जीवनसाथी – 17

जीवन साथी -17

  पिंकी ने सवालिया नजरों से राजा की तरफ देखा

  ” भाई सच बताना , आप अब भी गाते हो?”

  ” हाँ छुटकी, कभी कभी गा लेता हूँ, वो देख उधर क्या रखा है?”

  दीवार के सहारे लगी गिटार देख पिंकी की आँखे चमकने लगीं …..

  वो राजा के सीने से एक बार फिर जा लगी और उन दोनों को देख बांसुरी गिटार देख कर ऐसा खुश होने की क्या बात है, इस सोच में डूबी गिटार उठा लाई और राजा के सामने रख दी__” मैं शुरु करतीं हूँ, तुम आगे बढ़ा देना….

       कसमे वादे निभायेंगे हम,
मिलते रहेंगे जनमजनम
तू है मेरे जीने का सहारा,
बरसों पुराना है प्यार हमारा,
       तू है दिया मैं हूँ बाती,
           आजा मेरे जीवनसाथी
      कसमे वादे निभायेंगे हम,
          मिलते रहेंगे जनम जनम……..

  ” वाह कमाल की संगत है, मज़ा आ गया सुन कर, बांसुरी तो खैर जब देखो तब हमें गा गा कर पकाती रहती थी, पता है भाई माला इतनी जल्दी शादी करके क्यों भागी ??इसलिये कि इसका गाना ना सुनना पड़े ।”

  ” अच्छा बच्चू मैं इतना बुरा गाती हूँ?? क्यों राजा क्या तुम्हें भी भागने का मन करता है सुन कर”

  ” मेरा मन तो करता है मैं बस यूँ ही जिंदगी भर गिटार बजाता रहूँ और तुम गाती रहो, खैर ये सब छोड़ो तुम्हारा फोन कहाँ हैं बांसुरी?? देख लो तुम्हारे साहब का कहीं फिर कॉल मिस ना हो गया हो”

  राजा की बात पर पिंकी ने पलटकर बांसुरी को देखा
   “क्यों बांसुरी  तुम भास्कर के फोन उठाती नहीं हो? कॉल मिस हो जाते हैं? ऐसे कैसे चलेगा ?”

  ” हां पिंकी पता नहीं क्या हो गया है आजकल ?फोन तो क्या मैं तो हर चीज भूलने लग गई हूं दो दिन हो गए मम्मी को भी फोन नहीं किया।”

  बांसुरी अपना फोन उठाएं भीतर चली गयी, उसे भास्कर को सारी बातें जो बतानी थी।
      लगभग आधे घण्टे बाद वो अपना सा मुहँ बनाये बाहर आयी और एक कुर्सी खींच कर बैठ गयी, राजा वहीं सोफे पर बैठे लैपटॉप पर अपना कुछ काम कर रहा था, पिंकी नहाने गयी हुई थी, राजा ने बांसुरी को देखा __

” क्या हुआ? फिर झगड़ा हो गया”? राजा के सवाल पर बांसुरी ने हाँ में सिर हिलाया और वापस नीचे देखती चुप चाप बैठी रही…..

” बता भी दो क्या हुआ? मन में तो कुलबुला रही हो मुझे बताने के लिये”

   बांसुरी ने राजा की तरफ देखा और उसकी आंखों में आंसू आ गये__

  ” भास्कर कभी मुझे समझ क्यों नही पाता ?”

  ” ये भी तो हो सकता है कि तुम उसे समझ नही पाती हो?”

  ” मर्द हो ना उसी का पक्ष लोगे, औरत होते तब मेरी तकलीफ समझते”

” नही बांसुरी ऐसी बात नही है, बहुत बार हम मर्द अपनी बातों को सहीं ढंग से कह नही पाते, क्या करें तुम औरतों की तरह एक्सप्रेसिव नही होते ना, चलो अब अच्छे बच्चों की तरह शांत होकर सारा मसला बताओ।”

