान से देखने लगा….

” मैम मुझे समझ आ गया गड़बड़ कहां हुई है?? आपकी टिकट कूप ए की ही है, और सीट नंबर 18 ही है लेकिन यह आपकी टिकट कल रात की 12:00 बजे की है!!”

“वॉट?? ऐसा कैसे हो सकता है??”

  ” मैम असल मे रात 12 के बाद डेट बदल जाती है उसी मुगालते में आपकी टिकट गलत बुक हो गयी ,ये ट्रेन 12 :05 की है और इसिलिए इसकी बूकिंग में कल की डेट डालनी थी,पर आपकी टिकट में आज की डेट डली है ,मतलब आपकी टिकट के मुताबिक आपको कल रात ही ट्रैवल कर चूकना था।”

ओह्ह ,ये तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी,अब मैं क्या करुँ?ट्रेन छूट चुकी है,अब ये सीधे दो घन्टे बाद ही कहीं रुकेगी,ओह्ह नो अब मैं क्या करूँ??”

  ” जी हाँ,और दूसरी बात ये कि दो घन्टे बाद रात के दो बज चुके होंगे,उस समय किसी अनजान स्टेशन पर उतरना सेफ भी नही होगा,आप एक काम कर सकती हैं ,टी टी के आने पर उनसे पूछ कर कोई सीट अलॉट करवा लिजिये,बस आपको एक्स्ट्रा फेयर पे करना पड़ेगा ।”

  ” हम्म ,यही करना पड़ेगा,अगर आपको परेशानी ना हो तो क्या मैं अपना सामान यहाँ छोड़ कर जा सकती हूँ,टी टी को देखने।”

   ” श्योर!! पर आप इतना परेशान मत हो जाइये,टी टी साहब खुद यहाँ आएंगे टिकट चेक करने,आप तब भी उनसे बात कर सकती हैं,वैसे जाना चाहें तो जा कर भी देख लिजिये।””

  ” जी मैं देख कर आती हूँ ।”
  अपना पर्स और मोबाईल संभाले बाँसुरी उस कूपे से बाहर निकल गयी,इस वक्त उसे भास्कर पर बहुत तेज़ गुस्सा आ रहा था,उसी ने उसकी टिकट करवाई थी, उसने कितनी बार कहा भी कि थर्ड ए सी में करवाना पर नही तब तो भास्कर के ऊपर इम्प्रेशन जमाने का भूत सवार था __” अरे क्यों! मेरी फ्यूचर वाईफ तो फ़र्स्ट ए सी में ही जायेगी”
    “लो अब भुगतो ,फ़र्स्ट एसी का किराया भी गया और सीट भी नही मिली ,अब पता नही टीटी भी कहाँ मरा पड़ा है,नज़र भी नही आ रहा ,,जाने कितना फेयर काट लेगा ,हे भगवान कैसी मुसीबत में डाल दिया मुझे।”
   अपने आप में बड़बड़ाते हुए बाँसुरी चलती चली जा रही थी ,पर उसे टीटी कहीं नज़र नही आया ,सभी सीट्स पर पर्दे लगे थे और लोग सो रहे थे,इसलिये पर्दे हटा कर टीटी को ढूँढना मुसीबत हो रहा था।।

   आखिर पन्द्रह मिनट सब जगह तलाशने के बाद बांसुरी उसी कूपे में वापस आ गयी।।

  धीरे से केबिन का दरवाज़ा खोल वो भीतर आयी तो नीचे की बर्थ पर बैठा बंदा पूरी सीट पर फैला अधलेटी मुद्रा में कानों पर ईयरफ़ोन लगाये आंखें बन्द किये कुछ सुन रहा था ,केबिन का दरवाज़ा खुलने की आवाज पर उसने सामने देखा ,हैरान परेशान बाँसुरी खड़ी थी…..

    वो जल्दी से उठ कर बैठ गया__” क्या हुआ? टीटी साहब नही मिले क्या??”

  ” नही!! अब क्या करुँ?? नेटवर्क भी नही है,घर पर फ़ोन तक नही कर पा रही।”

  ” हम्म आप आराम से बैठ जाइये मैम!!जैसे ही टीटी साहब आएंगे आप उनसे सीट ले लीजिएगा, मैंने तो पहले भी कहा था, आप पूरी ट्रेन में कहां उन्हें  ढूंढती फिरेंगी ??”

