जीवनसाथी -35

जीवनसाथी -35


   बांसुरी ने घूर कर एक नज़र राजा को देखा__” क्या”

  ” बताता हूँ, दो मिनट ठहर कर सांस तो ले लूँ। भाग भाग कर थक गया हूँ।”

   राजा वहीं दीवार के सहारे टिक कर खड़े हुए बांसुरी को देख मुस्कुराता रहा, बांसुरी धीमे कदमों से चलती उसके पास चली आयी, तभी प्रेम हाथ में पेड़े लिये उन तक चला आया।
     पेड़ों का प्रसाद उन दोनों की तरफ बढा कर प्रेम ने चाय के लिये पूछा, राजा के हाँ कहते ही वो वहीं पास में बने स्टॉल से तीनों के लिये चाय ले आया।
     तब तक राजा तो मज़े से अपना पेड़ा खा गया लेकिन बांसुरी हाथ में रखे पेड़े को देखती उसमें से छोटा सा टुकड़ा तोड़ तोड़ कर धीरे धीरे जुगाली सी करती रही, उसे ऐसे देख राजा ने उसकी हथेली पर का पेड़ा उठाकर भी अपने मुहँ में डाल लिया__

   ” बहुत भूख लग रही है क्या तुम्हें?”

  ” भूख से ज्यादा प्यास लगी है।” राजा ने मुस्कुराती आंखों से बांसुरी को देखते हुए कहा। तब तक में चाय लिये प्रेम भी पहुंच गया __

   ” लो बुझा लो , चाय पी कर”

   ” चाय वाली नही थी।” 
 
    उन दोनों की बात ना समझ पाने से प्रेम असमंजस में था।

    ” क्या हुआ हुकुम? कुछ चाहिए आपको?”

   ” हाँ चाहिए तो था, इनकी मदद चाहिए थी पर ये हैं कि करना नही चाहती।”

   बांसुरी ने राजा को देखा फिर प्रेम को__

  ” अरे मैंने कब मना किया? बताओ तो सही क्या मदद चाहिए?”

    ” अगर आपको दिक्कत ना हो बांसुरी जी तो कल आप अपने ऑफिस से छुट्टी ले सकतीं हैं क्या? हमारे साथ चलकर कुछ गहनों और कपडों की खरीदारी करवा दीजियेगा।”

   ” गहने कपड़े किस के लिये? ” बांसुरी के सवाल पर राजा मुस्कुरा दिया__

  ” एक पत्रकार और दूजे वकील कभी संतुष्ट नही होते। ना किसी पर भरोसा करतें हैं। इन्हें अपने हर किन्तु परन्तु का जवाब चाहिए तभी ये आपके लिये कुछ करेंगे समझे प्रेम।”

  ” जी हुकुम”

   ” और यार तुम ये हुकुम हुकुम बंद करो। यहां कौन सा राजमहल है और कौन सा मैं राजकुमार। दोस्त की तरह मेरा नाम लो समझे वरना अभी तुम्हारी वापसी की टिकट कटवाता हूँ।”

  राजा की बात सुन प्रेम मुस्कुरा कर रह गया

   ” बस काम की छोड़ कर सारी इधर उधर की बातें करवा लो इनसे, समझे प्रेम भैय्या। अब जो पूछा है उसका जवाब दिये बिना ये बाकी सारी कहानी सुना देंगे।”

   प्रेम ने धीरे से हाँ में सिर हिला दिया__

   ” गहने कपड़े खरीदने हैं मतलब किसी की तो शादी होगी ही ना”
  राजा के इस बेमेल जवाब पर बांसुरी फिर बिदक गयी

   ” वही तो पूछ रही कि शादी है किसकी? कहीं आप तो शादी नही कर रहे?”

