जीवनसाथी -21

छिप कर हँसने की कोशिश में पान्डे की आवाज़ सुमन तक पहुंच गयी, बांसुरी भी लाख छुपाने की कोशिश में भी हँसी रोक नही पायी इसलिये आँख में कुछ गिरने का अभिनय करती वो अपने दुपट्टे से आंखों को पोंछने लगी, पर एक अकेला राजा चुपचाप खड़ा पूरी कविता सुन गया, अभी उसने ताली बजानी शुरु की तभी कहीं से एक गोली चली और राजा के कंधे से गुज़र गयी।

जीवन साथी – 21

  छिप कर हँसने की कोशिश में पान्डे की आवाज़ सुमन तक पहुंच गयी, बांसुरी भी लाख छुपाने की कोशिश में भी हँसी रोक नही पायी इसलिये आँख में कुछ गिरने का अभिनय करती वो अपने दुपट्टे से आंखों को पोंछने लगी, पर एक अकेला राजा चुपचाप खड़ा पूरी कविता सुन गया, अभी उसने ताली बजानी शुरु की तभी कहीं से एक गोली चली और राजा के कंधे से गुज़र गयी।
        एक ज़ूप की आवाज़ हुई जब तक बांसुरी पान्डे या सुमन कुछ समझ पाते, राजा वहीं घाट पर गिर पड़ा, काँधे से बहता खून उसकी सफेद कमीज को लाल करता चला गया…….
       अपनी बन्द होती आँखों से उसने बांसुरी को एक नज़र देखा और आँखे मूंद ली।

  पान्डे जल्दी से राजा की तरफ लपका और घबरा कर राजा के चेहरे को हाथों से हिलाता उसे आंखें खुली रखने की गुजारिश करने लगा। भौचक सी सुमन ज़ोर से रोने लगी, लेकिन बांसुरी कुछ सेकन्ड खड़े खड़े राजा को देखने के बाद जैसे तुरंत होश में आयी, ना उसका एक भी आंसू गिरा ना उसने रोने की कोई चेष्टा की , उसे ऐसे खड़े देख सुमन उसे पकड़ कर ही ज़ोर से रोने लगी__
     ” का हो गया भाभी…”
  
   बांसुरी ने सुमन को खुद से दूर किया और तुरंत राजा की तरफ लपकी __” पान्डे भैय्या यहाँ का सबसे अच्छा और पास का अस्पताल कहाँ हैं, ज़रा जल्दी किजीये , इन्हें उठाने में मेरी मदद किजीये।

   पान्डे की सहायता से उसे राजा को उठाते देख कर घाट पर के और भी कुछ लड़के उनकी मदद को दौडे चले आये, उनकी मदद से टैक्सी में अपनी गोद में राजा का सिर रखे बांसुरी पीछे बैठी और सामने पान्डे को साथ लिये वो सिटी हॉस्पिटल के लिये निकल गयी।
     रास्ते में ही उसने लल्लन को फोन कर सारी बातें बताई और हॉस्पिटल पहुंचने की फरियाद भी साथ ही कर दी। पत्रकार होने के नाते वो भी गोली लगने के बाद अस्पताल में होने वाले कानूनी पर्पंच जानती थी। “आप पहुँचिये,आपके पहले ही पहुंच जाऊंगा” लल्लन की बात सुन उसे थोड़ा ढाँढस हुआ।

    दर्द से तड़पता राजा लेकिन सच्चे मायनों में क्षत्रिय था, उसके मुहँ से एक बार भी कराहने की कोई आवाज़ नही निकली, बस बांसुरी के हाथ को ज़ोर से थामे उसने अपनी आंखें बन्द कर रखी थी, और इतने दर्द में भी बांसुरी की आवाज़ सुन कर बीच बीच में मुस्कुराने की नाकाम सी कोशिश कर रहा था__

