हमारे दरमियां….

   ऑफिस से आकर सुप्रिया रोज़ की तरह अपने लिये एक कप कॉफ़ी बनाकर अपने फ्लैट की सबसे पसंदीदा जगह अपनी बालकनी में जा बैठी…
    उसकी रोज़ की यही दिनचर्या थी ,एक कप कॉफ़ी और रेडियो पर रफी साहब के गाने सुनते हुए मोबाईल पे आये दिन भर के मेसेज पढना और जवाब देना।रेडियो पर उसका मनपसंद गाना बजने लगा।

   सुहानी रात ढल चुकी ,ना जाने तुम कब आगे।

    वह कॉफ़ी पीते हुए मोबाइल पर मेसेज देखने लगी।
    वॉट्सएप्प पर एक नये नम्बर से आया हुआ पिंग देख सुप्रिया ने उसे खोला,जया का मेसेज था।।
  ” हाय सुप्रिया !! मैं जया,हम स्कूल मे साथ थे, पहचाना।”

सुप्रिया के चेहरे पे एक मुस्कान खिल गयी।।

” ओफ्कोर्स पहचाना,कैसे भूल सकती हूँ जया,भले ही हमारे सेक्शन अलग थे,पर स्कूल की यादें कभी भूली जा सकती हैं क्या?”

” ग्रेट!! सुप्रिया हम कुछ लोगों ने मिलकर स्कूल रियुनीयन प्लान किया है,सभी अपने बैचमेट को ग्रुप में जोड़ते जा रहें हैं,क्या तुझे भी उस ग्रुप में जोड़ लूँ, ग्रुप में हमारी क्लास के बॉयस भी हैं।कोई प्रॉब्लम तो नही है ना?

” बिल्कुल जया ,मुझे भी ग्रुप में जोड़ लो,कोई प्रॉब्लम नही।।

“30 दिसंबर को स्कूल में सुबह सारे शिक्षकों के साथ मनाएंगे और शाम को होटल में डिनर है अपनी अपनी फैमिली के साथ।”
  सभी कंट्री कर रहें हैं,मैं बाकी डिटेल्स बाद में बताऊँगी अभी तुझे जोड़ देती हूं ।

इसके कुछ 30 सेकेंड में ही एक नये ग्रुप में सुप्रिया को जोड़ लिया गया,ग्रुप का नाम था _ reunion 2005 DPS

   ग्रुप में जुड़ते ही सुप्रिया ने उसमें जुडे लोगों को देखना शुरु कर दिया,मन मे अजीब उथल पुथल मची थी,अजीब कश्मकश थी,किसी का चेहरा पहचाना सा लगता तो उसका नाम याद नही आ रहा था, किसी का नाम याद था तो चेहरा भूल गयी थी, उसे खुद पर ही हँसी आ रही थी__ और कर लो टॉप बेटा,पढ़ाई में यूँ खोये रहे कि साथ पढ़ने वालों का चेहरा भी भूल गये…तभी रेडियो पर अगला गाना बजा__

  भूल सकती नहीं आँखें वो सुहाना मंज़र
  जब तेरा हुस्न मेरे इश्क़ से टकराया था
  और फिर राह में बिखरे थे हज़ारोँ नग़में
   मैं वो नग़में तेरी आवाज़ को दे आया था      साज़-ए-दिल को उन्हीं गीतों का सहारा दे दे मेरा खोया हुआ रंगीन नज़ारा दे दे,मेरे महबूब तुझे...

हँसते हँसते उसकी आंखें एक चेहरे पर जाकर अटक गयी__ हाँ वही तो था कार्तिकेय चतुर्वेदी!!
    उसकी क्लास का सबसे शैतान नकारा निकम्मा बैक बेंचर।।
    बचपन से एक ही सेक्शन में थे दोनो,पर कभी दोनो की बात नही हुई,वो  अक्सर सबका मज़ाक बनाया करता ,कोई टीचर उसके लिये”डॉ वाशिंग पाउडर “था तो कोई ” हमारा बजाज “।

    सुप्रिया के चेहरे पर मुस्कान चली आयी ,,बारहवीं में थे तब अक्सर वो जीरो पीरियड़ में अपनी सहेलियों के साथ लाइब्रेरी चली जाया करती थी,
एक दिन लाइब्रेरी के ब्लैक बोर्ड पर उसे एक गाना बहुत ही सुंदर अक्षरों में लिखा दिखा

