जीवनसाथी- 105




     जीवनसाथी –105



    आप पर हत्या के प्रयास का आरोप है मैडम। मैडम आप भी जानती है। कि हम सब आपको कितना सम्मान देते हैं।
   आपको इस तरह साथ लेकर जाते हुए अच्छा नही लग रहा मैडम लेकिन कानून आप भी जानती हैं और हमसे ज्यादा अच्छे से जानती हैं, इसलिए अगर आप।खुद चलेंगी तो ज्यादा सुविधा हो जाएगी….अभी आपको पूछताछ के लिए ही लेकर जा रहे हैं। ए सी पी से एक बार आपकी मुलाकात हो जाये बस उसके बाद देखते हैं।

” ठीक है!  पर क्या मैं एक बार अपने वकील से बात कर सकती हूँ?

  पुलिस वाले कि  इजाज़त मिलते ही बाँसुरी ने तुरंत समर को फ़ोन लगाया ……
     लेकिन बताती क्या, उसे खुद सारा मामला पता नही था……..

  समर के फ़ोन उठाते ही बाँसुरी ने झट पट उसे पुलिस का आना और बाकी बातें बता दी। बाँसुरी ने फ़ोन पुलिस वाले को देने कहा। पुलिस वाले ने फ़ोन ले लिया…

” क्या हुआ ? ” पुलिस वाले कि झुंझलाहट भरी आवाज़ सुन समर भी झुँझला उठा…

” आप पूरी बात बताए बिना हुकुम को हाथ भी नही लगा सकते। आप जानते हैं ना वो ए डि एम हैं वहाँ की। और वैसे भी रात के वक्त किसी भी महिला को आप थाने नही ले जा सकते? “

” जानतें हैं सर । लेकिन हमें भी तो हमारी ड्यूटी करनी है। ठाकुर साहब यहाँ के प्रतिष्ठित लोगों में से हैं। मैडम ने उन पर हाथ डालने की कोशिश की है। इसीलिए इन्हें तलब किया गया है।”

” लेकिन उसके सारे सबूत हैं मैडम के पास जो उन्होंने जमा भी करवा दिए हैं, फिर ? अब क्या कानून भी बस इसलिए रह गया है कि प्रतिष्ठित परिवारों की जी हुजूरी करे।

” सर बात ये है कि ठाकुर साहब की पत्नी की लाश मिली है , लाल टिब्बा के पास। उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ है वहाँ। और उनके फ़ोन पर आखिरी कॉल बाँसुरी मैडम की ही थी। शक की बिनाह पर उन्हें ले जाया जा रहा है।

पुलिस वाले ने फोन कट कर बाँसुरी के हाथ में दिया और बाँसुरी को साथ लिए बाहर निकल गया।
  बाँसुरी खुद हैरान थी,की ये क्या हो गया ? उसे कुछ दो घंटे पहले ठाकुर साहब की पत्नी का फ़ोन आया तो था। उन्होंने खुद उसे फ़ोन लगाया था। वो बार बार ठाकुर साहब के ऊपर लगाए इलज़ाम हटाने की बात कह रहीं थीं।
  बाँसुरी ने उन्हें कानून की बातें समझाने की कोशिश भी की लेकिन बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे वो रटी रटाई बातें कहती जा रहीं हैं, वो किसी की कुछ सुनना ही नहीं चाहतीं हों। अपनी बात कहते हुए वो लगातार बाँसुरी पर इल्जाम भी लगाए जा रहीं थीं और फिर अचानक ही उन्होंने फ़ोन काट दिया था।

   बाँसुरी थाने पहुंची ही थी कि राजा का फोन आ गया….

” ये क्या हो गया बाँसुरी? तुम घबराना मत। मैं बस यहाँ से तुरंत निकल रहा हूँ।”

  राजा की आवाज़ सुनते ही बाँसुरी का गला भर आया पर जिले भर की कलक्टरनी वहाँ पुलिस थाने में बैठ के रोये शोभा देता है क्या?
   मन में ऐसी दुख अवसाद की लहर सी उठी लगा किसी ने उसके हृदय को अपनी मुट्ठी में बंद कर मसल दिया हो।
   एक तो राजा से बिना मन के उसे दूर आना पड़ा उसपर शारीरिक अस्वस्थता और उस के ऊपर ये खून का इल्जाम।
   उसके बिल्कुल समझ से बाहर था कि आखिर हो क्या रहा है?

