समिधा – 17





     समिधा –17



     पारो ने कादम्बरी को देखने के लिए अपने एक ओर निगाहें डाली तो उसकी नज़र पास बैठे वरुण पर पड़ गयी और उसे अचानक उस शाम मंदिर के बाहर मिली वो जोड़ी याद आ गयी। द्वारिकाधीश और सत्यभामा की जोड़ी!
    पारो के चेहरे पर मुस्कान चली आयी… “आखिर सत्यभामा तो सत्यभामा ही रहेगी”

   पारो की गुनगुनाहट बहुत धीमी थी लेकिन वरुण के कानों तक पहुंच ही गयी..

” सॉरी ! आपने कुछ कहा? “
 
  उसने पास बैठी पारो से पूछ ही लिया, और ना में सर हिला कर पारो दूसरी साड़ियों की ओर देखने लगी।

   पारो के हाथ से लूटी साड़ी को फिर कादम्बरी ने वापस नही किया। पारो ने उससे मिलती जुलती साड़ी ढूंढने की कोशिश भी की लेकिन फिर उस साड़ी का कोई दूसरा रंग नही मिला।
    देव ने बहुत सुंदर सी दो साड़ियां पारो के लिए पसन्द की, लाली और घर भर की औरतों के लिए उनकी पसंद की साड़ियां लेकर तीनों घर के लिए निकल गए।
   
    कादम्बरी भी रोली के साथ शॉपिंग में मगन थी लेकिन वरुण के मन में जाने क्यों अजब सी बेचैनी सी उठने लगी।
   उसने एक बार पलट कर जाते हुए देव और पारो को देखा भी , इसने सोचा इन्हें एक बार आवाज़ दे कर रोक लूँ लेकिन फिर वो लोग क्या सोचेंगे यही सोच कर वो चुप बैठ गया।
    उसे खुद समझ नही आ रहा था कि उन दोनों अनजान जोड़े को देख उसके मन में इतनी ममता क्यों उबल रही थी। क्यों अचानक उसे उन दोनों की फिक्र सी होने लगी थी।
   मन ही मन हाथ जोड़ उसने कान्हा जी को प्रणाम किया… ” मुरली वाले उन दोनों की रक्षा करना”

” क्या हुआ? ये आंखें बंद किये क्या बड़बड़ा रहे हो? “

  कादम्बरी की आवाज़ पर उसका ध्यान टूट गया…
वरुण चौन्क कर कादम्बरी को देखने लगा..

” कुछ नही ! चलों घर चलें..”

” घर क्यों? हमें कुछ ख़िलाने पिलाने का इरादा नही है क्या? “

वरुण हंसते हुए उंगली में गाड़ी की चाबी घुमाते आगे बढ़ गया…

” महीने के पच्चीस दिन तो तुम डाइट फ़ूड खाती हो, आखिर तुम्हें खिलाना भी चाहूं तो क्या खिलाऊँ? “

   वरुण के साथ ही रोली और कादम्बरी भी आगे बढ़ गईं।

*********


    शादी की तैयारियों के साथ ही तीन दिन पलक झपकते बीत गए।
    घर से सभी लोग एक दिन पहले ही विवाह स्थल पर पहुंच चुके थे। सारा सामान भी लगभग ले जाया जा चुका था फिर भी अलग अलग नेगचार पूजा पाठ के वक्त कोई नई चीज याद आ जाती और वरुण को विवाह स्थल से घर भागना दौड़ना पड़ ही जाता था।
       विवाह के दिन सुबह से सभी लोग व्यस्त थे। मातृका पूजी जा चुकी थीं। दुल्हन को चढ़ने वाली तेल हल्दी निपटा कर उसकी रिश्ते की भाभियां उसे स्नान के लिए लेकर जा चुकी थीं।
   दुल्हन के साथ ही उसके माता पिता का भी व्रत था। और वरुण जूस का गिलास हाथ में लिए कमरे में जा रहा था कि उसे कमरे के अंदर से अपने पिता की चिंता भारी आवाज़ सुनाई दी।

