जीवनसाथी-13

जीवन साथी- 13

   और राजा ने अपनी शर्ट में बड़ी कुशलता से छिपा कर रखी छोटी सी टाईटेनियम गोल्ड सुपर ईगल निकाल कर सामने रख दी, अपनी आंखों के सामने चमकती इतनी महंगी राजसी गन को देखते ही प्रिंस ने राजा को वापस देखा__

   ” काहे कानपुर ए से हो का?”

   ” काहे कानपुर के बाहर कट्टा नही बिकता का?”

  अपनी ही बोली में राजा का जवाब सुन प्रिंस भौचक्का रह गया,

    “भौकाल केवल कानपुर ए वाले मचातें हैं का??
 
    राजा की बात पर प्रिंस राजा के पैरों में गिर पड़ा __

” माफ कर दो गुरू!! अब बताओ दादा तुम हो कौन?”

  इतनी देर से चुपचाप खड़ी बांसुरी ने भी राजा की तरफ सवालिया नजरों से देखा, राजा ने बांसुरी को देखा और अपनी चिर परिचित हँसी से उसे आश्वस्त कर गया…

   ” कहाँ से हो कौन हो गुरू?”

   प्रिंस के सवाल पर एक बार फिर बांसुरी चहक उठी__
         ” ये राजकुमार हैं, राजकुमार अजातशत्रु”

   प्रिंस ने आश्चर्य से राजा की ओर देखा__

  ” ई भाभी जी सही बोल रही का? नही मतलब हम सोचते थे राजा राजकुमार लोग मोटे गोलगुथने होते होंगें, तुम तो गुरू जब्बर फिट हो,  दिन भर जिमे में गुजार देते हो का।”

    प्रिंस की बात पर राजा मुस्कुराता रहा__

  ” ओये गनमास्टर मैं कोई भाभी वाभी नही हूँ ।”

  ” अच्छा तो फिर परनाम करतें हैं दीदी आपको”

  ” भाई मेरे, मेरा नाम बांसुरी है आप बांसुरी ही कहिये।”

  ” जभी इतना बज रहीं हैं।” प्रिंस के चेले के मुहँ से बोल फूटा, वर्ना अभी तक सब सुपर ईगल के डर से मौन धारण किये खड़े थे।

******

   प्रिंस कानपुर का छुट पुट गुण्डा था, उसके बाप दादा का जमीन का धंधा था, प्रिंस का बड़ा भाई भी उसी धन्धे में हाथ आज़मा रहा था, प्रिंस से उसके पिता की कुछ उम्मीदें थी कि शायद ये लड़का पढ़ लिख कर कुछ कर जाये, पर जब लगातार 3 साल के अथक परिश्रम के बाद भी प्रिंस लगातार फेल होता रहा और उसके प्रधानाचार्य खुद घर आकर प्रिंस के बाप को उसकी टीसी पकड़ा गये ” ई जितना रुपैय्या  इसके पीछे बहा रहें हैं ना उतने में एक गुमटी खुला दो , ई ससुरा हर पेपर मा धनिया बो आता है , अब तो इन्भिजीलेटर भी रिसाने लगे हैं कि लड़का एक्को शब्द नही लिखता काहे पेपर देलवा रहें हैं।”

   प्रधानाचार्य के जाने के बाद जब बीती रात कहीं से घूम बाग कर प्रिंस घर पधारे तब तक उनकी अम्मा रसोई की अकेली बत्ती जलाए बैठी सास बहू के सिरियल मे गुम  थी, नवेली बहू का ससुराल में चौथा दिन था और रसोई में उसने सास की किसी बात पर नाराज़ होकर गुंथे हुए आटे की भरी परात को झन्न से रसोई के फर्श पर दे मारा था, सीन बहुत मार्मिक बन पड़ा था , एक तो सीन में आटा गिरने की भावना को दिखाने के लिए उसे हर एंगल से शूट करके पांच बार परात गिरने का दृश्य चित्रित किया गया था दूसरा अपने बड़े लड़के की सगाई कर चुकी कमला सीरियल की सास में अपने आप को देख पा रही थी आजकल की लड़कियों के नाज नखरे बर्दाश्त करती सास की पीड़ा को अपने अंदर महसूस करती कमला से जब प्रिंस ने खाना मांगा तो उसने भी उतनी ही तेजी से तमक कर जवाब दिया__” कौन नैकी अम्मा पाल लिये हो जो इत्ती रात बिरात घर लौटते हो , हम का ऐसे ही तपस्या करते रहेंगे की अब हमरा मुहँ झौन्सा लरिका आयेगा और उसको खिला पिला के हम आरती उतारेंगे , हाथ मुंह धो कर आओ हम थाली परोस कर ला रहे”

