जीवनसाथी-38

जीवन साथी- 38


     रुको मैं ले कर आती हूँ, तुम्हारी एक शर्ट मेरे पास भी रखी है।” बांसुरी अपनी बात कह कर उठ कर कमरे में चली गयी और पिंकी रतन प्रेम सभी राजा को देखने लगे

  ” अरे ऐसे मत देखो तुम लोग। उस समय बांसुरी के साथ रहा था ना कुछ दिन,तभी छूट गयी होगी”

  पिंकी ने ज़ोर ज़ोर से हाँ में सिर हिला दिया, रतन चुपचाप मुस्कुराता नीचे देखने लगा लेकिन प्रेम अभी भी राजा को सवालिया नजरों से देख रहा था__

  ” प्रेम वो दो चार दिन बस यहाँ रुका था ना पिंकी के कमरे में तभी की है।”

  ” जी हुकुम ! बार बार बताने की ज़रूरत नही है, हम तो बस ये सोच रहे थे कि …..


   ” ये लो राजा ! तुम्हारी ये सफ़ेद शर्ट मुझे बहुत पसंद है” उसे कमीज पकड़ा कर वो तकिया गोद में लिये पिंकी के बाजू  में जा बैठी और वो तीनों एक बार फिर राजा को देख मुस्कुराने लगे।

    सभी बातों में मगन थे, पिंकी अन्दर वाले कमरे से राजा का गिटार भी उठा लाई , क्या गाऊँ? राजा को सोचते देख एक बार फिर बांसुरी बिना सोचे समझे अपना राग अलाप गयी__

  ” राजा वही सुना दो जो जब हम पहली बार ट्रेन में मिले थे तब तुम सुन रहे थे।”

  बाकी सब की नजरें देख राजा झेंप तो गया लेकिन फिर बिना शर्मिंदा हुआ उसने अपनी गिटार ट्यून की और गाने लगा__

           चेहरा एक फूल की तरह शादाब है
           चेहरा उसका है या कोई माहताब है…….
        
       ……माहरू माहरु, मेहजबीं मेहजबीं…हुस्न ए जाना की तारीफ मुमकिन नही …..

   गाते बजाते बातें करते रात बीतती जा रही थी, धीरे धीरे जिसको जहां जगह मिली वो उसी तरफ हल्की सी जगह बना कर तकिया रखे लुढ़कता गया।
      सब इधर उधर सर रखे नींद में डूब चुके थे, बांसुरी सोफे पे सर टिकाये सो गयी थी कि उसके कंधे पर हाथ रख किसी ने बहुत धीमी आवाज़ में उसका नाम लिया, हल्की आहट के साथ वो उठ गयी।
    सामने देखा राजा उस पर झुका उसे चुप रहने का इशारा कर अपने साथ आने को बोल निकल गया।
  वो आंखे मलती उठ बैठी, कहीं ये सपना तो नही उसने धीरे से खुद को एक छोटी सी चिकोटि काट ली। उसने देखा सबसे किनारे प्रेम ज़मीन पर सामने की ओर दोनों पैर एक पर एक रख कर फैलाये हाथ सीने पर सामने की ओर बांधे टेबल से सिर  टिका कर सो रहा था, बांसुरी के बगल में पिंकी गुडमुड़ी सी लेटी गहरी नींद में डूबी पड़ी थी,दूर एक कुशन पे टिके हुए रतन सोया पड़ा था। सब गहरी नींद में थे बस वो जाग रहा था और जाने क्यों उसे जगा कर बुला गया था।

    अपने दिल की धड़कनों को जितना संभाल सकती थी सम्भालने की कोशिश करने पर भी उसे उसकी ही धड़कने कानों पर ठक ठक सी सुनाई दे रहीं थीं, कहीं पास जाने पर वो भी सुन बैठा तो?,उसने बड़ी मुश्किल से अपनी बोझिल पलकें उठा कर उसकी तरफ देखा।  वो एक तरफ दीवार से लगा खड़ा उसे ही देख रहा था। बांसुरी के देखते ही उसने एक बार फिर उसे अपने पास बुलाया।
    वो धीरे से उठ कर उसके पास चली आयी__

