जीवनसाथी – 20

जीवन साथी- 20

          तुझे ऐसे रखूँ कभी खोए नहीं
         किसी और का तू कभी होए नहीं
            तुझे पाऊँ तो खो जाऊँ मैं
          फिर खुद को कहीं ढूँढू तुझमें

           तू बन जा गली बनारस की
          मैं शाम तलक भटकूँ तुझमें…….

गाने में खोयी बांसुरी देर तलक साथ वाले बजरे को देखती रही, जब मन में कुछ चल रहा हो तो आंखें किस दिशा में चलती हैं होश कहाँ रहता है?

” चलें मैडम! उतरें ? हम घाट पर लग चुकें हैं।”

  बांसुरी जैसे नींद से जागी, क्या सच में महादेव की नगरी की हवा में भंग घुली होती है, कैसा नशा उस पर छाता जा रहा था, घाट का सम्मोहन उस पर भी मोहिनी फिरा ही गया….

” क्या आज रात हम यहीं कहीं रुक सकतें हैं, यहीं घाट के पास!”

   राजा उसे देख मुस्कुराता खड़ा रहा, आगे बढ़ कर उसने बांसुरी को नाव से उतरने के लिये अपना हाथ दिया लेकिन तब तक में बजरे के किनारे को थामे बांसुरी सीढियों पर उतर आयी।

  “भैय्या जी एक से एक जब्बर इष्टार रेटिंग के होटल मिलेंगे यहाँ, कैसा चाहिए मतलब आपको, एसी कूलर पंखा सभी तरह के कमरे मिल जायेंगे, आदेस किजीये बस!”

  ” पाड़े जी रहने लायक ठीक-ठाक हो बस!

  ” जैसन बोलेंगे वैसने दिलवा देंगे सस्ते का सस्ता, महंगे का महंगा।”

  ” कोई बीच का दिखा दो”
राजा को अपनी शान दिखाने का एब कभी ना था__” अच्छा सुनिये पाड़े जी एक मित्र को खोज रहे थे जरा ये पता ठिकाना देख कर बताना, जानते हो क्या ?”

   पान्डे पता लिखा परचा ध्यान से उलट पलट कर देखता रहा_ ” ईहां का चप्पा चप्पा जानते हैं। ई तो जो पता आप दिखा रहे हैं भूतही इमली का है । चिंता ना करें आप , कल तक सब खोज मारेंगे।
  
” ये भूतही इमली क्या है?
    किसी चलचित्र तारिका सी सुंदर सोफिस्टीकेटेड बांसुरी के सवाल नाव वाले को और मुखर बना रहे थे, वो उसके हर सवाल का जवाब दुगुने उत्साह से दे रहा था

  “यहाँ के गली मोहल्लों के नाम ऐसे ही हैं, पेड़ पौधों पर रखे नाम हैं जैसे भुतही इमली, नाटी इमली, टेढ़ी नीम, बेनी राम की बगिया या बेनियाबाग।
    बनारस के हर गली मोहल्ले की अलग कहानी है मैडम, अगर सुनना चाहेंगे तो हम पूरा सुना देंगे।”

” सुना दो लेकिन सप्लीमेंट्री कम भरना।”

बांसुरी की बात सुन राजा हंसने लगा उसने हंसते हुए नाव वाले को देखा और कहा __”थोड़ा शॉर्ट में बताना पांडे जी”