   चेहरे में घुल गया है हसीं चाँदनी का नूर
   आँखों में है चमन की जवाँ रात का सुरूर
    गरदन है एक झुकी हुई डाली गुलाब की
   अब क्या मिसाल दूँ  मैं तुम्हारे शबाब की।।

फिर तो ये रोज़ का सिलसिला ही बन गया,रोज़ जब सुप्रिया लाइब्रेरी जाती वहाँ ब्लैक बोर्ड पर एक गाना लिखा मिलता।

हुस्न वाले तेरा जवाब नही,
कोई तुझसा नही हजारों में

सुप्रिया से सभी सखियाँ कहतीं कि ये गाने उसीके लिये लिखे जातें हैं क्योंकि ऊपर सुप्रिया का s लिखा होता था ,और गाने के अंत में k

   आप के हसीन रूख पे आज नया नूर है,
   मेरा दिल मचल गया ,तो मेरा क्या कसूर है।।

सुप्रिया बनावटी गुस्सा दिखा कर रह जाती….
कार्तिक की स्कूल में जैसी छवि थी,लड़कियाँ तो क्या शरीफ पढ़ने लिखने वाले लड़के भी उससे दूर ही रहना पसंद करते थे,पर वो मनमौजी अपने मे मगन अपनी मस्तियों में खोया रहता।।
    ऐसे ही एक दिन बोर्ड पर लिखा मिला_

  हम आप की आंखों में इस दिल को बसा ले तो।

जाने सुप्रिया को क्या सुझी उसने उसके नीचे लिख दिया__
  हम मूंद के पलकों को इस दिल को सज़ा दे तो

अब तो लिखने वाले की हिम्मत और बढ गयी, और सुप्रिया की धड़कन भी ,ये सोच सोच कर कि आज जाने क्या लिखा मिलेगा, और अगले दिन_

   इतना है तुमसे प्यार मुझे मेरे राज़दार
   जितने के आसमान पर तारे है बेशुमार।।

बड़े ही अजीबोगरीब तरीके से ही सही कार्तिक ने अपने मन की बात लिख दी, इस गाने को पढ़ने के बाद सुप्रिया की लाइब्रेरी जाने की हिम्मत भी चूकने लगी,,वो कुछ दिनो तक स्कूल ही नही गयी,चार पांच  दिन बाद गयी तो पता चला किसी दूसरे सेक्शन के बच्चों से हुई मार पीट में कार्तिक के हाथों किसी को बहुत चोट लग गयी और इसिलिए कार्तिक को स्कूल से कुछ दिनों के लिये डिटेन कर दिया गया था।।
     उसके बाद बोर्ड की परीक्षा की तैयारियों में खो गयी,,इम्तहान होने के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिये वो अपने मामा जी के पास चली गयी और अपने शहर से नाता ही छूट गया।
   
    पिता की असामयिक मृत्यु और अनुकम्पा नियुक्ति में नौकरी के साथ मिली घर भर की जिम्मेदारियों ने फिर उसे खुद अपने बारे में कुछ सोचने का मौका ही नही दिया।।
    अपने से छोटी बहन को पढ़ा लिखा कर उसकी शादी निपटाने के बाद  वो अकेली ही अपनी माँ  का आसरा थी,इसलिये आजीवन शादी ना करने का निश्चय कर बैठी ,पर छै महीने पहले जब माँ भी उसे अकेले छोड़ गयी तब ये अकेलापन उसे काटने लगा था,पर अब उसके पास उपाय भी क्या बचा था,, 32 की उमर में अपनी शादी का खुद प्रयास करना कितना हास्यास्पद था…

   आज जया से बात होने के बाद वो एक बार फिर अपनी जिन्दगी की सबसे मीठी यादों में चली गयी थी।।
      अपनी सोच में डूबी ही थी कि उसी ग्रुप में किसी का उसे लेकर मेसेज आया__ स्वागत है सुप्रिया।

उसने भी स्माइली भेज दी,,तब दुसरी तरफ से फिर एक सन्देश आया__ अरे हमारा नम्बर तो सेव कर लो,वर्ना तुम्हारा डीपी कैसे देखेंगे।।

सुप्रिया ने मेसेज किया__ “किस नाम से तुम्हारा नम्बर सेव करुँ। ” अब वो बेचारी कैसे कहती की चेहरा तो दिख रहा लेकिन वो उसे पहचान ही नही पा रही

सामने वाले ने तुरंत जवाब दिया–” राघव सिंह ,,याद आया।।”अब तो भई तुम्हें बचपन की बातें याद नही दिल सकते वर्ना तुम्हारे मियाँ जी खफा हो जायेंगे ।।”

