जीवनसाथी-90

जीवनसाथी 90



     आदित्य को पार्टी करने का कोई शौक नही था, लेकिन उसके पास कोई चारा भी नही बचा था, मन मार कर उसे नेता जी और उनके परिवार के साथ समय बिताना ही था।
   राजा को वहाँ से जाते देख उसके मन में आया भी –” हमें अकेले फँसा के निकल रहे हो अजातशत्रु?”

” यकीन मानिये आपको कभी अकेला नही छोडूंगा। आज तो पार्टी है यहां आपका पूरा स्टाफ है, मेरी कोई खास ज़रूरत है भी नही और ..

” पता है पता है गर्लफ्रैंड आ रही है तुम्हारी… जाओ।”

  मुस्कुरा कर राजा आदित्य को पार्टी में छोड़ घर के लिए निकल गया था। उसके वहाँ से निकलते ही सभी की नज़र बचा कर प्रेम भी निकल गया।
  
   प्रेम और राजा के घर पहुँचते में बाँसुरी घर आ चुकी थी।
  वो निरमा के साथ रसोई में खाना बनाने में लगी थी।
     राजा को देखते ही वो भाग का उसके सीने से लग गयी…

  ” अरे अरे दूर रहो बाबा! अभी बाहर से आ रहा हूँ, नहाया तक नही हूँ।”

  ” क्यों सुबह नहाकर नही गए थे क्या?”

“सुबह तो खाना भी खाया था, तो अभी नही खाऊं क्या?”

  ” ओके बाबा बातें न बनाओ। ज़रा जल्दी आना कुछ सरप्राइज है।”

  बांसुरी को खुद से अलग कर राजा नहाने चला गया…

   उसके और प्रेम के फ्रेश होकर आते में निरमा ने पकौड़े और बाँसुरी ने चार कप कॉफी  बना ली…
चारों साथ बैठे थे, राजा ऑफिस की बातें बता रहा था , प्रेम भी बीच में एकाध किसी बात पर ज़रा सा अपना तड़का लगा जाता था..

  ” मालूम है बांसुरी, आज रीमा ने एक बात बताई मुझे!”

” वो क्या ?”

” वो कह रही थी कि ऑफ़िस की ही एक एम्प्लाई हैं, ज़रा उम्र में सीनियर सी हैं स्वाति नाम है उनका उन्हें जाने क्यों मुझ पर विश्वास नही होता। उन्हें लगता है दुनिया में कोई भी इंसान पूरी तरह सफेद या काला नही हो सकता हर एक के अंदर एक ग्रे शेड छिपा ही होता है।
उनका मानना है कि जैसा मैं दिखता हूँ वैसा हूँ नही। और दूसरी बात उन्हें मेरे काम करने के तरीकों पर भी ऐतराज़ है, उन्होंने रीमा से कहा कि ये क्या पागलपन है क्या शेयर्स और बिट कोइन्स से कोई इतना कुछ सिर्फ छै सात महीनों में कर सकता है?”

  राजा की बात सुन बाँसुरी की आंखों में आंसू उभर आए…

” साहेब मैं एक बात कहुँ ये वही लोग हैं जिन्हें कभी कुछ करना नही होता। साल डेढ़ साल पहले की बात होती तो आपके फाइनेंशियल मेथड्स पर मैं भी कुछ बोलने में असमर्थ होती लेकिन अब इतना पढ़ने और जानने के बाद मैं समझ सकती हूँ कि ये छै महीने तो फिर भी काफी हैं मार्किट में रुपयों के उलट फेर से सिर्फ हफ्ते भर में लोगों के वारे न्यारे हो जातें हैं। और अगर वो और भी कुछ जानना चाहती हैं तो वॉरेन बफेट की जीवनी क्यों नही पढ़ लेतीं , सारा सब समझ आ जायेगा।
   और रही बात ब्लैक एंड व्हाइट की तो मैं यही कहूंगी की साहेब लोग दूसरों को अपने चश्मे से ही देखते हैं। दुनिया में नकारात्मकता इतनी बढ़ गयी है कि वाकई कोई आपकी सारी अच्छाई को हजम ही नही कर पाता।
    किसी को दूसरों की अच्छाई पर विश्वास ही नही होता। लोगों को आश्चर्य होता है कि क्या कोई इतना भी अच्छा हो सकता है?
 
        सब खुद जैसे स्वार्थी भौतिकतावादी होते जा रहें हैं आप जैसे इंसान के मन की सत्यता और प्रेम को कहां परख पाएंगे। उनके लिए तो आप भी उन जैसे ही हैं बस फर्क ये है कि उनकी नज़र में आपने विनम्रता और स्नेह का मुखौटा ओढ़ रखा है।
    खैर हम किसी का मुहँ तो नही बंद कर सकते, जिसे जो सोचना है सोचने दीजिये ये उनकी अपनी सोच है। और ऐसा सोच कर वो अपना ही खून जलाएंगे।
   वो कुछ भी सोच लें हम यहीं नही रुकेंगे। खैर ये सब छोड़िए इन बातों से दुखी होने का कोई मतलब नही। हमने जिसमें हमारी खुशी है वो साधन ढूंढ लेने चाहिये, मैं आज आपके लिए आपकी सबसे खास चीज़ लेकर आई हूँ”

  और बांसुरी अंदर से गिटार उठा लायी…

  गिटार देखते ही राजा की आंखों में भी चमक आ गयी..
  