” मैं ठीक हूँ साहेब। बस आप आ जाइये तो फिर यहाँ भी सब ठीक हो जाएगा। “

“मैं समर को लेकर निकल ही गया हूँ। “

” पर आप अपनी गाड़ी से आएंगे तो उसमें तो बहुत वक्त लग जायेगा। ” बाँसुरी रुआँसी हो गयी…

” बाबू हमारे पास हमारा अपना चॉपर भी तो है। बीच बीच में भूल जाती हो क्या की रियासत की रानी भी हो कलेक्टर होने के साथ साथ।

“बस आप जल्दी आ जाईये साहेब। यहाँ अच्छा नही लग रहा मुझे।।”

   ” लीजिये मैडम पानी पी लीजिये।” पुलिस वाले ने बाँसुरी के सामने पानी का गिलास रख दिया। पहले भी एक दो बार काम के सिलसिले में बाँसुरी उस से मिल चुकी थी।
    बाँसुरी ने थक कर पानी का गिलास उठा लिया…

” मैडम आप आराम से बैठिये अभी साहब आ रहे हैं फिर वो आपसे बात कर लेंगे। “

  हम्म बोल कर बाँसुरी नीचे सर किये बैठी अपने फोन को देखती रही कि, बाहर से किसी के आने की आहट हुई। तेज़ कदमों से बूट्स खटकाते आई पी एस की अगुआई में सभी पुलिस वाले सतर खड़े हो गए।
   बाँसुरी भी सबको देखती खड़ी होने ही जा रही थी कि उसके सामने यूनिफॉर्म में लीना खड़ी थी…

   बाँसुरी के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान चली आयी। लीना ने उसे देखने के बाद एक नज़र बाकियों को देख कर बाहर जाने का इशारा कर दिया।
   सबके बाहर जाते ही लीना ने आकर बाँसुरी को गले से लगा लिया….

” तू कहाँ थी लीना?  और तेरा तो आई ए एस में ही हुआ था ना? कितनी कोशिश की तुझे ढूंढने की!”

” चल झूठी! कहाँ से ढूंढने की कोशिश की तूने। किसी सोशल साइट पर तो तू है नही, उल्टा तुझे ढूंढना मुश्किल है बहुत। “

” ये बता तू यहाँ कैसे?  बाँसुरी के सवाल पर लीना मुस्कुरा उठी…

” यार रैंक के हिसाब से आई ए एस कैडर ही मिल रहा था पर मैंने आई पी एस चुना। पता नही क्यों लेकिन प्रशासन में बैठ कर काम करने से ज्यादा मुझे लॉ एंड ऑर्डर के लिए काम करने का मन था। पहली पोस्टिंग तो बड़ी तूफानी मिली थी, बस्तर के बीहड़ों में। मुश्किल से साल भर काम किया कि वहाँ के हुक्मरानों को मेरा काम अखर गया और मुझे कालाहांडी भेज दिया। वहाँ के जंगलों की कटाई पर रोक लगाने के कारण सिर्फ छै महीने में वहाँ से उठा कर यहाँ भेज दिया गया है।
   वैसे भी हमारी लाइफ कहाँ स्टेबल रहती है। आज यहाँ तो कल वहाँ। दो साल से ज्यादा कहीं वैसे भी कहाँ टिक पातें हैं। और मान लो कोई ईमानदार ऑफिसर हुआ तो साल छै महीने में ही बोरिया बिस्तर बांन्ध लो भैया।
   इसी बीच माँ की तबियत बहुत बिगड़ी गयी थी। उनकी चाह थी कि उनकी नज़रों के सामने ही उनकी।किसी बेटी की तो शादी हो ही जाए तो मेरी छोटी बहन के लिए लड़का ढूंढा उसकी शादी निपटाई। फिर भाई की पढ़ाई भी पूरी हो गयी थी उसने भी अब नौकरी कर ली है। इसी सब में व्यस्त हो गयी थी यार, लेकिन तुम यारों की बहुत याद आती थी। हमारी दिल्ली की तैयारियां, लब्सना की ट्रेनिंग सब कुछ बिल्कुल गोल्डन वर्ड्स में जैसे छप कर रहा गया है दिलो दिमाग में।
  तू बता तेरे क्या हाल चाल हैं? और ये सबसे बड़ी बात मर्डर किसका कर बैठी तू? “

” यार कितना कैजुअल बोल रही है मर्डर ! जैसे तेरा रोज़ का काम है? “

” हाँ तो ये मेरा रोज़ का ही काम है हर हाईनेस। अब बता क्या मैटर है? “

” पता नही यार! मुझे खुद कुछ समझ नही आ रहा। ये सब ठाकुर साहब के चक्कर में हो रहा है या किसी और का काम है? “

“हम्म । ये ठाकुर पंगेबाज भी बहुत है। हुकुम से तो तो इसकी कभी नही जमी..”

” तुझे भी पता है ये सब..!