” अब तक तो तिलक की राशि पच्चीस ही बोले थे ,अब अचानक पांच बढ़ा दिए। ऐसे कहेंगे तो कैसे होगा बंटी की माँ ? “

“कुछ न कुछ हो जाएगा जी। आप चिंता न करें। “

” कैसी बात करती हो? चिंता नही करें तो क्या करें बताओ? दोपहर का दो बजे चुका है , छै सात बजे तक द्वार पर बारात लग जानी है , उन्होंने साफ कह दिया है , द्वारचार में पांच लाख दे दो तभी लड़का अंदर कदम रखेगा ब्याह के लिए वरना बारात वापस लौट जाएगी।”

  वरुण सारी बातें सुनता भीतर पहुंच गया …

” ये क्या कह रहे हैं आप पापा? ये सब कब तय हुआ?

अपना सर पकड़ के बैठे वरुण के पिता उसे आया देख चौन्क गए। उसने आगे बढ़ कर उनके हाथ मे जूस का ग्लास थमाया और वहीं उनके पास बैठ गया…

“आप निश्चिंत रहें, मुरली वाला सब देख रहा है और वही सब ठीक करेगा!”

  वरूण की माँ आश्चर्य से उसे देखने लगी, उन्हें खुद को देखता पाकर वो मुस्कुरा उठा..

“मैं सच कह रहा हूँ , आप पूरे भरोसे के साथ एक बार सब कुछ उन पर छोड़ कर तो देखिए, मैं सच कहता हूँ कोई न कोई उपाय तो निकल ही आएगा।
  लीजिये सबसे पहले जूस पी लीजिये, तन में कुछ ठंडक पहुंचेगी तब मन मे भी राहत महसूस होगी न।


” उसकी मर्ज़ी के बिना तो पत्ता भी नही हिल सकता, फिर आपकी और हमारी हैसियत ही क्या हुई भला? आप विश्वास रखिये पापा भगवान ज़रूर रक्षा करेंगे और कोई न कोई उपाय ज़रूर निकालेंगे। अब तक भी तो उन्होंने ही रास्ता दिखाया है आगे भी दिखाएंगे। आप को हो न हो मुझे उन पर उनकी शक्ति पर पूरा भरोसा है।

उसकी बातें सुनते दोनों खो से गये। अपने आंसू पोंछ वरुण के पिता उसकी ओर देखने लगे..

” कैसे होगा बंटी? मेरी तो समझ से परे है? तूने पंद्रह का ऑफ़िस से लोन उठा लिया, मैंने मेरी जमापूंजी लगा दी, अब आखिर दो तीन घण्टो बस में पांच लाख कहाँ से लाऊं? अभी इस वक्त किसी से मांगना भी तो अच्छा नही लगेगा।
  पहले मालूम होता तो इतना सब जो समान खरीदा है वो नही लेते। इन्हें कार भी चाहिए और कैश भी।बताओ हमारे लिए ये कैसे संभव है?

  उन लोगों की बातें चल ही रही थीं कि बाहर से किसी ने आवाज़ दी और भीतर चला आया….
    वरुण का दोस्त अबीर था …

” यार बंटी यहाँ क्या कर रहा है?  चल बारात की तैयारी भी देखनी है, जनवासे का काम पड़ा है। वहाँ अभी तक इस्त्री वाला नही पहुंचा है। कोल्डड्रिंक का क्रेट भिजवा दिया है मैंने,  नाश्ता भेजना बाकी है।”

   अबीर के आते ही वरुण और उसके माता-पिता का ध्यान अबीर पर चला गया अबीर के कहे शब्दों में ध्यान जाते ही वरुण को जैसे एकदम से होश आया कि अभी कुछ घंटों में ही उसकी बहन की बारात आने वाली है वह उठकर तुरंत अबीर के साथ बाहर निकल गया।

