समिधा-12




   समिधा — १२



      ढेर सारी शॉपिंग निपटने के बाद पूरा सामान सारा को सौंप कर अपनी तरफ गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए वरुण का सर इतनी जोर से घूम गया कि वो खुद को संभाल नही पाया और बेहोश होकर गिर पड़ा।
   उसे दूसरों की मदद से गाड़ी में डाल कर सारा ने गाड़ी तुरंत अस्पताल की ओर घूमा ली।
   उसकी एक दोस्त किसी अस्पताल में नर्स का काम किया करती थी, उसे ही फ़ोन पर बात कर के सारा उसके पास पहुंच गई।

  अस्पताल पहुंच कर आपातकालीन चिकित्सा में वरुण को भर्ती किये जाने तक में उसे होश आ गया। खुद को अस्पताल में पाकर वो आश्चर्य से सारा की ओर देखने लगा।
   उसकी हालत के बारे में उसे बता कर सारा ने उसे ढांढस बंधाया और प्रज्वल को भी बुला लिया।
  उस रात वरुण को अस्पताल में ही भर्ती रखा गया। उसकी साधारण चिकित्सा शुरू करने के साथ ही कई ज़रूरी जांचे भी उसकी हो चुकी थी जिनकी रिपोर्ट्स अगले दिन आनी थी।
  
   अगली सुबह प्रज्वल भी वहाँ पहुंच गया। सारा ने अपने जाने की टिकट्स कुछ समय के लिए पीछे करवा ली..
     प्रज्वल हैरान परेशान सा वरुण के कमरे में बैठा था…..

  “क्या यार ? क्या हाल बना रखा है ये ? कितनी बार कहा था तुझसे कि एक बार डॉक्टर से मिल ले लेकिन तू सुने किसी की तब ना।”

  ” अरे ऐसी कोई घबराने की बात नही है यार। ये डॉक्टर डराते ज्यादा हैं अब अगर भर्ती किये बिना छुट्टी कर देते तो इनकी कमाई कहाँ से होती?  तू चिंता मत कर,बस कमज़ोरी की वजह से बेहोशी आ गयी थी।”

  उन दोनों की बातों के बीच ही सारा हाथ में कुछ रिपोर्ट्स लिए चली आयी…

  ” चिंता की बात तो है वरुण। तुम्हारी प्रॉब्लम ज़रा सीरियस है।”

  वो दोनो चौन्क कर उसे देखने लगे …

  ” क्या कह रही हो सारा ? कैसी चिंता की बात?”

  प्रज्वल सारा से पूछ बैठा..  सारा ने रिपोर्ट्स उसकी ओर बढ़ा दीं…
   रिपोर्ट्स देखते हुए झुंझला कर प्रज्वल ने सारा से शिकायती लहज़े में कहना जारी रखा..

” यार ये डॉक्टरों की बोली समझ आती तो मैं खुद डॉक्टर न बन जाता। क्या लिखा है इसमें?”

” इसमें लिखा है वरुण के हार्ट का वॉल्व जो बचपन में ही बंद हो जाना चाहिए अभी तक बंद नही हुआ है। ये वॉल्व एक उम्र के बाद स्वत: बंद हो जाना चाहिए जो वरुण के में नही हो पाया है। और इसकी एकमात्र चिकित्सा ऑपरेशन ही है।
    सिर्फ इतना ही होता तो फिर भी ठीक था लेकिन उसी के साथ ऑस्टिअल स्टेनोसिस भी है।”

  ” अब ये क्या बला है? “

  ” हार्ट के सर्कुलेशन में अपरोक्ष रूप से काम आने वाली वेन्स में ब्लॉकेज है,ऐसा भी साधारणतया नही होता, डॉक्टर खुद भी इसी लिए दुबारा सारी जांचों में लगे हैं, लेकिन सब कुछ ऐसा है कि वरुण तुम्हे जल्दी से जल्दी ऑपरेशन करवाना ही पड़ेगा। “