  ” मेरे कारण आपको परेशानी हो जाएगी”

  ” अरे नहीं परेशानी वाली कौन सी बात है?? मैं कौन सा अभी सो रहा हूं आप साइड पर बैठ जाइए।।”

   बांसुरी को भी समझ में आ रहा था कि उस छै फुटिये  के साथ एक ही बर्थ शेयर करना उसके लिए काफी तकलीफ का काम होगा, पर कोई ऑप्शन ना देख बांसुरी चुपचाप अपने पर्स को पकड़े वहां एक किनारे सिमट गयी।।
   
   रात के 1:00 बज रहे थे पर टीटी साहब का कोई पता नहीं था बांसुरी एक किनारे पर खुद को समेटे दुबक कर बैठी हुई थी बीच-बीच में वह उस लड़के को कनखियों से देख लेती थी वह शायद कोई गीत सुनने में मगन था ।

    बहुत ध्यान लगाकर बांसुरी ने धीरे से सुनने की कोशिश की,, उसके कानों में हल्के हल्के शब्द पड़े “आफरीन आफरीन”
     ओहो तो बंदा नुसरत साहब का फैन लगता है, मन में बांसुरी ऐसा सोच ही रही थी कि साथ बैठे  बंदे ने अपने कानों पर से ईयर फोन निकालें सीट पर रखें और केबिन का दरवाजा खोल कर बाहर निकल गया.. जाते जाते एक औपचारिक मुस्कान बांसुरी को देता गया।।

    बांसुरी को समझ आ गया के साथ वाला बंदा वॉशरूम गया है और कम से कम 10 मिनट तक नहीं आएगा ।।गानों  की शौकीन बांसुरी से आखिर रहा नहीं गया , पिछले आधे घंटे से उसका सहयात्री एकदम मगन होकर गानों में व्यस्त था, आखिर वह सुन क्या रहा था यह जानने की उत्सुकता में बांसुरी ने सीट पर रखे ईयर फोन उठाएं और कानों में लगा लिये अभी उसने कानों में लगाया और गाना शुरू हुआ ही था 

       ऐसा देखा नहीं खूबसूरत कोई
       जिस्म जैसे अजंता की मूरत कोई…….

   की केबिन का दरवाजा खोलकर वो वापस अंदर आ गया बांसुरी ने उसे देखकर हड़बड़ा कर अपने कानों से ईयर प्लग को निकालकर सीट पर रख दिया,,  

      वह अचरज से कभी ईयर फोन कभी बांसुरी को देखने लगा फिर एक हल्की मुस्कान के साथ उसे समझ आ गया कि बांसुरी भी उसकी तरह गानों की शौकीन है,और उसने बान्सूरी से पूछ ही लिया __”
    क्या आप भी गाने सुनने की शौकीन हैं??

शरमा कर बांसुरी ने सर नीचे कर लिया।।

“कोई बात नहीं!! आप एक ईयर प्लग  लगा लीजिए दूसरा मैं लगा लूंगा , हम दोनो साथ साथ ही गाना सुन लेंगे।”
    बांसुरी ने शरमाते हुए धीरे से कहा __
    “वह क्या है ना कि मुझे गाने सुनने का बहुत शौक है आप इतनी देर से गानों में इतने मगन थे कि मैंने सोचा कि आखिर आप सुन क्या रहे हैं?? बस यह जानना चाहती थी …..”
       बांसुरी की बात सुनकर वो ज़ोर से हंसने लगा,उसने  वापस से गाने को ट्यून किया और एक ईयर प्लग बांसुरी के हाथ में पकड़ा दिया और दूसरा अपने कान मे लगाये वॉल्यूम को सेट करने लगा ।।

