जीवनसाथी-95

जीवनसाथी– 95


       आदित्य की गाड़ी रास्ते के उतार चढ़ाव देखे बिना बस भागती चली जा रही थी।
   राजा ने अपनी गाड़ी उसी के पीछे भगा दी।
मौसम भी साथ नही दे रहा था, तेज़ आंधी पानी ने रास्ते की भयावहता को और बढ़ा दिया था ।
तेज़ी से आगे बढ़ती आदित्य की गाड़ी एक अंधे मोड़ पर तेज़ी से मुड़ी और गाड़ी पर से कंट्रोल खो जाने से एक ज़ोर की पलटी खा कर कुछ दूर लुढ़कती चली गयी।
      राजा की गाड़ी पीछे ही होने से उसके सामने ही ये हादसा हुआ और वो तुरंत आदित्य की गाड़ी के पास पहुंच गया।
   गाड़ी में अंदर फंसे हुए आदित्य को बाँसुरी की मदद से निकाल कर राजा को अपनी गाड़ी में डालते हुए एक नज़र देखने के बाद आदित्य ने आंखे मूंद ली।

    पुलिस को दुर्घटना की जानकारी देने के बाद आदित्य को अपनी गाड़ी में डाले दोनो वहाँ से सीधे अस्पताल निकल गए।
   अस्पताल पहुंचने तक मे आदित्य को होश भी आ चुका था। बाँसुरी के क्रेडेंशियल्स पाते ही डाक्टरों ने तुरंत ही आदित्य का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया।
    कुछ सामान्य चोटों के अलावा कोई अंदरूनी और गहरी चोट न होने से कुछ दर्द निवारक दवाओं के साथ ही आदित्य की छुट्टी हो गयी।
        राजा डॉक्टर से बात कर आदित्य के कमरे में वापस आया तब तक आदित्य अपने बेड पर चुपचाप बैठा अपने विचारों में मग्न था।
   राजा के अंदर आते ही वो खुद में संकुचित सा चुप बैठा रहा। राजा उसके स्वभाव को अब तक भली तरह समझ चुका था, इसलिए ज्यादा कुछ कहे बिना उसके सामने आ कर खड़ा हो गया..

” घर चलें आदित्य? “

  राजा के मुहँ से अपना नाम सुन आदित्य के अंदर भी कुछ पिघल सा गया, उसे लगा वो आगे बढ़ कर राजा के सीने से लग जाये और अपने इतने सालों के गुस्से को रो धोकर बहा दे, लेकिन उसने ऐसा नही किया। चुपचाप अपनी जगह से वो खड़ा हुआ ही था कि राजा ने कॉर्नर टेबल पर रखी उसकी दवाएं उठा कर साथ रख ली। वापस मुड़ कर उसने आदित्य के कंधे पर हाथ रखा …

” चले? “हाँ में सर हिला कर आदित्य उसके पीछे चल पड़ा। बाहर ही काउंटर पर बिल भरती बाँसुरी उन लोगो का ही इंतेज़ार कर रही थी।
   उन लोगो को आते देख वो भी उन लोगो के साथ आगे बढ़ गयी।
    बाहर अपनी गाड़ी न देख आदित्य राजा की तरफ देखने लगा। उसे उंगली के इशारे से राजा ने अपनी गाड़ी की तरफ मोड़ दिया

  ” तुम्हारी गाड़ी को तुमसे कहीं ज्यादा मरम्मत की ज़रूरत थी, उसे सर्विस सेंटर भेज दिया है। एक हफ्ते में गाड़ी वापस आ जायेगी। अब चलें।”

  आदित्य की समझ से परे था कि ये दोनों उसे कहाँ लेकर जाने वाले हैं पर इस वक्त उसकी जो मानसिक स्थिति थी वो चुपचाप गाड़ी में बैठ गया।
  राजा ने उसके बैठते ही गाड़ी बाँसुरी के सरकारी बंगले की ओर भगा दी।

     बंगले के पोर्च में गाड़ी खड़े कर राजा गाड़ी से उतरा और आदित्य की तरफ का दरवाजा खोल दिया, बड़े संकोच से ही आदित्य नीचे उतर गया..

” इतना परेशान मत होना आदित्य, ये तुम्हारी भाभी का घर है यानी इनका बाँसुरी अजातशत्रु सिंह का। ”

  राजा भी समझ चुका था कि आदित्य सब जान चुका है।

   आदित्य को अंदर बैठा कर बाँसुरी सबके लिए कॉफी बनाने अंदर चली गयी।
   राजा आदित्य के करीब चला आया…