” अरे इतना काहे चिल्ला रही हो का हो गया 10:00 बजे तो घर आ गए हैं ना हम !!
          वैसे बनाई का हो खाने में?”

  ” कद्दू है, वही बनाई है तुमसे कहे तो रहे शाम को सब्जी लेते आना पर तुम्हें फुर्सत मिले तब तो,,  अब जो पका है चुपेचाप खा लो”

” काहे खा ले??” का हमए घर में एक मर्द हैं सामान लाने के लिए जो रह गए हैं?? पापा से काहे नहीं कहती हो, एक हफ्ता हो गया मुर्गा नहीं खाए हैं?”

  ” अब तुम खाओगे भी नहीं बेटा।”

   यह आवाज प्रिंस के पिता की थी अब तक मां बेटे के कोलाहल को सुन वह भी अपने कमरे से निकल आए थे हालांकि आज वह भी खाना खाकर सोए नहीं थे उन्हें प्रिंस का ही इंतजार था, पहले ही भरे बैठे थे उस पर श्रीमती जी ने और बत्ती लगा दी पूरी तरह सुलगते हुए वह बाहर के कमरे में प्रकट हुए, बम गोले से दमकते पिता को देखते ही प्रिंस अपनी जगह पर खड़ा हो गया
        “काहे नहीं खाएंगे, ठीक है आज मुर्गा नहीं बना कोई बात नहीं कद्दू ही खा लेंगे कल ले आइएगा मुर्गी”

   ” बेटा मुर्गा कद्दू छोड़ो आज तो वो चीज खाओगे जिसके लिए तुम असल में पैदा हुए हो, अपने बाप की चप्पल।”

  पिता के बदलते तेवर देख प्रिंस ने अपनी मां को सवालिया नजरों से देखा और भागने की पूरी तैयारी करते हुए भी अपने मन का गुबार निकालता गया

    ” हां हम तो चप्पले खाने पैदा हुए हैं बाकी हीरा मोती अपने लाडले को ही खिलाओ!!
  हमें  तो लगता है अम्मा मंदिर की सीढ़ियों से तुम उठा लाई हो!!
      बड़े भैया को दूध मलाई और हम हैं घर की काली बिलाई!! सही कह रहे हैं ना! देख लो अम्मा अगर अगर पापा ने हमें चप्पल मारी हम कहे देते हैं एक बार जो भागे घर वापस नहीं आने वाले, कसम तुम्हारे चरणों की…. प्रिंस और भी जाने क्या-क्या बड़बड़ाता भागने को था कि सरसराती हुई पिता की चप्पल आकर उसे लगी और वह उस एक चप्पल को उठाकर घर से भाग गया,
     ” परान ले लो अपनी अम्मा के झूठी कसम खा खा के, औ तुम एक आदमी हो, लड़का सुबह का थक हारा लौटा है बैठा के चैन से खानाओ नही खाने देते, अजीब अमरीस पूरी से ब्याह दिये हमाये बाऊजी हमको।”
     घर से भागकर प्रिंस पड़ोस में रहने वाले अपने ताऊ के घर जा छुपा दो,दिन तक वहां पड़े रहने के बाद ताई के हाथ के बने  बेस्वाद खाने को बिना मन के डकारने के बाद वापस प्रिंस को अपनी अम्मा के हाथ का खाना याद आने लगा और एक शाम फिर वह अपने दरवाजे पर मुंह लटकाए खड़ा था उसी समय उसके पिता अपने काम से लौटे थे प्रिंस को पकड़कर उन्होंने अपने पास बैठा लिया और प्रेम से उसे यह समझाइश दे दी कि उनके घर परिवार में पूरे खानदान में आज तक ना कोई पढ़ पाया ना लिख पाया किसी के हिस्से कलेक्ट्री नहीं आई है। पहले उनके पुरखे जमीन में खेती किया करते थे खेती किसानी त्याग कर अब धीरे-धीरे जमीन को बेचना खरीदना शुरू कर दिया तो अब उन्हें यह बात अच्छे से समझ आ चुकी थी कि जो जमीन पहले भर भर कर उन्हें अनाज दिया करती थी आज भी वही जमीन उनका पेट भरेगी बस जमीन का उनको प्यार करने का ढंग बदल चुका है उन्होंने प्रिंस को भी यह बात समझा दी कि अब वह भी स्कूल जाने में उनके पैसे और ना बहाए और उनके साथ आकर धंधे पानी से लग जाए..

