जीवनसाथी – 10

जीवनसाथी -10

मौसमी के फ्लैट से निकले बांसुरी और राजा कैब में बैठे आगे निकल गये, बांसुरी अपना फ़ोन निकाल कर भास्कर को मौसमी के घर जाने के बारे में बताने लगी और राजा कैब में चलते गाने को सुन एक बार फिर किन्हीं यादों में खो गया, बांसुरी ने एक बार राजा को देखा उसे खुद में खोया देख वो वापस अपने मोबाइल पर कुछ ज़रूरी मेसेज देखने लगी ।
 
   एक झटके के साथ कैब एक शानदार फाईव स्टार होटल के सामने रुक गयी, बांसुरी कैब से उतर पैसे देने के लिये पर्स खोल ही रही थी कि राजा ने कैब वाले को पैसे दे कर विदा कर दिया __

” ओह्ह वॉव!! तो आज लंच या डिनर जो भी कह लो हम फाईव स्टार में करने वालें हैं??”
  हँसते हुए राजा ने बांसुरी को देखा, उसने ना में सर हिला कर उसके बाजू में बने एक छोटे से सुंदर सजीले भोजनालय की ओर इशारा कर दिया__

” जी नही अजातशत्रु जी फाईव स्टार से कहीं ज्यादा टेस्टी और उससे कहीं किफायती खाना खिलाने वालीं हुँ आपको, वो सामने दिख रहा है ना ” सासु की थाली” वहाँ हम जायकेदार मारवाड़ी थाली खायेंगे आज।”

पैसे बचाने का कोई मौका ये लड़की हाथ से नही जाने देती सोचता मुस्कुराता हुआ राजा बांसुरी के पीछे-पीछे चल पड़ा …..

  खाना वाकई लज़ीज़ था लेकिन रोज़ अलग अलग तरह के गरिष्ठ तामसिक निवालों को तोड़ने का अभ्यस्त राजा शुद्ध सात्विक शाकाहारी खाने से त्रस्त होने लगा था, आज भी बाहर खाने का प्लान सुन वो खुश था कि कुछ अपने हिसाबों वाला खाना मँगवा कर खा लेगा लेकिन शुद्ध शाकाहारी थाली में सजी मंगोड़ी, कढ़ी, दाल बाटी,  कैर सान्गरी से ही उसे काम चलाना पड़ा, इधर अपनी थाली में व्यस्त बांसुरी खाते हुए थाली के गुणों का भी बढा चढ़ा कर बखान कर रही थी, लेकिन ध्यान से देखने पर उसे समझ आ गया कि वो जिस थाली की इतनी भक्तीन है उसमें राजा को कोई विशेष रस नही मिल रहा।
 
    दोनों खा कर बाहर निकले अपनी कैब का इन्तजार कर रहे थे कि तीन चार लड़के बहुत तेज़ गति से बाईक चलाते उनके बाजू से लहराते हुए निकल गये__

” इन लड़कों को आखिर मिलता क्या है ऐसे बाईक को भगाने में, अरे सामान्य स्पीड पर भी तो गाड़ी चलायी जा सकती है।”

” थ्रिल बांसुरी थ्रिल!! ” राजा के मुस्कुरा के ऐसा कहते ही बांसुरी ने घूर कर राजा को देखा __

” इसका मतलब तुम भी…… अभी उसकी बात पूरी भी ना हो पायी की उन बाइकर्स ने सामने रास्ते के किनारे पर साईकल पर चाय बेचते एक बुज़ुर्ग को ज़ोर की टक्कर मारी और बिना रुके ही वहाँ से भाग निकले , राजा और बांसुरी आवाज की दिशा में दौड़ते हुए पहुँचे की उन्हें सामने एक तरफ साईकल और एक तरफ बुज़ुर्ग आदमी गिरा पड़ा नज़र आया, उसके सर से बहता खून उसकी नाज़ुक हालत बता रहा था, तभी उनकी कैब वहाँ आ गयी, कैब ड्राईवर ने कैब से झांक कर बांसुरी और राजा की तरफ देखा__

” पवई की सवारी?”
  राजा के हाँ में सिर हिलाते ही वो अपनी नाराज़गी जाहिर करने लगा__

” क्या साहेब बुकिंग कर के गायब हो जाते हो, अपन वहाँ होटल के सामने खड़ा देख रहा था आप लोग यहाँ इतनी दूर आ गये?”

