जीवनसाथी- 7

जीवनसाथी – 7

जब सभी कैन्टीन को निकल गये तब उसने भास्कर का फ़ोन मिला लिया__

” कैसे हैं आप ?? हाँ मैं तो एकदम ठीक हूँ, सुनो मुझे आपको कुछ बताना था।”

” हाँ बोलो ना, वैसे मुझे भी तुम्हें कुछ बताना था, बंसी तुम्हें मेरा वो दोस्त याद है सनी ?”

” हाँ याद है! क्या हुआ?”

” अरे कुछ खास नही, उसका उसकी गर्लफ्रेंड से कुछ झगड़ा हो गया,कल पूरी रात मुझे पकाता रहा , मैंने कहा भी कि तुम दोनो का मामला है, मैं क्या कर सकता हूँ, पर वो सुने तब ना।”

” ओह्ह आखिर ऐसा क्या हो गया?

” सनी के बारे में तुम्हें बताया था ना एक लड़की के साथ लिव इन में रह रहा है?”

” हाँ बताया था आपने!!”

” कल दोनों का ब्रेक अप हो गया!”

” अरे ऐसे कैसे? इतने दिन साथ में रहने के बाद ब्रेक अप ? कोई हँसी मज़ाक है क्या? अगर लिव इन की जगह शादी कर चुके होते तब?? तब भी ब्रेक अप कर लेते क्या?”

” वही तो आजकल हमारी जेनरेशन के लोगों ने सब कुछ हँसी मज़ाक समझ रखा है, लड़कियों को भी सोचना चाहिए ना एक बार!! लड़कों का क्या है, वो तो निकल लिये अपने रास्ते, पर पीछे से फँसती कौन है ये शुभा जैसी बेवकूफ लड़कियाँ!”

” इसमें शुभा की अकेली की क्या गलती, गलती तो दोनों की है ना भास्कर ।”

” नही मैं नही मानता, कि दोनों की बराबर गलती है, बंसी हर बात इमोशनल होकर नही सोची जाती, जब बनाने वाले ने ही औरत और मर्द में फर्क बनाया है तो हम कौन होते हैं बार बार बराबरी साबित करने वाले, अब प्रैक्टिकली सोच के देखो, कल को सनी की तो दुसरी जगह शादी हो जायेगी पर क्या कोई और लड़का शुभा से शादी करना चाहेगा जो ऑलरेडी किसी और लड़के के साथ इतने दिनों से साथ रह रही थी।”

” अरे पर ज़रूरी थोड़े ही है कि दोनों साथ थे तो हसबैंड वाईफ की तरह ही थे?”

” बिल्कुल ज़रूरी नही है, बल्कि मैं तो कहता हूँ सिर्फ दोस्त की तरह ही थे दोनों, पर शुभा इस बात को साबित कैसे करेगी?? यार सीधी सी बात है तुम्हें किसी लड़के के साथ रहना ही क्यों, सीधे शादी ही कर लो ना , पर ये आजकल की लड़कियों पर मॉर्डनटी का जो चस्का चढ़ा है ना वही इन्हें ले डूब रहा।”

” सिर्फ लड़कियों पर ही चढ़ा है क्या? लड़के इससे विलग कैसे हो गये?”

  ” यार तुम बातों को सुलझाने की जगह और उलझा देती हो, देखो चाहे जितनी भी बराबरी की बातें हम कर लें पर सच्चाई यही है कि लड़कियों को सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए, भई मैं तो इस मामले में पुराने ख्यालों वाला ही हूँ, मुझे अगर ये पता चले कि तुम कभी लिव इन में रह चुकी हो, मैं कभी तुमसे शादी ना करुँ।”

  बांसुरी भास्कर की बात सुन कर गुमसुम सी हो गयी, वो क्या बताना चाहती थी और भास्कर ने उसे किस उलझन में डाल दिया।

“अरे क्या सोचने लगी मेरी जान!! मुझे पता है तुम बाकी लड़कियों से काफी अलग हो इसिलिए तो तुम्हें चुना अपनी हमसफर के तौर पर, चलो जा रहा माँ किसी काम से आवाज दे रही है, और हाँ सुनो हमारा कुलदेवी पूजा के बाद मैहर दर्शन को जाने का प्लान बन गया है सो मुझे वापस आने में एक हफ्ता लग जायेगा, और सुनो तुम कहाँ खो गयी, कुछ छिपा तो नही रही हो मुझसे?”
 
