जीवनसाथी -37

जीवन साथी- 37


प्रिंस से बिदा लेकर वो सभी बांसुरी के घर की ओर निकल गये।

    ” बंसी वो अपना कुल्फ़ी वाला तो अभी भी उसी स्क़्वेयर पर अपना खोमचा लगाता होगा ना?”

  ” हाँ, वो तो सदियों से वहीं लगाता आ रहा है।”

   ” तो चलें पहले कुल्फ़ी खा लें? पिंकी की बात पर सभी तैय्यार हो गये।

     सुबह की ढ़ेर सारी खरीदी में खरीदी गयी वस्तुओं में ये गाड़ी भी शामिल थी। जो राजा ने दस दिन पहले ही कॉल कर के बुक कर रखी थी, ये राजा की तरफ से पिंकी और रतन के लिये शादी का तोहफा था।  आज भी जब बांसुरी मन्दिर जाने के लिये तैयार हो रही थी उसी समय मैनेजर से बात कर राजा ने वहीं मॉल के पते पर गाड़ी मँगवा ली थी।
    सभी इस वक्त उसी में सवार थे।

     गाड़ी प्रेम ने पिंकी के बताये मोड़ पर रोक दी। पिंकी बांसुरी और रतन को वहाँ उतार कर प्रेम ने राजा से पूछ कर गाड़ी थोड़ा आगे बढ़ा दी__

  ” ये लोग कहाँ चल दिये।”

  ” प्रेम भैय्या जरुर अपने लिये पान ढूंढने गये होंगे, यही तो उनका एकमात्र इश्क़ है। रात के खाने के बाद पान बहुत ज़रूरी है। हम तो उन्हें इस बात पर बहुत छेड़ते भी थे पर बेचारे कुछ कहते नही चुप चाप शरमा जातें है बस ।”

  ” आप प्रेम भैय्या को छेड़तीं थीं?” रतन के सवाल पर पिंकी लजा गयी__

  ” अरे हमारा मतलब ये है कि और कोई एब नही है उनमें बस इस एक पान प्रेम के अलावा, तो हम और राजा भैय्या हमेशा उनके पान प्रेम पर कुछ ना कुछ चुटकी लेते रहतें हैं।”

   रतन ने उन दोनों से फ्लेवर पूछा और तीनों के लिये कुल्फ़ी ले आया….

    तीनो अपनी बातों में लगे खा रहे थे कि चार पांच आस पास के गुंडे टाईप लड़के भी वहीं चले आये__

  ” क्या यार गोलु! हमे भी खिला दे यार कुल्फ़ी “

  ” कौन सा फ्लेवर लेंगे भैय्या?”

   ” पीले रंग का जो भी फ्लेवर है वही दे दे, साला आजकल हर तरफ एक ही रंग नज़र आ रहा है, पीला पीला।” उन लड़कों में से एक बांसुरी और उसकी पीली लहरिया साड़ी  को देखता कुछ ज्यादा ही रंगदारी पे उतर आया।

  ” क्यों सी पी भैय्या आम कुछ ज्यादा ही पसंद है क्या?”

   ” यार हर पीली चीज़ पसंद है चाहे सोना हो या लड़की। और अगर कहीं कोई गुलाबी लड़की पीले कपडों में हो तब तो क्या कहने?”

  ” ओह्हो क्या बात है ? आज तो आप शायर हुए जा रहें हैं , खाना नही खाया क्या?”

  ” नही यार , आज तो भूखे बैठे हैं, अब घर पे कोई हो तब तो खिलायेगी ना? बांसुरी को घूरना उसने कम नही किया।।

  ” तो आज बस कुल्फ़ी से ही पेट भरने का इरादा है क्या? ”

  “हाँ बिल्कुल!! खा लेंगे मन भर के।
          मैं सोच रहा हूँ, इन जैसी कोई मेरी ज़िंदगी में आये तो बात बन जाये, वो क्या है बे आगे की लाइन गुल को बहार बहार को चमन , दिल को दिल बदन को …..