  ” बांसुरी तुम धीरे से पिंकी को जगाओ और तुम दोनों अन्दर कमरे में जाकर सो जाओ।”

   वो जितना धीरे बोल सकता था उतना धीरे बोलने की कोशिश करता सा लगा, फिर भी हल्की आहट से एक बार को प्रेम ने करवट सी ली और वापस सो गया। प्रेम से हट कर वापस बांसुरी उसे देखने लगी__

  ” बस! यही कहना था?”

  ” हाँ! जाओ तुम दोनो आराम से अन्दर सो जाओ, मैं यहाँ इन लोगों को सही से एडजस्ट करता हूँ ”

   बांसुरी अन्दर से सुलग गयी। एडजस्ट करता हूँ!! अपनी लव लाईफ तो एडजस्ट हो नही रही दूसरों के कुशन तकिये एडजस्ट करने चलें हैं साहब। अरे अब बोल भी दो राजा जी , किसका इन्तजार है। सारी उमर निकल जायेगी तब बोलोगे क्या?”

  अपने मन में अपनी बातें गूँथती वो पिंकी को धीरे से आवाज़ दे जगा कर अन्दर ले गयी। पिंकी नींद में तकिया पकड़े अन्दर जाकर बिस्तर पर ढ़ेर हो गयी। बांसुरी का जी किया दरवाज़े को ज़ोर से बंद कर वो भी अब बाहर ना निकले और सो जाये पर हर बार दिल का सोचा पूरा कर जायें वो प्रेमी क्यों कहलायें।
दिल में तो यही था कि एक नज़र देख लिया जाये कि साहब कर क्या रहें हैं?

पानी की बोतल भरने के बहाने वो बाहर चली आयी, हॉल में कहीं राजा नही था, रसोई में भी नही। वो पानी भर कर बालकनी में चली आयी, झूले पर बैठा राजा सामने आसमान को देखता बैठा था, हल्की हल्की सी बारीश हो रही थी।

     हवा से बारीश के हल्के छींटे उन दोनो तक भी आ रहे थे। राजा के बालों पर बारीश की बहुत छोटी सी बूंदे मोतियों सी नज़र आ रही थी, और वो उन मोतियों में खोयी जा रही थी कि राजा ने उसे मुड़ कर देख लिया__

  ” सोई नही तुम?”

  ” तुम भी तो जाग रहे हो।”

  ” अच्छा जी, तो जो जो मैं करूंगा वहीं करना है तुम्हें।”

   हाँ राजा सब वही करना है जो तुम करते हो, जैसा तुम चाहते हो वैसे ही जीना है, जैसे रखोगे वैसे रह लूंगी, हर नियम हर कायदा तुम्हारे लिये अपने सर माथे लगा कर निभाउंगी, और कभी उफ नही करूंगी। कहना तो इतना कुछ चाह रही थी पर लफ्ज़ ज़बान पर आकर कहीं फंसे रह गये, और होंठों ने मुस्कुरा कर इज़्ज़त रख ली।

   राजा अपनी जगह से उठ कर आगे बढा और सामने बालकनी की रेलिंग पे दोनो हाथ टिकाये झुक कर खड़ा हो गया, बांसुरी भी उसके करीब आकर रेलिंग से पीठ टिका कर खड़ी हो गयी__

  ” एक बात पुँछू ?”

  तुम सौ बातें पूछ लो, पर मेरे दिल का हाल जान कर उसमें अपने दिल के रंगों को मिला दो….बांसुरी ने राजा को देखा और हाँ में सर हिला दिया__

    ” मेरे महल और मेरे रहन सहन से तुम्हें डर लगता है क्या बांसुरी?”