  ” बस राजा हम पहुंचने ही वाले हैं, तुम्हें कुछ नही होगा।”

******

हॉस्पिटल के पोर्टिको में गाड़ी पहुंचते ही उन्हें डॉक्टर के साथ सामने ही लल्लन खड़ा दिख गया, उसने इन लोगों के पहुंचने के पहले ही वहाँ सब तैय्यारी कर रखी थी।

   राजा को इमरजेन्सी ओ टी में ले जाते ही बाहर बांसुरी अकेली खड़ी रह गयी, डॉक्टर द्वारा बताई ज़रूरी चीज़ों की लिस्ट लेकर पान्डे अस्पताल की फार्मेसी के लिये निकल चुका था।
    
       अचानक ही उसे आभास हुआ कि राजा के उसके पास से हटते ही उसके आसपास कैसी स्तब्ध नीरवता छा गयी थी, कैसा अजीब सा अकेलापन आ गया था वहाँ, जैसे किसी सुनसान बियाबान में वो अकेली भटकती फिर रही हो।
       जैसे आज तक उसका सारा अस्तित्व उसका सब कुछ राजा ही था। अभी तक तो वो तैय्यार थी कि एक ना एक दिन राजा चला जायेगा और वो उसकी यादों के साथ ही अपनी नयी जिंदगी शुरु कर लेगी, सिर्फ इन कुछ दिनों के सहारे अपना सारा जीवन काट लेगी, लेकिन आज! आज अचानक जब उसके सामने जन्म मृत्यु का सवाल उठा तो जैसे उसके अन्दर की औरत जाग गयी ……..
      उसके अन्दर की वो पृकृति जाग गयी जिसके लिये ईश्वर ने एक ही पुरूष रचा था– राजा!
   उसके अन्दर की रति जिसका एक ही कामदेव था। उसके अन्दर की सति जिसका एक ही शिव था, है और रहेगा सदियों तक।
    क्या ये जोडियाँ बदली जा सकती हैं!! नही । कभी नही।
    फिर वो कैसे आज तक अपने और राजा के संबंध को जन्मों का संबंध ना समझ कर इतनी भारी भूल करने जा रही थी।
     राजा को अगर कुछ हो गया तो वो क्या जिवित रह पायेगी , नही बिल्कुल नही।
    और अब उसे ये भी स्पष्ट था कि अब वो राजा के बिना किसी और के साथ अपने जीवन की कल्पना भी नही कर पायेगी। कभी नही।

  सिर झुकाये अपनी सोच में मगन खड़ी बांसुरी को ये भी होश नही था कि उसकी आंखों से आंसू बहते जा रहें हैंं, उसके पास ही बैठने के लिये कुर्सी पड़ी है, पर ये सारी चीज़ें ये आसपास का सारा सब कुछ उसके लिये निर्जीव हुआ पड़ा था__ उस वक्त वहाँ सजीव अगर कुछ था तो वो था उन दोनों का रिश्ता।
   जन्मों का रिश्ता। एक दूसरे के जीवनसाथी होने का रिश्ता।

” बांसुरी जी! आप प्लीज़ बैठ जाइये। आप ऐसे रोती रहेंगी तो क्या सब ठीक हो जायेगा।”

   रोहित(लल्लन) के ऐसा कहने पर उसे भान हुआ की वो अब तक खड़ी थी और रो रही थी।
   दिखावे के लिये आज तक उसने कभी कुछ नही किया। इसलिये ज़ोर से चीख चिल्ला कर रोना धोना मचाना उसके बस के बाहर था।
    राजा से जुडे थे इसलिये ये आंसू भी निहायत ही बेशकीमती हो गये थे। पूरी तरह व्यक्तिगत, इन्हें किसी को दिखाना उसे इनका अपमान लग रहा था, पर दुख ऐसा था कि आंसू संभल ही नही रहे थे।
   वो चुपचाप कुर्सी पर बैठ गयी।
लल्लन उसके लिये एक कप कॉफ़ी लिये खड़ा था, उसने इशारे से मना कर दिया, उसके चेहरे की दृढता और तेज़ देख लल्लन को उसे दुबारा पूछने की हिम्मत ही ना हुई।

