जीवनसाथी- 15

जीवनसाथी – 15

  कुछ ही देर में राजा और बांसुरी वापस विवाह स्थल पर पहुंच चुके थे….
   
  ” मैं एक बार मौसमी से मिल कर आती हूँ, फिर निकलतें हैं।”

  राजा ने बांसुरी की बात पर हाँ में सिर हिलाया और प्रिंस से विदा लेने चल पड़ा __

” अरे ई का बोल रहें हैं भैय्या जी, आप इत्ता जल्दी चले जायेंगे, ऐसे कैसे?”

” जाना होगा प्रिंस, लेकिन हम जल्दी ही मिलेंगे।”

  ” राजा भैय्या !! मत जाइये हमको छोड़ के या हमें भी संगे ले चलिये।”
    प्रिंस की भोली सी बात सुन राजा मुस्कुराने लगा

” अभी तो मैं खुद इनके यहाँ मेहमान हूँ, वो भी कुछ दो चार दिनों का , एक बार अपनी दुनिया में लौट जाऊँ फिर तुम्हारे कानपुर आऊंगा और तुम्हें अपने साथ ले जाऊंगा, चलोगे ना मेरे साथ?”

” ई वैसने भी अपन घर के लाने पनौती हैं आप ले जायेंगे तो इनका घर वाले खुस ही होंगे”

   प्रिंस के चेले की बात पर राजा ज़ोर से हँसने लगा__” ये अपने घर का लाड़ला है ये तो मैं समझ गया हूँ और जल्दी ही कोशिश कर के इसे अपने साथ ले भी जाऊँगा ।”

” अभी से कहाँ जाने की बात होने लगी, बारात तो कल सुबह विदा होगी ना?”
  वही लड़की जो इतनी देर से राजा के आगे पीछे घूम रही थी , वहाँ धम्म से प्रकट हुई, उसके सवाल पर राजा ने उसे देखा और मुस्कुरा दिया__

  ” एक ना एक दिन तो हर किसी को जाना ही है “

  ” जाना तो है, लेकिन इतनी भी क्या जल्दी है?”

  इस बार उस कन्या की बात का जवाब दिया प्रिंस ने

” जल्दी इन्हें नही उन्हें है।” और बांसुरी की तरफ इशारा कर दिया

  उस लड़की ने मुड़ कर बांसुरी को देखा और फिर राजा को घूरते हुए उससे पूछ ही लिया__” बहन है तुम्हारी?”

  राजा ने उसे देख मुस्कुराते हुए जवाब दिया__

  ” गर्लफ्रेंड है।” और हँसते हुए वहाँ से बांसुरी की तरफ चल दिया

  ” हम तो पहले ही जानते रहे, जोड़ी देख कर ही समझ आ जाता है, ऐसा झन्नाट जोड़ी है बिल्कुल जैसे हीरो हिरोइन।”
  प्रिंस भी चुटकी लेता राजा के पीछे हो लिया

  मौसमी से बातचीत कर बांसुरी और राजा टैक्सी में बैठ गये, निकलने से पहले बांसुरी मौसमी के गले से लग कर उसे ढाँढस बंधा आयी, उस कमज़ोर उदास सी लड़की को देख वो उसके दुख से खुद भी बहुत दुखी हो गयी थी, राजा ने उसे चुपचाप देख कर टैक्सी वाले से कोई गीत चलाने की फ़रमाइश की और बांसुरी को देखने लगा, वो खुद में खोयी बाहर देख रही थी__

        देख लो हमको करीब से
      आज हम मिले हैं नसीब से
           ये पल फिर कहाँ
      और ये मंज़िल फिर कहाँ
     .ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
      ये दीवानापन, देखो ज़रा
    तुम हो अकेले, हम भी अकेले
       मज़ा आ रहा है, क़सम से…….
    