उसे समझ आ रहा था कि भास्कर भी अपनी तरफ से गलत नही था, लेकिन वो खुद अभी जिस सिचुएशन में थी उसे भास्कर को पूरी तरह से एक्सप्लेन करना बहुत मुश्किल काम लगने लगा, उसने यही सोचा कि एक बार भास्कर वापस आ जाये तब तफसील से आमने सामने बैठ कर पिंकी के भाई के बारे में बता देगी, वैसे भी वो दोनों कौन सा लिव इन में हैं ये तो एक तरह से एक्सीडेंटल लिव इन है जो दो चार दिन में पिंकी के वापस आते ही सेटल हो जायेगा।
  
         पिंकी के भाई का ख्याल आते ही जाने क्यों बांसुरी के चेहरे पर एक मुस्कान सी आ गयी, कैसा अजीबोगरीब लड़का है, दिखने में इतना लम्बा चौड़ा पर हर काम बच्चों जैसा, अपनी चादर भी ठीक से तह नही कर पा रहा था, इतनी देर जूझने के बाद कैसे भी लपेट के सोफे पे पटक दिया था उसने, और तो और जनाब को टूथपेस्ट निकाल कर ब्रश पर सही से लगाना तक नही आता, सुबह जब वो कॉफ़ी लेकर आयी तब बेसिन के सामने खड़ा वो आधी से ज्यादा ट्यूब बेसिन में बहा चुका था, और उसने हँसते हुए दौड़ कर ट्यूब उसके हाथ से छीन ली थी।
   उसे हँसते देख वो भी एक फीकी सी मुस्कान दे गया था, उसकी मुस्कान बिल्कुल बच्चों सी थी, निस्छल मासूम, बिल्कुल जैसे दुनिया के ताम झाम उसे पता ही ना हो, पर इतना बड़ा घोड़ा कैसे इतना मासूम हो सकता है।।

” हेलो! मैडम! बांसुरी कहाँ बिज़ी हो गईं भई ? सुन रही हो ना मुझे?”

” हाँ हाँ सुन रही हूँ, वो निरमा आ गयी थी टेबल पर, कोई ड्राफ्ट दिखाने लगी थी ।”

” ओके ! लंच ब्रेक ओवर हो गया लगता है तुम्हारा? वैसे आज क्या बना कर ले गईं थी टिफ़िन में?”

बांसुरी क्या कहती ब्रेक तो ओवर हो  गया था पर भास्कर की बातों से हैरान परेशान बांसुरी ने अपना टिफ़िन बिना खाये ही जस का तस बन्द कर दिया था

” आज तो व्रत होता है मेरा सोमवार का! इसिलिए साबुदाने की खिचड़ी बना कर ले आयी थी।”

” ओह मुझे लगा जैसे तुमने आलू बैंगन बनाये होंगे।”

” हाँ घर पर तो आलू बैंगन और पराठे ही बना कर आयी हूँ ।” बांसुरी खिलखिला उठी

” घर पे किसके लिये? तुम्हारा तो व्रत है ना?”

” शाम को लौटने के बाद थकान हो जाती है ना, खाना बना रहे तो खाने में दिक्कत नही होती”

   व्रत के दिन झूठ बोलने का पाप करवा दिया भास्कर बाबू ने, बेचारी बांसुरी फिर अपनी उधेड़ बुन में गुम थी की दूर से हाथ हिलाती निरमा चली आयी।

  ” भास्कर मैं फ़ोन रखती हूँ, निरमा बहुत देर से खड़ी खड़ी बोर हो गयी है।”

  निरमा ने बांसुरी को देख आंखों ही आंखों में सवाल किया, बांसुरी ने ना में सर हिला दिया और निरमा का हाथ थामे उसे वापस कैन्टीन की ओर चाय पीने ले चली।।