” हां तो भैया जी आप तो रहे हैं ना देख्बे किये होंगे कित्ता सारा गली मोहल्ला है यहां। जानते ही हैं कई कई गली मोहल्ला तो ऐसा है जहां सूरज देवता के दर्शनो नहीं होते लेकिन गर्मी में भी घर ठंडा बना रहता है धूप नहीं पहुंच पाता ना ।
     पहले शुरुआत करते हैं भदैनी से। उसको पेशवा बसाए रहे। जितने तरह के मोहल्ले उतने तरीके के नाम भगवान के नाम पर मोहल्ला है  वीरों के नाम पर मोहल्ला है , काहे की वीरों का भी बहुत पूजन किया जाता है यहां तो वीरों के नाम पर भी खूब सारी गली मोहल्ले जैसे लहुराबीर जोगिया वीर ऐसे।
   गोदावरी मैया वाला इलाका कहलाता है गोदौलिया और मंदाकिनी मैया का इलाका मैदागिन।
    पीली कोठी, बिसेसरगंज, चौहट्टा लाल खान मुसलमान बस्ती हैं। हमारे बहुत दोस्त रहते हैं वहाँ।
    देवी देवताओं के नाम पर भी हैं जैसे बड़ा गणेश है संकट मोचन है। और हां खाने-पीने के नाम पर भी गली मोहल्ला है कचौड़ी गली खोया गली और यहां का बहुत फेमस दालमंडी।

  ” बस बस खूब जानते हो दोस्त, तो तुम हमारा काम कर दोगे फिर , इस पते पे कल जाना है हमे।

  ” निश्चिंत रहें भैय्या जी, आप हमको काम बोलें हैं। कल भोर तक में ए लल्लन बाबू का जन्म कुंडली बंचवा लेंगे। आप भोरे भोर आ जाइयेगा, पहले घाट पर स्नान ध्यान कीजियेगा, महादेब के दरसन कर के हमारे यहाँ जलपान ग्रहण कर के फिर निकल चलेंगे, जादा दूर नही है यहाँ से। आईये आपको होटल तक पहुंचा दें।

    घाट पर से जाते हुए बांसुरी एक बार फिर मुड़ कर खड़ी हो गयी__

  ” क्या हुआ  जाने का मन नहीं कर रहा ना ?”

  उसने राजा को देखा और मुस्कुराते हुए ना में सिर हिला दिया, फिर वापस धीर मंथर गति से उसके साथ चलती हुई बाहर टैक्सी तक चली आई।

   ” सुनो ! अगर थकी नही हो तो क्या मेरा कॉलेज देखने चलोगी।”

  ” यू मीन बी एच यू?”

” यस ! नही तुम रहने दो , तुम्हें कमरे में छोड़ कर मैं अकेला ही जाता हूँ।”

” राजा ! मैं चलूंगी तुम्हारे साथ ।”

” आर यू श्योर? “

” यस!”

   ” तो चलो फिर , वहीं कुछ खा भी लेंगे।”

  टैक्सी की जगह राजा ने इस बार ऑटो रिक्शा बुक किया और बांसुरी को साथ लिये बनारस की गलियों में भटकने के लिए निकल गया ।
  कचौड़ी गली से खा पीकर वह आगे बढ़ गये…..

   कैंपस के सामने के रास्ते आज भी वैसे ही गुलजार थे जैसे उस समय हुआ करते थे, जब राजा वहां पढ़ा करता था। एक चाय की साधारण सी टपरी की बेंच पर राजा और बांसुरी भी जा बैठे । रात के 9:00 बज रहे थे इसलिए चहल-पहल सुबह की तुलना में थोड़ी कम थी लेकिन रौनक में कोई कमी नहीं आई थी।