” मैं जानता हूँ अब तक तुम मेरा परिचय जान ही चुके हो, तुम्हारे मन में भी कई सवाल आ रहे होंगे? देखो मेरा शुरु से इस बात पर यकीन है कि रिश्तों को बचाये रखना है तो बातें बहुत ज़रूरी हैं। जहाँ अबोला होता है वहाँ फिर गलतफहमियां पैदा होती जाती हैं और ये गलतफहमी की बेल अगर एक बार मन मे मजबूती से जम गई फिर शक और शुबहों कि खाद इसे ऐसे सींच देती है कि हर बात बेमानी लगने लगती है।
     तुम हमारे परिवार के लिए कभी गैर नही रहे, बल्कि सच कहूं तो हम सब आज तक तुम्हारे अस्तित्व से ही अनजान थे।
मुझे नही लगता कि काका साहेब ने तुम्हे जान बूझ कर छोड़ा होगा ,ज़रूर कुछ तो गलतफहमी उन्हें भी हुई होगी वरना वो ऐसा कभी नही कर सकते आदित्य। विश्वास करो मेरा। मैंने उन्हें बहुत करीब से देखा है, तुम्हारी माँ के जाने के गम को वो अब तक नही भुला पाए हैं और खुद को तिल तिल मारते चले आ रहें हैं आज तक।
   अगर तुम उनके जीवन मे वापस आ जाओ तो हो सकता है उनका बचा खुचा जीवन संवर जाए।”

  ” पर वो हमें आखिर क्यों अपनाएंगे? “

  ” क्योंकि तुम उनके बेटे हो, उनका अपना खून हो। हमारे खानदान का खून हो। ”

” और उनकी पत्नी? उनकी बेटी? “

.” हर कोई तुम्हे अपना लेगा, तुम एक कदम आगे बढ़ा कर तो देखो मेरे भाई , परिवार तुम्हारी तरफ चार कदम बढ़ाएगा और तुम्हे गले से लगा लेगा। यही तो रिश्ते होतें हैं। ”

  ” आप हम पर इतने मेहरबान क्यों हैं भला? हमने आज तक आपका कोई भला नही किया? उल्टा आप हमारे ऑफिस में भी हमारा अच्छा ही सोच रहे थे कर रहे थे। क्यों ? “

” हर सवाल का जवाब नही होता आदित्य! साहेब ऐसे ही हैं। ये क्या करते हैं? क्यों करतें हैं इन बातों के जवाब हम साधारण बुद्धि के जीव नही समझ सकते क्योंकि इनकी अप्रोच ही अलग होती है।
    इन्हें जैसे ही ये पता चला कि काका साहब का बेटा इनके महल से दूर अलग अकेला पड़ा है , अपने उस अकेले छोटे भाई को मना  कर लाने ये महल से निकल गये, और उसी समय अपने दूसरे छोटे भाई के ऊपर सारी जिम्मेदारी डाल गए जिससे इनके तुम्हें लेकर लौटने तक में या तो वो शासन करना सीख जाए और या फिर हार कर उनके लौटने पर सब कुछ बाइज्जत इन्हें वापस कर दे, जिससे आगे राजगद्दी का क्या करना है ये सब ये सभी बड़े बुज़ुर्ग मिल कर तय कर सकें।”

   बाँसुरी ने कॉफी आदित्य के हाथ में पकड़ाई और अपनी कॉफ़ी लिए राजा के बगल में जा बैठी।

  आदित्य कॉफी पीते पीते उन दोनों की सारी बातें सुनता रहा, कुछ अपनी भी कहता रहा, और इस सारी बातों में धीरे धीरे उसके मन का मैल घुलता चला गया। वैसे तो वो बहुत सी बातें कहना चाहता था, मामा जी की साज़िशें, उसके मन में बचपन से भरी गयी कालिख लेकिन अपने संकोची स्वभाव से वो उतना ही कह पाया जितना उसे ज़रूरी लगा।
   उन दोनों को बात करते छोड़ बाँसुरी उठ कर भीतर चली गयी। सोने के कमरे में आदित्य के लिए प्रबंध कर वो वापस बाहर चली आयी। दोनो भाइयों को बातों में उलझा देख उसने धीमे से आदित्य के सोने के कमरे की ओर इशारा किया और वापस अंदर चली गयी।
    कुछ आधे घण्टे बाद वो एक बार फिर कमरे का चक्कर लगा गयी।
     कुछ देर बाद फिर वो वापस आयी तो आदित्य से बात करते राजा ने आदित्य के पीछे की ओर खड़ी बाँसुरी की ओर एक नज़र देखा और मुस्कुराते हुए आदित्य की बात का जवाब देता रहा। बाहर दरवाज़े से टिक कर खड़ी बाँसुरी राजा को देख मुस्कुराती रही….

  “आदित्य अब तुम्हें भी सोना चाहिए, रात बहुत हो गयी है। बाँसुरी आदित्य के सोने की व्यवस्था कहाँ की है? ”

बाँसुरी पीछे चुपचाप खड़ी थी उसे नही लगा था कि राजा एकदम से उसका नाम ले लेगा, वो अचकचा गयी, आदित्य को भी बाँसुरी पीछे खड़ी है ये पता नही था, वो भी उसे देख चौन्क गया।

  ” जी ! किस तरफ जाऊँ मैं?”

  आदित्य ने बाँसुरी से पूछा और बाँसुरी ने गलियारे के एक ओर बने कमरे की ओर इशारा कर दिया।
   आदित्य उठ कर उसी कमरे की ओर बढ़ गया, उसके जाते ही राजा मुस्कुरा कर बाँसुरी की तरफ बढ़ गया..

