जीवनसाथी -11

जीवन साथी-11

  अगले दिन बांसुरी बाकी दिनों की अपेक्षा और जल्दी उठ कर काम पर लग गयी, उसकी रसोई में चलती उठा पटक सुन राजा की भी नींद खुल गयी, उसने रसोई में झांक कर देखा तो बांसुरी पूरी तन्मयता से खाने की तैयारी करने में लगी थी, उसे जागा हुआ देख पूछ बैठी__

   ” अरे तुम भी जाग गये, जाओ फ्रेश हो जाओ मैं कॉफ़ी बना कर ले आती हूं “

  “अरे नही तुम अपना काम कर लो, और मुझे भी बाहर का काम बता दो, की मैं क्या क्या कर दूं।”

” कुछ करने की ज़रूरत नही है राजा, मैं तो बस यही सोच रही थी कि तुम शाम तक कहाँ रहोगे, वैसे हो सकता है दोपहर तक में वो लोग लौट जायें।

  ” मेरी टेंशन मत लो, अच्छा ये बताओ अभी तुम्हारा और क्या क्या काम बाकी है??”

  ” बस खाना बनाने के बाद बाहर वाला कमरा सही करना है, डस्टिंग झाड़ू पोन्छा करना है, बाथरूम धोना है बालकनी साफ़ करनी है, पौधों को पानी डालना है और 2 दिन के जमा हो गये कपडों को धोने मशीन में डालना है , हो जायेगा सब यू डोंट वरी!”

  ” हम्म ” छोटा सा हां बोल कर राजा चला गया और बांसुरी अपने काम मे लग गयी, सब्जियां छौंक कर और पूड़ी का आटा लगा कर वो दो कप कॉफ़ी बना कर बाहर ले कर आयी तब तक में राजा ने बाहर का कमरा साफ़ सुथरा कर एकदम चमका दिया था__

” अरे वाह राजा जी आपने तो मेरे छोटे से कमरे को महल सा सुंदर बना दिया, पर क्यों किया? मैंने कहा था ना मैं कर लूंगी।”

” वाह एक तो काम करो उस पर तारीफ की जगह ताने सुनो।”
   राजा की बात सुन बांसुरी हँसने लगी__
         ” हाँ सही कहा मैं टिपिकल सास मटेरियल हूं है ना?”

  ” नही सच कहूं तो तुम टिपिकल बीवी मटेरियल हो, अच्छी कुक, बहुत अच्छी हाऊस मैनेजर, बॉस लेडी और सबसे अच्छी बात , बहुत बड़े दिल वाली।”

  ” लेकिन तुम हसबैंड मटेरियल नही टिपिकल बॉयफ्रेंड मटेरियल हो गिटार बजाने वाले एकदम टॉल फेयर एन  हैंडसम टाईप।”  राजा ने बांसुरी की बात सुन उसकी तरफ एक गहरी सी नज़र डाली कि बांसुरी को अपनी बेवकूफी समझ आ गयी __

” मेरा मतलब था कि ……. बांसुरी के पास सफाई देने को कोई बात नही बची थी, इसलिये उसकी बात आधे में ही काट राजा ने बात को संभाल लिया__

” हां बाबा समझ गया, शकल से बेवकूफ नज़र आता हूँ ना, चलो कोई बात नही , कॉफ़ी तो बहुत शानदार बनी है, आज खाने में क्या क्या बना रही हो?”
   राजा के बात बदल देने से बांसुरी को भी राहत मिली और वो अपने शानदार मेन्यू के बारे में बताने में व्यस्त हो गयी__
   ” हम्म मैं तो कुछ भी खा ही नही पाऊंगा”

  ” तुम सारा खाना खा कर ही जाना ना”

   ” अरे सुबह 10 बजे खाना कौन खाता है, चलो कोई नही, तुम सब बचा कर रखना, रात में खा लेंगे।

