जीवनसाथी -28

  जीवन साथी- 28

बांसुरी  अपने कमरे में जाने के लिये पलटी ही थी कि सामने ही रूपा से टक्कर होते होते बची__

” नजरें ज़मीन पर रखिये तो सही होगा वर्ना ऐसे ही इधर उधर टकराती रहीं तो भगवान भी आपको गिरने से नही बचा पायेंगे।”

  रूपा के कटाक्ष को समझ ना पाने के कारण बांसुरी उसे देखती खड़ी रही__

” जी मैं समझी नही, आप कहना क्या चाहती हैं?

” इतनी नासमझ लगती तो नही हो, खैर कुंवर सा के लिये लड़कियाँ कोई नई बात नही है।
             इस मुगालते में मत रहना की उनके कमरे तक पहुंचने वाली तुम पहली लड़की हो। इन राजकुमारों के शौक तुम्हें क्या पता?
        खैर मुझे क्या? तुम सीधी सी लगी इसलिये कह दिया। आगे खुद समझदार हो।
   राजकुमारों के लिये मन बहलाव के सामानों की कमी नही होती और इनके लिये लड़कियाँ सामानों से अधिक भी नही होतीं।

   रूपा अपना जहरीला तीर छोड़ कर चली गयी, उसके पीछे भारी कदमों और आंसू भरी आंखों से रास्ता टटोलती बांसुरी अपने कमरे की ओर चल पड़ी ……..

बांसुरी अभी अपने कमरे तक पहुंची भी नहीं थी कि पीछे से भागते हुए आकर पिंकी अपनी दोनों बाहें उसके कंधों पर डाल कर उससे लिपट गई__

” बांसुरी चलो ना हमारे कमरे में ही आज शाम की चाय पी लो, तुमसे कुछ बात भी करनी है।”

ना चाहते हुए भी बांसुरी भारी कदमों से पिंकी के साथ उसके कमरे में आ गई।

पिंकी के कमरे में मौजूद सहायिका ने उन दोनों के लिए प्यालो में चाय निकाली और अलग-अलग तरह के पकौड़े और कुछ सूखे नमकीन मेवों के साथ टेबल सजा दी। इतना सब करने के बाद भी वह कमरे से बाहर नहीं गई तो पिंकी ने बहुत प्यार भरे शब्दों में उसे बाहर इंतजार करने के लिए कहा, उसके कमरे से निकलते ही पिंकी लपक कर गई और दरवाजा बंद करके आ गई__

   बांसुरी का हाथ थामे पिंकी अपनी बड़ी बड़ी आंखों से कुछ देर तक बांसुरी को देखती रही…..
        दोनों भाई बहनों की गहरी आंखें कितनी मिलती थी।

” बांसुरी हम सोच रहे हैं घर में सब को रतन के बारे में बताने का समय आ गया है।”

” पर क्यों तुम तो इंटरव्यू के बाद बताने वाली थी ना?”

” हां इंटरव्यू के बाद ही बताने वाले थे लेकिन अब लगता है कि हमें बता देना चाहिए वैसे भी हमें इस बात पर पूरा विश्वास है कि रतन का इंटरव्यू में सिलेक्शन हो ही जाएगा, भले हम चूक जाएं। वैसे भी वह तो सारा दिन पढ़ने में ही गुजार रहा है। पर यहां हमें देखो एक घड़ी चैन से बैठकर पढ़ने नहीं मिलता। बड़ी मुश्किल से रात में 2 घंटे निकाल पाते हैं तब जाकर कुछ थोड़ा बहुत तैयार कर पाते हैं।
    इसीलिए सोच रहे हैं कि बता देते हैं जिससे इंटरव्यू के बाद दोनों घरों में बातचीत हो जाए और….

” ठीक है जब ऐसा सोच ही रही हो तो बता दो।”

” बंसी हम यह सोच रहे थे कि क्या रतन के बारे में तुम राजा भैया से बात कर सकती हो?”

