जीवनसाथी -12

जीवन साथी – 12

       देर होती देख बांसुरी को उसकी सोसाइटी के मेन गेट पर ही उतार कर भास्कर और उसके परिवार ने बांसुरी से बिदाई ले ली…..
   घर पहुंचने की खुशी में बांसुरी ने अपनी मौसी सास और उनकी सास ननंद के पैर एक बार फिर छुए और चिंकी को बाय बोल कर गेट के अन्दर चली आयी…..

    गेट के अन्दर आते ही उसकी नज़र राजा पर पड़ गयी जो वहीं पार्क की बैंच पर आंखें बन्द कर के बैठा अपनी ही सोच में डूबा था, उसे एक नज़र देख बांसुरी लिफ्ट की ओर चली गयी, ऊपर अपने फ्लैट में पहुंच उसने चैन की सांस ली और फिर फ़ोन निकाल कर राजा को घर पहुंच गयी हूँ का मेसेज भेज दिया….

    मुहँ हाथ धोकर फ्रेश होकर निकली बांसुरी अपनी सोच में डूबी थी…….., उसे समझ नही आ रहा था कि उसका आज का दिन कैसा गया__ वो अपने होने वाले पति के साथ पूरा दिन बिता कर आयी थी, उसके ससुराल वाले भी ठीक ही स्वभाव के थे, चिंकी तो काफी हद तक सहेली सी ही थी, उसने अपने मन मुताबिक शॉपिंग भी की, भास्कर ने उसे इतनी खूबसूरत साड़ी भी दी, इतनी सारी अच्छी बातों के बावजूद क्यों उसका दिल घर पहुंचने पर इतना खुश है, ऐसा लग रहा जैसे किसी कैद से रिहा होकर आयी है…….
   
        औरतें जितनी ही जल्दी मायूस होतीं हैं उतनी ही जल्दी उस मायुसी से निकल भी आती है, सारी चिंता पर बांसुरी की शॉपिंग भारी पड़ गयी, अपने सर को झटक कर वो बाहर रखे अपने सामान को देखने के लिये बाहर निकल पड़ी , तभी रसोई से हाथ में दो कप थामे राजा भी निकल आया__

  ” कैसा रहा आज का दिन?”

  मुस्कुरा कर पूछते हुए उसने चाय का कप बांसुरी के हाथ में थमा दिया__

  ” अच्छा था? और तुम्हारा, क्या किया सारा दिन, कहाँ घूमते रहे?”

” मेरा दिन तो शानदार रहा, यहाँ से नीचे उतरा तो कुछ देर के लिये लाइब्रेरी चला गया, पर कुछ बहुत अच्छा स्टफ मिला नही, वर्ना मेरी प्लानिंग तो सारा दिन लाइब्रेरी में ही बिताने की थी, फिर टैक्सी लेकर निकल गया, ड्राईवर से बोला भाई जो जगह तुझे पसंद आये वहाँ ले चल…… राजा अपनी बात पूरी भी नही कर पाया था की चाय पीते ही बांसुरी अपनी कुर्सी से उछल पड़ी, कप को किनारे रख उसने पॉलीबैग से एक बड़ा सा पैकेट निकाला और सामने टेबल पर रख दिया__

” देखो तुम्हारे लिये क्या लेकर आयी हूँ?”

  ” मेरे लिये? ” हँसते हुए राजा ने पैकेट को देख बांसुरी से आंखों में ही इशारे से पूछा कि क्या यही पैकेट, बांसुरी के हाँ कहते ही राजा ने उसे खोला और कॉफ़ी पर्कोलेटर देख कर हँसने लगा

” थैंक यू बांसुरी!! लेकिन मेरे लिये लाने की क्या ज़रूरत थी, मैं कौन सा रोज़ यहाँ रहने वाला हूं, कोई दो एक रोज़ में चला ही जाऊंगा , फिर कभी वापस भी आऊंगा या नही कह नही सकता,?तो क्या ज़रूरत थी इतने रुपये उड़ाने की? बोलो”

