जीवनसाथी पार्ट-5

  ” श्योर!! थैंक यू सो मच सर आपने सीट देकर मैडम पर बहुत आभार किया,, मैडम आप किसी तरह यही एडजस्ट कर लीजिए सुबह तक में, मैं देखता हूं अगर कहीं कोई सीट खाली होती है मुंबई से पहले, तो मैं आपको आकर जरूर इन्फॉर्म कर दूंगा , आप तब वहां शिफ्ट हो जाएगा मुंबई तक के लिये,,ओके ।। गुड नाईट!!”

  गुड नाइट बोलकर टीटी केबिन से बाहर निकल गया जाते-जाते मुस्कुरा कर उसने केबिन का दरवाजा बंद किया, और वहां से निकल गया ।।
  बांसुरी ने अपने साथ बैठे लड़के की तरफ देखा उसकी आंखें भर आई थी उसने भरे गले से उसे थैंक्यू बोला सामने बैठे लड़के ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ ईयर प्लग बढ़ा दिया बांसुरी ने ना कहा और अपना पर्स समेटकर किनारे की तरफ पीठ टिका कर चुपचाप बैठ गई ।।
    उस  ने वापस दोनों ईयर प्लग अपने कान में लगाएं और अपने गाने में एक बार फिर खो गया।।।

         दोनों को रात में जाने कब नींद लग गयी,,बर्थ का एक एक कोना पकड़े दोनों गहरी नींद में सो गये।
    सुबह बांसुरी की नींद खुली,तब उसने देखा की सीट पर वो अकेली ही थी और लगभग आधी सीट घेरी सो रही थी,अचानक उसे रात का सारा किस्सा याद आ गया, ना सीट उसकी थी ना कूपा और वो बड़ी बेशर्मी से पांव पसारे सोयी पड़ी थी, हड़बड़ा के वो उठी और हाथ से सीट पर की सिलवटों को सुधारने लगी।

  केबिन का दरवाज़ा खोल कर बाहर निकली ही थी कि बाहर पेंट्री बॉय ने उसे अभिवादन कर कॉफ़ी के लिये पूछ लिया, उसे कॉफ़ी दस मिनट बाद लाने को बोल वो वॉशरुम मे घुस गयी।।

     वापस बर्थ पर आने तक में पेंट्री बॉय कॉफ़ी और बिस्किट्स सर्व कर जाने को तैयार खड़ा था कि बांसुरी ने उसे रोक लिया__
” एक्सक्युज़ मी! कल रात जो यहां मेरे साथ थे वह अभी कहां है आप बता सकते हैं??”

   पैंट्री ब्वॉय बांसुरी को अजीब नजरों से देखने लगा तब बांसुरी को अपने सवाल का मर्म समझ आया अभी तक तो उस ट्रेन का स्टाफ़  बांसुरी को और उस आदमी को एक साथ ही समझ रहे थे बांसुरी के इस तरह पूछने से पैंट्री ब्वॉय कुछ देर को चकरा गया__” मैं देखता हूं मैडम, यहीं कहीं होंगे। “
       बोलकर वह बाहर निकल गया।

   बांसुरी ने अपनी कॉफी फिनिश की और कप सामने टेबल पर रखा ही था कि केबिन का दरवाजा खुला बांसुरी ने खुशी से उधर देखा कि शायद वह आदमी आ गया हो तो उसे आभार व्यक्त कर ले, लेकिन दरवाजे पर टीटी साहब खड़े थे।

  ” मैडम एक सीट खाली हो गयी है, मुम्बई तक के लिये आपको दे देता हूँ, पर एक्स्ट्रा फेयर के साथ रसीद बनेगी ।”

   ” ओके ! बना दीजिये।”