********

शाम फ्लैट में पहुंच कर वो चाबी लगा कर खोलने जा ही रही थी कि याद आ गया, कोई और भी घर पर है, ऐसे दरवाजा खोल कर जाना ठीक नही, उसने कॉलबेल बजा दी, दो बार कॉल बेल के बाद भी जब दरवाज़ा नही खुला तब बांसुरी को राजकुमार पर गुस्सा आने लगा__ हद है बदतमीज़ी की, पूरा दिन घर पर पड़े पड़े खाट तोड़ने के बाद भी जनाब के पास दरवाज़ा खोलने की फुरसत नही है।
   फिर अचानक ही उसे खयाल आया, कि हो सकता है बाथरूम में हो।
   बांसुरी खुद पर ही खीझ उठी__ आजकल कैसे बिना बात भी उसे गुस्सा आने लगा है, अब पहले जैसे वो खुश क्यों नही रह पाती।
  अपना सर झटक उसने चाबी निकाली और दरवाज़ा खोल अन्दर दाखिल हो गयी।
   धीरे धीरे चारों ओर देखती वो अन्दर आयी उसे राजा कहीं नज़र नही आया, बांसुरी के बेडरूम में उसके मिलने की कोई संभावना नही थी फिर भी उसने वहाँ भी झांक लिया, रसोई,बाथरूम सब खाली पड़ा था, तो आखिर ये बिना कुछ बोले चला कहाँ गया??

   बांसुरी ने बालकनी पर पड़े पर्दे को खोला, कांच के दरवाज़े के पार, बालकनी के झूले पे बैठा वो गिटार हाथ में थामे कोई धुन बजाने में मगन था__
    धीरे से कांच के स्लाइडिंग डोर को खोल वो चुपचाप आकर उसके पीछे खड़ी हो गयी__

   मेहरूम थे, उलझे सवालों के जायज़ जवाब मिले ना
   कुछ गम के थे,साये वो सड़कों पे ढूँढे मीलों तक मिले ना
  राहें फिर मुड़ीं और साथी एक साथी मिल गया….

   आश्चर्य से बांसुरी की आंखें फैल गई , यही तो वो सुबह गुनगुना रही थी, वो धीरे से रसोई में चली गयी और दो कप चाय बना कर ले आयी, चाय की ट्रे  पास रखे टेबल पर रखने की आहट सुन  राजा की आंखें खुल गयी,उसने बांसुरी को वहाँ खड़े देखा तो खुद भी गिटार रख खड़ा हो गया__

” नही नही आप बैठिए, मैं भी बैठती हूँ, ” उसने पास रखा मोढ़ा खिंचा और एक किनारे बैठ गयी।।

” आपको भी ये गाना पसंद है क्या राजा जी?”

” जी मैंने सुबह आपको इसे गुनगुनाते सुना था, आपके जाने के बाद से ये गाना दिमाग में खलबली मचाए हुए था कि मैंने इसे कहीं सुना क्यों नही, सारे म्युसिक एप में ढूँढ लिया, गूगल में ढूंढा कहीं मिला ही नही।”

  बांसुरी उसकी बात सुन हँसने लगी__” तो मुझसे ही पूछ लिया होता”

” कैसे पूछता,तुम्हारा सॉरी आपका फ़ोन नम्बर तो है नही मेरे पास?”

” कोई बात नही आप मुझे तुम कह कर बुला सकतें है और मेरे नाम के साथ जी लगाने की भी ज़रूरत नही है।”

  बांसुरी की मुस्कान पर राजा ने भी अपनी हँसी की मुहर लगा दी

” तब फिर आप भी मेरा मतलब तुम भी ज्यादा फोर्मैलिटी मत करो, सिर्फ राजकुमार ही काफी है या राजा , वैसे घर भर में सिर्फ पिंकी ही राजा भैया बोलती है मुझे।।”

” ओके तो फिर कैसे इस गाने को ढूँढ लिया राजा?”

