जीवनसाथी-53

जीवन साथी –53


      बिदाई एक ऐसा भावुक पल होता है कि जिसे देख कर हर औरत हर लड़की की आंखे भीग जाती हैं, अपनी विदाई याद कर।
     बांसुरी भी विदा हो गयी….अपने गठजोड़ और नारियल को गोद में रख कर राजा के बाजू में सिमटी सी बैठी अपने जीवन अपने माता पिता अपनी ताई बुआ दीदी,दीदी का बेटा …कितने सारे रिश्ते थे जिन्हें याद करती करती वो मन्दिर तक पहुंच गयी।
   वहाँ का एक फेरा ले कर उनकी गाड़ी महल की ओर मुड़ गयी।
  
     बारात के स्वागत के लिये महल पूरी तरह तैय्यार खड़ा था…गाड़ियों के पहुंचते ही दुल्हनों के गाड़ी से उतरने के पहले पारी पारी से रानी साहेब ने दोनो के लहंगें में नथ टाँकी और भीतर प्रवेश करते निकाल दी, सासु के नेग के लिये लाया सामान बांसुरी ने उनके हाथ  में रख दिया….

    ससुराल में दुल्हनों के प्रवेश के बाद एक एक कर कई सारी ऐसी रस्में होनी थीं जो रस्में कम और मनोरंजन अधिक थीं, शायद इन रस्मों को निभाने के पीछे का कारण यही रहा हो कि विदाई से विहल दुल्हन को इन हँसती मुस्कुराती रस्मों को करने से जो आनंद मिले एक तो उससे वो अपना विदाई का दुख भूल जाये दूसरा अपने ससुराल से हिल मिल जाये।

   दरवाज़े के भीतर आते ही दरवाज़े पर कुमकुम घुले पानी से अपने पैरों की छाप लगाती सामने बिछी कांसे की थालियां एक एक कर उठाती बांसुरी सासु जी को दे उनकी बतायी जगह पर बैठ गयी, रेखा भी साथ ही थी, लेकिन थालियां तलवार से सरकाने का नेग निपटा कर राजा वहाँ से तुरंत निकलने को तैय्यार खड़ा था, लेकिन रूपा और जया ने हाथ पकड़ कर उसे सामने एक रेशमी पाटे पर बिठा दिया__

” ऐसे कैसे चल दिये कुंवर सा अभी तो आप चारों के कंकन खुलेंगे, उसके खुलने के पहले आप कहीं नही जा सकते।”

  राजा की इन दो दिनों में ना प्रिंस और ना रोहित से कोई बात हो पायी थी…. और अब उससे और अधिक बर्दाश्त नही हो पा रहा था।
  रोहित कुछ सबूत साथ लाया था जो वो राजा को दिखाना चाहता था, लेकिन उसे भी राजा की व्यस्तता का आभास था इसलिये वो बड़े आराम से महल के मेहमानों वाले हिस्से में रुका अपनी राजा से बात होने का इन्तजार कर रहा था।

   राजा को खुद में खोये देख रूपा उसे छेड़ने लगी__

” जिनमें खोये रहते थे वो तो बगल में ही पधार चुकी हैं अब कहाँ खोएं हैं आप कुंवर सा?”

” कहीं नही भाभी! रात भर सोया नही ना इसिलिए ज़रा थकान सी है।”

  ” बस जल्दी जल्दी सब निपटा लीजिए फिर आप लोगों को आपके कमरों तक पहुंचा देंगे।

  दोनो जोड़ों के सामने बड़े से चांदी के दूध भरे बरतन को रख दिया गया, ऊपर तैरती लाल गुलाब की पंखुड़ियां जैसे मुस्कुरा रही थीं__

” अब इसमें क्या हमें तैरना होगा?” विराज ने हँसते हुए चुटकी ली , जया भी तैय्यार बैठी थी

” जोड़े संग तैरने के लिये ही तो इतने बड़े ज़कूज़ी लगवा रखे हैं आप राजकुमारों ने अपने कमरों में ,फिर यहाँ सरेआम क्यों अपनी घूंघट वाली को शर्मिंदा कर रहे तैर कर।”

  ” भाभी सा वकालत पढ़ी है आपने !”