  ” ऐसे अचानक उसे सोने जाने के लिए कहने की क्या ज़रूरत थी? पता नही क्या सोच रहा होगा? “

” सोच रहा होगा उसके भैया भाभी बहुत रोमांटिक हैं. और क्या? “

” वही तो। कुछ भी उटपटांग सोचेगा अब। मैं तो बस ऐसे ही आकर खड़ी थी, आपने तो फंसा ही दिया साहेब।

  ” तो तुम सच मे बस ऐसे ही आकर खड़ी थीं तो मैं जाऊँ आदित्य के कमरे में ही हमारी बची खुची बातें पूरी करने? “

” ये थोड़े न कहा मैंने? उसे भी तो आराम की ज़रूरत है। आपका क्या है, आप तो हैं ही निशाचर। न रात को नींद आती आपको न दिन में। बस रात दिन आपसे काम करवा लें कोई। सच में साहब ! थकते नही हैं आप।

  ” थकते हैं हुकुम ! लेकिन आपको देख कर सारी हिम्मत वापस जुड़ जाती है। एक बार अपनी पूरी रियासत और पूरे खानदान को जोड़ लूँ बस उसके बाद सुकून ही सुकून है।  अब पास आ जाओ, अब इतनी दूर क्यों खड़ी हो , और ये हाथ में क्या छिपा रखा है दिखाओ?”

    राजा ने बाँसुरी के हाथ आगे कर खोल दिये, उसके हाथों में कैंची थी। वो अपनी हथेली पर कैंची रखे मुस्कुरा उठी..
    राजा ने ये क्यों का इशारा किया और बाँसुरी ने उसकी बेतरतीब मूंछों की ओर इशारा कर दिया…

” ये आपके झाड़ झंखाड़ थोड़े सेट कर लूं। ”

” इतनी रात में मूंछें कौन सेट करता है हुकुम? “

  ” अच्छा खासा क्लीन शेव्ड हो गए थे, फिर से क्या ज़रूरत थी इन जंगल झाड़ियों की? “

” स्टाइल है हमारा। और वैसे सच कहूं तो थोड़ा समय भी नही मिला कि बार्बर बुला कर सेट करवा ली जाए। अब तुम अभी कहाँ ये सब ले बैठी हो, अभी छोड़ो मैं कल सुबह सुबह करवा लूंगा। ”

” नही कम से कम थोड़ा सा सेट कर दूंगी, आपकी बेतरतीब मूंछे डिस्टर्ब करती हैं।”

  एकबारगी राजा को समझ नही आया, और फिर समझ आते ही वो ज़ोर से हँसने लगा,हंसते हंसते उसने आगे बढ़ बाँसुरी को अपनी बाहों में भींच लिया

” तो ये बात है। हुकुम को गड़ती हैं हमारी शानदार मूँछे।”

  ” हाँ बाल भी तो साही के कांटो से हैं आपके।”

  बाँसुरी की बात सुन हँसते हँसते उसने बाँसुरी को अपनी बाहों में भर लिया….
      दीन दुनिया से बेखबर दोनो खुद में खोए जाने कब तक जागते रहे…..


   *********

    सुबह सुबह समर जोगिंग कर के वापस लौट रहा था कि पिया अपनी स्कूटी खड़खड़ाती चली आयी।
उसे आते देख वो एक तरफ हो गया, अपनी गाड़ी खड़ी कर पिया उसके पास चली आयी।

  ” आइये अंदर चलतें हैं।”

हाँ में सर हिलाती वो उसके साथ महल के अंदर चली गयी।
   महल के पिछले हिस्से में जिस तरफ समर के परिवार का निवास था, समर उसी ओर बढ़ गया, पिया भी उसके पीछे पीछे चली गयी।
    अंदर हॉल में ही समर की माँ और उसके पिता बैठे थे, दोनो को नमस्ते कर पिया आगे बढ़ने लगी, लेकिन कुछ सोच कर वो समर की माँ के पास रुक गयी…

” अब आपकी तबियत कैसी है मिसेस सिंह? “

  ” मैं ठीक हूँ डॉक्टर! आप कैसी हैं? “

” एकदम मस्त ! आज मंत्री जी को कुछ बहुत ज़रूरी दिखाना था उसी कारण सुबह सुबह आयी हूँ। ”

” ओह्ह ! ऐसी बात है क्या? जाओ जाओ फिर मंत्री जी को बता दो। ”

  समर की माँ मुस्कुरा उठी, उनके पास बैठे समर के पिता भी हल्के से हँस दिए।
   समर ने दोनों को देख कर न में सर हिलाया और अंदर चला गया, उसके पीछे पिया के जाते ही समर के पिता ने उसकी माँ से ही पूछ लिया

  “है कौन ये लड़की ? ”

  समर की माँ मुस्कुरा उठी

  “अभी तक तो हमारी डॉक्टर ही है। अब आगे कहीं तुम्हारे मंत्री की की मंत्राणी जी न बन जाये? “

  ” पर तुम्हारा लड़का तो उस केसर के चक्कर में फंसा हुआ है। ”

” कौन बोलता है। हम हमारे बेटे को अच्छे से जानते हैं, उसे वो केसर कभी पसन्द ही नही आई।

  ” लेकिन युवराज सा तो उसी के लिए बात करने आये थे, रूपा बाई सा भी साथ थी याद नही है क्या आपको?