” अरे भाई देख नही रहे हो क्या सामने, इनका ऐक्सीडेंट हो गया है, इनकी गिरने की आवाज सुन हम वहाँ से भाग कर यहाँ चले आये।”

” हो साहेब देख लिया, अब चलो बैठो गाड़ी मे, घाई करा मेड़म!”

  बांसुरी ने ड्राईवर को घूर कर देखा__

” मी घाई का करावी? दिख नही रहा तुम्हें ये आदमी चोट लगने से बेहोश हो गया है और तुम्हें सवारी की पड़ी है, अभी जल्दी से इसे उठाने में हमारी मदद करो, और नज़दीक किसी अस्पताल तक हमें छोड़ दो।”

” मेड़म( मैडम) पुलिस का पंगा नही चाहिए अपने को?”

” पुलिस कोई पंगा नही करेगी, ये जो साथ में खड़े हैं ना ये यहाँ  के कमिश्नर हैं समझे, इसलिये तुम बस हमें पास के अस्पताल तक छोड़ के निकल जाना, ये तुम्हें कुछ नही होने देंगे

ड्राईवर एक झटके में कैब से नीचे उतरा और राजा को बड़ा सा सलाम ठोंक कर उस आदमी को उठाने में राजा की मदद करने लगा, कुछ ही देर में कैब में सवार वो सभी आगे बढ़ गये….

” माफ करा मेड़म, मुझे पता नही था कि आपके साहेब कमिश्नर हैं, बस यही पास में इस एरिया का सबसे बड़ा हस्पताल है, वहीं छोड़ देता हूं ।”

  एक बड़े से चमचमाते अस्पताल के पोर्च में गाड़ी खड़ी कर कैब ड्राईवर ने राजा की मदद से उसे उतारा और बिना पैसे लिये ही वापस चला गया।

  अस्पताल स्टाफ़ की मदद से उस बुज़ुर्ग को अन्दर ले जाया गया और आपात चिकित्सा में बैठी नर्स उसका एडमिशन बनाने लगी__

” 10000 फक्त जमा कर दो मेड़म, आपके मरीज़ का एडमिशन बना रही हुँ।”

बांसुरी ने तुरंत अपने पर्स से अपना डेबिट कार्ड निकाला और काऊंटर पर नर्स के हवाले कर दिया, राजा बांसुरी को देखता रह गया, जो लड़की कुछ देर पहले उसे किफायती खाने पर लेक्चर दे रही थी वो आज ऐसे किसी अजनबी वो भी गरीब जिससे पैसे वापस मिलने की भी उम्मीद नही के लिये अपना कार्ड बिना आगा पीछा देखे ही यूं आगे बढा देगी उसने नही सोचा था।
    मरीज़ को भर्ती कर तुरंत आपात चिकित्सा कक्ष में ले जाया गया, राजा और बांसुरी बाहर रखी बैंच पर बैठ गये__

” बांसुरी एक बात पूछूँ? बुरा तो नही मानोगी?”

” बुरा लगने की बात हुई तो ज़रूर मान जाऊंगी….. अपनी बड़ी बड़ी आंखे राजा की आंखों में डाल बांसुरी एक बार फिर हँस पड़ी __

” अरे बुद्धू राम नही मानूंगी बुरा वुरा, पूछो क्या पूछना है?”

” तुम ऐसे तो सारा समय अपने मध्यमवर्गीय मूल्यों के बारे में बताती रहती हो जिसमें से एक पॉइंट होता है किफायत करना, इतने थोड़े से दिनों में भी मुझे ये समझ आने लगा है कि तुम फ़िजूल कभी कोई खर्च नही करती फिर आज इस अजनबी के लिये बिना सोचे समझे सीधे दस हज़ार निकाल दिये तुमने! ऐसा क्यों?”

   बांसुरी राजा के सवाल पर मुस्कुरा उठी__

” मैं गैरज़रूरी चीज़ों के लिये खर्च नही करती हूँ राजा जी लेकिन यहाँ तो उस आदमी की जिन्दगी का सवाल है ना, हो सकता है उसके घर में उसकी बीवी उसकी बच्ची उसका इन्तजार कर रहें हो….. तो यहाँ खर्च करना फिज़ूल कैसे हुआ ? उसकी जिन्दगी से कम कीमती है ये रकम, उसकी बीवी की आस उसकी बेटी के विश्वास से कहीं कम है ये रकम, बल्कि अगर ये लोग अभी और भी पैसे मांगेंगे तो वो भी मैं जमा कराने को तैयार हूँ ।”