” हाँ तो! राज्कुमारियों को तो और ज्यादा अपडेट रहना पड़ता है छोटे कुंवर। चलिये अब आप लोगों को एक दूसरे के हाथ में बंधा काग डोरा खोलना होगा, लेकिन एक छोटा सा पेंच है कि सिर्फ एक हाथ से ही खोल सकते है, बन्ना बन्नी के हाथ पैर का खोलेगा और बन्नी बन्ने के , चलो जोड़ों शुरु हो जाओ, जो जोड़ा जीतेगा उसके लिये सरप्राइज़ है।”

  रेखा भी थकान से खिज़ी पड़ी थी एक हाथ से खोलने में आखिर उसने गांठ को और कड़ाई से कस दिया और आखिर जया भाभी को बीच में जा कर गांठ सुलझानी पड़ी ।
     राजा ने बड़ी आसानी से बांसुरी के हाथ का कंकन खोल लिया लेकिन इतने भारी चूड़े अँगूठीयों के साथ और गज भर के घूंघट के साथ एक हाथ से बांसुरी गांठ खोल नही पा रही थी कि राजा ने अपने दूसरे हाथ से उसकी मदद कर दी__

” कुंवर सा! ये तो चीटिँग है?”

” कैसी चीटिँग भाभी सा ? इन्होने तो अपना एक ही हाथ इस्तेमाल किया ना आखिर ।”

” अरे पर कोई बाहर का इसमें मदद नही कर सकता ना।”

  ” मैं बाहर का कैसे हुआ! मैं तो अब इनका आधा हिस्सा हो गया हूँ।”

” क्या बात है , सुन लीजिए बांसुरी आपके साहेब क्या कह रहे…चलिये अब लाईये अपनी अपनी डोरियां …अब आप लोगों को इस दूध के बरतन से अंगूठी ढूंढ़ निकालनी है, देखते हैं हमारे बन्ने जीतते हैं या हमारी बन्नियां।”

  दोनो जोड़ों के सामने रखे बरतनों में ढ़ेर सारे सिक्के हल्दी की गांठ सुपारी और कंकन के साथ ही भाभीयों ने अँगूठीयाँ भी डाल दी।
    बांसुरी ने अंगूठी पकड़ी ही थी कि राजा ने उसका हाथ पकड़ लिया और बांसुरी के हाथ से अंगूठी छूट गयी जिसे दूध से बाहर निकाल कर सातों बार राजा जीत गया__

” ये क्या कुंवर सा आप तो ऐसे हड़बड़ा रहे अपने कमरे में भागने के लिये कि आधे घण्टे का खेला दस मिनट में निबटा डाला।”

राजा मुस्कुरा कर रह गया, मन ही मन वो जानता था कि उसकी हड़बड़ी का कारण क्या है?

  आगे रुई छिपाई की रस्म में रूपा भाभी ने अलग अलग रुई के फाहे पहले बांसुरी के कपडों में कभी उसकी बाह्ं के भीतर कभी चूड़ियों में कभी पाज़ेब में कभी जूड़े में छिपाये जिन्हें फटाफट राजा ने ढूँढ निकाला लेकिन जब राजा की जेब में, पगड़ी में छिपाने लगीं तो संकोच के कारण बांसुरी धीरे धीरे निकाल कर रूपा भाभी के हाथ में रखती रही__

” कुंवर सा बाई सा तो बड़ी शर्मिली निकली!”

” कोई नही भाभी सा! मैं बेशरम बना दूंगा।”

” और क्या अब तो सब आप ही सिखाएंगे , वो भी आज ही रात से।” आस पास बैठी रिश्ते की भाभियाँ नंदे ठिठोली करती रही लेकिन राजा की बेचैनी देख कर बांसुरी मन ही मन परेशान हो उठी।

” मेरा काम अगर हो गया है तो मैं निकलूं भाभी सा!”

” हम मना करेंगे तो आप रुक जायेंगे? नही ना तो जाइये, हो गया आपका सारा नेग चार , अरे रुकिये बस दुल्हन की मुहँ दिखाई कर लीजिए फिर जाइयेगा।”

” मुहँ दिखाई अभी बाकी है?”