  ” आपका रिकॉर्ड है ना हर नए शहर में एक नया गिटार लेना और फिर महल वापसी में उसी शहर में उसे छोड़ जाना”

  राजा ने मुस्कुरा कर गिटार थाम लिया..

  ” सुबह तुम से कहा था न निरमा साहेब की ज़रूरत की दो चीज़े शाम को लेती आऊंगी। उनमें से एक है ये गिटार और एक है अंदर रखा कॉफी मेकर। बस ये दो चीजें पास हो तो साहेब को बाँसुरी की ज़रूरत भी नही।”

  “अब तुम मेरी ज़रूरत नही मेरा हिस्सा बन चुकी हो। मुझमें ही हो मेरे अंदर कहीं। ज़रूरत उस चीज़ की होती है जिसकी कमी हो, तुमने ही तो मुझे पूरा किया है हुकुम!”
राजा की बात सुन बाँसुरी मुस्कुरा उठी, निरमा ने हँस कर राजा से गाने की सिफारिश ही कर दी..

  ” राजा भैया कुछ सुना भी दीजिये ना!”

  निरमा की बात पर राजा मुस्कुरा कर रह गया। मीठी प्रेम की गोद में बैठी थी, वो उसे अपनी प्लेट से ही खिलाता जा रहा था।
  राजा ने गिटार ट्यून की और बांसुरी की ओर देख इशारे से पूछा कि क्या बजाऊँ ? उसके इशारे से ही यह कहते कि कुछ भी वो तारों को सही करता किसी धुन को सोचने में लग गया…

    प्रेम की गोद मे फुदकती मीठी के हाथ से लग कर ज़रा सी कॉफी प्रेम के ऊपर गिर पड़ी और उसे देखते ही निरमा एक झटके से खड़ी होकर रसोई में पानी लेने चली गयी। उसके पीछे ही मीठी को गोद से उतारे प्रेम भी रसोई में पहुंच गया…

  ” इतना झटके से उठने की क्या ज़रूरत थी?”

  ” आपकी शर्ट पर कॉफी गिर गयी, जलन हो रही होगी न?”

  ” इतनी गरम नही थी कॉफी, मुझे कोई जलन नही हुई लेकिन तुम्हारा ऐसे झटके से उठना और ऐसे भागना दौड़ना अभी सही नही है ना!”

  निरमा को अचानक याद आ गया कि उसने प्रेम को अब तक सच्चाई बताई ही कहाँ है? वो तो यही सोच रहा कि निरमा प्रेग्नेंट हैं, वो बिना कुछ कहे पानी से उसके सीने पर गिरी कॉफी साफ करने लगी। उसे खुद से अलग कर –” इसकी जरूरत नही है। मैं खुद कर लूँगा” कह कर प्रेम ने खुद थोड़ा पानी अपने सीने पर लगाया और कमीज की बटन लगाता बाहर निकल गया।
   निरमा को प्रेम को मनाने का कोई मौका ही नही मिल पा रहा था, हालांकि अब यहाँ की हालत देख उसे प्रेम का निर्णय वाजिब लगने लगा था लेकिन फिलहाल वो कर भी क्या सकती थी। अब तो उसे यहीं रहते हुए किसी तरीके से प्रेम का मन जीतना था।
    ट्रे में पानी की ग्लास लिए वो बाहर चली आयी।

   अब तक राजा ने कोई धुन नही बजायी थी,वो कुछ ज़रा सा शुरू करता और फिर छोड़ देता,आखिर उसकी परेशानी देख बांसुरी बोल पड़ी…

  ” साहेब वो गाना याद है “साथी मिल गया” उसे एक बार ट्राय करो ना।”

  हां में सर हिलाकर राजा ने उस धुन को बजाने की एक नाकाम सी कोशिश की और लाचारगी से बाँसुरी को देखने लगा..

  ” कोई नही, मैं एक बार गा कर सुना देती हूँ उसके बाद ट्यून याद आ जायेगी..”

  बाँसुरी ने एक नही दो बार गाया लेकिन राजा उस धुन को नही बजा पाया…

  “धुन मुझे याद नही है ऐसी बात नही है बाँसुरी, मुझे ऐसा लग रहा है मैं गिटार बजाना ही भूल गया हूँ। मुझे इसके कॉर्ड समझ नही आ रहे।”

  राजा के माथे की शिकन देख बांसुरी मुस्कुरा कर उसके पास चली आयी,उसके हाथ से गिटार  उसने अपने हाथ में ले लिया और एक किनारे रख राजा के पास ही बैठ गयी..

” कहीं बाहर चलें साहेब, खुली हवा में शायद अच्छा लगे? वैसे भी आजकल आप मुझसे ज्यादा अपने लैपटॉप से प्यार करने लगे हैं..”