” तू भूल मत, दिल्ली में हुकुम ने मुझे तेरी बॉडी गार्ड नियुक्त कर रखा था, उस समय समर से काफी बातें पता चली थी। खैर !!!
   अभी मेरी बात ध्यान से सुन, मैंने ही तुझे बुलवाया है यहाँ। क्योंकि सारी बात जानने के बाद मुझे लगा कि तेरा अकेला रहना सुरक्षित नही है । “

” क्या ? लेकिन क्यों ? “

“रुक मैं सारी बात बताती हूं। ठाकुर साहब की पत्नी आज शाम किसी काम से अपने घर से निकली थीं। शाम गहराने के बाद एक मोड़ पर उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ और वो उसमें मृत पायी गयीं।
  वो पिछले कुछ दिनों से तुमसे ही बात कर रही थीं तो इसलिए एक भौंडी सी कल्पना कथा के अनुसार तूने चिढ़ में आकर उन्हें  मार दिया , ठाकुर साहब से बदला लेने के लिए। हालांकि इस बात का कोई सेंस नही बनता।
   लेकिन मुझे ये लगा कि एक तरफ ठाकुर साहब जेल में हैं दूसरी तरफ उनकी पत्नी की हत्या हो जाने से उनके चेले चपाटे कहीं तुझे नुकसान पहुंचाने न पहुंच जाए,इसलिए तुझे यहाँ बुलवा लिया। और कोई तरीका नही दिखा फिलहाल तुझे इस सब से बचाने का।
   और एक बात कानून की नज़र से देखें तो उनके फ़ोन पर तुझसे बात होने के अलावा और कोई सबूत तेरे खिलाफ नही बन रहा है। इसलिए कोई डर की बात नही है। फिर मैं यही कहूंगी की तू कुछ दिनों के लिए छुट्टी लेकर घर चली जा।”

” नही लीना, छुट्टियां ले लेकर वक्त बिताने के लिए थोड़े न जॉइन किया है। अब तो जो हो जाये इन लोगों से बिना डरे और बिना हारे काम करना है , बस।

लीना ने उन दोनों के लिए चाय मंगवा ली। बाँसुरी से वैसे भी कुछ खाया नही जा रहा था।

लीना से मिलने और बातें करने के बाद अब बाँसुरी काफी रिलैक्स लग रही थी…
  दोनों चाय पीती पुरानी यादों में खो गयीं।


*******

   निरमा सारा काम निपटा कर कमरे में आई तब प्रेम मीठी को किसी किताब से कोई कहानी पढ़ कर सुना रहा था।
    पलंग पर टिक कर बैठे प्रेम के ऊपर ही मीठी सोई हुई थी।
  उन दोनों को ऐसे देख निरमा के चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान चली आई…..

” सो चुकी है मीठी!”

प्रेम एक हाथ से मीठी का सर सहलाता कहानी पढ़ता जा रहा था। निरमा की बात पर उसका ध्यान गया कि मीठी तो वाकई सो चुकी है। उसने धीमे से उसे खुद पर से उठा कर नीचे लेटा दिया।

  तब तक में निरमा प्रेम के पास चली आयी..

” अब मेरी पारी है। ” शरारती आंखों से प्रेम को देखती निरमा को देख प्रेम ने किताब एक तरफ रख कर बाहें खोल दी..

  प्रेम की बाहों में सिमटती निरमा मुस्कुरा कर कुछ समय के लिए खामोश सी हो गयी..

  ” मुझे समझ में नही आता कि राजा भैया और बाँसुरी की मुसीबतें कब कम होंगी। “

” क्यों क्या हुआ? “

प्रेम के सवाल पर निरमा उसे देखने लगी..

” अब देखिए न इतने दिनों बाद दोनों कुछ दिनों के लिए साथ हुए भी तो चैन से रह नहीं पाए। पहले दादी साहब की तबियत बिगड़ी और फिर रानी माँ का अचानक ऐसे चले जाना। कुछ सम्भल पाता कि बाँसुरी को वापस अपने काम पर जाना पड़ गया। “

” हम्म ! पर वो भी क्या कर सकती हैं । जाना तो पड़ता  ही ना? “

  निरमा पास में ही लेटी मीठी को देखने लगी…

” समय का पता ही नही चलता न। अभी लगता है कल ही तो मीठी पैदा हुई थी और अब देखो ठुमक ठुमक कर अपने स्कूल जाने लगी।

“मेरा तो मन ही नही था कि मीठी को कहीं बाहर भेजूं लेकिन तुम्हारी ज़िद की वजह से इतनी छोटी बच्ची को स्कूल भेज रहा हूँ।”

  मुस्कुरा कर निरमा प्रेम को देखने लगी…

” इतने क्यूट हो न आप!! मेरी ज़िद के कारण स्कूल भेजा। आपका बस चले तो अनपढ़ ही रह जायेगी मेरी बेटी। आप उसे और मुझे कहीं जाने ही नही देंगे।।