” बहुत अच्छे बांसुरी, लेकिन ये याद रखना कि वो शायद ही तुम्हारे पैसे वापस कर पाये।”

” मुझे उससे पैसे वापस चाहिए भी नही राजा!
              मैं बचपन से ही अपनी मां पापा को पैसों को जोड़ते और समझदारी से खर्च करते देखते आई हूं मेरे घर पर सिर्फ पापा ही कमाने वाले थे ,एक साधारण सी नौकरी उसमें बीवी दो बेटियां सारे नाते रिश्तेदारी तीज त्यौहार बच्चों के स्कूल के खर्चे सब कुछ चलाना बहुत कठिन होता है, मैंने शुरू से उन दोनों को सब कुछ बहुत समझदारी से करते और निभाते देखा है।
     हां मेरी दीदी में  बचपना ज्यादा था, इसलिए वह अपनी सहेलियों को देखकर मां से किसी भी चीज की फरमाइश के लिए मचल जाती थी पर मां पापा ने कभी उसे या मुझे किसी भी चीज के लिए मना नहीं किया।
              हमने इतने कम पैसों में भी बहुत शानदार बचपन जिया है । मम्मी-पापा पापा ने कभी किसी चीज की कमी महसूस ही नहीं होने दी, हमारे चाहने से पहले ही वह चीज हमें दिलवा दी लेकिन उस चीज को हमें दिलवाने की उनकी जद्दोजहद मैंने बहुत करीब से देखी है पता नहीं दीदी कभी समझ क्यों नहीं पाई लेकिन मैंने हमेशा मां की इस तकलीफ को समझा था और इसीलिए मां की उस आदत को अपने आप में भी उतार लिया कि जहां जरूरत ना हो वहां पैसे ना उड़ाओ उन पैसों को भविष्य के लिए बचा के रखो लेकिन अगर सामने वाले की जरूरत तुमसे कहीं ज्यादा है तो उस पर खर्च करने से पहले कभी सोचो भी नहीं। यह सीख मेरे मम्मी पापा की दी हुई है जो मेरे खून में घुली हुई है उसे बदल नहीं सकती मैं अजातशत्रु जी!!”
    बांसुरी मुस्कुराने लगी, राजा का हाथ अनायास ही बांसुरी के सर पर रखा गया, जैसे वो कोई छोटी सी बच्ची हो…. और राजा उसकी मीठी सी बात पर खुश होकर उसे आशीर्वाद दे रहा हो , पर तभी उसे आभास हुआ कि वो लगभग अपनी ही हमउम्र एक अनजान लड़की जिसे अभी कुछ दो चार दिनों से ही जानता है के साथ बैठा है, जाने उसकी इस हरकत पर वो क्या सोच बैठेगी, और उसने झट अपना हाथ हटा लिया_

” सुनिये वो मरीज़ के साथ आप दोनो ही हैं ना?”

” जी नही , इनके घरवालों को खबर करना पड़ेगा , क्यों सिस्टर कुछ सीरियस है क्या??”

” सीरियस तो नही है मेड़म , लेकिन खून बहुत बह गया है, रुग्णाला रक्त द्यावे लागते( मरीज़ को खून चढाना पड़ेगा)”

” हाँ तो उनके रिश्तेदारों का इन्तजार मत किजीये आप खून चढ़ा दीजिये ना,कुछ और पैसे लगेंगे क्या??”

” यहाँ खून की कीमत अदा नही होती मेड़म, आपको जितना पॉइंट चाहिए उतना मझे यहाँ आपको डोनेट करना होगा, हमारा अपना अस्पताल का ब्लड बैंक है।

” ओके तो कितना पॉइंट चाहिए इन्हें”

” 2 बोतल बरोबर होगा मेड़म, आप दोनों वहाँ  रिसेप्शन में चले जाओ और फॉर्म भर दो वो आपको ब्लड बैंक लेकर जायेंगे और आपका खून निकाल कर बदले में आपको इस आदमी को लगने वाला ब्लड ग्रुप का खून दे देंगे, घाई करा मेड़म।”

बांसुरी ने हामी भरी और राजा को उठने का इशारा कर रिसेप्शन की ओर बढ गयी, अब राजा उसे कैसे बताता की राजपूत होते हुए भी बचपन से उसे खून देख कर ही उल्टी आती थी, मार काट से हमेशा बच कर रहने वाला राजा दिखने बस का खली था अन्दर से तो उसे इन्जेक्शन के नाम पर भी रोना आता था__

” अरे वहाँ क्या बैठे हो,इधर आओ मैंने फॉर्म भर दिया है, चलो ऊपर की मंज़िल पर जाना है हमें।”

   बांसुरी ने फॉर्म भरने के बाद मुड़ कर राजा से कहा और वहाँ के स्टाफ़ नर्स के पीछे पीछे ऊपर जाने वाली सीढियों की ओर चल दी, आखिर राजा को भी बांसुरी के पीछे जाना ही पड़ा  __

” सिस्टर जी एक सवाल था?”

