मायानगरी -2

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  मायानगरी -2



     काउंसिलिंग से वापस लौट कर रंगोली के पैर जमीन पर नही पड़ रहे थे। चार दिनों में वहाँ जाने रहने की सारी तैयारियां पूरी कर रंगोली बिल्कुल किसी राजकुमारी सी अपने घर से पहली बार विदा हुई।
   सत्रह की अल्हड़ उम्र में पहली बार अपनी माँ पापा बहन को छोड़ कर जाना उसके लिए बहुत मुश्किल था।
  यही हाल उसकी माँ का हो रहा था। उनकी कनक कलेवर लड़की जिसको मेडिकल की तैयारी के कारण उन्होंने ज़मीन पर पैर नही रखने दिए थे आज खुद अपनी ज़िम्मेदारी बन कर उनसे दूर जा रही थी।
   पिछले चार दिनों से वाकई रंगोली के जाने की ऐसी तैयारियां की जा रहीं थी जैसे वो घर से अपने ससुराल विदा हो रही हो।
   भर भर के रिश्तेदार रंगोली से मिलने आ रहे थे, आखिर घर परिवार से पहली बार कोई डाक्टरी पढ़ने बाहर जा रही थी।
  मामी जी किलो भर पिन्नियों के साथ चने के पापड़  ले आयीं तो वहीं ताई जी दो जोड़ी नए सूट के कपड़े लेती आयीं।
   सबसे खुशी खुशी मिलती रंगोली चहक रही थी…

” अरे बड़ी अम्मा इसकी क्या ज़रूरत थी? ” बोलते हुए भी उसने फटाफट पन्नी में से निकाल कर बंधेज का गुलाबी कुर्ता गले से लगा लिया..

” पर है बहुत सुंदर। थैंक यू !!!”

” अच्छे से पढना बेटा। फिर वापस आकर मेरे घुटनों का तू ही इलाज करना। मुये इनके मारे कही आना जाना मुश्किल हो रखा है ।”

” अरे अभी तो कॉलेज तक भी नही पहुंची है ये। ड़ॉक्टरी पढ़ने में बहुत समय लगता है अम्मा ? सिर्फ एम बी बी एस से कुछ नही होना जाना, उसके बाद पीजी भी तो करना पड़ेगा। पता नही ये झकली वहाँ क्या करेगी। ठीक से बोल तक तो पाती नही है। कोई ज़ोर से कुछ बोल भर दे तुरंत आंखों में आंसू चले आते हैं। ”

  मेहंदी की बात सुन रंगोली ज़रा सी रुआँसी हो गयी। बात तो सही थी। वो भले ही मेहंदी से दो साल बड़ी थी पर मेहंदी जैसी तेज़ तर्राट नही बन पाई थी।
   अपने विषय से इतर कुछ भी बोलने में उसे झिझक सी महसूस होती थी। पढ़ाई में अच्छी होने पर भी वाइवा में हमेशा पिछड़ जाया करती। कितनी भी अच्छी तैयारी हो वो सिर्फ लिख सकती थी,जवाब बोल कर बताना उसके लिए बहुत कठिन हो जाता था।
   अब तक तो चयन हो जाने की संतुष्टि में झूम रही थी लेकिन मेहंदी की बात ने उसे यथार्थ के धरातल पर पटक दिया था।
   वहाँ ढेर सारे सीनियर्स और टीचर्स के बीच वो कैसे और क्या करेगी।
  
  ” डरा क्यों रही है यार मेहंदी ? चल पैकिंग करवा मेरी। “

” मैं क्या पैकिंग करूँ। मम्मी तो ऐसा लग रहा है पूरा बाजार पैक कर चुकी हैं तेरे लिए। “

  मेहंदी की बात सुन सामान के पैकेट्स कमरे में लेकर जाती रंगोली की माँ उसकी तरफ पलट गई..

” मेहंदी बेटा! वहाँ से ज़रा वो बड़ा पैकेट भी इधर ले आना।।”

  सुबह से चल रही पैकिंग से परेशान मेहंदी ने पैकेट उठा कर पलंग पर पटका और अपना रैकेट उठाये बाहर निकल गयी, जाते जाते रंगोली के कान में एक और ज़हरीला तीर छोड़ गई….

” मम्मी का बस चले तो इस घर में चक्के लगा कर भेज दे तेरे साथ!”

