जीवनसाथी पार्ट -1

           मेरी कहानी shaadi.com को आप सब ने बहुत पसंद किया उस कहानी को एक बहुत सामान्य से विचार के साथ शुरू किया था कि एक साधारण रंग-रूप की सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की कैसे अपनी बुद्धि के बल पर अपनी सफलता का आयाम रचती है कहानी का नायक जो गोरा सुंदर है, नायिका की बुद्धिमता से प्रभावित होकर उससे शादी करना चाहता है।
     कुछ छोटी-मोटी गलतफहमी के कारण दोनों को कुछ समय के लिए अलग होना पड़ता है और उसी अलगाव में नायक अपनी क्षमताओं को पहचान कर पढ़ाई करता है और एक ऑफिसर बनकर नायिका से मिलता है कहानी बहुत साधारण थी, ना तो कहानी में बहुत मोड़ थे और ना ही रहस्य और रोमांच फिर भी मेरी उस साधारण सी कहानी को आप सभी के प्यार ने असाधारण बना दिया आज भी मुझे इनबॉक्स में आप में से कई लोगों के मैसेज आते हैं कि shaadi.com को आगे बढ़ाइए , आप सभी के उसी प्रेम और उत्साह के कारण मैं shaadi.com नया अध्याय लेकर आ रही हूं।।

      Shaadi.com नया अध्याय पुरानी कहानी से बहुत अलग है पात्रों के नाम वही हैं जो पहले थे परिवार भी वैसे ही मिलते जुलते हैं लेकिन इस बार कहानी की विषय वस्तु और कथानक बहुत अलग है।। इस बार shaadi.com में कई मोड़ हैं जो आड़े तिरछे चलते हुए कहानी को आगे ले जाएंगे ।।

     कहानी की शुरुआत एक छोटे से लिव-इन के साथ होगी जिसमें नायक और नायिका( राजा और बाँसुरी ) को इत्तेफाक से 15 दिनों के लिए एक साथ रहना पड़ता है यहीं से असल कहानी शुरू होगी।।
       इस कहानी में नायक और नायिका बिल्कुल ही अलग स्वभाव के हैं दोनों की पसंद नापसंद एक दूसरे से बहुत अलग है इसके साथ ही दोनों का रहन सहन और जीवनशैली भी अलग-अलग है।

      Shaadi.com समाप्त हुई थी राजा और बांसुरी की शादी पर ,,shaadi.com नया अध्याय शुरू हो रही है बांसुरी की सगाई से लेकिन बांसुरी की सगाई राजा से नहीं हो रही बल्कि भास्कर  से हो रही है……..
      तो आइए शुरू करते हैं shaadi.com नया अध्याय एक नये कलेवर और एक नये फ्लेवर के साथ….
    जैसे पिछली कहानी शादी डॉट कॉम थी, ये कहानी जीवनसाथी डॉट कॉम है, पर लेखन की सुविधा के लिये नाम सिर्फ जीवन साथी लिया है।

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       शादी डॉट कॉम : द्वितीय अध्याय

  जीवन साथी — साथी जनम जनम के

“अरे जल्दी जल्दी हाथ चलाओ रे छोरीयों  और कितना समय लगाओगी लड़के वाले आते ही होंगे बांसुरी तैयार हुई कि नहीं?”

  ” हां जिज्जी बांसुरी बस तैयार ही हो रही है, आप भी सुबह से काम में लगी है जाइए आप भी तैयार हो जाइए।”

  ” अरे हमारे लाने थोड़ी आ रहे हैं लड़के वाले जिसे ब्याहने आ रहे हैं वह तो वैसे ही सज सँवर  रही है अब इस उमर में हम क्या तैय्यार होंगे??”

   ” वैसे सही बात है जिज्जी आपको तैयार होने की जरूरत भी क्या है? आप वैसे ही बहुत सुंदर है पर जाइए कम से कम साड़ी तो बदल आईये, आपके कमरे में अपनी पीली कोसा सिल्क निकाल कर रख आई हूँ, उसे ही पहन लीजिएगा पीले रंग में आप बिल्कुल दमकता सोना लगती हैं।”

    “अब इस बुढऊती में  हम ही सोना दिखेंगे तुमको तुम भी प्रमिला कुछ भी कहती हो।”

  “तो और क्या सच ही तो कह रहें हैं, जाइये आप साड़ी बदल आईये, लड़के वाले आते ही होंगे।”

    प्रमिला अपनी जेठानी को उनके कमरे में धकेल कर सीढ़ियां चढ़ती ऊपर बांसुरी के कमरे की ओर बढ़  चली, सीढ़ियां चढ़ी रही थी कि बांसुरी के पिता की आवाज उसके कानों में पड़ी___
    ” अरे कहां हो?? कुर्ते पजामे के साथ पगड़ी क्यों निकाल रखी है ??कोई ब्याह थोड़ी हो रहा है अभी बिटिया का,  सगाई ही तो है इसमें कहां पगड़ी बांध लूंगा??”