” हाँ कहिये सर?”

” क्या दो बोतल खून लेने के लिये दो बोतल ही देना भी पड़ेगा?”

” जी हाँ सर! यही रूल है! अपने काम में व्यस्त सिस्टर ने आजू बाजू के दो बैड पर दोनों को लिटाते हुए जवाब दिया

” सिस्टर जी क्या एक ही आदमी एक बार में दो बोतल खून दे सकता है?”

” सॉरी सर लेकिन आप एक बार में दो पॉइंट नही दे सकते, हमारे रूल्स के अगेंस्ट है।”

” अरे नही मैं अपनी बात नही कर रहा, ये मैडम हैं ना ये लक्ष्मी बाई जी का अवतार हैं ये दे सकती हैं।”

  बांसुरी ने सवालिया नजरों से राजा को देखा , उसे राजा और नर्स की फुसफुसाहट सुनाई नही दे रही थी, उसके इशारे से क्या हुआ पूछने पर नर्स ने ही बांसुरी को जवाब दे दिया__

“आपला वर खूप घाबरला आहे( आपका दूल्हा खूब घबरा रहा है)”

  बांसुरी को लम्बे तगड़े राजा की घबराहट देख कर हँसी आ गयी__
  बांसुरी अपने बैड से उतर कर राजा के पास चली आयी

” क्या हुआ डर लग रहा है, इसके पहले कभी खून दिया नही क्या??”

” तुम तो ऐसे पूछ रही हो बांसुरी जैसे खून ना हुआ मेरा ऑटोग्राफ हो गया जो मैने आज तक किसी को नही दिया हो, खून कौन कम्बख्त बांटता फिरता है , बताओ भला?”

” बात तो सही कह रहे हैं आप राजकुमार अजातशत्रु सिंह जी।। नाम रखते समय तो बहुत होशियारी सूझ रही थी अब जब काम करने का वक्त आया तो सारी राजकुमारी निकल गई सारा राजपूताना दूर भाग गया।

” हम राजपूत हैं और रहेंगे हमारे खून के उबाल को कोई नहीं पा सकता समझी मूर्ख लड़की, वह तो हम खून देने में इसलिए डर रहे हैं कि हमारा उबलता हुआ खून कहीं  उस ठंडे आदमी को चढ़ा तो ब्लड इन्कोम्पिटेंसी ना आ जाए।।”

” ओहो तो राजा जी इसलिये घबरा रहे हैं, आईये सिस्टर आप पहले इन्हीं का ब्लड ले लिजिये मैं तब तक इनके साथ खड़ी हूँ ।”

    बांसुरी ने राजा की चौडी हथेली अपने हाथों में थाम ली और राजा की बैड के पास लगे स्टूल पर बैठ गयी __
               ” घबराओ मत राजा , तुम्हारे राजपूत होने ना होने से तुम्हारे डर का कोई लेना देना नही, ये तुम्हारे लम्बे चौड़े शरीर में जो बच्चों जैसा दिल धड़कता है ना, ये सब उसका किया धरा है , बस तुम मेरी तरफ देखते रहो और मुझसे बातें करते रहो, तुम्हें पता भी नही चलेगा।”

   राजा ने बांसुरी को देखा उसकी भोली सी हरकत पर उसे फिर हँसी आ गयी, लेकिन था तो वो एक लड़का ही जिसका हाथ उसके सामने बैठी एक लड़की ने थाम रखा था, उसने धीरे से अपना हाथ बांसुरी के हाथ से छुड़ा लिया, अपनी बातों से राजा का ध्यान ब्लड ट्रांसफ्यूजन से हटाने के लिये दुनिया भर की बातें राजा को सुनाने में व्यस्त बांसुरी का ध्यान इस बात पर गया ही नही कि कब राजा उसके हाथ से अपना हाथ अलग कर चुका था।।
  