” तुझे क्यों जलन हो रही है? दो साल बाद ऐसे ही तेरी भी पैकिंग होगी। समझी । “

” नही समझना मेरी माँ। ये सारा घरेलू सामान तुझे मुबारक। मैं दो साल बाद कॉलेज पढ़ने जाऊंगी, तेरे जैसे गृहस्थी बसाने नही। “

   अपने रैकेट को हवा में लहराती हंसती खिलखिलाती मेहंदी बाहर निकल गयी और रंगोली मुस्कुरा कर अपनी माँ से लिपट गयी…

” मम्मी हर सैटरडे मुझसे मिलने आ जाओगी न? मैं रह नही पाऊँगी आपके बिना!”



“हर शनिवार तो मुश्किल होगा बेटा लेकिन महीने में एक बार जरूर कोशिश करेंगे कि मैं ना भी आ पाऊं तो तेरे पापा को ही भेज दूं।”

  मुस्कुरा कर माँ बेटी दोनो ने अपने आंसू पोंछ लिए!

बड़े धूम धड़ाके से रंगोली की विदाई हो गयी। रंगोली को बात बात पर छेड़ने वाली उसकी छोटी बहन ही उस की विदाई पर उसके गले लग सबसे ज्यादा रोई और रंगोली अपने पापा के साथ पूरे  चार घंटों का लंबा सफर तय कर मायानगरी पहुंच गई…

   वहाँ रानी बाँसुरी अजातशत्रु सिंह मेडिकल कॉलेज में उसके प्रवेश की सारी औपचारिकताएं पूरी कर उसके पिता ने उसके होस्टल आदि की व्यवस्था देखने के बाद उसका सामान उसके कमरे में रखवाया और उसे साथ ले बाहर शहर घूमने निकल गए। उनकी वापसी  रात की थी। इसी से बेटी को बाहर खिला पिला कर वापस कॉलेज कैम्पस में छोड़ वो बाहर निकल गए।
   रंगोली पापा के सीने से लगी बिलख उठी। उसे लगा ये मेडिकल सीट ये कॉलेज सब उसके ममी पापा के सामने बकवास है। वो क्यों चली आयी इससे अच्छा अपने ही शहर में कुछ पढ़ लेती। बी एस सी में भी तो आजकल कितनी सारी ग्लैमरस ब्रांच हो गईं हैं। माइक्रोबायोलॉजी है और …और… और उसे कुछ याद ही नही आया। उसकी आदत ही थी खुद में कुछ भी सोचते हुए खो जाने की। और अक्सर ऐसे खो कर वो बात की मुख्य जड़ ही भुला बैठती।
   उसके पापा ने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा और बाहर निकल गए। पापा का ऑटो आंखों से ओझल होने तक उन्हें बाय करती वहीं खड़ी रही फिर थके कदमों से अपने कैम्पस की ओर बढ़ गयी…

   अपने होस्टल पर पहुंच कर अपना कार्ड गार्ड भैया को दिखा कर वो सीढ़ियों की ओर धीमे कदमों से बढ़ी चली जा रही थी…

” बिटिया कोई ज़रूरत हो तो पूछ लेना हमसे। डरना बिल्कुल मत!”

  पीछे मुड़ कर एहसान भरी आंखों से उन्हें देख हाँ में सर हिलाती वो सीढियां चढ़ने लगी।
   फ़र्स्ट ईयर की लड़कियों के कमरे ऊपर ही थे , नीचे सीनियर्स के थे। डरना बिल्कुल मत ऐसा क्यों बोला उन्होंने ? कुछ देर सोच कर वो गर्दन को झटक कर ऊपर चढ़ती गयी। दूसरी मंजिल पर उसे कमरा मिला था।
   वो ऊपर जा रही थी कि सामने से उतरती दो लड़कियां टकरा गई…” फुजी है ? “
रंगोली चौन्क कर सामने देखने लगी…”जी ?”

” जी जी क्या बे? फुजी है तू? “

” फूजी मतलब ? “

” मतलब फर्स्ट ईयर जूनियर। “

” जी हाँ !”

” कौन सा कमरा अलॉट हुआ है?

” सत्रह नम्बर सी विंग में!”