  ” मैंने जैसे ही मौसमी वाली बात भास्कर को बताई उसने कहा कि उसे सारा कुछ तो नही लेकिन कुछ हद तक सच्चाई पता थी, और इसलिये उसने नंदा सर को मुझे प्रोजेक्ट देने से मना किया था।
   भास्कर का कहना है कि वो जानते हैं मैं कभी सच्चाई की तह तक गए बिना आधी अधूरी रिपोर्ट देखकर न्यूज़ नहीं बनाऊंगी इसीलिए भास्कर मुझे इस प्रोजेक्ट पर काम करने से मना कर रहे थे उनका कहना है कि अब सच्चाई जानने के बाद या तो खून का घूंट पीकर मैं झूठी खबरें अखबार में लिखूँ  और या फिर सारी सच्चाई को सामने लिख दूं पर अगर सच्चाई लिखती हूं तो मैं मेरे बॉस के खिलाफ ही लिखूंगी और उसका परिणाम यह होगा कि बॉस मुझे नौकरी से निकाल देगा हो सकता है मुझ पर मानहानि का दावा भी कर दे और बस मुझे इन्हीं सब चक्करों से बचाने के लिए भास्कर शुरू से ही मुझे इस प्रोजेक्ट से दूर रहने कह रहे थे।

  ” जाहिर है कोई भी पति अपनी होने वाली पत्नी को ऐसे किसी मामले में फंसने उलझने नहीं देगा भास्कर ने क्या गलत किया?

   “भास्कर यह गलत कर रहे हैं, कि मुझे सच बोलने से रोक रहे हैं। मानहानि का दावा हो जाएगा, नौकरी से निकाल दिया जाएगा, यह सब कह कर मुझे डरा कर पीछे रखना चाहते हैं, जबकि वह खुद जानते हैं कि मैं ऐसा कुछ नहीं  करूंगी।”

  ” कोई भी साधारण इंसान यही करेगा बांसुरी।”

  ” हम्म मैं भी समझती हूं इस बात को !! अच्छा एक बात बताओ  अगर तुम भास्कर की जगह होते तो तुम क्या करते ?”

  ” अगर मैं भास्कर की जगह होता तब तो बात ही कुछ और होती, पर मैं तुम्हें किसी भी प्रोजेक्ट में या केस में ऐसे मझधार में नहीं छोड़ता। समझाने की कोशिश जरूर करता लेकिन अगर तुम सच्चाई का साथ देना चाहती, सच्चाई के लिए लड़ना चाहती, तो मैं हर वक्त तुम्हारी ढाल बनकर तुम्हारे सामने खड़ा रहता।
       पर एक बात कहूं बांसुरी बात बात पर मुझे और भास्कर को कंपेयर मत किया करो क्योंकि मैं मैं हूं और भास्कर भास्कर है। उसकी अपनी खूबियां हैं। और मेरी अपनी खामियां हैं।
         हम दोनों में बहुत अंतर है!!

” आई एम सॉरी मैं तुम दोनों को कंपेयर नहीं कर रही हूँ । बस समझना चाह रही हूं कि क्या मैं गलत हूं? अभी इतनी परेशान हूं कि मुझे यही समझ नहीं आ रहा कि भास्कर सही बोल रहे या मैं सही सोच रही हूं।
बस तुमसे यही जानना चाहती थी।”

”  तो सुनो !!तुम सही सोच रही हो। तुमने मुझसे गलत सवाल पूछ लिया तुम्हें यह कहने की जगह कि मैं भास्कर की जगह होता तो क्या करता यह पूछना था कि मैं तुम्हारी जगह होता तो क्या करता??
     तो इसका जवाब यह है कि मैं अगर तुम्हारी जगह होता तो मैं इस केस में सच्चाई की तह तक जाता, चाहे वह मामला मेरे बॉस का होता तब भी मैं अपने बॉस के खिलाफ खड़ा हो जाता, फिर वह मुझ पर मानहानि का दावा करें या मुझे गोली मरवा दे लेकिन सच्चाई के रास्ते पर मैं सीधा आगे बढ़ता कभी पीठ दिखाकर वापस नहीं लौटता।”

  राजा की बात सुन बांसुरी मुस्कुराते हुए  उठी और रसोई की तरफ जाने लगी__

” क्या हुआ किधर चलीं तुम?”

