जीवनसाथी -22

ओटी के ठीक बाहर के रूम में राजा को शिफ्ट कर दिया गया था, कांच के दरवाज़े के बाहर खड़ी बांसुरी ने उसे देखा। सुबह के साढ़े चार बज रहे थे।
  
          उत्तर भारत के शहर बनारस के अस्पताल के मन्दिर में ठेठ दक्षिण भारतीय अंदाज़ में भगवान को जगाने की प्रार्थना ” सुप्रभातम ” सुब्बलक्ष्मी की आवाज़ में शुरु हो गयी थी।

जीवन साथी – 22

  ओटी के ठीक बाहर के रूम में राजा को शिफ्ट कर दिया गया था, कांच के दरवाज़े के बाहर खड़ी बांसुरी ने उसे देखा। सुबह के साढ़े चार बज रहे थे।
  
          उत्तर भारत के शहर बनारस के अस्पताल के मन्दिर में ठेठ दक्षिण भारतीय अंदाज़ में भगवान को जगाने की प्रार्थना ” सुप्रभातम ” सुब्बलक्ष्मी की आवाज़ में शुरु हो गयी थी।
     
    राजा के चेहरे पे बांसुरी की सुबह भी खिलने लगी थी…..

    पिछली सुबह राजा के साथ जो खाया पिया था उसके बाद से बांसुरी के मुहँ में पानी की एक बूंद तक नही गयी थी, पर उस समय ना उसे भूख का ध्यान था ना प्यास का।

     थोड़ी देर बाद रोहित कैन्टीन से सबके लिये चाय ले आया , अम्मा जी ने बांसुरी की तरफ गिलास बढ़ा दिया, उसने बहुत नफासत से वो गिलास उन्हें वापस कर दिया __

   ” अरे दीदी चाय तो पी लो, रात भर की जगी हो,कल से कुछ खाया भी नही , सिरदर्द हो जायेगा ऐसे तो।”

  ” एक बार ये आँखें खोल दे फिर सब ले लूंगी, चाय पानी। अभी जी ही नही कर रहा।
  बहुत देर बाद बांसुरी के मुहँ से कुछ सुन कर सभी ने राहत महसूस की __

” ठीके बोल रही हैं बिटिया! ऐसन तप और कौन किया रहा जानते हो?पार्बती मैय्या , भोले भंडारी को पाने के लिये।
   जब समुद्र मंथन से गरल निकला तो ना सुर ना असुर कोई आगे नही आया रहा , तब हमरे भोला भंडारी उठा के पूरा हलाहल पी डारे, कहतें हैं एको बूंद जो गिरने पाती तो पूरी धरती को जरा डारती।”

” तभी पार्बती मैय्या बरत की रही का कि महादेव सुवस्थ हो जाएँ।”
     पान्डे को अम्मा की कहानी में बड़ा रस मिल रहा था __
   ” अरे नही तब नही की,ऊ तो महादेव को पाने के लिये बरत की भादो मास में , अन्न जल सब जब छोर दी रहीं तब ऊपर कैलास में बैठे शिव शंभू का आसन डोल गया और उनकी साधना टूट गयी तब परभु मैय्या के सामने परकट हुए और बोले तुम्हें का चाही बोलो और वर मांग लो।
    तब पार्बती मैय्या उन्हें परनाम कर बोली- परभु हमें तो आप ही चाहिए वर के रूप में, दे सकतें हैं तो यही वर दे दीजिये।
    अगर आप हमरी तपस्या से पर्सन्न हैं तो हमें अपनी अर्धन्गिनी बना लिजिये।
   परभु तथास्तु बोल आसिर्बाद दिये और उसके बाद खूब धूम धाम से परबतराज की कन्या यानी पार्बती मैय्या का ब्याह शिव जी से हो गया।
   तुम भी चिंता ना करो बिटिया, जान के तो किया नही पर तुमने भी जो बरत किया है उसका फल ज़रूर मिलेगा ये बुढ़िया का आसिर्वाद तुम्हरे साथ है , तुम्हरे आदमी को कुछ नही होगा।”