  दोनो लड़कियां चौन्क कर एक दूसरे को देखने लगी…

” हद करती है यार ये हिटलर!मतलब क्या इस बार ग़दर मच गया कि हॉन्टेड रूम को भी लड़कियों को दे मारा।

“हम्म सुनने में तो आया है इस बार मैनेजमेंट कोटा से भीड़ आयी है…

” अरे तो इसका मतलब भुतहा कमरा भी उठा कर रहने दे दोगे। “

  दोनो लड़कियों की बातें सुनती रंगोली घबरा कर खड़ी रह गयी….

” सुन बहन कोई परेशानी हुई तो तुरंत कमरे से बाहर भाग निकलना। बस कुछ भी हो जाये उस कमरे की खिड़की से नीचे मत झांकना और ऊपर लगे फैन को मत देखना और हाँ सुन कान में रुई डाल कर पड़ी रहना जैसे कोई आवाज़ सुनाई नही दे रही हो। एक बात और सुन,अरे एक मिनट नाम क्या है तेरा? “

” जी रंगोली , रंगोली तिवारी। “

” ओहो बढ़िया है जेम्स बांड स्टाइल में नाम बता रही है। वैसे मेरा नाम वृंदा है और ये है भूमि। हम दोनों तेरी करंट सीनियर हैं। और हम एंटी रैगिंग वाले ग्रुप के हैं। किसी सीनियर ने सताया तुझे तो तुरंत हमारे पास आना। समझी?

हां में सर हिला कर रंगोली मुड़ कर जाने लगी…

“जा बेटा महादेव का नाम लेकर चुपचाप कान में रुई डाले सो जाना।”

  रंगोली पहले ही हद दर्जे की डरपोक थी। उसे रात में उठ कर वॉशरूम जाना हो तब भी वो मेहन्दी को उठा लेती थी। अब ऐसे में कमरे में अकेले रहना उसके लिए बहुत मुश्किल था। हालांकि कमरा एलॉट करते समय उसे होस्टल इंचार्ज सर ने कहा था कि कल से एक लड़की और उसके साथ आ जायेगी रहने। लेकिन आज की रात उसे अकेले ही रहना था।

   ताले में चाभी घुमाती  वो धीमे से अंदर घुस गई। कमरा छोटा ही था। दो अलग अलग दीवारों पर छोटी छोटी कैंप कॉट पड़ी थी, बिन चादर के गद्दे और और बिना लिहाफ के तकिए के साथ। उसी के एक ओर एक टेबल कुर्सी और लैम्प था, जिससे लग कर एक आलमारी खड़ी थी।
पहली नज़र में ऐसा डरावना नही था कमरा। सामान तो वो सुबह ही ऊपर भेज चुकी थी। गार्ड भैया के हाथ से। कमरे की चाबियां भी गार्ड के पास ही छोड़ दी थीं जो अभी उन्हीं से लेकर वापस आ रही थी।

   चाबी अंदर टेबल पर रख वो अपने बैग से टॉवेल और नाइट सूट निकाल कर नहाने वॉशरूम में घुस गई।
     बाल्टी में पानी लगा कर कपड़े टांगते वो वापस अपने खयालों में खो गयी थी। घर से निकलते समय उसकी सहेलियों ने उसे समझाया था, हॉस्टल के कमरे बाथरूम सब जगह कैमेरा चेक कर लेना। आजकल ज़माने का भरोसा नही रहा, उसी बात को याद कर वो बाथरूम में कैमेरा चेक करती रही कि बाल्टी के भरने की आवाज़ पर जैसे ही नल बंद करने उसने हाथ बढ़ाया चौन्क कर एक कदम पीछे हट गई। बाल्टी में पूरा लाल पानी भरा था,और वैसा ही खूनी पानी नल से आ रहा था।
   खून!!! उसके मुहँ से चीख निकल गयी, बड़ी मुश्किल से हाथ बढ़ा कर जैसे तैसे नल बंद कर वो बाहर भागी तो देखा पूरे कमरे में हल्का  धुंआ सा है… दोनो बेड पर सलीके से चादरें बिछी हैं और कमरे में किसी के गुनगुनाने की धीमी सी आवाज़ आ रही है पर नज़र कोई नही आ रहा…
    ” झूम झूम ढलती रात, लेके चली मुझे अपने साथ झूम झूम ढलती रात …”

  डर के मारे रंगोली की आत्मा शरीर छोड़ने को थी कि उसके दिमाग ने गोता खाया और उसे लगा ये सब रैगिंग का हिस्सा भी हो सकता है।
  वो धीमे कदमों से आगे बढ़ती एक बेड के पास रुकी जहाँ से गाने की आवाज़ें आ रही थी। ध्यान से देखने पर उसे लगा वहाँ क्विल्ट ओढ़े कोई लेटा है। उसने धीरे से चादर हटा दी और एक तेज़ चीख उसके मुहँ से निकल गई….