   वरुण अपने बेड पर बैठे बैठे सोच में डूब गया। उसे अभी नौकरी में आये बहुत साल तो हुए नही थे। उसने नौकरी में आते ही अपने लिए बीमा पॉलिसी ली तो थी लेकिन वो भी इनकम टैक्स सेविंग्स के लिए। उसने कोई भी स्वास्थ्य बीमा नही ले रखा था। हालांकि ऑफिस के नियमों के अनुसार भारत में कुछ भी होने पर उसकी बीमारी का खर्च उसका ऑफिस ही उठाता लेकिन भारत से बाहर कुछ भी होने पर उस पर हुए खर्च का भुगतान उसका खुद का था।
     पच्चीस छब्बीस की उम्र में वैसे भी कौन सी बड़ी बीमारी उसे हो सकती थी, यही सोच उसने अब तक अमेरिका के लिए किसी स्वास्थ्य बीमा का फॉर्म नही डाला था।
       एक मध्यमवर्गीय परिवार के इकलौते लड़के को तो अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी किये बिना बीमार पड़ने का भी हक़ नही था।

  ” क्या सोचने लगा वरुण? “

  ” हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में सोचने लगा था यार। यहाँ के लिए कोई पॉलिसी ली नही है ना। “

  ” तो इसमें इतना क्या सोचना, आज ही ऑफिस एच आर से बात करता हूँ मैं। अगर यहाँ के लिए बीमा की सुविधा नही देंगे तो हम अपने देश ही चलेंगे दोस्त। वहाँ के डॉक्टर भी बहुत अच्छे हैं, बल्कि मुझे तो इन गोरों से ज्यादा हमारे हिंदुस्तानी डॉक्टर्स पर विश्वास है।”

  ” हम्म वही मैं भी सोच रहा था। तू एक बार रूम से मेरे सारे पेपर्स लेकर ऑफिस में पता कर भाई। क्योंकि खुद के पैसे लगा कर ऑपरेशन करवाना तो बड़ा मंहंगा पड़ेगा।”

” लेकिन हेल्थ पहले है वरुण! तुम ठीक रहे स्वस्थ रहे तो पैसे तो कमा ही लोगे न।”

” सारा तुम्हारी बात सही है लेकिन मेरे जोड़े हुए पैसे मेरी छोटी बहन के लिए है। उसके लिए भी रिश्ता देख रहें हैं, माँ पापा की कोशिश यही है कि मेरी शादी से पहले उसकी शादी निपट जाए।”

” पर वो तो तुमसे छोटी है ना?”

  ” दो साल ही छोटी है सारा। और हमारे तरफ ऐसा ही होता है। बहन की शादी निपटा कर ही भाई अपने लिए सोचता है। हमारे यहाँ शादी में खर्च भी तो बहुत करना पड़ता है।”

  “तो ऐसी जगह करना जहाँ खर्च कम हो। ”

  वरुण सारा की बात पर ज़ोर से हँसने लगा…

  ” मान लो ऐसा लड़का मिल भी गया जिसने दहेज लेने से इनकार कर दिया तब भी उसके घर वालों की डिमांड की शादी अच्छे से कीजियेगा में ही लाखों फुंक जाते हैं। खैर तुम नही समझोगी यार, तुम्हारे यहाँ ऐसा कल्चर जो नही है।”

  सारा मुस्कुराने लगी…

  ” हम्म ! हमारे कल्चर का तुम इंडियन्स मज़ाक बनाते हो लेकिन शादी के खर्चों के मामले में हम तुम लोगों से काफी बेटर हैं। हम शादी करतें हैं दिखावा नही। वो सब छोड़ो,सबसे पहले तो तुम अपने घर वालों को बताओ कि तुम्हारी क्या हालत है फिर आगे का सोचना। हो सकता है तुम्हारे घर वाले खुद आगे बढ़ कर तुम्हें कहें कि पहले ऑपरेशन करवा लो। “

  प्रज्वल और सारा के ज़ोर देने पर वरुण घर पर अपने पिता को अपनी हालत बताने को राजी हो गया, उसने घर पर फ़ोन लगाया, इस वक्त भारत में शाम हो रही थी। फ़ोन उसकी मासी ने उठाया, और हड़बड़ाते हुए बातों में लग गयी…

” अच्छा हुआ बंटी तेरा फ़ोन आ गया।”

  ” क्या हुआ मासी? सब ठीक तो है ना?”

” हाँ बेटा , यहाँ सब बढ़िया है। अभी रोली को देखने लड़के वाले आये हुए हैं। तुझे तेरी माँ ने बताया तो होगा ही ।”

  वरुण को याद आया ,माँ ने कुछ चार पांच दिन पहले उसे बताया तो था कि रोली के रिश्ते की कहीं बात चल रही है। उसके चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान चली आयी और आंखों में उसकी प्यारी सी बहन की भोली सी तसवीर।

  ” हां मासी ! माँ ने बताया था ,मैं ही ज़रा भूल गया था। तो अभी सब बैठे हैं क्या? “

“हां सब बैठे हैं बातचीत चल रही है। मैं तो यहाँ रसोई में तेरी माँ की मदद कर रही थी, इसलिए फ़ोन उठा लिया।

  “कैसा है लड़का?”