  जाने क्या सोच कर बांसुरी का मन एकदम से खट्टा हो गया, सच ही तो कह रहा था वो….ठीक है उसका साथ अच्छा लगता है , उसके साथ रहने में वक्त का पता ही नही चलता पर इसका मतलब ये तो नही की अपनी दीन दुनिया ही भुला दी जाये, कभी कभी कैसा बचपना कर जाती है वो……
     थोड़ी देर पहले जो मन भारी हो गया था वो अब अचानक अपनी इस बेवकूफी से संकुचित सा होने लगा था, पता नही क्या सोच रहा होगा? कैसी लड़की है अपने मंगेतर के साथ जाकर किसी गैर लड़के के लिये गिफ्ट खरीद लायी, बांसुरी को अपनी उधेड़बुन में खोया देख राजा ढूंढ़ ढांड कर अपनी गिटार ले आया और बांसुरी के सामने बैठे एक धुन बजाने लगा__

  ” चलो बान्सूरी  तुम्हें एक गाना सुनाता हूँ, तुम बताना ये सुन के सबसे पहले तुम्हारे दिमाग में किसका नाम आया?

              तेरी मेरी ऐसी जुड़ गई कहानी
        के जुड़ जाता जैसे दो नदियों का पानी
                 मुझे आगे तेरे साथ बहना है

जाना तुम्हें तो है ये बात जानी
के ये ज़िन्दगी कैसे बनती सुहानी
मुझे हर पल तेरे साथ रहना है

तूम कुछ अधूरे से हम भी कुछ आधे
आधा आधा हम जो दोनों मिला दे
तो बन जाएगी अपनी एक जिंदगानी
ये दुनिया मिले ना मिले हमको
खुशियां भगा देंगी हर गम को
तुम साथ हो फिर क्या बाकी हो
                  मेरे लिए तुम काफी हो

   बांसुरी मुस्कुराती हुई गाने को सुनती रही और आखिरी की पंक्तियाँ वो भी साथ ही गुनगुनाने लगी __ “मेरे लिये तुम काफी हो”

  ” हम्म बताओ?”

राजा के सवाल पर वो मुस्कुरा कर वहाँ से उठ गयी, चाय के कप लिये रसोई की तरफ चली गयी__” अरे क्या हुआ मैडम?? अजीब हो यार तुम ? “

” क्यों अब इसमें क्या अजीब हो गयी मैं?”

” अजीब नही हो तो इतने आसान से सवाल का जवाब क्यों नही दिया?”

  ” क्या जवाब दूं इसका?”

  ” यही कि तुम्हें इस गीत को सुन कर भास्कर की याद आयी होगी ,और वो नेचुरल भी है तो बस वही बताना था तुम्हें, और सुनो मुझे ये सुन कर क्या याद आया बताऊँ?

   बांसुरी जाते हुए रुक गयी और धड़कते दिल के साथ पलट कर इशारे से ही पूछा किसकी?

   राजा ने सामने रखे पर्कोलेटर को दिखाया और एक बार फिर गाने लगा__” मेरे लिये तुम काफी हो….” हँसते हुए बांसुरी ने राहत की सांस ली….

  ” आज तो खाना बनाने की ज़रूरत नही है सुबह का ही काफी कुछ बच गया है, तुम खा तो लोगे ना या तुम्हारे लिये कुछ और ताजा बना दूं।”

  ” अरे बिल्कुल खा लूंगा, मैं भी तो तुम्हारी तरह का ही इन्सान हूँ, अगर तुम्हारा पेट सुबह का खाना रात में पचा सकता है तो मेरा digestive सिस्टम तो तुमसे कहीं ज्यादा स्ट्रांग है।”

” क्यों भला?”