   सामने एक पूरा का पूरा कंकाल पड़ा था।

  उसकी चीख के साथ ही उस कमरे की बुझी हुई बत्तियां जल गई और एक साथ कई जोड़ी हंसती हुई आंखें उसके सामने चली आयीं।

” वेलकम वेल्कम रंगोली , रंगोली तिवारी उर्फ जेम्स बांड !

  बेहोश होने जा रही रंगोली जैसे होश में आ गयी.. उसने देखा सामने सीढ़ियों पर मिली उसकी करंट सीनियर्स खडी थीं वृंदा और भूमि मैंम। इनके अलावा वो किसी का चेहरा नही पहचानती थी।

   उसके माथे पर पसीने की बूंदे छलक आयीं, डर से गला सूख रहा था कि एक  लड़की पानी की बोतल लिए उस तक चली आयी…

” ले पानी पी ले। “

  कृतज्ञता से उसे देख रंगोली ने बोतल हाथ में ले ली, जाने कहाँ से दिमाग का फ्यूज बल्ब जल गया और उसने सीनियर्स से पानी पीने की परमिशन मांग ली…

” मैम क्या हम पानी पी सकतें हैं? “

” ज़रूर पियो, लेकिन हम में कौन कौन शामिल है भईया ? पूरा रामगढ़ साथ लिए घूमती हो क्या? “

” जी नही तो!”

“तो हम हम क्या लगा रखा है। सिंगुलर के लिए “मैं” यूज़ किया जाता है,नही मालूम क्या? ग्रामर भी सीखानी पड़ेगी ? “

” नो मैम!”

” तो आइंदा ये हीरोइनों वाली होशियारी मत मारना। चलो अब निकल लो तुम दोनों , जाओ सारे तीरथ कर आओ। फूटो अब यहाँ से। हम अपने कमरे में जा रहे। काम निपटा कर हमारे कमरे में आ जाना। समझीं !

” जी मैम ! ” रंगोली ने अपने साथ खड़ी लड़की की तरफ देखा , उसके आंखों के इशारे पर दोनों बाहर निकल गईं…

  कमरे से बाहर निकलते ही रंगोली ने चैन की सांस ली…

” बहुत घबरा गयीं थीं क्या?”

” हाँ फिर? कोई गधा ही होगा जो  ऐसे प्रैंक से नही घबराएगा ?

“मैं नही घबराई थी। मुझे समझ आ गया था ये प्रैंक है जो ज्यादातर मेडिकल कॉलेज होस्टल में किया ही जाता है। पहले सिर्फ बॉयज हॉस्टल में होता था अब गर्ल्स हॉस्टल में भी होने लगा है।”

” ओह्ह ! रियली?”

” यस!बाय द वे मेरा नाम झनक है, मैं तुम्हारी रूम मेट हूँ। “

” पर नीचे गार्ड भैया ने तो कहा कल आएगी रूममेट। “

” शायद कल कोई और भी आएगी। फिर उसके लिए भी बेड डल जाएगा । यहाँ वेल्कम करने का यही तरीका है।

” खतरनाक तरीका है यार। ऐसे हड्डियों वाला कंकाल दिखा कर कौन डराता है भला?”

” यार तू सच इतनी इनोसेंट है?  पागल लड़की वो कंकाल हमें गिफ्ट किया है वृंदा मैम और भूमि मैम ने, वो भी फ्री में।

” मतलब ?”