” हम्म फाइनली यूट्यूब में मिला, मुझे तो वर्ड्स भी याद नही थे, बस इतना ही याद था एक साथी मिल गया, उसिसे सर्च किया।”

  बांसुरी चुपचाप चाय पीते हुए मुस्कुराती रही

” बहुत प्यारा सॉन्ग है।”

” हाँ मुझे भी बहुत पसंद है, आपको गानों का बहुत शौक है? सीखा भी है क्या?”

” नही डैड को पसंद नही इसलिये कभी सीखने का मौका नही मिला, पर बचपन से संगीत का बहुत शौक था, स्कूल में जब तक रहा नही सीख पाया पर जब कॉलेज के लिये बाहर पढ़ने चला गया तब वहाँ मौका मिल गया, अपने शौक को पूरा करने का।”

  ” मुझे भी गाने पसंद हैं पर बस फिल्मी।”
  चाय खतम कर बांसुरी ने ट्रे उठाई और रसोई में रखने चली गयी तभी उसका फ़ोन बजने लगा, वो उलटे पैरों बाहर भागी पर तब तक में उसका फ़ोन हाथ में थामे राजा रसोई तक आ चुका था,फ़ोन बांसुरी को पकड़ाने के चक्कर में स्क्रीन पर हाथ लग गया और फ़ोन पिक हो गया, उधर से हेलो हेलो की आवाज सुन राजा ने भी प्रतिउत्तर में हेलो बोल कर फ़ोन बांसुरी को थमा दिया__
    फ़ोन बांसुरी की होने वाली सासु माँ यानी भास्कर की माँ का था।

” तुम्हारे घर पर किस लड़के ने फोन उठा लिया बांसुरी?”

” जी नही आंटी जी, मेरे घर पर कौन लड़का होगा?”

” ये हमें क्या पता? पर अभी किसी ने हेलो कहा था।”

” ओह्ह अच्छा वो, वो नीचे की दुकान से सामान मंगवाया था ना आंटी जी ,वही सामान पहुंचाने जो लड़का आया था ना, उसकी ही आवाज थी , मेरे अन्दर से आते में उसने गलती से फ़ोन उठा लिया था।”

  बांसुरी ने शरमा कर राजा की तरफ देखा उसने बेफ़िक्री में कंधे उचका दिये फिर बांसुरी के फ़ोन की तरफ हल्का सा झुका और__
          ” मैडम आपका किराना हियाँ रख दिये हैं, हिसाब आप कल दुकान पर कर देना।।

  बांसुरी अचकचा कर राजा की ओर देखने लगी__

” क्यों अभी तक गया नही क्या वो??”

” बस जा रहा है आँटी जी।”

” ठीक है ऐसा करो हिसाब कर दो उसका, मैं दस मिनट से फिर फोन करती हूँ ।”

” जी ठीक है।”
फ़ोन काटने के बाद बांसुरी ने चैन की सांस ली

” क्या हुआ परेशान हो गयी??”

” और क्या? मेरी होने वाली सास का फ़ोन था, तुम्हारी आवाज सुन पूछने लगी कि कौन लड़का है?  वहाँ क्या कर रहा है।”

” कह देना था चरस बो रहा है।”

” वॉट??” राजा की बात सुन बाँसुरी झुंझला उठी__

” तुम्हें मज़ाक लग रहा है, असल बात ये है कि मेरे घर पर किसी को पता नही कि तुम यहाँ मेरे साथ रह रहे हो।”

” ओह्ह !! पर वैसे मेरे घर पर भी किसे पता है? पिंकी के अलावा!!
     ये तुम्हारी होने वाली सास थी ??”

” हां जी! अभी दो दिन पहले ही सगाई हुई है मेरी।।”

” ओह्हो क्या बात है, बहुत सारी बधाईयाँ आपको, तो मैडम बांसुरी जी आपके यहाँ सगाई में मिठाई विठाई नही खाई खिलाई जाती क्या??

” ओह देखा मैं भूल ही गयी, मैं तो खूब सारी मिठाईयाँ ले कर आयी हूँ,वो भी स्पेशली आपके लिये।”

” स्पेशली मेरे लिये!! ऐसा क्यों?

