समिधा -5





    समिधा– 5



   सीढियां उतरती पारो अब तक उन्हीं विचारों में मगन थी कि मंदिर के बाहर भीख मांगते बच्चों की टोली की हँसने खिलखिलाने की आवाज़ उस तक पहुंच गई….
      ये वही बच्चे थे जिन्हें उसने सुबह मंदिर में प्रवेश के समय तेज़ धूप में इधर से उधर भागती गाडियों के साथ भागते भीख मांगते देखा था। पसीने और धूल मिट्टी से बेहाल उन बच्चों के चेहरे अभी लेकिन प्रसन्नता की फुहार से धुल गए थे।
   उन बच्चों को खिलखिलाते देखती वो भी मुस्कुराती धीमे धीमे उतर रही थी कि उसकी नज़र उन बच्चों को आइसक्रीम पकड़ाते लड़के पर चली गयी।
      लड़के की पीठ उसकी तरफ थी लेकिन पारो को उस पीताम्बर धारी को देखते ही पंडित जी की बात ठक से याद आ गयी। रोतो को हंसाने वो मुरलीधर किसी ना किसी रूप में चला ही आता है…..

      इस बात से पूरी तरह बेखबर की कोई उसमें भगवान को देख सकती है वरुण बच्चों को चॉकलेट और आइसक्रीम बांटने में लगा था।

   वो धीमे धीमे कदम बढ़ाती उस तक पहुंची ही थी कि एक बड़ी सी ऑडी आकर ठीक उसके सामने रुक गयी।
  वो आखरी सीढ़ी पर ही थी और वरुण रास्ते के दूसरी तरफ, लेकिन गाड़ी के रुकने की आवाज़ वरुण के कानों में भी पड़ गयी। वरुण के उस तरफ मुड़ने तक में गाड़ी से मुस्कुराती हुई कादम्बरी उतर आयी। अपने कमर तक के लंबे बालों को खुला छोड़े वो और भी खूबसूरत लग रही थी।
     वरुण ने उसे देखा और चौंक गया।

    ” तुम इस वक्त यहाँ कैसे?”

   ” बस ऐसे ही। असल में तुम्हारे फ़ोन पर कॉल किया तो फ़ोन रोली ने उठाया उसी ने बताया भैया मम्मी के साथ मंदिर गएं हैं तो मैं यहीं चली आयी।”

  वरुण को जैसे अचानक कुछ याद आया..

  ” अरे हाँ जल्दीबाजी में फ़ोन तो मै घर ही भूल आया था। चलो फिर हमारे साथ घर चलो।”

  ” पागल हो क्या ? मैं तुम्हें मेरे साथ लेकर जाने आयी हूँ। कुछ फ्रेंड्स पार्टी कर रहे हैं शहर से दूर हमारा एक फॉर्म हाउस है वहाँ। आज शनिवार तुम्हारी भी छुट्टी होती है ना इसलिए आज का दिन तय किया । ”

  ” लेकिन माँ मेरे साथ हैं, वो ज़रा बरगद को परिक्रमा देने चली गईं बस उन्हीं का रास्ता देख रहा था।”

   तब तक में कादम्बरी की नज़र वरुण को घेर कर खड़े बच्चों पर चली गयी…

  ” नाइस यार ! तुम इन बच्चों को आइसक्रीम बांट रहे थे?”

  “हाँ क्यों?”

   ” आओ ना प्लीज़ जल्दी इधर आओ!”

   कादम्बरी ने बच्चों की भीड़ अपने और वरुण के आसपास इकट्ठा की और अलग अलग एंगल से तस्वीरें लेने लगी

  ” अब ये क्या है मैडम ?”

   कादम्बरी गरीब बच्चों के साथ खींची अपनी सेल्फी को तुरंत अपने सोशल साइट्स पर अपडेट करने लगी

तस्वीरों के साथ उसने फटाफट बाइबल का एक कोट भी डाल दिया—: To them God has chosen to make known among the Gentiles the glorious riches of this mystery, which the hope of glory…..