” थैंक यू सर! अभी आपके सैम्पल को चेक किया जायेगा और उसके बाद हम ब्लड निकलेंगे।”

” क्या एक बार फिर से ये लोग सूई चुभायेंगे, ये तो ज्यादती है बांसुरी!! मैं अब कोई खून वून नही देने वाला, बस बहुत हो गया ।” राजा लगभग चीख उठा, बच्चों की तरह पैर पटकते वो अपने बैड पर उठ कर बैठ गया, तभी वहाँ एक बुज़ुर्ग स्टाफ़ नर्स हाथ में जूस की गिलास थामे आयी और गिलास बांसुरी की तरफ बढा दी__” हो बांसुरी ले ये जूस अपने गिटार को दे दे” राजा की तरफ मुखातिब हो उसने कहना ज़ारी रखा_ ” काय मानूस रे तुमि, दिखने में इतना सुंदर पहलवान के माफिक है और दिल का कितना कच्चा, अरे घबरा मत  ये लड़कियाँ सब मज़ाक कर रही हैं, अब डरने का नही , खून वून सब ले लिया है । ठीक है।”

   राजा की जान में जान आयी , उसने बांसुरी की तरफ देखा वो आराम से अपने बैड पर लेटी  ब्लड डोनेट कर रही थी।।

   अजब गज़ब है ये लड़की, जान ना पहचान इतना तो खाना भी नही खिलाया जितना खून पी गयी, अपनी ही बात सोचते हुए राजा को हँसी आ गयी , बांसुरी ने इशारे से उससे उसकी हँसी का कारण पूछा, राजा ना में सर हिला कर अपने बैड पर वापस बैठ गया।

   दोनों को वहाँ बैठे घण्टा-भर हुआ था कि मरीज़ के परिजन वहाँ आ गये, और उसके कुछ देर में ही मरीज़ को भी होश आ गया__

    चायवाले की पत्नि बांसुरी का हाथ पकड़े सिसकती रही__”बिटिया तुम्हरा एहसान कभी नही भूल पायेंगे , हम दूर गांव से यहाँ परदेस में आकर रह रहे, इतने साल हो गये पर कोई अपना नही आया कभी हाल चाल पूछने, और आज बिना जाने तुमने इत्ता किया है हमरे लिये कि तुम्हरे पांव पड़ने का मन कर रहा, बिटिया हम तुम्हरा रुपया धीरे धीरे चुका देंगे, अपना नम्बर हमें दे देना”

  ” अरे कैसी बातें कर रही हैं अम्मा जी! मैने कुछ विशेष नही किया, मेरी जगह कोई भी होता यही करता , क्यों है ना राजा?” बांसुरी ने मुड़ कर जिस तरफ राजा खड़ा था उधर देखा, राजा वहाँ नही बल्कि रिसेप्शन पर खड़ा कुछ बातें कर रहा था, कुछ देर मे ही वो वापस बांसुरी तक आ गया__

” चलो अब खतरा टल गया है, डॉक्टर से बात भी हो गयी है, परसों तक इनकी छुट्टी भी हो जायेगी, और अम्मा जी आप घबराएं नही उनका पूरा बिल जमा हो चुका है ये रही रसीद, आपको यहाँ एक पैसा भी देने की ज़रूरत नही है।”

   रसीद हाथ में लेते हुए उस औरत की आंखें छलक आईं ” मैं आप लोगों का एहसान कैसे…”

उसकी बात पूरी भी नही हुई थी कि राजा ने अपनी बात रख दी__” एहसान की कोई बात नही है माताजी आपके पतिदेव के पास स्मार्ट कार्ड था उसी से उनका बिल भरा है , आपको हमें कोई रुपये वापस करने की ज़रूरत नही है, बल्कि ये कुछ रुपये अपने पास रख लिजिये आपको खर्चे के लिये लगेंगे , ये भी सरकारी योजना में अपको मिल रहें हैं ये मेरे पैसे नही हैं।”

  राजा के हाथ से पैसे लेती महिला दोनों पर आशीर्वाद की झड़ी लगाती वहाँ से चली गयी, और राजा और बांसुरी बाहर कैब के लिये निकल गये__

” तुम तो बड़े झूठे निकले  राजा जी।”

” क्यों जी ? ऐसा क्या झूठ बोला मैने?”

” क्यों वो स्मार्ट कार्ड वाली बात?”