    इतने कठिन समय में भी अम्मा की बातें सुन बांसुरी मुस्कराये बिना ना रह सकी, उसने आगे बढ़ उनके पैर छू लिये__
   ” अरे रुको! बिटियन से हम गोड़ ( पैर) ना छुआब ” कह उन्होने उसे गले से लगा लिया।

एक नर्स उसी समय बाहर चली आयी__

  ” ओटी पेशेंट राजकुमार को नम्बर ट्वेंटी वन रुम में शिफ्ट कर रहे हैं, कौन है उसके साथ , आ जाइये।”

  ” ई का हमर मरीज के बारे में बोल गयी ।”

  ” हाँ अम्मा “

   ओटी का दरवाज़ा खुलते ही स्ट्रेचर पर राजा को लिये दो वार्ड बॉय के साथ दो नर्स और एक लेडी डॉक्टर रुम की तरफ आगे बढ़ गये,उनके पीछे बांसुरी और बाकी लोग भी बढ़ चले।

    रूम में राजा को बैड पर शिफ्ट करने के बाद डॉक्टर नर्स को कुछ ज़रूरी हिदायतें देने के बाद बाकी लोगों की तरफ मुखातिब हुई__

  ” आप सब ज़रा बाहर चले जायें, पेशेंट की ड्रेसिंग कर के स्पंज करना है।
   बांसुरी की तरफ देख उसने उसे रुकने का इशारा किया__
         ” आप रुक जाइये, आपकी ज़रूरत पड़ेगी।”

   बांसुरी की हिचकिचाहट को देख कर डॉक्टर मुस्कुरा उठी, सबके बाहर जाते ही वार्ड बॉय भी स्ट्रेचर लिये बाहर निकल गये, उनके जाते ही नर्स ने दरवाज़ा बन्द कर दिया।
    लेडी डॉक्टर ने नर्स के साथ साथ बांसुरी को भी राजा की ड्रेसिंग कैसे करना है ये समझाना शुरु कर दिया__

   ” देखिए यहाँ से तो तीन दिन में हम डिस्चार्ज कर ही देंगे उसके बाद भी आपको घर पर कम से कम पन्द्रह दिन तक ड्रेसिंग करनी होगी, इसलिये ध्यान से देख लिजिये , ऑपरेशन के तुरंत बाद हल्की ड्रेसिंग इसिलिए की थी की दो घण्टे बाद एक बार ज़ख्म देख कर फिर कर दी जाये।”
    डॉक्टर समझाते हुए अपना काम भी करती जा रही थी, ड्रेसिंग कैसे करना है, पट्टी कैसे बांधनी है सब कुछ
समझा कर उसने एक बार बांसुरी की तरफ देखा__

  ” आप समझ तो गयी ना, दवाएं भी आपको बता देंगे , अभी तो पेनकिलर इन्जेक्टेबल दिया जा रहा है बाद में गोलियाँ देंगे पर अगर इन्हें दर्द ज्यादा हुआ तो इंजेक्शन भी लगाना पड़ सकता है आपके घर के आसपास कहीं कोई नर्स हो तो आप उससे पहले से ही बात करके रखिएगा , एक बात और है इनके बांह में गोली लगी है वह भी राइट साइड में ऐसे में इनको इस हाथ को उठाने में अभी बहुत वक्त लगेगा। हो सकता है 2 महीने लगे, हो सकता है 6 महीने भी लग जाएं, एक बात और हो सकती है कि शायद यह हाथ कभी भी काम ना आये, मेरा मतलब इस हाथ से अपाहिज भी….आप समझ रही हैं ना?”