बांसुरी ने पलट कर घूर कर राजा को देखा और मिठाई लेने चली गयी।।प्लेट में मिठाई सजाये वो वापस आई और राजा के सामने रख कर जाने लगी__

” तुम नही खाओगी क्या?” ना में सर हिला कर वो रसोई मे जाने लगी की राजा को कुछ याद आ गया_

” अरे सुनो , वो शॉप वाला सामान दे गया है, लिस्ट मुझे दी थी उसने, मैंने सामान के कार्टन पर ही रख दी थी।”

” ओह ओके, अच्छा हुआ बता दिया, मैं अभी उसे ही फोन करने जा रही थी, पैसे कितने बोले उसने??”

” पैसे तो मैंने दे दिये!”

   बाँसुरी कुछ देर लिस्ट से सामान मिलाती रही__

” सुनो राजा! कितने पैसे दिये उसे।”

” एक्सैक्टली तो याद नही मुझे, क्यों क्या हुआ?”

” हिसाब ना करो तो ये शॉप वाले अंकल ऐसे ही बुद्धू बना जातें हैं।” राजा को बांसुरी के हाव भाव से लगा कुछ बहुत बड़ा गोलमाल हो गया है, वो अपनी कुर्सी से कूद, लपक कर बांसुरी के पास पहुंच गया, वो हर एक सामान ज़मीन पर फैलाये सब की एम आर पी और लिस्ट में लिखी राशि को मिलाती भन्ना रही थी।।

” क्या हो गया कुछ ज्यादा ही पैसे ले लिये क्या??” 
राजा भी कुछ परेशान सा हो उठा

” और क्या?? 17 रुपये तुमने ज्यादा दे दिये, ये अंकल शुरु से ऐसा ही करते आ रहे हैं।।”

  17 रुपये सुनते ही राजा ने चैन की सांस ली और उसकी हँसी छूट गयी

” कमाल करती हो बांसुरी,सिर्फ 17 रुपये की ही तो बात है, इतनी हाय तौबा क्यों मचा रखी हो, अगर बेचारा गरीब आदमी कुछ थोड़ा सा कमा ले तो क्या गलत हो गया इसमें?”

” ओह्हो राजा जी आप होंगे कहीं के राजकुमार अजातशत्रु , पर मैं तो मिडिल क्लास लड़की हूँ, मेरे लिये 17 रुपये बहुत अधिक है, कभी ऑफिस की बस ना आये तो 17 में मेरा लोकल ट्रेन से ऑफिस आना जाना हो जाता है, घर पे कभी चावल या आटा खत्म हो जाये तो 17 में मैगी का पैकेट आ जाता है जिसे मैं तीन बार बना कर खा सकती हूँ, 17 रुपये में मेरे और आपके लिये 2 टाईम की सब्जी भी आ सकती है…..
   कुछ रुक के बांसुरी फिर शुरु हो गयी__
  सॉरी दो टाईम की तो नही पर हाँ एक टाईम की हम दोनों की सब्जी तो आ ही सकती है ना।”

  राजा बांसुरी की बात ध्यान से सुनता रहा_

” पर अगर हम एक टाईम का फास्ट कर लें, जैसा की आज तुमने रखा ही था तो ये 17 रुपये यानी तुम्हारे एक टाईम की सब्जी हम उस शॉप वाले को दान कर सकतें हैं ! है ना?

  बांसुरी राजा की बात सुन कुछ देर को चुपचाप खड़ी रह गयी, फिर उसे ज़ोर की हँसी आ गयी, उसे हँसता देख राजा भी हँसने लगा, दोनों ने सारा सामान समेटा और बांसुरी रसोई में सामान रख खाने की तैयारी करने लगी।

  दो प्लेट में चावल और दाल लिये वो बाहर आयी तब तक में राजा वहाँ बैठा सारी मिठाई खत्म कर चुका था

   ” अरे सारी की सारी खत्म कर दी।” मन ही मन में बांसुरी ने सोचा हैं भी तो असुरों सा लम्बा चौड़ा ,खा गया सारी मिठाई !!

