जीवनसाथी -14

जीवन साथी–14

   कानपुर से आयी रन्गीली सजीली बारात आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 9 के सामने खड़ी थी, दूल्हे के फूफा ने विशेष रूप से दूल्हे के कान में मंत्र फूंक रखा था ,” चाहे तोहार लम्पट दोस्त यार कतना भी बुला ले तुम अगर नाचने के लिये गाड़ी से उतरे वहीं तुम्हरी टांग तोड़ देंगे”
   
   धमकी से डरा सहमा बैठा दूल्हा सीधे परछन के वक्त ही गाड़ी से नीचे उतरा, पर उसके उतरने से पहले ही राजा और बांसुरी की शानदार जोड़ी उतर चुकी थी, घरातियों में सजी संवरी खड़ी लड़कियाँ जो दूल्हे का रास्ता देख रहीं थी अब किसी की नज़र राजा से हट ही नही पा रही थी, उन्हीं लड़कियों में से एक कमज़ोर सी लड़की जब आगे बढ़ कर तिलक करने आयी तो दूल्हे ने बांसुरी को चुपके से इशारा कर दिया….

    द्वारचार निपटते में ही बांसुरी धीरे से मौसमी के पीछे हो ली, इधर दूल्हे और उसके साथियों को लड़कियाँ घेर घार कर बैठ गयी, अभी दुलहन की गणेश पूजा हो रही थी उसके बाद ही जयमाल प्रस्तावित था, तब तक में लड़कियाँ किसी ना किसी बहाने से राजा से बात करने चली आ रही थी..
..
   बारातियों का नाश्ता निपट चुका था, सभी इधर उधर की बातों में लगे थे कि प्रिंस ने फिर राजा को देख एक सवाल उछाल दिया__

   ” गुरू तुम आजकल के लड़कों की तरह मोबाइल से ज्यादा चिपक नही रहे, कोनो खास तकलीफ!! मोबाइल तो तुम्हरा भी तुम्हरे जैसा स्मार्ट  ही होगा ना??

  ” फ़ोन तो स्मार्ट है प्रिंस लेकिन लोग ओवर स्मार्ट हैं, किससे बात करुँ फ़ोन पर?, मैं तो ज्यादातर फोन बन्द ही रखता हूँ ।”

” ऊ तो हम जभी समझ गये थे जब तुमने अपना नम्बर दिया और हम डायल किये और तुम्हरा नम्बर बन्द बता रहा था”

  “समझदारी में तो गब्बर हो तुम प्रिंस”

  ” अरे काहे मज़ाक उड़ा रहें भैय्या जी, ऊ हमरे बड़के भैय्या भी कहतें है माता सरसती का बरदान हैं हम पर , इसलिये कहतें हैं की कम बोला करो प्रिंस तुम्हरी जबान मा सरसती माता का वास है जो बोलोगे झट हो जायेगा।”

   ” अरे जहां मुहँ खोलते हैं ना वहीं साला चरस बो आते  हैं इसिलिये बड़के भैय्या ज्यादा बोलने बतियाने मना करतें हैं”   प्रिंस के गुर्गे ने धीरे से अपनी फुलझड़ी छोड़ दी , तभी कुछ दो चार गाती गुनगुनाती हरी भरी खेतों सी लहराती लड़कियाँ वहाँ मिठाई की तशतरी संभाले चली आयीं __
    ” अब इन मिठाइयों के बदले में गाना सुनाना पड़ेगा आपको” एक ने बड़ी  अदा से राजा को देखा

  राजा ने बांसुरी की तरफ देखा वह कुछ दूर बैठी मौसमी से कुछ बातचीत में तल्लीन थी, हालांकि बीच-बीच में वह भी राजा की तरफ नजर डाल ले रही थी राजा ने वापस उस लड़की को देखा और बोला

   “चलो ठीक है कुछ आपके ही सम्मान में सुना देता  हूं।”