” हमें याद है लेकिन आपके बेटे का स्वभाव भी हम जानते हैं। केसर जैसी से आपका सनकी कभी शादी नही करने वाला। और वैसे जैसा इसका स्वभाव है हमे तो लगता था ये कभी शादी वादी में उलझेगा ही नही। पता नही अजीब ही लड़का है आपका, बस सारा समय इसे काम की पड़ी रहती है। जाने इतना काम करके करना क्या है इसे?

  ” आप समझती नहीं हैं उसका प्यार ये महल और इसकी सेवा नही है बल्कि उसका असली लगाव अपने भाइयों के प्रति है, चाहे वो युवराज सा हों या राजा अजातशत्रु।
    आजातशत्रु में तो तुम्हारे बेटे के प्राण बसते हैं, जानती नही हो क्या? बचपन से ही तो ऐसा है तुम्हारा बेटा। हमसे ज्यादा उन्ही की सुनता है , और उन दोनों भाइयों ने भी कभी उसे खुद से कम समझा है क्या? हमेशा अपने सगे छोटे भाई सा प्यार दिया है।

  “हाँ अब राजा ही इसका ब्याह भी करवाएंगे। बस जल्दी से जल्दी वापस आ जाये। उनके बिना महल महल नही लगता। कोई रौनक नही रही महल में। अब बहुत दिन हो गए महल के राजा रानी को वापस लौट आना चाहिए।  चलिए आप अपना अखबार पढ़िए मैं होने वाली बहु के लिए चाय कॉफी कुछ भिजवा दूं। ”

  ” वाह मतलब आपने मान लिया कि यही आपके सनकी सम्राट की रानी हैं। “

  ” क्यों इसके पहले किसी लड़की को आज तक आपके बेटे ने अपने कमरे तक जाने दिया भी है? आपके नमूने के लिए ऐसी नमूनी ही चलेगी, दोनों अलग तरह के सनकी हैं। ”

  ” क्यों लड़की तो अच्छी खासी लगी हमे। “

  ” पहली नज़र में अच्छी खासी लगती है पर है वो भी अपने तरह की सनकी।

  दोनो पति पत्नी आपस मे बातें करते हँस पड़े, समर की माँ उठ कर सहायिका के हाथों उन दोनों के लिए कुछ भेजने भीतर चली गयी।

इधर समर के साथ गयी पिया समर के इशारे पर एक ओर बैठ गयी….

“जी डॉक्टर साहिबा , तो कल रात क्या बताने वाली थी आप? “

” मैं ? मैं आपको कुछ बताने वाली थी, अरे हाँ याद आया है। असल में मेरे साथ ये होता है कि जो जिस वक्त सामने आता है ना उसकी बातें दिमाग में घूमने लगती हैं।
  अभी आपकी मॉम को देखा तो उनकी तकलीफ याद आ गयी।
  हाँ तो मैं आपको राजा अजातशत्रु जी के बारे में बताना चाहती थी।

  ” हाँ ये तो कल रात भी आपने कहा था। ”

  ” जी मैं ये बताना चाहती थी कि जैसा मुझे लगा था वही हुआ है। अजातशत्रु जी को मल्टीविटामिन्स के नाम पर कुछ गलत दवा दी जा रही है। और इन्ही दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण वो अचानक से कुछ बातों को भूल जाते हैं,दरअसल ये दवा दिमाग पर काम करती है और इसलिए दिमाग का वो हिस्सा जो मैमरी के लिए जवाबदार होता है की कोशिकाओं को कमज़ोर कर याद्दाश्त में परिवर्तन ले आता है।
   सीधे सपाट शब्दों में मैमरी लॉस का कारण बनता है।

  ” तो इसका मतलब ये परमानेंट डैमेज नही करता है।”

  ” बिल्कुल करता है। अगर ये दवाएं एक साल से अधिक समय तक कोई लेता रहे तो उसके दिमाग पर ये गंभीर असर पैदा करता है। आपको क्या लगता है आपके हुकुम कब से ये दवाएं ले रहे थे?”

  ” उन्हें एक बार हाथ में गोली लगी थी, उसके लगभग कुछ महीनों बाद से ही उनकी दवाएं शुरू हुई थी। कुछ ज़रूरी विटामिन्स और बाकी की दवाएं। “

” कौन सा डॉक्टर देख रहा था उन्हें?”