   अभी वो आगे की लाइन पूरी कर पाता की एक करारा झापड़ उसके गालों पर पड़ा, झन्नाट! की आवाज़ के साथ वो अपने इस अपमान से तिलमिला कर रह गया।
    “कहाँ है  बे कल्लू! निकाल मेरी दुनाली। “

   उस फोकटिये  की आवाज़ पर कल्लू भाग कर जीप से दुनाली निकाल लाया।
    तब तक में झापड़ से चपटे पड़े चेहरे को सीधा करता वो इधर उधर देखने लगा, एक ही थप्पड़ में रॉयल स्टैग के चार पैग का असर फ़ानी हो गया।

  ” भैय्या ये लिजिये ” दुनाली उसके हाथ में पकड़ा कर कल्लू बाजू में खड़ा हो गया।

   दुनाली को सीधा करने की कोशिश कर ही रहा था कि एक और करारा थप्पड़ उसके दूसरे गाल पर पड़ चुका था__

         ” मैं इनसान हूँ फ़रिश्ता नहीं
           डर है बहक न जाऊं कहीं
          तन्हा दिल न सम्भलेगा,
           प्यार बिना ये तड़पेगा
    आप सा कहाँ है दिल आप को ही पाये
             तो बात बन जाये …”
     आहाँ बात बन जाये….बात बन जाये….
   
….. राजा ने उसके कॉलर को पकड़ कर उसके चेहरे को देखते हुए गाने का बाकी का हिस्सा पूरा कर दिया। उसके साथ के बाकी लड़के अब तक प्रेम की गन देख कर वैसे ही गुमसुम हो रक्खे थे।
   आज तक ये छिछोरे खुद को यहाँ का सबसे बड़ा पण्टर समझते आये थे, आज पता नही किसका छप्पर फटा था और ये दो छै फुटिया गुंडे ( राजा और प्रेम) टपक पडे थे।

    दिखने में सादे शरीफ से लगने वाले इतनी महंगी गन लिये घूम रहें हैं यही कीड़ा उन सभी के दिमाग में कुलबुला रहा था। किसी बड़े आदमी के बॉडी गार्ड हैं, पुलिस वालें है या कहीं आर्मी वाले तो नही।
   बाद के दो ऑप्शन सोच बाकी बचे चारों के माथे पर पसीना छलक आया, एक ने धीरे से दूसरे के कान में  फुसफुसाया ___

   ” अब्बे कहीं पुलिस के हत्थे तो नही चढ़ गये हम?”

  ” यार आस पास की चार चौकियों के थानेदार को तो पहचानते हैं अपन। ये दोनों तो कभी नही दिखे। ”

  ” अबे एक नया आई पी एस आया है ना!  सुना है बाईस मारता है और गिनता है एक।”

  ” आजकल पुलिस में अनपढ़ों को भी भर्ती कर रहे का बे?” अगला बिल्बिलाया
 
  ” अब आजकल ये पढ़े लिखे फौजदारों की गिनती भी कमज़ोर हो गयी तो का करें बे।”

   ” अबे इनको गिनती नही आती तो क्या पीठ तो हमारी उधड़ेगी”

   प्रेम ने एक नज़र चारों पर डाली ,सब को जैसे सांप सूंघ गया__” हम चुप हैं साहब, और उस समय भी चुप थे ये सी पी भाई थोड़ा ज्यादा बोल जातें हैं कभी कभी”

  ” सीपी भाई कौन?” प्रेम गरजा।

   ” वो जिन्हें आपके दोस्त तबीयत से थपड़िया रहें हैं।”

  ” तो अपने सीपी को समझाते काहे नही हो बे” अबकी बार जवाब राजा ने दिया…..