       आज मैं तुझसे दूर सही और
         तू मुझसे अन्जान सही …
       तेरा साथ नहीं पाऊं तो
खैर तेरा अरमान सही …

ये अरमान हैं शोर नहीं हो, खामोशी के मेले हों
इस दुनिया में कोई नहीं हो, हम दोनो ही अकेलेहों

तेरे सपने देख रहा हूँ, और मेरा अब काम है क्या  सागर जैसी आँखों वाली,ये तो बता तेरा नाम है क्या…

     कुछ देर मौसमी से बात करने के बाद बांसुरी वहां से उठकर वापस राजा के पास चली आई लेकिन मौसमी से मिलने वाला उत्साह उससे मिलकर आने के बाद बांसुरी के चेहरे से गायब था राजा ने उसे परेशान देखकर इशारे में ही पुछा__क्या हुआ?  कुछ नहीं हुआ सब कुछ ठीक है का इशारा करके बांसुरी उसके पास चुपचाप बैठ गई……

    ” का बात हुई गयी, भौजाई कुछ नाराज़ लग रही?”

   प्रिंस के ना चाहते हुए भी उसके मुहँ से बारबार बांसुरी के लिये भाभी शब्द निकल रहा था, राजा ने अबकी बार प्रिंस को घूर कर देखा और वापस बांसुरी की तरफ हो लिया__

” अब का करे, जान के थोड़े ना बोल रहे आप दोनों की जोड़ी है ही ऐसी”

  ” अब चुप करोगे तो मैं उससे पूछूँ आखिर बात क्या हो गयी”

  ” हाँ बिल्कुल पूछ डारो बल्कि हम तो कहतें हैं हियाँ पास में एक झरना तालाब भी है, चाहो तो बांसुरीया को लिये हुआं घूम आओ, ई लो चाबी हमरी गाड़ी की, चले जाओगे ना कि हम चलें साथ में।”

  ”  बांसुरी यहाँ पास में कोई झरना है चलोगी घूमने?”

बांसुरी ने राजा की तरफ थोड़ी नाराजगी से देखा_” क्यों चलूँ, उसे लेकर जाओ जिसे गाना सुना रहे थे”

” अरे मैं किसे गाना सुना रहा था?”

  ” अब ज्यादा बनो मत, मैं वहाँ दूर बैठी थी इसका ये मतलब नही कि मैं अंधी बहरी हो गयी थी…

  ” ओह्हो तो इस बात की नाराज़गी है, सुनो मैं जाकर गाड़ी ऑन कर रहा हूँ, तुम्हारे पास पांच मिनट हैं आना है तो आकर बैठ जाना वर्ना यहाँ सप्तपदी अटैंड कर लो, फ्यूचर में तुम्हारे काम आयेगी।”
   राजा अपनी बात पूरी कर वहाँ से उठ कर बाहर चला गया, बांसुरी ने उसके जाने के बाद प्रिंस को देखा__
      ”  एक नंबर का सनकी है तुम्हारा दोस्त, जितना इसका नाम अजीब है उससे ज्यादा यह खुद अजीब है।”

   प्रिंस ने मुस्कुराकर बांसुरी को बाहर जाने का इशारा कर दिया।

   कुछ देर बाद राजा और बांसुरी झरने पर पहुंच चुके थे।
    झरने के किनारे लगे बड़े बड़े काले पत्थरों पर दोनों  वहां से बहते पानी में अपने पैर डुबोए बैठे थे…..

  ” अब बताओ क्यों घूर रहे थे उस लड़की को?”

  ” अरे मैं किसी लड़की को नही घूर रहा था , सच !! विश्वास करो मुझपे, मैं झूठ नही बोलता!!, तुम बताओ मौसमी से क्या बात हुई तुम्हारी?”

  ” तुम्हें बहुत चिंता हो रही मौसमी की?”

” हाँ तो क्यों नही होगी? हम उसिसे तो मिलने आये हैं बांसुरी मैडम, आप क्या भूल गईं, वैसे अगर इसी तरह तुम अपनी शादी के ख्यालों में खोयी रहोगी तो हो चुका तुमसे काम धाम?”