” क्योंकि तुम्हारे पेट को सिर्फ आलू छोले पनीर पचाने की आदत है और मेरा पेट मुर्गे से लेकर टर्की मोर तीतर जाने क्या क्या पचा चुका है।”

  ” तुम सच में ये सब खा चुके हो?”

  ” हाँ भाई,, हम सर्वाहारी लोग भी औरों के समान सामान्य ही नज़र आतें हैं, वैसे जिस हिसाब से तुम पूछ ताछ करती हो, कई बार लगता है तुम खुद खाना चाहती हो? ऐसा है क्या?”

” नही बिल्कुल नही, लेकिन एक चीज़ है जो मैं मेरी शादी के पहले करना चाहती हूं, बल्कि एक नही दो तीन चीज़े हैं , नही थोड़ी और ज्यादा चीज़े हैं…..

  “अरे बस बस तुम तो एक के बाद एक आगे बढ़ती जा रही हो, पर शादी के पहले क्यों करना चाहती हो??”

  ” क्योंकि मुझे पता है भास्कर मेरी इन बकवास  इच्छाओं को कभी पूरा नही करने देंगे।”

” इच्छायें कभी बकवास नही होती बांसुरी, अगर किसी के मन में कोई बात आयी है जो वो पूरी करना चाहता है तो वो बकवास कैसे हुई, हाँ बस इच्छा ऐसी हो जिससे किसी का नुकसान ना हो, अगर चाहो तो मुझे बता सकती हो।”

  ” मेरी पहली इच्छा है मैं रॉयल इनफील्ड चलाना चाहती हूँ, बचपन से मेरा सपना था पापा बाईक चलायें लेकिन उन्होने हमेशा अपने स्कूटर को ही खुद से चिपकाये रखा, वो तो कार खरीदने के पक्ष में भी नही थे, पर हमारी पढ़ाई के बाद जब दीदी की शादी भी निपट गयी और मेरी नौकरी लग गयी तब बहुत पीछे पड़ के मैंने ही जबर्दस्ती पापा को कार के लिये मनाया , और टिपिकल हमारे क्लास को सूट करती छोटी सी कार पापा ने खरीद ली वो भी ई एम आई पर और तुम्हें पता है राजा कार की ई एम आई की किस्तें मैं चुकाती हूँ ….. कहते कहते बांसुरी की आंखें चमक उठीं

  …… मम्मी पापा बिल्कुल नही चाहते थे लेकिन मैंने अपनी कसम देकर मना ही लिया , क्योंकि मुझे पता है एक बार शादी हो गयी उसके बाद मैं पता नही अपने पैरेंट्स के लिये कुछ कर भी पाऊंगी या नही इसिलिए लगा शादी के पहले जल्दी जल्दी सारी किस्तें चुका दूँ
   ये मेरी दूसरी इच्छा है.”…. बांसुरी अपनी बात पूरी कर मुस्कुराने लगी

” हम्म ये दोनो तो कोई बहुत बड़ी इच्छायें नही हैं, पूरी भी हो ही जायेंगी, पर बांसुरी एक बात कहूँ इतनी जजमेन्टल क्यों हो तुम? शादी के बाद कर पाऊंगी या नही? भास्कर इस बात के लिये मानेगा या नही? ऐसा क्यों ??

  ” जजमेन्टल नही हूँ, लेकिन भास्कर को , उसके स्वभाव को जानती हूँ ना और साथ ही जानती हूँ हमारे समाज को, जहां बेटियाँ सिर्फ ब्याह तक ही अपने मायके की होतीं हैं शादी के बाद ना उनका मायके पर कोई हक होता है और ना मायकेवालों का उन पर!!”

  ” फिर भी!! हो सकता है भास्कर ऐसा ना हो!!”

  ” हाँ हो सकता है, लेकिन रिस्क भी नही ले सकती ना, मान लो उसे पता चले की मैं पापा की कार का लोन भरती हूँ और वो मना कर दे तब माँ पापा को कितना बुरा लगेगा सोचो, उनके मन में छपी भास्कर की हीरो टाईप की छवि एकदम से खराब हो जायेगी ना!!”

