जीवनसाथी-40

जीवन साथी–40


        शनिवार की रात थी, भास्कर को सिंगापुर निकलना था, सारी तैयारियाँ निपटा कर उसने अपने फ़ोन का चार्जर ऊपर हैण्ड लगेज में रखने के बाद उसने बांसुरी को फ़ोन लगा लिया__

   ” कैसी हो?”

  ” ठीक हूँ। आप कैसे हैं?”

   ” मैं भी एकदम बढ़िया। बस निकल ही रहा था, सोचा एक बार सभी को फ़ोन लगा लूँ।”

   ” ऑल द बेस्ट भास्कर!! वैसे तो आपको और आपके परफेक्शन को अच्छे से जानती हूँ इसिलिए कह रही कि काम के चक्कर में खुद को मत भूल जाइयेगा”

   बांसुरी की बात सुन वो ज़ोर से हँस पड़ा, तभी नीचे से गाड़ी का हॉर्न सुनाई दिया__

   ” ओके बांसुरी अब निकलता हूँ एयरपोर्ट! और सुनो तुम्हारे लिये एक सरप्राइज़ है।”

  ” क्या?”

   ” कुछ देर में मालूम चल जायेगा।”

  हॉर्न की आवाज़ सुन उसने फ़ोन रखा और सामान उठाये नीचे भागता चला गया।

    अदिती अपनी गाड़ी के बाहर खड़ी भास्कर का इन्तजार कर रही थी, भास्कर के नीचे आते ही उसने चाबी उसकी तरफ की और खुद दुसरी तरफ को मुड गयी__

   ” नही मैडम ! आज आप ही ड्राइव किजीये।”

   “मैंने तो ट्रैफिक के चक्कर में तुम्हें चलाने दी थी।”

   ” मुझसे कहीं ज्यादा सेफ ड्राइविंग है तुम्हारी अदिती।”

   मुस्कुरा कर भास्कर दुसरी सीट में जा बैठा, अदिती ने गाड़ी स्टार्ट की और एयरपोर्ट की ओर भगा दी__

   ” अच्छा सुनो! सारा सामान ढंग से रख लिया ना?”

   ” हाँ भई! कपड़े जूते मोजे पर्फ्यूम टूथपेस्ट टूथब्रश सोप शैम्पू तुमने जो लिस्ट भेजी थी उससे मिला मिला कर हर सामान रख लिया”

  ” मोबाईल चार्जर? रखा या भूल गये?”

  ” तुम ने लिस्ट में लिखा था कि नही?”

  अदिती ने भास्कर को एक नज़र घूर कर देखा __

   ” मतलब ? खुद अपने दिमाग से चल लोगे तो पाप नही हो जायेगा। दिन भर फ़ोन में चिपके रहते हो तो उसकी खुराक का भी ध्यान रखो।”

   भास्कर हँसने लगा__” डांटती बहुत हो तुम ”

  ” तुम हो इस लायक”

  ” अदिती तुम भी साथ ही चलती तो अच्छा नही होता क्या?”

  ” दो दिन बाद दीवाली है भास्कर! इस टाईम पर तो तुम्हें पता है अखबारों को कितने विज्ञापन मिलतें हैं और इसी वक्त अधिकतर एम्प्लायी छुट्टी भी मांगतें हैं, इसिलिए निकलना पीछे कर लिया। बस हफ्ते दस दिन में मैं भी पहुंच जाऊंगी और तब तक फ़ोन तो है ही , इसी पर तुम्हें गाईड करती रहूंगी।
   असल में मैं यही चाहती थी कि उस ऑफिस में लक्ष्मी पूजा तुम्हारे हाथों हो।”

   ” जो चाहती हो पा ही लेती हो”

   ” ऊपर वाले का करम है, अबकी जो चाह रही वो भी मिल जाये”

   ” आमीन!! हा हा ऐसा ही कुछ कहतें हैं ना, ज़रूर मिलेगा।”