   दोनों कॉफ़ी खत्म कर वापस अपने अपने काम में लग गये, बांसुरी के रसोई करते तक में राजा ने बाहर के सारे काम कर दिये , और नहा कर बाहर जाने को तैयार हो गया__

  ” अपना ध्यान रखना, और समय पर खाना खा लेना, और हाँ बीच बीच में मुझे मेसेज करते रहना, जैसे ही ये लोग जायेंगे मैं तुम्हें बता दूंगी।”

   जाने क्यों राजा का घर से जाना बांसुरी के मन में टीस सी पैदा कर गया, पर घड़ी पर नज़र पड़ते ही वो वापस तैयारियों में भिड़ गयी, सारा काम निपटा कर नहाने जा ही रही थी कि बालकनी में सूखते कपडों में उसे राजा की सफ़ेद शर्ट नज़र आ गयी, उसने जल्दी से उसे वहाँ से उतारा और अपनी आलमारी में अपने कपडों के पीछे कहीं छिपा दिया….. अपना सारा सामान राजा समेट कर अपने बैग में भर कर रख गया था , शायद ये शर्ट अनजाने में छूट गयी थी। राजा के बैग  को अपने बेडरूम में दरवाज़े के पीछे छिपा कर बांसुरी ने एक नज़र पूरे घर पर डाली और निश्चिंत होकर नहाने घुस गयी।

   वो नहा कर तैयार हो ही रही थी कि उसकी डोर बेल बजने लगी, वो एक बार खुद को आईने में निहार दरवाज़ा खोलने चली गयी, दरवाज़े पर उसकी होने वाली मौसी सास अपनी सास और ननंद के साथ खड़ी थी, सबके पैर छू कर बांसुरी उन्हें अन्दर बुला ही रही थी कि मौसी सास ने एक और विस्फोट किया__ चिंकी तुम्हारे लिये एक सरप्राइज़ भी लेकर आयी है।”
   बांसुरी की सवालिया नजरों पर दरवाज़े के बाहर छिपी चिंकी अपने साथ भास्कर को भी खींच कर सामने ले आयी, भास्कर को सामने देख बांसुरी जहाँ चौंक गयी वहीं उसके चेहरे को देख सब के सब हँसने लगे__

” कैसा लगा सरप्राईज़ बांसुरी?”

  मौसी सास की बात पर मुस्कुरा कर अपनी खुशी जाहिर कर बांसुरी उन सब के लिये पानी लेने रसोई में चली गयी, उसके पीछे से उसकी मदद करने भास्कर भी रसोई में चला आया

” बहुत प्यारी लग रही हो, मैने कहा था ना पीले सूट में तुम बहुत खिलती हो।”

” हम्म तुमने ही तो सुबह सुबह मेसेज कर दिया था कि  सूट ही पहनना और वो भी पीला वाला इसिलिए पहना , वर्ना मैं तो….

” वर्ना क्या?? तुम जीन्स पहनने वाली थीं?”

” अरे ना बाबा ! इतनी अक्ल तो मुझमें भी है कि ससुराल वालों के सामने क्या पहनना है, खैर आपने जल्दी आकर बहुत प्यारा सरप्राइज़ दिया भास्कर।”
   बांसुरी की खुशी मुस्कान बन कर उसके चेहरे पर सजी रही, उसने चिंकी की मदद से चाय और नाश्ता टेबल पर सजाया और वापस रसोई में चली गयी।

    मौसी की सास घूम घूम कर घर का अवलोकन ऐसे करती रहीं जैसे शादी के बाद भास्कर बिदा होकर इस घर में रहने आने आने वाला है__

  ” काय बहुरिया वायलिन भी बजाना जानती है का?”

  ” पता नही अम्मा जी, क्यों बांसुरी? तुम गिटार भी बजा लेती हो?”