” हाँ वो! वो तो इसलिये की वो औरत पहले ही पति के एक्सीडेंट से परेशान थी , दूसरा हम कितना भी कह लें कि हम पैसे नही लेंगे पर वो रुपयों को वापस करने की चिंता में घुलती जाती इसलिये एक छोटा सा झूठ बोल दिया मैनें , पर एक मिनट मैडम तुम कौन सी हरीशचंद्र हो, तुम्हारे मुहँ से तो पट से झूठ झरता है।”

” अच्छा !! जैसे?

” जैसे ड्राईवर के सामने मुझे कमिश्नर बना दिया।”

” अच्छा वो !! वो भी तो ज़रूरी था ना।”

दोनों हँसते हुए आगे बढ कर कैब में जा बैठे, कैब में बैठ कर बांसुरी ने अपना फ़ोन निकाला, एक बार फिर भास्कर के नौ मिस्ड कॉल उसे मुहँ चिढा रहे थे__
   बांसुरी का पीला पड़ा चेहरा देख किसी आशंका से त्रस्त राजा ने इशारे से ही उससे क्या हुआ पूछा __” मैं हमेशा ही डांट खाने वाले काम करती हुँ राजा!! आज भी फ़ोन सायलेंट किया था और वापस नॉर्मल करना भूल गयी, और इसी सब में मुझे भास्कर के कॉल सुनाई ही नही दिये।।”
   आंखों में छलक आये बेबसी के आंसू छिपाती बांसुरी ने मेसेज बॉक्स खोल कर देखा भास्कर के आठ दस कड़वे मेसेज के बाद अंत में एक मेसेज था जिसे पढ कर बांसुरी एकदम से चौंक पड़ी __

” राजा!!”

” क्या हुआ बांसुरी?”

” कल भास्कर की मौसी बाम्बे आ रही हैं , मेरे फ्लैट पर ही।”

” ओह्ह तो ये तो खुशी की बात है! है ना?”

” सिर्फ मौसी अकेली नही आ रही उनकी सास ननंद और मौसी की बेटी आ रहीं है, पहले फ्लैट पर आकर ये लोग फ्रेश होंगे फिर लंच कर के यहाँ से शॉपिंग करने जायेंगे।, भास्कर ने लिखा है मैं कल की छुट्टी ले लूँ और उन लोगों को बॉम्बे घुमा कर शॉपिंग करवा कर फिर बिदा करुँ!”

” ओके तो इसमें प्रॉब्लम क्या है? तुम्हें अपने होने वाले ससुराल वालों के साथ क़्वालिटी टाईम मिल रहा है।’

” पर तुम कहाँ जाओगे दिन भर, पिंकी ने कहा था तुम्हारा बाहर कहीं जाना सही नही है।”

” ओह मेरी चिंता मत करो, मैं उन लोगों के आने के पहले निकल जाऊंगा और उनके जाने के बाद वापस आ जाऊंगा, डोंट वरी! अब ऐसा करो भास्कर को एक स्वीट सा सॉरी मेसेज भेज दो और दिन भर की सारी बात लिख कर बता दो।”

” हम्म पर मैंने कोई गलती थोड़े ही की है जो हर बात पे सफाई दूं।”

” बिल्कुल कोई गलती नही की, पर ये बात वहाँ भास्कर को पता कैसे चलेगी, उसके जानने के लिये उसे ये बताना भी तो ज़रूरी है , है ना, ये सफाई देना कैसे हुआ? इसलिये अगर मेरी मानो तो बता दो वर्ना रहने दो।”
          ” बातों के जादुगर हो तुम , अपनी लच्छेदार बातों में ऐसा उलझाते हो कि तुम्हारी बात मानने के अलावा कोई चारा नही बचता मेरे पास।

  मुस्कुराते हुए बाँसुरी राजा की बात मान कर भास्कर को मेसेज करने लगी, और राजा बाहर की रोशनियों को कुछ देर देख कर कैब में चलते गाने को सुनता आंखे बन्द कर चुपचाप फिर खुद में खो गया

    जैसे फूलों के  मौसम में ये दिल खिलते हैं ,
     प्रेमी ऐसे ही क्या पतझड़ में भी मिलते हैं
     रुत बदले, दुनिया बदले, प्यार बदलता नहीं
      दिल तेरे बिन कहीं लगता नहीं वक्त गुज़रता नहीं।  क्या यही प्यार है…हाँ यही प्यार है…….

  क्रमशः

aparna…

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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