सुप्रिया ने वापस एक स्माईली भेज दी,,राघव !! कार्तिक का सबसे खास दोस्त!! अक्सर सुप्रिया के घर के चक्कर कार्तिक राघव के साथ ही लगाया करता था।।सबकी तो शादियां हो चुकी थी,राघव भी अपनी डीपी में अपनी खूबसूरत बीवी और प्यारे से बच्चे के साथ मुस्कुरा रहा था,,तो क्या कार्तिक की भी??
    और क्या?? कार्तिक ने भी शादी कर ही ली होगी, उन दोनों के बीच कोई बातचीत कोई करार तो हुआ नही कभी।।
    फोन बन्द कर वो अपने रात के खाने की तैयारी करने चली गयी।।
   
इसके बाद का एक हफ्ता ऑफिस में बहुत व्यस्त गुज़रा,उसे ठीक से सोने खाने का समय नही मिला, मोबाइल पर मेसेज देखना तो बहुत दूर की बात थी।

   फिर भी बीच में जब कभी समय मिलता वह अपना मोबाइल देख लेती उस ग्रुप में सभी आपस में एक दूसरे को संदेश भेजते पर उसमें कार्तिक का कभी कोई संदेश उसने नहीं देखा,  वह महीना गुजर गया और रीयूनियन वाला दिन आ गया।।

   रीयूनियन की तैयारी करने वाले ग्रुप ने बहुत सलीके से और बहुत जोरदार शानदार तैयारियां की थी लड़के तो यूनिफॉर्म की कलर के ही पेंट और शर्ट पहने हुए थे, लड़कियों ने यूनिफॉर्म की कलर की कुर्तियां डाली हुई थी ।।
वह भी नियत समय पर स्कूल पहुंच गई।।
    जया ने उसे देखते ही आगे बढ़ कर  गले से लगा लिया,, हाथ पकड़ के सभी के पास सुप्रिया को ले गई सारी लड़कियां एक एक कर आकर उसे गले मिलती रही ।
     अपने साथ की लड़कियों को अब एक्स एल और डबल एक्स एल साइज में देख देख कर सुप्रिया को उनके सुखी संतुष्ट वैवाहिक जीवन का परिचय मिलता गया,सबसे मिल कर वो भी प्रसन्न थी।।
” यार सुपी तू तो बिल्कुल नही बदली,अभी भी वैसी की वैसी है ,स्कूल ट्यूनीक पहन के आयेगी तो लगेगा स्कूल मे ही पढ़  रही।।

   अपने शिक्षकों सहेलियों सखियों सब से मिलकर भी सुप्रिया की आंखें किसी को इस भीड़ में तलाश रही थी।। उसकी क्लास के सभी लड़के बारी-बारी से उन लोगों की तरफ आए और मिलकर बातें करके चले गए।।
     स्कूल की प्लेज,प्रेयर सबने एक साथ गायी, सारे टीचर्स को कुछ गिफ्ट दिए गये ,स्कूल को 2005 बैच की तरफ से एक तोहफा दिया गया,,फिर कुछ टीचर्स ने अपने वक्तव्य वहां प्रस्तुत किए इसके साथ ही विद्यार्थियों में से भी कुछेक ने सामने आकर एक आध गीत और वक्तव्य प्रस्तुत किया।।।
     वह तालियाँ  बजा ही रही थी कि उसकी कुर्सी के ठीक पीछे कोई आकर बैठा उसने धीरे से सामने की तरफ झुक कर कहा __ सुप्रिया मुझे पहचाना मैं कार्तिक कार्तिकेय चतुर्वेदी!! कैसी हो?

  सुप्रिया ने झट से पलट कर देखा वह भी तो वैसा ही था जैसा स्कूल में दिखता था बस पहले से लंबा हो गया था और चौड़ा भी, वह उसे देख कर मुस्कुरा दी।।
“सुप्रिया तुमसे कुछ बात करनी है जरा बाहर आओ ।”

” कैसे हो कार्तिक ?? क्या कर रहे आजकल,बीवी बच्चे फैमिली सब कैसे हैं ।।”