” वन मिनट मिस्टर!! तुमसे किसने कह दिया कि मै मेरी शादी के ख्यालों में खोयी हूँ, उल्टा मैंने तो भास्कर को ठीक ठीक बताया भी नही कि मैं यहाँ आ रही हूँ ।”

  ” सही किया, वर्ना वो अपना काम धाम छोड़ तुम्हारे साथ आ जाता।”

  ” नही, बल्कि वो मुझे भी यहां आने नही देते ।”

” पर अगर मैं भास्कर की जगह होता तो…..”

  ” तुम भास्कर की जगह होते तो बात ही क्या होती?”

  यह वाक्य बांसुरी ने इतने धीरे से कहा कि राजा सुन नहीं पाया__” क्या कहा तुमने बांसुरी?”

  ” कुछ नहीं, मैंने कुछ नहीं कहा, बल्कि तुमसे पूछ रही हूं कि तुम अगर भास्कर की जगह होते तो क्या करते ?”

  ” जानना चाहती हो अगर मैं भास्कर की जगह होता तो क्या करता ?”

  ” हाँ बिल्कुल!”

” अगर मैं भास्कर की जगह होता तो सबसे पहले तो सगाई और शादी के बीच इतना गैप नहीं करता!! “चट मंगनी पट ब्याह” कर लेता तुमसे!! दूसरी बात शादी के बाद एक पल के लिए भी तुम्हें अकेला नहीं छोड़ता…. तुम जहां जाती हर जगह तुम्हारे पीछे-पीछे तुम्हारा नौकर बन कर घूमता तुम्हारा पर्स उठाएं समझी….

  ” बहुत किस्मत वाली होगी तुम्हारी बीवी “

  ” चलो अब यह सब फालतू की बातें बहुत हो गई यह बताओ कि मौसमी से क्या बात हुई तुम्हारी कुछ काम का मैसेज हाथ लगा या नहीं?”

  ” हां बहुत कुछ पता चला है समझ नहीं आ रहा यह मेरे काम का है या नहीं ??और समझ में भी नहीं आ रहा कि तुम्हें कैसे बताऊं?? मौसमी ने मुझे रात में एक बार फिर से बुलाया है कुछ प्रूफ दिखाने के लिए उसके बाद ही मुझे विश्वास होगा कि मौसमी सही कह रही है या गलत क्योंकि उसने जिस पर इल्जाम लगाए हैं मैं कभी सोच भी नहीं सकती कि वह आदमी ऐसा कर सकता है।”

  ” क्या बात कर रही हो, आखिर ऐसा क्या बताया मौसमी ने?”