रूपा की बात सुन राजा ने अपना सवाल उछाल दिया

” लीजिए ये भी कोई पूछने की बात है, फेरों के बाद से दुल्हन का चेहरा देखा भी है आपने, अब सोचिये कहीं रेखा बाई सा यहाँ और आपकी मीठी मीठी बांसुरी वहाँ निकली तो?”

  विराज की तरफ इशारा कर रूपा ने जैसे ही कहा, हड़बड़ा कर राजा ने बांसुरी का घूंघट पलट दिया, सामने उसे ही मुस्कुराती देख कर उसकी सांस में सांस आ गयी__

” आप तो भाभी सा डरा देती हैं! मेरी तो जान ही निकल गयी थी।”
  एक बार फिर वहाँ बैठी औरतें हँसने लगी__

” बहूरानी कितनी देर हंसी ठिठोली करेंगी अब दुल्हनों का मुहँ जूठा करवा कर कुछ चाय वाय पिलवा दीजिये फिर मुहँ दिखायी शुरु करते हैं”!

  फूफू सा की बात पर रूपा ने खीर की कटोरी मंगवाई और दोनों जोड़ों के सामने रख दी__

” कुंवर सा खीर गर्म है आराम से खिलाइयेगा वर्ना आपकी दुल्हन का मुहँ ना जल जाये।”

हाँ में सर हिला कर राजा ने चमचे से खीर निकाली और फूँक फ़ूक के उसे ठंडी करने के बाद बांसुरी की तरफ बढ़ाया,दोनो हाथों से घूंघट उठाये उसने खीर खाई और फिर खुद राजा को खिलाने के लिये आगे बढ़ा दी…

   एक बार फिर औरतों का समूह खिलखिला उठा__

” मेरे प्यारे और भोले देवर सा खीर ठंडी ही थी, हम सब तो बस ये देख रहे थे कि आप लोगों को अपनी लुगाइयों की कितनी फिक्र है, लेकिन विराज सा आप फेल हो गये इस परीक्षा में। बस चम्मच उठाया और ठूंस दिया रेखा के मुहँ में…गलत बात है ये”
 
हंसी कहकहों का दौर था जो थमने का नाम नही ले रहा था, सभी के लिये चाय आ गयी थी, फटाफट अपनी चाय खत्म कर राजा वहाँ से निकल गया।

    इसके बाद तो एक एक कर जाने कितनी रस्में होती चली गईं….मुहँ दिखाई की रस्म में घर भर की औरतों के हाथ में शगुन के रुपये रखती सबके पैर छूती दुल्हने भी थक गयी, आखिर रेखा से रहा नही गया और अपना घूंघट सरकाये वो पास खड़ी सहायिका से पानी मांग बैठी, उसकी पुकार सुन रूपा चली आयी__

” पानी क्या बाई सा खाना ही आ रहा आप दोनों का, ज़रा धैर्य रखिये।”

” भाभी सा रात भर से सोये नही हैं, और अभी खाना खाने का मूड नही है…हम अपने कमरे में कब जायेंगे।”

  ” बड़ी जल्दी है आपको कमरे में जाने की…बस ये कुछ और रस्में बाकी हैं उसके बाद आपको पहुंचा दिया जायेगा।”

  एक के बाद एक रस्म निभाती बांसुरी भी थक कर चूर हो गयी थी…सबसे अधिक गुस्सा उसे राजा पर आ रहा था, जबसे उसे यहाँ छोड़ कर गया था, नज़र ही नहीं आया था। वो घूंघट के अन्दर से कई बार इधर उधर चोर नजरों से ढूंढने की कोशिश कर चुकी थी लेकिन वो जो गया कि वापस आया ही नही….