    अबीर और वरुण ने साथ ही पढ़ाई की थी, वो भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और एक बड़ी एम एन सी में अच्छे खासे पैकेज पर काम कर रहा था।
   वरुण के अमेरिका से लौटने के दिन से वो छाया की तरह वरुण के साथ जी जान से काम में जुटा था। वरुण को अबीर पर खुद से कहीं अधिक भरोसा था।

   दौड़ भाग में समय बीतता चला गया और बारात दरवाज़े आ लगी।
   नाचते झूमते बाराती द्वार से कुछ पहले ही खड़े नाचते रहे। घंटे भर के नागिन डांस की समाप्ति के बाद समधी भेंट को आगे चले आये।
    दूल्हा बाबू की पूछ मचने लगी। लेकिन वर के पिता ने कार के दरवाजे पर आकर खड़े वरुण को हाथ से ठेल कर दूर कर दिया…

” गाड़ी का दरवाजा तब तक नही खुलेगा, जब तक बाकी रकम आप दे नही देते। “

  वरुण के चेहरे का रंग उड़ गया। कैसा लोभी आदमी था। मात्र पांच लाख के लिए अड़ गया और अपने बेटे को कार से नही उतरने दिया। अरे जब पच्चीस दे दिए तो पांच क्या चीज़ है। उतना बचा के हम कौन रईस हो जाएंगे। यही सब सोचते वरुण कुछ कहने जा रहा था कि वरुण के पिता गिरते पड़ते समधी के सामने हाथ जोड़ खड़े हो गए….

” जब इतना किया है तो यहाँ काहे चूकेंगे समधी जी। आप थोड़ा वक्त तो दीजिये। हम अभी इंतज़ाम किये देते हैं।”

” अभी इंतजाम किए देते हैं इसका मतलब अब तक इंतजाम नहीं किया? मिश्रा जी हम कब से आपको बता चुके थे फिर आप काहे रस्ता देख रहे थे? का सोचे कोई चमत्कार हो जाएगा और हम भूल जाएंगे अरे इक्के एक लड़का है हमारा। छब्बीस साल पाले पोसे हैं उसको अब अगर उसका ब्याह में हम कोई नेग नावर न मांगे तो ये सोहाता है क्या हमको।
  अब आप भी लड़का का बाउजी है। कित्ता बड़ी जगह हाथ मारें हैं आप। आप के समधी को बोलेंगे तो अभी रुपया का नदी बहा देँगे और आप महज़ पांच लाख के लिए इतना सोच रहे । ”

” सॉरी अंकल लेकिन हमने दहेज कभी नही मांगा!”

वरुण की बात सुन वो थोड़ा और भड़क गए..

” दहेज तो हम भी नही मांग रहे। ये तो प्यार से एक बाप का बेटी को दिया तोहफा है। अब रोज़ रोज़ बेटी यहाँ अपने बाप के घर तो आएगी नही। तो एक बार मे उसको मन भर तोहफा देने में का हर्ज है बताइये।”

” तोहफा अपनी मर्ज़ी से दी जाने वाली चीज़ है, इसे मांग कर या छीन कर नही लिया जाता। और आप थोड़ा संयम रखें हम लोग कोशिश करते हैं फेरो  से पहले कुछ इंतज़ाम हो जाये।”

” पागल समझे हो क्या हमको ?एक बार लड़का गाड़ी से उतरकर फेरों तक पहुंच गया उसके बाद वहां से उसको उठाकर ले जाना बहुत मुश्किल है इसीलिए हम कहे दे रहे हैं पांच लाख दे दो और लड़का ले लो। वरना हम जो कल तुम तिलक चढ़ाए रहे वो भी साथ लेते आये हैं कि तुम्हारे मुहँ मार कर वापस लौट जाएंगे।”