  बांसुरी ने राजा की आंखों में देखा। राजा के दिल का सारा हाल उसकी आंखों ने बयाँ कर दिया था। मुहब्बत नही मुहब्बत का सैलाब था वहाँ। उसकी गुलाबी आंखे जैसे प्रेम का दरिया बहा रही थी__

  ” नही तो, क्यों पूछ रहे हो ऐसा?”

  ” जैसे तुम वहाँ से चली आयीं,तुम्हारे पीछे तुम्हें फ़ोन करने की हिम्मत ही नही हुई। कितनी बार फ़ोन उठाया और फिर बिना तुम्हारा नम्बर मिलाए वापस रख दिया।”

  ” इतने बेचैन थे तो एक बार बात कर ही लेते।”

  ” तुम नही थी? बेचैन? ”

   राजा के सवाल पर बांसुरी ने पलके झुका लीं वो क्या कहती और कैसे कहती। अपने मन से मजबूर उसका तो पूरा जीवन ही उलट पुलट हुआ जा रहा था और वो कुछ नही कर पा रही थी__

  ” मुझसे शादी कर सकती हो बांसुरी? ”

   जैसे हवा में  कोई सरगम बज उठी हो, कहीं कोई मधुर जलतरंग चल रहें हो, हर तरफ मुहब्बत की बारीश हो रही हो और उस पूरे संसार में उसके और राजा के सिवा कोई ना बचा हो।

   प्यार सच में इतना मोहक होता है, इतना मनभावन!वो कब से यही सुनने को तरस रही थी और आज जैसे ही राजा ने कहा उसका सारा संसार बस इन्हीं शब्दों में सिमट कर रह गया, वो उसकी आंखों में देखती किसी दुसरी ही सपनिली दुनिया में चली आयी थी।
    कहीं सच में ये सपना तो नही , पता चला नींद खुली और देखा राजा साहब दूर लेटे अपनी मीठी सी नींद में गुनगुने सपने बुन रहें हैं। पर कोई शिकवा नही अब, अगर ये सपना भी हुआ तो इस सपने से जागने से पहले ही मौत आ जाये…..

  ” क्या हुआ बांसुरी! कुछ तो जवाब दो।”

  हे भगवान ! ये सपना नही है…. बांसुरी ने शरमा कर अपने चेहरा अपने हाथों से छिपा लिया__

  ” अरे इसमें शरमाने की क्या बात है? अभी बस शादी के लिये पूछा है सुहागरात के लिये थोड़े ना पूछ रहा हूँ।”

  ” छी ! कुछ भी बकवास करते हो?”

  ” अच्छा ? इतना तो शरीफ हूँ हमेशा सोच समझ कर बात करता हूँ फिर भी कह रही हो बकवास करता हूँ, तो मैडम आप जवाब देंगी मेरे सवाल का?”

  ” इतनी जल्दी क्या है जवाब की?”

  ” अच्छा बेटा, बताऊँ मुझे क्या जल्दी है? ”

  राजा ने बांसुरी का हाथ पकड़ उसे अपनी ओर खींचा और अपने गले से लगा लिया…..

    जैसे सारा संसार उन दोनों में वहीं कहीं सिमट कर रह गया, एक राहत थी एक सुकून था उस मिलन मे।  जैसे बरसों से तपती धरती पर सावन की मन भावन बूंदे छई छप छई कर रही हों, जैसे सदियों से प्यासे चातक को स्वाति नक्षत्र की बूंद मिल जाये।
    राजा ने उसे धीरे से अलग करना चाहा, बांसुरी ने ना में सिर हिलाया और अपना चेहरा उसके सीने में छिपाये उसे और कस कर पकड़ लिया और वैसे ही  खड़ी रही।
    दोनो पता नही कब तक ऐसे एक दूजे में खोये वहाँ खड़े रहते कि फ़ोन की घंटी घनघना उठी।
   कोई जाग ना जाये इस डर से राजा दौड़ कर अन्दर गया….प्रेम का फ़ोन बज रहा था, राजा के अन्दर पहुंचते में प्रेम जाग चुका था और फ़ोन उठा चुका था__

” किसका फोन था प्रेम?”