” तुम्हारी बात सुनकर मूड अच्छा हो गया कॉफी बनाने जा रही हूं उसके बाद मुझे सुरेखा जी से मिलने जाना है उनके ऑफिस, और सुनो आज तुम मेरे साथ नहीं जाओगे, पिंकी के साथ घर पर ही रहना।”

राजा ने मुस्कुराकर हां कहा और वापस अपने लैपटॉप में व्यस्त हो गया __”बांसुरी एक कप मेरे लिए भी बना लेना”

” वह तो बाय डिफॉल्ट बनाती ही हूं एक साथ दो कॉफी एक मेरी एक तुम्हारी।”

” मैडम जी मेरे लिए भी बना ही लो मैं भी आ गई हूं नहा कर।”
    तभी दरवाजे पर घंटी बजी, पिंकी अपने बालों में फंसा टॉवल निकालकर वहीं सोफे पर छोड़कर बाहर दरवाजा खोलने चली गई कुछ देर में दरवाजा खोलकर वो अंदर आई उसके पीछे एक शर्मिला दुबला पतला गोरा सा लड़का खड़ा था जिसने हाथ में कुछ तीन-चार मोटी मोटी किताबें पकड़ रखी थी, पिंकी के साथ उस लड़के को आया देखकर राजा ने टेबल पर से अपने पैर हटा लिये और सीधे होकर बैठ गया , बांसुरी भी रसोई से बाहर झांकने लगी…..

” भाई यह रतन है हम कोचिंग में साथ ही पढ़ते हैं , आओ रतन बैठो।”
    रतन को वहां बैठाकर पिंकी टॉवल उठाकर अंदर कमरे में भाग गई कुछ देर बाद अंदर से तैयार होकर बालों को सही कर वह वापस आई और आकर राजा के पास बैठ गई, इतनी देर में राजा और रतन की कोई बातचीत नहीं हुई थी, रतन टेबल के नीचे बिछे कालीन की डिजाइन को देखने में व्यस्त था और राजा रतन को देखने में। इस बीच बांसुरी हॉल तक आई उसे देख राजा ने इशारे में उससे ” ये कौन है ?” पूछा बांसुरी ने  “मुझे नहीं पता”  का इशारा किया और पानी का गिलास रतन की ओर बढ़ा कर वापस रसोई में चली गयी__
       सब चुपचाप बैठे थे बांसुरी रसोई से कॉफ़ी लेकर आयी और सब को एक-एक कप थमा दिया_

” यह भी तुम्हारे साथ ही पढ़ते हैं क्या पिंकी?”

छोटा सा “हाँ” बोलकर पिंकी फिर चुप हो गयी,  राजा और बांसुरी ने एक दूसरे की तरफ देखा बांसुरी ने राजा से इशारे में कहा कि उसे अब निकलना होगा राजा ने पलके झुका कर उसे हां कहा और बांसुरी वहां से उठकर अपने कमरे में चली गई कुछ देर बाद उन सब से विदा लेकर बांसुरी सुरेखा के ऑफिस के लिए निकल गई……..

    राजा रतन को देख रहा था, पिंकी राजा को और रतन कभी नीचे बिछे कालीन को कभी ऊपर चलते पंखे को…….
   आखिर राजा ने ही बात शुरु की__”कहाँ के रहने वाले हैं आप?

” जी भैय्या जी हम कानपुर से हैं।”

” कहाँ तक पढ़े हो?”

” बनारस हिंदू युनिवर्सिटी से सिविल में इंजिनीयरिंग किये हैं अभी आई एफ एस की तैय्यारी कर रहें हैं।”

” यार बी एच यू के तो नही लग रहे तुम? मेरा मतलब है इतने सीधे कैसे?? एक तो कानपुरिया, दूसरा बी एच यू की धरोहर और उसपे इंजिनीयरिंग करके नीम और चढ़ा चुके फिर भी तुम्हारे किसी ओने कोने से नही लग रहा कि तुम अपना सही इंट्रो दे रहे हो”

” काहे आप भी बी एच यू के हैं क्या?”

” काहे ? लगते नहीं हैं क्या?”