      अदिती की गाड़ी रास्ते पर से फर्राटे भरती निकल गयी, उसी रास्ते से एक ओर मुड़ कर अन्दर गली में प्रताप के घर पर राजा और प्रेम अपना और प्रताप का सारा सामान बांध कर निकलने की तैय्यारी कर रहे थे।
     शादी के बाद मंदिर से निकलने के बाद बांसुरी और निरमा को साथ लेकर मामी अपने घर चली गई थी।
      उन्होंने घर पहुंच कर फटाफट खाने-पीने की तैयारियां शुरू कर दी थी।
     राजा और प्रेम को प्रताप के घर से उसका सामान उठाकर निरमा के घर पहुंचना था और वहां से उन सबको सीधे एयरपोर्ट निकलना था। राजा को भोपाल से आए हुए 3 दिन बीत चुके थे।
     2 दिन बाद ही दिवाली थी और उसके पहले उसे किसी भी हाल में अपने महल पहुंचना था हालांकि इस बार महल में दिवाली नहीं होनी थी क्योंकि 20 दिन पहले ही पिंकी की मौत का मातम मनाया जा चुका था लेकिन हर बार की तरह लक्ष्मी पूजा का नियम  तो होना ही था।

    बांसुरी मामी के साथ पूरियां बनाने में सहायता कर रही थी कि तभी बांसुरी का फोन बजने लगा फोन उसके घर से उसकी मां का था। बासुरी ने फोन उठा लिया__

  ” हेलो बिटिया कैसी हो? हम लोग भी ठीक हैं।
 
  “मैं भी ठीक हूं मां ! तुम बताओ वहां क्या हाल-चाल है?

  ” यहां सभी बढ़िया है बंसी ।  तुमसे एक बात कहनी थी तुम हो कहां अभी?

    “मैं तो अभी निरमा के घर पर हूं!  बोलो ना क्या हुआ?

   ” वह भास्कर जी के ऑफिस की खबर तो तुमको पता होगी ना ?

  “भास्कर की कौन सी खबर?”

  “अरे वह कहीं बाहर जा रहे हैं ना ? भास्कर  बाबू सिंगापुर या कहीं?

   ” अच्छा हां मालूम है मुझे, वो सिंगापुर जा रहे हैं। बल्कि आज अभी निकल भी चुके हैं। क्यों क्या हुआ?

    ” कुछ नहीं बेटा , उनके घर से अभी कुछ देर पहले फोन आया रहा कि, भास्कर अभी शादी नहीं कर पाएंगे। कह कर गए हैं, सिंगापुर में कुछ बहुत जरूरी काम है। उनको वहां भेज दिया गया है । अब वहां जाकर 3 महीने से पहले वापस लौटना मुश्किल है।  इसिलिए ये जो यह पहला मुहूर्त था जिसमें शादी की सोच रहे थे ना अब इसमें शादी होनी संभव नहीं है।”

  प्रमिला कुछ देर को शांत हो गयी, उसे लगा बिटिया को कहीं सदमा सा ना लग गया हो उसे क्या पता था कि उसकी ये बात सुन कर बिटिया के कदम ज़मीन पर नही पड़ रहे थे।

    “बिटिया सुनो तुम ठीक हो ना शादी 3 महीने बाद हो पाएगी ऐसा उनके घर वाले कह रहे थे”

    बांसुरी ने मन ही मन भास्कर को थैंक्यू कहा__ तो ये था भास्कर का सरप्राइज़! तुम इतने भी बुरे नही थे भास्कर, बल्कि बिल्कुल भी बुरे नही हो। बस बात इतनी ही थी कि हम एक दूसरे के लिये नही बने थे।

  उसके चेहरे पर एक  मुस्कान उभर आई क्योंकि सच में उसके पास इतना समय नहीं बचा था कि वह एकाएक अपने मां को और अपने पिता को कोई झटका दे पाती।
  उधर से अभी भी उसकी माँ फ़ोन पर थी__

   ” दीवाली के लिये कब पहुँचोगी गुड़िया?”