” जानती हो बांसुरी मेरे जीवन के सबसे सुनहरे साल थे जब मैं बनारस में था हम सभी दोस्त रात रात भर बनारस की गलियों में घूमा करते थे पढ़ाई लिखाई से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था ऐसे ऐसे कांड किए हैं कि क्या बताऊं ?
      रात भर रास्तों पर आवारगी करना, किसी के घर के बाहर लगे बल्ब को फोड़ कर भाग जाना , किसी के कुत्ते को खोल कर उसके चार घर आगे बान्ध आना।
   जम कर दारू पीना और पूरी भड़ास गालियाँ दे देकर निकालना, और फिर चढ़ी हुई उतारने के लिये घाट पर जाकर गंगा मैय्या में छलांग लगा देना।
    एक दोस्त था मेरा कहता था जब तक बनारस में हुँ तभी तक पियूंगा फिर छोड़ दूंगा, हमने पूछा क्यों तो कहता है यहाँ मैय्या अपनी गोद में लेकर पाप धो जो देगी।
    एक रात तो पता है क्या हुआ हम चार पांच लोग कमरे में बैठ कर पत्ते खेल रहे थे, अब खेलते खेलते एक को प्यास लग आयी तो उसने दूसरे से कहा चल बियर लेकर आते हैं, हम सब तैय्यार हो गये।
   अब सब घर के कपडों में चप्पल डाले पैदल निकल लिये, तभी पेट्रोलिंग जिप्सी आकर हमारे सामने रुकी दो हवलदार उतरे और हम सब को गाड़ी में चढ़ा लिया, और लिये चल दिये…..
      पर हम सब भी अनोखे ही थे, एक बंदे के अलावा किसी के चेहरे पर शिकन तक ना थी। लंका की पॉश कॉलोनी में ले जाकर उन्होने हमें उतरने कहा, हम सब सतर खड़े हो गये, तब उन्होने एक बड़े से घर के मालिक से जाकर कुछ पूछ ताछ की, उन्होने वहीं से हमे झांक कर देखा और ना में सिर हिला दिया।
    बाद में उन पुलिस वालों ने हमें छोड़ दिया, छोड़ने से पहले ये भी बताया कि उस आदमी के घर रात चोरी हुई थी, बड़ी पहुंच का आदमी था सो तुरंत पुलिस पहुंच गयी तहकीकात करने और जब हमें आवरगर्दी करते देखा तो उठा लिया।
   पर जानती हो अगले दिन क्या पता चला , उस खून्सठ ने टैक्स के घपले से बचने के लिये झूठी चोरी की रिपोर्ट करायी थी।”

    अपनी बातों में खुद मगन राजा उस बात को याद कर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा….बांसुरी उसे हँसते देखती रही__” क्या देख रही हो ऐसे?”
 
  ” देख रहीं हूँ वीरु खुद जय बना अपनी राम कहानी सुना रहा है”

” मतलब”

” मतलब शोले नही देखी क्या अजातशत्रु जी! बस कुछ उसी अन्दाज़ में आपने भी अपने महाविद्यालय के इतिहास को सुनाया है, पेल कर दारु पीना , जी भर कर गालियाँ देना, प्यास लगे तो बियर खरीदना, पत्ते खेलना, हे भगवान!! कोई गलत काम छोड़ा भी तुमने।

  बांसुरी को हँसते देख राजा भी खिलखिला उठा__”क्यों तुम्हें तुम्हारे कॉलेज की याद नही आती?

  ” आती है ना! कॉलेज होस्टल, लाइब्रेरी, किताबें, प्रोफेसर और हाँ राजा जी एक बात और, हम लोग ना प्यास लगने पर बियर खरीदने नही जाते थे, हम उससे आसान काम कर लिया करते थे, पानी पिया करते थे।
हफ्ते में एक दिन इतवार के रोज़ हमारी फीस्ट होती थी उस दिन हमारा टिफ़िन सिर्फ एक समय यानी सुबह आया करता था और उस दिन बाकी दिनों से स्पेशल खाना होता था, तो उस शाम हम अक्सर टहलते हुए आश्रम तक चले जाते थे और वहाँ मन भर कर पानी पूरी खाते थे पर गालियाँ किसी को नही देते थे।”

  ” स्पेशल खाने में क्या मिलता था टर्की?”