   गाने से सुर ताल मिलाता राजा भी साथ ही गुनगुनाने लगा, उसे गुनगुनाते सुन बांसुरी ने उसकी तरफ देखा__

  ” देख रहीं हूँ जबसे उससे मिल कर आये हो कुछ ज्यादा ही गाना बजाना हो रहा है।”

” तो क्या करुँ? तुम तो उदास बैठी हो , भई समय काटने के लिये गाना गुनगुनाना तो पड़ेगा ही ना? अरे हाँ  तुमने जी पी एस ऑन कर लिया ना वर्ना एक बार फिर भास्कर साहब नाराज़ हो जायेंगे।”

बांसुरी ने झट पर्स से मोबाइल निकाला और भास्कर को कॉल लगाने लगी, उससे बात कर जी पी एस ऑन कर निश्चिंत होकर राजा की तरफ देख मुस्कुराने लगी__

  ” एक बात कहना चाहती हूँ तुमसे।”

” हाँ कहो ना?”

” थैंक यू बहुत छोटा शब्द है, जितनी हेल्प तुमने मेरी की है उसके लिये, लेकिन फिर भी थैंक यू राजकुमार अजातशत्रु जी”

राजा बांसुरी की बात सुन हँसने लगा__
 
” जब पता है कि छोटा शब्द है तो कह क्यों रही हो, मेरी पर्सनैलिटी पर इतना छोटा थैंक यू सूट नही करता।”
    राजा को हँसते देख बांसुरी भी मुस्कुराने लगी__

” राजा कोई अच्छा सा सॉन्ग सुनाओ ना?”

“ओके!!  सफर पर ही सुनाता हूँ, पर तुम्हें भी साथ देना पड़ेगा।”

     धीरे चलना है मुश्किल तो जल्दी ही सही
       आँखों के किनारों में बहाने ही सही
      हम चले बहारों में, गुनगुनाती राहों में
         धड़कने भी तेज़ हैं, अब क्या करे

     वक़्त है तो जीने दे, दर्द है तो सीने दे
        ख्वाहिशें अंजान है, अब क्या करें

     शब्दों के पहाड़ों पे लिखी है दास्तां
         ख़्वाबों के लिफाफों में छुपा है रास्ता

     हम चले बहार में, गुनगुनाती राहों में
        धड़कने भी तेज़ है, अब क्या करे……

” मैं इसका बंगाली हिस्सा गाऊँ?”

” हाँ अगर तुम्हें आता है तो बिल्कुल गाओ…..

       ओ आकाश, ओ पौलाश, राशी राशी
            एक्टू शोबुझे, चोख मुछिये दे
                 घौर छाड़ा मानुषेर मोने
              ओ जिया, ओ गुज़रते नज़ारे
               रंग उड़ाने दे, हम नशे में हैं
                भूल गए सवालों को सारे

” गज़ब का गाती हो बांसुरी!! रखने वाले ने बहुत सोच कर नाम रखा है तुम्हारा– बांसुरी!! एकदम मीठी , मधुर , गुनगुनाती हुई”

  ” पर तुम्हारा नाम रखने वाले ने बिल्कुल नहीं सोचा।। बताओ यह भी कोई नाम होता है? अजातशत्रु!!     इसका मतलब क्या होता है राजा?”

” इसका दो तरह से मतलब निकाल सकती हो एक जिसका कोई शत्रु जिंदा ना बचा हो “अजातशत्रु” और दूसरा अर्थ होता है जिसका कोई शत्रु पैदा ही ना हुआ हो अजातशत्रु !!लेकिन एक मजे की बात बताऊं इस दुनिया में मेरे दोस्त से ज्यादा शत्रु ही भरे पड़े हैं।।”

” क्यों ? ऐसा क्यों कह रहे?”

” कभी बताऊंगा फुरसत में, अरे अभी तुम बताओ , वो मौसमी वाली बात अधुरी रह गयी थी ना?”