    बांसुरी की बात सुन राजा मुस्कुराने लगा……

” अजीब होती हो तुम लड़कियाँ भी “

  ” क्यों?”

  ” पति की जिन कमियों से खुद परेशान रहोगी उसे दुनिया से छिपा कर भी रखोगी जिससे किसी के सामने इमेज ना खराब हो जाये……
     भास्कर बहुत लकी है !!”

  आखिरी पंक्ति राजा ने इतने धीरे से कही कि बांसुरी सुन नही पायी

   ” और कोई ख्वाहिश जो बच गयी हो?”

  ” मैं एक बार , मतलब बस एक बार,  बहुत अच्छी वाली वाईन पीना चाहती हूँ.,मतलब सिर्फ टेस्ट करना चाहती हूँ …..

” ओह्ह्हो तो ये बात है, फिर मुझसे क्यों कहा कि तुम्हारे फ्लैट में पीना अलाउ नही हैं, झूठी!!”

  ” अरे कोई झूठ नही बोला मैंने, सच में अलाऊ नही है, और मैं भी कोई ये थोड़ी कह रही कि मुझे पीना ही है मैं तो बस बता रही हूँ कि एक बार पी कर देखना चाहती हूँ क्या चीज़ है आखिर जिस पर इतनी गज़लें इतने गाने लिखे गये, जिस पर बच्चन जी ने पूरी की पूरी मधुशाला ही लिख दी…….अरे भूल गयी कल मौसमी के फ्लैट पर जो लड़की मिली थी ना उसने कॉल किया था, पर तब मासी जी लोगों के साथ थी तो बात नही हो पायी, रुको मैं उससे बात कर लेती हूँ ।”

   बांसुरी अपना फ़ोन संभाले वहाँ से चली गयी, कुछ देर बाद कुछ सोचती हुई वापस आयी

  ” क्या हुआ बांसुरी?? कुछ परेशान लग रही हो?”

  ” हाँ!! असल में कल आते समय मैने उस लड़की का नम्बर लिया था, कल जब हम वापस लौट रहे थे तब मौसमी का फ़ोन कई बार ट्राय किया लेकिन लगा नही तब मैने इन्हें मेसेज किया था, फिर शायद इन्होने भी फ़ोन किया होगा लेकिन लगा नही तो आज वही बताने के लिये फ़ोन किया कि गांव में शायद नेटवर्क की दिक्कत होगी तो इसलिये मौसमी से फोन पर बात करना मुश्किल है, उसने कहा आप चाहे तो वहाँ जाकर मिल लिजिये, यहां से 3 घण्टे का ही रास्ता है, और पूरा एड्रेस मुझे भेज दिया है।”

  ” तो अब क्या करना है??”

  ” मैं सोच रहीं हूँ,मुझे एक बार तो जाना ही पड़ेगा, कम से कम मौसमी  से पूरी बात तो पता चले कि माजरा आखिर है क्या?”

   “बिल्कुल , पूरी बात जानना बहुत ज़रूरी है, तो कब निकलेंगे?”

   बांसुरी ने राजा को सवालिया नजरों से देखा

  ” अरे बांसुरी मैं भी चलता हूँ ना!! देखो अगर तुम्हारी जगह पिंकी……

   ” ओके ओके बाबा, फिर से पुराना डायलॉग मत चिपकाओ, तुम भी चलना, अरे एक बात तो पूछना तुमसे भूल ही गयी।”

” हाँ पुछो?”

” तुम आज शाम महालक्ष्मी मन्दिर कैसे पहुंच गये थे ?”