” आपको देख कर तो लगता है जैसे विदेश से पढ कर आयें हैं”

रतन की बात पर पिंकी हँस पड़ी __” काका साहेब ने लन्दन भेजा था इन्हें पढ़ने, पोस्ट ग्रेजुएशन वहीं से किये हैं, लेकिन उसके पहले ग्रेजुएशन बनारस से किये हैं।”

  पिंकी की बात सुन रतन के चेहरे पर कुछ भाव आये और कुछ चले गये, राजा ने उस पर ध्यान दिये बिना ही अपना अगला सवाल दाग दिया__

” आई एफ एस में जाना चाहते हो, क्यों हिन्दुस्तान से प्यार नही है?
   राजा अपनी ही बात पर हँसने लगा उसे हँसते देख रतन और पिंकी भी हँस पड़े।।

********

   बांसुरी अपनी उलझन में उलझी थी, एक तो पहले ही उसने खुद को भास्कर से शादी के लिये बड़ी मुश्किल से तैय्यार किया था, और जब जी कड़ा कर के उसने सगाई कर ली तब राजा आ धमका उसकी जिन्दगी में तूफान मचाने…..
    आखिर ऐसा क्या है उसमें जो वो बिना किसी डोर उसकी तरफ खिंची चली जा रही थी, चार दिन के लिये आया अजनबी कब उसके हृदय पटल पर अपना स्थायी आवास बना कर जम गया उसे भी पता ही नही चला।।
     उसका मन खुद में परेशान था, भास्कर की तरफ प्यार दिखाने की ज़रूरत थी, और राजा के लिये दिल में उभरते जज़्बात छुपाने की भी।।
   ना चाहते हुए भी बार बार उसके मन से भास्कर को धक्का देकर राजा हँसते मुस्कुराते आ खड़ा होता था, उसकी छवि को वो कितना भी हटाना चाहे वो पहले से भी ज्यादा मज़बूती से अपनी पकड़ बना लेता था।
   एक एक अवयव उसका मनमोहक था, कुछ तो ऐसा होता जिसे देख वो उससे अपना दिल हटा पाती।
    पर ऐसे सब किस्से फ़िल्मों में ही होतें हैं, उसे कैसे भी हो राजा से अपना मन हटाना ही होगा, वर्ना और कोई जाने ना जाने वो महाज्ञानी तो जान ही जायेगा कि उसके साथ सुबह की कॉफ़ी पिये बिना बांसुरी की सुबह नही होती।
   
*************
       
               अपने विचारों में खोयी बांसुरी सुरेखा से मिलने उसके ऑफिस पहुंच गयी लेकिन सुरेखा से मिलने के बाद उसे जो कहानी पता चली वो मौसमी की बताई कहानी से बिल्कुल अलग थी, जैसा की पहले ही बांसुरी को लगा था सुरेखा जी ने सारे काण्ड का ठीकरा मौसमी के सर ही फोड़ा और साफ़ सपाट शब्दों में बांसुरी से कह दिया कि मौसमी सारी झूठी कहानी उसे सुना गयी है।
     
************

  कुछ देर इधर उधर की बातें करने के बाद रतन ने राजा से विदा ली और बाहर निकल गया, उसे नीचे तक छोड़ने पिंकी भी उसके साथ ही बाहर चली आयी।
  अपनी बाईक पर किताबें संभालते हुए रतन ने एक बार ऊपर फ्लैट की खिड़की की तरफ देखा और गाड़ी में चाबी लगाने लगा__

  ” क्या हुआ? परेशान लग रहे हो?”

  ” तोप है यार तुम्हारा भाई, वो भी कोई ऐसी वैसी नही जयगढ़ की रखी ” जयबाण तोप “।”

  ” आखिर भाई किसके हैं”।

” सच कह रहा हूं पिंकी, आंखों से ही पूरा एक्स-रे निकाल लिया मेरा, कहां कितनी हड्डियां है कितनी सही है कितनी टूटी फूटी है सब कुछ चेक कर लिया, मुझे तो लगता है मेरे दांतों की कैविटी तक नहीं बच पाई होगी तुम्हारे भाई की नजरों से।

    रतन की बात सुनकर पिंकी हंसने लगी “अभी से डर गए बच्चू!! अभी तो सारे घर भर से मिलना है तुमको।
यह तो एक ही तोप है हमारा घर तो पूरा किला है जहां अलग-अलग शेप एंड साइज की तोपें मौजूद हैं”

  ” सच में डर गया हूं राजपूतानी कहीं तेरे चक्कर में मुझे मेरी जान से हाथ ना धोना पड़ जाए।”

“अच्छा जी तो मरने के डर से प्यार करना भूल जाओगे?”