   ” नही मेरी शादी को अभी वक्त है। फिलहाल अभी शादी कर रहें हैं आपके प्रेम भैय्या।”

   अपना नाम सुन कर प्रेम के गले में चाय अटक गयी और उसे खांसी का छोटा मोटा दौरा सा पड़ गया

    ” शादी का नाम सुनते ही इनकी तो तबीयत ही खराब हो गयी”

   बांसुरी के कहने पर राजा ने प्रेम के कंधो पर अपना हाथ टिका लिया__

   ” होने दो खराब! पर अब यहाँ आयें हैं तो इनकी दुलहन लेकर ही जायेंगे। तुम्हारे प्रेम भैय्या अगले साल तीस के हो जायेंगे उसके पहले इनके हाथ पीले करने हैं। और फिर मुझे भी तो शादी करनी है, जब तक मेरे सर पर मेरा सीनियर बैठा रहेगा मैं शादी कैसे कर सकता हूँ भला।”

  राजा अपनी बात पूरी कर एकबार फिर ज़ोर से हँसने लगा__

   ” आप इनकी बातों पर ध्यान मत दीजिये, मुम्बई आकर हुकुम कुछ ज्यादा ही खुश हैं।”

    बांसुरी की सारी नाराज़गी तो वैसे भी इतने दिनों में फीकी पड़ ही चुकी थी उस पर राजा को सिर्फ देख लेने से ही वो पूरी की पूरी पिघल गयी थी,अब भले ही नाराज़गी नही थी लेकिन इतने दिनों की दूरी की सज़ा तो राजा को मिलनी ही थी। वो कैसे इतनी आसानी से उसे माफ कर सकती थी।

    ” राजा सुनो! मैं इतना तो समझ ही गयी हूँ कि पिंकी को तुमने नही मारा लेकिन पिंकी के मारने वाले को तुमने कोई सज़ा भी तो नही दी।”

  ” तुम्हें कैसे पता?”

  राजा के इसी सवाल का तो वो इन्तजार कर रही थी

   ” मुझे कैसे पता चलेगा? तुमने तो मुझे कुछ बताया ही नही,बल्कि मुझे इस लायक ही नही समझा कि मुझे कुछ बता सको, मुझसे अपनी परेशानी साझा कर सको।”

  इतनी देर में पहली बार राजा पिंकी के नाम पर उदास हो गया__

   ” यकीन मानो बांसुरी, इतना वक्त ही नही मिला मुझे। सब कुछ इतना अचानक हुआ कि किसी से बोलने बात करने का समय ही नही मिला। पिंकी की भी तो गलती थी, उसे अपने भाई पर भरोसा नही था, एक बाहर के लड़के पर उसे इतना विश्वास हो गया कि अपनी माँ पिता भाई सभी को छोड़ कर निकल गयी। क्या उसने सही किया? तुम जवाब दो? क्या तुम उसकी जगह होती तो यही करती?”

    उदासी में डूबा राजा सीढियों पर से उठ कर आगे बढ़ गया, उसके पीछे प्रेम भी निकल गया।
   अपना पर्स संभाले बांसुरी भी राजा के पीछे जल्दी जल्दी आगे बढ़ गयी__

   ” राजा! मेरी बात सुनो, तुम्हारा मूड ऑफ़ करने का मेरा कोई इरादा नही था,मैं तो बस इसी बात से नाराज़ थी कि कम से कम मुझे कुछ बता कर तो जाते तुम।”

   ” क्या बता कर जाता बांसुरी। जाने से पहले कुछ पता था क्या मुझे। तुम्हारे सामने ही तो चिट्ठी पढ़ी थी मैने।”

    सीढ़ियाँ उतर कर तीनों नीचे रोड पर आये ही थे कि दुसरी तरफ से अदिती और भास्कर भी अपनी गाड़ी में वहीं चले आये।
     बांसुरी के साथ दो लड़कों को देख अदिती और भास्कर एक दूसरे को देखने लगे।
   अदिती ही पहले गाड़ी से उतर कर बाहर उन लोगों तक चली आयी।
    बांसुरी ने अदिती को राजा और प्रेम से मिलवाया कि अन्दर बैठे भास्कर को भी समझ आ गया कि सामने खड़ा लड़का ही राजकुमार अजातशत्रु है।
    राजा का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि कोई उससे बिना प्रभावित हुए रह ही नही सकता था। जिसके दुश्मन भी उसे मारने के पहले एक बार  गले लगाना चाहे ऐसे राजा को सामने खड़ा देख आखिर भास्कर कब तक अन्दर बैठा रह सकता था।
  उससे प्रभावित होता भास्कर भी गाड़ी खोल बाहर निकल आया।

  ” हेलो मैं भास्कर!”
  