   इसके बाद रेखा और बांसुरी को साथ ले जया एक बड़े कमरे में ले आयी__

” नेगचार के पहले आप लोगों को आपके कमरों में नही पहुंचाया जा सकता….रूपा भाभी जब तक सुहाग थाली सजा रहीं है तब तक आप लोग यहाँ नहा धो कर फ्रेश हो लीजिए, ये तीनों सेविकायें आप लोगों की सहायता के लिये हैं, आपके कपड़े और गहने यहाँ रखें हैं, हम बाहर रूपा भाभी सा की मदद करने जा रहे, थोड़ा जल्दी कर लीजियेगा।”

  जया के बाहर जाते ही रेखा बिस्तर पर फैल गयी__

” उफ्फ़ कितनी थकान हो गयी है, तुम नही थकी बांसुरी?”

” थक तो गईं हूँ ..घर की भी याद आ रही, कल सब लोग शाम में वापस निकल जायेंगे।”

” क्यों विराज सा का राजतिलक देखने रुकेंगे नही,? हमारे पापा और भाई तो रुकेंगे, उनका बरसों का सपना जो पूरा होने वाला है।”

” मैंने कहा तो था लेकिन पापा को कुछ काम है और फिर घर भी बिल्कुल खाली पड़ा है वहाँ?”

” क्यों कोई नौकर चाकर तो होंगे?”

बांसुरी ने मुस्कुरा कर ना में सर हिला दिया__

” शादी वाले घर को खाली नही रखते इसलिये पापा के एक दोस्त हैं वो रात रुकने आ जातें हैं।”

” ओह!! ” रेखा एक सेविका को लिये नहाने घुस गयी आज तक उसने कभी अपने बालों में खुद से शैम्पू नही किया था , उसके वहाँ से जाते ही दूसरे गुसलखाने में बांसुरी भी चली गयी।

सुहाग की थाली सजा कर रूपा और जया सभी औरतों के बीच ले आयीं…
  राजपूती परंपरा की सुहाग थाली बहुत बड़ी सी चांदी की थाली थी जिसमें छोटी बड़ी चांदी की कटोरियों में तरह तरह के व्यंजन सजे थे….और सबसे बीच में रखी थी लाप्सी जिसके ऊपर था चांदी का गोल सिक्का!

   बांसुरी और रेखा को वहाँ सब के बीच ले जाकर बैठा दिया गया, बहुत देर से राजा की राह तकती बांसुरी अब निश्चिंत थी कि वो ज़रूर आ जायेगा, क्योंकि उसी ने बांसुरी को कभी बताया था कि दूल्हा दुल्हन एक साथ खाते हैं, लेकिन इतनी राह तकने पर भी वो नही आया, बल्कि सामने सबसे पहले आयीं उसकी सास ….
   उन्होने चांदी के सिक्के से उसे लाप्सी खिला कर घूंघट उठा कर उसका चेहरा देखा और एक शानदार झिलमिलाता हार ,उसकी गोद में डाल दिया, उनके जाते ही एक एक कर सभी औरतें उसे उसी थाली से खिला खिला कर चेहरा देख नेग देती चली गईं।
  वो मन ही मन सोचती रही कितनी बार उसकी मुहँ दिखाई होगी आखिर….सब करते करते कब शाम बीत गयी उसे पता तक ना चला ।
    इतनी औरतों की भीड़ में ना उससे कुछ खाया जा रहा था ना आराम से बैठा जा रहा था ….और उस पर राजा का कोई पता ठिकाना ना था।

******

   राजा वहाँ से निकल कर सीधे रोहित के कमरे मे पहुंच गया, रोहित प्रिंस और राजा के अलावा वहाँ बस प्रिंस था।

दरवाज़े को ठीक से बंद करने के बाद राजा और प्रेम रोहित के सामने बैठ गये __

  ” भैय्या जी रोहित भैय्या ने सारा इनभेस्टीगेशन किया है और जो बात इन्हें पता चली है वो बहुत चौंका देने वाली है।पर उससे पहले हम आपको एक बात बता दें…
    आप जब तक मुम्बई में थे तब तक आपके लोकेशन का पता किसी को नही था, हम आपसे मुम्बई के पास के ही एक गांव में मिले रहे एक बियाह में , याद है?”