   ” मम्मी कल शाम तक पहुंच जाऊंगी, हालांकि ज्यादा छुट्टियाँ तो नही मिल पायीं हैं लेकिन दीवाली की मिल गयी।”
 
   ” चलो ठीक है ध्यान रखना अपना, रखती हूँ फ़ोन।”

   बांसुरी फ़ोन रख वापस रसोई में चली आयी, उसे पता था राजा को थोड़ा ज्यादा हड़बड़ी थी उसने पहले ही बांसुरी को तैय्यार रहने कहा था, वो वापस निकलने के पहले उसे कहीं लेकर जाना चाहता था।

    मामी के साथ सारी तैय्यारी कर वो ऊपर निरमा के कमरे में चली आयी, निरमा चुप बैठी कुछ लिख रही थी__

  ” निरमा ये क्या पैकिंग नही की अब तक?”

  निरमा ने बांसुरी को देखा और पीछे की तरफ इशारा कर दिया, आलमारी के  सामने दो बड़े बैग रखे थे__

  ” बस इतना ही? ” बांसुरी के सवाल पर निरमा उसे देखने लगी__

  ” और कितना? इतना सामान भी बहुत है। मैं तो बस उतना ही रखना चाहती हूँ जितना खुद उठा सकूँ। मुझे किसी का सहारा नही लेना।”

  बांसुरी ने उसे देखा और हां में सिर हिला दिया, तभी नीचे कुछ आहट हुई,उसने देखा नीचे राजा और प्रेम आ चुके थे। वो झट पट सीढ़ियाँ उतर आयी__ राजा ने उसे देख चलने का इशारा किया, और बाहर निकलने लगा__

  ” आप कहीं जा रहे हुकुम?”

  ” बस आता हूँ। और ज़रा एक बात सुनिये प्रेम बाबू, अब आप किसी और के भी बॉडीगार्ड हैं तो ज़रा उनका भी ध्यान रखीए, समझे!”

  ” आपको अकेले कहीं जाने नही दूँगा।” प्रेम के ऐसा कहते ही राजा उसके थोड़ा और करीब आ गया__

  ” यार तुम डेट पर भी नही जाने दोगे अब?” प्रेम ने चौंक कर राजा को देखा, राजा मुस्कुरा कर बांसुरी को साथ लिये बाहर निकल गया….

   इतने दिन में पहली बार राजा ड्राइव कर रहा था और बांसुरी उसके साथ वाली सीट पर थी__

  ” सो कहाँ लेकर जा रहे हो मुझे?”

  ” कहाँ जाना चाहती हो?”

  ” जहां ले चलो”

   ” इतना भरोसा है मुझ पर?”

  ” हाँ! बहुत बहुत ज्यादा”

    ” कितना भरोसा करती हो?”

   ” खुद से भी ज्यादा”

   ” अच्छा इसिलिये तुनक कर महल से चली आयीं थीं, एक बार पूछा तक नही कि राजा ऐसा क्यों किया?”

  ” हम्म गलती हो गयी। पर एक बार तो सभी से हो ही जाती है। एक तो तुम्हारे महल का माहौल इतना अजीब है कि किसी को भी वही लगता जो मुझे लगा।”

  ” अच्छा बांसुरी तुमसे एक ज़रूरी बात कहनी थी।”

  ” हाँ! कहो ना….

  ” मेरे जिस हाथ में गोली लगी थी, वो अब भी ठीक नही हुआ है, इस हाथ से अभी भी मुझे कुछ भी करने में बहुत दिक्कत आती है। और डॉक्टर ने कहा था कि हो सकता है धीरे धीरे ये हाथ एकदम ही बेकार हो जाये।”

  ” तो ? कहना क्या चाहते हो?”

  ” तो ये कि एक अपंग आदमी के साथ जिंदगी बिताने में तुम्हें कोई परेशानी ….