” मैं! लेकिन मैं क्यों? तुम्हारे भैया क्या सोचेंगे?
       ये तुम्हारे और रतन के बीच की बात है अगर मेरी जगह तुम खुद बताओ तो तुम्हारे भाई को ज्यादा अच्छा लगेगा। कहीं वो यह ना सोचे कि मैं कौन होती हूं तुम दोनों भाई बहन के बीच बोलने वाली।”

  “चुप करो! राजा भैया तुम्हारे लिए कभी ऐसा नहीं सोचेंगे। वह तुम्हें बहुत मानते हैं बंसी। तुम्हारी बात जरूर मान जाएंगे।  मान तो हमारी भी बात जायेंगे लेकिन अपनी ही शादी की बात हम खुद अपने भाई से कैसे करें? बस यही सोचकर…..”

” ठीक है राजकुमारी साहिबा मौका देख कर कोशिश करूंगी। अच्छा सुनो पिंकी मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी?”

  ” अरे बंसी अच्छा याद दिलाया हमें भी तुमसे पूछना था तुम्हारे उस काम का क्या हुआ जिसके लिए तुम बनारस गईं थीं?”

   ” वह तो केस ही कुछ और निकला पिंकी। कभी फुर्सत में सारा किस्सा सुनाऊंगी, अभी तो बस इतना है कि मेरे बॉस ने मुझे जो काम दिया वह सही है, और मुझे अभी डेली अपडेट लिखना होता है। मैं रात में बैठकर ड्राफ्ट तैयार कर लेती हूं और यहां से निरमा को मेल कर देती हूं निरमा उसे एडिट करके पोस्ट कर रही है…….

  ” ओके मतलब बनारस जाना तुम्हारा सफल रहा ना”

   कुछ ना कहकर बांसुरी मुस्कुरा कर रह गई, उसे जो सवाल पूछना था वह पूछने में वह कुछ कठिनाई का अनुभव कर रही थी लेकिन अपनी सारी हिम्मत जुटाकर आखिर उसने पिंकी से सवाल कर ही लिया__

    “पिंकी एक बात बताओ!  तुम्हारे राजा भैया भी तो सत्ताईस  अट्ठाईस साल के हो ही गए हैं आज तक उन्होंने शादी क्यों नहीं की?”

   सवाल पूछ तो लिया लेकिन पूछते ही अपने सवाल पर वो खुद लजा गयी , अपने ही सवाल पर बांसुरी के कान दहक उठे।
छी इतनी बेशर्मी से कोई किसी बहन से उसकी भाई की शादी के बारे में सवाल करता भी है? पता नहीं आजकल उसे क्या होता जा रहा था?

   एक हल्की सी मुस्कान के साथ पिंकी ने बांसुरी को देखा और कहने लगी__

  ” रिश्तो की तो पूछो मत बंसी, बहुत रिश्ते आए भाई के लिए। भाई चौबीस पच्चीस बरस के ही हुए होंगे तभी से।  लेकिन वह कैसी लड़की से शादी करना चाहते हैं यह बात आज तक वह किसी को समझा ही नहीं पाए या शायद खुद ही नही समझ पाये……..
   पर इसका मतलब यह मत समझ लेना कि उन्होंने आज तक किसी भी लड़की को नापसंद किया है असल में जब भी रिश्तो की बात चली उन्होंने कभी कोई तस्वीर देखी ही नहीं हमेशा ही छोटी मां से यही कहा कि जो छोटी मां की पसंद होगी वही उनकी भी पसंद होगी।
     हमारे यहां रूपा भाभी छोटी मां की पसंद की ही बहू हैं।”

   यह कहकर पिंकी थोड़ा रुकी और हंसने लगी

    “अब रूपा भाभी का स्वभाव तो इतने दिनों में तुम समझ ही गई होंगी  इसीलिए शायद जब भी छोटी मां कोई भी रिश्ता लाती है युवराज भैया सबसे पहले देखते परखते हैं और राजा भैया के लायक कोई रिश्ता नही पाते और रफ़ा दफा कर देतें हैं वैसे अभी रूपा भाभी अपने किसी काका साहेब की बेटी के लिये खूब ज़ोर लगा रहीं हैं।”

  ” इसका मतलब राजा की ज़िंदगी में आज तक कोई लड़की नही आयी?”