” हुकुम नंबर तो प्रताप का दिखा रहा था लेकिन आवाज किसी और की थी हेलो हेलो बोलते में ही कट गया मैं एक बार फिर लगा कर देखता हूं।”

  ” हाँ फोन लगा लो ” बोलता  राजा बालकनी से पूरा अंदर आ गया उसके पीछे बांसुरी भी आकर वहीं जमीन पर बैठ गई प्रेम ने जैसे ही फोन लगाया दूसरी या तीसरी रिंग में ही फोन उठा लिया गया।  उधर से किसने क्या बोला यह राजा और बांसुरी सुन नहीं पाए लेकिन फोन पकड़े हुए प्रेम का चेहरा एकदम से बुझ गया वह बमुश्किल फोन रख कर राजा की तरफ देख पाया__

   ” अस्पताल से किसी डॉक्टर का फोन था कह रहा था,इस फोन के मालिक का एक्सीडेंट हुआ है। मुंबई पुणे हाईवे पर लोनावला से आती कैब का एक्सीडेंट हुआ जिसमें ड्राइवर और इस आदमी को कुछ लड़के यहां मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती करके गए हैं आप तुरंत आ जाइए।”

    प्रेम ने असहाय नेत्रों से राजा की ओर देखा। राजा तुरंत प्रेम तक गया और उसे गले से लगा लिया__
 
   ” कुछ नहीं होगा प्रताप को। बिल्कुल परेशान मत हो प्रेम, चलो अभी तुरंत हम हॉस्पिटल निकलते हैं।”

  ” मैं भी साथ चलूं?” बांसुरी के सवाल पर राजा ने उसे इशारे से मना कर दिया__

   ”  नहीं तुम घर पर रुको। रतन और पिंकी भी हैं, वह लोग एकदम से घबरा जाएंगे , वहां जैसा भी जो होता है मैं तुम्हें फोन पर बताऊंगा, उसके बाद तुम लोग आना।”

  हां का इशारा कर बांसुरी भागकर रसोई में चली गई और चाय चढ़ा दी।
      पानी की बोतल भर कर वह वापस कमरे में आई और प्रेम को पकड़ा दिया__

     ” प्रेम भैया आप बिल्कुल भी मत घबराइए। प्रताप बिल्कुल अच्छा हो जाएगा। आप हाथ मुंह धो लीजिए तब तक चाय तैयार हुई जाती है। गाड़ी ड्राइव करनी है इसलिए चाय पीकर ही निकलना ठीक रहेगा, नींद अच्छे से खुल भी जायेगी।

   प्रेम और राजा के हाथ मुंह धो कर आते में बांसुरी ने चाय और बिस्किट उनके सामने रख दी। वो लोग  जल्दी-जल्दी बस चाय को दो-तीन घूंट में गटक कर  गाड़ी की चाबी लिए घर से बाहर निकल गये।

   सुबह सुबह का वक्त था छह 6:30 बज रहे थे रास्ते पर ट्रैफिक भी अपेक्षाकृत कम थी इसलिए उन्हें अस्पताल पहुंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगा।
     रिसेप्शन पर पूछताछ कर दोनों इमरजेंसी की ओर भागे भागे पहुंचे। वहां दिख रहे एक दो डॉक्टर और नर्स से पूछताछ करने पर किसी ने इशारा कर उन्हें एक तरफ के वार्ड  की ओर भेज दिया।
     वहां पहुंचकर एक डॉक्टर से पूछने  पर पता चला।   प्रताप एक कैब में लोनावला की ओर से आ रहा था उसे मुंबई से उस ओर जाती किसी जिप्सी ने जोर की टक्कर मारी,  जिससे कि कैब पूरी की पूरी पलट गई थी।
   