  ” बहुत अच्छा है बंटी। बैंक में पी ओ है,सरकारी नौकरी है, कमाता ठीक ठाक है। एक ही इकलौता लड़का है इसलिए उसके माँ बाप की भी तो इच्छा होगी न कि शादी अच्छे से हो।”

  ” हाँ मौसी ! शादी तो अच्छे से ही होगी।”

  ” बस बंटी तेरा ही तो भरोसा है। ये ले माँ आ गयी तेरी। बात कर ले।”

  वरुण ने जो बताने के लिए फ़ोन किया था वो उस बात को ही भूल बैठा, मासी के आवाज़ की चहक ने उसे कुछ राहत दी थी लेकिन अभी माँ से बात होनी बाकी थी….

” बंटी ! बेटा लड़का बहुत अच्छा है। शादी के लिए वो लोग ज़रा जल्दबाजी में लग रहे हैं। बस …

” बोलो न माँ ! क्या हुआ?”

  ” बेटा अकेला ही लड़का है, उनके भी सारे सुख स्वप्न
इसी एक से तो जुड़े हैं। कह रहे शादी काफी मोटी चाहिए।”

  ” मतलब कितने की डिमांड है वो बताओ माँ?”

  ” बेटा पच्चीस कैश बोल रहे हैं,उनका कहना है सामान हमें कुछ नही चाहिए, बस शादी अच्छी हो। शादी अच्छी मतलब कि शादी में अलग से हमारा बीस तीस लग जायेगा।
   अब तेरे पापा कुछ अपने पी एफ और ग्रेच्यूटी से निकाल भी लेंगे तब भी बेटा तुझे लगभग तीस करना पड़ सकता है।
   तू हां बोले तो हम लोग आगे सोचेंगे वरना देखी जाएगी।
  बंटी अभी फ़ोन रखती हूं, वहाँ सब बाहर रास्ता देख रहें हैं। रात में बात करूँगी बेटा।”

  वरुण के हां कहते ही उसकी माँ फ़ोन रखे बाहर निकल गईं।
   प्रज्वल और सारा उसका चेहरा देखते रहे और वरुण ने ना में सर हिला दिया।

कुछ देर में ही राउंड लेने वाला डॉक्टर भी वरुण के कमरे में चला आया, उसने भी वही सारी बातें बताई जो सारा पहले ही बता चुकी थी।
    वरुण ने ऑपरेशन करवाने की बात मान ली ।
कुल जमा खर्च पूछने पर डॉक्टर ने लगभग 30 हज़ार डॉलर के खर्चे का मोटा मोटा हिसाब बता दिया।
    कुछ दवाओं के साथ ही उसी शाम वरुण की छुट्टी हो गयी।
   उसकी सारी जांचों में एक जांच उसकी एंजियोग्राफी भी हुई थी। उन्हीं सारी जांचों और एक दिन के बिल में भी उसके काफी पैसे वहाँ खर्च हो गए थे। उन्हीं सब का हिसाब करता वरुण प्रज्वल और सारा के साथ अपने कमरे में वापस लौट आया।
    उन दोनों का कहना था कि वरुण को बिना देर किए घर पर बता देना चाहिए और फिलहाल रोली की शादी को कुछ समय के लिए पीछे कर उसका इलाज पहले करवा लेना चाहिए।
   लेकिन वरुण अपनी ही ज़िद पर अड़ा था, उसके अनुसार अगर अच्छा रिश्ता मिला है तो उसके जीवन की सबसे पहली प्राथमिकता उसकी बहन है। उसका जीवन सुखमय रहेगा तो वो भी सुखी रहेगा और आगे पीछे कभी भी ऑपरेशन करवा ही लेगा।

  ” वरुण ज़िन्दगी से बढ़ कर कुछ नही होता। तुम समझते क्यों नही। अगर तुम्हें ही कुछ हो गया तो तुम्हारी बहन की शादी कैसे होगी ? ये सोचा है कभी?”

  सारा की बात पर वरुण मुस्कुराने लगा..