बांसुरी ने राजा की बात आधे में ही काट दी

   ” खबरदार जो मेरे होने वाले पति के बारे में कुछ भी कहा, एक घूंसा मार कर ये जो उँची सी नाक है ना तोड़ दूंगी।”

   ” इतना गुस्सा? तुम तो शेरनी बन गईं।”

  ” और क्या? ऐसी वैसी बकवास करोगे तो गुस्सा तो झेलना ही पड़ेगा।”

   ” बांसुरी! जो सच्चाई है वो तुम्हें जानना भी तो ज़रूरी है , कल को ये ना हो कि कोई धोखा हुआ तुम्हारे साथ?”

  ” ऐसी बातें क्यों कर रहे हो राजा? अगर कोई और बात है तो बताओ। वर्ना यूं पहेलियाँ ना बुझाओ। तुम्हारा हाथ काम करे ना करे मुझे कोई फर्क नही पड़ता, मेरे दोनो हाथ भी तो तुम्हारे ही हैं।”

    ” क्या बात है? तुम्हारा और क्या क्या है जो मेरा है ज़रा डिटेल में बताना?”

  ” पूरी की पूरी तुम्हारी ही हूँ!”

  “फिर! चख कर देख लूँ एक बार? ”

  ” राजा !!
     तुम्हें नही लगता कि तुम कुछ ज्यादा ही शैतान हो गये हो।”

  ” मैं ऐसा ही हूँ बांसुरी! अब धीरे धीरे तुम्हें पता चल जायेगा।”

  ” क्या ?”

  ” की असल में कितना शैतान हूँ मैं, वैसे तुम कौन सा कम शैतान हो, मेरे काम की बातों को हवा में उड़ा जाती हो”

    ” गाड़ी चलाने पर ध्यान दो, बार बार मुझे देखने लगते हो, कहीं किसी को टक्कर ना मार दो।”

  ” ये देखो! फिर मेरी बात उड़ा दी।”

  ” कौन सी बात उड़ा दी अब?”

   ” वही चखने वाली।”

   ” राजा शादी से पहले मैं तुम्हारी पिटाई करना नही चाहती लेकिन तुम पूरी तैय्यारी में लग रहें हो।

  ” आओ ना प्लीज़ पिटाई ही कर दो मेरी, पर फिर मैं कोई गुस्ताखी कर गया तो शिकायत मत करना।”

  ” बहुत गंदे हो तुम, बहुत सताने लगे हो मुझे”

  ” और तुमने कितनी रातें जगाया है मुझे, उसका क्या? एक बार शादी हो जाने दो , गिन गिन कर बदले लूंगा।”

  ” तब की तब देखेंगे, अभी ये बताओ कि ये हम कहाँ आ गये,ये तो कोई कॉलोनी लग रही?”

  ” हम्म, बस देखती जाओ।”

  मेन गेट पर गाड़ी रोक कर राजा ने किसी को फ़ोन लगा दिया__

   ” हाँ हम लोग पहुंच चुके हैं, तुम लोग कहाँ हो? ओके आ जाओ फिर।”

   बांसुरी ने इशारे से पूछा भी लेकिन राजा मुस्कुरा कर रह गया। वहीं पास में नारियल पानी वाला खड़ा था उससे वो एक बड़ा नारियल और दो स्ट्रा डलवा कर ले आया, उसने अन्दर बैठी बांसुरी को बाहर बुलाया तो बांसुरी ने उसे ही अन्दर बुला लिया__

  ” क्या हुआ? बाहर क्यों नही आयीं गाड़ी से”

   ” बाहर सबके सामने एक ही नारियल पीते अच्छा लगता क्या?”