    ” वो क्या है भैय्या जी जब भी  ये बिदेसी लेते हैं तो थोड़ा ज्यादा बहक जातें हैं।”

  ” तो जब पचा नही पाते तो लेते ही काहें हैं” राजा उन चारों की तरफ देख कर बात कर रहा था तब तक में अपनी दुनाली सीधी किये सीपी ने फायर किया, और बन्दूक में से गोली की जगह पानी का फव्वारा निकल पड़ा।
   आवाज़ से राजा ने वापस उसकी तरफ देखा__

    ” तेरी दुनाली देख कर ही समझ गया था कि होली की पिचकारी है ये।”

  ” अरे ऐसे कैसे, हमारे दादा ने इसी से छब्बीस जंगली भैंसे मारे थे और एक सौ बियावन बाघ।”

   ” हाँ तो बेटा हमारे जंगलो से शेर बाघ खतम करने का पूरा श्रेय तुम्हारी फैमिली को जाता है, क्यों?”  राजा की ये बात सुन उनमें से एक पूरी तरह निश्चित हो गया कि ये हो ना हो पुलिस के आदमी ही है और फालतू की कहा सुनी में अपने साथ सीपी सबका बंटाधार करने वाला है।

  ” अरे नही साहब!  फेक रहा है जलील इन्सान। इसके बाप दादा ने भी देखी है बन्दूक । ये दुनाली तो अखेबर कबाड़ी के वहाँ से सैकेण्ड हैंड खरीदी थी वो भी बस गली मुहल्ले में धौंस मारने। माफ कर दो साहब जाने दो।”

   नही बेटा इत्ती जल्दी नही। अभी तो मज़ा आना शुरु हुआ है…. ज़रा बी एच यू वाली रैगिंग हो जाये!”

  ” साहब ! माफ कर दो साहब कसम पैदा करने वाले की अब कभी लड़की नही छेड़ेंगे।”

  ” काहे बे? रैगिंग के नाम से डर गये जो मिथुन की पिक्चर याद आ गयी?”

  ” नही हुजूर! बनारस हिंदू बिस्बिद्यआलय ( विश्वविद्यालय) के नाम से डर गये। वहीं होसियारपुर के हैं हम?” 
 
  ” ओह तभी  इतना ज्ञान पेल रहे हो बेटा? और ये तुम्हारे दुनाली चच्चा कहाँ के हैं”

” ई तो भैय्या जी यहीं लोकल के हैं घाटकोपर के।”

  ” क्या किया जाये हुकुम ? मार दिया जाये कि छोड़ दिया जाये?” प्रेम की बात सुन राजा ज़ोर से हँस पड़ा

  ” क्या बात है इन लड़कों ने तो प्रेम को भी शायर बना दिया, इसी बात पर इन्हें वार्निंग के साथ छोड़ दिया जाये। चलो बे फुटो अब यहाँ से, आइंदा ये काम करते नज़र आये जो आज कर रहे थे तो सोच लेना।”

  ” भैय्या जी रहम। अब तो खुद की बीवी को भी ना छेड़े इतना ड़ोज दे दिया आपने।”

  ” बेटा 2 ही थप्पड़ में लाइन पे आ गये, चलो निकलो अब। और सुनो ये दुनाली चच्चा को गाड़ी हर्गिज़ चलाने ना देना, पूरा टुन्न है।”

   ” अबे रुको एक मिनट सुनो। ये सीपी नाम कुछ अजीब नही है? मोती सीपी उसी तरह का है क्या कुछ?”

   ” नही भैया जी! ऊ असल में सीपी भैय्या एको बार दिल्ली गये रहे तब वहाँ कनाट प्लेस इन्हें बहुत भा गया तब से अपना नाम सीपी मतलब कनाट प्लेस का शार्ट फॉर्म रख डाले। वैसे इनका असली नाम चंदर प्रकाश मोगरे है।”

” चलो फिर निकलो , बस ये मोगरे को गाड़ी मत देना।”

  ” जी भैय्या जी”। वो चारों पांचों अपने संग सी पी को लिये गिरते पड़ते वहाँ से भाग खड़े हुए, हालांकि उनका छुटभैय्या नेता अपने अपमान से इतना तिलमिला गया कि निकलते समय राजा की आखिरी बात सुन जान बूझ कर उसकी बात काटने उसने गाड़ी की चाबी साथ वाले के हाथ से खिंची और गाड़ी गियर में डाल दी।

   ” अरे वो लल्लू खुद ही ड्राईव करने बैठ गया आखिर”

  रतन की बात पर जब तक सब उन्हें रोकने की सोचते वो अपनी जीप वहाँ से मुम्बई पुणे हाइवे की ओर भगा ले गया।

    उन लोगों के वहाँ से जाते ही यहाँ सब का हँस हँस के बुरा हाल था, राजा और प्रेम भी कुल्फ़ी लेकर उन लोगों के पास आ बैठे__

  ” क्या हुआ भाई? आप थोड़े परेशान लग रहे?”

