जीवनसाथी – 18

जीवन साथी – 18

” अरे नही नही राजा तुम गलत सोच रहे हो…

“अच्छा जी मैं गलत सोच रहा हूँ, अरे बुद्धू हम पिछ्ले पांच दिनों से अकेले ही थे घर पे, कुछ गलत करना होता तो कब का कर के निकल चुका होता, तुम रोक पाती मुझे? पागल लड़की।”
   अपनी बात पूरी कर राजा खिलखिला कर हँसने लगा, अब उसे बांसुरी क्या बताती कि वो राजा से नही अपने आप से डर रही है, अपने दिल से डर रही है जो बिना उसकी इजाज़त के राजा का हुआ जा रहा है, बांसुरी को अपने खयालों में गुम छोड़ राजा काऊंटर पर आगे बढ गया, उसके पीछे अपना पर्स संभाले बांसुरी भी भागी, काऊंटर पर राजा एक बार फिर मैनेजर से सवाल जवाब में उलझा था__

” सर नाम बताएंगे अपना”

  ” ब्योमकेश ….

  ” सॉरी …..

” क्यों ब्योमकेश एक ही है क्या?

” नही सर ऐसी बात नही !! पूरा नाम बताएंगे

” ब्योमकेश बक्शी!!

   मैनेजर एक बार फिर राजा को घूर कर देखने लगा

” अरे क्या हुआ क्या ब्योमकेश बक्शी एक ही है कलकत्ते वाला सत्यान्वेषी?”

” सर मैडम का नाम?

” अब अगर मैं ब्योमकेश हूं तो यह सत्या ही होंगी।”

मैनेजर उलझन में था वह समझ चुका था राजा गलत नाम बता रहा है उसने शांति से राजा की तरफ देखा और रजिस्टर में एंट्री करने से पहले उससे आईडी मांग ली…..

” सर आई डी प्रूफ?”

  राजा ने ₹10000 निकाले और डेस्क पर रख दिए

” भाई मेरे अगर आईडी दिखानी ही होती तो मैं अपनी सत्या को लेकर यहां क्यों आता? समझ रहे हो ना?

” ओके सर एंट्री नहीं कर रहा हूं रूम नंबर 507 में चले जाइए कीज़ के साथ हेल्पर को पीछे भेजता हूं पर सुबह आठ के पहले रुम खाली कर दीजिएगा क्योंकि मॉर्निंग दूसरे मैनेजर की ड्यूटी होती है।”

  राजा ने हाँ में सिर हिलाया और पास खड़ी बांसुरी की आंखों को देखते हुए कुछ गुनगुनाने लगा__

           ऐसे न मुझे तुम देखो
             सीने से लगा लूंगा
          तुमको मैं चुरा लूँगा तुमसे
              दिल में छुपा लूंगा……

*********

   वेटर रूम खोल कर कार्ड राजा के हाथ में थमा कर वापस चला गया और बांसुरी के पीछे कमरे में अन्दर घुस कर राजा ने दरवाज़ा बन्द कर दिया__

” कुछ ज्यादा ही ओवरएक्टिंग नहीं कर रहे थे तुम ओवर रोमांटिक”

  ” मैं हूं रोमांटिक , उस में ऐक्ट करने वाली कौन सी बात है।”

“अच्छा जी बड़ा रोमांस सिर पर सवार है तुम्हारे”

” क्या करूं तुम्हारे सिर पर तो जासूसी सवार है।”

” अच्छा सुनो जब मैं वहां से हट गई उसके बाद तुम पलट कर मैनेजर से क्या बोलने गये थे।”

” वाइन का ऑर्डर देने गया था अच्छी वाली!! तुम्हारा सपना था ना पीने का आज पी लेना!”

” पागल हो गए हो क्या?  मैं पियूंगी भी तो यहां तुम्हारे साथ!”

” क्यों क्या बुराई है? मेरे साथ पीने में । मेरी कंपनी इतनी भी बुरी नहीं है,  ओह समझा तुम्हारे दिमाग में फिर से कीड़ा कुल बुला रहा है, है ना!!”
   राजा ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा…..