  ” अजातशत्रु ”  राजा के ऐसा कहते ही अदिती ने अपनी बात कह दी__

  ” पूरा नाम लिजिये ना राजकुमार अजातशत्रु। मैंने तो मेरी लाईफ में पहली बार किसी असली राजकुमार को देखा है, ऐंड दिस टाईटल रियली सूट्स यू

   “थैंक यू मिस….

   ” अदिती!” अदिती ने आगे बढ़ कर अपना परिचय दिया

   ” सो राजकुमार जी आगे क्या प्लान है आपका?” अदिती ने सवाल राजा और बांसुरी के भविष्य और शादी को लेकर पूछा था लेकिन राजा ने उसे दुसरी ही तरफ घुमा दिया

   ” जी फिलहाल डिनर का प्लान है ,अगर आप लोगों को आपत्ति ना हो तो हमें डिनर के लिये जॉइन कर लिजिये, कहीं आस पास चलतें हैं”

  ” व्हाई नॉट? सी साईड पे किसी रेस्तरां में चलते हैं, क्यों भास्कर ठीक है ना?”

   भास्कर ने हाँ में सिर हिलाया और वो सारे लोग अदिती की गाड़ी में रेस्तराँ के लिये निकल गये।

     रस्तोरेंट पहुंचने के बाद मेन्यू कार्ड लड़कों को थमा कर अदिती बांसुरी के साथ रेस्ट रुम की ओर चली गयी__

  ” यार बांसुरी शाम से घूम रहें हैं, मुझे तो फ्रेश होने की नीड हो रही।”
   बांसुरी भी मुस्कुरा कर अदिती के साथ चली गयी।

  फ्रेश होने के बाद कॉमन एरिया में बाल बनाती अदिती फिर बातों में लग गयी__

  ” बांसुरी चोईस बड़ी अच्छी है तुम्हारी। एकदम शानदार बंदा है और एक बात बोलूं तुम्हें चाहता भी बहुत है। बहुत खुश रखेगा तुम्हें”

  ” आपको कैसे पता?”

  ” क्या कैसे पता? उसकी आंखों में दिख रहा है यार। कौन सी दुनिया का राजकुमार होता है जो एक सामान्य लड़की के लिये रेस्टोरेंट में चेयर पीछे खींचता है बोलो। देखो बांसुरी अब ये लुका छिपी का खेल खतम करो। पहले आप-पहले आप में कहीं गाड़ी ना निकल जाये।”

  ” क्या कहना चाहती हैं अदिति आप?”

  अदिती बांसुरी को देख हँस पड़ी

  ” यार मुझे ना ये तुम लड़कियों का प्रॉब्लम समझ नही आता। प्यार भी करना है, अपने लवर के लिये भर भर आंसू रोना है, खाना पीना छोड़ देना है….ऐसी सारी हरकतें जिससे पूरी दुनिया को समझ आ जाये की बन्दी इश्क़ में हैं कर लेना है लेकिन जैसे ही इज़हार का समय आया छुई-मुई बन जाना है, ऐसा क्यों?”

   बांसुरी चुप चाप मुस्कुराती खड़ी रही__

  ” नही सिरियस्ली। बताओ जब प्यार दोनो को बराबर है तो हमेशा इज़हार पहले लड़का ही क्यों करे? लड़की इज़हार कर लेगी तो गलत हो जायेगी क्या?

  ” बिल्कुल नही। क्यों गलत हो जायेगी?  अदिती जी जब दो दिल वाकई मुहब्बत में होतें हैं तब कौन पहले इज़हार कर रहा कौन बाद में ये बातें बेमानी हो जातीं हैं।”

   ” हाँ लेकिन जब समय कम हो तब बेमानी नही होतीं। अभी तुम्हें अपने घर पर भी बात करनी है ना? ये मत भूल जाना।”

” जी वो तो याद है मुझे। एक बात पूछूँ आपसे।”

  ” बेशक। ये भी कोई पूछने की बात है?”

” आप इतनी शिद्दत से प्यार को महसूस करती हैं तब तो किया भी होगा ना किसी से।”

  अदिती ने कोई जवाब नही दिया__

  ” आप किसका इन्तजार कर रहीं हैं?  आप ही इज़हार कर दीजिये पहले।”

  बांसुरी के सवाल पर चौंक के उसे देखती अदिती अपनी लिपस्टिक कंघी को पर्स में रखती वहाँ से बाहर निकलने की तैयारी करने लगी

  ” क्या हुआ? इज़हार  के नाम पे आपने कोई जवाब नही दिया?”