” मैंने कब कहा कि प्यार करना भूल जाऊंगा मैं तो यह कह रहा हूं कि तेरे चक्कर में जान से चला जाऊंगा।”

” बस रतन जल्दी से एग्जाम निपटे  हम दोनों का सिलेक्शन हो और हम यहां से कहीं दूर चले जाएं।”

” क्यों हमारे सलेक्शन के बाद भी क्या तुम्हारे घर वाले मानेंगे नहीं ?और अगर सब मान गए तो घर वालों से दूर जाने की क्या जरूरत है  पिंकी?”

” मेरे घरवाले कभी नही मानेंगे रतन, मैं जानतीं हूँ उन्हें।”

” तो जब शुरू से जानती थीं, तो प्यार क्यों किया मुझसे??”

” सोच समझकर करने वाली चीज होती तो कभी तुमसे प्यार नहीं करती अब तो हो गया अब क्या कर सकती हूं?”

” छोड़ सकती हो मुझे”

” तुम्हें छोड़कर मैं कहां जी पाऊंगी?? और जहां तक छोड़ने की बात है तो अभी भी तुम्हें बाय करने का मन नहीं कर रहा, समझे ?”

“तो मत करो बाय! चलो मेरे साथ, ले चलता हूं अपनी दुनिया में।”

  ” अभी नहीं अभी तुम जाओ मैं ऊपर जाती हूं भैया पता नहीं क्या सोच रहे होंगे?”

   रतन ने बाइक में बैठे-बैठे ही सामने खड़ी पिंकी के माथे को चूमा और गाड़ी स्टार्ट कर घुमा कर गेट से बाहर निकल गया, उसके बाईक वहाँ से हटाते ही पिंकी ने देखा बांसुरी सामने खड़ी थी…..

  ” अरे बंसी तुम कब आई?”

  ” बस अभी जब तुम दोनों तोता मैना अपने भविष्य का घोंसला बना रहे थे।”

  ” बंसी भाई से कुछ मत कहना प्लीज!”

  “मैं क्यों कहूंगी पिंकी बल्कि यह तो तुम्हें कहना चाहिए!! इतना प्यारा और समझदार भाई है उससे कुछ भी छुपाने की क्या जरूरत?? राजा को बता दो वह सब समझेगा और तुम दोनों का साथ भी देगा।”

  ” नहीं पिंकी अभी मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहती पिछली बार मेरा रिटर्न क्वालीफाई नहीं हुआ था। इस बार बड़ी मुश्किल से रिटर्न एग्जाम तक पहुंच गई हूं बस एक बार मैं और रतन सेलेक्ट हो जाएं, फिर सबसे पहले राजा भैया को ही बताऊंगी। प्रॉमिस!!

  ” चलो ऊपर चलतें हैं , चाय का वक्त भी हो गया, राजा वेट कर रहें होंगे।”

  ” वाह जी वाह बड़ा रिस्पेक्ट देती हो भाई को?”

  ” क्या करुँ पिंकी, जब से तुमने अपना राजसी इतिहास सुनाया है मैं कम्फर्टेबल ही नही हो पा रही, पहले की बात होती तो शायद मुहँ से ‘राजा वेट कर रहा होगा’ ही निकलता।”
    दोनो सहेलियां हँसती हुई फ्लैट की तरफ बढ़ गईं..

  चाय पीते हुए सुरेखा से हुई सारी बातचीत बांसुरी ने राजा और पिंकी को बताई और साथ ही ये भी कि अब वो इस मसले पर रोज़ का अपडेट नही लिखने की सोच रही, बल्कि वो सच्चाई को सामने ला कर उसकी न्यूज़ रिपोर्ट बनाना चाहती है।
    बांसुरी ने इसी सिलसिले में सुरेखा से मिल कर आते समय उसकी एक दोस्त के पति जो वकील हैं से मुलाकात भी की और उनके बताये अनुसार कल उसे उसी होटल में शाम को जाना है, कल शाम भी वहाँ कोई पार्टी होनी है जिसके पास वो अगले दिन सुबह तक में किसी तरह अरेंज कर लेगी।
   राजा ध्यान से सारी बातें सुनता रहा __

” कितने पास अरेंज हो पायेंगे बांसुरी?”

” पास तो एक ही अरेंज होगा पर उसमें दो लोगों को एन्ट्री मिल सकती है।”

  ” फिर ठीक है!”