     प्रिंस कौन सा पढ़ना लिखना चाहता था उसे स्कूल के नाम से वैसे ही वितृष्णा थी उसने भी अपने पिता के चरण स्पर्श किये और कसम खाई कि जमकर बिजनेस करूंगा और पिता का नाम रोशन करुंगा लेकिन पहली ही डील में प्रिंस ने अपने भाई का जमा जमाया खेल बिगाड़ दिया, और यह सिलसिला थमने की जगह बढ़ता ही गया,।
        छोटे भाई के रूप में मिली पनौती को साथ लेकर घूमने में बड़े भाई को भी कष्ट अनुभव होने लगा और उसने प्रेम प्यार से पिता को यह समझा दिया यह हमारे घर का लाडला छोटा बेटा किसी काम का नहीं है, तो इसे कृपया हर ऐसे काम से दूर ही रखा जाए जिसके बिगड़ने की संभावना हो, पर खाली दिमाग शैतान का घर सोचकर प्रिंस को व्यस्त रखना भी जरूरी था इसीलिए घर की एक पुरानी सी दुनाली को उसे थमा कर उसके पिता ने उसे वसूली दार बना दिया।।
प्रिंस के जमा दो चार  दोस्त थे वह उसके पिछलग्गू बन गए और प्रिंस बन गया छोटा मोटा सा भैया जी!!