   राजा मुस्कुरा कर रह गया। वो उनके सामने मुस्कुरा तो रहा था लेकिन मन ही मन उसे खुद समझ नही आ रहा था कि वो अपनी सबसे प्यारी चीज़ को भूल कैसे सकता है।
     निरमा को खाना परोसने जाते देख बांसुरी भी उसके साथ अंदर चली गयी..
    बाँसुरी के मन में भी हलचल मची थी और निरमा के मन में भी। लेकिन दोनो ही एक दूसरे से कह नही पा रहीं थी।
   बाँसुरी के लिए राजा का ऐसे गिटार भूल जाना बहुत बड़ी बात थी । उसने मन ही मन ठान लिया था कि इस बारे में वो जल्दी ही किसी डॉक्टर से सलाह करेगी।

   बाहर मीठी के साथ खेलते राजा का ध्यान फ़ोन की आवाज़ से टूट गया..
   फ़ोन समर का था…

  “कैसे हैं हुकुम?”

  ” ठीक हूँ तुम कैसे हो ?”

  ” में भी ठीक ही हूँ। अदित्यप्रताप की पार्टी कैसी रही फिर?”

  ” बहुत शानदार ! पर उन नेता जी से जान पहचान निकाली कैसे ? मुझे बस यही एक डर था कि कहीं मुझे न पहचान लें, ये नेता बड़े घाघ जो होतें हैं..”

  ” जी इसी घाघपने का फायदा उठाया है हुकुम! उनके सामने खुद को आदित्य का मुलाजिम बताकर उसकी बेशुमार दौलत  का ऐसा डंका बजाया गाया है कि नेता जी को लगने लगा वो अलीबाबा है और उन्हें चालीस चोरों का खजाना मिल गया है…   अब तक इसी गुमान में हैं कि आदित्य अकेले ही आगे उनकी पार्टी फंड की तिजोरी भर डालेगा, और इसके लिए उन्हें  आदित्य को शीशे में उतारे रखना ज़रूरी है साथ ही आदित्य के सनकी स्वभाव का ज़िक्र भी बारबार कर दिया जिससे वो उसे इस पार्टी के बारे में कुछ न कहें। अब उनकी हालत ये है कि वो आदित्य से अच्छे संबंध बनाए रखने के साथ ही उसे कुछ भी न बताने को भी मजबूर हैं।
  
  ” और आज की पार्टी का खर्चा समर ?”

  ” जी वो आपके कहे मुताबिक मैंने नेता जी के सेक्रेटरी को भेज दिया था, और इस बात का भी पूरा ध्यान रखा कि आदित्य को कुछ न पता चले। आप बताएं वहाँ सब कैसे हैं?

” सब ठीक हैं। निरमा भी यहां आयीं हुईं हैं, आज तो हमारी हुकुम भी हैं,कल उन्हें भारत भ्रमण पर निकलना है  ….. ” कैसे हैं समर सा?”

   राजा की बात के बीच ही बाँसुरी समर से उसका हालचाल पूछ बैठी..

  “ठीक हूँ रानी साहेब! आप बताएं वहाँ का हाल?”

  ” आपके हुकुम आजकल इतना काम कर रहे हैं कि गिटार तक बजाना भूल गए हैं” 

  “एक बार महल वापस आते ही उन्हें  सब याद आ जायेगा, आप चिंता न करें।”

  और थोड़ी इधर उधर की बात कर समर ने फ़ोन रख दिया।
वो अपने किसी दोस्त की शादी में आया हुआ था। सुबह उसे राजा ने जो काम दिया था उसकी सारी व्यवस्था सही थी या नही यही पूछने उसने फ़ोन किया था । उसने ही नेता जी को फ़ोन कर के सारी व्यवस्था करवाई थी।

    शादी वाली जगह की भीड़भाड़ से बचने वो एक तरफ किनारे जाकर ही बात कर रहा था। फ़ोन रख कर मुड़ा ही था कि सामने पिया खड़ी नज़र आ गयी…

” अरे मंत्री जी आप यहाँ कैसे?”

  ” यही सवाल मैं भी आपसे कर सकता हूँ डॉक्टर साहब? आप अस्पताल छोड़ यहाँ कैसे?”

” डॉक्टर हमेशा अस्पताल में ही रहें ऐसा ज़रूरी तो नही।

  “मंत्री भी हमेशा महल में हो ये भी ज़रूरी नही।”

  पिया ज़ोर से खिलखिला उठी

” बड़े हाज़िर जवाब हैं आप!”

   समर मुस्कुरा कर रह गया, उसके मन में भी राजा के भूल जाने वाली बात खटकने लगी थी।
  आखिर इतना तेज दिमाग कैसे किसी बात को भूल सकता है…
  उसे अपनी सोच में मग्न देख पिया वहाँ से पलट कर जाने लगी, उसे जाते देख समर को होश आया कि वो सामने खड़ी थी और समर अपने विचारों में उलझा पड़ा था। उसने तुरन्त पिया को आवाज़ दे दी…

  ” सुनिए डॉक्टर साहब!”