   एक बार फिर अपने मूर्खता भरे प्रश्न पर बांसुरी खुद पर ही सकुच उठी__

  ” आई थी , जब भाई पढ़ाई करने बनारस गये थे उस समय।
   उनके साथ ही पढ़ती थी। साधारण से परिवार की लड़की थी लेकिन पढ़ने में अच्छी थी। भाई का तो स्वभाव ही ऐसा है कि कोई भी उन पर मोहित हो जाये।
   एक साल दशहरे में भाई का पूरा ग्रुप सालाना जलसा देखने यहां आया था तब वह भी आई थी। यहां की रौनक चकाचौंध में ऐसा बही कि जलसे  वाले दिन शाम को सारे दोस्तों के सामने उसने भाई से अपने मन की बात कह दी। भाई बेचारे कुछ समझ ही नहीं पाए कि क्या करें? उसे कैसे समझायें? बाद में उन्होंने उसे बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन भाई की ना सुनकर वह इस कदर टूटी की अकेली ही यहां से अपने घर वापस लौट गई।
            उसके बाद उसने कॉलेज से अपना नाम भी कटवा लिया ,वापस पढ़ने नहीं गई। एक चिट्ठी छोड़ गई थी भाई के नाम वह भी अपने खून से लिखी हुई।
  उसके इस तरह बीच में पढ़ाई छोड़ देने से भाई के मन में एक बोझ घर कर गया । लेकिन वह कुछ कर भी नहीं सकते थे उसी समय भाई के एक दोस्त से उन्हें पता चला कि उसके पिता की तबीयत बहुत खराब हो गई है। तब भाई ने उसी दोस्त के हाथों उसके पिता का वहां के सबसे बड़े अस्पताल में ट्रीटमेंट करवाया और साथ ही जितनी जो मदद कर सकते थे सब उन्होने की। और साथ ही अपने उस दोस्त से यह गुजारिश भी की कि उस लड़की को यह नहीं पता चलना चाहिए कि इस सारी मदद के पीछे भाई का हाथ है उनके उस दोस्त ने भाई कि वह बात मान ली।
        वह लड़की यही समझती रही कि इस सारी मदद के पीछे भाई का दोस्त ही है …..कुछ समय बाद उन दोनों ने शादी कर ली उस दोस्त की नौकरी भी भाई की सिफारिश पर मुंबई में एक बहुत अच्छी जगह लग गई।
       भाई इन सब बातों से बहुत खुश थे, उनके मन का बोझ भी उतर गया। लेकिन एक बार जब वह मुंबई गए और उन्होंने अपने दोस्त को फोन किया तब उस समय उसका बर्ताव भाई को सही नहीं लगा। वह भाई से मिलने तो जरूर आया लेकिन एक औपचारिकता निभा कर बस चला गया। भाई उसे अपना सच्चा दोस्त मानते थे वह सच्ची दोस्ती उस ने उन से छीन ली।
  वो आज भी उसे याद कर के दुखी हो जातें हैं, हम उन्हे कितनी बार समझा चुके कि भाई, लोग आपकी अच्छाई का फायदा उठातें हैं पर वो समझते ही नही। जानती हो दूसरों की मदद के लिये वो हमें क्या कैफ़ियत देतें हैं?”

राजा के मन के बोझ की कहानी सुनती बांसुरी के मन का बोझ हल्का होने लगा था__” क्या कहतें हैं?”

” कहतें हैं मैं अगर किसी की मदद करता हूँ तो ये मदद उनकी किस्मत में लिखी है, मैं ना भी करुँ तो कोई ना कोई ज़रूर कर देगा, मैं तो इसी बात पर खुश हूँ कि भगवान ने मुझे किसी की मदद के लिये चुना है। अब सोचो ऐसे तो खयाल हैं हमारे भाई के, लोग सामने से बुद्धू बना जातें हैं और ये हैं कि हर किसी पर अँधा विश्वास किये बैठे हैं, अब छोटी माँ को ही ले लो…..

   पिंकी की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि बांसुरी का एक बार फिर फोन बज उठा दूसरी तरफ निरमा थी__

    ” कहां हो यार बांसुरी कब आ रही हो वापस?”

    ” बस दशहरे के बाद आ जाऊंगी तू बता कैसी है?”