  “अरे नहीं मौसी जी यह तो मेरी सहेली पिंकी का गिटार है वह बजाती है।”
     हे भोले भंडारी कितना झूठ बुलवाओगे मुझसे, ऐसे तो हमेशा इधर-उधर अपनी सहेलियों के ऊपर इंप्रेशन मारती फिरती थी कि मैं कभी झूठ नहीं बोलती और अब जब से ये पिंकी का भाई आकर रहने लगा है हर बात पर मुंह से फट से झूठ ही निकलता है, क्या करूं इसका?
   बांसुरी अपने विचारों में खोई थी की गिटार को उठाकर भास्कर एक स्टूल पर बैठ कर उसे बजाने का प्रयास करने लगा जिसे देखकर बांसुरी दौड़ पड़ी__

  ” अरे रहने दीजिए कहीं कुछ टूट टाट गया तो ? दूसरे की चीज है आखिर, चलिए मैं खाना लगाती हूं फिर शॉपिंग के लिए भी तो जाना है वरना देर हो जाएगी आप लोगों को वापस लौटना भी तो होगा।”

  ” अभी हमें आए हुए वक्त ही कितना हुआ बंसी कि तुम हमें भेजने की भी सोचने लगी।”
       हंसते हुए भास्कर ने बांसुरी को छेड़ा और वापस गिटार में लग गया…..

बांसुरी ने दो एक बार इशारों में भास्कर को रसोई में बुलाने की कोशिश की पर उसके इशारों को देख कर भी अनदेखा करते हुए भास्कर बाहर ही अपनी मौसी और बाकी लोगों के साथ बैठा रहा, और अंदर बांसुरी सारी तैयारी कर खाना प्लेट में सजाकर बाहर ले आई।
 
     सब को परोसती खिलाती बांसुरी अपनी सजी सजाई प्लेट रसोई में ही भूल आई थी, पर उनमें से किसी ने भी उसे अपनी प्लेट लाने के लिए नहीं कहा सबको खिला पिला कर सब की प्लेट उठाकर वापस रसोई में जाने पर उसने देखा उसकी प्लेट का गरमा गरम खाना ठंडा हो चुका था, तभी पानी लेने रसोई में आया भास्कर बांसुरी को देख हड़बड़ाने लगा__

     ” अरे तुमने अभी तक खाया नहीं ? जल्दी करो फिर शॉपिंग के लिए भी जाना है ना! लेट हो जाएंगे ! फटाफट खाना खत्म करो और उसके बाद हम निकलते हैं।”

  दो-चार उल्टे सीधे कौर डालकर पानी पीकर बांसुरी पर्स उठाकर उनके साथ बाहर जाने के लिए तैयार हो गई।

   भास्कर की एस यू वी में सभी लोग आराम से बैठ गए और वहां से शॉपिंग के लिए वीटी की तरफ निकल गये।।

   वहां के सबसे बड़े मॉल के सबसे शानदार सुसज्जित कपड़ों की दुकान पर सभी औरतें अपनी अपनी पसंद की साड़ियां निकलवाती बैठीं थी, जो साड़ी मौसी को भा जाती  वह उनकी बिटिया को पसंद नहीं आती और जो उन दोनों को पसंद आती उस पर मौसी की सास ननंद की मुहर नही लग पाती, इसी तरह की चिक चिक में समय गुज़र रहा था और सामने पडीं साड़ियाँ अपनी किस्मत को रो रहीं थी कि कब वो वापस अपने शैल्फ पर सजेंगी । इन सब से अलग एक किनारे किसी दूसरे कस्टमर को दिखाती एक साड़ी पर बांसुरी की नजर अटक कर रह गयी जब उस कस्टमर ने साड़ी को पसंद ना कर के किनारे करवा दिया तो बांसुरी ने तुरंत अपने सामने खड़े हेल्पर से उस साड़ी को मंगवा लिया।। बहुत प्यार से हाथ में पकड़ी  उस साड़ी को देखती हुई बांसुरी मुस्कुराती रही।।
      उसे देख चिंकी ने पूछ लिया” ऐसा क्या खास देख लिया  भाभी इस साड़ी में ? सिंपल तो है!!