“मतलब फर्स्ट ईयर में एनाटॉमी पढ़नी पड़ती है ना जिसके लिए बोन सेट चाहिए होता है। वो इन दोनों ने हमें दे दिया।
  हॉस्टल में ऐसे ही होता है, आपके सीनियर्स आपको चुन लेते हैं उसके बाद आपकी जम के रैगिंग भी लेते हैं, अपने असाइनमेंट लिखवातें हैं और वक्त पड़ने पर आपकी मदद भी करतें हैं। मुझे लगता है तुझे कुछ नही पता। चल कोई नही मैं बताती जाऊंगी। तीन फ्लोर में सबसे ऊपर हम जूनीज़ और हमारे नीचे वाले में थर्ड एंड सेकंड ईयर और सबसे नीचे फायनल प्रोफ की मैम लोग रहतीं हैं।
  तीर्थ करना मतलब हमें हर किसी के रूम को नॉक करना है डोर खुलते ही चाइनीज़ लोगों की तरह हमें झुक कर उन्हें विश करना है वो भी तीन बार। फिर अगर सिमी ( सीनियर मैम) हमारा नाम पूछतें हैं तब अपना नाम बताना है और फिर से विश करके निकल जाना है। “

” ओह्ह ! तो ये हैं तीरथ ? “

” हाँ जी! ” किसी को सामने से आते देख झनक फटाफट रंगोली का हाथ पकड़ सामने वाली को झुक कर विश करने लगी। रंगोली भी उसकी देखादेखी वैसे ही कर के खड़ी हो गयी।

  सामने से गुजरती सीनियर ने बड़ी प्यारी सी मुस्कान दी और सीढियां चढ़ कर ऊपर चली गयी…

” कौन थी यार ये। बड़ी मीठी सी थीं? “

रंगोली के सवाल पर झनक मुस्कुरा उठी….

“हमारे कॉलेज की शान हैं ये। इनके जूनीज़ इन्हें ऐश्वर्या रॉय का टाइटल दे चुके हैं। देखा न तूने कितनी ज्यादा खूबसूरत हैं।
   जहाँ से निकल जाएं लोग इन्हें देखते रह जातें हैं। सब कहतें हैं इनके मरीज़ तो इन्हें देख कर ही ठीक हो जाएंगे। थर्ड ईयर में हैं  , इनका नाम है गौरी मैम।

” वाकई बहुत सुंदर हैं। मैं तो खुद उन्हें देख कर खो गयी। ”

” हम्म पढ़ने में भी अच्छी हैं। अगर फायनल ईयर में भी इनका रिज़ल्ट ऐसे ही आया तो हाउस सर्जन शिप पक्की है इनकी। देख लेना फर्स्ट अटेम्प्ट में ही पीजी क्लियर कर लेंगी। चल फटाफट , आगे बढ़े….

  दोनों भागती दौड़ती हर एक के कमरे पर नॉक कर विश करती अपने कमरे में लौट आईं….

” बाकी के हमारे साथ वाले कहाँ हैं? “

” सब आजू बाजू के कमरों में ही हैं। सुबह मिल लेंगे। चल अब फटाफट सोतें हैं, सुबह 7 बजे से एनाटॉमी की क्लास रहेगी। ”

  अपने बेड पर बिछे कंकाल को उठा कर रंगोली ने धीरे से एक तरफ रखा और एक बार गौर से अपने बिस्तर को देख लेट गयी…

” क्या हुआ डर तो नही लग रहा, की जिस बिस्तर पर अब तक कंकाल सोया था वहाँ सोना पड़ रहा है?

रिरियाती सी आवाज़ में नहीं बोल रंगोली ने अपनी चादर सर तक तान ली। अगली सुबह उसका कॉलेज का पहला दिन जो था….

  सुबह सवेरे भागती दौड़ती दोनों एनाटॉमी लैब पहुंच गई। पहला ही दिन था , कोई पढ़ाई लिखाई नही हुई। सभी विद्यार्थी आपस में एक दूसरे का परिचय पाते रहे…
   तभी कहीं पीछे से एक आवाज़ आयी  “गांव वालों तैयार रहना गब्बर की सेना कभी भी हमला बोल सकती है”

  रंगोली ने पीछे मुड़ कर आवाज़ को पहचानने की कोशिश शुरू की ही थी कि धड़धड़ाते हुए दस बारह लड़कों का एक जत्था लैब में घुसता चला आया। आते ही उन्होंने मुख्य दरवाज़े को बंद किया और क्लास के सामने खड़े हो गए।
   झनक ने रंगोली का हाथ खींच उसे नीचे देखने कहा और खुद भी सर झुका कर खड़ी हो गयी…

” थर्ड बटन हो जा रंगोली , यमदूतों की टोली आ गयी है। ये करंट सीनियर्स सर लोग है । हम इन्हें नही देख सकते लेकिन ये लोग अपनी आंखों से ही हमारा एक्स रे स्कैन सब कर लेंगे। “