  ” अरे बांध लो ना क्या बिगड़ जाएगा पगड़ी बांध लोगे तो?? जमती है तुम पर,,कम से कम पगड़ी बान्ध लेने से बिना बालों का इतना चौड़ा माथा नज़र नही आता।”

   ” उड़ा लो और मज़ाक उड़ा लो, पर सुन लो तिवारीन अब तुम्हारी तरफदार भी जाने वाली है ससुराल, बस फिर हम दो बुड्ढा बुढ़िया ही रह जायेंगे घर में, तब देखूँगा कितना मज़ाक उड़ाओगी मेरा।।”

     सुबह से बेटी के सगाई के प्रसंग से प्रसन्न प्रमिला का चेहरा दप्प से मुरझा गया, कुछ देर पहले उत्साह से इधर-उधर डोलती, हंसती चहचहाती प्रमिला अचानक ही रुआन्सी  हो गई …..आज उसकी छोटी बेटी बांसुरी की सगाई जो थी….

*********

     प्रमिला का जब ब्याह हुआ तब वह सिर्फ 18 बरस की थी , ब्याह के बाद उसने अपना सारा जीवन अपने पति और परिवार पर वार दिया,  उसने 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं की थी, इसलिए उसकी इच्छा थी कि उसकी दोनों बेटियां खूब पढ़े….. बड़ी  बेटी वीणा  का पढ़ाई लिखाई में कुछ खास मन नहीं लगता था, उसका शौक सजने संवरने और एक अच्छे घर में शादी करने तक ही सीमित था, इसी से वह बहुत ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाई जैसे तैसे बी ए करने के बाद एक अच्छा घर बार देखकर प्रमिला ने उसे ब्याह दिया, पर छुटकी बांसुरी पढ़ने में बहुत तेज निकली स्कूल में हमेशा अव्वल आते हुए उसने डिस्टिंक्शन के बलबूते पर राजकुमार कॉलेज जैसे महंगी स्कूल में एडमिशन पाया और स्कॉलरशिप लेकर कॉलेज की भी पढ़ाई वहीं से पूरी की, पढ़ाई पूरी होते-होते उसे अपने क्रैडेंशियल्स के भरोसे पर मुम्बई के नामी अखबार में कॉलम लिखने की नौकरी भी मिल गयी।।
     
     एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार कि महिला के सपने भी उतने ही साधारण और सरल होते हैं ।।दो दो कन्याओं की मां का सपना यही होता है, कि दोनों बेटियां अच्छा घर वर पाकर सुखी और समृद्ध रहें, उनकी समृद्धि देख देख कर ही मां की खुशियां आंखों से जब तब छलकती रहती हैं।।

    बैंक ऑफिसर से विवाह संपन्न होने के बाद वीणा  अपने एकमात्र पुत्र के साथ खुशहाली की वीणा बजा रही थी और उसके जीवन की राग रागिनी से संतुष्ट उसकी मां छोटी बेटी के विवाह के स्वप्न सजा रही थी कि तभी बांसुरी के बहुत बुलाने पर प्रमिला का बांसुरी के पास मुम्बई घूमने जाना हुआ।
 
     पढ़ाई समाप्त करते ही बांसुरी की मुम्बई में नौकरी लग गई थी वहां कुछ दिन वर्किंग विमेन हॉस्टल में रहने के बाद बांसुरी ने अपनी दो सहेलियों माला और पिंकी के साथ एक फ्लैट किराए पर ले लिया था।।
  माला बांसुरी के ही साथ उसके ऑफिस में काम करती थी वहीं से दोनों की जान पहचान हुई थी पिंकी माला की सहेली थी और माला के जरिए ही पिंकी और बांसुरी दोस्त बने थे।।
  
     मुंबई एक बहुत बड़ा शहर है, सपनों का शहर!!! भारत की औद्योगिक राजधानी भी कहा जाता है मुंबई को!! मुंबई में सब कुछ मिल जाता है बस रहने को छत नहीं मिलती , इतनी ऊंची ऊंची इमारतें तो हैं पर उनमें रहने के लिए कमरे ढूंढना बहुत मुश्किल!!
     मुंबई में खाना और जीना बहुत सस्ता है, पर रहना बहुत कठिन। बांसुरी और माला एक साधारण परिवार से थे इसीलिए 50000 की बड़ी राशि किराए पर देना दोनों को बहुत अखर गया था तभी माला ने पिंकी को खोज निकाला था।।

