जीवनसाथी – 103

जीवनसाथी -103



घुटनों पर झुके ठाकुर साहब को अपने गन पॉइंट पर रखे प्रेम की आंखों में खून उतर आया था। वो गुस्से में वहीं शायद ठाकुर साहब को गोली मार चुका होता लेकिन इधर उधर फैले हाहाकार के बीच उसे बाँसुरी की चीख ‘साहेब ‘ सुनाई दी और वो ठाकुर को अपने आदमियों के हवाले कर तुरंत स्टेज की ओर भाग खड़ा हुआ।
    प्रेम के ठाकुर साहब के पास पहुंचते तक में आदित्य भी पहुंच चुका था। लेकिन इतनी तैयारियों के बाद भी आखिर वो लोग चूक ही गए और ठाकुर साहब की गन से गोली चल ही गयी…..

    ******

  मंच पर भाषण देते अजातशत्रु की ओर सभी की नज़रे थीं। सभी मगन थे, ध्यान से राजा जी के कहे एक एक शब्द सुन रहे थे, लेकिन रानी माँ का पूरा ध्यान सिर्फ ठाकुर साहब पर था।
     वो सिर्फ और सिर्फ उन्हें ही घूर रहीं थीं। वो चाहती थी कि एक बार ठाकुर साहब उन्हें देखे और वो उनसे हाथ जोड़ विनती कर उन्हें रोक ले।।
  पर ठाकुर साहब ने दुबारा रानी माँ की ओर नही देखा तो फिर नही देखा।
    ठाकुर साहब जैसे ही ज़रा हरकत में आये रानी माँ सतर्क हो गईं और जैसे ही ठाकुर साहब ने अपनी छिपी हुई गन निकाल कर अजातशत्रु के ऊपर तानी रानी माँ एक झटके से उठी और अजातशत्रु के पास पहुंच उसे एक तरफ को झुका दिया।
      किसी के कुछ समझने से पहले एक गोली राजा अजातशत्रु के कान के बहुत पास से होती हुई निकल गयी।
    ठाकुर साहब कहाँ रुकने वाले थे, एक के बाद एक उन्होंने लगातार तीन गोलियाँ चला दी और राजा अजातशत्रु को एक ओर धकेलती रानी माँ उन बची दो गोलियों की चपेट में आ गईं।
   मंच पर बैठे लोग सामने बैठी जनता जब तक कुछ समझ पाती गोलियाँ चल चुकी थीं।
   बाँसुरी अपने साहब को आवाज़ लगाती उन तक भाग कर पहुंची तब तक में अजातशत्रु रानी माँ को सहारा दिए नीचे बैठ चुके थे।
   प्रेम के आदमी इतनी देर में ठाकुर साहब को पकड़ चुके थे…. उनके हवाले उन्हें कर प्रेम भी राजा अजताशत्रु की तरफ दौड़ चला, उसके पीछे ही आदित्य भी भागा।
   मंच पर समर ठीक अजातशत्रु के पीछे ही खड़ा था, इसी से रानी माँ के धक्के के समय उसने गोली देख अजातशत्रु को कवर कर लिया था बावजूद गोली रानी माँ को लग ही गयी।
    अजातशत्रु को बचाने के लिए उन्हें हटाती रानी माँ खुद ठाकुर साहब के निशाने पर आ गयी। एक गोली कोहनी को छूती हुई पेट पर लगी और दूसरी सीने पर।
   गोली लगते ही रानी माँ वहीं गिर पड़ी। अजातशत्रु की गोद में सर रखे रानी माँ ने पीड़ा से आंखे बंद कर ली।
     मंच के नीचे लोगों में भगदड़ मच गई थी। समर और प्रेम ने अजातशत्रु की मदद करते हुए रानी माँ को उठाया,तब तक में विराज मंच के नीचे तक में अपनी गाड़ी ले आया।
  रानी माँ को गाड़ी में डाल वो सभी अस्पताल के लिए निकल गए।
     प्रेम के कुछ आदमी मंच पर से  लोगो को उतार गाड़ी में चढ़ाते जा रहे थे और बाकी आदमी नीचे भगदड़ मचाती जनता को भी घबराने की जगह सयंम से निकालते जा रहे थे……
  