    अपनी पुरानी जंग लगी दुनाली को साथ लिए वह अक्सर घूम घूम कर उन लोगों से ताकीद किया करता जिन्होंने उसके पिता से कभी बहुत पहले ब्याज की रकम उधार ले रखी थी हालांकि यह और बात थी कि मूलधन सहित वह ब्याज की राशि भी पूरी जमा करने के बाद भी प्रिंस के पिता के साहूकारी दिमाग की तिकडम के कारण वो लोग उबर नहीं पा रहे थे…….
…..
       तो ऐसे ही बिना मतलब और बिना जरूरत के जितने भी ब्याज धारक थे उन सब से ब्याज वसूलने का काम प्रिंस के पिता ने बड़ी चतुराई से प्रिंस को थमा दिया था।।।
       ऐसे गरीब गुजर लोगों पर अपनी धौंस जमाता प्रिंस अपने आपको बाहुबली समझने लगा था, (हालांकि उन गरीबों की गरीबी से पसीज कर कई बार अपने पास के रुपयों को वो ब्याज की धनराशि बोल कर अपने पिता को थमा दिया करता)
        उसकी दुनिया उसके मोहल्ले और आस पास के छोटे गाँवों तक ही सीमित थी, घर पर परिवार के लोग और बाहर उसके यार दोस्त उसे चढ़ा कर रखते, अपने इसी गर्व गौरव को अपने अन्दर जिलाए रखने के लिये वो घूम घूम कर लोगों को डरा डरा कर वसूली करता और अपने पिता को इंप्रेस करने में लगा रहता ।।
    उसी समय दूसरे मोहल्ले के तुलाराम जिससे ऐसी ही किसी वसूली में जान पहचान हुई थी ने आकर प्रिंस के पैर पकड़ लिये , तुलाराम यादव मुम्बई महानगर पालिका में कर्मचारी था ,वही उसका प्रेम तुलसी शिन्दे से हुआ और दोनों ने जाति धर्म प्रदेश के पचडों में पड़े बिना सीधी सपाट प्रेम की राह को चुन लिया, दोनों के घरों में थोड़े बवाल के बाद विवाह के लिये रज़ामंदी भी मिल गयी, लेकिन प्रेम कहानी में अगर विलन नही तो प्रेम कहानी में तड़का नही….. इनकी प्रेम कहानी में तड़का लगाने के लिये गुलशन ग्रोवर बन कर प्रकट हुआ तुलाराम यादव का फुफेरा भाई शान्तिराम यादव!! उसने साफ़ कह दिया कि “हम कनपुरिया कन्नौजी किसी भी येंदे शेंदे से ब्याह ना होने देंगे, का हमार गांव की सरिता , मुनिया, रानी, गीता मर खप गयी हैं जो आन गांव की मराठन को ब्याह लायोगे, शादी का लड्डू तो तुम्हें ना खाने देंगे भले चाहे तुम्हें गोली मारना पड़ जाये।”
     अब प्रिंस में ही तुलाराम को दुनिया बचाने वाले सुपर हीरो के दर्शन हुए इसलिये अपनी बारात के गिने चुने लोगों के साथ उसने प्रिंस और उसकी टोली को भी शादी में महाराष्ट्र चलने के लिए मना लिया। प्रिंस का भी ये इंटर स्टेट पहला प्रोजेक्ट था इसलिए वह भी बहुत प्रसन्नता से अपने दो-चार चेले चपाटोँ  के साथ तुलाराम यादव की बारात में शामिल होने पहुंच गया, बस एक छोटी सी गलती हो गई, निकलने के 2 दिन पहले उसने अपनी जंग लगी दो नाली को साफ करवाने भेजा था जो उसका चेला वापस लाना भूल गया।।
     खैर इन सब गलतियों के बाद भी जो सबसे अच्छा काम हुआ वह यह था कि प्रिंस को राजा के दर्शन हो गये,……….
       प्रिंस इतने दिनों से अपने अंदर जो चीज देखना चाहता था वह उसे राजा के रूप में साक्षात सामने दिख गया……
      जैसा नायक और नायिका के बीच पहली नजर का प्यार होता है,, वैसा ही कुछ प्रिंस के मन में राजा को देखते ही हुआ__
           पहली नजर की श्रद्धा
           पहली नजर की मैत्री
           पहली नज़र का आराध्य
           पहली नजर की दोस्ती……

    जहां प्रिंस राजा को देखकर अभिभूत था वही राजा को भी प्रिंस में एक बहुत सीधा सच्चा और प्यारा सा मित्र मिल गया था, प्रिंस राजा की भक्ति में ऐसा डूबा कि वह भूल ही गया कि वह महाराष्ट्र आया किस लिये था, उसने  अपने आराध्य देव हनुमान जी को प्रणाम किया और मन ही मन उन्हें आभार व्यक्त किया__

  ” एक्को बात कहें राजा भैय्या, आप बुरा मत मान जाना हम तो आपको राजा भैय्या या भैया जी ही बुलाएंगे।”

  ” अरे जो चाहो बुलाओ गुरू। अब हम तुम्हरे राजा भैया ही तो हैं।”

  ” हम ना बचपने से आप के जैसा बनना चाहते थे , एकदम टिप टाप, जितना सुंदर चेहरा मोहरा उतने सुंदर बानी , धन्य हैं आपकी अम्मा , का खा के पैदा की आपको”
    राजा के चेहरे को उदासी का एक बादल छू कर उड़ गया….
   
    ” अब ये पूछने के लिये तो बेटा हमे खुद ऊपर जाना पड़ेगा, काहे कि हमरी अम्मा अब महादेव के पास जो रहती हैं।”

   राजा की बात सुनते ही उसके दोनो फैन सन्न रह गये, बांसुरी ने राजा की तरफ देखा__

  ” तुमने कभी बताया नही राजा?? पिंकी ने भी कुछ नही बताया?”

