जीवनसाथी -9

  
जीवन साथी – 9

   बांसुरी अपने कमरे में जाने के बाद सीधे नहा कर तैयार होकर ही बाहर निकली, उसके बाहर आते तक में राजा ने अपना बिस्तर समेट कर बाहर का कमरा साफ़ सुथरा कर लिया था….

  ” अरे वाह !! तुमने तो पूरा कमरा समेट दिया।।”

  ” हम्म्म्म पर मुझे कुकिंग ठीक से नही आती , वर्ना मैं नाश्ता भी बना लेता।”

  राजा ने इतने भोलेपन से कहा कि उसका चेहरा देख बांसुरी को हँसी आ गयी__
 
” कोई बात नही, मैं फटाफट कुछ बना कर ले आतीं हूँ, उसके बाद मुझे निकलना भी है।”

  ” ओके ! इसका मतलब तुम्हारे सैंया जी मान गये।”
   मुस्कुरा कर हाँ में सर झुका कर बांसुरी रसोई में चली गयी, उसके नाश्ता और चाय लेकर आने तक में राजा भी नहा कर तैयार हो चुका था__

” क्या हुआ?? तुम्हें भी कहीं जाना है क्या?” नाश्ते की प्लेट टेबल पर रखते हुए बांसुरी ने राजा से पूछ लिया

  ” अगर तुम नाराज़ ना हो तो क्या मैं तुम्हारे साथ चल सकता हूँ ?”

  ” मेरे साथ !! पर क्यों ??”

”  बस ऐसे ही !!
      मुझे लगा थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड मामला है ऐसे में तुम विक्टिम के घर जा रही हो, हो सकता है कोई तुम पर भी नजर रख रहा हो….
      नहीं पर अगर तुम नहीं चाहोगी तो मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगा और मैं भी सिर्फ उस जगह तक तुम्हारे साथ जाना चाहता हूं लेकिन जब तुम विक्टिम से सवाल जवाब  करती रहोगी तब मैं बाहर ही तुम्हारा इन्तजार कर लूंगा , अंदर रहकर तुम्हें डिस्टर्ब नहीं करूंगा।
   देखो बांसुरी अगर तुम्हारी जगह पिंकी होती तब भी मैं उसके साथ जाता ना!! और सोचो अगर यहां मेरी जगह पिंकी होती तो वह भी शायद तुम्हें अकेले नहीं जाने देती, है ना? तो बस मुझे पिंकी समझ लो , और अपने साथ ले चलो।”

” बातें बनाने में तो आप दोनो भाई बहन एक्सपर्ट है राजा जी, कहीं वकालत तो नहीं कर रखी आपने?”

  ” अरे ना ना वकालत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है मेरा, तो मैं चलूँ ना?”

बांसुरी ने हँसते हुए नाश्ते की प्लेट राजा की तरफ बढाई और अपने कमरे से अपने पर्स और बाकी सामान लेने चली गयी।

  ********

  दोनो सोसाइटी गेट तक पहुँचे कि राजा को कुछ याद आ गया__

  ” कैब बुक कर ली थी ना बांसुरी?”

  बांसुरी ने ना में सर हिला दिया__

” बहुत दूर है उसका फ्लैट, तो हम कुछ दूर तक लोकल ट्रेन या लोकल बस से चलतें हैं, अब मुम्बई में हो और लोकल ट्रेन या लोकल बस में ना बैठो तो क्या फायदा मुम्बई आने का??”

   राजा ने चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया, वो बांसुरी को क्या बताता कि उसका तो हर सातवें आठवें महीने मुम्बई अपने काम के सिलसिले में आना होता ही था, पर हाँ ये बात भी सच थी कि इतनी बार मुम्बई आने पर भी वो कभी लोकल में नही बैठा था, उसकी मीटिंग्स ताज में ही हुआ करती थी, इसलिये वो सीधे एयरपोर्ट से ताज और वहाँ से वापस एयरपोर्ट निकल जाया करता था।।
     अपनी लक्जरी मुम्बई यात्राओं का वर्णन कर कहीं वो बांसुरी की मध्यमवर्गीय मान्यताओं को गलती से ही चटका ना दे,यही सोच कर राजा ने बांसुरी से कुछ भी नही कहा।।