  टीटी ने वहीं खड़े खड़े अपनी फेयर बुक से सारे डिफरेंस देख कर बड़ी तफसील से रसीद तैयार कर दी, पर इस इतनी देर में भी वो नही आया जिसे बाँसुरी एक बार मिल कर धन्यवाद देना चाहती थी, टीटी को रुपये देकर वो अपना सामान निकाल कर चलने को हुई फिर कुछ सोच कर वहीं बैठ गयी__” पूरी रात अपनी फ़र्स्ट एसी की बर्थ देकर पता नही बेचारा कहां चला गया, एक बार मिल जाता तो ढंग से थैंक्स तो दे लेती ” बांसुरी अपनी धुन में सोच रही थी कि उसकी नज़र खिड़की की तरफ रखे तकिये पर पड़ गयी, जाने क्या सोच कर उसने तकिया उठाया, उसके नीचे उस  का फोन और ईयरफ़ोन पड़ा हुआ था, जिसे देख मुस्कुरा कर बांसुरी ने उठाया और अपने कानों में लगा लिया, फोन देखा तो वो भी खुला हुआ था, सुनने वाला रात में अपने पसंदीदा गाने को सुनते हुए ही शायद सो गया था, और नींद में ही शायद गाने को आधे में बन्द कर रख गया था, बांसुरी अचरज में थी कि फोन पर कोई सिक्योरिटी लॉक नही था__” बड़ा अजीब आदमी है, आज के समय में भी कोई होता है जो अपना फ़ोन लॉक ना रखे, मैं तो कभी ऐसा रिस्क ना लूं ।”
     सोचते हुए बांसुरी अचानक मुस्कुरा उठी, आखिर है ही क्या उसके मोबाइल पर जो लॉक रखना ज़रूरी है, कुछ भी तो नही!!!
    पर फिर भी ये बंदा या तो हद से ज्यादा सीधा है या हद से ज्यादा गंवार बुद्धू, अनलॉक्ड फोन को छोड़ कर जाने कहां भटक रहा है।
    बांसुरी ने ईयरफ़ोन कान पर लगाया और गाना ऑन कर दिया__

       हो चांदनी जब तक रात, देता हैं हर कोई साथ
       तुम मगर अंधेरो में ना छोड़ना मेरा हाथ।।
          जब कोई बात बिगड़ जाये…….
        ना कोई है, ना कोई था, जिन्दगी में तुम्हारे सिवा
        तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज……

    बांसुरी एक बार फिर मुस्कुरा उठी, धीरे से कान से ईयरफ़ोन निकाल कर उसने वापस फोन के साथ तकिये के नीचे रखा और अपना सामान उठा कर अपनी सीट की तरफ चली गयी……

*********

    मुम्बई पहुँचते में शाम हो गयी, स्टेशन पर उतर कर कैब लेकर बांसुरी अपने फ्लैट के लिये निकल गयी, पर रात के बाद पूरे सफर के दौरान बांसुरी को फिर वो कहीं नही दिखा, मुम्बई सी.एस.टी. की तो फिर बात ही क्या, वहाँ तो ऐसा जनसैलाब उमड़ा पड़ा होता है कि किसी को उस भीड़ में ढूंढना घास के ढ़ेर में सुई ढूँढने जैसा ही है।।

     अपने फ्लैट को खोल अन्दर दाखिल होकर बांसुरी ने सुकून की सांस ली, नीचे की शॉप से साथ लेकर आये दूध के पैकेट को गैस पर गर्म करने चढ़ा कर बाँसुरी नहाने घुस गयी, वापस आकर उसने अपनी कॉफ़ी बनाई और बैठक में आ गयी, अब तक उसने घर पर फ़ोन नही किया था, फ़ोन करने जा ही रही थी कि उसका फ़ोन बजने लगा, उसने देखा भास्कर का फ़ोन था__
    ” ठीक से पहुंच गयी ना, कोई दिक्कत तो नही हुई?”