  “हम्म टर्की मिलेगा मेरा सर!! बाकी दिन हमें अमूमन पत्ता गोभी, कभी ककडी की तरी कभी सेम की फलियां मिलती थी फीस्ट वाले दिन फूल गोभी मिल जाती थी और रोटी की जगह पूड़ियां, और चावलों की जगह जीरा राईस।”

  ” बस ! तभी ऐसी दुबली सी हो”

  दोनों अपने कॉलेज के दिनों को याद करते करते वापस होटल के कमरे तक चले आये, बातों में डूबे उस रात भी दोनों को सोने में रात के तीन बज गये।

********

  अगले दिन घाट पर दर्शन कर दोनो ही पान्डे के होटल से खस्ता कचौरियों और जलेबी का नाश्ता कर लल्लन से मिलने निकल चले, पान्डे भी उनके साथ ही हो लिया।

    लल्लन के घर पहुंच कर दरवाजा खड़काने पर एक बुज़ुर्ग सी महिला ने दरवाज़ा खोला__

  ” का हो अम्मा? लल्लन है घर मा?”

  ” तुम कौन?”

  ” दोस्त हैं लल्लन के।” पान्डे की बात पर उन्होने अपने चश्में के भीतर से आंखों को गोल गोल कर अपनी दृष्टी को दूरदृष्टी में तब्दील किया और एक और तोप दाग दी__” कभी देखे नही तुम्हें, गदलिया से हो का?”

” कैसे जान डारी अम्मा?”

  ” किसी जमाने हम सरपंच रहीं वहाँ की” अम्मा अपनी पुरखौती बांचने जा रही थी कि कमरे में  दरवाज़े के सामने पड़ने वाली सीढियों से कमीज की बाहों को मोड़ता लल्लन उतर आया__” कौन आया है अम्मा हमसे मिलने।”

” को जानी ददा ? तुम ही देखो, हमरा टेम हो गया है।”

  लल्लन के वहाँ आते ही पाड़े ने आगे बढ कर बात संभाली__” अम्मा जी की आरती का बखत हो गया लगता है।”

” अरे नही यार बुढऊती में बिग बॉस देखने का चस्का लग गया है अम्मा को, कहतीं हैं टीवी पे इन औरतों को गंवारों सा झगड़ते देख अपने गांव की मेहरिया याद आ जाती हैं। कहो कौन हो भाई, कौन गांव से आए हो?”

   अपनी बात बोलते हुए लल्लन ने एक पूरी नजर राजा और बांसुरी पर भी डाली इतनी देर से चुप खड़े राजा ने आगे बढ़कर कहा__” मुंबई से आ रहे हैं तुमसे मिलने”

” अंदर आ जाइए”। लल्लन ने एक तरफ हट कर उनके लिए रास्ता बना दिया उनके अंदर आते हैं उसने दरवाजा बंद किया और सबको हॉल में ले जाकर सोफे पर बैठाया हॉल की दीवार पर लल्लन की एक तस्वीर लगी थी जिसमें उसने कुछ अलग सी वर्दी पहन रखी थी……
    एक और तस्वीर लगी थी जिसमें लल्लन अपनी डिग्री थामे खड़ा मुस्कुरा रहा था।

“आप लोग  आराम से बैठिए हम पानी लेकर आते हैं।”

   लल्लन के जाते ही बांसुरी ने राजा की तरफ देख इशारा किया कि ” ये वेटर जैसा तो नही लग रहा” बांसुरी को धैर्य रखने का इशारा कर राजा फिर कमरे को इधर उधर देखने लगा__

” लिजिये पानी। मुम्बई में कहाँ  रहते हैं आप?”

  लल्लन ने पानी की ट्रे लाकर टेबल की बीच रखी और एक किनारे तिपाई पर बैठ गया__

” हम कहां रहते हैं वह छोड़िए आप अचानक मुंबई से वापस कैसे चले आए तबीयत तो ठीक है ना।”

   राजा के इस सवाल पर लल्लन हड़बड़ा गया__” हां तबीयत को क्या हुआ है बिल्कुल ठीक है”

” और याददाश्त?” राजा के सवाल पर वह एक बार फिर भौचक्का रह गया __”जी दुरुस्त है।”