” हाँ पिंकी, वो लड़का बहुत पिया हुआ था ऐसे में उसका हाइवे में गाड़ी चलाना सही नही है। हमें उन लोगों को ऐसे नही छोड़ना था, या तो घर छोड़ देना था या पुलिस स्टेशन।”

  ” राजा भैय्या आप जिनसे जान पहचान तक नही उनके बारे में भी इतना सोच लेतें हैं।” रतन की बात का जवाब दिया प्रेम ने__

  ” आखिर राजा हैं पदवी से भी और दिल से भी। एक राजा अपनी जनता का भला बुरा सुख दुख सब सोचता है भले ही उन्हें जाने या ना जाने। अब ये लोग भले हमारे शहर के ना हों लेकिन राजा जी का खून तो वही राजसी खून है, जो जनता के लिये कभी बदलेगा नही।”

   सभी बातें करते फ्लैट पर पहुंच गये।

  सभी हॉल में ही फ्रेश होने के बाद जमे थे, एक बांसुरी ही इधर उधर भाग दौड़ कर सबके सोने की व्यवस्था देख रही थी, उसे इतना परेशान होते देख राजा भी उसकी मदद करने उसके साथ ही चला गया__

  ” इतना परेशान क्यों हो रही हो? ”

  ” बस सोच रहीं हूँ किसका बिस्तर कहाँ लगाऊँ?”  मेरे पास तो एक्स्ट्रा मेट्रेस भी नही है, सामने वाली आँटी से पूछ लूं क्या? ”

  ” अरे नही नही बांसुरी! इसकी ज़रूरत नही है।”

  ” ओके! लेकिन अगर यहाँ बेडरूम में पिंकी और रतन सो गये तो हॉल में तुम्हारे मेरे साथ प्रेम भैय्या सो जायेंगे?”

    कहने को तो कह गयी लेकिन कहने के साथ ही वो संकोच में गड़ भी गयी, राजा भी थोड़ा असहज हो उठा….. तभी पिंकी अपना बैग उठाये अन्दर चली आयी__

  ” क्या हुआ बंसी ? तुम दोनों कुछ टेंशन में लग रहे।”

” नही पिंकी, मैं बस सोने की व्यवस्था …..

  “व्हाट सोने की व्यवस्था? मैं यहाँ सोने आयीं हुँ क्या? कल भाई चले जायेंगे तब वापस हम भी पढ़ाई में डूब जायेंगे इसलिये आज की रात फुल मस्ती, समझीं मैडम। अब चलिये हॉल में, मैं ज़रा ये भारी-भरकम कपड़े बदल लूं। मैं फ्रेश होकर आती हूँ।”

   बांसुरी और राजा मुस्कुरा कर बाहर चले आये , तब तक में रतन ने प्रेम की मदद से सोफों को एक किनारे कर नीचे कुशन्स और कार्पेट को सेट कर उसके ऊपर से चादर डाल ऐसी व्यवस्था कर दी कि सभी उस पर आराम से बैठ सकें।

   सभी वहाँ बैठे अपनी स्कूल कॉलेज की यादें एक दूसरे से शेयर कर रहे थे। पिंकी अपनी कॉलेज की बातें बता बता कर खूब हँस रही थी कि उसे बांसुरी की कही एक पुरानी बात याद आ गयी__

  “भाई आपने अपनी कॉलेज की यादें हमसे कभी नही बताईं, लेकिन चोरी चोरी सब कुछ बांसुरी को बता गये, ये तो गलत बात है। अब जब बनारस पढ़ने गये थे तो यादें तो होंगी ही।”