  ” मौसमी का घर और परिवार तो देख ही चुके हो वह एक बहुत साधारण मध्यमवर्गीय परिवार की एंबिशियस लड़की है बचपन से पढ़ने में बहुत अच्छी थी इसलिए स्कॉलरशिप लेकर पढ़ती रही, सच्चाई लिखने और सच की खोज करने के जूनून ने उसे पत्रकारिता की ओर आकर्षित किया, पत्रकार बनने के उद्देश्य से वह मुंबई गई और उसने मास कम्युनिकेशन में डिग्री लेने के बाद जर्नलिज्म और पब्लिक रिलेशन में डिप्लोमा भी मुम्बई से ही किया…..
     अपने डिप्लोमा कोर्स के समय ही ‘ नया दिन’ के एडिटर से मौसमी का मिलना हुआ किसी कॉलेज फंक्शन के दौरान, और मौसमी की लिखी स्पीच से प्रभावित होकर उन्होंने उसे अपने यहां इंटर्न की जॉब पर रख लिया, सब कुछ ठीक ही चल रहा था मौसमी जी जान से अपनी इंटर्नशिप पूरी कर रही थी उसे जहां से जो चटकीली खबर मिलती वह लाकर अपने ऊपर काम करने वाली अपनी बॉस सुरेखा को देती……
     कुछ समय तक सब सही चलता रहा मौसमी की इंटर्नशिप पूरी होते ही उसे उसकी कर्तव्यनिष्ठा और लेखन पटुता देखकर वही नौकरी दे दी गई।
   अब वह वहां की इंटरनी नहीं बल्कि एंप्लॉय थी,  अब भी उसे सुरेखा जी को ही रिपोर्ट करना होता था लेकिन काफी चीजें ऐसी होती थी ऑफिस में जिनमें मौसमी को सुरेखा जी पर कुछ शक सा होने लगा था हालांकि इस बारे में वह कभी किसी और से बात नहीं कर पाई।
    फिर एक दिन की बात है मौसमी अपना कोई जरूरी आर्टिकल लिख रही थी , वैसे तो अधिकतर स्टाफ शाम 8:00 बजे तक चला जाता था 8:00 बजे के बाद वहां प्रिंटिंग से जुड़े लोग ही ऑफिस में हुआ करते थे जिनकी नाइट शिफ्ट हुआ करती थी सुरेखा जी अक्सर 6:00 बजे तक निकल जाया करती थी, पर उस दिन उन्हें भी किसी काम से वहां रुकना पड़ गया….