” क्या ठीक है ? आप कहीं नही जायेंगे राजा साहब, वहाँ जान का भी खतरा हो सकता है”

” अच्छा रानी लक्ष्मीबाई जी! अच्छा हुआ आपने बता दिया, राजा तो एकदम डर गया! अब कोई बहाना नही सुनूंगा मैं तुम्हारे साथ चलूँगा बस!! और एक मिनट ये क्या लगा रखा है राजा साहब, तुम सिर्फ राजा ही कहो, तुम्हारे मुहँ से वही अच्छा लगता है।”

” पर मुझे अजीब लग रहा है, कहाँ तुम सच के अजातशत्रु हो और मैं अभी तक तुम्हारा मज़ाक बना रही थी।”

  ” बंसी तुम मेरे भाई का मज़ाक बना रही थी?”

   पिंकी ने बांसुरी पर झूठ मूठ का गुस्सा दिखाया, और तीनों एक साथ हँसने लगे।।

**********

पास मिलने की उम्मीद पर पानी फिर गया था, होटल थ्री स्टार था जहां डिनर करने के बहाने आराम से घुसा जा सकता था लेकिन बिना कानूनी कागजात के किसी भी वेटर से किसी तरह की कोई भी पूछताछ करना असंभव था।।
     बांसुरी जितना ही राजा से दूर दूर रहना चाह रही थी बचना चाह रही थी उतना ही उसे उसके साथ की जरूरत पड़ रही थी आखिर बांसुरी को राजा को साथ लेकर ही जाना पड़ा, क्योंकि ऐसे वक्त में उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना है।
    शाम का धुंधलका गहराते ही बांसुरी को साथ लिये राजा उस होटल में पहुंच चुका था, बांसुरी इधर-उधर देखती कुछ खोजने की कोशिश कर रही थी तब तक राजा मैनेजर के काउंटर पर पहुंच गया__

  ” एक रूम चाहिए था आज रात के लिए?”

बांसुरी ने आश्चर्य से राजा की तरफ देखा और बांसुरी को ऐसे देखते मैनेजर ने उन दोनों को देखा__
    काउंटर से लगे पार्टी हॉल का दरवाजा बंद होने पर भी अंदर तेज आवाज में बजते गाने बाहर तक सुनाई दे रहे थे__

   ” कभी मेरे साथ कोई रात गुजार
     तुझे सुबहतक मैं करुँ प्यार……”

” क्या हुआ ? रुम खाली नही है क्या?”

” है सर!! किस तरह का रुम चाहिए आपको, डीलक्स सुपर डीलक्स, नॉर्मल सुईट या हनी…..

” बस बस ! आप एक मिनट वेट किजीये , हम अभी बताते हैं?”
  मैनेजर की बात सुन कर बांसुरी घबरा कर राजा को एक तरफ खींच ले गयी__

  ” ये क्या है?? अब रुम की क्या ज़रूरत है हमें? मैं यहाँ नही रुकने वाली।”

  ” तो वेटर के बारे में बिना किसी कानूनी पेपर्स के कैसे इंट्रोगेशन करेंगी आप जासूस मैडम?”

” क्या ये लोग तुम्हारा ही इन्तजार कर रहे थे क्या कि एक खूबसूरत जासूस आये और ये लोग सब बक दें और अपने होटल के नाम पर बट्टा लगा दें, बोलिये बांसुरी जी।”

” अरे ऐसे तो मैने सोचा ही नही!”

” हाँ ऐसा नही सोचा लेकिन राजा यहाँ आ कर रुम क्यों बुक कर रहा उसके लिये गलत सोच लिया….

” अरे नही नही राजा तुम गलत सोच रहे हो…

“अच्छा जी मैं गलत सोच रहा हूँ, अरे बुद्धू हम पिछ्ले पांच दिनों से अकेले ही थे घर पे, कुछ गलत करना होता तो कब का कर के निकल चुका होता, तुम रोक पाती मुझे? पागल लड़की।”
   अपनी बात पूरी कर राजा खिलखिला कर हँसने लगा, अब उसे बांसुरी क्या बताती कि वो राजा से नही अपने आप से डर रही है, अपने दिल से डर रही है जो बिना उसकी इजाज़त के राजा का हुआ जा रहा है, बांसुरी को अपने खयालों में गुम छोड़ राजा काऊंटर पर आगे बढ गया।।

क्रमश:

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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