” ज़रूरत भी क्या है तुम्हें कहीं जाने की? “

” हम्म रुपये पैसों से तो ज़रूरत नही है। लेकिन घर पर बैठे अब बोर हो जाती हूँ। अब तो मीठी भी थोड़ी बड़ी हो गयी है वो भी खुद में व्यस्त रहती है…

” तो ? नौकरी करना चाहती हो ? “

  निरमा ने प्रेम की तरफ देखा .. उसे लगा पता नही कहीं प्रेम नाराज़ न हो जाये…

” हाँ चाहतीं तो हूँ, लेकिन आप नही चाहेंगे तो नही भी करुंगी। ऐसी कोई बड़ी बात नही है। “

” कर लो जॉब! मैंने कब मना किया ? “

” सच्ची !”

” हाँ भई। बिल्कुल कर सकती हो जॉब, बस ये ना हो कि कुछ दिनों में थकान से परेशान हो कर मेरी मीठी को डांटना फटकारना शुरू कर दिया। अपने काम की टेंशन को मीठी पर उतारने लगीं।”

” नही परेशान मत होइए, मीठी पर तो नाराज़गी कभी ज़ाहिर नही करूँगी। नाराज़गी दिखाने के लिए मेरे पास मीठी के पापा हैं ना। ”

  आंखें बंद किये निरमा की बात सुनते प्रेम ने झट आंखें खोल दी…” अच्छा तो इसलिए हूँ मैं। गुस्सा दिखाने, झगड़े करने। है ना। अभी बताता हूँ। ”  बोल कर प्रेम ने निरमा को बाहों में कस लिया

” प्यार नही करता हूँ ?है ना !”

” मैंने कब कहा कि आप प्यार नही करते, एक उसी काम में तो एक्सपर्ट हैं आप !”

” अच्छा बेटा , तो आओ फिर बहुत दिन से अपनी एक्सपर्टीज चेक नही की मैंने। “

” झूठे !

” और क्या सच तो बोल रहा हूँ। तुम्हें आजकल फुरसत ही नही होती है। जाने अपनी डायरी में घुसी क्या लिखती रहती हो। “

  निरमा को ज़ोर से हंसी आ गयी…

” आ गए घूम फिर के डायरी में। मैंने पढ़ने क्या नही दी आप हाथ मुहँ धो कर मेरी डायरी के पीछे ही पड़ गए हैं। अरे डायरी पर्सनल होती है। उसे लिखने वाले के अलावा कोई नही पढ़ता,तभी तो उसमें मन की बातें लिखी जा सकती हैं।”

” मन में कोई और है क्या ? “

” नही तो!”

” तो जब मन में भी हम हैं तो मन की बातें पढना हमें अलाऊ क्यों नही है भला?”

” मुझे शर्म आती है। पता नही मेरा लिखा पढ़ कर आप क्या सोचेंगे। “

” हर बात पर तो तुम्हें शर्म आती है निरमा। बात बात पर शरमा कर गुलाबी हो जाती है। लेकिन बहुत खूबसूरत लगती हो शरमाती हुई। ”

  निरमा ने पलकें झुका लीं …

” ये लो तुम तो फिर ऐसे शरमाने लगीं जैसे मैंने मीठी का भाई लाने की फरमाइश कर दी हो…”

  प्रेम के सीने पर सर रखे लेटी निरमा की पीठ पर उसकी सरकती उंगलियों को महसूस करती निरमा ने चेहरा उठा कर प्रेम को देखा और मीठी सी झिड़की दे दी…

” कहें या न कहें आप, हरकतें तो वहीं रहतीं हैं हमेशा।”

” अब कौन सी हरकत कर दी मैंने।”

” अपनी उंगलियों से पूछिए! कहाँ चल रहीं हैं।

” अरे उंगलियों की वहीं जाने। तुम्हें देखते ही फिर मेरे काबू में नही रह जातीं हैं।

  झटके से प्रेम उठ गया, और निरमा को गोद में उठाये कमरे से बाहर निकल गया।

” अरे रुकिए एक बार मीठी को देख तो लूँ सोई भी है या नही।”

  जाते जाते एक बार प्रेम पलटा और मीठी को गहरी नींद में सोए देखा निरमा को गोद में लिए ही बाहर निकल आया..

  दोनो एक दूसरे को देखते एक दूजे में खोए जा रहे थे कि प्रेम का फ़ोन बजने लगा….
   प्रेम ने एक नज़र फ़ोन पर डाली , फ़ोन समर का था..

” समर की टाइमिंग भी बड़ी खतरनाक है! खुद तो शादी कर नही रहा और हम जैसों को …

  बोलते बोलते ही प्रेम ने फोन उठा लिया…

” प्रेम सो तो नही गए थे ना?”