  बांसुरी ने चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया।

  डॉक्टर सारी बातें बांसुरी को समझाती रही और साथ ही नर्स राजा को स्पंज भी करती रही।

” ये देखिए, ये युरिन बैग टांग रखा है, अभी इन्हें ड्रिप लगी है इसलिये लगभग हर दो से तीन घण्टे में इसे खाली भी करना होगा, आपको करने की ज़रूरत नही है आप सिस्टर को याद से कह दीजियेगा, ये एक दवा है जिसे इन्हें रात में दस बजे खिलानी है और इसे सुबह खाली पेट में। आज तो पूरा दिन सोल्यूशन पर ही हैं कल इनकी प्रोग्रेस देख कर आगे का बताऊँगी।
एक बात और ये जब भी होश में आये पानी माँगेंगे लेकिन इन्हें पानी पिलाना नही है सिर्फ कॉटन से आप इनके होंठ भीगा दीजियेगा, ब्लड फ्लो प्रोपर रहे इसलिये दो दिन बाद फ़िज़ीयोथेरेपी वाली आयेंगी वो थोड़ा हाथों और पैरों में मसाज दे देंगी।”

  ” क्या अभी भी हाथों पैरों में मसाज कर सकतें हैं?”

” हाँ बिल्कुल! सिर्फ उंगलियों पर ही करना है जिससे रक्त संचरण पोरों तक अच्छे से होता रहे, आपको कोई भी समस्या हो तो आपके कमरे से दायीं तरफ ही सिस्टर जंक्शन है, वहाँ सिस्टर मिल जायेंगी, मैं दोपहर 2 तक ड्यूटी पर हूं उसके बाद दूसरे डॉक्टर रहेंगे, कोई भी समस्या होने से आप हमसे इंटरकॉम पर बात कर सकती हैं, मैं दो बजे के पहले एक बार और आऊंगी।”
 
  डॉक्टर ने जाते हुए मुस्कुरा कर बांसुरी का कन्धा थपथपाया और बाहर निकल गयी__” डोंट वरी!! सब ठीक हो जायेगा।”

  ” आपको कुछ भी चाहिए तो ये बेल बजाना मैं बाहर ही हूँ।” नर्स भी डॉक्टर के जाने के बाद बाहर चली गयी, उन लोगों के जाते ही रोहित ,पान्डे और अम्मा अन्दर चले आये….

   सभी कल रात से यहीं थे, बांसुरी ने सब को ज़िद कर के घर भेज दिया, पान्डे को अपने होटल का पता बता कर वहाँ से अपना और राजा का बैग भी मँगवा लिया।
     रोहित के बार बार गुजारिश करने पर कि आप भी कुछ देर के लिये होटल जाकर फ्रेश होकर आ जाइये वो नही मानी, आखिर उसकी ज़िद पर पहले रोहित और अम्मा निकले उनके कुछ देर बाद उसने पान्डे को भी एक तरह से धकिया कर ही घर के लिये भेज दिया, सभी उसके साथ कल रात से जागे थे।

    सबके जाते ही वो वापस राजा के पास आ बैठी__

        ” कभी सोचा नही था राजा जी कि आपके साथ ऐसे अकेले एक कमरे में वक्त गुजारने मिलेगा, अब जल्दी जल्दी से अच्छे हो जाइये आप। अब मैं बिल्कुल इमोशनल नही होंगी ना ही रोना गाना करूंगी, थक गयी मैं कल से रो रो कर। अब तो बस मुस्कुराना है और तुमसे ढ़ेर सारी बातें करनी है। तुमसे पहली मुलाकात से लेकर आज तक की बातें ! हमारी जो बातें एक सी है उनसे लेकर जो कुछ अलग है उसकी बातें। ढ़ेर सारी बातें…..

