जीवनसाथी -6

  सुबह खिड़की पर चिड़ियों की ची ची सुन बांसुरी की नींद खुल गयी, मुस्कुराते हुए एक अंगडाई ले वो  उठ बैठी, खिड़की पे चहचहाती चिड़ियों को कुछ देर देखने के बाद वो अपने कमरे का दरवाज़ा खोल अपने लिये सुबह की कॉफ़ी बनाने रसोई में जा ही रही थी कि हॉल के सोफे पर सोये उस अनजान अजनबी पर नज़र पड़ते हो वो उलटे पैरों अपने कमरे की ओर भाग गयी,  जल्दी जल्दी हाफ पैंट बदल कर पूरी लम्बाई वाली लोअर के साथ श्रग पहन कर वो रसोई की ओर चल दी, अपने लिये कॉफ़ी बना रही थी कि बाहर से आने वाली आवाज सुन उसने हॉल में झांक के देखा, वो अपने अनाड़ी हाथों से चादर को तह करने की कोशिश में लगा था_

  जीवन साथी–6

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  सुबह खिड़की पर चिड़ियों की ची ची सुन बांसुरी की नींद खुल गयी, मुस्कुराते हुए एक अंगडाई ले वो  उठ बैठी, खिड़की पे चहचहाती चिड़ियों को कुछ देर देखने के बाद वो अपने कमरे का दरवाज़ा खोल अपने लिये सुबह की कॉफ़ी बनाने रसोई में जा ही रही थी कि हॉल के सोफे पर सोये उस अनजान अजनबी पर नज़र पड़ते हो वो उलटे पैरों अपने कमरे की ओर भाग गयी,  जल्दी जल्दी हाफ पैंट बदल कर पूरी लम्बाई वाली लोअर के साथ श्रग पहन कर वो रसोई की ओर चल दी, अपने लिये कॉफ़ी बना रही थी कि बाहर से आने वाली आवाज सुन उसने हॉल में झांक के देखा, वो अपने अनाड़ी हाथों से चादर को तह करने की कोशिश में लगा था__

  ” आप रहने दीजिये, मैं कर लूंगी राजा भैय्या!!”

  रसोई से आवाज लगा कर उसने कहा पर इस बार भी पूरा वाक्य समाप्त होते होते आवाज की बुलंदी कहीं खो गयी, इस बार भी राजा के बाद का भैय्या जीभ और दांतों के बीच कहीं अटक कर रह गया…..

  वो दो कप में कॉफ़ी और पानी की बोतल लिये आ गयी, पानी की बोतल देखते ही वो खुश हो गया, उठा कर गट गट पीकर पूरी बोतल एक बार में ही खाली कर जब रखने लगा तो बांसुरी ने सिर्फ औपचारिकता के नाते पूछ लिया कि क्या और पानी चाहिए और उसने भी मुस्कुरा के हाँ कह दी…..
    एक बार कॉफ़ी कप में डालने के बाद बांसुरी को कॉफ़ी नही पी पाना कॉफ़ी का अपमान लगता था, पर बेचारी अपनी कॉफ़ी से उठते धुयें को देख मन मसोस कर बोतल उठाये वापस रसोई में चली गयी।।

   “हे भगवान !! दिखने में भी तो ताड़ सा है, इतने उंचे पेड़ को पानी भी ज्यादा लगता होगा, पर इतना ज्यादा कि  एक बार में ही दो बोतल गटक गया”
   बांसुरी अपनी सोच में गुम कॉफ़ी पी रही थी कि पहली बार उसने खुद होकर कुछ कहा__

  ” आपकी सोसायटी में जिम तो होगा?”