      जिप्सी और कैब दोनों ही बहुत तेज गति में थी इसीलिए कैब को संभलने का बिल्कुल भी मौका नहीं मिला और वह दो बार पलटी खाकर सड़क किनारे लुढ़क गई सामने बैठे ड्राइवर के साथ साथ प्रताप को भी बहुत ज्यादा चोटें आईं थी। बाहर से दिखने वाली चोटों पर तो डॉक्टर ने फिलहाल टांके आदि लगाकर रक्त विस्रावण  रोकने का उपाय कर दिया था  लेकिन अंदरूनी चोटें जानने के लिए अभी प्रताप की सारी जांचे होनी बाकी थी। ड्राइवर का भी वही हाल था दोनों का ट्रीटमेंट शुरू हो चुका था, लेकिन दोनो की ही हालत नाज़ुक बनी हुई थी। हादसे में ड्राइवर का फोन भी चकनाचूर हो चुका था इसलिए उसके किसी रिश्तेदार को अब तक खबर नहीं दी जा सकी थी पुलिस को अस्पताल में तुरंत ही बुला लिया था पुलिस आकर डॉक्टरों से पूछताछ कर कैब का मुआयना कर रही थी।
     इत्तेफाक की बात थी कि प्रताप का मोबाइल उसके लैपटॉप बैग के भीतरी पाउच में सुरक्षित बच गया था।
     लेदर की डबल लाइनिंग के कारण लैपटॉप और प्रताप का फोन बिल्कुल सुरक्षित था उसके अलावा प्रताप के हाथ में बंधी घड़ी उसका चश्मा सब कुछ टूट कर चूर-चूर हो चुका था। चश्मे और गाड़ी दरवाज़े के कांच की किरचें  प्रताप के चेहरे को भी बुरी तरह से जख्मी कर गयीं थीं।

   प्रताप को ईंटेसीव केयर युनिट में रखा गया था, जब डॉक्टर को मालूम चला की प्रेम उसका बड़ा भाई है तब डॉक्टर ने उन दोनों को अन्दर जाकर उसे देखने की इजाज़त दे दी।
    अब तक बड़ी मुश्किल से खुद को संयमित खड़े रखे प्रेम के सब्र का बांध अपने जान से प्यारे छोटे भाई को ऐसे बेहोश पड़े देख टूट गया, राजा ने उसे कंधो से थामे रखा वर्ना प्रताप को देख प्रेम वहीं सुध बुध खो बैठता।

     डॉक्टर पूरी मुस्तैदी से प्रताप की जांचे करने में लगे थे, सी टी स्कैन, सोनोग्राफ़ सब कुछ बारी बारी से हो रहा था, डॉक्टर ने उन्हें तसल्ली दी और बाहर ही इन्तजार करने को कह भीतर चला गया।
    पुलिस भी बाकी लोगों से पूछ ताछ करती इन लोगों तक भी चली आयी__

  ” जी तो आप हैं मिस्टर प्रेम?”

” जी सर!”

  ” देखिए पहली नज़र में तो मामला एक्सीडेंट का ही लग रहा है, लेकिन हमारा तो काम ही है शक करना और फिर शक की बिनाह पर तफ्तीश करना इसलिये आपके भाई का मोबाइल और लैपटॉप हमें लगेगा, हमारे आई टी एक्सपर्ट एक बार जांच लें उसके बाद आपके सुपुर्द कर दूंगा।”