   ” ओहो स्मार्ट वाईफ!  मतलब नारियल पीने के बहाने कुछ और भी खुरापात है तुम्हारे दिमाग में”

   ” जी नही ! कोई खुरापात नही है सिर्फ शान्ती के साथ नारियल पीना है”

   ” तो लो पियो, लेकिन अब किसी शान्ती को नही ढूंढ़ कर लाऊँगा।”

   बांसुरी ज़ोर से हँसने लगी, उसने अपनी स्ट्रा नारियल में डाली और पीना शुरु किया की राजा ने भी शुरु कर दिया…..
    नारियल खतम होते ही उसे बाहर निकल कर फेंकने के बाद राजा फिर नारियल वाले की तरफ जाने लगा__

  ” फिर से?”

  राजा ने हाँ में सर हिलाया और अबकी बार दो नारियल हाथ में लिये वापस लौटा__

  ” दो क्यों? बांसुरी आश्चर्य से उसे देख पूछ बैठी

  ” पिछला तो तुम ही पूरा पी गयी, मुझे कुछ मिला ही कहाँ? इसलिये इस बार अपना अपना पियेंगे ” कह कर राजा अपने नारियल में स्ट्रा डाले पीने लगा।

  ” बस!!  एक नारियल पानी पे आकर सारी मुहब्बत खतम हो गयी राजा जी।”

  ” मुहब्बत अपनी जगह है और खाना पीना अपनी जगह! हमारे यहाँ शादी के बाद एक रस्म होती है जिसमें दूल्हा दुल्हन को एक ही थाली में खाना परोसा जाता है, हमारी शादी के बाद उस रस्म के पहले ही मैं तो भई अच्छे से खा पी लूंगा क्योंकि तुम तो थाली सामने आने के बाद मुझे देखोगी तक नही, और सब चट कर जाओगी।”

  ” अच्छा बच्चू इतनी खब्बू हूँ मैं।”

   ” अगर किसी काम में फंसी हो तब तो खाना पीना सब भूल जाती हो लेकिन जब मैडम बांसुरी भूखी हो तब उनके सामने थाली लायी जाये तो वो फिर और कहीं नही देखती खाने के अलावा। और खाने पर पूरी तरह टूट पड़ती है।”

  ” अच्छा! तो ये सब भी नोटिस किया है आपने! और क्या क्या देख लिया?”

   ” ये सवाल तो पूछो ही मत कि मैंने तुम में क्या क्या देखा, क्योंकि जवाब दूंगा तो नाराज़ हो जाओगी।”

  बांसुरी ने राजा को घूर के देखा __” फिर शुरु?”

  ” तुम्हारे माथे पर सुनहरा आसमान चमकते देखा है…..जब मुस्कुराती हो ना तब तुम्हारे होंठों के किनारों पर एक बचपन गुनगुनाते देखा है।
    जब पानी पीती तो तब तुम्हारे गले की ये हरी सी नस फड़कने लगती है………, उस शफ्फाक खूबसूरत  रग से बूंद बूंद पानी तुम्हारे अंदर उतरते देखा है……….
   कभी कभी जब सारे बालों को समेट कर एकदम ऊपर क्लच कर लेती हो तब एक ज़िद्दी लट हर बार तुम्हारे गालों पर उतर आती है, उसे बार बार तुम्हारा गुस्से से कान के पीछे फंसाना देखा है……
      तुम्हारा सामने से तीसरा दांत जो थोड़ा नुकीला है,अक्सर बातें करते वक्त या कुछ सोचते वक्त तुम्हारा अपनी जीभ से उस दांत के पैनेपन को चेक करना देखा है…….
     और हाँ ! अक्सर सोचते या लिखते वक्त तुम एक हाथ से अपने कानों को जाने क्यों पकड़ा करती हो बार बार……..वो भी देखा है।
    तुम्हारी आंखों में जो समन्दर है ना, उसे अक्सर छलकते देखा है……., तुम्हारे काजल को उसी में बहते देखा है। और खुद को हर बार इनमें डूबते देखा है….
         तुम्हारी मुस्कुराहट में अपनी ज़िंदगी को सांस लेते देखा है……….तुम्हारी खुशबू से खुद को महकते देखा है……    

      तुम्हारे बिना आज तक मेरा जीवन कितना व्यर्थ था निरर्थक था अपने उस जीवन को तुम्हारे मिलने के बाद मायनों में बदलते देखा है….. अब तुम्हारे बिना एक पल भी नही रह सकता.. पता नही अजीब सा डर मन में बैठ गया है कहीं तुम्हें खो ना दूँ? तुम मेरे लिये बहुत कीमती हो बांसुरी….. तुम्हें अपनी जिंदगी से ज्यादा संभाल कर रखूंगा। अब क्या हुआ ?,ये आंखों में आँसू क्यों चले आये?