    स्टॉप पर खड़े मुश्किल से पांच मिनट बीते की उन्हें खचाखच भरी लोकल बस मिल गयी, बांसुरी तो जैसे तैसे जगह बना कर चढ़ भी गयी, पर हर पीछे वाले को पहले चढ़ने का मौका देते देते बस छूटने की कगार पर पहुंची की बांसुरी के हाथ पकड़ कर खींचने पर राजा भी जैसे तैसे बस में चढ़ ही गया।

    भीड़ में जैसे तैसे जगह बना के दोनों खड़े थे कि पास ही में खड़ी कॉलेज जाती कुछ लड़कियों के समूह की हँसी ठिठोली दोनो के कानों में पड़ी __

” ए गौरी  देख ना हा मुलगा अगदी बाहुबली सारखा दिसत आहे”

” कुठे आहे?”

” आहो ही मरून टी शर्ट “।

  उनकी बात सुन बांसुरी को हँसी आने लगी, वो समझ गयी कि उन सभी लड़कियों का फिलहाल टाईम पास राजा ही बना हुआ है, उनमें से एक की तरफ मुहँ कर बांसुरी ने अपना सवाल उछाल दिया_

   ” तुम्हीं कोणत्या कॉलेज मधे शिकता ??

  ” अरे देवा, हे मराठीला माहित आहे।”
 
  बांसुरी उसकी बात सुन हँसने लगी उसे हँसते देख वो सारी की सारी भी सुर में सुर मिला कर खिलखिला उठी। तभी उनमें से एक ने बांसुरी से सवाल कर दिया__
    ” हा तुझा नवरा (दूल्हा) आहे का?

    ” नाही फक्त मित्र आहे।”

  वहाँ बैठी एक बुज़ुर्ग सी महिला भी बहुत देर से ये सारी चुहलबाज़ी सुन रही थी, उनका स्टॉप आने वाला था, जाते जाते वो भी एक बम फोड़ गयी_

  “पण तुमच्या दोघांची जोडी राम सीते प्रमाणेच खूप सुंदर आहे.।”

   “तू एकदम बरोबर काकू आहेस”  वो लड़कियाँ एक बार फिर बांसुरी को छेड़ने में लग गयी, कुछ देर में ही उनका भी स्टॉप आ गया।।
    इतनी भीड़ भाड़ में खड़े खड़े बस के धूल धक्के खाने का राजा का पहला अनुभव था, फिर भी अपने स्वभाव के अनुरुप वो हर कठिनाई को भी सरलता से अपना लेता था।।
    कुछ देर में ही उनका भी स्टॉप आ गया, बस से उतर के उसने चैन की सांस की, वहाँ से कैब लेकर दोनों मौसमी के फ्लैट की ओर बढ चले।।

  ” तुमने पता ठिकाना अच्छे से पूछ लिया था ना??

  ” हाँ सुबह उसने मेसेज में पता भेजा तो था, पर मुझे नही लगा था कि इतना दूर होगा उसका घर, उसने मुझे 11 तक आने को बोला था।”

  ” पर उस हिसाब से तो हम बहुत लेट हो गये बांसुरी “

  ” इतना तो चलता है राजा बाबू! ये हिन्दुस्तान है, यहाँ सामने वाला जब हमें कोई समय देता है ना तो वो खुद भी यही मान कर चलता है की हम समय से एक घण्टे बाद ही पहुंचेंगे।”

  ” वो तो ठीक है लेकिन अभी तो हम समय से 3 घंटा लेट हो चुके हैं मैडम!!”

  ” हाँ तो क्या हुआ?? उसे भी लगना चाहिए की कोई व्यस्त पत्रकार आ रही है उसके पास ।”

  ” हाँ वो बात भी सही है।”

  दोनो पूछताछ करते आखिर मौसमी के फ्लैट पर पहुंच ही गये, लगभग दो तीन बार बेल बजाने पर दरवाज़ा खुल ही गया, साफ़ लगा की दरवाज़ा खोलने वाली इस वक्त सो रही थी, और उसे ऐसे अपनी नींद में खलल डालने वालों के लिये दरवाज़ा खोलना पसंद नही आया था__

” हेलो मौसमी जी?? मैं बांसुरी!! सुबह आप से बात हुई थी।”

” मैं मौसमी नही हूँ “

” फिर?? मेरा मतलब,मौसमी ने तो यही पता बताया था !”