  ” बांसुरी आपने किसी को देखा था आसपास।”

   उसने ना में सिर हिला दिया, कितनी लाचार हो गयी थी वो, क्यों उसने आजतक राजा से गन रखने का कारण नही पूछा? क्यों नही पूछा कि उस रात रायपुर में हुआ क्या था आखिर जिसके कारण उसे वहाँ से रातों रात बॉम्बे के लिये निकलना पड़ा था। कितनी बेवकूफी की बांसुरी। अगर कुछ भी पता होता तो आज शायद कुछ तो समझ आता कि आखिर किसने गोली चलायी।

” बांसुरी थोड़ा दिमाग पर ज़ोर देने की कोशिश करो, याद करो जब तुम दोनो साथ थे तब कहीं भी किसी भी जगह कोई ऐसा दिखा जिस पर थोड़ा भी संदेह किया जा सके।

   अपनी लाचारगी पे तरस खाती बांसुरी को अब खुद पर गुस्सा आने लगा था__” एक मिनट इस बारे में शायद पिंकी यानी इनकी बहन कुछ बता सकती है।”

  ” वो कहाँ हैं?”

“मैंने पिंकी को फ़ोन तो कर दिया है, पर उसे मुम्बई से यहाँ पहुंचने में समय लग जायेगा, मैंने उसे पूरी बात भी नही बताई वर्ना वहाँ वो अकेले परेशान हो जायेगी, अभी बस ये कहा कि राजा की थोड़ी तबीयत …. इतना कहते ही बांसुरी को एक बार फिर अपने फ्लैट में राजा के साथ बिताये पल याद आ गये और इस बार सारे बाँध तोड़ उसकी आंखें बह चलीं, लल्लन ने भी उसे चुप कराने का कोई प्रयास नही किया।

      इमरजेन्सी केस था इसलिये तुरंत ही ऑपरेशन के लिये ओ टी तैय्यार की जाने लगी …..
   कुछ देर में एक जूनियर डॉक्टर कुछ फॉर्म हाथ में लिये बाहर चला आया__

” गोली वाले मरीज़ के साथ कौन है यहाँ?”

  बांसुरी उठ कर सामने आ गयी, तब तक पान्डे भी वहाँ चला आया__

” मैडम ये आपका रिश्तेदार है?”

” जी “

” तो आप ये फॉर्म साईन कर दीजिये “

” ये क्या है डॉक्टर साब ?” पान्डे के ऐसा पूछने पर अपने रटे रटाये अंदाज़ में डॉक्टर ने उन्हें फॉर्म के बारे में बता दिया__

  ” इसमें लिखा है अगर ऑपरेशन के दौरान किसी कारण से आपके मरीज़ की जान चली जाती है तो उसके लिये चिकित्सक और अस्पताल प्रशासन ज़िम्मेदार नही होगा।”

” ई का बकवास है डॉक्टर, तो हम यहाँ लाये काहे हैं बे, अगर तुम जान लेने ही बैठे हो तो हम कहीं और ना ले जायें।”
   पान्डे को गुस्से में देख रोहित ने बात संभाली और फॉर्म लेकर बांसुरी से साईन करवा कर डॉक्टर को वापस दे दिया__

” सॉरी डॉक्टर साहब! थोड़ा परेशान हैं सब।”