        पिंकी भोपाल की रहने वाली राजपूतानी थी घर द्वार  से संपन्न और सशक्त !!, उसके लिये अकेले भी इतनी राशि खर्च करना साधारण सी बात थी,पर मुम्बई जैसे बड़े शहर मे अकेले रहना सुरक्षा की दृष्टी से भी सही नही था।।
       पिंकी अपनी ज़िद से आई ए एस की परीक्षा की तैय्यारी कर रही थी,और उन्हीं तैय्यारियों के लिये वो मुम्बई  घर वालों का क्रोध झेल कर भी अकेले चली आयी थी,एक महीने से वर्किंग वीमेंस होस्टल की पतली दाल और जले हुए चावल जिन्हें बड़े प्यार से उनकी मेस में वरण भात कहा जाता था, से उसका जी ऐसा ऊब गया था कि उसने वापसी के लिये अपना बोरिया बिस्तर लगभग बान्ध ही लिया था कि तभी उसकी रुम मेट ने उसे माला के बारे में बताया ……
    माला से मिलते ही उसे आभास हो गया कि जैसे दोनो जनम जनम की सखियाँ हो, और उसने भी माला के साथ फ्लैट शेयर करने की रज़ामंदी दे दी।।

    अब तीनों सहेलियां मिलकर 50000 की राशि को आधा-आधा बांट कर किराया दिया करते थे, और मुंबई में रहा करते थे, तीनो को साथ रहते लगभग डेढ़ साल हो चुका था,और इसी बीच तीनों मे खाँटी दोस्ती हो चुकी थी।।
     बांसुरी और पिंकी अब दोस्त कम बहनें ज्यादा हो गई थी ऐसा लगता नहीं था कि इन दोनों को माला ने मिलाया है, बल्कि यूं लगता था कि दोनों बचपन की बिछड़ी सखियां मुंबई आकर वापस मिल गई थीं ।    
        साथ ही खाना साथ ही सोना दोनों के सारे काम एक साथ हुआ करते थे, पिंकी जब रात रात भर जाग कर नोट्स बनाया करती  तो बांसुरी उसके लिए कॉफी बना कर उसकी पानी की बोतल भर कर उसकी पढ़ाई की टेबल पर रख कर ही सोने जाती, कई कई बार जब पिंकी परीक्षा के दबाव से परेशान हो उठती तो बांसुरी रात रात भर उसके साथ जाग कर उसका हौसला बढ़ाती, पहले अटेम्प्ट में पिंकी मेन्स क्लियर नहीं कर पाई थी, इसीलिए दूसरी बार वह पूरे जी-जान से अपनी तैयारियों में डूबी हुई थी क्योंकि इस बार उसके घर वालों ने उसे अल्टीमेटम दे दिया था कि  इस बार फेल होने पर उसे वापस बुलाकर उसका ब्याह कर दिया जाएगा।।
     घर भर में अगर कोई था जिसे पिंकी के आईएएस बनने का चाव था, तो वह था पिंकी का चचेरा भाई राजकुमार!!
     पहली बार पिंकी के मुंबई आने में भी राजकुमार का ही  हाथ था, उसी ने घर भर से मिन्नतें कर अपनी जिम्मेदारी पर पिंकी को मुंबई भेजा था, भेजा क्या था खुद छोड़ने आया था ।।
      पिंकी की सुविधा का सारा साजों सामान उसके हॉस्टल के कमरे में छोड़कर 2 दिन तक उसे रोज उसकी कोचिंग क्लास से आना-जाना करवा कर फिर राजकुमार वापस अपने शहर लौट गया था।।

वैसे तो पिंकी की मां पिंकी के साथ खानसामा, आया बाई और ड्राइवर भी भेजना चाहती थी पर पिंकी ने रो धोकर सब को इस बात के लिए मना लिया कि वह अकेली ही मुंबई जाएगी।।
  
     पर एक महीने में ही जब हॉस्टल जीवन से ऊब कर पिंकी ने रो धोकर राजकुमार को फोन किया कि हम वापस आ रहे हैं तब राजकुमार ने ही उसे उसके कलेक्ट्री वाले सपने को याद दिला कर वहीं रुकने के लिए बाध्य किया था।।
      माला और बांसुरी के साथ फ्लैट में शिफ्ट होने वाली बात पर भी राजकुमार ने ही घर भर की मुहर लगवाई थी, वीडियो कॉल में अपनी मां और पिताजी को फ्लैट का कोना कोना दिखाकर पिंकी ने आखिर सब की इजाजत पा ली थी।।

क्रमशः

aparna….

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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