” तब तो इन तस्वीरों को आप आसानी से पहचान जाएंगे।”
     बोलकर राजा ने बांसुरी के फोन की स्क्रीन लल्लन के सामने कर दी। लल्लन ने मौसमी की तस्वीर देखी और फिर सुरेखा जी की, उसके बाद फोन उसने राजा को वापस कर दिया ।
        “पूछिए क्या पूछना चाहते हैं आप”

  बांसुरी ने शुरू से लेकर आखिरी तक सारी बात थोड़ी कांट छाँट  के साथ लल्लन को बता दी लल्लन अपनी तिपाई से उठा और जिस कुर्सी पर बांसुरी बैठी थी उसके बिल्कुल पास में जाकर बैठ गया।

  “बांसुरी जी अब मैं आपको सारी बात बताता हूं आप जितना सीधा सोच रही हैं यह केस इतना सीधा नहीं है और ना ही यह कोई रेप केस है। अब पूरी बात सुनिये वो भी शुरू से । सबसे पहले मैं अपना परिचय आपको दे दूं मेरा घर का नाम लल्लन है और मुंबई भी मैं इसी नाम से गया था, लेकिन असल में मैं क्राइम ब्रांच में काम करने वाला एक इंस्पेक्टर हूं इंस्पेक्टर रोहित सूर्यवंशी।
    लगभग दो-तीन साल पहले ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जुड़ी  कई वारदातें हमारे शहर के आसपास होनी शुरू हुई । यूपी बिहार झारखण्ड से कई नाबालिग और बालिग लड़कियां अचानक गायब होने लगी, इन्हें कभी घरों पर काम करवाने के नाम पर कभी कुछ नौकरी दिलवाने के नाम पर यहां से मुंबई दिल्ली जैसे बड़े से बड़े शहरों में शिफ्ट किया गया। अधिकतर लड़कियां ऐसे गरीब घरों की होती थी जिनके घर वाले अगर पुलिस में जाकर रिपोर्ट भी लिखायें तो भी कोई खास एक्शन नहीं होता था। ज्यादातर केस फाइलों में बंद होते जा रहे थे, उसी समय मेरी इमानदारी से खुन्नस खाये मेरे एस पी ने मुझे जान बूझ कर ये अनसुलझी फाइल पकड़ा दी, उन्हें लगा नयी उमर का नया पौधा है ऐसे केस में जहां रिश्वत की बारीश और भ्रष्टाचार की मिट्टी ना हो पनप नही पायेगा मुरझा जायेगा, पर अपन भी लल्लन हैं हार मानने वालों में से नही हैं।
    पूरे 1 साल रिसर्च की जिससे कई सारी बातें पता चली।  पता चला कि यहां से लड़कियों लड़कों को पहले मुंबई ले जाया जाता है , फिर वहां से नकली पासपोर्ट वीजा के द्वारा विदेशों में बसे भारतीयों के यहां घर का काम करने के लिए एक्सपोर्ट कर दिया जाता है। कई लड़कियों को अरब कंट्रीज भी भेज दिया जाता है रईस रसूखदारों के यहाँ बांदी बनाकर छोड़ दिया जाता है, और कई जो बाहर नही भेजी जा पाती उन्हें यहीं आसपास बेगैरत और फ़िज़ूल कामों में उलझा दिया जाता है।
        इस सब पर सबसे पहले मुम्बई के अखबार ने एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसकी कटिंग के आधार पर ही मैंने अपनी तफ्तीश शुरु की थी।
     उस सारी सच्चाई को जानने के लिये मेरा मुम्बई जाना ज़रूरी था इसलिये मैं यहाँ से छुट्टी लेकर मुम्बई पहुंच गया, और सबसे पहले उसी अखबार के दफ्तर में गया, वहाँ मैने एक अस्थाई नौकरी पकड़ ली और साथ ही अपने एक जान पहचान वाले से कहलवा कर एक बड़े होटल में भी काम पकड़ लिया।

      जिस अखबार मैं मैंने काम पकड़ा था वही का एडिटर एक सच्चा और नेक आदमी था उसी ने इस सारे केस के तिनकों को जोड़ जोड़ कर पूरा घोंसला तैयार किया था उसके बाद ही उसने अपनी रिपोर्ट तैयार की थी उसने एक प्रति पुलिस में भेजी और उसका कुछ हल्का सा हिस्सा ही अपनी न्यूज़ पेपर में छापा लेकिन ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जुड़े सरगना लोगों ने उस आदमी के साथ बहुत गलत किया और उसकी जान के दुश्मन बन गये , इसिलिए।

” इसिलिए क्या रोहित जी?”