” हाँ देखो मैं भूल ही गयी थी, तुम्हारे साथ रहो ना तो सारी काम की बातें दिमाग से उड़ जाती है, सारी फिक्र सारी चिंताएं सब कुछ”

” ओहो क्या बात है? चलो बताओ आगे का किस्सा!”

” मौसमी ने आगे जो बताया वो ये है कि उसने दोबारा ऑफिस ज्वाइन कर तो लिया लेकिन उसे उसके महत्वपूर्ण पद से सुरेखा जी ने हटा दिया था और उसे बहुत ही गैर जरूरी काम सौंप दिया, फिर भी वह अपने काम करती रही पर कहते हैं ना अगर किसी औरत का एक बार रेप हो जाए तो रेपिस्ट तो एक बार रेप करके चला जाता है लेकिन ये दुनिया ये समाज वाले बार बार अपनी आंखों से घूर घूर कर विक्टिम का रेप करते हैं, कभी उस पर एहसान कर के तो कभी तरस खा कर बार बार उसे इस बात का एहसास दिलाया जाता है कि तुम खराब हो चुकी हो समाज के लिये, तुम फ्रूट बास्केट में रखा वो सड़ा हुआ फल हो जिसकी बू से आसपास के फल भी सड़ सकतें हैं।
   बार बार विक्टिम को ये महसूस करवाना की रेप करने वाला तो गुनाहगार था पर कुछ तो कमी तुम्हारी भी रही होगी सही है क्या??”
   पता नही समाज के लोग क्यों एक रेप विक्टिम को साधारण जिन्दगी जीने नही देते, मौसमी के साथ भी यही हो रहा था, ज्यादातर लोग तो उससे कटने लगे जो इक्का दुक्का लोग बात करते भी थे वो भी उस पर तरस खाते होते ऐसे में उसने अपने आप को सबसे अलग काट लिया, अकेले ऑफिस जाना अकेले ही अपने काम में डूबे रहना और वैसे ही वापस लौट आना इसी सब में मौसमी की जिन्दगी धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी, पर तभी एक दिन उसने सुरेखा को किसी से फ़ोन पर बात करते हुए सुन लिया , उसे उनकी बातें सुनकर यह समझ आ गया कि उसे और एडिटर साहब को फंसाया गया है ,उनके उस दिन के जूस में कुछ तो मिलाया गया था जिसे पीकर एडिटर साहब भी उसके साथ बेहोश हो चुके थे मौसमी परेशान हो गई क्योंकि उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि फिर उसके साथ गलत किया किसने??
   खैर सुरेखा की बात सुनकर उसे यह भी समझ आ गया कि सुरेखा इस काम में अकेले नहीं है उसका कोई ना कोई साथ दे रहा है ,अब यह जानने के लिए कि सुरेखा किस से बात कर रही थी ?उसे सुरेखा का फोन चाहिए था, बड़ी मुश्किल से उसी शाम ऑफिस में जब सुरेखा फोन रखने के बाद वॉशरूम की ओर गई तब जल्दी से जाकर मौसमी ने उसके फोन को चेक किया, उसने एक बार बहुत पहले सुरेखा को अपने फोन का पैटर्न लॉक करते देखा था भगवान का शुक्र था कि वह पैटर्न मौसमी को याद रह गया था उसने फोन खोला सबसे पहले डायल नंबर को देखा और वह चौंक  गई क्योंकि यह नंबर तो उसके फोन पर भी था वह अच्छे से इस नंबर को जानती थी उसने फोन को वापस रख दिया और बाहर चली गई अपने फोन पर उसने उस नंबर को ढूंढा वह नंबर और किसी का नहीं हमारे न्यूज़ पेपर के एडिटर साहब का था।”

” क्या ? मतलब तुम्हारे बॉस इस सब में इन्वॉलव्ड हैं?”