  ” मैं नही रहा तो मेरी बीमा पॉलिसी मेरे पैरेंट्स और बहन के काम आ जायेगी सारा।”

  सारा ने अपना हाथ अपने ही माथे पर दे मारा

  ” तुम समझते क्यों नही। तुम्हारी पॉलिसी के पैसों से कहीं ज्यादा तुम कीमती हो तुम्हारे घर वालों के लिए। तुम रहोगे तो पैसे हमेशा ही कमा कर दे सकते हों। तुम्हारे न रहने पर एक बार मिले पैसे कितने दिन चलेंगे भला।
   तुम्हारे भगवान भी यही कहतें हैं,कर्म कर ! इसका मतलब कर्म ही सब कुछ है। और कर्म करने के लिए हमारा ज़िंदा और स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है।”

” तुम्हें बहुत विश्वास है ना हमारे भगवान पर। तो चलो यही चैलेंज रहा, अब जब तक मैं अपने सारे काम नही निपटा लेता तुम्हारा भगवान मुझे कुछ नही होने देगा। और अगर मुझे इस बीच कुछ भी हो गया तो तुम मान लेना कि भगवान नही होता।”

   सारा और प्रज्वल एक दूजे का चेहरा देखने लगे। सारा को इंडियन माइथोलोजी पर भरोसा तो था लेकिन वो भी अचानक से वरुण के इस बर्ताव पर क्या कहे क्या नही इसी सोच में चुप खड़ी रह गयी….
    आखिर कुछ देर में खुद को संयत कर उसने कहना शुरू किया…

” हां वरुण मुझे है विश्वास तुम्हारे भगवान पर। मैंने जितनी भी किताबें पढ़ीं हैं वो मुझे बस उस एक अद्भुत शक्ति पर आंखें मूंदे भरोसा करने ही कहती हैं लेकिन तुम्हारे भगवान खुद तुमसे कहतें हैं कि सफलता चाहिए तो कर्म करना ही होगा।”

  ” मैं वो सब नही जानता,मैं बस इतना मानता हूँ कि अगर छोटी की शादी तक मुझे कुछ नही हुआ तो मैं अपना सारा जीवन उसी भगवान को समर्पित कर दूंगा। पूरी दुनिया में उसके नाम का डंका बजाऊंगा और हर अविश्वास और अंधविश्वास को दुनिया से हटा कर रहूँगा। बोलो मानती हो मेरी शर्त?”

” मानती हूँ। क्योंकि मैं जानती हूँ तुम्हारा भगवान तुम्हें कुछ नही होने देगा।”

  एक व्यंग भरी हंसी वरुण के चेहरे पर आई और चली गयी। वो अपने बेड पर बैठा खिड़की से बाहर खिले फूलों को देखता रहा।
     प्रज्वल उतनी देर में तीनों के लिए कॉफी बना कर ले आया…

  “” चल भाई मान ली तेरी बात। लेकिन भगवान भरोसे बैठने का ये मतलब हरगिज़ नही की तुम बस चुपचाप बैठ जाओ। डॉक्टर ने जो दवाएं और परहेज़ बताया है वो सब तो फॉलो करना ही पड़ेगा। बोल ठीक है ना।”

  ” अरे हाँ यार। मैं भी कोई आत्महत्या थोड़े न करना चाहता हूँ। मैं भी तो यही चाहता हूँ कि तुम्हारा भगवान जीत जाएं और मैं उससे हार जाऊँ।”

  वरुण के चेहरे पर आई मुस्कान देख कर सारा भी मुस्कुरा उठी…

  ” असल बात तो ये है कि तुम अंदर ही अंदर भगवान पर मुझसे भी कहीं ज्यादा भरोसा करते हो वरुण। और उसी भरोसे को साबित करने इतनी बड़ी कसम ले ली। पर चलो अच्छा ही है, भगवान की शरण में सब अच्छा ही होगा। अब चिंता की कोई बात नही है।”

  दूर कहीं किसी मंदिर में बजते शंख की आवाज़ वहाँ उस कमरे में बैठे वरुण तक भी चली आयी….