   बांसुरी ने ना में सर हिला कर आंखें पोंछ ली__

  ” तुम्हारी आंखों में ये जो 24×7 टेप फिट है ना ये भी मैंने देखा है, जब देखो तब बहना शुरु कर देती हैं”

   आन्सूओं के बाद भी बांसुरी के चेहरे पे मुस्कान चली आयी उसने राजा को अपनी तरफ बुलाया__

” क्या हुआ? क्यों बुला रही हो ऐसे? ”

  ” क्यों ? आ नही सकते।”

  ” नही डर लग रहा है तुमसे। बोलो ना क्यों बुला रही हो?”

   ” चख कर देखना है तुम्हें”

   ” देखा !! मैं जानता था। खुरापात चल रही है तुम्हारे दिमाग में “

  बांसुरी ज़ोर से हँसती अपने नारियल को देखने लगी
तभी एक कैब आकर रुकी और पिंकी और रतन उतर कर उन तक चले आये। उन लोगों को देखते ही राजा तुरंत गाड़ी से बाहर आ गया__

   ” सही समय पर तुम लोग आ गये, चलो अन्दर चलतें है।”

   राजा ने पिंकी रतन को वहाँ क्यों बुलाया था ये पिंकी रतन बांसुरी किसी को समझ नही आया था। सब लिफ्ट से सबसे ऊपर पन्द्रहवे माले पर पहुंच गये।

    एक फ्लैट के सामने रुक कर राजा ने दरवाज़े पर लगा ताला खोला और उन लोगों को साथ लिये अन्दर चला आया।
    एक खूबसुरत सा सजा धजा फ्लैट देख कर बांसुरी और पिंकी की आंखें चमक उठी__

  ” ये किस का घर है भाई?”

   ” ये आपका घर है प्रिंसेस।” राजा ने घर की चाबियाँ पिंकी के हाथों पर रख दी__

  ” पर भाई ये क्यों?”

   ” मेरी तरफ से एक छोटा सा तोहफा , तुम दोनो की शादी का तोहफा”

  ” लेकिन राजा भैय्या, ??
     आप नाराज़ ना होना लेकिन ये तोहफा हम ले नही पायेंगे।”

  ” रतन !! नाराज़गी की कोई बात नही। मैं बस ये कहना चाहता हूँ कि इसे मेरी बहन का दहेज मत समझना रतन।
   और ये भी मत समझना की मुझे तुम्हारी काबिलियत पर कोई शक है। दिल से मैं भी दहेज के खिलाफ हूँ। अगर दहेज ही देना होता तो मेरी ये प्रिंसेस मेरी छोटी सी गुड़िया हमारे पूरे महल की मालकिन है, वो सब कुछ इसी का है, दहेज देने के लिये तो मुझे बहुत कुछ देना पड़ता।
   ये घर और गाड़ी, सिर्फ एक बड़े भाई का प्यार है अपनी छुटकी के लिये। आशा करता हूँ मेरे प्यार को समझोगे, हालांकि अगर तुम्हारी बिल्कुल ही इच्छा नही हुई रखने की तब भी मैं बुरा नही मानूँगा।
   मेरा दिल से आशीर्वाद है तुम दोनो खूब पढ़ो, खूब खुश रहो।”

   रतन ने आगे बढ़ कर राजा के पैर छूने चाहे लेकिन उसे रोक कर राजा ने गले से लगा लिया__