बांसुरी के सवाल पर रोहित कुछ देर को रुका फिर उसे देखते हुए आगे की बात पूरी की…..

  ” आप विश्वास नही कर पायेंगी बांसुरी जी मेरी बात पर, कि आगे क्या हुआ?”

” आप बताइये तो सही।”

” इन सरगनाओं पर कई बड़े नेताओं व्यवसाइयों का हाथ था, इन्हें पकड़ पाना इतना आसान काम नही था, लेकिन एडिटर साहब और उनकी टीम काम में जुटी रही और एक एक कर के सुबूत जुटा ही लिये, और इसके साथ ही केस फाइल कर दी गयी, अपनी जान बचाने के लिये उन्होनें प्रोटेक्शन की भी गुहार लगाई, अब लीगली जायें तो उनका काम बड़ा तो है पर ऐसा भी नही जिसके लिये पूरी पुलिस फोर्स को उनकी सुरक्षा के लिये उनके घर भेज दिया जाये इसिलिए हम सब ने मिल कर ये उपाय सोचा कि पुलिस उन तक नही जा सकती लेकिन वो पुलिस के पास तो आ सकते हैं। अब जेल जाने के लिये कुछ ठोस करना पड़ता इसके लिये उनकी टीम ने ये सारा जाल बुना। जब मैंने पहली बार उनके काम को समझा तभी मैंने उन्हें अपनी सच्चाई बता दी थी, तो मैं भी उस प्लान का हिस्सा बन गया।”

” उनकी टीम का हिस्सा कौन कौन हैं?”

” ये दोनो औरतें जिनकी तस्वीर आपने दिखाई और….

  ” और मेरे खुद के बॉस यानी ” आज की दुनिया ” के एडिटर नंदा साहब भी। है ना?”

  ” हाँ वो भी हैं। यही तो आश्चर्य की बात है कि दोनो अखबार कभी एक दूसरे पर कीचड़ उछालने से बाज नही आते थे पर जब बात मानवता की आयी तब नंदा जी और सुरेखा जी खुद आगे आये उनकी सुरक्षा के लिये। अब ये एडिटर साहब पूरी तरह से सुरक्षित अन्दर बैठे अपनी रिपोर्ट्स तैय्यार कर रहे हैं और जैसे ही उनका सारा काम फायनल होता है वो सारे लोग जो इस केस में इन्वॉल्व थे अन्दर हो जायेंगे तब मौसमी सामने आ जायेगी और एडिटर पर चलने वाले मुकदमे में गवाही बदल कर उन्हें बाहर निकाल लिया जायेगा।

” ओह्ह गॉड! इतना बड़ा गोलमाल! मेरा तो सर चकरा गया। मौसमी को मुझसे झूठ बोलने की क्या ज़रूरत थी, वो मुझे सब सच बता सकती थी।”

” बांसुरी जी वो आप पर कैसे भरोसा करती, असल बात तो ये है ना उसे ना सुरेखा जी को किसी को भी सच्चाई अभी कहीं बोलने की इजाज़त है ही नही वर्ना बात लीक होने से जेल में भी एडिटर साहब की जान को खतरा हो सकता है। मैं तो ठहरा पुलिस वाला, सूंघ कर सामने वाले की नीयत जान जाता हूँ, आप लोगों को देखते ही समझ गया कि आप लोगों से हमें कोई खतरा नही है, इसलिये सारा सच बता दिया, और बांसुरी जी आपको डेली रीपोर्टिँग का काम भी इसी लिये दिया गया कि उन लोगों का ध्यान इन सब बातों से हट जाये और एडिटर साहब को रेप जैसे घिनौने केस में फंसा देख वो लोग निश्चिंत हो जायें कि अब ये आदमी उनके खिलाफ कुछ नही कर पायेगा।