“तुम लड़कियां भी ना गजब की फ़िल्मी होती हो! एक कमरा, एक लड़का लड़की। हसीन रात। तो मतलब कुछ गड़बड़ होनी ही है ।। बुद्धू कहीं की!
      वह वेटर आता ही होगा ड्रिंक्स लेकर, ठीक है!! तुम यहां बेड पर बैठी रहो जैसे ही डोर नॉक होगा मैं दरवाज़े के पीछे चला जाऊंगा ठीक है! समझ गयी ना!

  बांसुरी के ना में सिर हिलाते ही राजा मुस्कुराने लगा_

” तुम्हें ज़रूरत भी नही समझने की, मैं सब संभाल लूंगा।”

  दरवाज़े की बेल बजी, और राजा ने धीरे से दरवाज़ा खोला और वेटर के अन्दर आते ही दरवाज़ बन्द कर दिया__

  ” सर ये आपका ऑर्डर! कहाँ  रख दूं?”

  ” सामान टेबल पर रख दो और खुद चेयर खींच कर बैठ जाओ”

   राजा की गंभीर आवाज को सुन वेटर एक पल को घबरा गया

“जी  क्या कहा सर?”

“सुनते जरा कम हो?” मैंने कहा बैठ जाओ”

” सर हमें अलाउड नहीं है गेस्ट के सामने बैठना।”

” यही सब तो पूछताछ करनी है कि क्या क्या तुम्हें अलाउड है और क्या नहीं? सी बी आई से हैं हम शान्ती से बैठो और जो जो पून्छू सही सही जवाब देते जाओ।

  राजा ने बांसुरी से उसका फोन लिया और उसमें से मौसमी की तस्वीर निकाली और उस वेटर के सामने रख दी
      “इस लड़की को पहचानते हो”?
वेटर ने एक सेकंड को उस लड़की की तस्वीर देखी राजा की तरफ देखकर ना कह दिया राजा ने अगली तस्वीर सुरेखा जी की उसके सामने कि __
     “इन्हें पहचानते हो “?

     वेटर ने तस्वीर को ध्यान से देखा फिर राजा को देखा और मना कर दिया!

राजा ने अब की बार अपनी शर्ट से वापस अपनी गन निकाली और वेटर के सामने टेबल पर रख दी __

     “इसे पहचानते हो ?”
वेटर गन देख  कर डर गया………
” साहब मैं कुछ नहीं जानता हूं इस सब के बारे में मुझे कुछ नहीं पता ।”

” भाई देख मैं तो सीबीआई वाला हूं …एक डॉक्टर और एक पुलिस वाले हम लोगों को किसी को भी ऊपर पहुंचाने का लाइसेंस मिला होता है, समझ रहा है ना, यह गोली मैं तुझे मार कर  निकल जाऊंगा तो भी यहाँ  मुझे कोई कुछ नहीं कर पाएगा ।
        या तो तू थोड़े पैसे ले ले और सारी सच्चाई बता दे और या फिर गोली खा ले और हमेशा हमेशा के लिए अपना मुंह बंद कर ले, तेरे ऊपर है तू सोच ले,……
     वैसे भी मैं 55 एनकाउंटर कर चुका हूं तेरा करते ही नाना पाटेकर जैसे अब तक छप्पन पूरे हो जाएंगे सोच ले तेरे पास पूरे 5 सेकंड है जवाब देने के लिए…..