  वो पीछे मुड़ कर खड़ी हो गयी

  ” जी !”

  ” आप किसी के साथ हैं क्या? “

समर के सवाल पर उसके माथे पर शिकन चली आयी..

  ” मैं आपका मतलब नही समझी?”

  “अगर आप अकेली हैं तो क्या मेरे साथ कॉफी ले सकती हैं?

  ” बिल्कुल ले सकती हूँ, पर कॉफी नही मैं तो पूरा खाना ही खाऊँगी। एक्चुली आई लव शादी का खाना।
जब से बाहर पढ़ने गयी ये सब पार्टी वारटी छूट ही गयी तो जब मौका मिलता है तो मैं तो दबा कर खाती हूँ!”

   उसकी बात सुन समर को हंसी आ गयी..

” श्योर , आप प्लेट लगा लीजिये मैं वहाँ बैठा हूँ।”

  समर बाँसुरी की बात सोचता एक कोने की कुर्सी पकड़ बैठ गया।, कुछ देर में ही दो प्लेट्स हाथों में थामे पिया भी वहाँ चली आयी।
    शादी की जगह, भारी भरकम सिल्क बनारसी में मेकप से लकदक लसर फसर करती औरतों के बीच सादी सी शिफॉन पहने पिया बसन्ती बहार लग रही थी।
   उसे देख समर अपने विचारों से बाहर आ गया..

” अरे आप मेरे लिए भी प्लेट ले आयीं!”

पिया अचकचा कर उसे देखने लगी क्योंकि वो दोनो प्लेट्स खुद के लिए ही लेकर आई थी। एक में स्टार्टर और डेजर्ट थे तो दूसरे में मेन कोर्स।

” हाँ आप भी इसी में ले लीजिए,मुझे कोई एतराज नही।

  टेबल पर प्लेट्स रखते ही समर देख कर हँसने लगा

  “बुरा मत मानियेगा लेकिन आपको देख कर लगता तो नही की आप ये सब खा लेंगी।”

  पिया मुस्कुरा कर झेम्प गयी

“खा तो नही पाऊँगी लेकिन लालच भी कोई चीज़ है आखिर। मुझे हर एक डिश टेस्ट जो करनी थी आई एम रियली वेरी फूडी । आइये आप भी शुरू हो जाइए।”

  उसके सामने प्लेट सरका कर बड़ी बेतकल्लुफी से वो खाना खाने लगी,लेकिन समर कुछ सोचता बैठा रहा, उसे इस कदर परेशान देख पिया ने ही पहल करी और पूछ ही लिया…”कोई परेशानी है क्या मंत्री जी?”

  ” जी ! नही तो!”

अचानक ही समर को ध्यान आया कि पिया भी तो उसकी मदद कर सकती है।

  ” अरे डॉक्टर साहब आप मेरी मदद कर सकतीं हैं? मैं एक बात जानना चाहता हूँ।

  ” बेशक पूछिये।”

  ” क्या अठ्ठाईस उनतीस की उम्र में किसी को अल्ज़ाइमर हो सकता है?”

  पिया ने प्लेट से आंखे उठायी और आंखे चौड़ी कर समर को देखने लगी..

  ” मुझे पूरी बात बताइये प्लीज़,पेशेंट की हिस्ट्री , उसका वर्किंग एरिया वगैरह। “

  ” मेरे एक दोस्त हैं,आजकल काम का कुछ ज्यादा ही स्ट्रेस ले बैठे लगतें हैं। उनका पसन्दीदा काम था गिटार बजाना, लेकिन आज वो बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी गिटार नही बजा पाए।”

  ” ये तो सामान्य सी बात है। क्योंकि अगर ये सब की रोज़ प्रैक्टिस न कि जाए तो कोई भी भूल सकता है। कब से सीख रहें हैं बजाना? एक दो साल से भी सीखने वालों के साथ होता है ऐसा।”

  ” सात साल की उम्र से सीख रहे थे और तेरह चौदह की उम्र में इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बेस्ट टीन गिटारिस्ट का अवार्ड जीता था…

  ” व्हाट? ” पिया चौन्क कर समर को देखने लगी

” हाँ , इसलिए सोच सोच कर परेशान हो रहा हूँ कि कहीं ये किसी बड़ी बीमारी की शुरुवात तो नही? “

  पिया कुछ जवाब देती उसके पहले ही उसका मोबाइल बजने लगा….

  फ़ोन उसकी माँ का था,कुछ देर इधर उधर की बातें कर उसने फ़ोन रख दिया लेकिन सामने बैठा समर पिया और उसकी माँ की तीखी बातें सुन अपदस्थ हो उठा लेकिन पिया फ़ोन रख कर एकदम सामान्य हो गयी।
    समर को असहज देख पिया के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी..

” मेरी मॉम का फोन था। एंड यू नो अ टिपिकल मॉम शी इस… हर मॅट्रिमोनी साइट पर मेरी प्रोफ़ाइल बना रखी हैं उन्होंने, और हर दूसरे तीसरे दिन किसी न किसी लड़के के बारे में बताने लगती हैं।
 
” ओह्ह ! अच्छा!”

