जीवनसाथी – 23

बांसुरी ने पिंकी को पानी के लिये पूछा और उठ ही रही थी कि उसका ध्यान गया इतनी देर से उसने राजा का हाथ थामा था जिसे नीम बेहोशी में राजा ने ज़ोर से पकड़ रखा था। अपने हाथ को देख कर उसका ध्यान पिंकी पर गया, पिंकी के चेहरे पर कुछ रंग आये और चले गये, उसने खुद उठ कर पानी पी लिया , उसके चेहरे के बदलते रंगों को देख बांसुरी ने राजा के हाथों से अपना हाथ धीरे से अलग कर लिया……

जीवनसाथी- 23

  बांसुरी ने पिंकी को पानी के लिये पूछा और उठ ही रही थी कि उसका ध्यान गया इतनी देर से उसने राजा का हाथ थामा था जिसे नीम बेहोशी में राजा ने ज़ोर से पकड़ रखा था। अपने हाथ को देख कर उसका ध्यान पिंकी पर गया, पिंकी के चेहरे पर कुछ रंग आये और चले गये, उसने खुद उठ कर पानी पी लिया , उसके चेहरे के बदलते रंगों को देख बांसुरी ने राजा के हाथों से अपना हाथ धीरे से अलग कर लिया……

  ” तुम थक गयी होंगी पिंकी, चाहो तो कुछ देर होटल जाकर आराम कर लो, शाम तक वापस आ जाना।”

” थक तो तुम भी गयी होंगी बांसुरी, आखिर कल रात से यहीं हो, अच्छा ये रहेगा कि तुम जाकर आराम कर लो, हम यहीं रहेंगे भाई के पास।”

      कुछ क्षण पहली की पक्की सहेलियों के बीच जैसे एक अदृश्य दीवार खड़ी हो गयी, जाहिर था राजा अगर उनमें से एक का भाई था तो दूसरी का सब कुछ!
   
      मज़ाक में अपने भाई से अपनी सखी के ब्याह की बात करना और बात है लेकिन अपने जाने बिना अगर सखी प्राणप्रिय भी हो तब भी अपना भाई तो अपना भाई ही होता है।  ऐसे कैसे किसी लड़की की हिम्मत हो गयी वो भी उसके  भाई का हाथ थामने की।
   
     क्या बांसुरी भूल गयी कि उसकी सगाई हो चुकी है, दो महीने भी नही बचे शादी को और यहाँ किसी और लड़के का हाथ थामे बैठी है।  बुरा तो उसे राजा भैय्या का बांसुरी के साथ बनारस जाना भी लगा था पर अपने भाई के मददगार स्वभाव से वो परिचित थी, बचपन से उसने अपने भाई को हर किसी की मदद करते देखा था, राजा का यूँ बांसुरी की मदद करना उसकी नजरों में गलत नही था लेकिन बांसुरी का इस तरह उसके भाई का हाथ पकड़े बैठना गलत ही नही अक्षम्य अपराध था।
      
  “तुमने हमें पूरी बात क्यों नही बताई बांसुरी, कम से कम हम घर पर सबको बता तो देते।” पिंकी के तेवर बदले से थे….
  पिंकी के इस हमले के लिये बांसुरी तैय्यार ना थी वो तो अब तक अपनी ही सपनीली दुनिया में खोयी थी जहां उसके और राजा के अलावा कोई ना था, ना राजा का राजपाट ना उसकी सगाई, हर बात से जैसे उसने मुहँ मोड़ रखा था।

  ” मुझे लगा तुम घबरा जाओगी पिंकी। तुम अकेली भी थी वहाँ, पर तुमने जो नम्बर कहा था उस नम्बर पर मैंने फ़ोन कर दिया है।”

” ठीक है भाई का फ़ोन कहाँ हैं? लाओ मुझे दो, मेरे फ़ोन पर प्रेम भैय्या का नम्बर नही है?”