********

   सुबह सुबह ठाकुर माँ के शंख की आवाज़ सुन कर पारो की हड़बड़ा कर नींद खुल गयी। आँखे खुलते ही उसकी नज़र ठीक सामने सोफे पर सोए देव पर पड़ी और वो मुस्कुरा कर अपने खुले बालों का जुड़ा बनाती  बाहर निकल गयी।
     आज उसे सुबह से ही खूब सारा काम था। घर पर लाली को देखने लड़के वाले आने वाले थे।
    और आज ही उसकी साल भर की मेहनत का परिणाम भी आने वाला था।

    वो नहा धो कर नीचे रसोई में अपनी सास की मदद करने पहुंच गई। कुछ देर में ही देव भी नीचे चला आया। नीचे घर के बीचोबीच खुले आंगन में एक ओर ठाकुर माँ अपनी सुमिरनी लिए बैठी थी, वहीं एक ओर देव के पिता और काका चाय पीते आपस में बातों में लगे थे दूसरी ओर देव हाथ में अखबार थामे खबरों को पढ़ने में लगा था।
   पारो ने धीमे कदमों से आकर देव के पास चाय का प्याला रख दिया। देव ने एक नज़र कप पर डाली और पारो को देख मुस्कुरा कर अपना कप उठा लिया।
   कप जिस प्लेट में रखी थी उसमें एक छोटी पर्ची थी, चाय पीते हुए सबकी नजर बचा कर देव ने पर्ची उठा ली….

  ” आज परीक्षा परिणाम का दिन है। ”

  पर्ची पढ़ते ही देव को याद आ गया कि कल रात ही पारो ने उसका ध्यान इस तरफ दिलाया था। उसे ये भी मालूम था कि उसके पढ़ने के बाद अखबार उसके पिता के पास पहुंचता है और घर की किसी भी महिला के हाथों में अखबार का दिखना बहुत बड़ी अनहोनी की बात हो जाती। देव ने फटाफट सारा अखबार अल्टी पलटी कर लिया लेकिन कहीं परिणाम के बारे में कुछ भी नही लिखा था। उसने रसोई की ओर झांक कर देखा पारो बैंगन काटते हुए उसे ही देख रही थी, उसने न में सर हिला दिया।

  ” ये क्या तैयारियां चल रहीं है माँ?”

  ” आज लाली को देखने लड़के वाले आने वाले हैं बाबून ! तू भी दुकान खोल कर वापस आ जाना, या फिर आज घोष बाबू को दुकान खोलने बोल दे ना। ”

” इतनी जल्दी क्या है माँ ? लाली तो बच्ची है अभी।”

  ” हम्म लाली की उम्र की तेरी भी दुल्हन है बाबून ! अब तू ज्यादा दिमाग मत चला, और हम लोगों को काम करने दे। ”

  “लेकिन माँ ! तुम खुद भी तो औरत हो ,समझती हो कि एक बच्ची की जल्दी शादी उसके ऊपर कितनी सारी ज़िम्मेदारियाँ लाद जातीं हैं, सिर्फ शारीरिक ही नही मानसिक रूप से भी…

” बस बाबुन ! मैंने कहा न ज्यादा दिमाग मत चला। मैं जब इस घर में शादी होकर आयी थी तब मेरी उम्र दस बरस की थी, तेरी मंझली और संझली काकी तेरी बड़ी माँ उनकी बहु सभी लगभग इसी उम्र में आयीं हैं। आज किसे कोई बीमारी है बता तो भला? सभी शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं। तुम लोग चार किताबें पढ़ कर ज्यादा ज्ञानी बन जाते हो। जब स्कूल में पढ़ने वाली पंद्रह सोलह साल की लड़कियां घरों से भाग कर शादी कर लेती हैं तब? तब कोई नही कहता लेकिन हम उसी उम्र में ब्याह करें तो हम गलत हो जातें हैं।
   बाबुन बहस करने से अच्छा है हमारी मदद कर, जा बाजार से ये सारा सामान लेते आ बेटा।”

  देव समझ गया था घर पर लाली के लिए कुछ भी बोलना बेकार है। वो भी वो सारे काम करता चला गया जो जो काम उसकी माँ ने उसे करने को कहे थे।
      घोष बाबू को दुकान खोलने बोल  वो बाजार का बहाना कर पारो का परीक्षा परिणाम पता करने निकल गया।
   
  नियत समय पर लड़के वाले चले आये, देव का पूरा परिवार उनकी आवभगत में जी जान से जुट गया ।
सभी आपस में बातचीत में लगे थे, लड़का एक ओर बैठा चुप चाप सभी की बातें सुन रहा था।
    पारो और लाली की माँ लाली को साथ लिए चली आयीं। लाली सर झुकाये शरमाते हुए आकर एक ओर बैठ गयी।
   खाने पीने के साथ ही देव ने धीमे से लड़के के बड़े भाई के कान में कुछ कहा जिसके बाद उन्होंने वहाँ बैठे सभी के सामने एक प्रस्ताव रख दिया…

  ” अगर आप सभी को मंजूर हो तो क्या प्रखर लाली से अकेले में बात कर सकता है?