” ओके!! अगर नंदा सर ने मुझे भी सारी बात पहले ही बता दी होती तो मैं इतना परेशान होकर इस केस में उलझती ही क्यों? ये तो खोदा पहाड़ और निकला चूहा वाली बात हो गयी।”

” नही ” खोदा पहाड़ निकला चूहा ” वाली बात नही है बल्कि ” खोदा पहाड़ निकली नहर ” हो गया ये तो।”
  परिस्थितियों से कभी हार ना मानने वाला राजा एक बार फिर एक सकारात्मक बात बोल कर हंस दिया।

  ” आप ऐसा क्यों सोच रही है बांसुरी जी। पहली बात नंदा सर ज्यादा लोगों को इंवॉल्व नहीं कर सकते थे। दूसरी बात उन्हें भी पता चल गया कि आप कितनी मेहनती कर्मचारी हैं। तो अब से आप अपना काम शुरू कर सकती हैं।”

  ” हाँ जी सही कहा आपने। आपका बहुत बहुत धन्यवाद। तो आप अब मुम्बई वापस कब जायेंगे?”

  ” बस जाने ही वाले हैं कुछ दिनों में , वैसे आप लोगों का बनारस कब तक रुकने का प्रोग्राम है?”

  ” हम भी कल वापस लौट रहे। “

   ” कभी कोई और ज़रूरत हो तो ज़रूर बताइयेगा वैसे भी पत्रकार और पुलिस मिल कर साथ काम करें तो रास्ते आसान हो जातें हैं।”

   अपनी बात पूरी कर लल्लन के खड़े होते तक में राजा उठ कर बाहर तक चला आया, उसके पीछे बांसुरी भी धीरे धीरे बाहर निकल आयी।
       हमेशा हँसने बोलने वाला राजा आज इतनी देर तक रोहित यानी लल्लन को बांसुरी से बात करते देख कुछ गुमसुम सा हो गया पर उसे हमेशा ही अपने चेहरे पर एक मुस्कुराता मुखौटा ओढे रहने की आदत थी, इसीसे वहाँ से बाहर निकलते ही वो  अपने पुराने अन्दाज़ में वापस आ गया।

  बांसुरी ने मुस्कुरा कर राजा को देखा__

” समझ गया ! घाट जाना चाहती हो?”

   हाँ में सर हिला कर बांसुरी आगे बढ़ गयी, लल्लन के घर चाय पीने के बाद पान्डे वहाँ से निकल गया था, वो बाहर पनवाड़ी की दुकान में बैठा इन्हीं लोगों का रास्ता देख रहा था कि उसे दूर से राजा और बांसुरी आते नज़र आ गये।

    तीनों घाट पर पहुँचे तब लोगों का आना शुरु ही हुआ था, आरती शुरु होने में पूरा एक घंटा बाकी था__

  ” भैय्या जी आप बैठिए हम उन्हें लेकर आतें हैं आप दुनों से मिल्वाने।” पान्डे दोनो को वहीं छोड़ कहीं निकल गया….