” मंत्री जी आपकी माँ आपको शादी के लिए परेशान नही करती?”

  ” दुखती रग पर हाथ रख दिया आपने! माँ ही क्या घर की दीवारें अलमारियां खिड़कियां ऐसा लगता है सब मेरे लिए लड़की खोजने लगे थे पर किस्मत सबकी खराब थी किसी को मेरे लिए लड़कीं ही नही मिल रही थी, कि अचानक..”

समर की बात बीच में ही काटती पिया अपनी बात कह उठी…

  ” पर क्यों ? अच्छे खासे दिखतें हैं आप, राजा जी के मंत्री की हैसियत से नौकरी पर भी हैं। महल में रहतें हैं तो कमाते भी ठीक ठाक ही होंगे फिर टेंशन किस बात की? मेरी तो अलग ही टेंशन है?”

” आपकी क्या टेंशन?

” जिस लड़के को मैं ठीक लगती हूँ वो मुझे सही नही लगता और जो मुझे ठीक लगता है उसे मेरी पढ़ाई या जॉब से प्रॉब्लम हो जाती है। मैं इसलिए इन सब बातों से दूर रहना चाहती हूँ,मॉम को कह दिया है आप जिसे देखेंगी मैं बिना देखे ही हाँ कह दूंगी। मैंने तो बस पीछा छुड़ाने कह दिया था अब मॉम पीछे पड़ गयी हैं एक हफ्ते के अंदर दिल्ली आ जाओ।

  ” शादी करने बुला रही क्या? “

” नही नही ! अभी बस लड़के देखने।”

  “कौन किसके लिए रिश्ता देखने लगा , ज़रा हम भी तो सुने..”

   केसर हाथ में एक वाइन ग्लास थामे उन दोनों तक चली आयी…

    शादी समर के किसी दोस्त की थी, जिससे केसर की भी जान पहचान थी। इसी नाते वो भी इस शादी में आई हुई थी।
   इधर पिया लड़कीं वालों की तरफ से थी, उसकी सहेली की दीदी की शादी थी…
केसर को अचानक वहाँ देख समर चौंक गया, पिया भी  इस नई मेहमान को देखने लगी..

” हमें बताया क्यों नही समर कि आप यहाँ शादी में आ रहें हैं। हम भी साथ ही आ जाते!”

” मुझे नही पता था कि आप यहाँ आने वाली हैं।”

  मुस्कुरा कर केसर ने पिया की तरफ मुहँ फेर लिया , समर समझ गया कि वो पिया का परिचय जानना चाहती है।

  ” ये डॉ पिया हैं। माँ का इलाज अभी यही कर रहीं हैं?

” लेकिन सुबह तो कोई और लड़कीं आती है ना?”

“जी हाँ वो फिजियोथेरेपिस्ट है सुधा।” इस बार जवाब पिया ने दिया

  ” ओह्ह और आप डॉक्टर हैं?”

”  हाँ जी !”

“और हम समर की मंगेतर हैं केसर! केसर वखारिया जो जल्दी ही केसर समर सिंह हो जाएंगे।”

“ग्रेट !” पिया बस  इतनी छोटी सी बधाई देकर समर की ओर मुड़ गयी..

” आप अपने किस दोस्त की समस्या बता रहे थे समर जी!”

   केसर की उपस्थिति के कारण या जाने क्यों पर इस बार पिया ने समर को मंत्री जी नही बुलाया। इस बात को समझ कर समर भी अंदर ही अंदर खुश होता लेकिन पिया का सवाल उसे मुश्किल में डाल गया। अब तो केसर ज़रूर इस सवाल की बखिया उधेड़ कर ही मानेगी। किस तरीके से इस सवाल को टाला जाए समर अभी यही सोच रहा था कि पिया एक बार फिर बोल उठी…

  ” हाँ तो आपने ये पूछा था न कि आपके फ्रेंड को हेयर फॉल बहुत होता है तो उसके लिए मैं कुछ सप्लीमेंट्स बता दूंगी और एक चीज़ , आजकल के लड़के लड़कियां हेयर ऑइल नही यूज़ करते यह भी हेयर फॉल का एक कारण है तो उन्हें प्रॉपर हेयर केयर करनी होगी । ओके !”

   पिया अपनी बात कह वहाँ से उठ गई, उसे जाता देख समर उसे रोकने की सोच रहा था कि केसर ने ही आवाज़ दे दी…”अरे आप तो बिना कुछ खाये ही चल दीं”

  ” जी मैं पानी लेने जा रहीं हूँ। अभी वापस आकर सब खाऊँगी।”
मुस्कुराती पिया अपना आँचल लहराती चली गयी और केसर समर की तरफ हो गयी…

  “आजकल कुछ ज्यादा ही दोस्ती हो रही है लड़कियों से ?”