” हमारे फ़ैमिली डॉक्टर पहले देख रहे थे,बाद में उनके रिफरेंस में एक दूसरे डॉक्टर उन्हें देखने लगे । “

” हम्म हो सकता है, उन्हीं दूसरे डॉक्टर ने कुछ दवाओं में  फेर बदल किया हो। आप उनसे ज़रा कड़ाई से पूछताछ कीजिये। ”

  समर के चेहरे का रंग बदलने लगा। वो उसी वक्त अपनी कुर्सी से उठ गया, उसे इतना नाराज़ होते देख पिया ने उसके कंधे पर हाथ रख उसे वापस बैठा दिया…

  ” शांत रहिए मंत्री जी!, मैंने हुकुम की दवाओं के सैम्पल लैब से टेस्ट करवा लिए थे, उनकी रिपोर्ट्स है मेरे पास। उन डॉक्टर ने कहीं कोई प्रेस्क्रिप्शन तो दिया नही था, उनके पास से पूरे महल के लिए अलग अलग दवाओं के पैकेट्स आया करते थे,  उसी में हुकुम की दवाओं में ये दवा भी थी।
    मैं चूंकि उसी अस्पताल में काम करती हूँ इसलिए मैंने उन डॉक्टर साहब पर नज़र रखनी शुरू की और साथ ही उन्हें थोड़ा विश्वास में लेकर पूछताछ भी की।
वैसे ऐसा कुछ खास तो नही पता चला लेकिन एक बात जरूर समझ आ गयी कि वो किसी को यहाँ की सारी रिपोर्ट्स भेजतें रहते हैं।
   एक बात और आश्चर्य करने वाली है कि आपके हुकुम महल से बहुत समय से बाहर हैं इसके बावजूद उन तक दवाएं कैसे पहुंच पा रहीं हैं।
   आप शांत दिमाग से बैठ कर ये सोचिए कि उस डॉक्टर से कैसे आप ये राज़ कुबूल करवाएंगे , क्योंकि अगर उसे आभास हो गया कि आप उससे कुछ पूछताछ करने वाले हैं तो वो रातोरात यहाँ से भाग खड़ा होगा और उसके बाद उसे ढूंढना या इस राज़ का खुलना मुश्किल हो जाएगा। “

  ” हम्म सही कह रही हैं आप डॉक्टर साहिबा! इस वक्त वो डॉक्टर साहब कहाँ होंगे? “

” हॉस्पिटल में ही होंगे, उस वक्त वो वहीं होतें हैं। एक बात और उनके बारे में  मुझे पता चली है वो ये है कि ये डॉक्टर साहब देहरादून के रहने वाले हैं, वहीं कहीं से इन्होंने पढ़ाई भी की है। “

  ” जी मुझे पूरा यकीन था ये वहीं कही से होंगे। अब काफी बातें क्लियर हो गईं है। आपका भी बहुत शुक्रगुज़ार हूँ आपने बहुत मदद की मेरी डॉक्टर साहिबा।”

” ये क्या डॉक्टर साहिबा लगा रखा है। मेरे मॉम डैड ने भी मेरा एक खूबसूरत सा नाम रखा है और मुझे मेरे नाम से बुलाये जाना ही पसंद आता है ना कि मेरे पद से। ”

  ” अच्छा जी तो क्या मेरा नाम खराब है। ” समर की बात सुनते ही पिया अपनी जीभ काट कर रह गयी

  ” मेरे भी माँ पापा ने बड़े प्यार से और चाव से मेरा नाम रखा समर सिंह और आपने अच्छे खासे नाम पर मेरी पद प्रतिष्ठा को रख दिया,मुझे मंत्री जी बुलाने लगीं। “

” सॉरी सॉरी मंत्री जी! असल में आपकी पर्सनैलिटी इतनी दमदार है ना कि मुहँ से खुद ब खुद मंत्री जी निकल आता है, वैसे तो आप भी कहीं के राजे महाराजे से ही लगते हैं पर मंत्री जी सूट्स यू। ”

  ” एंड डॉक्टर साहिबा सूट्स यू!”  समर की बात सुन पिया मन ही मन कुछ सोचती धीमे से बड़बड़ा उठी

  ” हद दर्जे का हाज़िर जवाब है, कम्बख़्त का जब तक मैं नाम नही लुंगी ये मुझे ऐसे ही छेड़ता रहेगा।

  पिया की धीमी सी गुनगुनाहट सुन समर ने उसकी ओर कान लगा दिए

” कुछ कहा आपने डॉक्टर? “

” जी नही तो। मैं ये कह रही थी कि मैंने अपने प्रोफेशन से हट कर जासूसी का काम भी किया है इसके लिए मुझे कोई एप्रिसिएशन या कोई फ्रीबिज़ कुछ और नही  मिलेगा ?”

   समर मुस्कुरा कर अपनी जगह से उठ कर पिया तक चला आया, धीमे से उसके चेहरे पर वो झुका ही था कि पिया ने आंखें बंद कर ली। लगभग पांच मिनट तक जब समर की तरफ से कोई हरकत नही हुई तो पिया ने आंखे  खोल दी, समर उसकी कुर्सी से एक ओर हटकर टेबल के सहारे हाथ बांधे खड़ा उसे ही एकटक देख रहा था, पिया ने आंखें फाड़े उसे देखा तो समर ने आंखों के इशारे से उसकी गोद की ओर इशारा कर दिया।
    पिया ने देखा उसकी गोद में एक छोटा सा डॉक्टर टेडी बियर रखा था, जिसके गले में एक स्टेथो लटक रहा था। उसे देखते ही पिया के चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान खींच गयी….