   ” अरे कौन बेवकूफ कॉलेज में पढ़ने जाता है खास कर लड़के तो बिल्कुल नही। हम बस डिग्री के लिये जातें हैं। असली पढ़ाई तो मालूम चलता है कॉलेज के बाद शुरु होती है।”

  ” बात तो पते की कही है भाई आपने” रतन ने राजा की बात का समर्थन किया

   ” अच्छा जी आप भी राजा भैय्या की तरफ हो गये। वैसे तुम पर तो अटूट विश्वास है मुझे, तुम सच में कॉलेज में पढ़ाई के अलावा सब कर लेते होगे।”

   पिंकी की बात सुन रतन और तन कर बैठ गया__

” देखा भैय्या जी कितना विश्वास है हमारी बीवी को हम पर । अच्छा राजा भैय्या एक बात पूछें आपसे?”

  ” हाँ बिल्कुल पूछो?”

  ” हम बहुत दिन से सोच रहे थे, बल्कि जब पहली बार आपसे मिले ना तभी से सोच रहे लेकिन मौका नही मिला”

  ” अरे तो सोच सोच के इतना काहे परेशान हुए भाई, फ़ोन कर के पूछ लेते”

  ” नही अब वो सामने आपकी बहन भी बैठी है तो सोच में हैं कि पूछे की नही”

  राजा आश्चर्य से रतन को देखने लगा__

  ” ऐसा क्या पूछना है जवाई जी”
 
  ” आप इतने हैंडसम हैं तो कॉलेज में कोई लड़की वड़की का चक्कर नही हुआ आपका। देखिए जवाब देना नही देना आपके उपर है ।”

  रतन की बात पर पिंकी ज़ोर से हँस पड़ी __

  ” राजा भैय्या भाई, पापा, दोस्त सब कुछ हैं हमारे। इनकी हरकतें सब हम अच्छे से जानतें हैं। इनका ज्ञान तो पूछो मत रतन, पूरी रात बीत जायेगी पर इनकी ज्ञान गंगा बहती ही रहेगी।”

  ” अच्छा मतलब आपने भी छेड़ी तो होंगी, तभी तो आज वहाँ कुल्फ़ी काण्ड में कैसे तुरंत कूद पड़े।”

  ” अरे वो छेड़ थोड़े ना रहा था, सामने से लाइन मार रहा था , पूरा का पूरा।”

   इन सब की बातें जैसे ही कुल्फ़ी वाले किस्से की ओर मुड़ी बांसुरी असहज हो उठी__” मैं कॉफ़ी बना कर लाती हूँ ”
   कह कर वो जल्दी से रसोई में घुस गयी। वैसे आज वहां एक पल को वो भी उन गुंडों को देख घबरा गयी थी लेकिन सही समय पर राजा के थप्पड़ ने उसे राहत दे दी थी।
  पर इस सारे काण्ड का केंद्र बिंदु तो वही थी इसलिये वहाँ भी इस सबके बाद वो शर्म से चुपचाप रह गयी थी इस बात को समझ राजा ने बातों को हँसी मज़ाक में उड़ा दिया था।
    उस समय तो बात खतम कर गया लेकिन अभी फिर वही शुरु। वो रसोई के कांच से लगी ध्यान से राजा की बात सुनने की कोशिश कर रही थी।

    राजा की छेड़ने वाली बात रतन को बड़ी पसंद आ गयी__”भैया जी अन्तर क्या होता है दोनो में।”

  ” देखो रतन मैं कॉलेज में लड़कियों को ना तो छेड़ता था ना लाइन मारता था, क्योंकि अपनी पर्सनैलीटि ही ऐसी थी कि लड़कियाँ खुद इंप्रेस हो जाती थी। अब देखो छेड़ना मतलब किसी लड़की के बाजू से कोई कमेंट मारा और निकल गये, जैसे ए चश्मिश, हे बुक वर्म । बोल तो और भी बहुत कुछ देते थे लेकिन अपनी प्रिंसेस बहना के सामने इतना ज्ञान काफी है। और लाइन लड़के तब मारतें हैं जब वो बदले में लड़की से भी कोई रिस्पोंस चाहते हैं। जो मैने आज तक कभी नही किया।”