   ” बांसुरी इज़हार तो आज कर दूँ पर सामने वाले को पहले एहसास तो हो।
   जिस दिन उसे मुझसे उतनी ही मुहब्बत हो गयी जितनी मुझे है उस दिन किसी का इन्तजार नही रहेगा। समझीं।”

  बांसुरी और अदिती मुस्कुराती हुई टेबल पर वापस लौट आयीं।

    राजा और भास्कर एक दूसरे से वैसे ही मिले जैसे दो शिक्षित सम्भ्रात कुलीन घर के लड़के मिलतें हैं।
  उन दोनों के बीच वही सारी बातें होती रहीं जो इस सत्ताईस अट्ठाईस की उम्र के लड़कों में होतीं हैं।
  लीडिंग पॉलीटिकल पार्टी के काम अपोसिशन के आरोप, मिडिया की मनमानी के साथ ही आई पी एल और ट्वेंटी ट्वेंटी की बातें निपटा के अब वो दोनो वैश्विक अर्थव्यवस्था की चीरफाड़ तक पहुंच चुके थे।
    बातें सारी ही ऐसी थी जिनमें लड़कियों को कोई इंटरस्ट नही आ रहा था, लेकिन पहली बार ही मिले राजा और प्रेम के सामने अदिती भी अपना ज्ञान कम ही दिखा रही थी।

   खाना खत्म होते तक में भास्कर राजा से और राजा भास्कर से पूरी तरह प्रभावित हो चुके थे।
  राजा को अब तक ये मालूम नही था कि बांसुरी भास्कर को सारी बातें बता चुकी हैं।
    उन लोगों के सामने ही राजा ने जब फिर से बांसुरी को अगले दिन की छुट्टी के लिये पूछा तो अदिती ने सहर्ष अनुमति दे दी।

   इसके साथ ही राजा ने अगली शाम छै बजे के समय पर भास्कर और अदिती को भी मन्दिर आने का न्योता दे दिया।
    ज्यादा पूछताछ करने का स्वभाव ना भास्कर का था ना अदिती का। दोनों ने ही कल मिलने की बात स्वीकार कर राजा से बिदा ली और घर के लिये निकल पड़े।
   बांसुरी भी उन दोनों के सामने संकोचवश ज्यादा कुछ ना कह सकी, अगली सुबह राजा के बताये मॉल में तय समय में पहुंचने का वादा कर वो भी अदिती के साथ ही निकल गयी।

   राजा और प्रेम प्रताप के फ्लैट की ओर निकल गये।

    ” आज रात कहाँ रुकोगे भास्कर?”

  अदिती के सवाल पर भास्कर सोच में पड़ गया। हालांकि उसका एक शेयरिंग रुम बॉम्बे में भी था, पर उसके पुणे शिफ्ट होने से उसके रुम मेट ने एक और लड़के को साथ रख लिया था।
   वीसा का काम बॉम्बे से ही होना था जिससे अब उसे पुणे वापस नही जाना था।

   उसे सोच में डूबा देख बांसुरी ने धीरे से अपनी बात कह दी__

   ” मेरे फ्लैट पर रुक जाइये।” अदिती पलट कर बांसुरी को देखने लगी

  ” आर यू श्योर बांसुरी?”

  ” हाँ! मुझे कोई दिक्कत नही है। मैं वैसे भी आज निरमा के घर रुकने वाली थी, असल में कल छुट्टी लूंगी तो थोड़ा सा काम अभी रात में निपटा कर निरमा को समझा दूंगी। जिससे उसे कल आसानी हो जायेगी।”

   ” ओके! तब तो कोई प्रॉब्लम ही नही है। तो बताओ बांसुरी तुम्हें कहाँ उतार दूँ?”