  ” एक छोटी माँ है मेरी, पर माँ साहब के गुज़रने के बाद किसी और को माँ बोलने का दिल नही किया इसलिये छोटी माँ को मॉम कहता हूँ ।”

  राजा ने बहुत स्वाभाविकता से जवाब दिया लेकिन उसका जवाब भी बांसुरी को अन्दर तक भीगो गया, आज इतने दिन से दोनो साथ हैं पर बांसुरी ने कभी राजा के बारे में कुछ जानने की कोशिश ही नही की, बल्कि हमेशा अपना ही रोना लेकर बैठी रही, कभी भास्कर के बारे में बताती रही, कभी अपने अभिभावकों के बारे में तो कभी अपने सपनों के बारे में, पर कभी पलट के उससे पूछा ही नही कि उसका सपना क्या है, और वो बेचारा आज तक उसकी हर परेशानी को अपने नजरिये से देख कर सुलझाता रहा, चाहे ट्रेन की सीट का मामला हो या घर पर ससुराल वालों के आ  धमकने का मामला…..
    बांसुरी को अपनी ही सोच पर गुस्सा आने लगा_” छी बांसुरी कितनी स्वार्थी हो जाती है तू कभी कभी”

  ” किस सोच में गुम हो मैडम, भास्कर की याद आ गयी क्या??”

   ” नही कुछ नही!! राजा मैं सोच रही थी मौसमी कहाँ मिलेगी हमें”

  ” हाँ मैं भी वही सोच रहा था, चलो पता करतें हैं”

  राजा और बांसुरी की बात सुनता प्रिंस राजा के और निकट खिसक आया__
     ” भैय्या जी तनिक इधर परस्थान किजीये ना”
 
  राजा को इशारे से अपनी तरफ खिसकने को कह कर प्रिंस अपना मुहँ उसके कान तक ले आया__

   ” किसन कन्हैय्या बन गये हो का गुरू”

  प्रिंस की बात का व्यापक अर्थ ना बूझ पाने के कारण राजा ने आंखों से ही प्रिंस को सवाल दाग दिया__” कैसे?”

  ” नही हम सोचे आप भी किशन जी की तरह रुक्मिणी भाभी को लिये आये हैं जिनका कहीं और ब्याह होना था”

   ”  ये सिर्फ दोस्त हैं मेरी समझे और तुम यार कौन से जमाने में जी रहे हो, आजकल लड़का लड़की भी दोस्त होतें हैं बे,समझे!”

  ” भैय्या जी आप जो करें सब सही है हमारे लिये, हम तो आपके जबरा फैन हैं अब!! कोनो ज़रूरत हो तो कभी भी फ़ोन घुमा लेना हम सीधा आपके दुवारे खड़े मिलेंगे”

   राजा ने प्रिंस को खींच कर गले से लगा लिया__

  ” इतना प्यार मत करो दोस्त, राजा को इतने प्यार की आदत नही है।”

   बांसुरी की आंखे जाने क्यों आज इस अजनबी की बातों पर बार बार भरी जा रही थी

   ” ” ऐसा लगता है तुमसे पिछ्ले जनम का कोई रिश्ता है प्रिंस”

  ” भैय्या जी हमें भी ऐसने कुछ लग रहा”

  ” अब राम भरत मिलाप हुई गवा हो तो हमरे फेरे भी फिरवा दो, उहाँ से दू दो बार लरिका आकर बुला चुका है , लगन का समय बीता जा रहा “

   तुलाराम यादव जिनके जीवन का आज सबसे स्वर्णिम दिन था बहुत देर से एक तरफ उपेक्षित से बैठे अपनी पारी का इन्तजार कर के थक चुके थे, उनकी हालत बिल्कुल फील्ड में बैठे उस एक्स्ट्रा खिलाड़ी की सी थी जिसे अपनी पारी का इन्तजार उस समय था जब पाकिस्तान के खिलाफ भारत को जीतने के लिये सिर्फ 12 रन बनाने हों वो भी 67 बॉल पर, और क्रीज पर सचिन अपने जादूई बल्ले की कलाकारी दिखा रहा हो।

    तुलाराम की बात सुन कर प्रिंस को होश आया कि वो यहाँ उसके साथ उसकी बारात में शामिल होने आया हैं, उसने राजा भैय्या और बांसुरी को साथ लिये बारात के साथ विवाह मंडप की ओर प्रस्थान किया

  ” वैसे भैय्या यहाँ आना कैसे हुआ?