” मैं तुम्हारी जागीर नही हूँ। और ये लड़कियों के जलन वाले भाव अपने चेहरे पर न ही लाओ तो अच्छा है वरना और गुस्सा आने लगता है तुम पर!”

” हाँ जब एक खूबसूरत लड़की साथ बैठी हो तो हम पर तो गुस्सा आएगा ही!”

  समर ने केसर की तरफ देखा लेकिन उसका कुछ भी कहने का दिल नही किया, कि उसे अचानक याद आया आज यहाँ आते हुए उसने अपने किसी आदमी से कह कर फ़ोन मंगवा लिया था।
     उसने जेब में हाथ डाल कर फ़ोन निकाल कर केसर के सामने रख दिया…
    आई फ़ोन पर नज़र पड़ते ही केसर की आंखे चमक उठी… लेकिन उसे तभी ध्यान आ गया कि जबसे उसका फ़ोन खोया था समर तीन बार उसे फ़ोन लाकर दे चुका था पर हर बार उसके फ़ोन में कोई न कोई खराबी आ ही जा रही थी।
   इसलिए इस बार भी फोन की प्रसन्नता कहीं क्षणिक न हो सोच वो कुलबुला उठी….

  ” कहीं ये भी खटारा तो नही निकलेगा न?”

  ” इत्तेफाक कहुँ या खराब किस्मत! की आपके पास पहुंचते ही महंगे से मंहंगा मोबाइल खराब हो गया। कहते हैं ना बुरी संगत सबको रास नही आती बस आपके मोबाइल इसी लिए आत्महत्या कर गए शायद। पर इस बार खूब ठोंक बजा कर फ़ोन लाया हूँ। अबकी खराब हुआ ना तो ..

  ” तुम्हारा नाम बदल देंगे? ” केसर की इस बात पर समर हँसने लगा…

” जी नही। फ़ोन रखने का विचार त्याग दीजिएगा।”

  समर की बात को हवा में उड़ा कर केसर अपना नया मोबाइल सम्भालती वहाँ से निकल गयी। उसके जाते ही पिया पानी की छोटी सी बोतल थामे चली आयी…

  ” हे भगवान ! पूरी तोप हैं आपकी फियांसे। वैसे ब्यूटीफुल हैं।”

” आप अब तक कहाँ छुपी बैठी थीं?”

” बैठी नही वहाँ खड़ी थी। देख रही थी कि वो जाएं तब मैं आऊँ!”

  ” लेकिन क्यों?”   समर ने पिया को गहरी नज़र से देखते हुए पूछ लिया और वो अपनी ही बात पर झेंप कर रह गयी, बात संभालते हुए उसने खाने की प्लेट की ओर इशारा कर दिया..

  ” वो मेरी प्लेट जो यहाँ रखी थी।”

  ” ओह्ह ! मुझे लगा कोई और बात है।”

  समर की गहरी नज़रों को नज़रंदाज़ करती वो वापस खाने लगी…

  ” अब बताये आप अपने दोस्त के बारे में क्या कह रहे थे?

  समर आश्चर्य चकित रह गया कि आखिर सिर्फ उसके चेहरे के भाव बस देख कर ये लड़कीं कैसे इस बात को समझ गयी कि वो केसर के सामने आने हुकुम की बात नही करना चाहता था।
   मुस्कुरा कर उसने राजा की सारी परेशानी और अपने मन की उलझन पिया को बता दी…
   जाने क्यों वो उसे ये सच भी बता गया कि वो दोस्त और कोई नही उसके प्यारे राजा साहब ही हैं।
सारी बातें ध्यान से सुनती पिया ने समर से और भी कुछ सवाल किये लेकिन कई बातें ऐसी थी जिनके जवाब समर के पास भी नही थे..

  “देखिए हमें दिन रात काम में लगे रहने की प्रेरणा हमारे ब्रेन से ही मिलती है और इसलिए उसे भी एक समय आराम के लिए चाहिए होता है । पर कभी किन्हीं खास मौकों पर अगर दिमाग आराम नही कर पाता तब कुछ समय के लिए उसके कुछ खास हिस्सों के काम अवरोधित या बाधित होने लगता है… और ऐसे समय में व्यक्ति कुछ अधिक ही स्ट्रेस के कारण कई अन्य महत्वपूर्ण बातों को कुछ समय के लिए भूलने  भी लगता है लेकिन इस समस्या को हम पूरी तरह से अल्जाइमर नही कह सकते क्योंकि अल्जाइमर में ब्रेन के कुछ हिस्से हमेशा हमेशा के लिए अक्रिय या सुप्तावस्था में चले जातें हैं।
   हर भूलने की बीमारी अल्जाइमर नही होती लेकिन ये भी देखने की बात है कि उनमें किस तरह के लक्षण पैदा हो रहें हैं?
  वैसे रहतें कहाँ है आपके राजा साहब!”

   समर ने इधर उधर नज़र घुमाई और पिया के ज़रा करीब खिसक आया।

” डॉक्टर साहब मैं तो कहता हूँ आप अपनी मम्मी का कहा मानकर लड़का देखने दिल्ली चली जाएं, इससे दो फायदे होंगे!”