   ” हाँ! आराम से पहुँच गयी,।” जाने क्यों बाँसुरी का ट्रेन वाली बात भास्कर से बताने का मन नही हुआ, कुछ देर इधर उधर की बात कर उसने फ़ोन रख दिया।
   माँ से बात कर के उसने अपनी कॉफ़ी पीने उठाई ही थी कि एक बार फिर फ़ोन घनघना उठा__

    ” हाँ पिंकी! बोलो कब तक पहुँच रही हो?”

     ” बंसी प्लान थोड़ा चेंज करना पड़ा …..

       ” मतलब!! तुम्हारे भाई नही आ रहे क्या?”
 
  बांसुरी ने राहत की सांस ली …..

     ” अरे हमारा प्लान चेंज करना पड़ा, यहाँ दिल्ली में जबर्दस्त फॉग के कारण हमारी फ्लाईट कैंसल हो गयी है, और कल की भी फ्लाइट ऐसा ही मौसम रहा तो कैंसल ही समझो, अब ट्रेन से आने के लिये तो रिजर्वेशन की ज़रूरत पड़ेगी तो बस हम 2-4 दिन में पहुंच जायेंगे बंसी, आई एम सो सॉरी डियर ….”

” और तुम्हारे भाई के प्लान का क्या हुआ ?”

   बांसुरी को पिंकी की नादानी पर अब बेहद गुस्सा आ रहा था,जब खुद को आना नही था तो अपने भाई का भी ठिकाना कहीं और कर लेती।

   ” अरे लो हम अपनी बात में भूल ही गये, भैया आज ही रात तक पहुंच जायेंगे, वैसे वो भी मना ही कर रहे थे, पर हमने उन्हें खूब रिक्वेस्ट कर मना ही लिया, घर वाले नही चाहते इस वक्त वो कहीं बाहर रहें, हम वहाँ आ कर सारी बात तुम्हें आराम से बताएंगे, अभी बस दो चार दिन किसी तरह मैनेज कर लो बंसी प्लीज़ ।”

   ” ऐडजस्ट करने की बात नही है पिंकी, मैं भास्कर से क्या कहूँगी, वो क्या सोचेंगे कि उनकी होने वाली बीवी किसी लड़के के साथ अकेली रह रही है, छी!! तुम खुद सोचो ना।”

   ” अरे पागल !! वो कोई बाहर का लड़का थोड़े ही है,
हमारे भैय्या हैं , जैसे हमारे भाई, वैसे तुम्हारे भाई!”

   ” बातें बनाना कोई तुमसे सीखे पिंकी, तुम पक्का कलक्टरनी बन कर रहोगी, अभी कुछ दिन पहले इन्हीं से मेरी शादी करवा रहीं थी ना….
   ऐसा बोल कर बांसुरी ज़ोर से हँस पड़ी , पर तुरंत ही उसे अपनी बेवकूफी का एहसास हो गया, तभी दरवाज़े पर डोरबेल बजी__

  ” पिंकी बेल बज रही है, चलो मैं फ़ोन रखती हूँ, देखूँ आखिर रात में आठ बजे कौन आ धमका।”

   ” बंसी !! सुनो लगता है राजा भैय्या है, अगर वो ही हुए तो हमें एक बार कॉल कर के बता देना कि वो आ गये।”

   ” हाँ ” छोटा सा जवाब दे कर बांसुरी ने फ़ोन रखा और दरवाज़ा खोलने चली गयी।

    दरवाज़ा खोलने पर बांसुरी ने देखा सामने वही  खड़ा था जिसके साथ पिछली रात  ट्रेन के एक ही कूपे के एक ही बर्थ में वो मुम्बई तक आयी थी, उसे देखते ही अचानक बांसुरी को याद आ गया,कैसे वो बेशर्मों सी पूरी सीट में पसर कर सोती हुई आयी थी, और ये जाने कहाँ गायब हो गया था, उसे ठीक से धन्यवाद भी तो नही दे पाई थी, वो अभी क्या बोलूं सोच ही रही थी कि __
     ” क्या आप ही बांसुरी है?”