    सादी सी सफेद रंग की मलमल कॉटन में पतली सी भूरे रंग की लेस लगी थी और साथ ही नीचे और पल्ले पर ढेर सारे नीले पीले गिटार बने हुए थे उन्हीं सुरीले गिटारों  पर हाथ फिराती बैठी बांसुरी साड़ी में खोकर रह गई थी उसे वैसे खोया देख भास्कर भी वहाँ चला आया__

   ” तुम्हें बहुत पसंद आ गई है क्या? क्या बकवास साड़ी हाथ में लिये बैठी हो, देखूँ ज़रा हमारी साहिबा को कितने की साड़ी  पसंद आयी है, मात्र 1200 रुपये!!
   छोड़ो भी यार!!यह देखो मैं  ये लेकर आया हूं ……..12000 की है,  साउथ इंडियन पट्टू साड़ी!! कैसी है?

  अपने कंधे पर साड़ी को डाले बांसुरी आईने में खुद को ही देख  मोहित हो गयी।। सुर्ख लाल और नारंगी रंग की साड़ी पे सजा सुनहरी बॉर्डर साड़ी की खूबसूरती और बढ़ा रहा था।।

  ” चिंकी की भी सगाई है ना अगले महीने, उसी की शॉपिंग के लिये मासी आयी हैं।”

   भास्कर की बात सुनकर बांसुरी ने मुस्कुराकर चिंकी को देखा चिंकी ने शरमा कर आंखें झुका ली। कपड़ों के बाद वो लोग इलेक्ट्रॉनिक सामान की शॉप पर घुस गये…
    बांसुरी को उनके वहां जाने का कोई औचित्य समझ नहीं आया लेकिन ससुराल का मामला होने से उसने कोई सवाल नहीं किया और चुपचाप उन लोगों के साथ अंदर चली गई चिंकी अपने होने वाले दूल्हे के लिए कोई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट खरीदना चाहती थी इसीलिए वह और भास्कर अलग-अलग काउंटर पर दूल्हे के लायक गिफ्ट ढूंढते रहे कि तभी अलग-अलग सामानों पर नजर डालते हुए बांसुरी की नजर कॉफी पेर्कोलेटर  पर अटक गई!! वो उसे उठाकर अलट  पलट कर देख रही थी की हेल्पर ने उसके हाथ से परकोलेटर  लिया और और उसकी खूबियां गिनाना शुरु कर दिया , जिसे देख भास्कर तुरंत वहाँ पहुंच गया__

” क्या हुआ बांसुरी तुम्हें इसकी क्या ज़रूरत?”

” ना ना कोई ज़रुरत नही, मैं तो बस यूं ही देख रही थी, तुम जाओ अपना काम निपटा लो।”
  बांसुरी ने पर्स से अपना फ़ोन निकाला और एक बार चेक कर के वापस पर्स में डाल लिया__

” जैसे आज घड़ी घड़ी अपना फ़ोन देख रही हो ना ऐसे ही जब मैं साथ नही होता हूं तब भी चेक कर लोगी तो मेरे कॉल्स मिस्ड कॉल्स में नही बदलेंगे।”
   भास्कर बांसुरी पर बिजली गिरा कर दूसरे काऊंटर पर चला गया और वो बेचारी कट के रह गयी…… सच ही तो कह रहा था भास्कर क्या गलत कहा उसने ??