  जानते हो कल जब तुम्हें अचानक मेरे पास से ले गये तब मुझे तुम्हारे होने का तुम्हारे अस्तित्व का एहसास हुआ, मुझे एहसास हुआ इस बात का कि मैं तो दूध में पानी सी चाय में चिनी सी तुम में घुल चुकी हूँ । कल समझ आयी ये बात कि हम एक दूसरे से अलग है ही नही हम तो एक ही हैं।
     जानते हो राजा जब पहली बार तुम्हें देखा था ट्रेन में तब भी उस पहली नज़र में मुझे तुम में कोई अजनबी नज़र ही नही आया, वर्ना आज तक मैने कभी ट्रेन में किसी लड़के क्या किसी लड़की तक से बात नही की, पर तुमसे, तुमसे तो बातें करने से लेकर तुम्हारी सीट शेयर करने तक किसी पल में भी तुम पराये लगे ही नही, तुम्हारी गैरहाज़िरी में तुम क्या सुन कर खुश थे वो जानने के लिये तुम्हारे मोबाईल से गाना भी सुन लिया बाद में मैं खुद सोच के परेशान थी कि आखिर क्यों मैं एक अनजान हमसफर का मोबाइल ऐसे हक से सुन ले रहीं हूँ….. पर कल मेरे दिल ने इन सारे सवालों के जवाब दे दिये।
  जन्मों का साथ शायद इसे ही कहतें होंगे ना राजा!!

      तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो ये अभी भी पूरी तरह मुझे समझ नही आया क्योंकि हो सकता है उस दिन गलती से फोटो डिलीट करना भूल गये होगे खैर, अब मुझे फर्क भी कहां पड़ता है, मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ यही फीलिंग अपने आप में बहुत खूबसूरत है।”

   राजा से अपने मन की बात कहती बांसुरी धीरे धीरे उसका हाथ थामे उसकी उंगलियों के पोरों को हल्के हाथों से मसाज भी करती जा रही थी।

    धीमे से उसने राजा का हाथ बेड पर रखा और वॉशरूम की तरफ चली गई कुछ देर में मुंह हाथ धोकर वह वापस एक बार कमरे में चली आई अबकी बार अपने स्टूल  को उसने राजा के पैर तरफ रख लिया राजा के दोनों पैरों को अपने हाथों में थामे वह धीरे-धीरे उंगलियों की पोरों पर मसाज करने लग गई।
   राजा के पैरों पर हाथ रखते ही एक बार फिर उसकी आंखों में आंसू भर आये लेकिन उन्हें उसने गिरने नही दिया ,धीरे से झुक कर उसने राजा के पैर चूम लिये__

   ” राजा जी!! आपकी बांदी आपकी बांसुरी ज़िंदगी भर आपकी गुलामी करने को तैय्यार है, बस जल्दी से अच्छे हो जाओ, देखो बाहर कितना सुंदर मौसम है , हवाएं चल रही हैं बारीश हो रही है, तुम्हें याद है उस शाम जब तुम बालकनी में बैठे कुछ सोच रहे थे और मैं कॉफ़ी बना कर ले कर आयी थी, तभी बाजू वाली बालकनी में शर्मा आंटी की बेटी एफ एम पर एक गाना सुन रही थी, उसका ध्यान हम दोनो पर ही नही था लेकिन मेरे सामने जब वो गाना चल रहा था तो तुम कैसे झेंप गये थे ,एकदम लड़कियों से गुलाबी हो गये थे, चलो आज तो यहाँ कोई नही है आज तुम्हें मैं वही गाना सुनाती हूँ __

         यूँ ही बरस-बरस काली घटा बरसे
             हम यार भीग जायें
         इस चाहत की बारिश में
        मेरी खुली-खुली लटों को सुलझाये
            तू अपनी उंगलियों से
           मैं तो हूँ इस ख्वाहिश में
          सर्दी की रातों में ……
      ज़रा ज़रा बहकता है महकता है आज तो मेरा
    तन बदन मै प्यासी हूँ मुझे भर ले अपनी बाहों में

अपनी धुन में मगन बांसुरी का गाना खत्म ही हुआ था कि दरवाज़ा खोल कर नर्स चली आयी __

  ” युरिन बैग खाली करना था मैम ” बोल कर अन्दर आयी नर्स ने बैग को खाली देख अचरज से बांसुरी की तरफ देखा __

   ” जी अभी कुछ देर पहले ही मैने खाली कर दिया।”

   ” ओके! But नेक्स्ट टाईम यू कैन टेल मी..”