” हाँ राजा मेरे बॉस नंदा सर इस सबसे जुडे हैं, भास्कर शायद ये सारा मैटर जानते थे ….”

” ओह्ह इसिलिए भास्कर तुम्हें इस सारे पचड़े से जुड़ने को मना कर रहे थे।”

” हां!! क्योंकि भास्कर नंदा सर के बहुत खास हैं,  इसीलिए शायद भास्कर ने पहले नंदा सर को भी मना किया था मुझे इस केस को देने के लिए लेकिन पता नहीं क्यों नंदा सर ने भास्कर की बात  नहीं मानी और इसलिए फिर भास्कर ने मुझे कहा कि मैं मना कर दूं, लेकिन मैंने भी उसकी बात नहीं मानी, अब तुम बताओ ? मुझे क्या करना चाहिए?”

” बांसुरी, मेरे ख्याल से तुमने अब इस प्रोजेक्ट को हाथ में लिया है तो अपनी पूरी लगन से और मेहनत से इस काम को पूरा करो। मौसमी से तुमने इतनी देर बात भी की है और मौसमी को भरोसा भी दिलाया है अब उसके भरोसे को मत तोड़ो।। वैसे मौसमी क्या चाहती है तुमसे?”

  ” वह तो यही चाहती है कि मैं किसी भी तरीके से सच्चाई को सामने लेकर आऊं!! उसे अब भी भरोसा है कि उसके बॉस ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया है ,अब सारी सच्चाई को सामने लाने के लिए मुझे मेरे बॉस के खिलाफ खड़ा होना पड़ सकता है जिस बात के लिए भास्कर कभी मुझे परमिशन नहीं देंगे।”

  ” हम्म मुश्किल तो है तुम्हारे सामने लेकिन मुझे भरोसा है तुम अपनी बुद्धि से इस मुश्किल को पार कर जाओगी,।”
  राजा ने मुस्कुराकर बांसुरी की तरफ देखा और उसके बाद गाड़ी के ड्राइवर से मुखातिब हुआ

      “भाई मेरे!! आस पास कोई ढ़ाबा हो तो रोकना ज़रा चाय वाय पी जाये, बहुत देर से बैठे बैठे पैर दर्द करने लगे।”

  ” हाऊ साहेब, ये तो पूरा हाइवे है एक से एक ढ़ाबा मिलेगा।”

  तरह-तरह की लाइट से सजे ब्लू मून ढाबे के सामने ड्राइवर ने अपनी गाड़ी रोक दी__

” साहब यहां का वडापाव बहुत फेमस है चिक्की भी अच्छा मिलता है, जो खाना पीना हो खा लो पी लो सब मिलता है, बीयर पन मिलता है भाऊ।”

  राजा ने घूर का ड्राइवर को देखा

  “शक्ल से मैं बीयर पीने वाला लगता हूं तुझे?”

  ” माफ करना भाऊ मज़ाक कर रहा था”

  ” बेटा बियर तो बच्चे पीते हैं हम तो राजा हैं सब कुछ राजसी चलता है, मेरे टेस्ट की यहाँ मिलेगी भी नही।।”

  राजा और ड्राईवर की नोंक झोंक के बीच बांसुरी भी फ्रेश होकर आ गयी__

” अब कुछ खा लिया जाये मैडम! आपके उनके चक्कर में बारात से बिना खाये ही निकलना पड़ा “

बांसुरी ने हंसकर हां कहा और मैन्यू कार्ड देखने लगी।

” सुनो राजा तुम चाहो तो तुम्हारे लिए नॉनवेज मंगवा लो तुम्हें बहुत दिन हो गए ना मेरे हाथ का जला कटा वेज खाते हुए।”

राजा हंसने लगा उसने अपना फोन निकाला फोन ऑन किया और  कोई नंबर डायल करते हुए बाहर चला गया जाते-जाते बांसुरी को कह गया जो वह  खुद के लिए मंगवायेगी वही राजा के लिए भी मंगवा ले।