” नही , नही सोया था । बोलो समर क्या बात है? “

” अभी के अभी दून निकलना होगा। मैं और हुकुम जा रहें हैं। तुम भी अपना थोड़ा सामान रख लो। अपनी गाड़ी से मत निकलना, हम लोग तुम्हें ले लेंगे। “

” हुआ क्या है ? रानी सा तो ठीक हैं? “

” रानी साहब को पूछताछ के लिए पुलिस थाने ले गयी है, मर्डर हुआ हैं वहाँ?

” किसका ? ” प्रेम चौन्क कर अपनी जगह से उठ कर खड़ा हो गया..

” ठाकुर साहब की धर्मपत्नी का। मेरे खबरी लगें हैं सब पता करने में । तुम रेडी हो जाओ। दस मिनट में हम लोग पहुंच रहें हैं।

” ठीक है!”

बिना ज़रूरत की बातें करना प्रेम को कभी भी पसन्द नही था। कब हुआ मर्डर , क्यों हुआ मर्डर जैसी फ़िज़ूल बातें जिनको पूछने से भी सामने वाला जवाब नही दे पाएगा जानते हुए भी ऐसे अवसरों पर लोग आपा खो कर ऐसे सवाल अमूमन कर ही जातें हैं लेकिन प्रेम इन्हीं बातों में सबसे अलग था।
  काम की बात के अलावा वो कभी किसी बकवास में अपना वक्त जाया नही करता था।

  उसने तुरंत ही एक नम्बर पर कॉल किया और इस मर्डर से जुड़ी बातें पता करने को कह दिया।
   फ़ोन रखने के बाद अपना सामान रखने को बोलने उसने निरमा की तरफ देखा, उतनी देर में निरमा उसका बैग पैक कर वहाँ ला चुकी थी।
   अपना बैग देख वो मुस्कुरा कर आंखों ही आंखों में निरमा को आभार प्रकट कर गया…

” कैसे सब समझ जाती हो?”

” फ़ोन में होती बातें सुन ली थी न इसलिये वक्त जाया किये बिना फटाफट आपका सामान पैक कर दिया, आप जाइये तैयार हो जाइए,मैंने कॉफी के लिए दूध भी चढ़ा दिया है। “

  मुस्कुरातें हुए प्रेम ऊपर सीढियां चढ़ने लगा कि अचानक उसे कुछ याद आया और वो पलटा ही था कि उसके पहले ही निरमा बोल उठी..

” हाँ मुझे पता है आप बिना नहाए घर से नही निकलते चाहे जिस वक्त भी निकलें इसलिए आपका टॉवेल और साफ कपड़े बेड पर रख दिये हैं..

अपने बालों में हाथ फिराता प्रेम फटाफट ऊपर चला गया।

  दस मिनट बाद प्रेम राजा और समर के साथ दून के लिए चॉपर में बैठ चुका था।


*******

  रेखा का मन बदला हुआ सा था तो उसे इस बार मायके में भी सभी का व्यवहार बदला बदला सा लग रहा था।
   उसे अपने बचपन की सारी बातें याद आ रहीं थीं। वो मानती थी कि उसे ठाकुर साहब और उनकी पत्नी यानी उसके माँ बाप ने बहुत ज्यादा लाड़ प्यार दिया, लेकिन वही लाड़ उसे प्यार से ज़िम्मेदारियों को सिखाने की जगह अकड़ और स्वायत्तता दे गया।
   बचपन में गैर जरूरी चीजों की मांग को भी पूरा कर उसके सामने इस तरह दूसरे बच्चों को बेइज़्ज़त किया जाता कि उसे खुद में एक गलत तरह का अभिमान और आत्मसंतुष्टि आने लगी कि वो जो मांगती है जो करती है वो सब सही है। और उसके अलावा हर कोई गलत है।
   इसी अभिमान ने उसे ज़रूरत से ज्यादा घमंडी और नकचढ़ी बना दिया।
   हमेशा गुड्डे गुडियो की फरमाइश करने वाली रेखा ने कब इंसानों को भी अपने हाथ की कठपुतली समझना शुरू कर दिया वो खुद नही समझ पायी।

    रोहित से हुई पहली मुलाकात के बाद जब उसकी सबसे अच्छी दोस्त ने एक शाम बनारस के घाट पर उसके और बाकियों के सामने रोहित को पसन्द करने की बात रखी तब उसी ज़िद में कि उसके रहते कैसे कोई स्मार्ट लड़का किसी और लड़कीं को चुन सकता है उसने रोहित से दोस्ती बढ़ाई और उसे पाने की ज़िद में सारी हदे पार कर दीं।
     लेकिन उसकी हर कमी को उसकी हर मूर्खता को अपने पैसों की छांव से ढकते ठाकुर साहब ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।