” हाँ प्रिंस अच्छे से याद है।”

” तब हम सोचे भी कि भैय्या जी ज्यादतर टाईम अपना फ़ोन काहे बंद किये रहते हैं पर बहुत बाद में समझ आया कि आपकी सुरक्षा के लिये आपका फ़ोन बंद रखना ही सही था। आप बनारस आये तब आपका फ़ोन ऑन हुआ और आपके दुश्मनों ने आपका लोकेशन ट्रेस कर लिया भैय्या जी।
   जब आप बनारस पहुँचे तब वहाँ आप पर गोली चली और चलाने वाले थे हमरे कानपुर के गुंडे ….अब ज्यादा तो नही लेकिन थोड़ा बहुत गुण्डागर्दी हम भी कर ही लेते हैं,बस जैसे ही इन दोनों कनस्तरों का पता चला हम लल्लन भैया को फ़ोन घुमाई दिये और उसके बाद तो ये एकदम सिंघम बन के जो पेले हैं ऊ दोनों को कि ससुरों को अपनी अम्मा नानी सब याद आ गईं।
    अब इसके आगे का कहानी आपको लल्लन भैया मतलब हमारे सिंघम बाबू बताएंगे।”
  अरे रुकिये उसके पहले आपको कुछ गिफ्ट दे दें।”

  प्रिंस ने एक पैकेट सा निकाल कर राजा को दे दिया, जिसे खोलने पर उसमें उसके और बांसुरी के गंगा घाट पर के कई सारे फोटो थे, उन्हें देख एक पल को राजा मुस्कुरा उठा__

” भैय्या जी मुस्कराइए नही! ये हम नही वही गुण्डा लोग खींचे रहे,ये तो हम बहुत कुटाई करने के बाद निकलवा पाएँ हैं, शायद जिसने आपको मारने…उसी को ये लोग फ़ोन से लेकर भेज रहे थे, बाद में इन लोगों ने इन फोटो का हार्ड कॉपी भी निकाल लिया, जाने क्यों?”

“हम्म, रोहित तुम बताओ आगे की बात।”

  ” राजा साहेब  जिस वक्त आप बनारस में थे मैं भी वहीं था, बल्कि आप मुझसे ही मिलने आये थे हैं ना….आप को गोली लगने के बाद मैंने अपनी टीम तुरंत काम पर लगा दी थी, मेरी टीम ने खोज बीन कर यही बताया कि ये काम किसी सुपारी किलर का नही बल्कि कानपुर के कुछ गुंडो का है, बांसुरी से प्रिंस के बारे में पता चला और मैने उसे वहाँ के सारे गुंडों की लिस्ट मँगवा ली लेकिन प्रिंस ने मेरा काम और आसान कर दिया उसने उन लोगों से अपने तरीके से सब कुछ उगलवा भी लिया … जब मैं उन गुंडों तक पहुंचा तो उन्होने मुझे बस इतना ही बताया कि किसी एक नम्बर से उन्हें ये काम करने का ऑर्डर मिला था और पैसे तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफ़र कर दिये गये थे, इसके साथ ही मारने के लिये गन और आपकी तस्वीर उन्हें भेज दी गयी थी।
  जिस नम्बर से उन्हें फ़ोन आया वो बंद आ रहा था लेकिन कॉल डिटेल्स के ज़रिये मैं एक आदमी तक पहुंच गया, जब उसे थोड़ा डराया धमकाया तब आखिर उसने सच्चाई बतायी।
   आप पर गोली चलवाने वाला व्यक्ति और कोई नही आपके भाई विराज के ससुर ही हैं।”

” क्या? लेकिन ठाकुर साहेब ऐसा क्यों करेंगे? “

  ” हम्म यही बात तो जानने वाली है…. ठाकुर साहब के आपके परिवार से पुराने और घनिष्ठ संबंध हैं , सुनने में ये भी आया कि ठाकुर सा और आपकी माँ यानी रानी साहेब एक ही कॉलेज के पढ़े हैं इसलिये दोनों में काफी घनिष्ठ्ता शुरु से ही थी।रानी साहेब के पिता की रियासत वैसे भी बहुत लम्बी चौडी नही बची थी, ऊस वक्त उन्हें कुछ घरानों ने तकलीफ पहुंचाने की कोशिश की तब इन्हीं ठाकुर साहब के पिता ने उनकी काफी सहायता की थी और एक बड़ी सी ज़मीन आपके दादा सा से लीज़ पर काम के लिये दिलवा दी थी, जिसे शायद आपके पिता अपने समय में वापस लेना चाह रहे थे लेकिन फिर कुछ आपसी सहमती बन गयी और वो ज़मीन और उससे जुड़े सारे गांव रानी साहेब के पिता की रियासत का हिस्सा बन गये थे।”