    एक के पीछे एक दस गाड़ियां फर्राटे से अस्पताल की ओर बढ़ गईं।
     अस्पताल में  समर ने फ़ोन कर दिया था इसलिए ओटी पहले ही तैयार थी।
     अस्पताल पहुंचते ही बिना कोई देर किए रानी माँ को तुरंत ओटी ले जाया गया।
    बाकी सभी बाहर ही खड़े रह गए। एक के पीछे एक गाड़ियों में सभी वहाँ पहुंच चुके थे। रानी माँ के साथ विराज अजातशत्रु समर थे, तो उसके पीछे की गाड़ी में प्रेम के साथ बाँसुरी युवराज रुपा और महाराज थे।
    इन गाड़ियों के वहाँ से निकलते ही आदित्य गाड़ी लिए काकी साहब के सामने पहुंच गया। सोचने समझने का समय ही किसके पास था। आदित्य की गाड़ी में ही काका साहेब काकी साहेब के साथ पिंकी और रतन भी चले आये
    विराट अपने किसी एडवांस फोटोग्राफी कोर्स के लिए फिलहाल अफ्रीका में था इसी से उसे किसी ने कोई सूचना नही दी थी।
   यूँ लग रहा था पूरा का पूरा महल अस्पताल पहुंच गया था।
    
    डॉक्टरों की टीम रानी माँ की जान बचाने में लगी थी और बाहर सभी हैरान परेशान बैठे भगवान से प्रार्थना कर रहे थे।

  सबसे किनारे की कुर्सी पर अकेली बैठी रेखा जब से अस्पताल पहुंची थी बस रोये ही जा रही थी। अजातशत्रु के पास बैठी बाँसुरी का ध्यान बहुत देर से रेखा पर था , उसने किसी सहायक को भेज राजा के लिए साफ कपड़े मंगवा लिए थे।
  रानी माँ को संभालने के चक्कर में राजा की सफेद पोशाक खुनाख़ून हो चुकी थी। बाकियों को तो कुछ नही लग रहा था पर जाने क्यों बाँसुरी राजा को वैसे देख नही पा रही थी, इसलिए इतनी सब परेशानियों के बाद भी उसने कपड़े मंगवा लिए।
   सहायक के कपड़े लाते ही वो मिन्नतें कर राजा को साथ लिए कपड़े बदलवाने चली गयी।
साफ सुथरे कपड़ों में राजा को वहीं छोड़ फिर वो रेखा की तरफ बढ़ गयी…..

  रेखा का रोना बदस्तूर जारी था।

  बाँसुरी ने रेखा के कंधे पर धीमे से हाथ रख दिया,रेखा ने एक बार उसे सर उठा कर देखा और दूसरी तरफ मुहँ फेर लिया…

” मैं जानती हूँ तुम मुझसे नाराज़ हो,मैंने ठाकुर साहब के खिलाफ सबूत इकट्ठे किये , उन्हें जेल भेजने के लिए। लेकिन ऐसा क्यों किया ये भी तो जान लो रेखा। एक बार अपनी बड़ी बहन मान कर ही मेरी बात सुन लो। “

” क्या सुनें हम बाँसुरी। अब सुनने को रह क्या गया। हमारा तो सब चला गया। अपने हमारे पिता हुकुम को जेल करवा ही दी। अब अगर कहीं रानी माँ को कुछ हो गया तो हम तो कहीं के नहीं रहेंगे। विराज सा वैसे ही हमारा मुहँ नही देखेंगे। ससुराल में सब हमसे नाराज़ हो जाएंगे और यहाँ की सब की नाराजगी के बाद हम मायके भी नही जा सकते।  पिता हुकुम के जेल में रहने पर वहाँ भी तो मुश्किलें पैदा हो जाएंगी न।
    अब न तो हम ससुराल के रहे न मायके के…

” आपने ऐसा सोचा भी कैसे रेखा! होता वही है जो वो परमशक्ति चाहती है। दूसरी बात ठाकुर साहब ने जो किया वो उनके मन का द्वेष था और उनके उस कृत्य के लिए आप कहीं से भी जवाबदार नही हैं। जैसे पहले आप रियासत की बहू थीं अब भी हैं और परिस्थितियां कुछ भी हों आप हमेशा इस घर की बहू रहेंगी। आपके आदर सम्मान में कोई कमी कभी नही आएगी।
   आज मॉम की जो भी हालत है उसके लिए कहीं न कहीं वो भी ज़िम्मेदार हैं, इसलिये उनकी हालत की ज़िम्मेदार आप खुद को मत मानिए।
   आप जिस दिन मेरे छोटे भाई विराज की दुल्हन बन कर आयीं उसी दिन से मैंने आपको अपनी छोटी बहन मान लिया था, और मैं कोई बात ऊपरी तौर पर नही कहता, मैंने अगर कोई रिश्ता किसी के साथ बनाया है तो उसे दिल से निभाया भी है, ये आप भी जानती हैं। फिर आपने इतनी बड़ी बात सोच कैसे ली कि अगर मॉम को कुछ हो गया तो महल आपको यहाँ से उठा कर बाहर फेंक देगा।
  
  रेखा ने डबडबाती आंखों से राजा की ओर देखा … राजा ने उसके सर पर हाथ रख दिया..