         पिछले 2 दिनों में जब से वह राजा के साथ बाहर जा रही थी  उसे एक बार भी अपने फोन का होश ही नहीं रहता था!!
       आखिर गलती तो उसकी खुद की थी, भास्कर की नाराज़गी बेवजह तो नही थी!! और आज जब भास्कर साथ है तो वह बार-बार क्यों उस अपरिचित अनजाने के मैसेज देखने के लिए फोन खोल रही है! आखिर वह लगता क्या है उसका??  सिर्फ दो ही दिनों  में इतनी दोस्ती कैसे हो गयी??
     खैर दोस्ती समय की मोहताज तो नहीं होती ना!! बस विचार मिले और हो गई दोस्ती !!
    और वैसे भी कोई इतना अच्छा दोस्त नहीं है वह। सिर्फ पिंकी का भाई है , परेशानी में है, इसीलिए बार-बार उसकी तरफ ध्यान जा रहा है, और इस से ज्यादा कुछ नहीं ……
          बांसुरी अपने मन को समझा कर वहां से निकल आई, सब जब उस दुकान से बाहर निकलने लगे तो आखिर बांसुरी से नहीं रहा गया  और उसने वापस काऊंटर पर लौट कर उस कॉफी परकोलेटर को खरीद ही लिया…….

  भास्कर के कहने पर सभी गाड़ी पर सवार हो किसी कैफे की तलाश में निकल गये__

       मेरी ज़िन्दगी में तेरी बारिश क्या हुई
        मेरे रास्ते दरिया बने बहने लगे
        मेरी करवटों को तूने आके क्या छूआ
        कई ख़्वाब नींदों की गली रहने लगे
        जीने के इशारे मिल गए
         बिछड़े थे किनारे मिल गए…..

    ” बांसुरी इस एरिया का सी सी डी यहीं कही पर था ना??”
   गाने में बजती गिटार और उसके बोलों में खोयी बांसुरी भास्कर के सवाल को सुन नही पायी

” कहाँ खो गयी हो भाभी?? जिनके खयालों में खोयी हो उन्हीं की बात सुन नही रही हो!”
   चिंकी के झकझोरने पर बांसुरी चौंक गयी__

” क्या हुआ?? क्या पूछ रहे भास्कर?”

” कुछ नही, जो पूछ रहा था, वहाँ पहुंच गये हम, चलो उतरो सब सी सी डी आ गया।”

   सभी अपनी पसंद की कॉफ़ी ऑर्डर कर रहे थे __

” बांसुरी तुम तो कैपेचीनो लोगी ना??”
  हमेशा कैपेचीनो ही पीने वाली बांसुरी ने तुरंत कहा__

” नही कैफे लाटे लूंगी”

  भास्कर ने बांसुरी की तरफ ऐसी निगाहों से देखा की क्या वो सच में अपने सबसे प्रिय फ्लेवर के अलावा कुछ और लेना चाहती है, बांसुरी खुद आश्चर्य में थी कि आखिर उसने उस दिन कॉफ़ी पीते हुए इतना ही तो बताया था की उसे सी सी डी की लाटे पीना पसंद है।।
  ये पिंकी का भाई उसकी जान लेकर रहेगा !! राजा के बारे में सोचते हुए उसे हँसी आ गयी और उसने एक बार फिर पर्स से मोबाइल निकाल कर देखा , सुबह जब से राजा घर से निकला था उसने कोई मेसेज बांसुरी को नही भेजा था, खुद से पहल करने की ना तो बांसुरी हिम्मत जुटा पा रही थी और ना उसे इसका अवकाश ही मिला था, पर अभी मोबाइल खोलते ही बांसुरी की आंखे चमक गयी, राजा अजातशत्रु नाम का नोटिफ़िकेशन आया हुआ था__

   उसने खोल कर देखा राजा ने अपनी सेल्फी भेजी थी…… समन्दर के किनारे ढ़ेर सारे कुत्तों और ढ़ेर सारी बिस्किट के पैकेट्स के साथ राजा मुस्कुराता हुआ रेत पर आलथी पालथी बना कर बैठा हुआ था।।

   उसकी सेल्फी देख बांसुरी एक बार फिर मुस्कुरा उठी, थोड़ी देर फोटो देखने के बाद उसने फ़ोन बन्द कर वापस पर्स में डाला और जैसे ही सामने देखा उसने भास्कर को खुद को देखते हुए पाया__

” वो माला का मेसेज था , उसने अपने घर की फोटो भेजी थी भास्कर!!”