” लेकिन इन सब बातों का अभी यहाँ क्या औचित्य है रोहित?”

” है राजा साहेब! रानी साहेब के पिता महत्वाकांक्षी थे वो चाहते थे उनकी बेटी रानी बने सो आपके पिता से शादी कर के उन्हे लगा उनका ये सपना पूरा हो गया लेकिन आपके पिता साहब ने जो  महारानी की पदवी और  सम्मान आपकी खुद की माँ साहेब को दिया वो सम्मान वो रानी साहेब को कभी नही दे पाये….
   खैर रानी साहेब के पिता के समान ही ठाकुर सा भी अति महत्वाकान्क्षी हैं, उनकी एक ही संतान है रेखा , अब चूंकि उनका कोई बेटा नही है इसलिये उनके बाद उनकी गद्दी उन्हे। कायदे से अपने भाई के बेटे को देनी पड़ेगी जिसके कारण रेखा मायके से गद्दी का उत्तराधिकार नही पा सकेगी इसिलिए वो चाहते थे किसी अच्छे राजघराने के युवराज से रेखा का विवाह हो जाये।
   आपके महल के किसी जलसे में उन्हें  आपके राजघराने का पूरा ब्योरा मिला और मिली पुरानी छूटी सखी रानी माँ।

  इसके बाद उनका महल आना जाना शुरु हो गया, फिर तो युवराज भैय्या के विवाह में भी वो सपरिवार सम्मिलित हुए ।
    यहीं इन  दोनों ने मिल कर विराज और रेखा का विवाह करने की सोची क्योंकि दोनों की ही यही अभिलाषा थी कि किसी तरह विराज को गद्दी मिल जाये।
   युवराज भैय्या के गद्दी पर ना बैठने का कारण सबको पता था,अब बचे आप।
   आप में ढूंढने से भी कोई त्रुटी नही मिल रही थी, इसलिये ठाकुर सा ने आपको रास्ते से हटाने की सोच ली…..बड़े बड़े महलों में ऐसी छोटी छोटी बातें तो होती रहती हैं राजा साहेब।
  आप जैसे ही महल छोड़ कर कहीं बाहर निकलते ठाकुर साहब के गुंडे जो आपकी ताक में बैठे होते थे आप पर हमला बोल ही देते, अपनी किस्मत से ही आज तक आप बचते आयें हैं।
  बनारस में एयरपोर्ट से आपने किसी को फ़ोन लगाया था जिसे ट्रैक करने के बाद आप पर गोली चलवाई गयी, लेकिन गोली चलाने वाले कोई पक्के खिलाड़ी ना थे गोली आपके कंधे पर लगी…और आप फिर बच गये।
  इस हमले के बाद युवराज भैय्या भी बहुत सजग हो गये और आपके पिता भी, दोनो ने यही तय किया कि आपका राजतिलक कर दिया जाये, ऐसे में रानी साहेब ने सबके सामने ये बात रख दी कि ठाकुर साहब आपसे रेखा का विवाह करना चाहतें हैं, जबकि रानी साहेब के पास पहले ही ठाकुर सा ने आपकी और बांसुरी की बनारस की फोटोज भेजी थी, उन्हें पूरा यकीन दिलवाने ही इन फोटोज की हार्ड कॉपी भी निकाली गयी थी।
   रानी साहेब आपकी भावुकता और आपका स्वभाव को जानती थी, उन्हें पता था आप किसी लड़की को कभी धोखा नही दे सकते…इसलिये उन्होने रेखा वाली बात कही, और जब आपने बांसुरी के बारे में रानी सा को बताया तो उन्होंने तुरंत विराज का प्रस्ताव सबके सामने रख दिया।
    उसके बाद ऐसी परिस्थितियां बना दी कि सबको विराज के राजतिलक के लिये मंजूरी देनी पड़ गयी।”