” आप अपनी और अपने बेटे की बिल्कुल चिंता मत कीजिये, आप मेरे संरक्षण में हैं।”

” भाई साहब लेकिन हमें हमारे पिता हुकुम की तो चिंता हो ही रही है ना? “

” अभी फिलहाल उनके बारे में भी मत सोचिये। मेरा यही मानना है कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है, आप भी अभी शान्त मन रहिये और विश्वास रखिये जो भी होगा अच्छा ही होगा।”

 
राजा की बातों से भी रेखा को कोई तसल्ली नही मिली।  वो अब भी वो अपने पिता को लेकर परेशान ही थी।
   उसे इस बात का भी डर रह रह कर सता रहा था कि कहीं विराज इसके पिता पर का गुस्सा उसके ऊपर न निकाल दे। उसकी इस परेशानी को सभी समझ भी रहे थे लेकिन ये समय ही ऐसा था कि जो भी विराज से बात करने जाता विराज उसी पर नाराज़ हो सकता था।
    सभी चुपचाप बाहर बैठे रानी माँ की सकुशल वापसी का इंतज़ार कर रहे थे।
    
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   आदित्य धीमे कदमों से चलते हुए रेखा के पास पहुंच गया। रेखा की आंखें भरी ही थीं। आदित्य उसके बाजू में बैठ गया। उसके बैठते ही रेखा ने उसे देखा और उसके कंधे पर सर रखे फफक के रो पड़ी। आखिर इतने लोगों के बीच वही अकेला तो उसके मायके का था। रेखा तो अब तक ये भी नही जानती थी कि ठाकुर साहब और उनकी धर्मपत्नी उसके असली माता पिता नही हैं।
   उसे तो आदित्य उसकी बुआ का लड़का ही मालूम था, हालांकि वो भी शादी से पहले कभी भी आदित्य से ज्यादा हिली मिली नही थी। हमेशा अपनी माँ के कड़े निर्देशों का पालन करती वो आदित्य से एक दूरी बनाए रखती थी। लेकिन आज वही पराया सा लगने वाला भाई अचानक कितना अपना लगने लगा था। कहा भी जाता है ससुराल में तो मायके से आया कौंवा भी प्यारा लगने लगता है फिर आदित्य तो उसका भाई था।।
   रेखा के सर पर हाथ फिराता आदित्य चुपचाप बैठा रहा और रेखा उसके कंधे पर सर रखे रोती रही।

” रेखा बाई सा आपसे हम कुछ बात करना चाहतें हैं।”

” हाँ कहिये । “

” नही यहाँ सबके बीच नही। क्या आप बाहर चल सकती हैं? “

  रेखा ने एक नज़र आदित्य की तरफ देखा और उसके साथ बाहर जाने के लिए खड़ी हो गयी। आदित्य ने राजा को देख कर बाहर जाने की अनुमति ली और तेज़ कदमों से बाहर निकल गया। रेखा भी धीरे धीरे उसके पीछे बाहर निकल आयी…

” आपसे कुछ बताना चाहतें हैं। पता नही आप हम पर विश्वास करेंगी भी या नही। “

” कहिये क्या कहना चाहतें हैं।”

  एक गहरी सांस भर कर आदित्य ने ठाकुर साहब की सारी कारस्तानी रेखा को बता दी। सारी बातें सुनती कभी चौंकती कभी आश्चर्य से आँखें फाङती रेखा को जैसे विश्वास ही नही हो रहा था।

  ” हमारी कही एक एक बात सही हैं रेखा बाई सा। आप मामा जी की असली बेटी नही हैं। “

” तो उनकी असली संतान कौन है फिर? “

” ये तो हम नही बता पाएंगे। आपको उतना ही बताया जितना जानना आपके लिए ज़रूरी था। मामा जी ने सिर्फ़ हमारी ज़िंदगी का ही मज़ाक नही बनाया बल्कि आपकी बड़ी बहन और आपके पिता का जीवन भी उन्होंने बर्बाद कर के रख दिया है।

  वक्त और परिस्थितियों के बदलने में वक्त नही लगता। अब तक जो रेखा ठाकुर साहब को पिता समझ उनके जेल जाने से दुखी थी, जिसे सारे महल वासी अपने दुश्मन से लग रह थे अब कुछ ही पलों में अपनी अनदेखी बहन और पिता के लिए ममता से भर उठी।
 