” मैंने कुछ पूछा?? नही ना, फिर सफाई क्यों दे रही हो?”
       बांसुरी एक बार फिर कट के रह गयी, सही तो कहा रहा भास्कर क्या ज़रूरत है उसे ही ना दिखने वाले तिनके को खुद ही खोज कर दिखाने की।।

  ” अरे बांसुरी अम्मा जी कह रही थी आज पूर्णिमा है अच्छा दिन है, जब सब साथ निकले ही हैं तो महालक्ष्मी मन्दिर भी चलते हैं, दर्शन कर लेंगे और तुम दोनों साथ में आशीर्वाद भी ले लेना, क्यों ठीक है ना  गुड्डू?
   मासी भास्कर को उसके घर के नाम से ही बुलाया करती थी।।

” हाँ  ठीक है।” छोटा सा जवाब देकर भास्कर ने गाड़ी मन्दिर की तरफ मोड़ ली, लेकिन बिना उसके कुछ कहे भी बांसुरी उसके रूखेपन का कारण मन ही मन समझ गयी थी।

    मन्दिर की भीड़ भाड़ और उँची सीढ़ियाँ देख सासु माँ को सहारा देकर चढ़ाने के लिये मासी और उनकी ननंद पीछे ही रह गयी,  उन्होंने इशारे से बांसुरी भास्कर और चिंकी को आगे जाने के लिये भेज दिया__
       ” तुम दोनों पण्डित जी से साथ में आशीर्वाद ले लेना।” अपनी बात एक बार और दोहरा कर मासी धीरे धीरे सीढ़ियाँ चढ़ती रहीं, लम्बी लाइन के धक्के खाती बांसुरी माता की मूर्ति देखती हुई आगे बढ़ती कब माता लक्ष्मी के सामने खड़ी हो गयी उसे पता भी ना चला_

  ” सौभाग्यवती भव !! दोनो का साथ सदा सर्वदा बना रहे।”
   पण्डित जी का आशीर्वाद लेकर बांसुरी ने अपने बाजू में प्रसाद देने के लिये हाथ बढ़ाया ही था कि बाजू में खड़े राजा को देख चकित रह गयी, वो उससे कुछ पूछती कि चिंकी ने लपक कर बांसुरी के हाथ से प्रसाद ले लिया तभी लोगों को हटाते हुए भास्कर भी वहाँ पहुंच गया__

    ” अरे नीचे इतनी लम्बी लाइन थी, तुम तो फूल नारियल की टोकरी भी लाना भूल गयी थी, बस वही लेने में लेट हो गया, आओ बांसुरी आशीर्वाद ले लेते हैं।”

   बांसुरी ने भास्कर के साथ एक बार फिर प्रणाम किया और पण्डित जी के वापस आने के पहले ही वहाँ से निकल गयी, वो खुद अपने मन को इस बात की कोई कैफ़ियत ना दे सकी की पण्डित जी के आशीर्वाद के समय आखिर किस जादू की छड़ी से राजा वहाँ प्रकट हो गया था……… आस पास चारों तरफ  ढूँढने पर भी राजा उसे फिर कहीं नज़र नही आया……

  शाम के गहराने के साथ ही सभी गाड़ी में बैठे बांसुरी के फ्लैट की ओर निकल गये, उसे वहाँ उतार कर सब को पुणे वापस निकलना था।
    गाड़ी में चलते हुए गाने को आगे बढ़वा कर चिंकी से बोल कर बांसुरी ने एक बार फिर वही गाना चलवा लिया जिसे सुनते हुए गिटार की आवाज में वो खो कर रह गयी थी…….

           मेरी लौ हवाओं से झगड़कर जी उठी
           मेरे हर अँधेरे को उजाले पी गए
          तूने हँसके मुझसे मुस्कुराने को कहा
          मेरे मन के मौसम गुलमोहर से हो गए
  जीने के इशारे मिल गए बिछड़े थे किनारे मिल गए ..

क्रमशः

aparna…

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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