” वो क्या?”

  “एक आप मुझे दिल्ली घुमा दीजिएगा और दूसरा कोई अच्छा लड़का पसन्द आ गया तो हमें एक पार्टी और खाने को मिल जाएगी।”

  ” ओके डन! फिर मैं टिकट्स करवा लेती हूँ।

  पिया इतनी जल्दी उसकी बात समझ जाएगी समर ने सोचा नही था, वो भी मुस्कुरा कर उसकी प्लेट से डेजर्ट की कटोरी उठाये खाने लगा ।
  उसे खाते देख वो भी चुपचाप खाने में लग गयी…

   दूर खड़ी केसर ने दोनों को साथ बैठे देखकर मुहँ फेर लिया, और पैर पटकती वहाँ से दूसरी तरफ निकल गयी….

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     महल से वापसी के बाद एक तरफ जहाँ पिंकी खुश थी कि उसे उसके मायके ने अपना लिया था वो भी रतन के साथ वहीं दूसरी तरफ राजा का ऐसे चले जाना अब तक उसके मन को कचोट रहा था।
   रतन को फील्ड वर्क में आये समय बीत चुका था, और एक तबादला भी हो चुका था।

  हर नई जगह उसके लिए नया घर नए दोस्त लेकर आते थे लेकिन कहीं भी उसे राजा और बाँसुरी नही मिल पा रहे थे।
   उसका नन्हा सा बेटा अभी साल भर का नही हुआ था, इसी से पिंकी का सारा वक्त बच्चे के पीछे ही गुज़रा करता था…
    नई नई नौकरी थी , रतन के पास फिलहाल पिंकी और बच्चे के लिए समय की कमी सी हो गयी थी, इस कमी को पूरा करने वो जब तब पिंकी को कहीं न कहीं घूमने भेज दिया करता था।
  पिंकी भी अब सारे काम अकेले करने की आदि हो गयी थी। जिलाधीश का महत्वपूर्ण पद और उसकी महत्ता वो भी समझती थी। कुछ सालों की ही बात थी , एक बार अपने काम में जमने के बाद रतन भी एक सामान्य प्रशासनिक अधिकारी की तरह राह सकेगा इसी विचार में खुद की बहलाये दोनों अपने अपने तरीके से गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे थे।
   हालांकि रतन से पिंकी को कोई शिकायत न थी, शिकायत थी तो सिर्फ भगवान से की उन्होंने उसके राजा भैया को उससे दूर क्यों कर दिया था?

  रतन को गृहस्थी की जिम्मेदारियों से मुक्त रख पिंकी ने खुद पर सारा सब ओढ़ रखा था।
   उस दिन उसके लाडले को सुबह से रह रह कर हल्का हल्का बुखार बना हुआ था, बच्चे ने पिछली रात से एक बूंद दूध को भी मुहँ नही लगाया था, एक माँ के घबराहट भरे योगल्पन के लिए ये कारण पर्याप्त थे । घर पर काम करने वाली बुज़ुर्ग काम वाली अम्मा ने कहा भी बुखार की दवा पिला दो मालकिन लेकिन इन सब बातों को नकारती बेसुध पिंकी बेटू को लेकर तुरंत अस्पताल की ओर निकल गयी।
   घर पर मिली सरकारी गाड़ी रतन के पास थी, दूसरी गाड़ी को ड्राइवर ने पिंकी के कहने पर तुरंत निकाला और भगा दिया।
        सड़क पर ट्रैफिक की भरमार थी, उस पर रतन का फ़ोन भी पहुंच के बाहर बता रहा था।
   कलेक्टर निवास शहर से ज़रा बाहर बसी प्रशासनिक कॉलोनी में होने से अस्पताल ज़रा दूर ही था।
   गाड़ी अपने पूरे रफ्तार में भाग रही थी कि ड्राइवर को लगा जैसे गाड़ी में कोई समस्या आ रही है, उसने एक किनारे गाड़ी खड़ी की ही थी कि पिंकी हड़बड़ाने लगी, लेकिन ड्राइवर का शक सही था, गाड़ी का अगला पहिया पंक्चर होने से गाड़ी आगर लेकर जाना संभव नही था।
    ड्राइवर स्टेपनी बदलने में लगा था और परेशान हाल पिंकी गोद में लिए बच्चे के साथ ही फ़ोन पर कैब बुकिंग की कोशिश में लगी थी…
     तेज़ धूप में परेशान होते बच्चे को ढांकने के लिए नई जनरेशन की माँ के पास आँचल भी नही था। इतनी जल्दी में वो घर से निकली थी कि जो जीन्स घर पर डाले थी वही पहने निकल पड़ी थी। अभी इस वक्त उसे खुद पर सबसे अधिक गुस्सा आ रहा था।
      वो उधर से निकलने वाली गाड़ियों को हाथ देकर रोकने की कोशिश करने की सोच कर रोड पर आई ही थी कि तेज़ गति से आती बी एम डब्ल्यू से टकराते बची। गाड़ी वाले ने तेज़ी से टर्न लेकर ब्रेक लगा दिए।
     गुस्से में गाड़ी के चालक ने दरवाज़ा खोला और पिंकी तक चला आया….