  जब कभी इंसान को कोई ऐसी सच्चाई पता चले जिसके बारे में वो आज तक अंधकार में था , उसके बाद वो खुद से जुड़े हर सच को उस नए सच से ढाँक कर देखने लगता है।

  ठाकुर ठकुराइन के प्यार को भी अब रेखा इसी नज़र से देख रही थी कि क्या अगर वो उनकी खुद की औलाद होती तो वो लोग उसे इस कदर बिगाड़ कर रखते?
    आदित्य उनकी सगी बहन का लड़का था इसी लिए उसे कितना पढ़ाया लिखाया और इस काबिल बना दिया कि वो अपने पैरों पर खड़ा हो सके और वो चूंकि गोद ली हुई बेटी थी इसी से न उसे ढंग से पढ़ाई लिखाई का महत्व सिखाया और न ही कोई और काम का काम।

  अपने विचारों में उलझी रेखा जब उस जगह पर पहुंची जहाँ आदित्य ने उसे बुलाया था , वहाँ आदित्य पहले ही उसका इंतजार कर रहा था।
   रेखा को देखते ही वो उसकी गाड़ी की तरफ बढ़ गया..

” रेखा बाई सा अगर आपको अपने साथ लेकर आता तो घर पर किसी को भी शक हो सकता था। क्योंकि हम दोनों पहले कहीं साथ गए नही न। इसलिए आपको ड्राइवर के साथ अकेले आने कहा। दूसरी बात मामी जी की नज़र बड़ी तेज़ है। घर से निकलते वक्त मुझसे भी बड़ी पूछताछ की थी उन्होंने। “

” हम्म हम समझतें है आदित्य भैया। चलिए हमारी बहन कहाँ हैं ? हम मिलना चाहतें हैं उनसे।”

” आइये हमारे साथ!”

ड्राइवर को वहीं छोड़ रेखा और आदित्य पैदल ही निकल गए। रेखा अपने बेटे को घर पर ही छोड़ कर आई थी, वो उन पहाड़ियों के ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर आदित्य के साथ चली जा रही थी इस बात से बेखबर की उसकी माँ उसका पीछा कर रही थी।

   एक पुराने से गोदाम में आदित्य घुस गया। उसके पीछे ही रेखा भी चली गयी।
  बाहर से उजड़ा सा वीरान दिखने वाला गोदाम अंदर ठीक ठाक ही था।
   एक लिफ्ट में प्रवेश कर आदित्य उसे साथ लिए बेसमेंट में चला गया।
   बेसमेंट आश्चर्य जनक रुप से साफ सुथरा और सुसज्जित था। हॉल में आदित्य के दो तीन लड़के थे, उनसे इशारों में कुछ बात कर आदित्य एक कमरे की तरफ बढ़ गया।
  
  “ये सब मेरे आदमी हूं। केसर चूंकि बहुत कुछ जान चुकी थी इसलिए ठाकुर साहब के आदमियों से उसे बचाने के लिए  मुझे उसे ऐसे यहाँ रखना पड़ा। उसका ज्यादा वक्त अस्पताल में रहना भी सुरक्षित नही था। ”

  कमरे का दरवाजा खुलते ही रेखा भाग कर भीतर चली गयी…
   केसर ने दरवाज़े की आहट पर आँखें खोल दी।केसर की हालत देख रेखा रो पड़ी…

” बाई सा हमें माफ कर दीजिए। हम आज तक आप हमारी बहन हैं यह  कैसे नही जान कर समझ पाए?

  रेखा आगे बढ़ केसर के गले से लग गयी…
दोनो बहनों की आंखों से गंगा जमना बरस पड़ी । जाने कितनी शिकायतें कितने शिकवे उन ऑंसूओं में धुलते बहते रहे।

  उन दोनों को नही पता था कि ठकुराइन उन्हें बाहर से देख रही है।

” तो आखिर ये कारण था जिसकी वजह से तुम ऐसी गुमसुम हो गईं थीं। “

  ठकुराइन को एकदम से सामने देख वो दोनो चौन्क गयीं…

” मम्मी आप यहाँ? ” रेखा उन्हें देखते ही बौखला गयी। लेकिन वो रेखा को अनदेखा कर आदित्य को ढूंढने लगी। और आदित्य पर नज़र पड़ते ही वो उस पर बरस पड़ीं।

” दिखा ही दिया न अपने गंदे खून का असर! आखिर चैन नही पड़ा तुझे। खुद तो जन्मते ही अपनी माँ को खा गया। उस पर पाल पोस के बड़ा करने वाले ठाकुर साहब के लिए भी हमेशा मनहूस ही बना रहा। जबसे उनके जीवन से जुड़ा वो भी कहाँ चैन से बैठ पाए। हमेशा कही न कहीं उनका पैर उलझा ही रहा।और अब जब उनके आराम करने की उम्र आयी उन्हें दाखिल जेल करवा दिया। शर्म नही आती तुझे। पाखंडी कहीं का। मेरी नज़रों से दूर हो जा। ठाकुर साहब को तो दूर किया ही अब इस रेखा को भी जाने क्या पट्टी पढ़ा दी कि वो यहाँ इतनी दूर इस लड़कीं से मिलने चली आयी।”