   ” आज बहुत सुकून सा लग रहा है राजा! जब से इस केस में इन्वॉल्व हुई थी अन्दर से एक अजीब सी बेचैनी थी कि मैं उस लड़की को बचा नही पायी, उसके साथ ऐसा क्यों हुआ? किसी के भी साथ ऐसा क्यों होता है? इसी तरह के हजारों सवाल दिमाग में चलते रहते थे, अब कम से कम चैन से सो सकूंगी की मौसमी के साथ ऐसा कुछ नही हुआ।”

” हां बांसुरी लेकिन उन हजारों लड़कियों के बारे में भी सोचो जिन्हें तुम्हारे बॉस और वो दूसरे एडिटर मिलकर बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं, खुशकिस्मत हो कि तुम्हें उनका साथ देने का मौका मिला है।”

” तुम बहुत अलग हो राजा हर बात में पॉजिटिविटी ढूंढ ही लेते हो।”

  बांसुरी की बात पूरी हुई ही थी कि एक प्यारी सी मझोले कद की लड़की के साथ पान्डे जी शरमाते हुये प्रकट हुए__

  ” नमस्ते! हम सुमन है , यहाँ महिला कॉलेज में आर्ट्स पढ़तें हैं।
   लड़की ने मुस्कुरा कर अपना परिचय दिया, राजा और बांसुरी के अपना नाम बताने के बाद वो एक बार फिर शुरु हो गयी__

  ” हमें कविता लिखने का बहुते शौख है, हमारे हिंदी वाले ज्ञानेन्द्रपति सर बोले की तुम बहुतै बढ़िया लिखती हो महादेबी बर्मा बन जाओगी फ्यूचर में, हम बोले धत! इत्ता अच्छा कहाँ लिख पायेंगे। फेर उनका आसिर्बाद लेकर हम जौन ऊ दिन से लिखना सुरु किये तो आज दिन तक सरस्वती मैय्या का किरपा हम पे बना हुआ है…..

  बीच में पान्डे ने उसकी बात काट कर एक हाथ से अपना कान छू कर धीरे से फुलझड़ी छोड़ दी__” बहुतै बतियाती हैं। लेखिका कबित्रि हैं ना।”

  सुमन से उसे घूर का देखा पर तब तक में आदत से मजबूर राजा बीच में कूद पड़ा, उसे वैसे भी ये तोता मैना की जोड़ी की नोंक-झोंक बड़ी प्यारी लग रही थी।

” कवियित्रि सुमन जी कुछ सुनाइए अच्छा सा!”

” पक्का सुनायें?”

” हाँ बिल्कुल पक्का ही सुनाइए कच्चा नही।

राजा की बात पर शरमा कर सुमन ने अपनी एक कविता कहनी शुरु की और पान्डे बड़ी मुश्किल से हँसी संभालता वहाँ से ज़रा परे सरक गया__

  “कुछ टेढ़े उतरे बादल थे
    मेरे आंगन में बरसने को
   मैने कहा रुको बादल सुनो
    यहाँ ना बरसो तो अच्छा है
    मैने बचपन में बनाये थे
    कुछ मिट्टी के खिलौने उनका
    अभी तक रंग कच्चा है
    और सुनो बादल तुम वहाँ जाओ
    जहां किसान तुम्हारा रास्ता देखे
    और बांट जोहे खड़े ताकते अम्बर पर
    तुम्हारे कदमों के निशान
     तुम उन पर बरसो और हरा भरा करो
      मेरी धरती को हे बादल मेरी बात सुनो।

  छिप कर हँसने की कोशिश में पान्डे की आवाज़ सुमन तक पहुंच गयी, बांसुरी भी लाख छुपाने की कोशिश में भी हँसी रोक नही पायी इसलिये आँख में कुछ गिरने का अभिनय करती वो अपने दुपट्टे से आंखों को पोंछने लगी, पर एक अकेला राजा चुपचाप खड़ा पूरी कविता सुन गया, अभी उसने ताली बजानी शुरु की तभी कहीं से एक गोली चली और राजा के कंधे से गुज़र गयी।
        एक ज़ूप की आवाज़ हुई जब तक बांसुरी पान्डे या सुमन कुछ समझ पाते, राजा वहीं घाट पर गिर पड़ा, काँधे से बहता खून उसकी सफेद कमीज को लाल करता चला गया…….
       अपनी बन्द होती आँखों से उसने बांसुरी को एक नज़र देखा और आँखे मूंद ली।

क्रमशः

aparna….

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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