    राजा की बात सुन घबराए हुए वेटर ने वही रखे पानी के गिलास से एक गिलास पानी पिया और वापस राजा की तरफ देखने लगा कुछ ही देर में राजा ने अपनी जेब से ₹10000 निकाले और टेबल पर रख दिये__ ” देख लो क्या तुम्हारे ज्यादा काम का है।”

  ” साहब मैं सच में  ज्यादा कुछ नही जानता।”

  ” ज्यादा नही जानते लेकिन कुछ तो जानते हो, वही बता दो …..
      देखो मैं चाहता तो पूरे कानूनी पेपर्स के साथ आता और तुम्हें पूछताछ के लिये उठा कर ले जाता, फिर यहाँ तुम्हारा नाम खराब होता, नौकरी से अलग हाथ धोना पड़ता, और ये सब करना मुझे भाता नही है, इसलिये मैं अपने स्टाईल से काम करता हूँ, किसी को पता नही चलेगा कि तुमने हमें कुछ बताया है, अब जो भी पता है फटाफट बोलो।”

  “साहब यह जो दोनों तस्वीरें आपने दिखायी हैं इन्हें मैंने देखा था उस दिन।
         यहां अखबार वालों की एक पार्टी थी हम सब बारी-बारी से ड्रिंक्स और स्नैक्स सर्व कर रहे थे तब यह वाली मैडम ने लल्लन को उधर बुलाया और कुछ कहने लगी….

” कौन सी , इन तस्वीरों में से देख कर बताओ?” इतनी देर से चुप बैठी बांसुरी ने अपने फोन की स्क्रीन उस वेटर के सामने रख दी

” मैडम ये दोनों ही उस दिन लल्लन से बात कर रही थी, पहले ये वाली मैडम …..
     ऐसा बोल कर उसने सुरेखा की तस्वीर पर हाथ रखा __” और उसके बाद ये वाली मैडम ने भी लल्लन से कुछ बात की थी , और उसे कुछ छोटा पैकेट जैसा दिया था , और उसके कुछ देर बाद ये मैडम पार्टी हॉल से कमरे में चली गयी, उनके साथ एक कोई आदमी भी था। “

  ” मतलब तुम यह कहना चाहते हो कि मौसमी ने लल्लन को कोई पैकेट दिया था।”

” जी हां इन मैडम का नाम अगर मौसमी है तो इन्होंने ही कोई पैकेट दिया था।”
  बांसुरी ने राजा की तरफ देखा और वापस उस वेटर से सवाल करने लगी__” उसके बाद क्या हुआ?”

” उसके बाद मैडम पार्टी तो चलती रही रात में 2:00 बजे पार्टी खत्म हुई। और सब अपने अपने घर चले गए। यह वाली मैडम काफी देर तक पार्टी के बाद भी हॉल में बैठी थी हमारे स्टाफ ने उन्हें सिक्योरिटी रीजन के कारण वहां से जाने के लिए भी कहा, लेकिन 4:00 बजे के आसपास उनका मोबाइल बजा और वह भागकर जो रुम बुक था उसमें चली गयी, मेरी और लल्लन की नाईट ड्यूटी थी तो हम लोग भी उनके पीछे भाग कर ऊपर गये, मैनेजर साहब भी थे।”

” फिर ?”

” फिर मैडम वहां का सीन देखने लायक नहीं था यह दूसरी मैडम बहुत रो रही थी और यह बड़ी वाली मैडम उनको सहारा दे रही थी जो साहब यह मौसमी मैडम के साथ गए थे वह भी अपना सिर पकड़ कर वहां बैठे हुए थे मुझे तो ज्यादा कुछ समझ नहीं आया लेकिन लल्लन थोड़ा घबरा गया था। वहां यह सब फसाद देखकर मैनेजर ने मुझे और लल्लन को बाहर बुलाया और हमें बस इतना कहा कि यहां की कोई बात बाहर नहीं जानी चाहिए वरना होटल की बहुत बदनामी होगी उसके बाद वह वापस उन मैडम के पास भी गए , और उनके भी हाथ पैर जोड़कर यही कहने लगा कि आप लोग किसी तरह मामला निपटा लीजिए लेकिन हमारा नाम मत खराब कीजिए अगर पुलिस आ गई तो बहुत बदनामी होगी पर वह मैडम मानने को तैयार नहीं थी उन्होंने तब तक में पुलिस को बुला लिया था ।

” तो पुलिस ने लल्लन से पूछताछ नही की?”