  बांसुरी को जैसे सांप सूंघ गया था, कभी दिल के इतने करीब बसी पिंकी से आज ऐसा डर क्यों लग रहा था पता नही, लेकिन राजा का फ़ोन पिंकी को एकबारगी देने में उसे हिचकिचाहट सी होने लगी। उसी समय पिंकी के फ़ोन पर किसी का कॉल आया और वो फ़ोन लिये कमरे से बाहर निकल गयी, बांसुरी ने झट राजा का फ़ोन खोल कर स्क्रीनसेवर बदल दिया, राहत की सांस ले उसने फ़ोन वापस टेबल पर रखा और नज़र ऊपर उठाई ही थी कि रोहित को खुद को देखते हुए पाया।
    अचानक उसे कोई कैफ़ियत नही सूझी वो बस मुस्कुरा कर नीचे देखने लगी, सत्ताईस अट्ठाईस साल का लड़का वो भी पुलिस वाला उसकी नजरों से क्या छिप सकता था? उसने भी बांसुरी को बुरा ना लगे इसलिये कोई पूछताछ नही की….

दोपहर हो चुकी थी, पर राजा को अब तक होश नही आया था, पिंकी राजा के सिरहाने उसका हाथ थामे बैठी थी, बांसुरी राजा के पैरों की तरफ लगे स्टूल पर चुपचाप बैठी खिड़की से बाहर देख रही थी, उसे पिंकी की नाराज़गी समझ आ रही थी, कोई और वक्त होता तो वो उसे गले से लगा कर मना लेती लेकिन एक अनजान शहर में उसी के कारण पिंकी का भाई इतनी बड़ी मुसीबत में पड़ा था, आखिर किस मुहँ से वो पिंकी से कुछ कहती, और कहती भी तो क्या कहती।

  एक दो इधर उधर की बातों के अलावा फिर पिंकी ने बांसुरी से कोई और बात नही की, रोहित के बार बार कहने पर आखिर बांसुरी वहाँ से जाने को तैयार हो गयी, जाते वक्त उसने पिंकी से बहुत प्यार से पूछा भी कि वो उसके लिये खाने के लिये क्या लेती आये लेकिन गोलमोल सा जवाब देकर पिंकी वापस अपने फ़ोन में भिड़ गयी।
    आंखों में आये तिरस्कार के आंसू छिपाये बांसुरी ने एक बार राजा को भर नज़र देखा और अपना पर्स उठाये रोहित के साथ ही बाहर निकल गयी__

” अगर आप सहीं समझे तो मेरे घर भी चल सकती हैं। अम्मा भी हैं घर पर ।”

   रोहित की बात पर बांसुरी भी भावुक हो गयी लेकिन इसे इस वक्त एकान्त की ही आवश्यकता थी, रोहित से कह कर वो अपने होटल ही रुक गयी, एक घण्टे बाद उसे वापस लेने आने का बोल रोहित वहाँ से निकल गया।

   अपने कमरे में पहुंच कर बांसुरी एक बार फिर बिखर गयी, उसे खुद भी पता नही था कि ये आंसू क्यों कर भला बह रहें हैं, राजा की फिक्र के आंसू हैं या पिंकी की नाराज़गी के।
    रो धोकर फुरसत होने के बाद बांसुरी ने अपना और राजा का बिखरा सामान समेट कर रखा और नहाने घुस गयी।
    नहा कर तैय्यार होते में उसके फ़ोन पर रोहित का फ़ोन आ गया, और कुछ ज़रूरी सामान अपने बैग में भर कर वो रोहित के साथ हॉस्पिटल निकल गयी।

  राजा के कमरे में उसके बैड के पास ही दीवार से लगे बैड पर थकी हारी पिंकी भी सो रही थी,इतनी देर बाद सोती पिंकी के चेहरे पर वही पहली वाली मासूमियत देख बांसुरी को थोड़ी राहत मिली, आश्चर्यजनक रूप से दोनों भाई बहन के नाकनक्श मिलते थे, वही तीखी नाक वैसी ही रेशमी पलकें।
    उसे सोते देख बांसुरी एक बार फिर राजा के पास खड़ी हुई उसे निहार ही रही थी कि एक बार फिर दरवाज़ा खुला और काले रंग के सूट बूट में सजा एक छै फुट का उंचा चौड़ा लड़का अन्दर चला आया।
  उसके पीछे कोई दो लोग और थे जिन्हें उसने इशारे से बाहर रुकने कह दिया।