  ” आपकी इच्छा सर माथे राजा भैय्या। बस आपका प्यार और आशीर्वाद हम पर बना रहे। अब पिंकी का मायका तो बस आप ही हैं”

  ” रतन, ईश्वर चाहेंगे तो इसी साल आई एफ एस निकाल कर यहाँ से बाहर चले जाना तब काकी सा भी तुम लोगों के साथ कुछ समय गुजार पायेंगी, और खैर मैं तो हूँ ही। मेरा मुम्बई आना लगा ही रहेगा…..
    अब चलता हूँ पिंकी, आज की फ्लाईट मिस नही कर सकता, मॉम का सुबह से दो बार फ़ोन आ चुका है।”

  पिन्की आंसू भरी आंखों से आकर राजा के गले से लग गयी__
 
   ” भाई प्रेम भैय्या के बारे में छोटी माँ को बता दिया?”

  ” हम्म थोड़ा बहुत हिन्ट तो दे दिया है। बाकी बातें घर पहुंच कर ही बता पाऊंगा, वैसे मैं उतना ही बताऊंगा जितना जानना उनके लिये ज़रूरी है।”

  ” भाई अब कब आओगे यहाँ?”

   राजा ने पिंकी के सर पर हाथ रखा और अपनी आंखें पोंछ कर वहाँ से निकल गया।
  बांसुरी के पीछे पीछे पिंकी और रतन भी नीचे चले आये।
   नीचे रतन के हाथ में गाड़ी की चाबी देकर राजा बांसुरी को साथ लिये पैदल ही निकल गया__
    राजा का उदास चेहरा देख बांसुरी की कुछ कहने की हिम्मत नही हो रही थी__

  ” सुनो!”

   राजा ने बांसुरी की तरफ देखा__

  ” लोकल बस से जाने का विचार है क्या?”

  बांसुरी के सवाल पर राजा मुस्कुरा उठा__

  ” तुम्हारा क्या विचार है?”

  ” मेरा तो टैक्सी में बैठ कर किसी के कंधे पर सर रख कर एफ एम पे गाने सुनते हुए जाने का विचार है।”

  राजा हँस पड़ा __

  ” डोंट वरी! मैं ठीक हूँ बांसुरी।”

   बांसुरी ने मुस्कुरा कर राजा का हाथ थाम लिया, दोनो टैक्सी मिलने तक एक दूजे का हाथ थामे चलते रहे।

   *********

    निरमा के घर पर राजा के जाने के बाद से प्रेम नीचे मामा जी के साथ बैठा था।
   मामाजी बातों के शौकीन थे ज़रूरत से ज्यादा ही बोलते थे और प्रेम ज़रूरत से काफी कम।
   वो इतनी देर में प्रेम के पूरे खानदान को खंगाल चुके थे। कहाँ के ठाकुर हैं? बाबा परदादा के साथ साथ कुल देवता कुल देवी के नाम भी पूछ लिये और प्रेम पूरी विनम्रता से उनके सारे सवालों के उलझे ऊन को सुलझाता रहा।
     इसी बीच मामी की मदद कराने को उतरी निरमा ने ही खाने की थाली प्रेम और मामा जी के सामने रखी और उठ के जाने लगी__

  ” निरमा बेटा तू भी साथ ही खा ले”

   निरमा ने मना किया और वापस ऊपर जाने लगी__

  ” अच्छा ठीक है, इनके खाते तक तो रुक सकती है”

   मामी की बात पूरी भी ना हो पायी थी कि वो जल्दी जल्दी सीढ़ियाँ चढ़ ऊपर चली गयी।

   थोड़ी देर रो धोकर उसने मुहँ हाथ धोया और तैय्यार हो गयी।
     उसने अपनी आलमारी खोल कर उसमें कपडों के कहीं पीछे छिपा कर रखा एक फ्रेम निकाला उसे एक बार देख कर अपने बैग में रख लिया।
 