  “क्या कैसी हूं यार? काम इतना ज्यादा बढ़ गया है। तेरा भी फैलाया रायता समेट रही हूँ जल्दी आजा तू। आज ऑफिस में एक गॉसिप कान में पड़ी तेरे भास्कर जी सिंगापुर गए हुए हैं मैंने सुना।”

    ” हां गए तो है”

   “इतना सूखा सड़ा रिएक्शन? तू वापस आ तुझ से तो पार्टी लूंगी बड़ी सी।
         सुनने में आ रहा है सिंगापुर ब्रांच के हेड बनने वाले हैं तुम्हारे भास्कर जी। अच्छा है  तुम डबल दिवाली मनाओगी इस बार।
      दिवाली के बाद शादी, फिर सिंगापुर में हनीमून फिर वही सेटेल हो जाना। ऐश है भई ।”

  ” निरमा मैं फ्री होकर तुमसे बात करती हूं अभी थोड़ा बिजी थी।”

  ” हाँ जी अब तो शादी की तैय्यारियों में बिज़ी ही रहोगी, खैर जल्दी वापस आ जाओ तुम्हें किसी से मिलवाना भी है।”

” किससे?”

  ” सरप्राइज़ है।”

   बांसुरी ने फ़ोन रखा उतनी देर में दरवाज़े पर दस्तक देता राजा खड़ा था…..

” अकेले अकेले चाय पी जा रही है यहाँ।”

” आईये भाई अन्दर आ जाइये, आपकी चाय लगवातें हैं हम “

    राजा के लिये चाय निकाल कर पिंकी वाशरूम चली गयी, दोनों आमने सामने एक बार फिर अकेले बैठे थे__

   ” कहीं और पी जाने वाली चाय आखिर यहाँ मिली।”

   राजा की बात पर बांसुरी ने उसे देखा और उसे खुद को देखता पा कर वापस नीचे अपना कप देखने लगी।
 
  “बांसुरी तुम कुछ परेशान हो क्या?”

   उसके मुहँ से अपना नाम सुनते ही कैसे पिघलने लगती थी वो। अब तक रूपा भाभी की बातों को दिल से लगाये बैठी थी पर बस एक बार उसके मुहँ से अपना नाम सुनते ही सारा रोष सारा गुस्सा जाने कहाँ बह गया।
    उसकी आंखों में झांकते ही जाने वो कहाँ खो जाती थी। किसी तरह का छ्ल कपट उन निर्दोष आंखों में नही था, वहाँ तो थी बस दो बड़ी रसभरी अंखियां जिनके आस पास ही अब उसके जीवन की परिधि खिंच कर रह गईं थी। उसके संसार का सूर्य बन बैठा था वो और वो बन गयी थी उसके चारों ओर चक्कर लगाती पृथ्वी, जो उससे इतर कुछ भी सोच पाने में असमर्थ होकर रह गयी थी।
    रूपा भाभी की तीखी कड़वी बात उसका खुद का अपमान सब जैसे बिसर गयी, और एक बार फिर उसके सामने उसकी अभिसारिका बनने को वह प्रस्तुत थी।

  ” कुछ नही , बस घर की याद आ रही थी।”

  ” हाँ समझ सकता हूँ, पर यहाँ से लौट कर तो मुम्बई ही जाओगी ना!”

   राजा से अपने मन की बात कहने को जैसे वो आतुर हो उठी।
   किस तरह वो राजा को बताये कि उसके पास बहुत समय नही बचा है, उसके घर पर तैय्यारियाँ शुरु हो चुकी हैं। दीवाली बीतते ही पहले मुहूर्त में उसका विवाह निश्चित हो चुका है। अगर वो भी उसके लिये कुछ वैसा ही सोचता है जैसा वो तो अब किस बात की प्रतीक्षा है….कह क्यों नही देता!