   आदित्य पर भरोसा कर लेने का एक और कारण भी था, उसने बचपन से ही आदित्य को ठाकुर साहब के साथ ही देखा था। आदित्य ने जीवन भर ठाकुर साहब के अलावा न किसी पर विश्वास किया न किसी के साथ काम किया, तो अब अगर वो ऐसा कह रहा कि वो ठाकुर साहब की बेटी नही है तो इसका मतलब ये बात सच ही होगी ।

  उसने तुरंत अपनी माँ यानी ठाकुर साहब की पत्नी को फ़ोन लगाना चाहा लेकिन फिर कुछ सोच कर फ़ोन नीचे रख दिया…

” आपको सबूत चाहिए ना। रुकिए…” ऐसा कह आदित्य ने अपने एक आदमी को फ़ोन लगा दिया। उससे बात कर उसने केसर से बात करने की इच्छा जताई।
  वो आदमी तुरंत केसर तक फ़ोन लेकर पहुंच गया…

” केसर ! कैसी तबियत है अब तुम्हारी ? हम जल्दी ही आने वाले है तुम्हारे पास।  “और फिर थोड़े शब्दों में आदित्य ने वहाँ जो कुछ भी घटा सब सारा केसर को बता दिया..

” पहले से आप सभी को बताने के बावजूद ठाकुर साहब ने वो कर ही लिया जिसके लिए वो यहाँ से भागे थे आखिर।
  सोचो आदित्य कहीं वो गोलियां अजातशत्रु को लग जाती तो क्या होता?
रानी माँ को लगीं ये तो एक तरह से अच्छा ही हुआ। उन्हें तो मर ही जाना चाहिए क्योंकि अजातशत्रु तो उन्हें कोई सज़ा देंगे नही। रही बात ठाकुर साहब की तो उन्हें भी अगर अजातशत्रु की अदालत में पेश किया जाता तो वो उन्हें भी माफ ही कर देता…

” बस बस एक मिनट रुको तो सहीं ।
   केसर यहाँ कोई है जो तुमसे बात करना चाहती है। ” और आदित्य ने फ़ोन रेखा को थमा दिया।

  ” कौन रेखा? हमारी छोटी बहन रेखा ? रेखा हमसे बात करना चाहती है? क्या सच में ? तुमने उसे क्या बताया आदित्य हमारे बारे में ? “

  केसर अपनी रौ में बहती कही चली जा रही थी। बिना ये जाने की दूसरी तरफ उसकी बात आदित्य नही बल्कि रेखा सुन रही थी…
    अपने आप को संभाल कर रेखा ने धीरे से केसर का नाम पुकारा …

” दीदी !”

” कौन ? आदित्य कौन है वहाँ तुम्हारे साथ?”

” हम हैं दीदी सा रेखा !”

एक पल को ये नाम सुनते ही केसर की आंखों से मोतियों की लड़ी बहने लगी। इसी बहन के अच्छे जीवन के लिए, अपने पिता के लिए क्या क्या नही किया उसने।
  और आज वही बहन उसे पुकार रही थी। पर रेखा से किसने कहा दिया कि वो दोनो बहनें हैं।

” रेखा ! कैसी हो? “

” कैसे होंगे दीदी सा? अभी अभी हमें हमारे जीवन की सबसे बडी सच्चाई पता लगी है। हमें तो ये समझ ही नही आ रहा कि हम करें क्या? इस बात पर रोएं कि हम ठाकुर साहब की औलाद नही हैं या इसी बात पर खुश हो रहें। “


” हम समझ सकतें हैं रेखा आपकी हालत।।क्योंकि  हम ऐसी हालत के खुद शिकार हो चुके हैं लेकिन अब क्या कहें।
   हमारी किस्मत ही भगवान ने जाने कैसी सियाही से लिखी है कि हम कहीं के न रहे। समझ में नही आता कि ज़िन्दगी भर गलतियां करते रहे और जब समझ आया कि हम गलत थे और अब सुधारना चाहते हैं तब भगवान ने वक्त ही नही छोड़ा हमारे पास।

” ऐसा क्यों बोल रहीं हैं दीदी सा?”