” आई कैन अन्डरस्टैंड! हमारा तो रोज़ का काम है गालियाँ खाना, कभी कोई केस सही हुआ तो भगवान बना देंगे और गलती से कभी कुछ बिगड़ गया तो हमारे केबिन में तोड़ फोड़ मचा कर हमें यमराज के पास पहुंचाने में भी लोग देर नही करते।
    डॉक्टर पान्डे की तरफ हो कर फिर उसे समझाने लगा__
     ” घबराइये मत गोली लगी तो कंधे पर ही है, लेकिन कई बार एनस्थिशिया के ड़ोज के कारण तो कभी गोली के कारण फैलने वाले ज़हर के कारण कुछ लोगों में रिस्क बढ जाता है, वैसे आपके मरीज़ के सारे टेस्ट हमने कर लिये हैं। अब बस ऑपरेशन के लिये लेकर जा रहें हैं, भगवान से प्रार्थना किजीये सब ठीक हो जाये।”

  फॉर्म हाथ में पकड़े डॉक्टर ओ टी की तरफ बढ गया, कि अचानक वापस मुड़ा और रोहित की तरफ चला आया__ ” ये कॉलम छूट गया है, साईन करने वाली मरीज़ की क्या लगती हैं यहाँ भर दीजिये।”
  रोहित ने डॉक्टर के हाथ से पेन लिया, एक बार सिर नीचे किये रोती बांसुरी की तरफ देखा और फॉर्म में मरीज़ से रिश्ता वाली जगह पर _” वाईफ ” भर दिया।
  डॉक्टर ने फॉर्म लिया और जाते जाते बांसुरी के पास रुक गया__” आप चाहें तो एक बार मिल लिजिये, क्योंकि ऑपरेशन में काफी समय लग जायेगा।”

   बांसुरी ने अपनी आँखें पोंछी और डॉक्टर के पीछे ओ टी में चली गयी।
    बड़े बडे मोटे कांच के दरवाजों के पीछे संकरा सा गलियारा था जिसके दोनों तरफ कई छोटे कमरे थे, जिनमें 2-3 लोग अस्पताल की यूनिफॉर्म में बैठे किसी ना किसी काम में लगे थे, गलियारे के एक किनारे पर एक बड़ा सा कांच का दरवाज़ा था, उसे खोल डॉक्टर अन्दर चला गया , यहाँ लगभग 4- 5 डॉक्टर और 3-4 नर्स के साथ ही 2 वार्ड बॉय भी थे।
   तभी उनमें से एक लेडी डॉक्टर ने उसे टोक दिया__

” हू इस शी राहुल?”

” मैम पेशेंट की वाईफ हैं, एक बार ऑपरेशन से पहले…
    उसकी बात पूरी सुनने का भी वहाँ किसी के पास अवकाश नही था__” ओके फाइन, उधर पहले इन्हे। वॉश करवा दो।”
    ऐसा बोल कर वो एक दूसरे डॉक्टर जो रेडियोलॉजिस्ट थे के साथ गोली की पोजीशन को एक्स रे में देखने लगीं।
    एक नर्स बांसुरी को साथ के कमरे में ले गयी और बालों हाथों और चेहरे को ढकने के ग्लव्स उसे दे दिये। उसके बाद एक ब्लू एप्रन पहन कर बांसुरी को साथ लिये नर्स उसे वहाँ से सीधे ओटी में ले गयी। एक बड़े से हॉल में खूब सारी ओटी लाइट्स के बीच एक बैड पर राजा अकेला लेटा था, एक हाथ से जहां ड्रिप लगी थी वहीं दूसरे मे पल्स ओक्सिमीटर लगा था।