  ” हाँ बताया होगा!!” उस लड़की का इतनी कठोरता से बात करना बांसुरी को बड़ा अजीब लगा, उन दोनो की बातचीत सुनता राजा भी अब दीवार की ओट से बाहर आ गया

  ” देखिए हमें मौसमी जी से मिलना था, क्या आप बता सकती हैं, वो कहाँ मिलेंगी, असल में हम बहुत दूर से आ रहें हैं।”

” मुम्बई के बाहर से आ रहे क्या??”

” हाँ ऐसा ही समझ लिजिये, पवई से आ रहें हैं, ये बांसुरी हैं “आज की दुनिया” के लिये लिखतीं हैं।

  अब तक नींद पूरी खुल चुकने के कारण या जाने क्या सोच कर उस लड़की ने दरवाज़ा पूरा खोल कर दोनों को अन्दर बुला लिया, छोटा सा एक कमरे और रसोई का फ्लैट बिल्कुल ही बेतरतीब सा पड़ा था।।

  ” आप लोग कुछ लेंगे??” पूछ कर बिना जवाब सुने ही वो लड़की वॉशरूम में घुस गयी।

  अपने बड़े से हैंडबैग से पानी की बोतल निकाल बांसुरी ने राजा की तरफ बढ़ा दी_
   राजा  एक सांस में पानी गटागट पीने लगा__ अरे फिर भूल गयी ये तो पानी के लिये प्यासी आत्मा है सारा पानी पी जायेगा मछली कहीं का, पहले खुद पी लेना था, अब तो ये बचाने से रहा, और इस सूखी मरी  बिलाई के घर का पानी पीने का मन नही कर रहा, हे भगवान क्या आज बांसुरी प्यासी मर जायेगी। बांसुरी अभी अपने खयालों में खोयी थी कि राजा ने बोतल उसकी तरफ बढ़ा दी__” लो तुम भी पी लो, प्यास तो तुम्हें भी लग आयी होगी।”

  बोतल में आधे से अधिक पानी बचा देख बांसुरी ने कृतज्ञता से राजा को देखा और पानी पीकर बोतल वापस अपने भानुमति के पिटारे में डाल ली।

   इतनी देर में हाथ मुहँ धोकर वो लड़की भी वहाँ आ चुकी थी

” जी कहिये, मैं क्या मदद कर सकती हूँ  आप की?”

   बिना किसी औपचारिकता के वो वहीं उनके सामने रखे एक स्टूल पर बैठ गयी

” मेरा नाम बांसुरी है, आज सुबह ही मेरी मौसमी से बात हुई थी, उसने मुझे मिलने के लिये बुलाया था।”

” पर वो तो अपने गांव निकल गयी है।”

” पर कब?? आई मीन उसने मुझे खुद बोला था 11 बजे आने को।”

  उस लड़की ने बांसुरी की बात सुन कर सामने टँगी घड़ी पर अपनी नज़र डाली __
” आपके ग्यारह अभी बजे हैं?? वो तो बारह बजे यहाँ से निकली है।”

  बांसुरी झेंप कर इधर-उधर देखने लगी__

” पर इस वक्त वो कैसे कहीं जा सकती हैं, उनका तो केस लगा हुआ है ना??”

” केस तो लगा है, पर डेढ़ महीने बाद की डेट है, बेचारी यहाँ रहते रहते उदास भी हो गयी थी, इसलिये चली गयी, कोई शादी है उसके घर पर।”

” अच्छा आप कुछ बता सकती हैं क्या? मौसमी के केस के बारे में….”

” आप जो पूछना चाहे पूछ लिजिये, वैसे कुछ नया नही है केस !! मौसमी भी एक आम लड़कियों की तरह ही अपने गांव से यहाँ कुछ बनने ही आयी थी, बेचारी जी तोड़ मेहनत भी करती थी, पर वही सब ऑफिस पॉलिटिक्स!! इसी सब का हिस्सा तो जाने अनजाने हर किसी को बनना पड़ जाता है….. काम सारा वो करती थी और मलाई कोई और खा जाता था, बस इसी सब को लेकर उसके बॉस से उसका कुछ पंगा चल रहा था, बॉस ने अपना बदला ऐसे निकाला…. उसे लगा मौसमी डर के बैठ जायेगी, चुप हो जायेगी , पर मौसमी ने तुरंत जा कर पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवा दी ।।

” इसका मतलब मौसमी के बॉस अभी हवालात में हैं?”