  प्रेम ने हाँ  बोल कर प्रताप का बैग  पुलिस वाले के हाथ में थमा दिया।
   थोड़ी देर में एक वार्ड बॉय आकर प्रताप के कपड़े बेल्ट आई कार्ड  और वॉलेट प्रेम को थमा गया।
     अपने छोटे भाई के कपड़े अपनी गोद में देख प्रेम को रह रह कर प्रताप की याद सताती रही वो  प्यार से उन पर हाथ फेरता रहा , आई कार्ड पर की तस्वीर में मुस्कुराता प्रताप बार बार अपने भाई की आंखों में आंसू लाता गया। कुछ देर बाद प्रेम का ध्यान वॉलेट पर गया और जाने किस धुन में वो अपने छोटे भाई का वॉलेट खोल गया। प्रताप की हर वस्तु में उसे प्रताप की झलक मिल रही थी।
    वॉलेट में अन्दर उसकी और प्रताप की एक संग की मुस्कुराती तस्वीर लगी थी जिसे देख वो भी मुस्कुरा उठा, वहीं उस तस्वीर के पीछे से झांकती एक तस्वीर आधी अधुरी सी और नज़र आ रही थी, प्रेम ने हाथ डाल कर उस तस्वीर को बाहर निकाल लिया।
    किसी लड़की की तस्वीर थी, खुले हवा में लहराते बालों को चेहरे से हटाने की कोशिश करने में एक चौथाई चेहरा उसकी उंगलियों से ढक गया था।
    फिर भी चेहरा नज़र आ रहा था।
    तो यही थी जिसके बारे में एक दो बार प्रताप ने उसे कुछ इशारा भी दिया था लेकिन अपने काम में व्यस्त वो ही आज तक समझ नही पाया था।
    प्रेम को लड़की पहली बार में ही पसंद आ गयी, तू बिल्कुल ठीक हो जा छोटे, इस साल तेरी शादी भी करवा दूंगा।

     प्रेम अपने खयालों में खोया था, राजा इधर उधर दौड़ भाग करता डॉक्टर की बताई हर ज़रूरत का सामान पूरा कर रहा था, दोनों को वहाँ आये चार घण्टे से ज्यादा बीत चुके थे पर अब तक प्रताप को होश नही आया था।
      प्रताप का हृदय बुरी तरह से डैमेज हुआ था जिसकी तुरंत सर्जरी करनी ज़रूरी थी, डॉक्टर उसी तैय्यारी में लगे थे।

   बांसुरी सुबह से चार बार राजा को फ़ोन कर चुकी थी पर उसने अभी उन लोगों को वहाँ आने से मना कर दिया था।
     आखिर बांसुरी के बहुत ज़ोर देने पर वो तैय्यार हो गया, पिंकी और रतन के साथ बांसुरी अस्पताल पहुंची और बहुत ज़िद कर प्रेम और राजा को नाश्ता भी करवा ही दिया।

   प्रताप की हालत में अब भी कोई सुधार नही था। रतन और पिंकी के एक्साम को ज्यादा वक्त भी नही बचा था ये सोच कर प्रेम और राजा ने उन दोनो को ही जबर्दस्ती वहाँ से उनके घर वापस भेज दिया।

     बैंच का एक किनारा पकड़े बांसुरी बैठी थी और दूसरे किनारे पर प्रेम, राजा इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था …..  शाम के चार बजने को थे लेकिन अन्दरूनी खून रिसते रहने के कारण डॉक्टर ऑपरेशन शुरु करने में असमर्थ थे।

  तभी वही पुलिस वाला थाने से वापस आ गया__

” सॉरी मिस्टर प्रेम आपको तकलीफ देने के लिये। आपके भाई का फ़ोन और लैपटॉप एब्सोल्यूटली क्लीन है,कोई ऐसा सुराग या बात नही मिली जिससे लगे कि कोई इनका कत्ल करने की कोशिश कर सकता है। मामला एक्सीडेंट का ही लग रहा, हम पंचनामा कर चुके।
   और एक बात फ़ोन चेक करने के लिये हमे इनका फ़ोन सिक्योरिटी लॉक भी खोलना पड़ गया, अब आप चाहें तो लॉक कर सकतें हैं। ”
    पुलिस वाला अपनी बात पूरी कर अस्पताल स्टाफ़ की तरफ बाकी की जानकारियां लेने चला गया।

     प्रेम के हाथ में प्रताप का मोबाइल था……, तभी मोबाइल पर मेसेज की बीप बजी। वर्तमान के संस्कारों जैसे दूसरे का फ़ोन उसकी इजाज़त के बिना नही खोलना चाहिये जैसी बातों से अनजान प्रेम के लिये वो उसके लाड़ले का जिगर के टुकड़े का फोन था, उसने सामने दिख रहे मेसेज के नोटिफिकेशन को क्लिक किया और निरमा का मेसेज सामने खुल गया।