   बांसुरी राजा के पास धीरे से जाकर खड़ी हो गयी, आंखें बन्द किये लेटा पड़ा राजा लग रहा था जैसे किसी गहरी नींद में कोई स्वप्न देख रहा था, एक सफेद चादर से कांधों तक ढँका वो चित पड़ा था, बिना कमीज के उसकी गोरी गरदन से नीचे उसके चौड़े कंधों पर नज़र पड़ते ही उसे एक बार फिर ज़ोर से रुलाई आने लगी, वो धीरे से राजा की तरफ झुक ही रही थी कि __
   ” मरीज़ को छूना नही है, इन्फेक्शन का खतरा रहता है।”
   नर्स की आवाज़ पर बांसुरी चौंक कर सीधी खड़ी हो गयी, कुछ देर राजा को देखती खड़ी बांसुरी उसके चेहरे में जैसे खो गयी थी, कैसी बड़ी बड़ी आंखें थी बिल्कुल लड़कियों जैसी और वैसी ही काली गोल घूमी हुई पलकें , जैसे सारा समय मस्करा लगा रखा हो। क्या लड़के भी इतने सुंदर होतें हैं?
     बांसुरी ने एक बार पीछे मुड कर देखा नर्स कुछ इन्जेक्शन और वायल में अटकी पड़ी थी।
   वो धीरे से नीचे झुकी और राजा के कान के पास अपना चेहरा ले गयी, होंठ एक बार को कांप गये, पहली बार किसी पुरूष देह परिमल को ऐसे पास से महसूस किया था उसने , ऐसा लगा जैसे एक साथ कई सारे जल तरंग बज उठे हों __” तुम्हारा रास्ता देख रहीं हुँ राजा! तुम्हें कुछ नही होना चाहिए। तुमसे पहले आज तक किसी के लिये ऐसा नही सोचा , और आज के बाद किसी के लिये सोच भी नही पाऊंगी। तुम्हें जिन्दा रहना होगा , मेरे लिये। “
     उसने धीरे से उसके कान पर अपने प्यार की मुहर लगा कर अपनी बात की तस्दीक की और बाहर निकल गयी।
    उसके पीछे से नर्स चुपचाप आयी और स्पिरिट बोल से कॉटन निकाल कर राजा का कान साफ़ किया और वापस अपने काम में लग गयी।

    थके कदमों से बांसुरी बाहर चली आयी, ओटी के बाहर निकलते ही पान्डे उसके पास चला आया __” कैसे हैं भैय्या जी?”

एक नज़र पान्डे को देख वो आगे बढ गयी , थोड़ा आगे बढ़ कर ही उसे गणपति जी की मूर्ति दिख रही थी, वो वहाँ पहुंच कर हाथ जोड़े खड़ी हो गयी__

” नीचे बड़े गजानन महाराज भी है मन्नत वाले, वहाँ जाकर धागा बाँध दो, उनकी किरपा कभी बिफल ( विफल) नही जाती।”
   पास खड़ी एक औरत ने बांसुरी के कान में फुसफुसा कर कहा, बांसुरी के उसकी तरफ देखते ही उसने खिड़की से बाहर नीचे की तरफ इशारा कर दिया। बांसुरी तुरंत सीढ़ियाँ उतर गयी।
   
     अस्पताल के बड़े से गार्डन में एक किनारे छोटा सा गणपति मन्दिर था, वही पास में कैन्टीन के कारण काफी आवाजाही थी।
    जाहिर सी बात थी अस्पताल का मन्दिर होने से वहाँ मन्नत के धागे भी कुछ अधिक ही थे।
           और देशों में भले जो होता हो हमारे भारत में आज भी किसी की श्रद्धा को मज़ाक की दृष्टी से नही देखा जाता, बल्कि ऐसे वक्त में उस श्रद्धा को दुगुना करने में लोग और सहायक बन जातें हैं।
   वहीं बैठे एक बाबा जी से एक पीला धागा ले उसने वहाँ बाँध दिया , कुछ मंत्र पढ़ उन पण्डित जी ने एक धागा बांसुरी के हाथ में भी बाँध दिया।

    पास ही कैन्टीन में रेडियो पर बजता गाना आस पास की हवा में गूँज रहा था।

        मेरे जैसे बन जाओगे जब
           इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
           दीवारों से टकराओगे
         जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा

         हर बात गंवारा कर लोगे
         मन्नत भी उतारा कर लोगे

          तावीज़ें भी बँधवाओगे
        जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा……

    इसी बीच रोहित को अपनी दादी को बताने की आज उसे अस्पताल में रुकना पड़ेगा अपने घर जाना पड़ा तो तबीयत की बात सुन वो भी उसके साथ अस्पताल चली आयीं।

    बांसुरी बड़ी देर तक गणपति मन्दिर के बाहर ही खड़ी रही, कुछ देर बाद रोहित उसके पास चला आया__” बांसुरी बाहर अब ठंड बढ़ रही है, अन्दर आ जाओ।
    बिना कुछ बोले वो चुप चाप उसके साथ अन्दर चली गयी।
  अन्दर आकर बैठी ही थी कि पान्डे उसके पास चला आया__

      ” दीदी तुम्हरा फ़ोन कई बार बजा और बन्द हुई गा , तनिक देख लो ।”

  अभी तक बांसुरी को ना अपने फ़ोन का होश था ना बैग का, उसका हैंड बैग इतनी देर से पान्डे ही संभाले था। हाँ बोल कर बांसुरी ने अपना पर्स धीरे से खोला, अचानक उसे ध्यान आया की ओपरशन शुरु हुआ है मतलब कुछ एडवांस तो भरना पड़ा होगा उसने पान्डे से पूछा तो उसने शरमाते हुए बता दिया की बांसुरी को परेशान देख उसने खुद भर दिया, बांसुरी ने अपना डेबिट कार्ड निकाल कर पान्डे के हाथ में रख दिया और उसे पासवर्ड बताने लगी__

  ” बांसुरी रहने दीजिये। किसी को अपना पासवर्ड बताना सुरक्षित नही।”

” क्या फर्क पड़ता है रोहित जी? सबसे कीमती चीज़ तो अन्दर है , उनके बिना इन सब का क्या मोल।”

   बांसुरी का चेहरा देख फिर किसी की कुछ कहने की हिम्मत नही हुई, पान्डे ने चुपचाप कार्ड रख लिया।
  बांसुरी ने अपना फोन निकाला, ढ़ेर सारे मिस्ड कॉल्स थे, कुछ उसके घर से, लगभग 8-10 भास्कर के और 2 पिंकी के।

    उसने सबसे पहले पिंकी को फ़ोन लगा लिया__

” हेलो हाँ बांसुरी! भाई कैसे हैं अभी? सुनो हमारी सुबह की फ्लाइट है , हम लगभग बारह बजे तक पहुंच जायेंगे , हमने अभी घर पर कहा नही है वर्ना बवाल मच जायेगा, तुम ऐसा करो भाई का फ़ोन चेक करना उसमें एक नम्बर होगा प्रेम सिंह चंदेल नाम से।
   ये भाई के सिक्योरिटी हेड हैं एक बार इनसे कॉल कर के बात कर लो, वो भी तुरंत पहुंच जायेंगे।
    वैसे भाई को हुआ क्या है बन्सी? डॉक्टर क्या बोल रहे?”

  अब तक हर बात में हाँ हूँ करती बांसुरी ने आखिरी बात के बाद आवाज़ नही आ रही कह कर फोन काट दिया।
     घर पर पापा को और भास्कर को सब ठीक है चिंता ना करें, काम की व्यस्तता है का मेसेज भेज कर अपना फ़ोन बैग में डाला और बैग से राजा का फ़ोन निकाल लिया।
    उसे पता था राजकुमार अजातशत्रु अपने फोन को लॉक नही रखते।

    फ़ोन खोलते ही स्क्रीनसेवर पर उसकी नज़र पड़ी, उसने ध्यान से देखा , किसी लड़की के पैरों की तस्वीर थी, झूले पर बैठे कोई लड़की सामने रेलिंग पर अपने दो सुंदर पैरों को एक दूसरे से क्रॉस किये रखी थी, तस्वीर में सिर्फ दोनों पैर नज़र आ रहे थे और नज़र आ रही थी एक सुनहरी पायल ……    उसे अचानक याद आया….. अरे हाँ ये तो उस दिन की तस्वीर थी।