   मामी के ऊपर खाने की थाली ले आने पर भी उससे कुछ भी खाया नही गया, वही हाल नीचे प्रेम का था, मामी और मामा जी के बार बार इसरार करने पर भी दो चार निवालों की औपचारिकता पूरी कर प्रेम ने थाली सरका दी।
    वो लोग उसका दुख भी समझ रहे थे पर स्थितियाँ ऐसी निर्मित हो चुकी थीं कि ना कुछ कहते बन रहा था और ना ही चुप रहते।

    कुछ देर बार राजा और बांसुरी भी चले आये।
उनके आते ही माहौल कुछ हल्का हो गया, थोड़ी देर बैठ कर सभी एयरपोर्ट के लिये निकल गये।

   मामी निरमा को गले से लगाये रो पड़ी पर दिन दिन भर रो कर गुजार देने वाली निरमा चुप ही खड़ी रही।
   बांसुरी भी उन लोगों के साथ ही निकल गयी, उसका एयरपोर्ट जाने का मन था लेकिन उसे उसके फ्लैट पर उतार कर राजा लोग आगे बढ़ गये__

  ” घर पहुंच कर मॉम से बात करता हूँ, पूरा यकीन है वो मुझे कभी मना नही करेंगी। तुम ध्यान रखना अपना।”

  बांसुरी की आंखों में आंसू भर आये__” जल्दी करना राजा। तुम्हारे बिना अब रहने का जी नही कर रहा, लग रहा है तुम्हारे साथ ही चली जाऊं।”

  ” तो चलो”

  ” पागल हो क्या? कल मुझे भी घर के लिये निकलना है, परसों दीवाली है।”

   ” ठीक है फिर तुम अपने घर पहुँचो मैं भी तुम्हारे पीछे-पीछे पहुंचता हूँ।”

  ” सच्ची।” राजा ने हाँ में सर हिलाया और वापस मुड़ कर कैब मे जा बैठा। बांसुरी ने एक बार निरमा का हाथ पकड़ उसे तसल्ली दी और फिर निरमा को साथ लिये प्रेम और राजा निकल गये….

    जब तक उनकी गाड़ी जाती हुई नज़र आती रही,वो वहीं हाथ हिलाती खड़ी रही।

  थके कदमों से अपने फ्लैट में पहुंच कर वो बालकनी में ही जा खड़ी हुई, नीचे गार्डन में बच्चे खेल रहे थे, औरतें साथ बैठी गपशप कर रही थी, सब कुछ तो सामान्य नज़र आ रहा था, असामान्य तो बस वो और उसका मन ही था जिसे अब हर बात में हर जगह राजा ही चाहिये था।
    उसके फ़ोन की मेसेज बीप बजी__

   मेसेज राजा का ही था__

  ” जानता हूँ अभी तुम बालकनी में खड़ी होंगी, और कुछ देर बाद जाकर कॉफ़ी बना कर ले आओगी और फिर कोई गाना लगा कर कॉफ़ी पीते हुए झूले में बैठ कर मेरे बारे में सोचती रहोगी”

  ” जादुगर हो तुम। बिल्कुल ऐसा ही करने वाली थी।”

  ” इसिलिए तुम्हारे सुनने के लिये एक गाने की लिंक भेज रहा हूँ, उसके बोल सुन कर ये मान लेना कि ये मेरे ही बोल हैं। अभी जो सोच रहा हूँ तुम्हारे लिये बिल्कुल वही…….

   बांसुरी ने लिंक खोली___


           मेरे ज़ख्मों को तेरी छुअन चाहिए
            मेरी शम्मा को तेरी अगन चाहिए
           मेरे ख्वाब के आशियाने में तु चाहिए
        मैं खोलूं जो आँखें सिरहाने भी तु चाहिए
          ………तू चाहिए, तू चाहिए
                हर मर्तबा तू चाहिए
              जितनी दफ़ा ज़िद्द हो मेरी
              उतनी दफ़ा हाँ तू चाहिए……….


  क्रमशः

aparna…..


    


 

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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