  ” अरे वो क्या है ना !अभी कुछ दिन पहले एक मूवी में देखा था कि ऐसे ही एक डॉक्टर एक पुलिस वाले कि मदद करती है और जैसे ही बदले में कुछ मांगती है पुलिस वाला जो कि उस फिल्म का हीरो भी था वो आकर उस हीरोइन को किस कर लेता है और कहता है ये एप्रिसिएशन चलेगा या और कुछ चाहिए। तो बस मुझे वही सीन याद आ गया था…”

   बोलने को तो पिया बोल गयी लेकिन बोलते बोलते ही उसे ध्यान आ गया कि वो क्या बोलना चाहती थी और क्या बोल गयी। उसकी बात सुन समर मुस्कुरा कर नीचे देखने लगा और उसकी इस हरकत को देख पिया और भी शरमा गयी।

  ” सॉरी सॉरी मैं क्या बोलना चाहती थी और क्या बोल गयी।  आप प्लीज़ मुझे गलत मत समझियेगा। मैं असल मे कहना ये चाहती थी कि उस फिल्म में…

  पिया बोल रही थी कि समर उसके करीब चला आया, उसके गालों पर धीरे से उसने अपने होंठ रख दिये।
    पिया बोलते बोलते एकदम से खामोश रह गयी। कुछ सेकण्ड्स को उसकी धड़कने उसे खुद अपने कानों में सुनाई पड़ने लगीं , वो अपनी सुध बुध खोती इसके पहले ही उसके कानों में समर की आवाज़ गूंज उठी…

  ” चले अब जरा उन डॉक्टर साहब की खबर भी ले ली जाए? “

  बिना कुछ कहे पिया चुपचाप समर के पीछे बाहर निकल गयी।

  “अरे तुम दोनों कहाँ चल दिये, मैं कॉफी लेकर आ रही थी। ”

  ” अभी नही पी पाऊंगा माँ,कुछ बहुत ज़रूरी काम से जाना है। आकर पी लूंगा। ”

  समर ने पीछे मुड़ कर पिया को देखा और आंखों ही आंखों में उससे इशारे से पूछ लिया

  “तुम्हे  तो नही पीना कॉफी पिया। ”

  जल्दी जल्दी न में सर हिला कर वो भी उसके पीछे आगे बढ़ गयी….

  ” ये इतनी सी देर में ऐसा क्या हो गया जो डॉक्टर साहिबा पिया बन गयी? ” समर के पिता के सवाल पर उसकी माँ मुस्कुराने लगी…

” बस अब देखते जाइये, जल्दी ही यही डॉक्टरनी आपकी बहु भी बन जाएगी।”

  दोनो हंसते हुए अपनी चाय पीने लगे।

**********

   राजमहल में विराज दीवानखाने में गांव के किसी मुद्दे पर दोनो पक्षों की बातें सुन रहा था। कभी एक पक्ष हावी हो जाता तो कभी दूसरा लेकिन इसी बहसबाजी का नतीजा ये हो रहा था कि उन दोनों पक्षों की बातें विराज के सर के ऊपर से निकल रहीं थीं।
     युवराज भैया काका साहेब के साथ ऑफिस में बैठे विदेशों से जुड़े अपने व्यापार का लेखा जोखा देख रहे थे। समर अस्पताल के लिए निकल चुका था, ऐसे में अकेले विराज से कुछ संभाला नही जा रहा था कि उसी वक्त विराज के फ़ोन पर महल से रेखा का फ़ोन चला आया।
    महाराजा हुकुम की तबियत कुछ बिगड़ने के कारण रेखा विराज को तुरंत उनके कमरे में बुला रही थी।
     विराज ने सभा को कुछ समय के लिए रोका और समर को फ़ोन लगाते हुए महाराज के कमरे की ओर निकल गया।

    समर अस्पताल पहुंचा और तेज़ कदमों से भीतर चला गया। उसके पीछे ही पिया भी जल्दी जल्दी अंदर चली आयी।
    डॉक्टर साहब के केबिन के बाहर कुछ मरीज़ बैठे इंतेज़ार कर रहे थे।
   समर और पिया को देखते ही केबिन के बाहर बैठा पियोन अंदर डॉक्टर को जानकारी देने चला गया।  समर और पिया अंदर गए तब डॉक्टर साहब किसी से फोन पर बात कर रहे थे, दोनो को बैठने का इशारा कर उन्होंने फ़ोन रखा और समर की ओर मुड़ गए…

” जी समर जी कहिये अब आपकी मदर कैसी हैं? “

  “” ठीक हैं डॉक्टर साहब! आज तो मैं आपसे हुकुम की दवाएं लेने आया था। दवा खत्म हो गयी है उनकी। ”

  ” इतनी जल्दी कैसे खत्म हो गयी? अभी तो मैंने महीने भर की दवा भेजी थी। ”

  ” कहाँ भेजी थी आपने। मेरे पूछने का मतलब ये है कि हुकुम तो किसी एक जगह रह नही रहे हैं अभी , ऐसे में आप किस पते पर दवा भिजवातें हैं।”