   बांसुरी ने चौंक कर उसे देखा __

  ” हाँ हैं ना!! बहुत शानदार जिम है बिल्कुल फाईव स्टार सुविधाओं के साथ, जिम योगा सब कुछ।”

  ” बहुत बढ़िया! किस विंग में है आप बता देंगी तो मैं चला जाऊंगा।”

  ” जी मुझे भी किसी से पूछना पड़ेगा, असल में मैं कभी गयी नही हूँ ना, समय ही नही मिल पाता।”
   बांसुरी झेंप कर अपनी कैफ़ियत देने लगी, पर वो अपनी कॉफ़ी में मगन सामने रखी मैगज़ीन को देख रहा था।।

  ” अच्छा सुनिये, क्या मैं आपका नाम जान सकती हूँ, मतलब आपको क्या कह कर बुलाऊं?”

  “अजातशत्रु !! राजकुमार अजातशत्रु सिंह बुंदेला नाम है मेरा, पर आप जो चाहें बुला सकती हैं।”

” वॉट?? किसका शत्रु?आई मीन कुछ अजीब सा नही है,रखा किसने??,,खैर मुझे क्या ,किसी ने भी रखा हो पर नाम खतरनाक है, है ना?”

  वो बांसुरी को अचरज से देखने लगा, तब बांसुरी को अपनी बेवकूफी समझ आयी__

” आई एम सॉरी, लेकिन इतना कठिन नाम सब लेते कैसे होंगे, आपकी मम्मी आपको क्या बुलाती है?”

“सिर्फ मॉम ही नही सारा शहर मुझे राजकुमार नाम से बुलाता है।।”

” वॉव ग्रेट ” राजकुमार अजातशत्रु ” हो आप!! आपके घर पर एक आप ही ऐसे अजूबे हो या सारा घर नमूना है??१1

” हमारा घर आसपास के लोगों के लिये आदर्श है मैडम, पिंकी ने कभी बताया नही क्या?”

” ओह्हो तो राजा जी आपके घर पर  बाकी लोगों के नाम भी आपके जैसे ही हैं या ….

” बड़े भैय्या का नाम युवराज चंद्रगुप्त है पर उन्हें सब प्यार से युवराज बुलाते हैं,भाभी का नाम रानी अनन्तरूपा  है उन्हें सब रूपा बुलाते हैं, छोटी बहन को  सब पिंकी कहतें हैं।”

” पिंकी ने अपना कुछ कठिन सा नाम नही रखने दिया क्या??”

  बांसुरी की बात सुन सामने बैठा राजा ज़ोर से हँसने लगा

” आप तो मज़ाक उड़ाये जा रही हो मेरा, वैसे मेरी पर्सनैलिटी पर मेरा नाम सूट भी तो करता हैंं।”

” हाँ लम्बे तगड़े तो ऐसे हो की आप पर सिकंदर सूट करता है।। बांसुरी मन में ये सोच कर रह गयी …..

” पिंकी ने कभी अपना असली नाम नही बताया क्या?”

  ” ना !! क्यों पिंकी उसका असली नाम नही है??”

  ” भुवनमोहिनी नाम है उसका, कहतें हैं जब पैदा हुई तब उसकी मुस्कान से सबका मन मोह लिया था इसिलिए उसका नाम भुवनमोहिनी रखा गया, पर उसकी पैदाइश के समय जो एंग्लो इंडियन नर्स थी उसने उसकी गुलाबी रंगत देख उसका नाम पिंकी बुलाया बस उसी कारण  घर पर सब उसे पिंकी ही बुलाने लगे।”

  ” घर पर तो सिर्फ बुलातें हैं पर हम लोग तो उसे जानते ही एक ही नाम से है, पिंकी!