******

  दिन के उजाले में जो रास्ता तीन साढे 3 घंटे में पूरा हो गया था वह रात के अंधेरे में बढ़कर पांच साढे 5 घंटे का हो गया ,, राजा और बांसुरी जब तक मुंबई पहुंचे सुबह का सुरमई उजाला होने लग गया था सुबह 5:30 पर बांसुरी ने अपने फ्लैट का दरवाजा खोला और वह दोनों अंदर आ गये।

    दोनों अभी अंदर पहुंचे ही थे कि दरवाज़े की बेल बज उठी बांसुरी ने जाकर फ्लैट का दरवाजा खोला सामने पिंकी खड़ी थी, अंदर आकर अपना बैग एक तरफ फेंक कर पिंकी बांसुरी से लिपट गई दोनों सखियां इतने दिन बाद एक दूसरे को देख कर बहुत खुश थीं, बांसुरी से मिलने के बाद पिंकी का ध्यान पास में खड़े अपने भाई पर गया वह कूदकर अपने भाई के पास पहुंच गई और उसके सीने से लग गई__

” आई एम सो सो सॉरी भाई मेरे कारण तुम्हें और बांसुरी को बहुत परेशानी हुई, मैं जानती हूं लेकिन बहुत बुरी फंसी थी मैं ।।
     एक तो जो क्रैश कोर्स करने गई थी वह पूरा नहीं हो पाया था, दूसरा वापस लौटने का सोचा तो फ्लाइट कैंसिल हो गई फिर सोचा 2 दिन रुक कर जा ही रही हूं तो इससे अच्छा 5 दिन रुक कर क्रैश कोर्स कंप्लीट कर लेती हूं इसीलिए मुझे इतना समय लग गया आशा करती हूं मेरे प्यारे से भाई को बन्सी ने ज्यादा सताया नही होगा।”

” अच्छा जी!! क्या मैं सताने वाली लगती हूँ?”

  ” नहीं बिल्कुल नही तुम तो रिझाने वाली लगती हो।”

  पिंकी ने मुड़ कर राजा को देखा, तब तक में बांसुरी रसोई में जा चुकी थी__

” क्या बात है भाई? बांसुरी रिझाने वाली लगती है आपको??”

” अरे राइम करने के चक्कर में कुछ भी बोल जाता हूँ, तू तो जानती है छुटकी”

” जानतीं हूँ इसिलिए तो कह रही, बहुत बार आपकी ज़बान से वही निकल आता है जो आपकी आंखें कहती होती हैं।”

” अच्छा दादी अम्मा! अब जा फ्रेश हो ले मैं भी थक गया हूँ, रात भर सोया नही हूँ “

” क्यों रात भर सोये क्यों नही?” आश्चर्य से पिंकी ने रसोई की तरफ झांक कर देखा फिर वापस राजा को देखने लगी__” इतनी जल्दी आप दोनों की……

” नो प्रिंसेस जैसा आप सोच रहीं वैसा कुछ नही है, लो बांसुरी आ गयी इसी से पूछो मैं क्यों नही सो पाया रात भर”

  ” मैं कैसे बताऊँ, मैं तो आराम से सो गयी थी, तुम क्यों जाग रहे थे तुम जानो?”

  ” मैडम जी तो मेरे कंधो को तकिया बनाये आराम से खर्राटे मार रही थीं  मैं ज़रा भी हिलना चाहूँ तो मुझे नींद में ही डांट पड़ रही  थी अब ऐसे में भला कोई सोये कैसे?”
   राजा की बात सुन बांसुरी झेंप कर रह गयी__

” अरे मेरा सर दुसरी तरफ कर के तुम्हे सो जाना था ना, मेरे कारण सो नही पाये ।”

” पर तुम्हारे खर्राटों का क्या करता, मुझे तो उनके कारण नींद नही आ रही थी।”