” हम सच कह रहे हैं रेखा। हमने जीवन भर गलतियां की हैं। अजातशत्रु और बाँसुरी के जीवन में बिना मतलब ज़हर घोलने की कोशिश की हमने। हम तो आज उन दोनों से माफी मांगने के भी काबिल नही हैं।
  हमारे पिता जब अस्पताल में भर्ती थे उस वक्त का लाखों का बिल अजातशत्रु ने चुकाया था ये जानते समझते हुए भी की हमारे ही कारण उनकी पत्नी उनसे अलग हुई थी। जबकि हम आज तक यही सोचते आये थे कि ये सारे अस्पताल के बिल्स ठाकुर साहब ही भरतें आएं हैं।
   पर हम सच कहतें हैं जिस दिन से हमने उस महल में रहना शुरू किया था , हमारे हर खर्च का वहन अजातशत्रु और उसके महल ने किया ।
    आज जब हमें सारी सच्चाई मालूम चल गई है हम राजा अजातशत्रु और रानी बाँसुरी को मुहँ दिखाने लायक भी नही बचे।

   अब तक अपने पिता के जेल जाने के लिए बाँसुरी को गुनाहगार समझती रेखा की आंखें भी अब धीरे धीरे खुलने लगी।

” ठाकुर साहब ने न जाने कितनी दफा राजा अजातशत्रु पर वार किए उनकी जान लेने की कोशिश की , अब ये सब जानने के बाद भी क्या कोई पत्नी होगी जो अपने पति के दुश्मन को छोड़ देगी? उसे तो ठाकुर साहब को गोली मरवा देनी चाहिए थी, लेकिन ये दोनों राजा रानी जाने किस मिट्टी के बने हैं। बाँसुरी ने कायदे से उनके कारनामों के खिलाफ सबूत जमा किये और उन्हें पुलिस के हवाले करना चाहा। अगर उसी समय ठाकुर साहब जेल चले गए होते तो भी ठीक था पर वो वहाँ से भाग गए और एक बार फिर पहुंच गए राजा अजातशत्रु और रानी बाँसुरी को मारने।
   उनका ये प्रयास आज का नही है रेखा। उनकी ये कोशिश तो राजा अजातशत्रु के बचपन से ही चल रही है। अब ये सब जानने के बाद कौन होगा जो उन्हें माफ कर पायेगा।
   इन दोनों ने तो फिर भी बदला लेने की जगह कानूनी रास्ता चुना है।
  तुम्हें एक बात पता है रेखा, ठाकुर साहब ने दुश्मन भी ढेरों पाल रखें हैं। इसलिए जब उनके नाम से समन जारी हुआ तब कहीं उनके दुश्मनों को पता चलने पर वो सब मिल कर उनकी पत्नी और बाकी सदस्यों को नुकसान न पहुंचा दे इसलिए बाँसुरी ने उनकी पत्नी की सुरक्षा के लिए दो पुलिस कर्मी भी लगा दिए हैं।  

   रेखा ने वहीं खड़े खड़े दूर से ही एक नज़र बाँसुरी और राजा को देखा।
  राजा विराज को सहारा दिए बैठा था और बाँसुरी काकी साहेब के पास थी। दोनो ही के चेहरों से चिंता झलक रही थी और ये कोई बनावटी चिंता नही थी।  एक निश्चिन्तता से भरी हल्की मुस्कान रेखा के अधरों पर भी छा गयी।

” दीदी साहेब । अभी हम ससुराल में हैं इसलिए फोन रखतें हैं।।जल्दी ही आयंगे आपसे मिलने। वैसे मिलें तो पहले भी कई दफा हैं लेकिन अब के जो मिलना होगा वो अलग ही होगा हर बार से। “

  ” अपना ख्याल रखना रेखा। “

” जी बाई सा। “

रेखा ने फोन आदित्य को थमाया और धीरे धीरे चलती आगे निकल गयी।
    महल की बाकी औरतों के पास पहुंच वो भी धीरे से बाँसुरी के पास बैठ गयी…

” थैंक यू बाँसुरी ! तुमने जो किया उसके लिए। ”  बाँसुरी ने एक नज़र रेखा को देखा और धीमे से मुस्कुरा कर रह गयी।

   महलवासियो को अस्पताल पहुंचे दो घंटे हो चुके थे और डॉक्टरों की टीम ने अब तक कोई जवाब नही दिया था।
    महाराज के लिए वहाँ बैठना मुश्किल हो रहा था, इसलिए युवराज प्रेम के साथ महाराज को लिए महल वापस छोड़ने चले गए।

   बाकी सभी लोग वहाँ बैठे भगवान से रानी माँ कें जीवन के लिए प्रार्थना कर रहे थे।।
कुछ देर में एक सीनियर डॉक्टर बाहर चले आये, उनके आते ही सभी उनकी ओर दौड़ चले…

   ना में सर हिलाते हुए वो राजा के पास जा खड़े हुए…

” ऑपरेशन कर के गोलियाँ तो निकाल दी हैं हमने राजा साहब, लेकिन अभी भी कुछ कहा नही जा सकता।
   मैं तो यही कहूंगा कि आप इन्हें शहर के किसी बड़े अस्पताल या फिर दिल्ली एम्स ले जाइए। “