” आपका लड़का कोई आलू टमाटर है जो पांच लाख दें और आपका लड़का ले लें।”

  बाहर चलती बातचीत किसी ने जाकर दुल्हन के कान में फूंक दी, दहेज की बातों से अनजान रोली हैरान सी भागती बाहर चली आयी। यहाँ पीछे छिप कर खड़ी अपने भावी ससुर और अपने पिता भाई की बातचीत सुनती रोली की आंखों में आंसू चले आये।
    अपने होने वाले ससुर के लालची स्वभाव पर अधिक क्रोध करे या अपने होने वाले पति के नीरव स्वभाव पर , यही सोचती वो बीच में कूद पड़ी। उसकी कही बात ने उसके होने वाले ससुर के क्रोध में घी का काम किया।

” ये दुल्हन यहाँ क्या कर रही है। मिश्रा जी कहिये अपनी बिटिया से मर्दों के बीच बोलने की ज़रूरत नही है इसे। चुपचाप अंदर जाकर बैठे और फेरों की प्रतीक्षा करें। “

” अच्छा अब समझी , तो ये मर्दों की बातचीत हो रही इसलिए शायद आपका बेटा मुहँ में टेप चिपकाए चुपचाप गाड़ी में बैठा है। क्यों ठीक कहा न! “

  समधी की मांग से पहले ही परेशान वरुण के पिता इस तरह से रोली के वहाँ आ जाने से हैरान परेशान अपना सर थामे वहीं जमीन पर बैठ गए। उन्हें लगने लगा कि जो बात वो धीमे से कह कर सुल्टा सकते थे अब रोली के आ जाने से और उलझ गई थी। उन्हें अपने सीने में कुछ भारीपन सा महसूस होने लगा था।
वरुण कभी अपने पिता को देखता कभी रोली को देखता मन ही मन अपने आराध्य को आवाज़ देने लगा। ” प्रभु अब तो आ जाओ। रक्षा करो हम सब की। किसी भी रूप में आओ पर एक बार आ जाओ मुरलीधर !”
   रोली की तीखी बात कान में पड़ते ही समधि जी बुरी तरह से बिफर उठे…

” यही संस्कार दिए हैं मिश्रा जी अपनी लड़कीं को। सरे आम मर्दों के बीच आकर अपने होने वाले पति को क्या कुछ कह गयी।”

“होने वाला पति है ,अब तक हुआ नही है। और एक बात कहुँ अगर मुझे पहले पता होता कि यहाँ मुझसे ब्याह करने के बदले रुपये या दहेज दिया जा रहा है तो मैं कभी इस शादी के लिए हाँ नही कहती।वरुण भैया अपने भी मुझे पराया कर दिया, कुछ नही बताया।”

” रोली घर वर अच्छा था तो तुझे ये सब बताने की ज़रूरत ही नही…”

  वरुण की बात आधे में काट रोली बोल पड़ी…

” कैसा अच्छा घर वर भैया? घर ऐसा है कि द्वारचार रोक कर समधि अपने समधि से दहेज़ मांग रहा है।और वर ऐसा है कि अपनी आंखों के सामने गलत होता देख कर भी आंख कान बंद किये बैठा है। इसी घर वर के लिए आपने इतने रुपये बहा दिए भैया?बोलिये न कितना दे चुके है अब तक?”

वरुण या किसी और से कुछ भी कहते नहीं बना सभी आश्चर्य से रोली के पराक्रम को देख रहे थे उसके होने वाले वर की भी इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वह गाड़ी से निकलकर अपने पिता की बात को काट सके कुछ हद तक शायद वो रोली की बात से सहमत था बावजूद अब उसके पास बोलने को कुछ नही बचा था।

“माफ कीजियेगा मिश्रा जी लेकिन अब ये ब्याह नही हो सकता।”

  वरुण के पिता ने आंखों में आंसू लिए उनके पैर पकड़ लिए..