धीमे से फुसफुसा कर झनक ने रंगोली के कान में कहा और वो दोनों भी बाकियों की तरह थर्ड बटन हो गईं।

  ” ओह हेलो ! क्या नाम है तुम्हारा? सेकंड रो में लेफ्ट से थर्ड ? “

  सब धीरे से इधर उधर देखने लगे। पर झुके सरों में देखना मुश्किल था तभी रंगोली को पीठ पर किसी ने पेन चुभाई और धीमी सी आवाज़ आयी ” तुम्हें ही बुला रहें हैं, जाओ आगे!”

  रंगोली अपनी जगह से थोड़ा आगे बढ़ गयी…

” इन के पीछे वाले सर आप भी आइये। ” उसी पेन वाले लड़के को जिसने रंगोली को आगे भेजा था भी बुला लिया गया। एक एक कर पांच छै लोगों जिनमें झनक भी शामिल थी को चुन कर सीनियर्स अपने साथ बाहर ले गए…

  “चलो बेटा एक एक कर अपना इंट्रो दो। ” सबके अपना परिचय देने के बाद सीनियर्स अपनी मस्ती में चले आये।
  मेडिकल कॉलेज गेट के ठीक बाहर बड़ा सा गार्डन था,वहीं सब ने महफ़िल जमाई थी।  कुछ सीनियर्स किनारे बनी रेलिंग पर पैर लटकाये बैठे थे तो कुछ जूनियर्स के चारों ओर घूम घूम कर उन्हें  घूरते हुए गाने गवा रहे थे…

” अबे सुनो जिसको गाना सुनाना है  तनिक चार कदम यहाँ सामने आ जाओ। “

रंगोली को छोड़ कर बाकी सारे चार कदम पीछे सरक गए, पर रंगोली को चुपचाप अपनी जगह खड़ा देख वही लड़का वापस चार कदम आगे बढ़ गया…

” क्या बात है फुज़े ! पहले ही दिन सेटिंग। जय हो!!
     अब बेटा सामने आ ही गए हो तो हमारी शान में ज़रा कुछ सुना दो !”

” सर गाना सुनाऊं?”

” हाँ बेटा गाना ही अच्छा लगेगा अब मेरे ऊपर निबंध सुनाएगा तो ये लोग तुझे ज़िंदा नही छोड़ेंगे न। चल शुरू हो जा, पर होना मेरे लिए चाहिए…

  कुछ देर सोचने के बाद उसने गाना शुरू कर दिया…

  “नफ़रत से देखना पहले अंदाज प्यार का है ये
   कुछ है आँखों का रिश्ता गुस्सा इकरार का है ये 
   बड़ा प्यारा है तेरा जुल्म , सनम तेरी कसम…
   कितने भी तू कर ले सितम हँस हँस के सहेंगे हम
    ये प्यार ना होगा कम, सनम तेरी कसम…”

” बस बस बेटा , गज़ब खुश कर दिए तुम तो। माहौल बना दिये यार,अब तो एकदम रोमैंटिक मूड बन गया है। अब कुछ यहाँ शादी ब्याह हो जाये बस, पिंक सूट वाली मैडम ज़रा अब आप आगे आइये…

  घबराती हुई रंगोली दो कदम आगे बढ़ गईं….

” यहाँ जो लड़का पसंद आ रहा है उसे आपको शादी के लिए प्रोपोज़ करना है। अगर तुम्हारे कहने पर उसने पलट कर ये कह दिया कि वो तुमसे शादी के लिए तैयार है तो मैं अभिराज सिंह तुम्हारा करंट सीनियर शपथ लेता हूँ कि पूरा साल तुम्हारी रैगिंग नही करूँगा। “

खुशी से रंगोली के चेहरे पर मुस्कान चली आयी… पर उसे झनक ने बताया था कि सीनियर्स के सामने बत्तीसी किसी हाल में मत दिखाना वरना कमीने कहर तोड़ने से बाज नही आएंगे।
  अपनी खुशी अपने अंदर संभालती रंगोली ने हाँ में सर हिला दिया…

” तो वेट किसका है? जस्ट गो एंड प्रोपोज़ योर ड्रीमबॉय!”