   दरवाज़े की आवाज़ पर पिंकी की नींद टूट गयी, दरवाज़े पर खड़े प्रेम पर नज़र पड़ते ही वो एक बार फिर भावुक हो गयी__

  ” हुकुम की तबीयत कैसी है अभी बेबी साहब, इन्हें हुआ क्या है?”

  पिंकी के सब कुछ बताते ही प्रेम की मुट्ठियाँ गुस्से में भींच गईं__
   ” सौ सौ बार सबने समझाया है पर हुकुम किसी की माने तब ना, राजपूती खून है बस अपनी ज़िद पर अड़ जातें हैं। “

  ” भाई को समझाना बहुत मुश्किल है , पर आपने उन्हें रायपुर में अकेला छोड़ा ही क्यों? सारा फसाद वहीं से तो शुरु हुआ है?”

” क्या बताऊँ बेबी साहब! मैं तो इन्हें एक सेकंड के लिये भी अकेला ना छोडूं पर राजा साहब की ज़िद के आगे घुटने टेक जाता हूँ “

   इतनी देर में पिंकी से बात करते हुए प्रेम की तीखी नजरें  कमरे का मुआयना करने के बाद बांसुरी पर अटक गईं__” आप ही ने शायद हमें फोन किया था।”

  उस तेज़ तर्राट लड़के के सामने बांसुरी और दब कर रह गयी, धीरे से हाँ में सिर हिला कर वो एक ओर चुपचाप खड़ी रही, रोहित पहले ही वहाँ से निकल चुका था, कमरे में उस राजसी खानदान के अलावा अकेली बांसुरी सहमी सी चुपचाप खड़ी थी।

” आपने कुछ खाया बेबी साहब?”

” हाँ सुबह कुछ खा लिया था, पर अभी चाय की बहुत ज़रूरत लग रही।”

” ठीक है हम लेकर आते हैं, आप भी कुछ लेंगी?” बांसुरी को देख कर प्रेम ने अपना सवाल उछाल दिया, ऐसी नाज़ुक सी घबराई सी लड़की को देख उसे भी तरस आ रहा था,और वो भी जितना सम्भव हो अपनी वाणी में मिठास भर कर ही बांसुरी से बात कर रहा था पर उसके प्रोफेशन का अक्खड़ पना उसे ज्यादा मीठी बातें करने से रोके था।
    एक बार फिर चौंक कर बांसुरी ने ना में सिर हिला दिया__
” रुकिये हम भी नीचे चलते हैं, यहाँ बैठे बैठे टाँगे और सिर में दर्द हो गया, थोड़ा चलेंगे फिरेंगे तो राहत मिलेगी, तुम कुछ लोगी बांसुरी?”

  ना कह कर बांसुरी दूसरी ओर देखने लगी, कमरे से पिंकी और प्रेम के निकलते ही उसने राहत की सांस ली।
    मन ही मन राजा के अच्छे होने की प्रार्थना करती बांसुरी की नज़र वहाँ लगी मशीन पर पड़ी जिसपे राजा की पल्स और हार्ट रेट ई सी जी नज़र आ रहा था  उसने देखा उसे ई सी जी की आड़ी टेढ़ी लकीरें सीधी सी चलती नज़र आयीं, उसने अब तक फ़िल्मों में ही देखा था_ ई सी जी का सीधा सपाट चलना अच्छा लक्षण नही था इसीसे एकबारगी चौंक कर वो राजा के पास पहुंच गयी , उसके सीने पर हाथ रखे उसने उसकी धड़कन जानने की कोशिश की पर अनुभवहीन हाथों को धड़कनों का अंदाज़ा नही हुआ, उसने धीरे से अपना कान राजा के सीने पर रखा और आँख बन्द कर पूरा ध्यान उसकी धड़कनों को सुनने में लगा दिया।