” ऐसा मत कहिये समधि जी ! बच्ची है ये नादान है। नही जानती क्या बोल रही है। पर हम तो बड़ें हैं हमारा काम तो बिगड़ी संवारना है। “

” हमने कोई ठेका नही ले रखा है आपकी बिगड़ी संवारने का । जो जितना संवर सकता था संवर गया। आपकी बेटी ने खूब नाम उछाल दिया है मिश्रा जी। अब इस लड़की को घर की बहू बना कर क्या जीवन भर इसके ताने सुनेंगे हम ? और हम क्या हमें तो लगता है अब समाज का कोई बिरला ही ऐसा घर और लड़का होगा जो आपकी शहजादी को ब्याहेगा। पढ़ाई लिखाई अपनी जगह है मिश्रा जी लेकिन लड़की
को इतनी आज़ादी भी मत दे डालिये की अपना अच्छा बुरा सोचे बिना कुछ का कुछ कर जाए। “

” सलाह के लिए धन्यवाद अंकल जी। आप क्या मुझसे शादी से मना करेंगे मैं ही आपके गूंगे बेटे से शादी करने से इनकार करती हूँ। रही बात समाज के ठेकेदारों की तो जिन्हें मैं गलत और आप सहीं लगतें हैं उन घरों में मुझे ब्याह कर के जाना भी नही है।
  और एक बात , आप चुपचाप ऐसे ही बारात वापस नही ले जा सकते। इसके पहले तिलक में जो भी राशि आपको दी गयी थी वो भी सब वापस दीजिये और फिर जाइये यहाँ से।”

” हद करती है ये लड़की। ए छोकरी खुद को समझ क्या रखा है? तू जानती नही कौन हैं हम…अब देखतें हैं समाज का कौन सा घर है जो तुझे ब्याह कर ले जाएगा? अब किस भले घर का लड़का तुझसे शादी करने को तैयार होता है देखता हूँ मैं? “

” माफ कीजियेगा , ये आप लोगों का पारिवारिक मसला है, लेकिन वरुण अगर तुम और तुम्हारे घर के लोग इजाजत दें और रोली की मर्ज़ी हो तो क्या मैं रोली से शादी कर सकता हूँ।”

  अब तक बातें जिस तरह से बिगड़ती चली जा रहीं थीं अबीर की बात ने जैसे मौसम बदल दिया था। अब तक वहाँ उपस्थित लोगों की निगाहें जहाँ रोली और उसके होने वाले ससुर पर टिकी थीं अब अबीर की ओर मुड़ गयीं…
   वरुण अपने पिता को सहारा दिए खड़ा था, उसकी आंखें आश्चर्य से चौड़ी हो गईं
   अबीर उसी के साथ पढ़ा था, उसके माता पिता थे नही। उसकी बुआ ने ही उसे पाला था , जो गांव रहा करती थीं। पढ़ाई के समय होस्टल में रहने वाले अबीर ने नौकरी लगने के कुछ समय बाद लोन लेकर अपना घर गाड़ी सब धीरे धीरे ख़रीद लिया था। ऐसा गुणी और विवेकी लड़का वरुण ने आज तक नही देखा था फिर भी जाने क्यों उसके दिमाग में कभी ये बात नही आई कि रोली की शादी अबीर से भी तो की जा सकती है।
    उसने अपने पिता की ओर देखा। आंखों ही आंखों में दोनो  ने परस्पर विमर्श कर लिया और वरुण ने आगे बढ़ कर अबीर के हाथ पकड़ लिए। वहीं से वरुण ने एक नज़र रोली को देखा, वो खुद अचरज में डूबी कभी अबीर तो कभी वरुण को देख रही थी, लेकिन रोली की उन आंखों में अबीर के लिए अवमानना या अवहेलना नही थी। उन आंखों में एक मौन था एक स्वीकृति थी । वरुण के मन में भावों की हिलोर उठने लगी, गला रुन्ध जाने से वरुण कुछ कह नही पाया और उसने अबीर को गले से लगा लिया।
 