मौसमी जब ऑफिस से निकल रही थी उसी समय सुरेखा जी ने भी टैक्सी पकड़ी, रात हो चुकी थी मौसमी का फ्लैट भी दूर था और सुरेखा जी का घर भी मौसमी के फ्लैट की तरफ़  ही पड़ता था, इसलिए उसने मौसमी जी से बहुत रिक्वेस्ट कर टैक्सी शेयरिंग की बात की और उनके साथ बैठ गई।।
      कुछ देर बाद उसने नोटिस किया कि सुरेखा जी लगातार फोन पर किसी को मैसेज भेज रही हैं और बहुत परेशान हैं, असल में उसी दिन उनके ऑफिस में भी एक बहुत कॉन्फिडेंशियल न्यूज़ को प्रूफ रीडिंग के बाद तैयार किया गया था छापने के लिए।।
     मौसमी के अलावा तीन लोगों ने मिलकर उस न्यूज़ पर काम किया था और उस कॉन्फिडेंशियल ड्राफ्ट को उसने सुरेखा जी को थमा दिया था……
  मौसमी को सुरेखा जी का इस तरह मोबाइल में उलझे रहना कुछ खटकने लगा उसने धीरे से मोबाइल में देखने की कोशिश की तो उसे लगा जैसे मौसमी जी किसी को कुछ बड़ी फाइल्स मेल कर रही हैं और यह काम करने में वह बहुत हड़बड़ा भी रही हैं और घबरा भी रही हैं।
          मौसमी ने बिना कोई देर किए उनके हाथ से मोबाइल छीन लिया, सुरेखा जी कुछ समझ पाती  उसके पहले ही मौसमी ने वह मेल पढ़ लिया वह समझ गई कि जो कॉन्फिडेंशियल न्यूज़ आज उनके अखबार में छप कर कल रिलीज होने वाली थी, उसे उन्होंने किसी और अखबार को बेच दिया है।
      यह समझ में आते ही वह उन पर बिफर पड़ी पर सुरेखा जी बहुत घाघ औरत थी उन्होंने मौसमी को प्यार से समझाया शांत किया और उसे अपने साथ लेकर अपने फ्लैट पर चली गई, वहां पहुंचकर बैठकर उन्होंने उसे हर तरह से समझाने की कोशिश की यहां तक कि उसे रिश्वत भी ऑफर की लेकिन अपने ईमान की पक्की मौसमी ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया, अपनी रेपुटेशन और इमेज का हवाला देकर और बहुत रोकर गिड़गिड़ा कर आखिर सुरेखा जी ने मौसमी से माफी मांग ली, उसके सामने ही उन्होंने वो फाइल भी अपने मोबाईल से डिलीट कर दी, और अच्छी तरह से मौसमी को अपने भरोसे में लेकर वापस उसके घर छोड़ दिया।।
   उसके अगले दिन वह खबर जो मौसमी के अखबार में छपनी थी वो बिना किसी कांट छाँट के जैसे मौसमी ने तैयार की थी वैसी ही छप गयी, इससे मौसमी थोड़ी रिलैक्स तो हुई लेकिन अब भी उसे सुरेखा जी पर पूरा विश्वास नही हुआ था….
      इसके कुछ रोज़ बाद ऑफिस की ही एक सक्सेस पार्टी थी जिसमें एडिटर साहब जो मौसमी को बहुत मानते थे के बहुत ज़ोर देने पर वो भी पार्टी में चली गयी।
   पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी, सभी तरफ ड्रिंक्स का दौर चल रहा था, हालांकि मौसमी अपनी एक दोस्त के साथ किनारे खड़ी अपने किसी ड्राफ्ट की चर्चा में लीन थी तभी उसने सुरेखा को बाहर जाते देखा, वापस किसी शक के तहत वो उसके पीछे गयी तो देखा सुरेखा बाहर किसी आदमी को कोई पार्सल दे रही है, हो सकता था कि वो सुरेखा का कोई पर्सनल सामान रहा हो पर जब एक बार किसी पर भरोसा टूट जाता है तब उस आदमी पर दुबारा विश्वास करना बहुत मुश्किल हो जाता है, मौसमी जब तक वहाँ से मुड़ कर जाती सुरेखा ने उसे देख लिया….
    क्या करुँ क्या ना करुँ की उलझन में फंसी मौसमी ने सब कुछ एडिटर साहब को बताने की सोची और उनके पास पहुंच गयी, पार्टी में बड़े बड़े मेहमानों से घिरे एडिटर साहब के पास मौसमी की बात सुनने के लिये कोई माकूल जगह नही थी, तो वो उसे पार्टी के लिये बुक किये हॉल के साथ मिले कोम्प्लीमंट्री रुम में बात करने ले गये।
     वहां मौसमी ने शुरू से लेकर आखिर तक की सारी बातें एडिटर साहब को बता दी उसी समय वेटर दो ग्लास में जूस लेकर आया एडिटर साहब खुद सुरेखा की इस कारगुजारी से आश्चर्यचकित थे उन्हें बिलकुल विश्वास नहीं था कि उनकी इतनी अनुभवी एंप्लॉय उनके साथ ऐसी बेईमानी कर सकती है मौसमी से बातें करते हुए उन्होंने और मौसमी ने जूस पी लिया इसके कुछ देर बाद मौसमी का सिर चकराने लगा और वह वहीं सोफे पर लुढ़क गई”

  ” फिर ? फिर क्या हुआ?? “

  राजा बहुत ध्यान से बारीकी से बांसुरी की बात सुन रहा था,

  “ये सीन काफी फिल्मी नही लग रहा तुम्हें?”

  ” मेरे लगने ना लगने से क्या होता है? आखिर फिल्में असल ज़िदगी का ही तो आईना होतीं हैं ना, थोड़ा ड्रामा तो है लेकिन पॉसिबल है ऐसा होना, कॉर्पोरेट सेक्टर में आज इतनी गलाकाट स्पर्धा है कि लोग किसी भी हद तक नीचे गिर सकतें हैं….. फिर आगे क्या हुआ?”

  ” फिर आगे वही हुआ, बेहोश मौसमी को जब होश आया तब वो उसी कमरे में बैड के नीचे पड़ी थी, बैड पर उसके बॉस एडिटर साहब पड़े थे, उसे जब तक कुछ समझ आता उसका फ़ोन बजने लगा, देखा तो सुरेखा जी का कॉल था उसने फ़ोन उठाया और उनकी आवाज सुनते ही उसे रोना आने लगा, उन्होने उसे सांत्वना दी और पूछा की वो कहाँ है? उसके बताते ही दस मिनट में सुरेखा वहाँ पहुंच गयी। जैसे ही मौसमी ने दरवाज़ा खोला उसने अन्दर आकर एडिटर साहब को देखा फिर मौसमी को__” ये सब क्या है मौसमी?तुमसे ये उम्मीद नही थी कि तुम अपने प्रोमोशन के लिये इतना गिर जाओगी?”