   ” मुझे तो यार इतना सही आइडिया ही नही आता। अब देखना इन गरीब बच्चों के साथ कि हमारी सेल्फी कैसे तबाही मचाती है सोशल प्लेटफॉर्म पर।
    भई नेता लोगों को तो ये सब करते रहना पड़ता है। चुनाव के ठीक पहले किये कामो को लोग स्वार्थ से जोड़ लेते हैं पर ऐसे जो बिना मौसम की बरसात होती है ना इसे लोग कभी नही भूलते।
    अब ये तस्वीर लाखों लाइक्स बटोरेगी और चुनाव के समय इसे वापस से हाइलाइट कर दिया जाएगा।क्यों सही है ना मेरा आइडिया ?”

  वरुण मुस्कुरा कर रह गया, और कादम्बरी उसका हाथ पकड़ उसे गाड़ी में बैठाने लगी…

  ” कादम्बरी रुको। कहा ना माँ भी साथ है..

  तब तक सीढ़ियां उतरती सुशीला भी वहाँ आ पहुंची। कादम्बरी ने झट आगे बढ़ अपनी सासु माँ के पैर छुए और उनके पास ही अपनी अर्जी लगा दी…

  ” मम्मी जी मेरे सारे दोस्त इनसे मिलना चाहते हैं, अगर आप कहें तो मैं इन्हें अपने साथ ले जाऊँ.?”

   कादम्बरी के सवाल पर ना करने की कोई गुंजाइश ही नही थी…

  ” वरुण गाड़ी की चाबी दो ” वरुण से चाबी ले उसने अपने ड्राइवर को थमाया और उन्हें अपनी होने वाली सासु माँ को सही सलामत घर पहुंचाने का आदेश दे वरुण को अपनी ऑडी में बैठाए निकल पड़ी।
      सुशीला बस जाते हुए वरुण को देखती रह गयी।

इतने सब तामझम के पहले ही पारो रोड़ पार कर वरूण की तरफ ही चली आयी थी। वहां एक पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर बैठी वो उसी प्रेमी जोड़े को देखने में इतनी व्यस्त थी कि उसे ये भी ध्यान नही रहा की कादम्बरी की खींची गई सेल्फी में सबसे पीछे चबूतरे पर बैठी और वरुण  की तरफ देखती वो भी आ गयी है।
     माँ बेटे के अलग अलग दिशा में निकलने के कुछ देर बाद ही बाली दादा भी अपनी गाड़ी में वहां पहुंच गए।
   माँ के साथ मंदिर की बातों में लगी पारो को अचानक वरुण का चेहरा याद आ गया और अपनी ही प्रेयसी से बात बात पर शरमाते उस लंबे चौड़े लड़के को याद कर वो मुस्कुरा उठी….

  ” क्या हुआ खुकू? तुझे हंसी क्यों आ रही भला?”

  ” माँ पता है आज मुझे द्वारिकाधीश के दर्शन हुए और वो भी उनकी सत्यभामा के साथ। मैं समझ गयी माँ द्वारिकाधीश सत्यभामा से क्यों दबते हैं?”

  ” अच्छा ? बता तो ज़रा क्यों ?”

  ” क्योंकि सत्यभामा उनसे भी अच्छी गाड़ी चलाती है।”

   अपनी बात पूरी कर उसे ज़ोर से हंसी आ गयी और उसकी बात का ओर छोर पल्ले न पड़ने से दुर्गा भौं चढ़ाये खिड़की से बाहर देखने लगी।

    गांव में गाड़ी के प्रवेश करते ही जोइता के घर के सामने गाड़ी रुकवा कर जब तक दुर्गा उसे रोक पाती वो चट फट जोइता के घर के भीतर भाग गई। एक ठंडी सांस भर दुर्गा ने बाली को गाड़ी आगे बढ़ाने बोल दिया।
     जोइता की माँ से मालूम चलने पर की जोइता ऊपर है सीढियाँ फांदती पारो भी ऊपर चली गयी…

  ” ये ले तेरे किये मंदिर से अमरुद लेकर आई हूँ। देखना अंदर से लाल निकलेगा पक्का।”

   चुन्नी में बंधे अमरूद खोल पारो ने जोई के सामने बिखेर दिए। जोइता किसी किताब में सर घुसाए पड़ी थी….