” हाँ, और उसकी जगह है भी वही!! वहीं सड़ सड़ के मरना चाहिए उसे।”

  ” आपका बहुत बहुत शुक्रिया…..क्या नाम बताया आपने अपना??”

” अभी बताया ही कहाँ? वैसे डेज़ी नाम है मेरा।”

  ” जी शुक्रिया डेज़ी जी!! मौसमी कब तक वापस आयेगी??”

” पता नही!! आप ऐसा क्यूँ नही करती कि उससे फोन पर ही बात कर लीजिये, आपको रीपोर्टिँग ही तो करनी है ना ,डेली अपडेट्स के लिये उससे पूछ कर अपना तड़का लगा कर लिखते जाइये, वैसे भी केस अभी लम्बा खिंचेगा।।

” जी ऐसा ही करती हूँ, मैं उन्हें फ़ोन ही कर लूंगी।”

तभी रसोई में कुछ गिरने की आवाज आयी, बांसुरी चौंक के उधर देखने लगी__

” अरे डरिये मत, कभी कभी बिल्ली आ जाती है यहाँ दूध में मुहँ मारने, आज फिर पीने लगी होगी……कहते हुए डेज़ी भाग कर रसोई में चली गयी , अगले ही पल वापस आकर उसने राजा की तरफ देख कर एक सवाल उछाल दिया__” देखा कहा था ना मैंने बिल्ली ही थी, आप लोग कुछ लेंगे चाय या कॉफ़ी”

  राजा सोच ही रहा था कि दोनो में से कौन सा ऑप्शन चुनूं उतने में बिल्ली के जूठे दूध से बनी चाय कॉफ़ी को गले से उतारने में होने वाली मुश्किल से बचने हड़बड़ा कर बांसुरी ने मना कर दिया__
  ” नही नही! हम सब कुछ पी कर आयें हैं किसी चीज़ की ज़रूरत नही है, अब हम लोग चलतें हैं, एक बार फिर आपको धन्यवाद डेज़ी।”

डेज़ी ने मुस्कुरा कर उन्हें देखा और दरवाज़े तक छोड़ने चली आयी__

” आप बहुत लकी है बांसुरी , आपका बॉयफ्रेंड बहुत केयरिंग है, आपके ऑफिस केस में भी आपके साथ जाता है, वेरी नाईस!!”

बांसुरी कुछ कहती उसके पहले ही राजा ने डेज़ी को थैंक यू बोला और बांसुरी को लिये आगे बढ़ गया।।

  आगे बढ़ने पर बांसुरी ने राजा को सवालिया नजरों से देखा __
  “अरे क्या करता ? अब तुम किस किस को सफाई देती फिरोगी की बॉयफ्रेंड नही है सिर्फ फ्रेंड है, इसलिये बात बढाने की जगह मैंने सोचा बात खत्म कर आगे बढ़ना चाहिए, वैसे भी शाम हो रही है, घर भी तो पहुंचना है ना।”
और सुनो बांसुरी इस बार सीधे कैब ले ले क्या? बस का इन्तजार करने में देर हो जायेगी, और मुझे बहुत ज़ोर की भूख लग रही है।”

   राजा के बोलने का ढंग ऐसा था की बांसुरी को हँसी आ गयी __

  ” अब समझी  राजकुमार अजातशत्रु जी इतना हड़बड़ा क्यों रहे थे, चलो चलो जल्दी चलते हैं, मैं तुम्हें एक लाजवाब जगह लेकर चलती हूँ, वहाँ का खाना बहुत टेस्टी है।”

” ठीक है पर मैं बस में नही जाऊंगा।”

” ओके बाबा!! चलो कैब बुलाती हूँ ।”

  दोनों कैब में बैठे वहाँ से निकल गये, बांसुरी अपना फ़ोन निकाल कर भास्कर को मेसेज भेजने में लग गयी और राजा कैब में चलते गाने को सुनता खिड़की से बाहर मुम्बई की रौनक देखता एक बार फिर कहीं खो गया……

    तू होगा ज़रा पागल तूने मुझको है चुना
    तू होगा ज़रा पागल तूने मुझको है चुना
    कैसे तूने अनकहा
    तूने अनकहा सब सुना
    तू होगा ज़रा पागल तूने मुझको है चुना
    तू दिन सा है मैं रात, आना दोनो मिल जाएशामों की तरह
     ये मोह मोह के धागे
    तेरी उँगलियों से जा उलझे……

क्रमश:

aparna…

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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