”  की ना मैडम लल्लन से भी पूछताछ हुई और मुझसे भी लेकिन हमने अपने मैनेजर के अनुसार यही कहा कि हम कुछ नहीं जानते लल्लन को तबीयत खराब लग रही थी इसलिए वह पुलिस के वहां से जाते ही घर चला गया! उसके बाद उसने घर से ही मैनेजर साहब से अपनी छुट्टी की बात कर ली और अपने गांव निकल गया।
     इधर पुलिस ने वैसे भी उस आदमी को गिरफ्तार कर ही लिया था, इसलिये उस दिन के बाद एक बार और आकर पुलिस ने कमरे की तलाशी ली और वापस चली गयी।

” मतलब लल्लन की तरफ किसी का ध्यान नही गया?”

” नही मैडम किसी का ध्यान नही गया?”

  बांसुरी मुस्कुराने लगी __ ” किस बात पर ध्यान जाना चाहिए था वेटर साहब,वो भी बता दीजिये!!

” वो तो मैं गलती से बोल गया मैडम!”

” तो गलती से ही आगे का सच भी बोल जाओ , वर्ना वो देख रहे हो ना बडे साहब बैठे हैं वहाँ, वो मुहँ से कम लात घूंसो से ज्यादा बोलते है।”

  वेटर ने एक ग्लास पानी और पिया और आगे की बात बताने लगा__” लल्लन को मैंने ड्रिंक्स में कुछ मिलाते देखा था मैडम, लेकिन वो ग्लास उसने किसे दिया और ड्रिंक्स में क्या मिलाया ये मुझे नही पता, क्योंकि पार्टी में पूरा वक्त हम सभी व्यस्त थे और उसके बाद सुबह लल्लन जो गया तो वापस ही नही आया”

  अपनी बात पूरी कर वेटर राजा के पास पहुंच गया और उसके पैरों में बैठ गया_” साहब एक एक बात सच्ची कह रहा हूँ, इससे ज्यादा कुछ नही जानता माँ कसम!

इतनी देर से चुप बैठे राजा ने अपना मोबाइल उसके सामने कर दिया__” मान लिया मैंने कि तू सच बोल रहा है, अब देख तूने जो जो यहाँ बताया है, वो इस कमरे से बाहर किसी को बताने की ज़रूरत नही है, वर्ना तेरी इस रिकॉर्डिंग को मैं कोर्ट में सुबूत के तौर पर पेश करवा दूंगा उसके बाद कोर्ट कचहरी के झंझट से तुझे सात जनम तक मुक्ति नही मिलेगी, इसलिये बेटा इस कमरे में घुसने के पहले तू जितना इनोसेंट था वापस बाहर निकल कर उतना ही इनोसेंट बन जाना। ना तूने हमें कुछ बताया, ना हमनें तुझसे कुछ पूछा है। ठीक है?”

” ठीक है साब! अब मैं जाऊँ?”

” अभी कहाँ? अभी तो मैडम के सवाल खत्म हुए हैं मेरे तो बाकी हैं, चल अब जल्दी से लल्लन का पता ठिकाना और नम्बर भी बता फिर चलता बन!”

  राजा की बात सुन वेटर ने लल्लन का नम्बर और उसके गांव का अता पता बता दिया।
    वेटर जाने लगा तब राजा ने टेबल पर पड़े अपने पैसे उठाये और वेटर की जेब में ठूंस दिये, पैसे डालते समय बांसुरी ने कुछ इशारा किया जिसे राजा ने अनदेखा कर वेटर को बाहर भेज दिया__

” अब बोलो! क्या इशारे कर रहीं थी।

” इतने पैसे उड़ाने की क्या ज़रूरत थी, दस का लालच दिया था जब उसने सब बता दिया तब दो तीन हज़ार कम भी देते तो क्या फर्क पड़ जाता।”

  बांसुरी ने मुहँ बिचका कर कहा और उसकी बात सुन राजा ज़ोर से हँस पड़ा __” बांसुरी बांसुरी कभी कभी कितनी भोली बच्चों सी बातें कर जाती हो तुम!! तुम्हें पता है तुम कितनी क्यूट हो”