” दिल्ली ले जाने की कंडीशन में हैं वो ? “

” नही अभी तो नही हैं लेकिन आप तैयारी रखिये। आज की रात निकल जाए तब कुछ उम्मीद की जा सकती है। आप लोगों को किसी मुगालते में नही रखना चाहता, फिर भी सुबह तक देखते हैं अगर हालत ठीक रहती है तो कल सुबह तक में ले जाएं तो सही रहेगा।

   समर ने तुरंत दिल्ली फोन कर रानी माँ को अगले दिन लाने के लिए बुकिंग कर ली।
  फिर तो आनन फानन सब होता चला गया। उस काली रात के बीतते ही उम्मीदों का सूरज जगमगाया और राजा समर प्रेम और विराज के साथ रानी माँ को साथ ले दिल्ली निकल गया।

  वहाँ डॉक्टरों ने सारी तैयारी कर रखी थी, रानी माँ को तुरंत भर्ती कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया।

   बाँसुरी भी राजा के साथ जाना तो चाहती थी लेकिन जाने क्यों उसकी तबियत उसे सही नही लग रही थी। थकान से उसका चेहरा कुम्हला गया था, और इसीलिये उसकी स्थिति देख राजा ने उसे महल में रहने और आराम करने को छोड़ दिया।

  चार दिन के गहन उपचार के बाद पांचवी रात आखिर रानी माँ ने आंखे खोल दी। रात गहरी बीत चुकी थी , सुबह होने को थी पर कमरे में उजाला नही फैला था। रानी माँ ने धीमे से आंखे खोली तो देखा , उनके पैरों के पास एक आरामकुर्सी में राजा अधलेटा सा सोया पड़ा है। एक दूसरी कुर्सी पर प्रेम सोया था और साथ कि कैंप कॉट में समर हाथ पांव सिकोड़े पड़ा था।
   अपने सामने राजा को बैठे देख उनकी आंखें भर आई ….
   ये रियासत के राजा हैं जिन्हें न अपनी सुविधा का ख्याल है और न अपने ऐशोआराम का। बिल्कुल किसी आम बेटे की तरह जिसकी माँ अस्पताल में पड़ी हो वो अपनी माँ के पलंग के एक तरफ की कुर्सी पर ही सोया हुआ था।
   उन लोगों को देखते रानी माँ के मन में ख्याल आया कि ये तीनों यहाँ है तो बाकी लोग कहाँ हैं?

अपने ज़िन्दगी भर के पाप मन ही मन दोहराती रानी माँ की आंखें भर आईं। उन्होंने करवट लेनी चाही और उस हल्की सी आहट से राजा की आंखें खुल गईं..

” मॉम कैसी तबियत लग रही है अभी ? कुछ चाहिए आपको? “

” हम कहाँ हैं कुमार?”

” आपको लेकर हमें दिल्ली आना पड़ा मॉम। ”

” आप तीनों के अलावा और कौन आया है? “

  राजा इस बात को समझता था कि एक माँ का मन तो अपनी संतान में ही अटका रहता है, और इसी से वो विराज को अपने साथ लेकर आया था।

” विराज भी साथ ही है मॉम। कल दिन भर बहुत थक गया था इसलिए रात में सोने के लिए होटल चला गया! विराट अपने असाइनमेंट के लिए अफ्रीका में था वो भी कल रात पहुंच चुका है, वो भी आराम करने होटल में ही रुक गया।”

” तुम क्यों नही गए कुमार? “

” मैं आपको छोड़ कर कैसे जा सकता हूँ मॉम? “

  रानी माँ अपने बहते आंसुओं के साथ भी मुस्कुरा उठी….

” हमारा अंतिम समय आ गया है कुमार, और अपने इस अंतिम समय में ईश्वर से बस यही प्रार्थना है कि अगले हर जन्म में वो हमें आपकी माँ बनाए। जैसे औरतें हर जन्म में वही पति पाने के लिए करवाचौथ करती हैं काश कोई व्रत उसी संतान को पाने का हो पाता तो हम आपके लिए ज़रूर करते।
  कुमार हम कुछ कहना चाहतें हैं..

” कहना क्या आप आदेश करें मॉम। “

  रानी माँ एक बार फिर मुस्कुरा कर रह गईं

“आपको पता नही लेकिन हमने ज़िन्दगी भर बहुत पाप किये हैं…

  राजा ने आगे बढ़ रानी माँ का हाथ थाम लिया…

” आप ऐसी कोई भी बात नही कहेंगी जिससे अभी आपकी तकलीफ बढ़े मॉम।”
  
   “नही बेटा आपसे सब कह लेने से तकलीफ बढ़ेगी नही बल्कि घटेगी। आप नही जानते हम क्या हैं? “

” मुझे जानना भी नही है मॉम। आप मेरे लिए माँ थी और हमेशा रहेंगी। आप प्लीज़ अभी स्ट्रेस मत लीजिये।

रानी माँ बहुत आराम से बात कर पा रहीं थी , उन्होंने चेहरे पर लगा ऑक्सीजन मास्क भी हटा दिया था..