” आश्चर्य की बात है कि आप लोग आज तक पिंकी के असली नाम से अनजान थे।”
   वो वापस मुस्कुराने लगा पर वापस पलट कर उसने बांसुरी के बारे में कोई पूछताछ नही की तब बांसुरी ने ही वापस बोलना शुरु किया__

अच्छा अब मैं मेरे बारे में भी कुछ बता दूँ आपको, मेरा नाम बाँसुरी है,रायपुर की रहने वाली हूँ,सेंट पलोटी से पढ़ने के बाद राजकुमार कॉलेज से डीग्री लेकर अभी यहाँ नौकरी कर रही हूँ, ये मेरा परिचय है।

    इतनी सब बातचीत के बाद भी बांसुरी इसी सोच में थी कि इस लड़के को आखिर वो क्या कह के पुकारे, अजातशत्रु, राजकुमार, राजा या राजा भैय्या??

” सुनिये क्या मैं आपको कुमार जी बुला सकती हूँ?”

  ” बेशक! आपका जो जी करे वो बुलाएँ, वैसे भी मुझे जानने वाले सभी कुछ ना कुछ अलग नामों से ही मुझे बुलातें है।”

   “ओके!! अच्छा अब मुझे तो ऑफिस के लिये निकलना है, मैं आपके लिये खाना बना कर रख जाऊंगी, आप खा लीजियेगा। वॉशरूम आप देख ही चुके हैं, नीचे सी या डी  विंग में हमारा जिम है आप एक बार नीचे किसी से कन्फर्म कर लीजियेगा और वहीं लाइब्रेरी भी, नीचे बच्चों के पार्क के पास ही सोसाइटी की शॉप है, वहीं सब्जियां फल यहाँ तक की काम चलाऊ मिठाई और आइसक्रीम भी मिल जाती है, बस इतना जानना सफीशियेंट होगा आपके लिये, बाकी तो मैं शाम में आ ही जाऊंगी।”

   बांसुरी की इतनी लम्बी चौड़ी बात का जवाब उसने एक हम्म से ही दिया और सामने पड़े अखबार को खोल लिया।

  ” अभी क्या बना दूँ आपके लिये?”

  ” ओ नही!! कुछ भी नही, आप ऑफिस जाइये मैं मेरा देख लूंगा।”

  ” अरे ऐसे कैसे? आज आपका पहला दिन है यहाँ  और आप आखिर पिंकी के भाई हैं, कल से अगर आप चाहें तो हम काम बांट लेंगे ।
   वैसे मेरा तो आज फास्ट है मेरे टिफ़िन के लिये मैं साबूदाना बना रही हूँ आपके लिये पराठे और आलू बैंगन बना दूँ , आप खा लेंगे क्या।”

   राजा ने मुस्कुरा कर बांसुरी को देखा __

” जी मैं खा लूंगा।”

  बांसुरी मुस्कुरा कर रसोई में चली गयी, और राजा वापस अखबार पढ़ने लगा
    बांसुरी गुनगुनाती हुई अपने काम मे लग गयी, उसने सोचा भी नही था कि वो कुछ पूछने रसोई के दरवाज़े पर आया तो लेकिन बांसुरी का गाना सुन ठिठक कर खड़ा रह गया

   “हमसफर मिला वो हमसफर, माना अनजाना है
       लगे पहचाना पर ……
     राहें फिर मुड़ीं और साथी एक साथी मिल गया…”

  बांसुरी ने जैसे ही किसी काम से पीछे मुड़ कर देखा वो सामने खड़ा था__

  ” बांसुरी जी, क्या आपको शॉप से कुछ चाहिए, मैं लेकर आ जाता हूँ, जैसे सब्जियां फल या एग्स?”

  ” अरे नही, मैं कल आते समय थोड़ा बहुत तो लेती आयी थी, बाकी सारी लिस्ट शॉप वाले को फ़ोन पर नोट करवा दी है, वो घर पे ही छोड़ जायेगा।”

  ” अच्छी बात है”  वो वापस मुड़ा ही था कि बांसुरी ने चौंक कर उसे आवाज दी__

” एक्सक्यूज़ मी!! आपने अभी क्या कहा ?”

” क्या कहा मैंने?” वो भी चौंक कर बांसुरी को देखने लगा

” एग्स कहा क्या?”

” हाँ! क्यों ? कुछ गलती हो गयी क्या?”