   वहाँ होती जाती घटनाओं को अंदर से बैठे देखते दूल्हे ने जाने क्या सोचा और गाड़ी खोल दूल्हा नीचे उतर आया, साथ में पकड़ा पैसों का ब्रीफकेस वरुण के हाथ रख उसने वरुण के सामने हाथ जोड़े और अपने पिता का हाथ पकड़ वो गाड़ी की ओर ले गया” और कितनी इज्जत उतरवाएँगे आप पापा। अब चलिए यहाँ से।”

उन्हें गाड़ी में एक तरह से ठूंस कर वो अपने साथ ले गया….
 
  बारात जैसी धूमधाम से आई थी उतनी ही शांति से बिना दुल्हन और फेरों के विदा हो गयी। लेकिन विधि ने रोली के लिए अगर ब्याह का यही मुहूर्त तय कर रखा था तो इसी मुहूर्त पर उसका ब्याह होना ही था।

   बारात के विदा होते ही, अबीर को साथ लेकर वरुण अंदर चला गया। कमरे में रोली और अपने माता पिता से चर्चा कर सबकी सहमति से रोली और अबीर का ब्याह सम्पन्न हो गया।
    सब कुछ अच्छे से निपटते ही वरुण रोली की विदाई की तैयारियों में लग गया।
    उसने अबीर से एक किनारे ले जाकर रुपयों से भरा बैग उसके हाथ में रख दिया…

” अबीर बुरा मत मानना दोस्त! लेकिन ये रुपये रोली के नाम के हैं तो अब ये तुम्हारे हुए । हो सके तो ये छोटी सी भेंट स्वीकार लो।”

” सारा लफड़ा ही इन रुपयों के कारण था और दोस्त तुम अब भी इन्ही रुपयों  के चक्कर में फंसे हो। मैं इनमें से एक रुपया भी नही ले सकता। और वैसे भी तुमने ये रुपये अपने ऑफिस से लोन में लिए थे न, वापस कर देना। तुम्हारा बोझ भी उतर जाएगा और मेरा आत्मसम्मान भी नही डिगेगा।”

    अबीर की बात सुन वरुण ने उसके सामने हाथ जोड़ दिए । उसके हाथों को अपने हाथों में ले वरुण को अबीर ने गले से लगा लिया।
   सारे नेगचार निपटा कर अबीर के साथ रोली की बिदाई हो गए। उसके पीछे एक एक कार मेहमान भी बिदा होते चले गए।
   पीछे से बचे घर के कुछ करीबी सारा सब समेटने में लगे रहे।
   थोड़ी देर में वरुण का ध्यान रुपयों के उस बैग पर चला गया।
    ब्रीफ़केस पर ऊपर एक तरफ मुरली बनी हुई थी…
उस मुरली को देखते ही वरुण के चेहरे पर मुस्कान चली आयी…
  “मैं सोच रहा था कि अगर मंदिर ट्रस्ट में चला जाऊंगा तो नौकरी छोड़नी पड़ेगी और तब लोन कैसे चुकाऊंगा। और तुमने ऐसे मेरी समस्या का हल निकाला प्रभु।
   रोली का ब्याह भी हो गया और ये रुपये भी रह गए। ये कैसी माया रचते हो प्रभु। अपने मनोरंजन के लिए हमारी दुनिया में इतने गोल गोल चक्कर डाल देते हों कि साधारण इंसान उलझ कर रह जाता है और फिर खुद उस बवंडर में हमारा हाथ पकड़ हमें बाहर  निकाल लेते हो।
  वाह रे भगवान तुम और तुम्हारा संसार !!
अब तुम्हें पूरी तरह समझने आना ही पड़ेगा मुझे तुम्हारे रचे संसार को तज कर तुम्हारी शरण में…..

क्रमशः

aparna….
   

 
.



    
  
 



        

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s