    कुछ सेकंड्स की खामोशी के बाद लब डब की आवाज़ उसके कानों में गूंजने लगी , एक चैन की सांस लेकर वो उठने ही जा रही थी कि उसे अपने बालों पर राजा का हाथ महसूस हुआ और कानों में एक बहुत धीमी सी आवाज़ जैसे राजा कहीं दूर से उसे पुकार रहा हो__” मुझे कुछ नही होगा बांसुरी, तुम्हारे लिये जीना है मुझे!

   धीरे से उठ कर उसने देखा राजा की आंखे उसे देख मुस्कुरा रही थी, खुशी से उसके आंसू छलक उठे।
राजा ने इशारे से उसे रोने के लिये मना किया , अपने आंसू पोंछती वो उठी और वापस उस मशीन के पास खड़ी हुई तब ध्यान से देखने पर उसे समझ आया कि राजा के हाथ में लगी लिड हिल जाने के कारण मशीन में गलत रिपोर्ट आ रही थी, अपने माथे पर अपने ही हाथ से धीरे से एक चपत लगा कर वो राजा की तरफ मुड़ गयी__

  ” कुछ चाहिए राजा साहब, पानी या और कुछ?”

  पर उसका सवाल इस बार हवा में ही खो कर रह गया, सुनने वाला उसका सवाल सुनने के पहले ही एक बार फिर अपनी नींद में जा चुका था, फिर भी इस बार बांसुरी को तसल्ली थी। उसे डॉक्टर पहले ही बता चुकी थी कि एकाएक होश में आने की बजाय मरीज़ ऐसे ही धीरे धीरे होश में आतें हैं।

  बाहर से पिंकी भी प्रेम के साथ कमरे में कुछ खाने का सामान पानी की बोतल और दो कप में चाय लिये आ गयी, सारा सामान टेबल पर रख उसने चाय बांसुरी की ओर बढ़ा दी।
    चौबीस घण्टे से ज्यादा हो चुका था बांसुरी को चाय पानी या कुछ भी लिये हुए, सिर में हल्का दर्द भी शुरु हो चुका था उसने पिंकी के हाथ से चाय ले ली, हालान्की उसके बार बार कहने पर भी बांसुरी से कुछ खाया ना गया।
   कमरे में दो से ज्यादा लोग रुक नही सकते थे इसलिये प्रेम नीचे चला गया , बांसुरी अपनी जगह पर और पिंकी अपने भाई के पास वाली स्टूल पर आ बैठी, तभी पिंकी का फ़ोन घनघना उठा। वो फ़ोन लिये बाहर निकल गयी __

” हाँ रतन उस समय ठीक से बात नही कर पा रही थी, प्रेम भैया साथ ही थे।”

” कोई बात नही , अभी तो मूड ठीक है ना?”

” हम्म” पिंकी के मुहँ से इतना रूखा “हम्म” सुनकर रतन को बहुत आश्चर्य हुआ वह एक बार फिर उसे मनाने में जुट गया__

   ” पिंकी एक बात बोलूं मुझे तुम्हारी नाराजगी समझ ही नहीं आ रही। अगर बांसुरी और राजा भैया के बीच कुछ है भी तो उससे तुम्हें क्या दिक्कत है यार? मतलब यह तो यही बात हुई कि तुम करो तो प्यार कोई और करे तो बेकार….”