  ” मुझसे तो खाई नही जा रही थी, तुमने इतनी सारी लाकर रख दी थी, पर फिर मैने सोचा अगर मैंने ये खत्म नही की तो तुम फिर नाराज़ हो जाओगी कि इन मिठाइयों को एक बार सर्व कर दिया तो अब नही खाने पर इन्हें फेंकना पड़ेगा वगैरह वगैरह।।

   बांसुरी ज़ोर से हँसने लगी__” अरे बुद्धू तुम्हें इतना भी नही पता!! मिठाई तो ऐसे ही सर्व की जाती है, तुम्हें जितना खाना था खा लेते, बाकी मैं सहेज लेती, इन्हें बाद में भी खाया जा सकता था।।

  बांसुरी ने खाने की प्लेट उसकी तरफ बढ़ाई और इशारे से ही पूछा कि वो अब कुछ और खा पायेगा या नही, राजा के असमर्थता में सर हिलाते ही वो मुस्कुरा कर प्लेट अन्दर रख आयी,और अपनी प्लेट लिये खाने बैठ गयी।।

  राजा अपने पेट से मिठाईयों का बोझ कम करने वॉक के लिये नीचे उतर गया।।
   खाना खाकर, राजा का बाहर बिस्तर तैय्यार कर बांसुरी अपने कमरे में चली आयी।
  अपनी बिस्तर पर बैठ उसने अपना फ़ोन उठाया तो देखा भास्कर के सात और उसके ऑफिस से 4 मिस्ड कॉल थी, मीटिंग के समय उसने फ़ोन को साइलेंट किया था वो वापस शायद नॉर्मल करना भूल गयी थी, वो तो जब उसकी सासु जी का फ़ोन आया तब फ़ोन आंखों के सामने था इसलिये पता चल गया था।

  बांसुरी सोच में पड़ गयी, इतनी रात में तो ऑफिस से कॉल नही आती आखिर क्या बात हो गयी__
 
उसने  फ़ोन देखा भास्कर का मेसेज भी था__

” कहाँ बिज़ी हो? फ़ोन क्यों नही उठा रही?”

” हेलो बांसुरी इतनी बार तुम्हारा फ़ोन ट्राई किया, कहाँ रख कर भूल गयी हो, फ़ोन को गले में लटका कर रखा करो!!

“किसी भी बात की हद होती है, 7 बार कॉल कर चुका हूँ ।”

” हेलो बांसुरी! ऑफिस से अभी तुम्हें जिस प्रोजेक्ट के लिये कहा जायेगा उसके लिये तुम साफ़ मना कर देना। यही बोलने के लिये फोन कर रहा था, जब तुम्हारा जी करे फ़ोन कर लेना, अब मैं थक गया हुँ सोने जा रहा हूँ ।”

इतने सारे मिस्ड कॉल के बाद और भास्कर के गुस्से से भरे मेसेज देख बांसुरी एक पल को डर गयी, अब इतनी रात गये क्या करे, क्या ऑफिस में फ़ोन करना सही रहेगा?? भास्कर को अभी फोन करने का तो कोई मतलब नही क्योंकि वो पक्का बहुत गुस्से में होगा और सिर्फ उसपे अभी अपना गुस्सा ही उतारेगा,और इतना थकने के बाद अब भास्कर की डांट खाने की हिम्मत भी नही है….. यही सब सोच बांसुरी फ़ोन किनारे रख सोने की कोशिश करने लगी, पर चिंता में आंखों से नींद भी गायब था, तभी….

  बाहर से गिटार की हल्की हल्की सी आवाज सुनाई देने लगी, राजा गिटार बजाते हुए शायद कुछ गुनगुना रहा था__
   गाना सुनते ही एक हल्की सी मुस्कान बांसुरी के चेहरे पर आ गयी और उसने आंखें बन्द कर ली__

  ” मेहरूम थे, उलझे सवालों के जायज़ जवाब मिले ना
   कुछ गम के थे,साये जो सड़कों पे ढूँढे मीलों तक मिले ना
  राहें फिर मुड़ीं और साथी एक साथी मिल गया….

क्रमश:

aparna…



लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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