  इतने में केबिन का दरवाजा खुला और टीटी साहब अंदर आ गये, टीटी को देख बांसुरी थोड़ा परेशान हो गई वह अभी अपनी सीट और अपनी परेशानी टीटी को बताती इसके पहले ही सामने बैठे बंदे ने टीटी को सारी बातें समझानी शुरू कर दी ….. टीटी कभी उस बंदे को कभी बांसुरी को बारी बारी से देखने लगा,, टीटी ने इशारे से उसे चुप करवाया और ऊपर लेटे  व्यक्ति को जगा कर उसके टिकट पूछने लगा, ऊपर की बर्थ का टिकट चेक करने के बाद वह बांसुरी की ओर मुखातिब हुआ देखिए मैडम यह ऊपरवाले भाई साहब भी मुंबई तक ही जा रहे हैं यह नीचे वाले भाई साहब भी मुंबई तक जा रहे हैं आप भी मुंबई ही जाना चाहती हैं लेकिन इस पूरे एसी कोच में कोई भी सीट खाली नहीं है जो मैं आपको दे सकूं, हां आप चाहें तो अगले स्टेशन पर उतरकर पीछे स्लीपर में देख सकती हैं लेकिन उम्मीद उसकी भी कम है और दूसरी बात ट्रेन में आप चढ़ी तो है पर आप का टिकट बैक डेट का है इसलिए आपको उसका फाइन भी देना पड़ेगा लेकिन आपकी परेशानी देखते हुए मैं फाइन फिर भी माफ कर सकता हूं लेकिन अभी मैं कहीं से भी आपको अरेंज करके एक भी सीट नहीं दे सकता  मैंने ऊपर वाले भाई साहब की टिकट इसीलिए चेक करी  कि अगर वह मुंबई से पहले किसी स्टेशन पर उतरते तो वहां से मैं आपको उस सीट को एलाऊ कर देता लेकिन मैडम माफ कीजिए इस पूरे एसी कंपार्टमेंट में एक भी सीट खाली नहीं है।”

  ” सर अब मैं क्या करूं कहां जाऊं आधी रात में किसी स्टेशन पर उतरना भी मेरे लिए सुरक्षित नहीं होगा??”

    टीटी बहुत अर्थ पूर्ण ढंग से बांसुरी के साथ बैठे आदमी को घूरने लगा।।
 
   “देखिए मैडम अगर यह साहब चाहे तो आप साइड में यही एडजस्ट करके बैठ जाइए हालांकि पूरी 24 घंटे की यात्रा है लेकिन इससे ज्यादा मैं और कोई मदद नहीं कर सकता। मैं बस इतना ही कर सकता हूं कि आपका फाइन माफ कर दूं लेकिन सीट देना मेरे बस में नहीं है,, ट्रेन इतनी पैक चल रही है कि मेरी खुद की सात नंबर की सीट पर मैंने 2 स्टूडेंट्स को बैठाया है मुंबई तक जाने के लिए ।।
    दोनों का ही वेटिंग क्लियर नहीं हो पाया था और मुंबई में परसों कोई एग्जाम है जाना भी जरूरी था इसीलिए उन्हें बैठा कर आया हूं मेरा तो खुद रात काटने का मुश्किल है मैडम मैं कहां से आपके लिए सीट अरेंज करूं??”

  टीटी की बात सुन साथ वाले ने बांसुरी की तरफ देखा और मुस्कुराकर धीरे से टीटी साहब से कहा__

   “कोई बात नहीं सर मैं मैनेज कर लूंगा मैडम आप चाहें तो उस किनारे बैठ जाइए मैं इधर बैठ जाऊंगा।।
      पर सर हो सके तो एक बेडरॉल और भेज दीजिए इन्हें भी तो ओढ़ने के लिए चादर लगेगी ना।”

  ” श्योर!! थैंक यू सो मच सर आपने सीट देकर मैडम पर बहुत आभार किया,, मैडम आप किसी तरह यही एडजस्ट कर लीजिए सुबह तक मैं मैं देखता हूं अगर कहीं कोई सीट खाली होती है मुंबई से पहले, तो मैं आपको आकर जरूर इन्फॉर्म कर दूंगा , आप तब वहां शिफ्ट हो जाएगा मुंबई तक के लिये,,ओके ।। गुड नाईट!!”

  गुड नाइट बोलकर टीटी केबिन से बाहर निकल गया जाते-जाते मुस्कुरा कर उसने केबिन का दरवाजा बंद किया, और वहां से निकल गया ।।
  बांसुरी ने अपने साथ बैठे बंदे की तरफ देखा उसकी आंखें भर आई थी उसने भरे गले से उसे थैंक्यू बोला सामने बैठे लड़के ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ ईयर प्लग बढ़ा दिया बांसुरी ने ना कहा और अपना पर्स समेटकर किनारे की तरफ पीठ टिका कर चुपचाप बैठ गई ।।
    उस  ने वापस दोनों ईयर प्लग अपने कान में लगाएं और अपने गाने में एक बार फिर खो गया।।।
    ” तू भी देखे अगर तो कहे हमनशीं आफ़रीन आफ़रीन….

क्रमशः

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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