” ऐसी बात नहीं है रतन, पर प्यार करने का भी कोई कायदा होता है कानून होता है, यह थोड़े ही सही है कि बस मुंह देखा और प्यार हो गया।”

“कायदे और कानून में लिपटा प्यार नहीं होता वह बस व्यापार होता है समझी। और अगर तुम इतनी ही कायदे बाज प्यार करने वाली थी तो मुझसे क्यों प्यार किया? तुम राजपूतानी हो सवर्ण हो मैं दलित हूं मुझसे प्यार करने से पहले तो तुम्हें सौ बार सोचना चाहिए था। हम दोनों के प्यार के बीच जब कायदा कानून नहीं आया तो तुम्हारे भाई और बंसी के बीच कैसे आ गया?”

” बांसुरी की सगाई हो चुकी है रतन वो भी किसी और से। एक से सगाई करके दूसरे से प्यार करना सही हैं क्या?”

” पिंकी पिंकी! यही तो समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि इतना सोच समझ कर जो होता है वो प्यार नही होता।
    अब अगर मैं तुम्हें तब मिलता जब तुम्हारी कहीं सगाई हो चुकी होती तो क्या तुम्हारे मन में मेरे लिये कुछ नही आता?
    ज़रूर आता , बेशक आता, बेझिझक आता। क्योंकि प्यार उम्र, समय और परिस्थितियां देख कर नही होता ….. हाँ ये लड़की मेरे मज़हब की है, मेरे कौम की है, कन्वारी है, नौकरी भी करती है इससे प्यार किया जा सकता है, अरे इश्क़ इतना सब देखने की इजाज़त कहाँ देता है मैडम,वर्ना सच कहूँ तो प्रिंसेस मैं तुझसे कभी प्यार ना करता।
   बल्कि सच कहूं तो तुम्हें प्यार करने के पहले अपने मन को मैंने बहुत रोका, बहुत समझाया कि बेटा आस्माँ का चांद दूर से ही अच्छा लगता है तेरे गरीबखाने की शोभा नही बन सकता पर ना दिल को समझना था ना हमें, हम दोनों ही तुम पर हार गये।”

  रतन अपनी बात पूरी कर हँसने लगा, उसके साथ ही पिंकी के चेहरे पर भी एक मुस्कुराहट चली आयी, दिन भर से बांसुरी और राजा भैया के बारे में सोच सोच कर उसके दिल में जो मनहूसियत भरे बादल जम गये थे रतन की बातों ने उन बादलों को बिना बरसे ही उड़ा दिया।
   मन से एक बोझ उतार कर वो वापस कमरे में चली आयी, जब वो कमरे में आयी तब बांसुरी राजा के पैरों को गीले टॉवेल से पोंछ रही थी, उसके कमरे में आते ही बांसुरी ने धीरे से टॉवेल ले जाकर बाथरूम में छोड़ दिया।
    अपनी प्यारी सखी से बात कैसे और कहाँ से शुरु करुँ सोचते सोचते पिंकी की आँख लग गयी, रात लगभग दस बजे एक गोली राजा को देनी थी, बांसुरी राजा के पैरों के पास के स्टूल पर बैठी बस दस बजने की राह देख रही थी….

    दस बजते ही उसने धीरे से दवा निकाली और दबे पांव राजा तक पहुंच गयी, पिंकी की नींद में खलल ना पड़े इस बात का भरसक ध्यान रखने पर भी पिंकी की कच्ची नींद टूट गयी पर उसने अपनी आंखों पर अपनी बाहें पहले के समान ही रखी हुई थी जिससे बांसुरी को पिंकी के जागने का पता नही चला।
    दवा लेकर उसने धीरे से उसे तोड़ा और राजा के मुहँ को हल्का सा खोल कर अन्दर दवा को सरका दिया, दवा मुहँ में रखते ही घुलने वाली थी इसलिये पानी की ज़रूरत नही थी। उसके बाद रूई के फाहे को पानी में भीगा कर राजा का मुहँ पोंछ कर बांसुरी जैसे ही जाने को हुई राजा ने उसका हाथ पकड़ लिया__

  ” तुम जाग रहे हो राजा?? तुम ठीक हो, रुको मैं अभी डॉक्टर को बुला लाती हूँ।”

  राजा ने ना में सिर हिला के किसी को भी बुलाने से मना कर दिया फिर इशारे से बांसुरी को अपने पास बुला कर उसने एक नज़र पिंकी की तरफ देखा__

” पिंकी बहुत परेशान है ना?”