अपनी तस्वीर राजा के फोन में देख उसकी आंखों में एक  चमक सी आ  गयी…..
     पर उसे छोड़ वो कॉन्टैक्ट लिस्ट की तरफ बढ़ गयी
लिस्ट में प्रेम सिंह चंदेल नाम ढूँढने में उसकी नज़र अपने नाम पर पड़ गयी, एक हल्की सी मुस्कान के साथ वो आगे बढ़ गयी, प्रेम का नाम मिलते ही उसने उसे कॉल लगा दिया, राजा के फोन से रिंग जाते ही उधर से तुरंत फोन उठा लिया गया__

  ” हुकूम !! कहाँ हैं आप?”

  भारी भरकम तेज़ तर्राट आवाज़ सुन कर बांसुरी चौंक गयी उसके मुहँ से एक धीमा सा हेलो ही निकला कि दुसरी तरफ वाले ने कड़कते हुए सवाल दाग दिया__
      ” आप कौन बोल रही हैं? फ़ोन तो कुंवर सा का है, वो कहाँ है इस वक्त?

  ” जी मैं बांसुरी बोल रहीं हूँ, राजा की फ्रेंड , इस वक्त राजा हॉस्पिटल में है , तबीयत कुछ नासाज़ हैं उनकी।”

  ” तबीयत कुछ नासाज़ होने से हॉस्पिटल में एडमिट तो नही करना पड़ता है, बात क्या हुई है साफ़ साफ़ बताइये, हैं किस शहर में?”

” जी बनारस !!”

  ” बनारस ?? ये तो उनके प्लान में नही था। ठीक है मैं अभी इसी वक्त निकल रहा हूँ ….

  ” सुनिये एक मिनट मेरी बात सुनिये । उनका कहना है अभी घर पर किसी को इस बारे में कुछ कहिएगा मत, सब घबरा जायेंगे ना। उन्होने सिर्फ आपसे कहने को कहा था।”

” हम्म। ठीक है फिर मैं अपनी गाड़ी से ही निकलता हूँ ।

    फोन बन्द करने के बाद बांसुरी के पास एक रोचक काम बाकी रह गया था, राजा के फ़ोन से खेलना, उसे पता था ये काम गलत है लेकिन इश्क़ करने वाले कहाँ इन सब सही गलत के फेर में पड़तें हैं……
    उसने अपना नाम देख कर खोला उसमें एक ट्यून असाइन की हुई थी, उसे सुनने का लोभ वो छोड़ नही पायी__
         राहें फिर मुड़ीं और साथी एक साथी मिल गया..

उसके चेहरे पर ऐसे समय में भी हल्की सी मुस्कान चली आयी….
    वहीं उसे एक सीक्रेट फोल्डर दिखा, जिसके ऊपर थंबनेल में फ्लूट बना था, उसे खोलते ही बांसुरी चकित रह गयी, उसमें उसकी एक तस्वीर थी।
    एक तस्वीर थी जिसमें उसके सिर्फ पैर नज़र आ रहे थे, उसे याद आया उस दिन उसने बहुत दिनों बाद पैरों में नेलपेंट लगाई थी, और दीदी की लाई हुई सुनहरी सी पायल पहनी थी, ये वही पायल थी जिसे घर पर पहन लेने के कारण उसकी ताई ने उसे टोक दिया था 

    “अरे बांसुरी बामणों की छोरियां पैर में सोना नही पहने हैं ये राजपुतानियों के शौक हैं, चल उठा के धर दे, तेरे किसी काम की ना है।” और उसी समय बांसुरी ने उतार कर पर्स में डाल ली थी जाने क्या ढूंढते में वो पायल हाथ लग गयी और उसने पहन ली थी उसे खुद उसके पैर बहुत सुंदर लग रहे थे , अपने पैरों को निहारती वो झूले में बैठी मुस्कुरा रही थी कि राजा वहाँ चला आया था __ ” क्या बात है मैडम कहाँ खोयी हुई हो?”