” देख लो हमें कोई तकलीफ नही है बात करने में। कहतें हैं न दिया बुझने से पहले अपनी पूरी लौ में जलने लगता है , बस वैसा ही कुछ समझ लो। “

” मॉम प्लीज़ ऐसा कुछ मत कहिये। अभी आपको लंबा जीवन जीना है, विराज विराट के बच्चों के साथ खेलना है…

  रानी माँ ने राजा की बात आधे में ही काट दी..

” तुम्हारे  बच्चों के साथ खेलने की तमन्ना ज़रूर अब पैदा हो गयी थी लेकिन वो अब पूरी नही हो पाएगी। हम जानतें हैं बाँसुरी खुशखबरी सुनाने वाली है, अच्छा सुनो अब सबसे ज़रूरी बात जो हम कहना चाहतें हैं वो ये है कि अगर हमारी सच्चाई महाराज या महल के सामने आ गयी तो विराज विराट का कोई सहारा नही रह जाएगा कुमार..

” मॉम आपसे वादा करता हूँ आपकी विराज और विराट की कोई सच्चाई कभी महल या डैड के सामने नही आएगी। आप मुझ पर पूरा भरोसा कर सकती हैं।

” एक आप पर ही तो पूरा भरोसा है कुमार। हमारे जाने के बाद हमारे बच्चे अनाथ न हो जाएं ये ध्यान रखना। आप राजनैतिक कैरियर शुरू करने जा रहें हैं, यूनिवर्सिटी शुरू करने जा रहें हैं… हमारी शुभकामनाएं हैं आपके साथ। बस हमारे लिए एक काम कर देना आप!

” आप हुकुम कीजिये मॉम!”

” विराज को भी राजनीति में अपने साथ रखना कुमार। अब तक बड़े भाई की तरह संभाला है उसे अब हमारे बाद एक माँ की तरह संभालना। वो ज़रा तेज़ मिज़ाज़ का है। जल्दी भड़क जाता है। उसे सही गलत की अब भी पहचान नही है फिर भी उसे कभी अकेला मत छोड़ना कुमार।
   अपनी पार्टी में उसे भी कोई ओहदा देना, यूनिवर्सिटी में भी उसके लिए कुछ रखना कुमार। उससे जिम्मेदारियां भले निभाई न जाएं लेकिन पद का लालच तो है ही उसके मन में।
  हो सकता है आपके साथ रहते रहते वो भी अपनी जिम्मेदारियां समझ जाएं।
विराट की हमें चिंता नही है,हम जानतें हैं उसे प्रकृति और रंगों से प्यार है और वो उसी में अपनी ज़िंदगी के रंग भी ढूंढ लेगा।
   लेकिन विराज विराट से बहुत अलग है। विराज को सत्ता की पावर की भूख है। राजगद्दी नही संभाल पाया इस बात के लिए उसके अंदर मलाल भी है। इसलिए उसे अपने साथ किसी महत्वपूर्ण पद पर रख लोगे तो उसे थोड़ी खुशी और हमारी आत्मा को संतुष्टि मिल जाएगी कुमार।

  राजा ने मुस्कुरा कर उनके हाथों को अपने हाथों से थपकी देकर उन्हें आश्वासन दिया..

” आप निश्चिन्त रहें मॉम , आप नही भी कहतीं तब भी विराज के लिए एक सीट थी ही मेरे पास। वो हम सब के साथ चुनाव लड़ेंगा और जीतेगा भी। अब उसे सदन तक पहुंचाना मेरा काम है। और एक वादा करता हूँ, अब तक यूनिवर्सिटी का काम अपने सर ले रखा था मैंने। लेकिन मैं खुद इतनी जिम्मेदारियां नही उठा पाऊंगा तो अबसे यूनिवर्सिटी की सारी जिम्मेदारी विराज की हुई।
  वही विश्वविद्यालय का कर्ता धर्ता होगा। बीच बीच में मैं और बाँसुरी भी देखते रहेंगे।
  
  अब आप आराम कीजिये मॉम मैं डॉक्टर को इत्तिला कर दूं कि आपको होश आ गया है। ”