  हाँ में सिर हिला कर बांसुरी चुपचाप उसके पास उसका हाथ थामे खड़ी रही

” प्रेम भी आ गया है ना, जानता हूँ। अब ये लोग नही मानेंगे और मुझे अपने साथ वापस ले जायेंगे……
     इतना बोल कर राजा को कुछ देर को रुका अपने आप को संयत कर उसने बांसुरी को एक भर नज़र  देखा और एक गहरी सांस छोड़ कर आगे कहने लगा__

” मेरे साथ मेरी दुनिया देखने चलोगी ?”

  बांसुरी आश्चर्य से राजा को देखती खड़ी रही, वो कुछ कहती उसके पहले ही नर्स दरवाज़ा खोले भीतर चली आयी__

” युरोबैग खाली करना था मैडम” और हर बार की तरह बैग खाली देख वो मुस्कुरा कर वापस लौटने लगी__

” क्या मैडम, आप तो हमारा काम भी कर देती हैं बैग खाली करने के साथ ही आउटपुट भी नोट कर देती हैं रियली यू आर वेरी स्वीट!

  मुस्कुरा कर उसे बिदा देकर बाँसुरी ने राजा की तरफ देखा वो अपलक उसे ही देख रहा था, उसे देखते देख वो झेंप गयी__

” पर किस बहाने से चलूंगी तुम्हारे साथ?”

” मेरी नर्स बन जाना। ” बोल कर वो एक बार फिर मुस्कुरा उठा__

  ” हा बहुत थकान सी है बांसुरी! अब थोड़ी देर सोता हूँ।”

” तो कल से आप और कर भी क्या रहें हैं जनाब!! सो ही तो रहे हैं, आपके बदले मैं जाग रहीं हूँ।”

” तो अब तुम भी आराम कर लो, कुछ खाया है तुमने ?

  बांसुरी ने ना में सिर हिला दिया__” चाय पी ली थी शाम को, पिंकी लेकर आयी थी इसलिये।”

” और पानी?” राजा के पूछने पर बांसुरी का ध्यान गया कि उसने पानी अब तक नही पिया था।

” आपके होश में आने का इन्तजार था!”

” हद करती हो, एक बीमार आदमी की सेवा करने आयी हो या खुद बीमार पड़ने आयी हो, जाओ पानी पी लो”

  बांसुरी को मुस्कुराता देख राजा ने उससे गिलास में पानी मंगवाया और खुद उसके होंठो से लगा दिया__
   बांसुरी ने लजा कर गिलास अपने हाथ में ले लिया और वहाँ से उठ कर खिड़की पर आ गयी, धीरे से पानी पीते हुए वो बाहर आसमान में खिले चांद को देखती मुस्कुराती रही।कुछ देर पहले ही बारीश थमी थी और चांद बादलों से छिटक कर आसमान से उस खिड़की पर उतर आया था
    अस्पताल में नीचे कैन्टीन के आसपास बाहर  किसी रेडियो पर गज़ल चल रही थी जिसे सुन कर उसकी मुस्कुराहट और बढ़ गयी….

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा।
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा।

हम भी वहीं मौजूद थे, हम से भी सब पूछा किए,
हम हँस दिए, हम चुप रहे, मंज़ूर था परदा तेरा।

इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटी महिफ़लें,
हर शख़्स तेरा नाम ले, हर शख़्स दीवाना तेरा।

      उसे मुस्कुराते देख राजा का चेहरा भी खिल गया उसने सुकून से मुहँ फेर कर चेहरा सीधा किया और आंखें बन्द कर लीं।

    इस बात से अनजान की उन दोनों के प्रथम परिणय की गवाह खुद भी धीरे धीरे मुस्कुराते हुए सोने की कोशिश में लगी थी।

क्रमशः

aparna..


लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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