  ” अंधी हो क्या? मेरी ही गाड़ी मिली थी मरने के लिए”

  बोलते बोलते एक पल को उस लड़के की आंखें पिंकी को देख खामोश सी रह गयी…

” माफी चाहते हैं , हम ज़रा परेशान हैं। बच्चा बीमार है और गाड़ी खराब हो गयी है।”

   पिंकी की आंखों में लाचारगी के ऑंसू आ गए। उसकी भरी आंखे  देख जाने क्यों उस लड़के का दिल कसमसा कर रह गया।
   वैसे इतनी जल्दी किसी की मदद कर देने का उसका स्वभाव था नही। और न ही औरतों के आंसूओं से उसे कुछ विशेष फर्क  पड़ता था,, लेकिन आने स्वभाव के विपरीत आदित्यप्रताप ने उस अनजान लड़की और उसके बच्चे के लिए अपनी गाड़ी का दरवाजा खोल दिया..

” आप चाहें तो हम आपको अस्पताल तक छोड़ देते हैं।”

  ” जी शुक्रिया !” पिंकी के पास अभी ज्यादा कुछ सोचने का वक्त नही था। वो तुरंत आदित्य की गाड़ी में बैठ गयी। उसके बैठते ही आदित्य ने गाड़ी आगे बढ़ा दी…

*******


   बाँसुरी अपने दोस्तों के साथ निकल चुकी थी। लेकिन मन उसका राजा के पास ही अटका पड़ा था।
उसने तो दो चार बहाने भी सोचे थे कि वो इस ट्रिप में ना जाये लेकिन ये उसकी ट्रेनिंग का ज़रूरी हिस्सा होने से राजा ने उसे ज़बरदस्ती भेज दिया था।

    आंध्र प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में पढ़ते लिखते उस राज्य की भौतिक स्थिति , भूगोल वहाँ की संस्कृति वहाँ का मौसम सब कुछ वहाँ रहते हुए पढना बेहद रोचक था।
   
    विष्णुकुण्डिना द्वारा स्थापित उनदल्ली गुफाओं में घुमते हुए उन सभी को वहाँ के राजवंशों से परिचित कराया जा रहा था । वहाँ घुमतें हुए शेखर एक बार फिर पुराना शेखर बन बैठा था…

  ” ध्यान से सुन ले फ़र्ज़ीना! बाद में तू सातवाहन वंश और पल्लव वंश के बीच कंफ्यूज मत हो जाना।”

  ” खुद कन्फ्यूजन की छठी औलाद है और मुझे ज्ञान दे रहा है कबीला कहीं का!”

  “यार ज़रीना तू गाली बहुत देती है यार!”

  ” मैंने कब गाली दी तुझे?”

   ” तूने मुझे अभी कमीना नही बोला!”

  “नही बिल्कुल नही । मैंने तो तुझे ज़ाम्बिया के घने जंगलों के काबिले का सरदार कबीला कहा, तू कमीना समझ गया तो मैं क्या करूँ।”

  ” ओह्ह सॉरी सॉरी ! देखो भाई लोग अच्छे से राजवंश पढ़ लो। बाँसुरी जी आप भी ध्यान दे सब याद रखियेगा। हो सकता है मध्यप्रदेश जाने पर आपके हुकुम के राजवंश के बारे में भी हमें जानने का मौका मिल जाये।”

  बाँसुरी हल्के से मुस्कुरा कर रह गयी…

  ” फिर इसके अंदर आशिक की आत्मा लहराने लगी।”   रिदान ने धीमे से लीना के कान में कहा और दोनों हँस दिए

  ” ये देखिए बाँसुरी जी कटरीना फिर हँसने लगी..”

  लीना शेखर की चुहलबाजी देख कुछ देर को ही सही लेकिन बाँसुरी खुल कर खिलखिला उठी। उसे वापस पहले की तरह हंसते मुस्कुराते देख शेखर ने भी आने आराध्य को आभार में ऊपर देख हाथ जोड़ लिए..

  ” देख देख बाँसुरी इस कमीने से मेरी खुशी सहन कहाँ होती है। भगवान से मना रहा कि ये गुफा मेरे सर पर गिर जाए।”

  “पागल हो गयी है क्या हसीना ये दीवार तुझ पर गिर गयी तो ये बचेगी भी ? मैं किसी ऐतिहासिक धरोहर के साथ कोई रिस्क नही ले सकता समझी।”

  बनावटी गुस्से से मुहँ बनाये लीना बाँसुरी का हाथ थामे पैर पटकती बाहर निकल गयी।
   मुस्कुराते हुए शेखर भी अपने कंधो पर अपना बैग टांगे रिदान के गले में हाथ झुलाये कुछ गुनगुनाता आगे बढ़ गया…

   अकेला चला था मैं,न आया अकेला
    मेरे संग संग आया तेरी यादों का मेला।।


क्रमशः

aparna…..


 

  


   


    

 
  

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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