  समर की बात सुन डॉक्टर मुस्कुरा उठा…

” जैसे आपको आपके हुकुम की चिंता है और कोई भी है जिन्हें उनकी बहुत चिंता है, उन्होंने अपनी पत्नी के घर का पता हमें दे रखा था, की हुकुम की दवाएं एक दिन भी नागा हुए बिना पहुंच जाएं। तो बस मैं उसी पते पर दवाएं भेज दिया करता था। अब वहाँ से उनकी पत्नी के घर वाले कहाँ भेजतें है ये नही पता लेकिन मैं बीच बीच में प्रेम साहब से जानकारी ले लिया करता था कि हुकुम दवाएं ले रहे है या नही? “

समर समझ गया कि प्रेम को दवाओं की असलियत के बारे में कोई जानकारी नही है…

  ” ये हमारे प्रेम साहब जी को बस पता चले कि ये चीज़ हुकुम के लिए सहीं हैं बस वो बिना संजीवनी पहचाने पूरा पहाड़ उठा  लाएंगे। क्या करूँ मैं इस आदमी का? “

समर ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा लेकिन पिया तक उसकी आवाज़ पहुंच ही गयी…

” आपका भी हाल कुछ कुछ वैसा ही है। अब इनका क्या करना है वो सोचिए। ” 

डॉक्टर दोनो की बातें सुनने की कोशिश में कुछ आगे झुक गया..

  ” बताएंगे बताएंगे डॉक्टर साहब । आपको भी सब बताएंगे लेकिन पहले आपको बताना पड़ेगा, एक एक बात हमें सच सच बतानी होगी।।

  ” क्या बताना होगा समर साहब। “

  ” यही की हुकुम को कौन सी दवा आप दे रहे और क्यों दे रहे? “

  ” जी मैं तो बस कुछ सप्लीमेंट्स ही दे रहा हूँ। “

  ” ऐसे कौन से सप्लीमेंट्स हैं जो दिमाग को सुन्न किये जा रहे, याददाश्त को मिटाए जा रहे।

  ” नही ऐसा तो कुछ … समर के तेज तेवर देख डॉक्टर ज़रा घबरा गया और उसकी ज़बान लड़खड़ाने लगी

  ” सर आपने जो दवाएं महल भेजनी थी और जो आप हुकुम के नाम पर पार्सल करने वाले थे मैंने उन सभी से थोड़ा सा सैम्पल निकाल कर लैब में टेस्ट करवा लिया है।
   मेरे पास लैब के टेस्ट रिपोर्ट्स भी हैं, तो अब ऐसे में कोई भी नया झूठ बोल कर अपनी जान आफत में मत डालिये।
   ये जो सामने खड़े हैं ना ये समर वैकेशन वाले हल्के फुल्के मज़ेदार समर नही बल्कि युद्ध वाले हैवी समर हैं। आप सब कुछ सच बता दें उसी में सब की भलाई है।”

   पिया की बात सुन समर जहाँ उसकी समझदारी से प्रभावित होने जा रहा था कि उसकी समर वेकेशन वाली बात सुन इतने गुस्से में भी उसे हंसी आ गयी। लेकिन समर के तेवर देख डॉक्टर के चेहरे पर फिर हंसी नही आई….

    वो बार बार अपनी बात दुहराता खड़ा रहा कि वो कुछ नही जानता, तभी पिया ने अपने बैग से निकाल रिपोर्ट्स उसके सामने की टेबल पर पटक दी। रिपोर्ट्स देख डॉक्टर के माथे पर पसीने की बूंदे छलक आयी…

   वो रिपोर्ट्स को देख रहा था कि समर ने वो सारे कागज़ उठा कर उसके हाथ में थमा दिए..

  ” ध्यान से देख लो डॉक्टर, तुम्हारी ही भाषा में लिखा है, अब तुम्हारी वाली अंग्रेज़ी मुझे तो आती नही लेकिन इन डॉक्टर साहिबा ने मुझे मेरी बोली में सब समझा दिया है। तुम्हें अब भी अगर समझ नही आ रहा तो अब मैं मेरी बोली और भाषा में समझाना शुरु करूँगा और अगर मैं मेरी बोली पर आ गया तो फिर तुम्हें ब्रम्हा भी नही समझा पाएंगे। समझे कि मैं क्या कहना चाहता हूँ।”