  ” अरे कहीं नहीं।”

  ” चोरी पकड़ी गयी तुम्हारी , अपनी ही पायल देख देख कर खुश हो रही हो ना , अच्छा लाओ तुम्हारी एक तस्वीर खींच दूँ।”

   और वो कुछ कह पाती उसके पहले ही राजा ने अपने फ़ोन पर उसकी तस्वीर ले ली थी।

” बैड मैनर्स ! ऐसे किसी लड़की की तस्वीर लेना अच्छी बात नही है।” मुस्कुरा कर बांसुरी के ऐसा कहते ही राजा हँस दिया__
      ” लड़की से इजाज़त लेकर ही खिंची है पर अगर लड़की नही चाहती तो लड़का तस्वीर डिलीट कर देगा।”

” चलो दिखाओ” पर बार बार कहने पर भी राजा ने उसे अपना फ़ोन नही दिखाया था, और कुछ देर बाद किसी और बात में व्यस्त होकर वो उस बात को भूल भी गईं थी, अपनी उस दिन की तस्वीर को वहाँ देख वो मुस्कुरा उठी थी, जैसे उस दिन की सारी यादें ताजा हो उठी थीं।
      राजकुमार अजातशत्रु वाकई बहुत डिसेंट हैं , एक ही तस्वीर उतारी वो भी पूछ कर , और आज तक उसे सहेजे रखा है।
      एक आंसू कोर से फिर ढलक गया….

” बांसुरी कब तक ऐसे बैठी रहेंगी कुछ खा लिजिये?”

  रोहित के ऐसा कहते ही उसकी अम्मा आलू के पराठों का डिब्बा खोल कर सबके लिये निकालने लगी__

” खा लो बिटिया ऐसन भूखा बैठने से का होई?”

   अम्मा का कंधे पर स्पर्श पाते ही बांसुरी एक बार फिर बिखर गयी, उसके मौन रूदन के आगे सभी चुप रह गये थे……..

    सबकी आंखें ओपरेशन थियेटर की तरफ थी ।लगभग 2 घण्टे बाद वही जूनियर डॉक्टर बाहर चला आया__

  ” ओपरेशन कर के गोली निकाल दी है…. अभी तो एनस्थिसिया के असर में हैं, कुछ देर में यहाँ से रुम शिफ्ट कर देंगे, आप में से कोई रिसेप्शन पर जाकर रूम्स के टाईप सेलेक्ट कर लिजिये।”

   बांसुरी ने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा__” मिल सकती हूँ “

  डॉक्टर ने ना में सिर हिला दिया फिर रो रो कर आंखों को सूजा बैठी बांसुरी को देख उसे भी तरस आ गया।
 
   ” जाइये एक बार बाहर से ही देख कर आ जाइये”

    डॉक्टर की बात सुन बांसुरी तुरंत ओटी के लिये चली गयी……

    ओटी के ठीक बाहर के रूम में राजा को शिफ्ट कर दिया गया था, कांच के दरवाज़े के बाहर खड़ी बांसुरी ने उसे देखा। सुबह के साढ़े चार बज रहे थे।
  
          उत्तर भारत के शहर बनारस के अस्पताल के मन्दिर में ठेठ दक्षिण भारतीय अंदाज़ में भगवान को जगाने की प्रार्थना ” सुप्रभातम ” सुब्बलक्ष्मी की आवाज़ में शुरु हो गयी थी।
     
    राजा के चेहरे पे बांसुरी की सुबह भी खिलने लगी थी…..

क्रमशः

aparna….

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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