   सुरेखा के ऐसा कहते ही मौसमी रोने लगी, उसे बिल्कुल समझ नही आ रहा था कि क्या हो रहा है, तब सुरेखा जी ने आगे बढ़ का उसे ढांधस बन्धाया कि वो ना घबराये उसके साथ एडिटर ने जो ज्यादती की है उसकी सज़ा वो उसे दिलवा कर रहेंगी, एडिटर साहब चिल्ला चिल्ला कर अपनी बेगुनाही की दुहाई देते रहे लेकिन पुलिस के आगे उनकी एक ना चली।
     पुलिस एडिटर साहब को पकड़ कर ले गई और ऑफिस की हेड कर्ताधर्ता सुरेखा जी बन गई।

” लेकिन बांसुरी मौसमी का फिजिकल एग्जामिनेशन भी तो हुआ होगा ना।”

” हां फिजिकल एग्जामिनेशन हुआ और उसमें मौसमी को विक्टिम पाया गया, उसके साथ उस रात रेप होना पाया गया।।”

  ” पर सिर्फ उसका विक्टिम होना ही काफी नही है, ऐक्यूज़्ड कौन है वो जानना भी तो ज़रूरी था , हो सकता है रेप किसी और ने किया हो?”

  ” बिल्कुल !! मौसमी खुद इस कन्फ्युजन में है, अभी सारे सैंपल की रिपोर्ट्स नही आ पायी है, लेकिन ये ऐसा मामला था कि एडिटर साहब को तुरंत जेल में डाल दिया गया है, शुरु में एक नज़र देखने पर मौसमी को भी लगा की एडिटर साहब ने ही कुछ किया है लेकिन…..

“लेकिन क्या?”

” लेकिन इस घटना के दो दिन बाद बहुत हिम्मत जुटा कर जब मौसमी ऑफिस गयी तब उसे सुरेखा जी का बिहेवियर बहुत बदला हुआ सा लगा, रेप की घटना के समय जो नारी सशक्तीकरण की ओट में सारा वक्त मौसमी को सपोर्ट करती दिख रहीं थी उन्होंने अचानक दो दिन बाद ही तेवर दिखाने शुरु कर दिये, मौसमी से उसका कॉलम छीन लिया और उसकी जगह उसे कुछ मामूली ड्राफ्ट सुधार करवाने का काम दे दिया, मौसमी को जाने क्यों ऐसा लगने लगा की उसकी आड़ लेकर सुरेखा जी ने एडिटर का पत्ता काटा है, लेकिन मौसमी ये नही समझ पा रही थी कि इस सब में सुरेखा का साथ कौन दे रहा है।”

  ” कौन साथ दे रहा था सुरेखा का?”

  ” मौसमी को अगले दो दिन में ही ये भी पता चल गया कि इस सारे षड्यंत्र में सुरेखा के साथ कौन है, लेकिन वो ये बात पुलिस तक बताने जाती इसके पहले ही उसे एक विडियो क्लिप किसी अनजाने नम्बर से आयी जिसमें उस रात का विडियो था लेकिन चेहरा उतना साफ़ नही था, पहले से परेशान मौसमी इस बात से और परेशान हो गयी, उस नम्बर पर फोन करने पर वो लगातार बन्द आ रहा था , आखिर अपने आप से हार कर मौसमी तीन दिन की छुट्टी लेकर घर चली आयी, उसे लगा यहाँ आकर परिवार वालों के साथ उसकी आत्मा को राहत मिलेगी और अपनी ताकत वापस जुटा कर वो फिर उन लोगों से लड़ने जायेगी।”