” छी मैं कोई खर्राटे नही मारती, ये बिल्कुल झूठ है, मेरी आंखों में देख कर कहो कि मेरे खर्राटों के कारण तुम्हें नींद नही आयी”

   बांसुरी ने राजा के सामने आकर उसकी आंखों में झांकते हुए  कहा__

” मीर उन नीमबाज़ आंखों में सारी मस्ती शराबो सी है।”   राजा के इस शेर को सुन हँसते हुए पिंकी आयी और बांसुरी को दुसरी तरफ ले गयी__

” भाई मज़ाक कर रहें हैं बंसी !! “

  ” वो तो मैं भी जानती हूँ कि ये मज़ाक कर रहें हैं” बांसुरी ने चाय आगे बढ़ कर राजा को पकड़ाई और अपनी चाय लिये पिंकी के पास आकर बैठ गयी।

  ” भाई मज़ाक बहुत हो गया अब बताओ इस बार क्या चक्कर हुआ जो घर से बाहर हो? और ये रायपुर में क्या मैटर हुआ है आपका??”

  ” सब बताता हूँ बाबा तू सांस तो ले ले, बहुत थकान सी है मैं एक राउंड जॉगिन्ग कर के आता हूँ।”

  ” थकान लगने पर सब सोतें हैं और अजातशत्रु जी दौड़ लगाने जातें हैं।”

” भाई ऐसे ही हैं बंसी  बहुत अजीब !! बचपन से ही बिगड़े शहज़ादें हैं घर के, मज़ाल जो इनसे कोई अपनी मर्ज़ी का कुछ करवा ले, बस काकू साहब के सामने भीगी बिल्ली बन जातें हैं, उनके तो ऐसे भक्त हैं की अगर उन्होंने कहा सूरज रात में उगता है तो ये उस बात को भी मान जायें”

” अब मेरी तारीफ आप बन्द करेंगी आप, या मैं जाऊं यहाँ से?”

” जाओ ना आप तो जा ही रहे थे जॉगींग के लिये, हम कहाँ रोक रहे आप को।”

   राजा के बाहर जाते ही पिंकी बांसुरी के पास आकर बैठ गयी,” बंसी एक कप चाय और मिलेगी ? मज़ा आ गया यार इतने दिन बाद तुम्हारे हाथों की चाय पीकर”

  बांसुरी दो कप चाय बना लाई__

” भाई तो अब एक घण्टे से पहले वापस नही आयेंगे, इन्हें दौड़ने का बहुत शौक है।

” हम्म ” छोटा सा जवाब देकर बांसुरी चुप बैठी रही

” बंसी तुम्हें भाई ने अपने बारे में कुछ नही बताया?”

” नही ! कुछ ऐसा खास तो नही बताया, बस अपना स्पेशल नाम बताया, क्यों ऐसा क्या है , कोई राज़ की बात है क्या?”

  ” बहुत कुछ है बंसी , भाई ने बहुत परेशानियां देखीं है बावजूद इसके सिर्फ मुस्कुरातें हैं और हर जगह खुशियाँ बांटने में लगे रहतें हैं जबकि आज तक हर किसी ने इन्हें सिर्फ और सिर्फ धोखा ही दिया है।”

  बांसुरी की आंखों में जाने क्यों पानी भर आया, वो अनजान लड़का जिसके साथ रहते मुश्किल से हफ्ता भर भी नही बीता था के साथ रिश्ता ऐसा हो गया था जैसे दोनों जन्मों से एक दूसरे को जानते हों।

  ” अगर तुम बताना सही समझो तो बता दो पिंकी कि आखिर वो क्या तकलीफ है जो राजा अपने दिल में दबाये है, एक दो बार कुछ इशारा तो दिया लेकिन कभी कुछ खुल के बताया नही।”

” तुम्हे बताने में कैसा संकोच बंसी …..

क्रमशः

aparna…

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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