  बांसुरी ने अपने फ्लैट की चाबी भास्कर को दी और निरमा का पता अदिती को बता दिया।
   निरमा के घर के सामने उसे उतार कर दोनो आगे बढ गये……

   ” तुमने एक बात सही कही थी अदिती”

  ” क्या । मेरा मतलब कौन सी बात? क्योंकि मैं तो ऑलमोस्ट सारी ही बातें सहीं कहती हूँ।”

   ” वही ,ज़िन्दगी में आगे बढने वाली बात। आज इतनी देर तक राजा और बांसुरी के साथ बैठ कर भी मुझे राजा से कोई जलन महसूस नही हुई।
  दिल का सारा दर्द शायद पहले ही बह चुका था, या पता नही क्या? लेकिन आज उन दोनों को एक साथ देख कर यही लगा कि बांसुरी के लिये मुझ से कहीं ज्यादा अच्छा लड़का राजा ही है।
   दोनो को देख कर ही मेड फ़ॉर इच अदर वाली फीलिंग आती है, है ना।”

” हम्म! भास्कर तुम्हें सच में फ्लैट पर जाना है?”

  ” क्यों? तुम्हें नही जाना?”

  ” नही। मुझे घर नही जाना। मैं हमेशा सोचा करती थी कि जब मुम्बई की रातें जागती हैं तो लोग क्यों सो जातें हैं यहाँ। मेरा मतलब मैं एक बार बस एक बार पूरी रात मुम्बई के बीच पर गुज़ारना चाहती हूँ।”

  ” तो चलो फिर। क्या सोचना है?”

  ” पक्का?”

  ” हाँ भई एकदम पक्का।”

   ” बाद में ये तो नही कहोगे कि इस लड़की ने मुझे बिगाड़ दिया?”
   अदिती की शरारती हँसी सुन भास्कर भी हँस पड़ा

  ” बिगाड़ना शुरु तो कर ही दिया है मैडम तुमने, अब मुझे देखना ये है कि मैं किस लेवल तक बिगड़ पाता हूँ।”

   ” मेरे जैसी बैड गर्ल के साथ रहोगे तो बैड बॉय बन ही जाओगे?”

   ” एक्सक्युज़ मी! यू आर नॉट ए बैड गर्ल यू आर एक्चुली ए बैड बैड गर्ल।”

  ” अच्छा बच्चू अभी बताती हूँ तुम्हें। ये बैड गर्ल हाथों और लातों से आरती भी उतारना जानती है।
  
समन्दर की रेत पर एक दूसरे के पीछे भागते, कभी पानी की लहरों से खेलते दोनो अपने खोये बचपन में पहुंच गये थे।
    अदिती ने कभी अपना बचपन जिया ही नही था। आज भास्कर के साथ उसके बचपन की सारी दबी छिपी इच्छायें उसे बताती वो बचपन की छोटी सी गुड़िया बन गयी थी और उसकी छोटी छोटी इच्छायें पूरी करता भास्कर जैसे उसकी सिर्फ माँ ही नही पिता भी बन बैठा था।

    मुरमुरे वाले से एक के उपर एक मुरमुरे खरीदते भास्कर को बिना रोके टोके चुपचाप रेत पर बैठी अदिती देखती रही। फिर उस मुरमुरे को वहाँ किनारे सोये बच्चों को बांट कर उनसे सिर्फ पेपर वापस लाकर भास्कर ने ढ़ेर सारी कागज़ की नाव तैय्यार कर अदिती को थमा दी।
   उन्हें समंदर की उँची नीची लहरों पर तैराती अदिती बच्चो सी चहक उठी थी।
     कभी गोलगप्पे तो कभी कुल्फ़ी के रेहड़ी से कुछ ना कुछ खरीदती, आधा खाती आधा गिराती अदिती जैसे अपनी ऑफिस की पोजीशन, अपना नाम शोहरत सब ताक पर रख कर छोटी सी बच्ची ही बन गयी थी।
    उसे वैसे भी दुनिया की निरर्थक बातों की फिक्र कम होती थी लेकिन आज वो जैसे इस दुनिया का हिस्सा ही नही रहना चाहती थी।

  ” मिस्टर भास्कर ये मत सोचना की नशा सिर्फ ड्रिंक्स में होता है और पीने वाला ही बहकता है। देख लो आज तो मैंने पी भी नही फिर भी और दिनों से कहीं ज्यादा बहकी हुई है।”

  ” वही देख रहा हूँ, बहकने के लिये किसी बहाने की ज़रूरत नही है।”