  रानी माँ के माथे को चूम उनका हाथ धीमे से उनके बिस्तर पर रख  उसने उनके बेड के बगल में लगा अलार्म बजाया और फिर ये सोच कर की कहीं सिस्टर और डॉक्टर सो न रहें हों खुद उन्हें बुलाने बाहर निकल गया।

   डॉक्टरों के साथ राजा लौट कर आया तब तक में रानी माँ ने वापस अपनी आंखें मूंद ली थीं।
   डॉक्टरों ने आते ही उनकी जांच शुरू कर दी। उनके हाथ को थामे एक डॉक्टर उनकी नब्ज़ जांच रहा था, उसने दो बार जांच करने के बाद अपने साथ के डॉक्टर के कान में कुछ कहा और टॉर्च लिए रानी माँ की आंखें खोल देखने लगा..
   अब तक में प्रेम और समर भी जाग चुके थे…..
  डॉक्टरों की टीम ने जो जो हो सकता था कर के देख लिया और राजा की तरफ देख ना में सर हिला दिया…

” सॉरी राजा साहब! रानी माँ को बचाया नही जा सका। वी आर वेरी सॉरी!!”


राजा उनकी बात सुन चौन्क गया…

” अरे पर ये हुआ कब? मैं अभी पांच मिनट पहले ही तो आप लोगों को बुलाने निकला तब तक तो…

” जी वाईटल्स चेक करने पर लग रहा है रानी माँ की डेथ एक से डेढ़ घंटे पहले ही हो चुकी थी।

” क्या ? लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है?

राजा ने रानी माँ के चेहरे की तरफ देखा, उनके चेहरे पर से सिस्टर ने ऑक्सिजन मास्क हटा दिया था। मुहँ में डाली रॉयल्स ट्यूब नाक में डाली गई ट्यूब सब निकाला जा रहा था, और रानी माँ को देखता खड़ा राजा इसी सोच में डूबा था कि पिछले एक डेढ़ घण्टे से तो वो रानी माँ से बात कर रहा था। और उस समय उसने इस बात पर ध्यान ही नही दिया कि रानी माँ के मुहँ नाक में कोई पाइप नही था, ऑक्सीजन मास्क तो उन्होंने खुद हटाया था।
   पर अगर डॉक्टर के अनुसार उनका देहांत एक डेढ़ घंटे पहले ही हो गया था तो वो अब तक क्या रानी माँ की आत्मा से बातें कर रहा था, या फिर कोई सपना देख रहा था जिसमें उसे आगे क्या करना है कैसे करना है का मार्गदर्शन देने रानी माँ चली आयीं थीं।

  वो हैरान परेशान सा एक कुर्सी में ढह गया। अब तक समर और प्रेम ने महल और विराज विराट को फोन कर सूचना दे दी थी।

      महल में रानी माँ के देहावसान की खबर मिलते ही उनकी अंतिम यात्रा की तैयारियां शुरू हो गईं थीं।
  विराज विराट तुरंत ही अस्पताल पहुंच गए थे । रानी माँ के शरीर को महल वापस ले जाने की तैयारी में समर और प्रेम जुट गए थे।
  विराज विराट एक दूसरे का सहारा बने एक दूसरे को संभाले खड़े थे और राजा सबसे अलग एक किनारे की कुर्सी पर बैठा रानी माँ के बारे में ही सोच रहा था…

  ” भले ही दुनिया वालों की नज़रों में आप गलत होंगी मॉम लेकिन मैं जानता हूँ आपने अपनी पूरी ज़िंदगी सिर्फ अपने बच्चों को कुछ बनाने में लगा दी। क्या कोई माँ अपने बच्चों के लिए इतना भी कलप सकती है कि मौत से भी इजाज़त लेकर चली आयी अपने बच्चे के लिए अर्जी लगाने।
  आप जहाँ कहीं भी हैं मॉम आपसे राजा अजातशत्रु का वादा है विराज को सिर्फ टिकट ही नही दिलाऊंगा बल्कि उसे जिता कर भी रहूंगा। आप निश्चिंत होकर महाप्रयाण पर निकलिए , आप ने जो जैसा कहा है वो सारे अधिकार आज से विराज के हुए। उसे कभी किसी कीमत पर अकेला नही छोडूंगा। “

  अपनी लाल लाल आंखों से खिड़की से बाहर दूर आकाश को देखते राजा अजातशत्रु की आंखों से ऑंसू बह चले, तभी आकर किसी ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया।
   राजा ने पलट कर देखा , सामने विराज खड़ा था।

  राजा उससे गले लग सिसक उठा।
दोनों भाई एक दूसरे को सहारा दिए रोते रहे, पास खड़ा विराट भी उन दोनों के गले से लग गया…..

क्रमशः


लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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