    ” हाँ! जी हाँ, मैं ही बाँसुरी हूँ, बाँसुरी तिवारी।”
 
     ” जी मैं राजकुमार …..

    ” हाँ पिंकी ने बताया था, आईये अन्दर आ जाइये।”

   बांसुरी के पीछे-पीछे वो भी अन्दर चला आया, जब उसने देखा कि  बांसुरी ने दरवाज़ा बन्द नही किया तो वो वापस पलट कर दरवाज़ा बन्द करने जाने लगा।।

   ” नही! दरवाज़ा मत बन्द करना ।”

    ” क्यों? आप लोग दरवाज़ा बन्द नही रखतीं क्या?”

   एक बार फिर अपनी बेवकूफी पर झेंप कर बांसुरी उसके सामने से हट कर रसोई में चली गयी__ सही तो कह रहा, फ्लैट का दरवाज़ा आखिर कब तक खुला रखेगी, अभी नही तो रात में बन्द तो करना ही पड़ेगा।
  बांसुरी खुद समझ नही पा रही थी कि आखिर क्यों वो अपनी सहेली के भाई के साथ सहज नही हो पा रही थी, आखिर ये कोई अजनबी तो था नही, भले ही उससे मिलना पहली बार हुआ हो लेकिन जानती तो है ही, पिंकी से कितने सारे किस्से सुने हैं उसने इसी राजा भैय्या के!! कैसे नाम ले रहा था अपना – राजकुमार! जैसे सही में कहीं का राज कुमार है, तभी उसे याद आया कि पिंकी ने उसके राजा भैय्या के वहाँ पहुंचते ही फ़ोन करने कहा था, वो हड़बड़ा कर वापस बाहर चली आयी, बाहर आते हुए पानी से भरा ग्लास भी लेती आयी।

    बांसुरी ने देखा वो अजनबी चुपचाप बाहर की ओर खुलने वाली खिड़की पर खड़ा उदास नजरों से मुम्बई की चमकीली रौनक देख रहा था।

  ” आप पानी लेंगे ? सुनिये ,क्या नाम है आपका … राजा !! राजा भैय्या!”

    ऐसे किसी अनजान अजनबी को किसी रिश्ते का नाम देना उसे और भी अजीब लगा इसिलिए राजा के बाद बोलने वाले भैय्या को उसने अपेक्षाकृत धीमे सुरों में ही कहा कि सामने वाला सुन ही नही पाया….
   अपना नाम सुन कर उसने पलट कर बांसुरी को देखा और उसके हाथ से पानी का गिलास लेकर पानी पी लिया।।

   ” स्वाद थोड़ा अजीब है ना??”

  ” किसका?? पानी का? हम लोगों को तो आदत हो गयी है, आपको भी हो जायेगी।”

  ” हम्म!! आदत होना आसान है, आदत की आदत छोड़ना बहुत मुश्किल है।”

   ” क्या ??”  बांसुरी को सामने वाले की अजीब शायराना सी बात समझ नही आयी, लेकिन उसके क्या का जवाब दिये बिना वो वापस खिड़की से बाहर देखने लगा…..
     उसके अजीब से रवैये से बांसुरी को आश्चर्य भी हुआ__ कौन ऐसा करता है, किसी और के फ्लैट पर हो आखिर, चुपचाप सोफे पर बैठने की जगह खिड़की पर खड़ा है, ना कुछ बोल रहा ना बता रहा, ऐसे कैसे चलेगा? आखिर हिम्मत जोड़ बाँसुरी ने ही बात आगे बढ़ाई__
          ” आप कुछ लेंगे? चाय या कॉफ़ी??”