  ” सही कहा , ये जिंदगी का नशा है, जो इसमें एक बार डूबा उसे फिर किसी और चीज़ का असर नही रहता। वैसे तुम सोचते होगे मैं थोड़ी फिलोसफर टाईप भी हूँ ना।”

   ” मैं जानता हुँ मल्टीटैलेंटेड हो आप”

  ” और आप भी भास्कर जी। बस थोड़े से खडूस हो, थोड़े हाश हो, थोड़े से रूड हो, कभी कभी गुस्सा थोड़ा ज्यादा कर लेते हो, बातें कम करते हो, खाना भी नपा तुला खाते हो, भले ही पीते भी नही हो लेकिन फिर भी टैलेंटेड तो हो बॉस।”

   ” भिगो भिगो के जूतियाँ मारना कोई आपसे सीखे।”

  ” सिर्फ जूतियाँ मारना ही नही, हम और भी बहुत कुछ सिखा सकतें हैं, सामने वाला सीखना तो चाहे।”

  ” अच्छा ये बात! तो और क्या क्या सिखा सकती हैं आप?”

  ” बहुत कुछ ! सही समय आता जायेगा और आपको पता चलता जायेगा।”

   बहुत देर तक दोनो इधर उधर की बातों में डूबे रहे। कभी बचपन की बातें कभी कॉलेज की बातें।
  बातें तो खतम नही हुई लेकिन वो दोनों वहीं किनारे पड़ी एक एक नाव में खुले आसमान के नीचे लेटे कब सो गये उन्हें भी पता नही चला।
    

   **********

   निरमा के घर पर बेल बजा कर बाहर खड़ी बांसुरी शाम से हुई सारी बातें याद कर कर के मुस्कुरा रही थी। दरवाज़ा निरमा की मामी ने खोला, बांसुरी को देखते ही वो खुश हो गईं।

   ” आओ अन्दर आ जाओ बांसुरी। आज बड़े दिनों बाद तुम्हारा आना हुआ है इधर।”

  ” जी मामी जी,इधर थोड़ा काम में व्यस्त हो गयी थी। निरमा कहाँ है?”

  ” ऊपर अपने कमरे में है बेटा! तुम ऊपर चलो मैं चाय लेकर आती हूँ।”

  ” नही मामी जी रहने दीजिये, मैं तुरंत खाना खा कर ही आ रही हूँ।”

  ” अरे तो क्या हुआ? चाय से खाना पच जायेगा। तुम चलो मैं आयी।”


बांसुरी निरमा के कमरे में पहुंची तब निरमा किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी। बांसुरी को देखते ही निरमा ने मुस्कुरा कर उसे अन्दर आने कहा और फ़ोन रख दिया__

  ” मैं तो यहीं आ गयी फिर बात किस से हो रही थी।”

  ” उसी से जिससे तुझे मिलवाना है।”

  ” ओह्हो क्या बात है? तो मैडम कब मिलवाने वाली हैं आप?”

  ” मैं तो  तुझे प्रताप से कब का मिलवा चुकी होती, तेरे ही पास अब मेरे लिये टाईम नही है। जाने कहाँ कहाँ भटकती रहती है ऊपर से अपना काम भी मेरे सिर डाल देती है।”

  ” मेरी निरमो बड़ी नाराज़ लग रही है।”

  ” काहे की नाराज़ , जानती हूँ तू फिर अपनी मीठी बातों से मना ही लेगी। तुझसे कोई जीत पाया है जो मैं जीत पाऊंगी।”

   बांसुरी निरमा के गले में बाहें डाले झूल गयी__

  ” मुझे भी तुझसे कुछ बताना है निरमा”

  ” हाँ बोल! अब कहाँ भागने वाली है तू, और कितने दिन के लिये तेरे ड्राफ्ट एडिट कर कर के मुझे पोस्ट करने पड़ेंगे”
    दोनों सखियों की बातें चल ही रहीं थी कि मामी दरवाज़ा खोले अन्दर चलीं आयीं। उन दोनों के सामने चाय की ट्रे रख वो हँस कर वापस लौट गईं।

  बांसुरी ने अपनी चाय उठाई और पीते हुए निरमा की बातें सुनती रही__

  ” क्या हुआ निरमा तू चाय क्यों नही ले रही? ठंडी हो जायेगी पी ले।”

  ” नही यार! आजकल मुझे चाय भाती नही है।”
 
  ” क्यों? पहले तो 3-4 कप ऑफिस में ही पी लेती थी , क्या हो गया ऐसा?”