   बांसुरी कुछ कहने वाली थी कि वाशरुम की तरफ एक बार देख कर राजा ने जल्दी से अपनी बात बांसुरी के सामने कह दी__

  ” बांसुरी आज बहुत खुश हूँ मैं! जानती हो डैड ने मुझे क्यूँ बुलाया था? पिंकी के लिये देहरादून के राज परिवार का रिश्ता आया है, बहुत बड़े लोग हैं। बहुत उंचा खानदान है।
   वो लोग दशहरे की अगली शाम यहाँ आ रहे। वैसे तो उन्हें पिंकी पसंद है पर फिर भी औपचारिकता के लिये कुंवर सा और पिंकी एक दूजे को देख ले पसंद कर लें तो अंगूठी की रस्म भी साथ ही हो जायेगी।
    जानती हो ये कुमाऊँ के सबसे उंचे राजपूत राजघराने से हैं। ‘ बिष्ट’ लिखतें हैं, कुमाऊं गजेटियर का सबसे उंचा और नामी खानदान है। गढ़वालों के छप्पन गढ़ी में से तीन पूरे के पूरे इनके थे। दादी ने बताया कि बहुत सालों पहले राजस्थान से आकर कुमाऊँ में बस गये थे।
   अब तो दून में एक महल बना कर यहाँ रहने लगे हैं। वैसे असल में तो पूरा परिवार लंदन रहता है, यहाँ बस साल में एक आध बार कभी आना होता है।
   इस बार आयें है तो उनका सोचना है कि ब्याह निपटा के ही लौटा जाये।”

  ” और पिंकी का इंटरव्यू?”

  ” इंटरव्यू देने से किसने रोका है?”

  ” रोका किसी ने नही लेकिन इंटरव्यू सेलेक्ट हो गयी और फिर शादी हो गयी तो वो क्या करेगी? यहाँ रह कर नौकरी या लन्दन रह कर घर संभालेगी।”

  ” ये तो मैंने सोचा ही नही। पर वो तो बाद की बात है , वो लोग इतनी पढ़ी लिखी दुल्हन की शिक्षा को व्यर्थ नही जाने देंगे। आखिर यहाँ भी तो घर है ना तो कुंवर और पिंकी यही रह जायेंगे।”

  ” ऐसा तो तुम सोच रहे राजा, लेकिन मान लो अगर उसके ससुराल वालों ने ये शर्त नही मानी तब?”

  ” बांसुरी एक बार फिर तुम जजमेन्टल हो गईं। आखिर ससुराल के नाम पर इतनी नकारात्मक क्यों हो जाती हो। आज कल ऐसा नही होता कि लड़कियों की इच्छाओं उनके सपनों को उनके पति या ससुराल वाले पूरा ना करें ….

  ” बात तो सही है लेकिन हर कोई तुम्हारे जैसी सोच का हो ये ज़रूरी तो नही।”

” हम्म्म और हर कोई मुझसे अलग सोच का हो ये भी तो ज़रूरी नही…

  ” ईश्वर करे तुम उन लोगों के लिये जैसा सोच रहे वैसा ही हो लेकिन अगर पिंकी के लिये कोई आई ए एस करता लड़का देखा जाता तो क्या उसके लिये ज्यादा सही नही होता?

   बांसुरी की बात सुन राजा के चेहरे पर कुछ रंग आये और चले गये, वो आगे कुछ पूछता उतने में पिंकी वापस चली आयी, और बांसुरी की बाजू की कुर्सी खिंच कर बैठ गयी।
   अपना कप थामे वो भी उनके साथ चाय पी रही थी कि दरवाज़े पर रूपा भाभी भी चलीं आयीं__

  ” तो आज यहाँ महफिल सजी है। हमें तो कोई याद तक नही करता, क्यों कुंवर सा?”

   ” आप को कोई भूल पाये तब तो याद करने की ज़हमत उठायेगा भाभी सा।”

   ” क्या बात है आज तो कुंवर सा की आंखें भी मुस्कुरा रही हैं, बड़े खुश लग रहें हैं आप। अपनी खुशी का कारण बाई सा से नही कहेंगे।”

    ” अब आप आ ही गईं हैं तो अपने ही शुभ मुख से कह दीजिये ,मैं जाकर ज़रा तैय्यारियाँ देख लूं।”

   राजा मुस्कुरा कर उठ गया, और बिना देर किये वहाँ से बाहर निकल गया।
   
    राजा की खुशी और पिंकी के मन की बात के बीच उलझी बांसुरी इसी उधेड़बुन में खोयी थी कि अब पिंकी को राजा से हुई बात कैसे बताये कि इसी बीच रूपा भाभी ने अपने स्वभाव के अनुरूप एक और विस्फोट कर ही दिया….

क्रमशः

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s