  डॉक्टर तुरंत समर के पैरों पर गिर गया…

  ” मुझे माफ़ कर दीजिए समर सा। बस कुछ पैसों के लालच में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी। मल्टीविटामिन्स के डिब्बे में मैं दूसरी दवा डाल कर पैक कर प्रेम साहब को भेज दिया करता था। उन्हें पूरी तरह से विश्वास में ले रखा था कि ये दवा खाना हुकम के लिए बहुत ज़रूरी है और इसी को खा कर हुकुम ठीक हो जाएंगे, लेकिन उन्हें कभी आभास नही होने दिया कि ये गलत दवा है। ये सब मैंने ठाकुर साहब के कहने पर किया, असल में उनके हमारे परिवार पर बहुत एहसान है। मेरे पिता के खेत उन्हीं के पास रहन पड़े थे, उस पर जब मेरी मेडिकल की पढ़ाई के लिए मेरे पिता और कर्ज़ लेने गए तब उन्होंने उन चंद रुपयों के बदले मेरे पिता से साधिकार मुझे खरीद लिया।
   उस समय मेरी ज़िद थी कि मुझे मेडिकल की पढ़ाई किसी भी कीमत पर करनी है। खुद का बंधुआ होना ऐसा भी हो सकता है ऐसा मैंने कभी नही सोचा था। मुझे लगता था ज्यादा से ज्यादा अपने महल की गुलामी या अपने किसी अस्पताल की देखभाल में लगा देंगे।
   लेकिन उन्होंने मेरी पांच साल की पढ़ाई के दौरान मुझे कभी किसी चीज़ की कमी नही होने दी। और उल्टा मेरे पिता के खेत भी वापस कर दिए,रुपये पैसों से मेरी मदद भी की।
  लेकिन डिग्री पूरी कर के आते ही उन्होंने एक एक कर अपने सारे एहसानों का बदला वसूलना शुरू कर दिया।
    उनके एक कोई बिज़नेस राइवल थे, मुझसे पूछ कर उनकी शराब में कभी कोई दवा मिलवा दी तो कभी अपने किसी और दुश्मन के खाने में कुछ मिलवा दिया।
   पहले के ज़माने में कहते थे न कि राजा महाराजा लोग अपने पास विशेषज्ञ चिकित्सक रखा करते थे और उनसे सलाह कर अपने दुश्मनों का सफाया दवाओं के द्वारा भी किया करते थे, बस वैसा ही कुछ इन ठाकुर साहब का भी हिसाब है। उन्होंने आपके हुकुम की तबियत बिगड़ती चली जाए इसलिए उन्हें भी दवा खिलवानी शुरू कर दी।
   मैं तो पूरी तरह से उनके हाथ की कठपुतली हूँ, वो जो कहते हैं वही करता हूँ क्योंकि आज भी मेरा परिवार तो उनका बंधुआ मजदूर ही है। मेरे द्वारा ये सब करने के बाद अब वो बाबू को कुछ कहते नही लेकिन उनके सामने बार बार मेरी पढ़ाई लिखाई करवाने के किये एहसान ज़रूर जता जातें हैं। अब बाबू कहाँ जानते हैं कि मेडिकल की पढ़ाई के बदले उनका लड़का कहाँ और कैसे फंस गया है।

  “तुम ठाकुर साहब की बात काट भी तो सकते थे ना?”

  ” कैसे काटता? वो तो साफ सपाट शब्दों में मेरे बाबू और इजा को मारने की धमकी दे चुके हैं। मेरा उनके खिलाफ खड़ा होना यानी मेरे बाबू की जान पर…

   डॉक्टर बोलते बोलते चुप रह गया…

  “” हम्म ठीक है। तुम्हें और तुम्हारे परिवार को कुछ नही होगा लेकिन यही सब तुम पुलिस के सामने कबूल कर सकते हो?

  “” जी अगर मेरा परिवार सुरक्षित है तो मैं पुलिस के सामने सब कबूल कर लूंगा। ”

  ” ठीक है हम लोग कोशिश करेंगे कि तुम्हारी डिग्री पर आंच न आये । कोशिश यही रहेगी कि तुम्हारी पहचान छिपी रहे। ”

  डॉक्टर चुपचाप हाँ में सर हिलाए खड़ा रहा। वो आगे कुछ कहता कि समर के फ़ोन पर विराज का फ़ोन चला आया।
    विराज से बात होते ही समर हड़बड़ा कर महल की ओर निकल गया, लेकिन जाते जाते वो एक बार फिर उस डॉक्टर को धमका गया…

  ” अगर आज की यहाँ की बात इस कमरे से बाहर गयी तो समर की गोली होगी और तेरा सर। याद रखना जब तक नाराज़ नही होता तभी तक मैं सही बंदा हूँ एक बार दिमाग किसी पर सटक गया फिर तो गन में साइलेंसर लगाने की भी नही सोचता सीधा शूट कर देता हूँ।
   वैसे चाहूं तो अभी के अभी तुझे पुलिस के हवाले कर सकता हूँ लेकिन तेरी कही हर एक बात पर विश्वास कर रहा हूँ और तुझे यहीं छोड़ जा रहा हूँ। अगर कोई भी होशियारी करने की कोशिश की तो याद रखना समर की नज़र तुझ पर ही है।”

  “मैं कोई बात बाहर नही जाने दूंगा समर सा। मैं यहीं हूँ आप जैसे ही बुलाएंगे मैं साथ चलने को तैयार हूँ। ”

  समर डॉक्टर को धमका कर बाहर निकल गया।
गाड़ी तक पहुंचते पहुंचते उसने राजा को फ़ोन लगा लिया।
    महाराज हुकुम की तबियत बिगड़ी थी और इस वक्त वो अपने सारे बच्चों को अपने पास देखना चाह रहे थे।
   उन्हीं की इच्छा पर उधर उनके पास खड़े युवराज और इधर महल की ओर तेज़ी से बढ़ते समर ने भी राजा को फ़ोन लगा दिया ….

  क्रमशः

aparna …

  

 

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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