  ” हे कहाँ हो? कल रात से लगातार फ़ोन बंद आ रहा तुम्हारा? अपने भाई को सरप्राइज़ देने के चक्कर में मुझे ही भूल बैठे ना? कितना मना किया कि रात में मत निकलो पर मेरी सुनते ही कहाँ हो।
         आधी रात को निकल कर सुबह सुबह फ्लैट पर पहुंच कर भैय्या को सरप्राइज़ कर दूंगा यही कहा था ना, ये भी कह देते कि अपने भाई से मिलते ही तुम्हें भूल जाऊंगा निरमा।”

  प्रेम के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी, उसे पता था कि  उसे अब ये मेसेज नही पढ़ने चाहिये। लेकिन इस बेइन्तिहा दर्द के वक्त ये मेसेज जैसे उसके लिये मरहम का काम कर रहे थे।
   तभी एक बार फिर बीप हुई, ना चाह कर भी नोटिफिकेशन पर उसका हाथ चला ही गया__

  ” अब छोड़ो क्या नाराज़ रहूँ तुमसे? अच्छा सुनो तुम्हें एक गुड न्यूज़ देनी है। तुमसे कहा था ना पिछले दस पन्द्रह दिन से तबीयत ठीक नही लग रही थी, आज सुबह ही डॉक्टर के पास गयी थी।
  पहले सोचा की मिल कर ही तुम्हें खुश खबरी सुनाऊंगी पर तुम तो आज सारा दिन अपने भाई को छोड़ कर मुझसे मिलने आओगे नही,और बिना तुम्हें बताये मुझसे रहा नही जायेगा।”

   मेसेज बस यहीं तक का था, प्रेम के माथे पर शिकन चली आयी। दीन दुनिया से बेज़ार लड़का तबीयत खराब होने पर भी कोई अच्छी खबर क्या हो सकती है एक बारे में समझ नही पाया….. तभी एक और मेसेज आ गया__

” बुद्धू कहीं के, तुम्हें बताया तो था कि इस मंथ आई मिस्ड  माय पिरियड्स। अब तो समझ ही गये होगे मिस्टर डैडी!! यस प्रताप तुम पापा बनने वाले हो।”

     फ़ोन हाथ में पकड़े प्रेम जैसे कुछ देर को ये भी भूल गया कि उसका छोटा भाई अन्दर जीवन और मौत के बीच झूला झूल रहा है, एक मासूम खुशी की बयार उसे छू कर गुज़र गयी, मन ही मन उसने उस लड़की को शुक्रिया अदा किया और भगवान के सामने हाथ जोड़ दिये__” भगवान एक बार फिर मुझे प्रताप का बचपन जीने देने के लिये बहुत बहुत सारा आभार, जैसे ही मेरा भाई ठीक होता है तुरंत दोनो की शादी करवा कर अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाऊंगा, अब बिल्कुल देर नही करनी”।
   अपनी प्रार्थना मन ही मन दोहराता खड़ा प्रेम अपने आस पास से जैसे बिल्कुल कट गया था, कि तभी डॉक्टर बाहर आया और प्रेम के पास जाकर उसके जुडे हुए हाथों को पकड़ कर उसे हिलाया और उसके सामने  अपने हाथ जोड़ दिये___

  ” माफ कीजियेगा! आपके भाई को हम बचा नही पाये। कोशिश तो बहुत की लेकिन उन्हें बचाया नही जा सका……….

छन्न से गिर कर जैसे कोई कांच टूट कर बिखर गया, अगर राजा वक्त पर आकर प्रेम को सम्भाल ना लेता तो प्रेम वहीं उसी ज़मीन पर गिर चुका होता।
     दोनो दोस्त एक दूसरे के गले से लगे एक दूसरे का दर्द बहाते रहे और अपने आंसू एक दूसरे में मिला कर रोते रहे…….

क्रमशः

aparna….
  
  

  

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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