काहे का ड्रीमबॉय रंगोली को तो बस ये रोज़ रोज़ के तमाशे से छुटकारे का रास्ता मिल गया था। उसने धीमे से नज़रे उठायी, उनसे ज़रा दूर लड़कों का एक झुंड खड़ा था,वो उसी तरफ तेज़ी से बढ़ गयी।
       ग्रे शर्ट पहने उस लड़के की न रंगोली ने कभी पहले शक्ल देखी थी न उस लड़के ने रंगोंली को देखा था।
   उसे एक झटके से अपनी तरफ घुमा कर जो दिमाग में आया उल्टा पुलटा बोल कर वो वापस भाग गई। उस लड़के ने भी वही जवाब दे दिया था जो रंगोली को चाहिए था, वो वापस भागती सी अपने ग्रुप के पास पहुंच गई…

” आई एम इम्प्रेस्ड डॉक … क्या नाम बताया था अपना?

” सर रंगोली , रंगोली तिवारी !”

“तिवारी जी… ओके गुड लक। आज के लिए बहुत हो गया, अब निकलो सब के सब। वरना फिजियो की पहली क्लास मिस हो जाएगी।
   लीला पांडेय के कहर से बचना मुश्किल ही नही नामुमकिन है।

   सीनियर्स की आज्ञा मिलते ही सारे जूनियर अंदर की तरफ भाग चले।
    वही क्लास जो सुबह रंगोली को बड़ी मनहूस लगी थी , अब सुकून और शांति का ठिकाना लग रही थी।
  क्लास में पहुंचतें ही अपनी बेंच पर बैठते ही उसने राहत की सान्स ली कि अचानक उसे वो पेन वाला लड़का याद आ गया।
   कौन था वो ,जो बेचारा पहले दिन ही मदद के चक्कर में खुद फंस गया।

  उसने अपने पीछे मुड़ कर देखा। कोई एक लड़का नही पीछे बंदरों सी पूरी फौज थी। सीनियर्स के सामने विनम्रता और शिष्टाचार की मूर्ति बने खड़े लड़के अब अपने असली रंग में उन्हीं सीनियर्स को गालियों से नवाज़ते उनके नए नए नाम रख रहें थे…..
    उन्हें  देखती मुस्कुराती रंगोली सामने मुड़ गयी। कल झनक से पूछ लुंगी, सोच रही थी कि झनक उसके पास आकर खड़ी हो गयी…
   चल फिजियोलॉजी लैब में चलना है अब!”

  हां में सर हिलाती रंगोली झनक के साथ बाकी क्लास के पीछे लैब की तरफ बढ़ गयी…..


क्रमशः …..




दिल से…


   मायानगरी का भाग आने में ज़रा देर हो गयी, कारण ये था कि मुझे लगा मालूम नही ये कहानी आप लोगों को पसन्द आएगी भी या नही। क्योंकि अधिकतर प्रेम कहानियों में कॉलेज वाला एंगल कॉमन ही होता है। अगर किसी भी आदरणीय लेखक की किसी कहानी से मेरी कहानी का कोई हिस्सा मिलता सा लगे तो ये एक इत्तेफाक ही है।

  तो कहीं ये भी कॉमन सी न लगे….

  एक और बात आप में से बहुतों को लग रहा ये मेरी कहानी है, तो उसके लिए मैं ये कहना चाहूंगी कि ये मेरी कहानी बिल्कुल भी नही है।
    हां कहानी में कुछ मेरे कॉलेज के वहाँ की पढ़ाई के, रैगिंग , पार्टिस , कलचरल्स के अनुभव शामिल हो सकतें हैं लेकिन कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है।

   कहानी में ढेर सारे किरदार होंगे जिनमें से मुख्य किरदारों के आसपास घूमती कहानी से बाकियों की कहानियां जुड़ती चली जाएंगी। बाकी बातें आप लोगों को आगे के भागों में पढ़ने मिल ही जाएगी।

  मुझे पढ़ते रहने के लिए आप सभी का दिल से आभार व्यक्त करती हूँ।
   हार्दिक धन्यवाद !!!!

aparna …..


   

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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

“मायानगरी -2” पर एक विचार

  1. मायानगरी यहां देरी से आई है पर हम दीवानों के लिए क्या पहले क्या बाद में। बस मुझे समिधा का भी इंतजार है यहां। बहुत बढ़िया डॉ साहिबा ❣️😊

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