  ” प्रिंस बेटा एक लड़की की तलाश में आयें हैं यहाँ “

  ” एक को साथ लिये घूम रहे, दुजी की तलाश में भटक रहे, भैय्या जी आप तो मतलब फुल कैसानोवा हैं।
    प्रिंस का चेला दांत निपोरता राजा को एकटक देख रहा था, कि उसकी बात सुन प्रिंस ने उसे एक थप्पड़ रसीद कर दिया__

  ” देख रहे आजकल बहुते जादा बतिया रहे हो, जादा चूं चपड़ की ना यही सून्त देंगे समझे।।”

  ” अरे हम तो मज़ाक कर रहे थे भैय्या जी आप इतना काहे रिसिया रहे , अब राजा भैय्या  हैं भी तो इत्ते सुंदर लड़कियाँ तो इन्हें देख ऐसे ही पट जाती होंगी।”

  बांसुरी को उसकी बात सुन ज़ोर से हँसी आ गयी__

” प्रिंस तुम्हारे राजा भैय्या की एक और भी खूबी है ये गाते भी बहुत बढ़िया हैं, कभी मौका मिले तो ज़रूर सुनना।”

   ” ज़रूर सुनेंगे बांसुरी!! हाँ तो राजा भैय्या कौन लड़की है जिसे आप ढूंढ़ रहें हैं?:

   ” मौसमी नाम है ,बॉम्बे में नौकरी करती है, छिटपुट पत्रकार का काम करती है समझ लो!!”

  ” मौसमी शेंडे?” गाड़ी में आगे बैठे दूल्हे ने पीछे पलट कर सवाल किया

  ” हाँ शायद! बांसुरी ने जवाब दिया

  ” अरे उसी की बहन तुलसी से तो हमारा ब्याह होने जा रहा है, अभी वहाँ मंडप में मिल जायेगी आप लोगों को”

   ‘” अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है, बोलो मैं सुबह से सोच सोच के परेशान थी कि अब इस गांव में कहाँ और कैसे मौसमी को ढूँढूँगी, पहले ही आप से बात हो गयी रहती तो समस्या ही खतम हो जाती।”

  ” चलिये अब आप लोग भी बारात का हिस्सा हैं तो उहाँ अन्दर घुसने में भी कोई परेसानी नही होगा।।”

  ” थैंक यू तुलाराम जी”
  एक सुंदर स्मार्ट शहरी लड़की के मुहँ से थैंक यू सुन दूल्हा बना बैठा तुलाराम शरमा कर गुलाबी हो गया, राजा ने बांसुरी की तरफ देखा उसकी मुस्कुराती आंखें देख वो भी आश्वस्त हो गया ।।

   प्रिंस की टोली के आठ दस लड़के ढोल दमामों के साथ बजते हुए गानों पर अपना नागिन डांस करते तरह तरह से उस बारात की एकमात्र महिला सहयात्री  को रिझाने का भरसक प्रायस करते रहे, पर राजा के साम्ने किसी की भी प्रत्यक्ष रूप से कोई प्रयास करने की हिम्मत नही थी…..
    गाने के बोलों पर थिरकते लड़के बीच बीच में तिरछी नज़र से बांसुरी को ताड़ लेते थे, जिन्हें राजा भी देख रहा था और जान बूझ कर अनदेखा कर रहा था, और इन सब बातों से अनभिज्ञ बांसुरी अपने फ़ोन पर अपनी माँ और दीदी को अपने किसी शादी में व्यस्त होने की जानकारी देने में व्यस्त थी …..
    गाने के बोल हवा में चारों ओर गूँज रहे थे___

   ” दुलहन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा
    मेरा इन्तजार करना, बारात लेकर आऊंगा।।”

  क्रमशः

aparna…
    

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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