   घर के बड़े बेटे की बात नकारना लड़के वालों के लिए मुश्किल था और लड़के वालों की नकारना लड़कीं वालों के लिए।
   आखिर लाली और प्रखर को साथ लिए देव और पारो अपने कमरे में चले आये।
    पारो ने चाय का प्याला लाली की ओर बढ़ाया, लाली ने वही प्याला प्रखर को दे दिया…

   प्रखर मुस्कुराते हुए चाय पीने लगा।
पारो और देव बाहर निकल गए थे, पारो की हंसी बाहर आने पर भी नही रुक रही थी…

” क्या हुआ ? तुम्हे इतनी हंसी क्यों आ रही है? “

  ” एक बात बताऊँ? “

“हां बताओ? “

  ” अगर दूल्हा बाबू ने चाय पूरी पी ली इसका मतलब समझो रिश्ता पक्का। और अगर नही तो…

” ऐसा क्यों भला? ”

  कहते कहते ही देव ने खिड़की से कमरे में झांक भी लिया। प्रखर मुस्कुराते हुए लाली से कुछ बातें करते चाय भी पीता जा रहा था…

  ” उसने तो चाय पी ली, अब बताओ क्या बदमाशी की है तुमनें पारो?”

  पारो की आंखें खुल कर चौड़ी हो गईं उसने अपने दोनों हाथों से अपना सर थाम लिया और वहीं बैठ गयी…

  ” बोलो भी क्या किया था तुमने..”

” देव बाबू मैंने चाय में चीनी की जगह नमक मिला दिया था। मैंने आपको माँ से बात करते सुना था न! आप नही चाहते थे ना कि लाली की इतनी जल्दी शादी हो जाये इसलिए मुझे लगा चाय में नमक मिला देने से दूल्हा बाबू नाराज़ होकर रिश्ते को मना कर जाएंगे, लेकिन ये तो सारी चाय गुटक गए। अब क्या होगा?”

अपनी बड़ी बड़ी आँखें देव पर टिकाये पारो एकदम से चिंतित हो उठी और उसे देख देव को हंसी आ गयी।

  ” वाह एक से बढ़ कर एक बहाने रहते हैं तुम्हारे पास शादी तोड़ने के। पहले मेरे सामने पूरे चेहरे पर काजल पोत कर चलीं आयीं अब लाली को बचाने चाय में नमक घोल दी । एकदम पागल लड़की से शादी हुई है रे बाबा मेरी। है ना “

  देव ने पारो के सर पर हाथ रख उसे हिला दिया, और उसे हंसते देख वो भी हँसने लगी…

” अरे मैं तो आपकी ही मदद कर रही थी।”

” हाँ वही तो देख रहा हूँ कि मेरी धर्मपत्नी को मेरी कितनी चिंता है। चलो अब अंदर चलते  हैं। उन दोनों से भी तो पूछ लें कि उन्हें एक दूसरे से मिल कर कैसा लगा? “

” आप दोनों से पूछेंगे। मतलब लाली से भी?”

” हां क्यों नही पूछुंगा?”

  ” तो क्या अगर लाली ने शादी से मना कर दिया तो ? क्या आप शादी रोक देंगे?”

  पारो का सवाल वाजिब था। जिस घर में लड़की की कमसिन उम्र के बारे में सोचा नही गया वहाँ उसकी इच्छा अनिच्छा का सवाल ही कहाँ उठता था। पारो की बात सुन देव भी सोच में पड़ गया..

  ” अगर लाली की मर्ज़ी न हुई तो फिर शादी टालने के लिए भी कोई बहाना ढूंढ लेंगे। या भगवान से मनाएंगे की किसी तरह शादी टल जाए। ”

  पारो ने हाथ जोड़ कर आंखे  मूंद ली..

  ” मैं तो यही मनाऊंगी की लाली के प्रखर बाबू का स्वभाव भी बिल्कुल मेरे देव बाबू सा हो।

  मुस्कुराती पारो कमरे के अंदर चली गयी और देव वहीं खड़ा अपनी इस चुलबुली सी दुल्हन की बात में डूब कर रह गया….

  क्रमशः

aparna….

   ….
    

  

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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