  ” मालूम नही लेकिन आजकल चाय की स्मेल से ही उल्टी सी आने लगती है।”

  ” हम्म होता है, जब दिमाग में काम का प्रेशर और दिल में बॉयफ्रेंड का प्रेशर तो अक्सर चाय कॉफ़ी ज़हर बन जाती है।”

  ” ओह मैडम शायरा जी! आप बताइये किसके बारे में बताने वाली थीं आप?”

  ” अभी नही! कल शाम ठीक 6 बजे तू ऑफिस से सीधे लक्ष्मी मन्दिर आ जाना, वहीं सब बताऊँगी।”

  ” तू और तेरा सस्पेंस। अच्छा ये बता शादी के लिये कब से छुट्टी लेने वाली है तू। और वीसा के लिये ऑफिस वालों ने तेरा पेपर डाला है या नही।”

   ” नही मैं कोई सिंगापुर नही जाने वाली हूँ ”

  ” लेकिन क्यों?”

   बांसुरी ने उसे भास्कर और अदिति के साथ हुई सारी बातचीत बता दी, लेकिन अभी भी राजा से जुड़ी कई बातें वो नही बता पायी। कुछ तो समय की कमी और कुछ काम की अधिकता में वो सारा सब कुछ कह नही पायी।
   बांसुरी अपनी गाथा कहती रही और साथ ही लैपटॉप पर काम भी करती रही लेकिन कहानी सुनने वाली कब गहरी नींद में डूब गयी ये बांसुरी जान नही पायी।

   ********

  प्रताप के फ्लैट पर राजा और प्रेम भी पहुंचने के बाद अपने एक दो ज़रूरी फ़ोन निपटा कर सोने की तैय्यारी कर रहे थे।

    हाथ मुहँ धोकर आने के बाद प्रेम ने कमरे की सारी खिड़कियों दरवाजों का मुआयना किया और ताला वगैरह लगा कर सोने चला गया ।
 
   प्रेम के जाने के बाद राजा ने अपना मोबाइल निकाला और देखा बांसुरी का कोई मेसेज नही आया था।
   उसने मुस्कुरा कर फ़ोन बंद किया और सोने चला गया। बिना बात के गुड मॉर्निंग गुड नाईट सन्देश भेजने का उसका स्वभाव भी नही था।

   अचानक जैसे उसे कुछ ध्यान आया। फ़ोन बंद कर रखने के बाद एक बार फिर फ़ोन उठाया वॉट्सएप्प खोला, बांसुरी का प्रोफाइल देखा__
   वही फोटो लगी थी जो उसके स्क्रीनसेवर में थी।
जिसमें बांसुरी के दोनों पैर और उनमें बंधी पायल नज़र आ रही थी।
   चेहरे पर एक मुस्कान चली आयी, फिर ध्यान आया उस दिन तो ये फोटो उसने बांसुरी को दी ही नही थी। देना क्या दिखाई तक नही थी, फिर ये तस्वीर उसकी प्रोफाइल में पहुंची कैसे?
    
    अब तो राजकुमार अजातशत्रु फ़ोन लॉक रखना सीखना ही पड़ेगा वर्ना दिल के गहरे राज़ उथले होकर सारे जहान के सामने चले आयेंगे।
  उस तस्वीर पे एक बार प्यार से हाथ फेर कर राजा ने आंखें बंद कर ली।
   उसका अगला दिन बहुत व्यस्त बीतने वाला था। उसके पास सुबह के कुछ पांच छै घण्टे ही थे जिसमें उसे शादी की सारी तैय्यारियाँ करनी थीं। वो तो अच्छा है ये पंडिताईंन साथ रहेगी तो पूजा पाठ का कोई सामान छूटने नही पायेगा वर्ना वो और प्रेम दोनो से ही ये काम अकेले नही होना था।

   बांसुरी के बारे में सोच उसके चेहरे पर फिर एक बार मुस्कान चली आयी …

क्रमश:

aparna….

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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