     ” नही, आप बेवजह परेशान ना हों, मैं कुछ नही लूंगा।”

    ” अरे ऐसे कैसे चलेगा, आखिर आप पिंकी के भाई हैं, कॉफ़ी बना कर लाती हूँ, मेरी भी ठंडी हो गयी, उसके बाद आज का खाना मैं बना लूंगी।”

   वो चुपचाप आकर सोफे पर बैठ गया, और मुस्कुरा कर हामी भर दी, बाँसुरी रसोई से दो कप कॉफ़ी ले आयी।।

” सुनिये कल रात के लिये बहुत बहुत सारा थैंक यू”

   वो चुपचाप मुस्कुराता अपनी कॉफ़ी पीता रहा

  बड़ा अजीब है, बातें करनें में कंजूस लगता है, बाँसुरी ने उसे देखते हुए फिर से खुद ही बात आगे बढ़ाई __
  ” पिंकी का फ़ोन आया था, वो बता रही थी कि उसकी फ्लाईट कैंसल हो गयी।”

” हम्म” छोटा सा जवाब देकर वो फिर चुप हो गया।

   हे भगवान ये ऐसे ही चुपचाप बैठा रहा तो कैसे इसे अपने रूम में रहने के रूल्स बताऊँगी, अपनी उधेड़बुन में बांसुरी खोयी थी कि उसका फ़ोन बजने लगा, पिंकी का फ़ोन था__

  ” बांसुरी, ज़रा भाई को फ़ोन देना ” बाँसुरी ने पिंकी का फ़ोन सामने बैठे उस अजनबी की तरफ बढ़ा दिया

” क्या हुआ?? हाँ मेरा दूसरा फ़ोन तो परसों से ही बन्द है, तुम्हें कहा तो था पिंकी।”

   उधर से पिंकी के कुछ कहने पर इसने  जवाब दिया__

   ” ये फ़ोन शायद डिस्चार्ज हो गया होगा, तुम घबराओ मत, मैं बिल्कुल ठीक हूँ, घर पर तुम ही बता दो, मैं अब सोने जा रहा हूँ, कल रात भर सो नही पाया।”

  फ़ोन बांसुरी को वापस देकर उसने बाथरूम का रास्ता पूछा और उठ कर वहाँ से चला गया।।

” आप फ्रेश हो लिजिये मैं तब तक खाने के लिये कुछ बना लेती हूँ ।”

  उसके बाथरूम से वापस आने तक में बाँसुरी दो बाऊल में मैगी बना कर ले आयी….

” मैगी खा लेते हैं ना आप? असल में एक हफ्ते से मैं थी नही तो राशन भी खत्म हो गया है, कल सब लेकर आ जाऊंगी।”

  ” मैं चमगादड़ और सांप छोड़ कर सब खा लेता हूं ।”

  ” क्या?? छी!! ”  चमगादड़ और सांप सुनकर बांसुरी का मुहँ अजीब सा बन गया

  ” अरे डरो मत मैं यहां यह सब बनाने  वाला नहीं हूं!”

   ऐसा कह कर वो हँसने लगा ,उसे हंसते देख बांसुरी भी मुस्कुराने लगी।।

  बाँसुरी जब तक रसोई की साफ सफाई कर बाहर आयी, तब तक में नींद से बोझिल वो सोफे पर ही अपनी बाहों का तकिया बनाये सो चुका था, उसके सामान को एक किनारे दीवार के पास रख उसने दरवाज़ा लॉक कर लाइट्स बुझाई और अन्दर अपने कमरे में चली आयी।
   
     पिंकी का भाई दिखने में तो बिल्कुल भोला भाला शरीफ सा लग रहा था, पर था तो अनजान लड़का ही, यही सोच कर बाँसुरी ने अपने कमरे का दरवाज़ा अच्छे से लॉक किया और अपने बिस्तर में घुस गयी, अपनी डायरी थामे कुछ लिखने जा रहीं थी कि भास्कर का फ़ोन आने लगा, उसने एक नज़र फ़ोन को देखा और साइलेंट कर लिखने लगी, फिर जाने क्या सोच उसने फ़ोन उठा ही लिया।।

क्रमशः

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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