  ” बस ऐसे ही , पहले मरीन ड्राइव गया, काफी देर वहाँ बैठने के बाद ड्राईवर हाजी अली ले गया, फिर उसने पूछा और कहाँ जाना है तो मेरे मुहँ से महालक्ष्मी मन्दिर ही निकला ,और बस उसने मुझे पहुंचा दिया, मैंने खुद वहाँ प्रणाम करने के बाद जब आंखे खोली तो तुम्हें देख कर चौंक गया, कि तुम तो शॉपिंग के लिये गयी थी, फिर मुझे लगा तुम्हारे साथ के लोग जाने क्या सोचेंगे इसिलिए बिना तुमसे कुछ कहे ही वहाँ से निकल गया।।”

  ” ओके “

  ” और कोई सवाल मैडम??”

  ” नही चलो अब तुम भी फ्रेश होकर चेंज कर लो मैं हम दोनों का खाना परोस लाती हूँ ।”

   खाना खाकर बांसुरी सोने चली गयी, और राजा एक बार फिर अपनी गिटार उठाये झूले पर बैठा कोई धुन गुनगुनाने लगा__

    
        कुछ ख़ुशबुएं यादों के जंगल से उड़ चलीं
      कुछ खिड़कियाँ लम्हों की दस्तक पे खुल गईं
          कुछ गीत पुराने रक्खे थे सिरहाने
       कुछ सुर कहीं खोए थे बन्दिश मिल गई
जीने के इशारे मिल गए बिछड़े थे किनारे मिल गए………

    राजा को गाते सुन बांसुरी के होंठों पर मुस्कान छा गयी__ जादुगर है क्या ये लड़का, आज पूरा दिन यही गाना तो सुनती आयी थी वो और यही गीत वो बाहर बैठा गुनगुना रहा है।
     आंखें बन्द कर गाने में खोयी जाने वो कब गहरी नींद में सो गयी…..

*******

   अगली सुबह समय से तैयार होकर दोनों  टैक्सी लेकर उस गांव के लिए निकल पड़े जहां मौसमी किसी शादी का हिस्सा बनने गई हुई थी पूरा पता और फोन नंबर अच्छे से नोट कर बांसुरी ने पर्स में अलग से रख लिया था उसे अपने मोबाइल और मोबाइल की चार्जिंग पर थोड़ा कम भरोसा था।

    दोपहर होते-होते वो लोग गांव  पहुंच चुके थे लेकिन इत्तेफाक से उस गांव में उसी वक्त पर तीन शादियां हो रही थी, मौसमी का फोन सुबह से ही बन्द आ रहा था, और अब उस दुसरी लड़की के फोन पर भी दूरभाष आंटी का संदेश सुनाई दे रहा था” आपण डायल केलेली संख्या कव्हरेज क्षेत्राच्या बाहेर आहे”

   ड्राईवर ने उन्हें एक छोटे से आंगन बाड़ी केंद्र के सामने उतार दिया__

   “सर, ही तुमची लग्नाची इमारत आहे!!”

   “तुला कसं ठाऊक( तुम्हें कैसे पता)”

   ” अरे देख के मेड़म ,गांव में ऐसे ही शादी भवन होता है, कोई सरकारी स्कूल, पंचायत भवन इसी सब मे लगन होता है मेड़म।”

  ड्राइवर को पैसे देकर दोनों नीचे उतर गए ,उस भवन के मुख्य द्वार पर नकली फूलों की कुछ मालाएं सजी थी और ऊपर एक चमकीला बैनर सजा था __
     तुलशी वेड्स तुलाराम

   बांसुरी को समझ  नही आ रहा था कि अन्दर जायें या बाहर ही रुक कर किसी से पुछे, तभी भागता दौड़ता एक आदमी आया और उसने राजा को कोल्ड ड्रिंक का एक क्रेट थमाया और जल्दी जल्दी अपनी बात पूरी कर अन्दर भाग गया__” ए भाऊ ये दूल्हा और उसके दोस्तों के लिए है तू जा ना जरा जल्दी से उन लोगों को दे दे।”