” अरे ऐसा क्या पढ़ रही ? ”  पारो ने जोइता के हाथ से किताब छीन ली…….
    किताब में लेख से अधिक चित्र थे , और जोइता उन चित्रों को देख देख अपने मन में कहानी बुनती जा रही थी। किताब अंग्रेज़ी में जो थी….

  ” गीता दी कि किताब है ,मुझे अच्छी लगी तो मैं उठा लाई थी, ये देख कितना प्यारा पंखों वाला बच्चा है । उसी की कहानी पढ़ रही थी। ये बच्चा जादू जानता है और जहाँ भी किसी बच्चे को कोई सताता है ये तुरंत अपना तीर चला कर सामने वाले को घायल कर देता है।”

   जोइता के कहानी सुनाते तक में पारो को कहाँ धैर्य था उसने फटाफट अंग्रेज़ी में लिखी उस किताब के वो पन्ने पढ़ लिए…

  ” ओ मेरी माँ ये कोई जादूगर बच्चा और उसकी कहानी नही है। इस बच्चे का नाम क्यूपिड है ये रोमन देवताओं में से एक है प्रेम का देवता।प्राचीन मान्यता है कि ज्यूपिटर और देवी वीनस की संतान है। इनके तूणीर में दो तरह के बाण हैं एक जिसे लग जाये उसे सामने वाले से प्यार हो जाता है और दूसरा लगने पर नफरत।
   समझी!!! ये लिखा है। मन ही मन बस चित्र देख जाने क्या कहानी बुन बैठी तू?” पारो की बात पर जोइता खिलखिला उठी

  पारो ने अगला पन्ना पलटा किसी ग्रीक गॉड की मूर्ति की बैठी हुई तस्वीर थी, बदन का ऊपरी हिस्सा निर्वस्त्र था, दोनो हाथों से अपने एक पैर को थामे आकाश की ओर देखती बड़ी बड़ी चुम्बकीय आंखों में गजब का आकर्षण था।
    कुछ देर को पारो उस तस्वीर को देखती रह गयी, जैसे पहचानने की कोशिश कर रही हो..

   ” अब तू क्या देखने लगी? ये कौन है ?

   ” ये सुंदरता और ताकत के देवता है , ग्रीक गॉड!जोई एक बात बोलूँ? आज बिल्कुल ऐसे ही चेहरे वाले किसी को देख कर आई हूँ।
   इतना ही सुंदर बिल्कुल ग्रीक गॉड सा! “

  ” अच्छा तो ये बात है। पारो ये तो बता कि सुबह सुबह तू घूम कर कहाँ से आ रही।”

  ” मंदिर गयी थी माँ के साथ ! ”

  ” अच्छा ! और वो जो तुझे देखने आने वाले थे उनका क्या हुआ?”

  ” अरे पगली बताया तो था तुझे मैंने कैसे बुद्धू बनाने की कोशिश की थी, पर वो तो बड़े समझदार निकले!”

  “मतलब पारो को पसंद आ गए।”

   पारो ने मुस्कुरा कर आंखें नीचे कर ली। किताब के पन्नों को पलटती पारो को मुस्कुराते देख जोइता उससे लिपट गयी

  ” मतलब अब तू ससुराल चली जायेगी पारो?”

  ” हाँ जोई ! लेकिन तू दुखी मत हो देव बाबू बहुत अच्छे हैं । वो मुझे माँ से,  तुझसे सभी से मिलवाने लाते रहेंगे।”

  ” सच्ची?”