  रोहित ने अपनी बात खत्म कर राजा की ओर देखा उसका चेहरे का रंग उड़ा हुआ था, पूरा चेहरा दुख और विषाद में घिर गया था, उसे समझ नही आ रहा था कि क्या सच है क्या नही… प्रेम को काफी बातों का आभास तो था लेकिन सिर्फ राजगद्दी के लालच के लिये राजा जैसे लड़के के साथ किया छल उसके मन को भी कचोट गया था, उसने रोहित की तरफ देखा__

” इन बातों का कोई सबूत है रोहित?”

हाँ में सर हिला कर रोहित प्रेम को साथ लिये एक किनारे चला गया और रेखा से हुई बातचीत जिसकी विडियो उसने निकाल ली थी प्रेम को दिखा दी__

” देखिए प्रेम ये विडियो सिर्फ आपको दिखा रहा हूँ, इसके बाद इसे डिलीट कर दूंगा, आज रेखा इस घर की बहू है , आप प्लीज़ किसी और से इसका ज़िक्र मत कीजियेगा। राजा साहेब और बांसुरी के लौटने के बाद प्रिंसेस रेखा और इनकी सहेलियों का ग्रुप बनारस ट्रिप पर आया था, हमारे ऑफिस को इन सभी की सिक्योरिटी का चार्ज मिला तब जैसे ही मेरा ध्यान इस बात पर गया कि रेखा ठाकुर साहब की बेटी है तब मैने खुद होकर इस स्पेशल ड्यूटी के लिये अपना नाम दे दिया…
    सिर्फ दो दिन की मुलाकातों में मैंने रेखा को पूरी तरह रिझा लिया और वो तीसरे दिन मेरे साथ अकेले ही बनारस घुमने निकल पड़ी।
  मेरे कमरे में अपने सबसे प्यारे पलों में वो भावुक हो गयी, उसने मुझसे कहा कि प्यार कितना भी मुझसे कर ले लेकिन शादी कभी नही कर पायेगी। शादी की तो खैर मैं भी नही सोच रहा था, मैं बस सारी सच्चाई किसी राजमहल वाले से जानना चाहता था, ये सारी बातें जो मैने अभी बताईं रेखा की बताईं बातें ही हैं, उसे शायद उसकी माँ ने बताईं थी और कहा था कि उसकी शादी इस महल के राजा से ही होगी।
उस वक्त भी मैने उसकी सारी बातों को रिकॉर्ड कर लिया था, उसके बाद अभी शादी के समय जब मिला तब ये विडियो बनाया, पहले सोचा था कि राजा साहेब को सबूत दिखा दूंगा लेकिन अब उनकी हालत देख लग रहा ये सबूत देख और रेखा की सच्चाई जान वो और दुखी हो जायेंगे इसलिये ये सिर्फ आपको दिखाने के बाद डिलीट कर दूंगा।

रोहित ने कुछ रुक कर दूर बैठे राजा की तरफ देखा__
” इनसे या युवराज भैय्या किसी से कुछ मत कहियेगा, हमारे प्रोफेशन में कभी कभी सच्चाई उगलवाने करना पड़ता है ऐसा, पर विश्वास रखिये मैं रेखा की ज़िंदगी में कभी पलट कर वापस नही आऊँगा।”

प्रेम ने उसके कंधे पर हाथ रख थपथपाया और राजा के पास चला गया, रोहित भी उसके पीछे चला गया।

राजा भरी आंखों से रुबिक क्यूब को बनाने की कोशिश कर रहा था, किसी को समझ नही आ रहा था कि क्या कहा जाये…
    रात एक एक पल बीतती जा रही थी लेकिन वो चारों वहाँ जैसे बैठे थे, वैसे ही बैठे  रहे।