     शादी ब्याह गांव देहात में हो या शहर में, होता एक ही जैसा है, और अगर नज़ारा लड़की के ब्याह का हुआ तब तो जो हाय तौबा मची होती है उसका अन्दाज़ा वही लगा सकता है जिसने लड़की का ब्याह किया हो,  यहाँ भी वही हाल था, हर कोई भाग रहा था, दौड़ रहा था, चाहे वो परिवार का सदस्य हो या पड़ोसी, ऐसा लग रहा था पूरे गांव का ब्याह है, बांसुरी अब तक उसी आदमी को अन्दर से बाहर निकलते में रोक कर बस इतना ही जान पायी थी कि ये आंगनबाड़ी का केंद्र क्रमांक 6 है जहां दूल्हे को जनवासा दिया गया है, असल शादी तो केंद्र क्रमांक 9 में होनी है क्योंकि वहाँ का आंगन सबसे बड़ा है और पंगत बैठा कर वरण भात आमटी परोसने में एक बार में चार लाइन जिनमें कम से कम पन्द्रह आदमी बैठ पायेंगे की सुविधा होगी।।

   बांसुरी आकर सारी बात हिंदी में राजा को समझा रही थी कि वही आदमी डालडे के दो टिन अपनी साईकल में लटकाये ज़ोर से चिल्ला कर राजा को उसका काम याद दिलाता गया

   “अरे जा ना भाऊ, त्या लीगचा राग येऊ लागेल”

   ” शादी ब्याह में लोगों को ध्यान ही नही रहता किसी को भी काम थमा कर चले जातें हैं “
    बांसुरी के ऐसा कहते ही राजा ने उससे पूछा__” कुछ काम की बात पूछी या नही तुमने?

” अरे कहाँ पूछ पायी, वो तो कितनी जल्दबाजी में था, चलो अन्दर ही चलते हैं, वहीं शायद कुछ सुराग मिल जाये मौसमी का!”

  वो अन्दर जा ही रहे थे कि कोल्ड ड्रिंक की आस में एक प्यासा चातक बाहर निकल आया__

  ” कोई है कि नही बे? दिख नही रहा बराती प्यासे हैं, कोल्ड ड्रिंक कौन तुम्हरा दद्दा लाएगा”

  राजा ने आगे बढ़ कर क्रेट उसके सामने कर दी__

  ” तुम कौन हो बे?? हियाँ के तो नै लग रहे? काहे स्पेसल सरभेंट तैनात किये हैं का सरपंच जी, ओ भी गॉगल वाला?”

   उसकी बात सुन बांसुरी आगे आ गयी__

” देखिए, हम असल में…….

” ओहो तो मैडम जी भी हैं ? का बात है…….
, रे गुडुआ ई सरपंच तो बड़ा आदमी निकला यार, हम बस इत्ता कहे रहे कि बरात कानपुर से आ रही है हमरी नाक कटनी ना चाहिए तो , ई  तो वो का कहते हैं  कट्रीन्ग वालों को बुला लिया हमार सेवा के लिये ओ भी सूट बूट में।

  ” भैय्या जी कट्रीन्ग नही कैटरिन्ग “
 
   ” बहुत पढ़ लिख लिये हो बे तुम जो अब प्रिंस को पढ़ाओगे ।”
   अपने चेले की बात सुन प्रिंस का खून खौल गया, इतनी देर से वहीं रखी कुर्सी पर चुप चाप बैठा राजा दोनों की बात सुन रहा था

  ” और तुम का सुन रहे हो बे! हम का नवधा रामायण बांच रहें हैं जो इत्ता मगन हुए बैठे हो, जानते हो हम है कौन ?

  राजा के ना में सर हिलाते ही प्रिंस एक बार फिर गरज़ उठा __

  ” कानपुर का नाम तो सुने ही होगे, जानते हो वहाँ का का फेमस है?