  ” हाँ सच्ची ! उन्होंने ही कहा मुझसे। और ये भी कहा कि वो मुझे आगे पढ़ाएंगे भी। मैं शादी के बाद वापस स्कूल आने लगूंगी।”

   स्कूल और शिक्षा में जोइता को कोई खास रुचि नही थी लेकिन स्कूल के बहाने ही वो पारो से रोज़ मिल सकेगी यही बात उसके दिल में ठंडक पहुंचा गयी।

  ” कब का सुदिन तय हुआ है ब्याह का? “

   “सात दिसम्बर !”

   ” हाय राम ! तब तो बस दो हफ्ते बचें हैं?”

  ” ऐसे क्यों सोच रही … ये सोच अभी पूरे पंद्रह दिन बचे हैं… हम जिस ढंग से सोचते हैं ना बातें वैसा ही असर पैदा कर जाती हैं दिमाग पर। अब तू ये किताब बंद कर और चल मेरे साथ, तुझे मेरे ब्याह की तैयारियां भी तो दिखानी हैं।”

   जोइता फटाफट उठ कर पैरों में चप्पल डाले उसके साथ चलने को हुई कि पारो एक पल को रुकी और पलट कर उस किताब को उठा लिया

  ” क्या ये किताब मैं ले जाऊँ जोई? पढ़ कर वापस कर दूंगी”

   ” हाँ ले जा ! लेकिन किताब पूरी अंग्रेज़ी में हैं।”

  पारो ज़ोर से हँसने लगी…

  ” तुझसे तो ज्यादा ही आती है मुझे और जो समझ नही आएगा बाली दादा से पूछ लुंगी।”

  हँसती खिलखिलाती दोनो सहेलियां सीढ़ियां उतर रहीं थी कि मौसम खराब होने लगा। काले काले बादलों को छाते देख दोनों ने पारो के घर की ओर दौड़ लगा दी कि बारिश शुरू होने के पहले पहले घर पहुंच जाएं…

**********

    वरुण के साथ ड्राइविंग सीट पर बैठी कादम्बरी गाड़ी चलाते हुए बीच बीच में वरुण पर भी नज़र डाल लें रही थी।

   शहर से बाहर निकलते में ही मौसम कुछ खराब सा होने लगा था… घने काले बादलों से आसमान भरने के साथ ही मोटी मोटी बूंदे बरसने लगी थीं।

   गाड़ी हाइवे पर दौड़ रही थी कि मौसम को देखते हुए लोकल रेडियो स्टेशन ने गाना भी मौसम के हिसाबों वाला चला दिया….

      भीगी भीगी रातों में, मीठी मीठी बातों में
          ऐसी बरसातो में, कैसा लगता है? 
            ऐसा लगता है तुम बनके बादल,
               मेरे बदन को भिगोके मुझे,
                 छेड़ रहे हो ओ छेड़ रहे हो….

    सुमधुर गाने से ताल मिलाती मुस्कुराती कादम्बरी ने उस सुनसान सी सड़क पर एक किनारे गाड़ी लगा दी और जब तक वरुण कुछ पूछता वो तुरंत अपनी तरफ का दरवाजा खोले बरसात में भीगने बाहर निकल गयी।
     भीतर बैठा वो उसे बारिश में भीगते इठलाते, नाचते देखता रहा।
    उसका मन जाने कैसी उथल पुथल में फंसा था। वो चाहता तो था कि कादम्बरी में अपनी होने वाली पत्नी को देख पाए लेकिन कादम्बरी की मूरत में उसे एक प्रेयसी की कोमल छवि से इतर एक तेज़तर्राट राजनेता की झलक अधिक मिलती और वो उसकी तरफ बढ़ते अपने हाथ रोक लेता।
      कादम्बरी को बारिश में भीगते देख भी उसके अंदर के पुरुष में वो भाव नही जाग पा रहे थे जो एक होने वाली सुंदरी पत्नी को देख भावी पति के मन में जाग जाने चाहिए थे….
 