   दीवार से लगी खड़ी बांसुरी मुस्कुरा उठी__” बड़ा आया झूठा कहीं का। सत्ताईस का हो गया और आज तक किसी लड़की को देखा तक नही? हुह्ं झूठा।”

  वो सांस रोके आगे की बात सुनने की कोशिश करती रही लेकिन बाहर से आवाज़ें आनी कुछ कम हो गयी। बस कुछ हँसी ठिठोली की आवाज़े आती रहीं , वो थोड़ा और आगे बढ कर उन आवाज़ों में राजा की आवाज़ पहचानने की कोशिश कर रही थी कि किसी से टकराते टकराते बची। सीधी खड़ी होकर उसने सामने देखा तो राजा खड़ा था__

  ” तुम दरवाज़े के पास खड़ी होकर कॉफ़ी बना रही थी?” बांसुरी उसे छिप कर सुनने की कोशिश कर रही थी, ये बात समझ कर उसे ज़ोर की हँसी आ रही थी लेकिन खुद को रोक उसने अपने चेहरे पर एकदम गंभीर भाव बनाये रखे__

” नही वो असल में….इधर उधर क्या बोलूं क्या नही सोचती बांसुरी कुछ का कुछ बोल गयी__

  ” तुमने मुझे बताया नही बांसुरी?”

  ” क्या ? क्या नही बताया मैंने?”

   राजा बांसुरी के कुछ और पास आ गया, बांसुरी उसकी आंखों में देखती जैसे पूरी दुनिया को भूल गयी, उसे सामने दिख रहा था वही लड़का जो उसकी ज़रा सी तकलीफ बर्दाश्त नही कर पाता है। जो उसकी इच्छा का पालन करने के लिये रीतियों रिवाजों से भी लड़ जाता है।
    वही लड़का जिसके लिये वो खुद पूरी दुनिया से लड़ जाने को तैय्यार थी। बल्कि अगर उसके घर वाले राजा के लिये तैय्यार ना हुए तो वो उसके लिये अपने घर परिवार तक को छोड़ जाने की इन्तहा तक तैय्यार थी।
  लेकिन फिर दोनो के बीच का सिर्फ दो कदम का फासला क्यों पूरा नही हो पा रहा था। वो आज तैय्यार थी इस बात के लिये भी कि राजा एक बार उसे अपनी बाहों में लेकर कह दे कि बांसुरी सब कुछ छोड़ कर मेरी हो जाओ।

     राजा की खुशबू, उसकी आंच इतने पास महसूस होने लगी कि बांसुरी की आंखें बंद होने वाली थी कि राजा की बात ने उसकी आंखें पूरी खोल दी__

” ये नही बताया कि कॉफ़ी के लिये दूध उबालने रख छोड़ा है, और देखो उबल उबल कर गिरने वाला है”

  बांसुरी को खुद की बेवकूफी पर हँसी आ गयी।
राजा ने बांसुरी के पास से हाथ बढा कर गैस का नॉब बंद किया और एक नज़र बांसुरी पे डाल कर बाहर निकल गया__

  उसके पीछे कप में कॉफ़ी लिये वो भी बाहर चली आयी
     
   ” किस्से तो एक से एक हैं मेरे कॉलेज के। अब क्या था कि मेरे पिता साहब सख्त खिलाफ थे मेरे बाहर जाने के, वो तो मॉम के बहुत कहने पर  तैय्यार हुए थे लेकिन नाराज़गी के साथ। और मैं ठहरा उन्हीं का ज़िद्दी खून। तो मैंने भी कसम खा ली थी कि सारी पढ़ाई अपने बूते पर करूंगा, महल से एक पैसा नही लूंगा।”

   ” वाह भैय्या बड़े स्वाभिमानी रहे आप तो?”