   नर्स बाहर जाते हुए थोड़ा रुकी और बांसुरी की तरफ देखने लगी__
    ” मैडम आप कल रात से जाग रही हैं, यहाँ अटैंडर के लिये भी बैड लगा है, आप भी सो जाइये, अभी आपके मरीज़ को होश में आने में समय लगेगा।”
   मुस्कुरा कर वो बाहर चली गयी।

  बांसुरी उसे कैसे समझाती कि ये कीमती वक्त वो खोना नही चाहती है कुछ ही देर में पिंकी, प्रेम सिंह चंदेल, पांडे रोहित सब के सब चले आयेंगे तब क्या उसे ऐसा सुनहरा एकान्त मिल पायेगा जहां सिर्फ वो और उसका राजा है। स्वभाव से लज्जालू बांसुरी को पहली बार अपने मन की बात करने का सुअवसर मिला था जिसे वो किसी कीमत पर खोना नही चाहती थी। एक बार फिर वो राजा के पैरों के पास बैठने जा रही थी कि उसे लगा राजा के होंठ कुछ बुदबुदा रहे हैं, वो उसके चेहरे के पास चली आयी , उसने बहुत ध्यान से सुनने की कोशिश की, पर कुछ भी समझ नही आया , उसने धीरे से थोड़ी सी रुई को पानी में भिगोया और राजा के होंठों पर रख दिया , होंठ एक बार फिर हल्के से खुले __” बां….. सुरी…..

   ” हाँ मैं यही हूँ, कहो! क्या चाहिए ” खुशी से दो बूंद फिर ढलक आये बांसुरी ने राजा का हाथ थाम लिया। तभी दरवाज़े पर एक हल्की दस्तक हुई और दरवाज़ा खोले रोहित पिंकी के साथ अन्दर दाखिल हुआ।

  पिंकी भाग कर राजा के पास पहुंच गयी__

” भाई तो बेहोश हैं इन्हें हुआ क्या है बंसी ?”

  ” इन्हें गोली लगी है।” रोहित ने आगे बढ़ कर बांसुरी की मुश्किल हल कर दी उसे समझ आ गया था बांसुरी बार बार इस बात को दोहराने में कितना कष्ट अनुभव कर रही थी।
    सारी बातें सुन कर पिंकी के आंसू भी नही थम रहे थे__ ” हम तो हमेशा कहते थे पर भाई किसी की सुनते ही नही ….. इनकी जान के दुश्मन कम थोड़े ही हैं।”

” क्या आप इस बारे में कुछ और बता सकती हैं जिससे मुझे कोई क्लू मिले कि आखिर गोली किसने चलाई होगी।”

  ” बहुत ज्यादा तो हम भी नही जानते पर ये जानते हैं कि ऐसा भाई के साथ पहली बार नही हुआ। हम सब छोटे ही थे तभी से इनके साथ कुछ ना कुछ ऐसा घटता ही रहता है।
     एक बार की बात है हमारे यहाँ के सालाना जलसे में हमारे रीति रिवाजों के अनुसार घर के सभी राजकुमारों को घुडसवारी और बाकी कलाओं का प्रदर्शन करना होता है उस समय भाई सिर्फ सत्रह के हुए थे, उनका खास और सबसे प्यारा घोड़ा ज़ोराब है जिस पर भाई जाने कितनी बार सवारी कर चुके थे ,अचानक घुडसवारी वाली प्रतियोगिता के दिन बिदक गया, और बहुत ज़ोर से भागते हुए उसने भाई को पटक दिया था, जब बाद में खोजबीन हुई तो पता चला कि ज़ोराब को घुड़दौड़ की सुबह ही उसके जैसे दिखने वाले घोड़े से बदल दिया गया था, और साथ ही उसे कोई नशीली चीज़ भी खिलायी गयी थी।
   ये सब किसने किया पता नही चल पाया।
भाई के इक्किसवें जन्मदिन पर भी हमारे कुलदेवी  मन्दिर से दर्शन कर निकलते समय उन्हें एक भाला लगभग छू कर निकल गया, और क्या क्या बतायें बंसी । हमें खुद समझ नही आता कि हमारे घर पर आखिर भाई का दुश्मन है कौन।
     बनारस में पढ़ाई के दौरान भाई ने यहाँ किसी को अपना असली परिचय नही दिया था पर अन्तिम वर्ष आते आते उनकी फैकल्टी को पता चल ही गया और उसके बाद बनारस में भी उन पर दो बार जानलेवा हमले हुए उसी के बाद गुस्से में काका साहब उन्हें यहाँ से ले गये और लन्दन भेज दिया आगे की पढ़ाई के लिये।
    अभी पिछले साल ही तो लौटें हैं, अब काका साहब भी चाहतें हैं कि भाई सब संभाल लें, पर उनकी जान की फिक्र के कारण ही कहीं जाने नही देते।
   अभी रायपुर में उनके बनारस की पढ़ाई के दौरान बने किसी दोस्त की शादी थी जिसमें शामिल होने के लिये उन्होने बड़ी मुश्किल से काका साहब को मनाया था, छोटी माँ के कहने पर ही काका साहब तैय्यार हुए थे और भाई को इजाज़त दे दी थी पर…..