     वो अपनी सोच में गुम उसे ही देख रहा था कि वो उसके पास चली आयी। वरुण की तरफ का दरवाजा खोल उसने उसे भी बाहर खींच लिया।
    कादम्बरी का हाथ थामे वरुण भी बाहर चला आया। गाड़ी एक छोटे से पुल पर एक किनारे खड़ी थी।
    नीचे बहती नदी बारिश के पानी में और भी सुंदर लगती किसी किशोरी सी कूदती फांदती बहती चली जा रही थी कि उस नदी को इतने वेग से बहते देख वरुण को अचानक मंदिर में दिखी वो लड़की याद आ गयी।
   वो भी तो ऐसी ही नदी सी चंचल जाने कहाँ से चली आयी थी और अपनी माँ के हाथ से जलता कपूर गिरा दिया था। हालांकि उसके आने के पहले से ही वरुण उस औरत को हाथ में कपूर जलाए आरती करते देख उन तक जा कर कपूर बुझाने को कहने की सोच ही रह था कि वो किसी आंधी सी आयी और अपना काम कर गयी ।
   वरुण के चेहरे पर उसे याद कर एक मुस्कान चली आयी थी। वो लड़का होकर भी सोचता ही रह गया था और वो इतनी कम उम्र लड़की होकर भी अपनी बात पूरी दृढ़ता से कह गयी थी…

  ” किसे याद कर मुस्कुरा रहे हो।”  वरुण ने पलट कर देखा, कादम्बरी उसके कंधे पर हाथ रखे उसे अपनी तरफ ही घुमा रही थी।

  ” किसी को नही!”

  वरुण की आंखें और होंठ अलग ही दिशा में जा रहे थे, जबान से ना कहने पर भी आंखें गवाही दे रही थी कि वो किसी की याद में खोया था…

  ” खैर चलो वापस! बहुत देर हो गयी…”

  कादम्बरी शायद जो चाहती थी वरुण का उस तरफ ध्यान ही नही गया …
   वो बालों पर से पानी झाड़ता अपनी तरफ का दरवाजा खोलने जा रहा था कि कादम्बरी ने उसे गाड़ी चलाने बोल दिया और खुद उसकी तरफ जा बैठी।
   गाड़ी को ऑटो गियर में डाल वरुण ने कादम्बरी से किस तरफ फार्म हाउस है और किधर जाना है पूछा ही था कि वो ज़ोर से हँस पड़ी…

   ” मुझे बस तुम्हारे साथ आउटिंग पर जाना था। कोई फॉर्म हाउस कहीं कोई पार्टी नही है। लेकिन मेरे अठारहवीं सदी के हीरो अगर मैं ये कहती कि मेरे साथ लॉन्ग ड्राइव पर चलो तो तुम कभी मम्मी जी को छोड़ कर आते नही,बस इसलिए झूठ बोल दिया।”

  ” मतलब तुम झूठ भी बोलती हो?”

” सो व्हाट? आज की दुनिया में कौन है जो झूठ नही बोलता? ऑफिस से सीधे घर ना लौट कर दोस्तों के साथ ऑफिस के बाहर की गुमटी में चाय की चुस्कियों और सिगरेट के कश लगाते हुए ऑफिस की नई लेडी एम्प्लाई के शार्ट स्कर्ट की बखिया उधेड़ने  वाला पति पत्नी का फोन आने पर क्या सच बता देता है? बड़ी आसानी से कह देता है मीटिंग में हूँ।
  सिर्फ पति ही नही पत्नियों के भी यही हाल है। किटी के पैसों से अपने लिए सोने की चेन बनवाने के बाद बचे कुछ पैसों से घर का थोड़ा बहुत सामान और एक लोअर टी शर्ट पति को गिफ्ट कर शान से ये शेखी बघारना की किटी के पैसों से भी देखो तुम्हारा ही सामान लेकर आई हूँ क्या झूठ नही है?
   और तो और पिद्दी से नर्सरी के बच्चे भी जब माँ पूछती है पढ़ाई कर ली तब हाँ कर ली और जब माँ कहे खाना खा लो तब कहना भूख नही है क्या ये सब झूठ नही है।
   और तो और अभी खुद को ही देख लो। मैंने पूछा किसे याद कर मुस्कुरा रहे थे तुम साफ मुकर गए, क्या वो झूठ नही था?