  ” अरे कहाँ का स्वाभिमानी? अब फीस तो डैड पहले ही पूरी भर आये रहा वहाँ रहने खाने का खर्च तो उसके लिये वो मेरे एकाउंट में हर महीने एक रकम जमा करते ही थे, लेकिन मैं उस रकम को हाथ नही लगाता था।
   अब दोस्तों के साथ घुमने में बियर पीने में सिगरेट फूंकने में खर्च तो होता ही है तो पहले साल में अपना खर्चा निकालने के लिये पता है मैंने क्या किया?”

  ” क्या किया भैय्या?”

   ” अपने कुछ ब्रांडेड कपड़े और जूते चोर बाज़ार में बेच आया। अब वहाँ अरमानी और गुची के कपड़े गॉगल देख दुकानदार की आंखें फट पड़ी। मैंने और तिली लगा दी कहा कि भोपाल के पास की रियासत के राजकुमार के कपड़े है , तो दाम भी भरपूर मिल गये और पूरा एक साल मज़े से निकल गया”

  पिंकी ने अपने माथे पर हाथ मारा __ ” हे भगवान! ये और इनके शौक। बड़े अजीब हैं भाई आप। अपने ही कपड़े बेच दिये।”

  ” शुक्र मनाओ मैंने खुद का ही सामान बेचा । मेरे दोस्त तो बहुत बार मकान मालिक के संभाल कर रखे कबाड़ को बेच आते थे, कभी उसका न्यूज़पेपर। एक बार तो उसके पुराने ज़माने के रखे बड़े बड़े बरतन हांड़ी सब बेच आये। और एक बार उसकी कार की स्टेपनी।”
    राजा की बात सुन सभी को हँसी का जो दौरा पड़ा की सब हँस हँस के लोट पोट हो गये। बांसुरी भी खिलखिला कर हँस रही थी इस बात से बेखबर की उसकी हँसी देख राजा भी मुस्कुरा रहा था__

  ” मैं तो पिंकी ये सारे कारनामे पहले ही सुन चुकी हूँ, लेकिन आज भी उतनी ही हँसी आयी जैसे उस रात आयी थी।”

   ” हाँ तुम से ही तो पहली बार इनके किस्से सुने थे, अरे भाई आपकी शर्ट पर लगता है कुछ लगा है। शायद कुल्फ़ी गिरा दी उस बेवकूफ बन्दूकिये ने।”

  राजा का ध्यान अपनी शर्ट पर गया, वाकई सामने की तरफ कुल्फ़ी का भद्दा सा दाग उभर आया था__

  ” उफ्फ़! यहाँ तो मेरे कपड़े भी नही, कहाँ से कपड़े बदलूं और मुझे ये दाग धब्बों वाले कपड़े बहुत इरिटेट कर देते हैं।’

  ” हाँ हुकुम बैग तो प्रताप के कमरे में रखा है।”

” रुको मैं ले कर आती हूँ, तुम्हारी एक शर्ट मेरे पास भी रखी है।” बांसुरी अपनी बात कह कर उठ कर कमरे में चली गयी और पिंकी रतन प्रेम सभी मुस्कुराते हुए राजा को देखने लगे।

  ” अरे ऐसे मत देखो तुम लोग। उस समय बांसुरी के साथ रहा था ना कुछ दिन,तभी छूट गयी होगी”

  बांसुरी ने ज़ोर ज़ोर से हाँ में सिर हिला दिया, रतन चुपचाप मुस्कुराता नीचे देखने लगा लेकिन प्रेम अभी भी राजा को सवालिया नजरों से देख रहा था__

  ” प्रेम वो दो चार दिन बस यहाँ रुका था ना पिंकी के कमरे में तभी की है।”

  ” जी हुकुम ! बार बार बताने की ज़रूरत नही है, हम तो बस ये सोच रहे थे कि …..


   ” ये लो राजा ! तुम्हारी ये सफ़ेद शर्ट मुझे बहुत पसंद है” उसे कमीज पकड़ा कर वो तकिया गोद में लिये पिंकी के बाजू  में जा बैठी और वो तीनों एक बार फिर राजा को देख मुस्कुराने लगे। राजा शरमा कर कमीज हाथ मे लिये बाथरूम की ओर चल दिया।

क्रमशः

aparna…
……

   

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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