  ” पर मौसमी तो अभी बिना पुलिस पर्मिशन के शहर छोड़ कर नही जा सकती, फिर यहाँ कैसे आयी।”

  ” वो बहुत थक गयी थी राजा, उसकी तकलीफ मैं समझ सकती हूँ आखिर औरत हुँ ना!! किसी भी परेशानी में सिर्फ अपनों के पास ही राहत और सुकून मिलता है, तुम जानते हो वो कौन था जिसने सुरेखा के साथ मिल कर ये सब……

    बांसुरी अपनी बात पूरी कर ही रही थी की फ़ोन की घंटी बजने लगी, बांसुरी ने राजा की तरफ देखा, उसने फ़ोन जल्दी उठाने का इशारा किया और वापस झरने की तरफ देखने लगा__

  ” कसम खा रखी है ना तुमने अपनी मन मर्ज़ी करने की।”

” नही भास्कर वो बात ये है की…..

  ” मुझे नही सुननी तुम्हारी कोई बात, तुम मुझसे बिना बोले बताये मुम्बई से बाहर निकलीं कैसे?”

  ” मतलब !! कहना क्या चाहते हो तुम?

  “ये कहना चाहता हूँ कि मेरी होने वाली बीवी हो, मेरे हिसाब से ही अब तुम्हें रहना है, मैं तो पहले ही तुम्हें अपने बारे में सब बता चुका हूँ, फिर तुम क्यों ऐसी हरकतें करती हो कि मुझे गुस्सा आ जाये।”

  ” ये क्या तरीका है बात करने का भास्कर?”

  ” अगर चाहती हो कि मैं तरीके से बात करुँ तो तुम भी तरीके वाले काम किया करो ना, उसे सड़े से केस के पीछे तुम उस लड़की के गांव तक पहुंच गयी, ये पागलपन नही तो और क्या है बांसुरी?”

  ” यही बात प्यार से भी तो कही जा सकती है।”

  ” प्यार से बात करने लायक काम नही किया तुमने, अभी के अभी वहाँ से निकल कर वापस आओ”

  ” अभी इतनी रात में….?

” हाँ क्यों? जब अकेले जाने में डर नही लगा तो अब डर क्यों लग रहा है, प्राईवेट टैक्सी लो उसका नम्बर मुझे मेसेज करो, टैक्सी वाले का नम्बर भी मुझे मेसेज करो और गाड़ी में बैठते ही अपना जी पी एस ऑन कर लेना मैं तुम्हें यहां से ट्रैक करता रहूँगा।”

” पर भास्कर…..”

  ” अब मुझसे बात करना सीधे टैक्सी में बैठने के बाद”

बांसुरी ने संकोच से राजा की तरफ देखा, भास्कर से इतनी सारी डांट सुन कर वो शर्मिंदा थी क्योंकि भास्कर जैसे तार सप्तक में उसे डांट लगा रहा था, एकदम करीब बैठे राजा के कुछ ना सुन पाने की संभावना ही नही थी।
       राजा ने बांसुरी को देखा, और मुस्कुराते हुए ज़ोर का कहकहा लगा उठा उसे इतनी ज़ोर से हँसते देख बांसुरी भी हँसने लगी, और दोनो हँसते हुए वहाँ से उठा खड़े हुए।

  ” तो टैक्सी बुक कर ली जाये मैडम, वर्ना आपके वो नाराज़ हो जायेंगे!”

  हाँ मे सिर हिला कर बांसुरी आगे बढ़ गयी, राजा ने झुक कर उस छोटे से पत्थर को जिसे इतनी देर से उछालते हुए बांसुरी सारी कहानी कह रही थी और भास्कर का फोन आते ही हड़बड़ा कर नीचे फेंक दी को उठा कर अपनी जेब के हवाले किया और उसके पीछे पीछे  उन बड़े बड़े पत्थरों से नीचे उतर गया।।

क्रमशः

aparna.

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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