  आखिर केसर से नही सुना गया। ठकुराइन तो और भी जाने क्या क्या कह जातीं उसके पहले ही केसर ने उन्हें बीच में ही टोक दिया…

” आदित्य पर गलत इल्ज़ाम लगाना बंद कीजिए ठकुराइन। ठाकुर साहब जिन भी मुश्किलों में फंसे रहे हैं वो अपने स्वार्थ और मक्कारी के कारण। हमें नही लगता कि आपको उनका स्वभाव याद दिलाने की हमें ज़रूरत भी है। हमसे कहीं ज्यादा तो आप उन्हें जानती हैं और अगर नही जानती तो हम उनके कारनामे आपको बताए देते हैं। “

” हम कुछ नही सुनना चाहते। ये जो एहसान फरामोश लड़कीं यहाँ खड़ी है जिसे कभी बड़े प्यार से हमने अपनी गोद में समेट लिया था आज हमसे छिप कर अपनी सगी बहन से मिलने आई है। वाह !!!
   इसे ही तो कहतें हैं कि खून अपना असली रंग ज़रूर दिखा देता है। ठाकुर होती , हमारा खून होती तो क्या इस तरह इस कठिन समय में हमें छोड़ अपनी बहन को ढूंढती फिरती। बल्कि इसे तो हर हाल में हमारा साथ देना चहिये था। आखिर अपनी नीचता दिखा ही दी।

” मम्मी प्लीज़ ! ये सब क्या कह रहीं है आप। आपसे किसने कहा कि हम आपको और पापा साहेब को छोड़ कर कहीं जा रहें हैं। बस सारी सच्चाई पता चलने पर हम एक बार अपनी बहन से मिलना ही तो चाहते थे, उसमें ऐसा क्या गलत हो गया। वही बहन जो हमारे जीवन को खुशहाल बनाने अपने जीवन को नरक बना गयी क्या उससे एक बार मिल कर उसके गले लग कर आभार व्यक्त कर देने से हम नीच हो गए। हमने अपना असली खून दिखा दिया? ये कैसी बातें कर रही हैं आप?

“बिल्कुल सहीं कह रहे हैं हम। अगर हमारा अपना खून होता तो क्या हमसे धोखा कर के इस तरह बिना बताए यहाँ चला आता।

” धोखा आपसे रेखा ने  नही ठाकुर साहब ने किया है।!”

केसर की बात पर ठकुराइन ने खा जाने वाली नज़रों से उसे देखा और वापस रेखा को कुछ सुनाने जा रही थीं कि केसर आगे बोल पड़ी…

“आप माने या न माने पर यही सच है। ठाकुर साहब ने आज तक अपने आसपास रहे हर व्यक्ति का लाभ उठाया है आप उनसे अलग नही है । आप समझिए हमारी बात को।
   हमने जब छिप कर उनकी बातें सुनी थीं तब उन्होंने राजा अजातशत्रु को मारने की प्लानिंग के बाद भी कुछ कहा था…

  राजा का नाम आते ही आदित्य जो अब तक इस सारे नाटक को देखता चुपचाप एक ओर हाथ बंधे खड़ा था तुरंत केसर के पास चला आया…

” क्या कहा था उन्होंने केसर ? इसलिए जानना है कि कहीं फिर वो भैया को कोई हानि तो नही पहुंचाना चाहते? “