  प्रिंस ने पहले राजा फिर बांसुरी को देखा, राजा तो चुप था बांसुरी ने धीरे से कहा__” गुट्खा और पान मसाला”

  ” हैं??” पान मसाला चबाते हुए प्रिंस के मुहँ से उतना ही निकला की साथ वाला चेला अपना ज्ञान बघारने लगा__
        ” चमड़ा भी फेमस है, लेदर !!समझी , हाँ पहले नम्बर पे गुट्खा ही होई।”

   राजा को बांसुरी का जवाब और उस पर प्रिंस के चेले की प्रतिक्रिया सुन हँसी आ गयी, जिसे देख प्रिंस ने वापस अपने चेले को घूरा__ ” काहे पान मसाला फेमस है हमरे यहाँ का ?? औ गंगा बैराज में का डूबने मरने जाते हो…..

   प्रिंस की बौखलाहट देख रुकने की जगह राजा की हँसी और तेज़ हो गयी

  ” का है बे? कुछ जादा ही खीसे निपोर रहे हो तुम , यहीं धर दिये जाओगे समझे  सारी बत्तिसी बाहर आ जायेगी, और कहीं जादा रिसिया गये ना हम तो तुम्हरी बाडी भी नही मिलेगी चीरने के लिये ऊ क्राईम ब्रांच वालों को…….
  ए गुड्डू जाओ हमरी गन लेकर आओ ज़रा, तुलाराम यादव के ब्याह के सुभ मुहूर्त मे थोड़ा बाजा गाजा भी हो जाये “

   ” ऊ भैय्या जी आपकी दुनाली तो जंग खा गयी थी पिछले हफ्ते ही तो नेतराम की दुकान पर आयलिंग के लिये दी थी ना।

   ” तो सालों वापस कौन  लेकर आयेगा।”

” ऊ तो हम भूल गये भैय्या जी”
    प्रिंस का तमतमाया चेहरा देख राजा अपनी कुर्सी से खड़ा होकर ठीक उसके सामने चला आया__

   ब्लू डेनिम पर डार्क मरून शर्ट को कुहनीयों तक मोड़े एक हाथ में रुद्राक्ष और दूसरे में राडो की घड़ी पहने राजा ने जब अपनी आंखो से शेड्स निकाल कर प्रिंस की तरफ देखा तो अपने से दुगुनी हाईट पर्सनैलिटी के राजा में उसे कुछ देर के लिये ” कर्पूर गौरं करुणावतार्ं “साक्षात शिव के से दर्शन हो गये , उसे देख प्रिंस की आंखे श्रद्धा से बन्द होने वाली ही थी कि उसे अपना रुतबा याद आ गया, ऐसे कैसे वो किसी और के सामने झुक सकता था, वो अगली तिकडम सोच ही रहा था की राजा की आवाज उसके कानों में पड़ी __

    “तुम प्रिंस हो तो हम राजा है, समझे , ई देखो हमरे पास भी कुछ रखा है , तनिक ध्यान से देखना शायद तुम्हरे गाजे बाजे के काम आ जाये”

   और राजा ने अपनी शर्ट में बड़ी कुशलता से छिपा कर रखी छोटी सी टाईटेनियम गोल्ड सुपर ईगल निकाल कर सामने रख दी, अपनी आंखों के सामने चमकती इतनी महंगी राजसी गन को देखते ही प्रिंस ने राजा को वापस देखा__

   ” काहे कानपुर ए से हो का?”

   ” काहे कानपुर के बाहर कट्टा नही बिकता का?”

  अपनी ही बोली में राजा का जवाब सुन प्रिंस भौचक्का रह गया,
“भौकाल केवल कानपुर ए वाले मचातें हैं का??
  राजा की बात पर प्रिंस राजा के पैरों में गिर पड़ा __

” माफ कर दो गुरू!! अब बताओ दादा तुम हो कौन?”

  इतनी देर से चुपचाप खड़ी बांसुरी ने भी राजा की तरफ सवालिया नजरों से देखा, राजा ने बांसुरी को देखा और अपनी चिर परिचित हँसी से उसे आश्वस्त कर गया…

    क्रमशः

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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