*******

  सारी रस्में निभाने के बाद बांसुरी और रेखा को उनके कमरों में पहुंचा दिया गया…
…कमरे तो पहले ही सुंदर थे उस पर आज उनके वैवाहिक जीवन की शुरुवात थी…पहली रात थी तो सजावट की बात ही अलग थी।
कुछ हंसी ठिठोलीयों के बीच बांसुरी को उसके कमरे में पहुंचा कर सेविकाओं को ज़रूरी बातें बता कर रूपा कुछ देर बांसुरी को महल की बातें वहाँ के कायदे बता कर वहाँ से चली गईं, आज बांसुरी का दादी सा से मिलना नही हो पाया था, उनकी तबीयत के कारण वो बाहर नही निकलीं थीं, कल सुबह ही बांसुरी को उनसे भी मिलने जाना था।
   रूपा भाभी के जाते ही सेविकायें  बांसुरी को संवारने में लग गईं ….
    सब अच्छा लग रहा था पर जाने क्यों बांसुरी की बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
  सेविकाओं के जाते ही दरवाज़ा भिड़ा कर उसने समय देखा रात के दस बज चुके थे….वो खिड़की पर जाकर खड़ी हो गयी, कल सुबह कितने सारे काम थे उसे, दादी सा से मिलने के बाद अपनी माँ और सब से मिलने जाना था…थकान भी बहुत थी लेकिन नींद आंखों से गायब थी, राजा दोपहर से गया था अब तो रात हो चुकी थी, उसने समय देखा ग्यारह बज चुके थे…
  अब तो उसकी घबराहट अपने चरम पर थी, उसने अपना फ़ोन ढूंढा,  …और राजा को फ़ोन मिला ही लिया…पूरी रिंग जाने पर भी उसने फोन नही उठाया।

  बांसुरी को रोना तो बहुत आया लेकिन उसने खुद को संभाल लिया।
    बिस्तर पर पीछे तकिये से टेक लगाये वो राजा से जुड़ी बातें सोचती सोचती जाने कब सो गयी  …..

*****

  शादी की रस्मों में रात भर जागने से निरमा भी थक गयी थी, सुबह वो कुछ देर के लिये घर जाना चाहती थी लेकिन रूपा भाभी और जया भाभी ने उसे साथ ही रोक लिया, वो अपनी स्थिति से उन्हें अवगत भी नही करा सकती थी, एक बांसुरी ही थी जो जानती थी लेकिन वो खुद नवेली सी गठरी बनी एक ओर बैठी थी…
   दोपहर में खाने के बाद भी वो दो घड़ी का आराम नही कर पायी थी, इसीसे शाम ढलते ही वो बांसुरी से बात कर घर चली गयी थी,उसे प्रेम भी कहीं नज़र नही आ रहा था…..
    रात का खाना नही खा के आयी थी इसलिये महल से रूपा भाभी ने खाना भिजवा दिया था।
  अम्मा और बाकी नौकर भी महल में थे….ऐसे एकान्त में उसे बहुत सुकून मिला , गरम पानी से नहा कर जब थोड़ा फ्रेश लगा उसने खुद के लिये एक कॉफ़ी बनाई और ऊपर छत पर चली गयी, सामने महल की रोशनी देखती कॉफ़ी पी रही थी कि उसे पेट में हल्का सा दर्द जैसा महसूस हुआ, कुछ होगा सोचा कर उसने अनदेखा कर दिया, वैसे भी शादी के चक्कर में दो चार दिन से बहुत गरिष्ठ खाना पीना हो गया था।
   थोड़ी देर में भी जब आराम नही हुआ तो वो अन्दर अपने कमरे में चली आयी, पलंग पर आराम से लेटते ही उसे थोड़ा आराम लगने लगा।

प्रेम राजा के साथ था, आज काफी मेहमानों की विदाई भी थी, इसलिये वो समझती थी कि प्रेम को वापसी में देर हो सकती है….
  
     प्रेम को फ़ोन करना चाहिये या नही सोचते हुए उसने हाथ में पकड़े फ़ोन को वापस रख टीवी चला लिया।
 
  टीवी देखते में ही जाने कब उसे भी नींद लग गयी….

क्रमशः

aparna…

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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