” उनकी पूरी बात तो हमें भी समझ नही आई पर उन्होंने जो कहा था वो हम बता देतें हैं। उन्होंने कहा राजा अजातशत्रु को मारने का उनका पूरा और पक्का प्लान है, अगर कहीं कोई चूक हो गयी तब वहाँ की चाक चौबंद तैयारियों के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है और तब जब वो जेल में रहेंगे उस समय का उनका मास्टर प्लान है। और उस मास्टर प्लान में उनका साथ देगी रानी , उनकी रानी।
   हमें ये तो समझ आ गया था कि ये बात ठकुराइन से सम्बंधित ही है। हमें लगा ठकुराइन उन्हें छुड़वाने के लिए शायद कुछ करने वाली होंगी… लेकिन तभी उन्होंने आगे की अपनी बात कहनी शुरू की…
    उनके अनुसार जब वो जेल में होंगे तब उनका सबसे खास आदमी जिसे वो ये सब बता रहे थे किसी तरह ठकुरानी को उनके घर से दूर ले जाकर उनकी जान ले लेगा।
   ठकुरानी के मरने की खबर को इस ढंग से फैलाया जाएगा कि रानी और राजा दोनो ने मिल कर षड्यंत्र कर ठाकुर साहब के परिवार को समूल नष्ट करने ही ऐसा किया।
  पत्नी का अंतिम संस्कार करने के लिए उन्हें कुछ समय के लिए रिहा भी किया जाएगा, उस बात का फायदा उठा कर वो भाग निकलेंगे और खून के इज़ाम में फसेंगी रानी …
   अगर रानी साहेब फंस गई तो उनकी व्हाइट कॉलर पर जो दाग लगेगा सो लगेगा राजा साहब के नाम को भी बट्टा लग जायेगा और उनका राजनैतिक कैरियर शुरू होने से पहले ही खत्म समझो। फिर उनकी आधी ज़िन्दगी तो रानी सा को जेल से निकालने की कोशिश में बीत जाएगी और बाकी आधी सोचने में की किससे पंगा लिया था आखिर। “

” तुम्हारी एक एक बात बकवास है केसर। हम जानतें हैं रेखा को बरगलाने ही ये सब कहानी रच रही हो न? रेखा तुम हमारे साथ चलोगी या अभी कुछ देर और रुकना चाहती हो यहाँ।”

  रेखा कुछ सोच समझ पाती, उतनी ही देर में पैर पटकती ठकुरानी वहाँ से बाहर निकल गयी।
    उनके बाहर निकलते ही में किसी का फ़ोन उनके फोन पर आ गया , जिसे उठा कर वो बस “ठीक है तो बता दीजिए क्या बोलना है हम बोल देंगे।” कह कर फ़ोन रख दिया….
    तेज़ कदमो से चलती वो साथ साथ ही किसी को फ़ोन भी लगाती चल रही थी। कुछ देर बातें करने के बाद वो आंखों से ओझल हो गईं। रेखा का इस सब में रो रोकर बुरा हाल था।
  केसर उसे समझना चाहती है थी कि बाहर से एक ज़ोर के धमाके की आवाज़  आयी । केसर के अलावा आदित्य और रेखा बाहर की ओर भागे और बाहर का दृश्य देख रेखा के होश उड़ गए ….

  ठकुरानी की गाड़ी को पीछे से आते ट्रेलर ने इस बुरी कदर झिंझोड़ा था जैसे कोई बड़ा सा डायनासोर किसी छोटी सी बिल्ली को मुहँ में दबाए इधर उधर अलट पलट कर जान निकलने पर नीचे फेंक दे।

  आदित्य और रेखा को बाहर आते देख गाड़ी वाला अपनी गाड़ी  को तेजी से भगाता चला गया….
   आदित्य ने तुरंत ही पुलिस की गाड़ी को फ़ोन करने के लिए फ़ोन निकाला ही था कि रेखा ने उसे टोक दिया…

” पागल हो गए हैं क्या आप ? अगर आपने पुलिस को बुलाया तो यहाँ तक पहुंची पुलिस केसर दीदि को भी बाहर निकाल देगी फिर आप उसे पापा साहेब के लोगों से बचा पाएंगे?
  आप उसे लेकर निकलिए हम मम्मी को देखते हैं ।

अपने अंत समय में इतनी उठापटक होने के बावजूद आज छब्बीस साल तक जिसे माँ मानती चली आयी थी उसे इस हाल में देख किस बेटी का दिल नही पसीजता।
    उनके पास पहुंच जैसे ही रेखा ने उन्हें देखा अत्यधिक पीड़ा और करुणा से वो बेहोश हो गयी।
आदित्य को उसने पहले ही वहाँ से भगा दिया था। वो केसर को गोदाम के पिछले रास्ते से भगा कर ले जा चुका था।
  लेकिन भागतें भागतें भी उसने पुलिस को इस दुर्घटना की इत्तिला दे दी थी। उसे ये नही समझ आया था कि ठकुरानी जिंदा नही बची हैं। उसे लगा एक साधारण सा एक्सीडेंट है जिसमें ठकुरानी बाल बाल बच चुकी हैं।

पुलिस के वहाँ पहुंचने पर दो औरतें वहाँ बेहोशी की हालत में थी , एक रेखा दूसरी उसकी माँ। दोनो को साथ लिए पुलिस अस्पताल निकल गयी।
    अस्पताल जाते ही में पुलिस के एक अधिकारी के पास बाँसुरी को तुरंत थाने लेकर आने का आदेश हुआ और आदेश का पालन करने उस टुकड़ी में से तीन पुलिस वाले एक लेडी कॉन्स्टेबल को साथ लिए बाँसुरी की कोठी पहुंच गए….

क्रमशः







   

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s