” पैसे उड़ाना कोई तुम से सीखे।”

  बांसुरी की बात पर राजा थोड़ा गंभीर हो गया__” अच्छा बताओ अगर मैं दो हज़ार कम भी देता तो मैं कितने बचा लेता, मेरा मतलब है वो तो हमारे एक बार के टैक्सी के खर्चे में ही उड़ जाते लेकिन वही दो हज़ार उस वेटर के लिये जिसकी सैलरी दस हज़ार होगी बहुत मायने रखतें हैं, मेरा कहने का मतलब ये है कि कोई रकम अधिक या कम उसके उपयोग करने वाले और उसकी उपयोगिता पर निर्भर करती है……
    अब तुम ये मत सोच लेना कि मैं तुम्हारे मिडिल क्लास वैल्यूज़ का मज़ाक उड़ा रहा हूँ, मैं बस रुपयों की ज़रूरत की बात कर रहा हूँ, हाँ जिस दिन मेरे पास खत्म हो गये उस दिन मैं भी पैसे उड़ाना बन्द कर दूंगा। अब चलो वापस, हमारा यहाँ का काम खत्म हो गया।”

” वापस चलें?” बांसुरी के सवाल पर राजा ने उसे गहरी नजरों से देखा __” क्यों जाने का विचार नही है”

” अरे मेरा मतलब था, इतनी महंगी सी वाईन मंगवा ली तुमने और चखी तक नही , बस इसिलिए।”

” ये तो मैडम सीन क्रियेट करना था मैनेजर के सामने, सो हो गया, अब टेस्ट करने की क्या ज़रूरत? चलो!

  हाँ में सर हिला कर बांसुरी राजा के पीछे पीछे कमरे से निकल आयी, पर्स से वापस अपने आधे चेहरे को ढकने वाले गॉगल्स निकाल कर उसने आंखों पर चढाये और काऊंटर की ओर निकल गयी।

  “जल्दी निकल रहे सर वापस, कुछ देर और ठहर जाते।”
     जेब में ठूंसे दस हज़ार मैनेजर के मुहँ से चाशनी बहा रहे थे

  ” अपना काम कर ना भाई ! ये रहे बिल के पैसे “

  मैनेजर खिन्सियानी हँसी हँस कर पैसे रखने लगा, राजा को मालूम था वो बचे पैसे वापस करेगा नही, इसलिये उसे दुबारा देखे बिना उसने बांसुरी का हाथ थामा और बाहर निकल गया।

   कैब में बैठे दोनो फ्लैट की ओर चल पड़े….

” ये लल्लन तो बनारस भाग गया है बांसुरी “

” फोन नम्बर भी तो है उसका ।”

” वॉव सुपर स्मार्ट लेडी डिटेक्टीव , लल्लन तो वहाँ बेसब्री से आपके फोन का वेट कर रहा है कि कब बांसुरी की बीन बजेगी और वो लहरा लहरा के नागिन डांस कर के तुमको सारी कहानी सुनाएगा।”

” अरे ये मतलब थोड़े ही था मेरा।”

” तो इतनी बिना मतलब की बातें कैसे कर लेती हो बांसुरी, यहाँ मैं बिना किसी वजह के तुम्हारे केस में जूझ रहा हूँ और तुम जाने किन खयालों में खोयी रहती हो? “

  राजा की बात सुन बांसुरी मुस्कुराने लगी, दूर कहीं भोर का उजाला फैल रहा था , खिड़की से बाहर देखती बांसुरी कैब में चलते गाने में खो गयी….

        तू रूह है तो मैं काया बनूं
        ता-उम्र मैं तेरा साया बनूं
      कह दे तो बन जाऊं बैराग मैं
       कह दे तो मैं तेरी माया बनूं
           तू साज़ है, मैं रागिनी
           तू रात है, मैं चांदनी……..

  जबसे पड़े तेरे क़दम. चलने लगी दुनिया मेरी…...

क्रमशः

aparna….

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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