  वरुण एक पल को कादम्बरी को देखता रह गया, कितनी तेज़ थी कादम्बरी!!
         लेकिन उसे सच भी क्या बताता क्योंकि उस वक्त जो लड़की उसके दिमाग में चल रही थी उसका तो ओर छोर तक उसे पता नही था। यहाँ तक कि दो चार दिन बाद तो शायद वो उसे चेहरे को भी भूल जाएगा।
    कुछ सेकंड रुक कर उसे लगा क्या वाकई वो मंदिर में दिखी उस लड़की का चेहरा भूल पायेगा? उसकी हिरनी सी बड़ी बड़ी आंखे, गुलाबी होंठो से झांकते अनार के दानों से दांतों की खिलखिलाहट, गहरी काली माथे पर बार बार आकर उसे तंग करती लटें और सब कुछ एक बार में जान लेने को उत्सुक उसका मन।
    क्या इतना सहज था उस अनजानी सी लड़की को भूल पाना?
        शायद नही! कभी नही!!!
   वो अपनी सोच में गुम था और कादम्बरी अपने फ़ोन में घड़ी घड़ी आते नोटिफिकेशन देख देख कर खुश हो रही थी…

  “वरुण देखो! मैंने कहा था हमारी फोटोज  एकदम कमाल कर देंगी। देखो घंटे भर में ही इतने सारे लाइक्स कमेंट्स सब मिल गए। कुछ कमेंट्स तो बड़े मज़ेदार भी हैं…

   कादम्बरी को मुस्कुराते देख वो भी खिल उठा वरना अब तक वो यही सोच रहा था कि उसका झूठ पकड़ने के बाद कादम्बरी ज़रा बुझ सी गयी थी।

  “ये देखो किसी ने लिखा है ” who is behind luv birds?”
  कोई लिख रहा है , ये चाँद कहाँ से झांक रहा है…

ये कहते हुए अपने मोबाइल की स्क्रीन कादम्बरी ने वरुण की तरफ कर दी…

  ” चाँद माय फुट! ये पीछे जो लड़की झांकती सी हमारी फ़ोटो में आ गयी है ना हमारी फ़ोटो ही बिगाड़ दी इसने, अब देखो ना उसी पर सबसे ज्यादा कमेंट्स मिल रहे।”

  कुछ जलन की तो कुछ स्नेह की मिली जुली भावना में डूबी कादम्बरी ने वरुण को देखा वो उस फ़ोटो को देखता आश्चर्य में डूबा बैठा था।
     उसके दिमाग में घूम रही वही चंचल हिरणी सी लड़की ही तो थी जो यहाँ उसकी और कादम्बरी की सेल्फी में उन दोनों के पीछे से झांकती नज़र आ रही थी।
   उन दोनों के ठीक बीच में कहीं पीछे चबूतरे पर अल्हड़ सी बैठी वो उस वक्त उसी की तरफ देख रही थी शायद जब कादम्बरी ने फ़ोटो क्लिक कर ली थी।
   उसे देख एक पल को सुखद आश्चर्य में डूबे वरुण का ध्यान जैसे ही इस बात पर गया कि कादम्बरी उसे ही देख रही है उसने तुरंत फ़ोटो पर से नज़र हटा ली…


” क्या हुआ ? तुम जानते हो इसे वरुण?”

  ” नही , नही तो!”

  मुस्कुरा कर कादम्बरी ने एक बार प्यार से वरुण की तरफ देखा और आगे बढ़ उसके गालों पर अपनी प्यार की मुहर लगा दी….
    वो मुस्कुराता हुआ गाड़ी चलाता रहा….

  क्रमशः

   aparna….



  

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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