  ” नही नही गलती नही हुई पर मैं एग्स नही खाती, आई मीन नॉनवेज ही नही खाती, मेरे कारण ही पिंकी भी यहाँ नॉनवेज या एग नही खाती थी, पिंकी और माला बाहर चले जाते थे जब भी उन्हें खाना होता था।।”

  ” ओह्ह ओके! मतलब मैं भी नही खा सकता!”

  बांसुरी ने मुस्कुरा कर सिर नीचे झुका लिया__

  ” एक बात और कहनी थी, वैसे तो आप पिंकी के भाई हैं सो उसने सब कुछ आपको बता ही दिया होगा फिर भी मैं फिर से याद दिला देती हूँ, हमारे फ्लैट पर ड्रिंक्स ऐंड स्मोक भी अलाऊ नही है”

  ” ओह फिर आप लोग कहाँ जातें हैं ड्रिंक करने!”

  ” वॉट?” बांसुरी खीज़ कर उसे देखने लगी और वो अपनी ही बात पर ज़ोर से हँस पड़ा

” आई एम सॉरी बांसुरी जी!! मैं मज़ाक कर रहा था, आपके सारे रुल्स पिंकी मुझे बता चुकी है, आपका ऑफिस होगा ना, आप जाइये मैं खाना बना लूंगा।”

  बाँसुरी अपना टिफ़िन पैक कर के रसोई से बाहर निकल गयी।।

  **********

  ऑफिस में अगर इतनी ज़रूरी मीटिंग ना होती तो वो भी कुछ दिन घर पर रुक जाती, कितना ही अच्छा होता अगर उसे भी घर पर कुछ दिन रहने मिल गया होता, ये पिंकी के भाई वाली मुसीबत भी अकेले पिंकी को ही झेलनी पड़ती, हालांकि लग तो सीधा सादा रहा है पर जवाब बड़े अजीबोगरीब देता है, खैर वो सब तो बाद की बात है, सबसे पहले तो किसी भी तरीके से आज के आज उसे भास्कर को राजकुमार के बारे में बताना पड़ेगा, वर्ना वो और कितने दिन अपने दिल पर ये बोझ लिये मारी मारी फिरेगी….. बांसुरी अपनी सोच में गुम थी कि ज़िया के बुलाने पर वो मीटिंग के लिये चली गयी।।

  मीटिंग सीधे उनके लंच ब्रेक के समय पर ही खत्म हुई, अपना टिफ़िन और पानी की बोतल लिये वो आज और दिनों की तरह कैन्टीन में ना जाकर अपनी डेस्क पर ही जमी रही, उसे भास्कर से जो बताना था उसके लिये उसका डेस्क ही उपयुक्त जगह थी, जब सभी कैन्टीन को निकल गये तब उसने भास्कर का फ़ोन मिला लिया__

” कैसे हैं आप ?? हाँ मैं तो एकदम ठीक हूँ, सुनो मुझे आपको कुछ बताना था।”

” हाँ बोलो ना, वैसे मुझे भी तुम्हें कुछ बताना था, बंसी तुम्हें मेरा वो दोस्त याद है सनी ?”

” हाँ याद है! क्या हुआ?”

” अरे कुछ खास नही, उसका उसकी गर्लफ्रेंड से कुछ झगड़ा हो गया,कल पूरी रात मुझे पकाता रहा , मैंने कहा भी कि तुम दोनो का मामला है, मैं क्या कर सकता हूँ, पर वो सुने तब ना, शुभा की भी गलती है ये लड़कियाँ बिना सोचे समझे कोई भी काम करती हैं, बाद में पछ्ताती हैं।।”

” ओह्ह आखिर ऐसा क्या हो गया?

” बेवकूफी और क्या? दोनो कुछ समय से लिव इन में थे अब दोनों का ब्रेक अप हो गया!”

” व्हाट??”

क्रमशः

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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