   ” पर क्या पिंकी?”

  ” पर भाई को कहीं भी अपने राजसी ठाठ बाट दिखाने से हमेशा ही आपत्ति होती है इसी चक्कर में वो अपनी सिक्योरिटी को भी साथ नही ले जाना चाहते थे पर काका साहब की ज़िद के कारण उन्होनें बस प्रेम को अपने साथ रखा और रायपुर पहुंच कर उसे भी इमोशनल ब्लैकमेल कर वापस भेज दिया। पता नही कैसा शौक है भाई का। लोग इनके जैसा जीवन पाने को तरसतें होंगे और ये हैं कि हर राजसी शान शौकत को ठुकरा कर आम आदमी बने रहना चाहते हैं।
  रायपुर में शादी के एक दिन पहले भाई ने अपने दोस्त के लिये बैचलर पार्टी रखी थी ” मेफेयर” में।
  अब वहाँ पार्टी के दौरान पता नही किसने कैसे क्या मिलाया भाई की ड्रिंक्स या खाने में … वो तो अच्छा था उन्होने ज्यादा खाया पिया नही था। थोड़ी देर में ही उन्हें वोमिटिंग हो गयी, इसी बात पर वहाँ की कैटरिन्ग मैनेजर से उनके एक दोस्त की ज़रा बहस क्या हुई उस लड़की ने इन सब पर ड्रिंक कर के बदतमीज़ी करने का इल्जाम लगा दिया, बात को बढ़ते देख भाई ने दोस्तों को समझा बुझा कर वहाँ से निकलने में ही भलाई समझी, क्योंकि शायद वो समझ गये थे कि वहाँ भी वो उस वक्त सुरक्षित नही थे, काका साहब को कुछ भी बताने का मतलब था तुरंत घर लौटना और भाई को दस दिन की पर्मिशन मिली थी इसिलिए उन्होने घर पर कुछ भी बताने से मुझे मना कर दिया और सीधा मेरे पास चले आये।

  ” ओह तो इसिलिये ये गन साथ ही रखतें हैं।”

  ” हाँ बांसुरी!! काका साहब ने इन्हें इनके जन्मदिन पर दी थी, तबसे हमेशा साथ रखतें हैं।”

   बांसुरी ने पिंकी को पानी के लिये पूछा और उठ ही रही थी कि उसका ध्यान गया इतनी देर से उसने राजा का हाथ थामा था जिसे नीम बेहोशी में राजा ने ज़ोर से पकड़ रखा था। अपने हाथ को देख कर उसका ध्यान पिंकी पर गया, पिंकी के चेहरे पर कुछ रंग आये और चले गये, उसने खुद उठ कर पानी पी लिया , उसके चेहरे के बदलते रंगों को देख बांसुरी ने राजा के हाथों से अपना हाथ धीरे से अलग कर लिया……

क्रमशः

aparna….

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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