” पहले तुम बताओ कैसी हो?? वैसे तुमने शादी नही की ये मुझे पता है,,मेरे बारे में तुम भले ही कुछ ना जानती हो पर तुम्हारे एक एक पल की खबर मुझे थी सुप्रिया,तुम्हें कॉलेज की पढ़ाई के बाद नौकरी करनी पड़ी,तुम आगे पढ़ना चाहती थी,सिविल सर्विस में जाना चाहती थी,पर घर की जिम्मेदारी ने तुम्हें तुम्हारे सपनों को पूरा करने नहीं दिया, यह सब मैं जानता हूं।।
   अभी वो दोनो बात् कर ही रहे थे कि राघव आ गया, उसी समय एक फोन आ जाने से कार्तिक अभी आया का इशारा कर के वहाँ से फोन पर बात करते हुए निकल गया।

” क्या सोच रही हो सुप्रिया,,कार्तिक को कैसे सब पता है यही ना,क्योंकि वह तुम्हारे हर संघर्ष में तुम्हारे पीछे खड़ा था पर तुमने कभी मुड़कर देखा ही नहीं तुमने कभी सोचा  जिस अनुकंपा नियुक्ति को पाने के लिए लोगों को एड़ियां रगड़नी  पड़ती है वह तुम्हें घर बैठे कैसे मिल गयी, इसके अलावा तुम्हारे पिता के नाम का ना तो कोई पैसा रुका और ना कोई और व्यवधान आया,, सब कुछ तुम्हें आसानी से मिलता गया,, क्योंकि वह  जानता था तुम्हारे जीवन में वैसे ही भगवान ने बहुत कष्ट दिए हैं कम से कम इन सबके लिए तुम्हें ज़माने से लड़ना ना पड़े।।
     वह तुम्हारे पीछे तो था पर तुम्हारे सामने कभी नहीं आ पाया उसके घर का तो तुम जानती हो उसके पिता का जमा जमाया कारोबार था  उसने उसी को आगे बढ़ाने की सोची,  उसके पिता को उसके दिमाग पर कुछ ज्यादा ही भरोसा था उन्होंने उसे विदेश एमबीए करने भेज दिया एमबीए करके आने के बाद उसने उनके बिजनेस को और चमका दिया और सिर्फ इसी शहर में नहीं इस देश के कई शहरों में उसका बिज़नेस फैला हुआ है,और वो  बिज़नेस ग्रुप का सी ई ओ है,क्लास का सबसे शैतान लड़का आज शहर का जाना माना बिज़नेस टाईकून है ।
” और शादी ?”

” हां शादी भी कर ली। उसकी मां ने ऐसा इमोशनल ब्लैकमेल किया कि उसे शादी के लिए हां कहना पड़ा ,,उसके पापा के बिजनेस पार्टनर की लड़की दिव्या से उसकी शादी हो गई लेकिन वो उसमें भी कहीं ना कहीं कुछ ऐसा ढूंढता रहा जो उस में था ही नहीं,, आखिर वो दोनो  साथ नहीं निभा सकें और शादी के 1 महीने में ही दिव्या उससे रूठ के अपने घर चली गई बस उसके बाद उन दोनो  तलाक हो गया,  तब से बस वो और उसका बिजनेस।। अब अंकल भी नहीं रहे सिर्फ आँटी  है घर पर,, अभी भी कहती हैं कि शादी कर ले कार्तिक!! मरने से पहले अपने नाती पोते का मुंह देखना चाहती हूं पर वो आँटी  को कैसे समझाये कि जिससे वो शादी करना चाहता है,वो तो कभी शादी ना करने की कसम खा कर बैठी है।।
    यकीन मानो आज भी वो तुम्हारा रास्ता देख रहा है।

   दोनों बात कर रहे थे कि कार्तिक जया और बाकी लोग भी वहां चले आए सबके आते राघव खामोश हो गया ,,सबने शाम को सही समय पर आने का वादा लिया और अपने अपने घर की ओर चले गए।।

   शाम को 7 बजे से होटल ऑर्किड में जो उन सब की महफिल सजी कि समा बन गया।।कार्तिक तो पहले से ही रफी साहब के गानों का जबर्दस्त प्रशंसक था,उसने इसिलिए रफी नाईट का आयोजन कर डाला,स्थानीय गायकों ने एक एक कर रफी साहब के गीत गाने शुरु किये

   इक हसीन शाम को दिल मेरा खो गया
पहले अपना हुआ करता था अब किसीका हो गया…..

राघव कहाँ चुप बैठने वाला था,उसने भी माईक पकड़ राग छेड़ दिया__

    गुनगुना रहे हैं भँवरे खिल रही है कलि कलि,।।

उसके बाद एक से एक गानों के साथ महफिल का रंग जमता चला गया , आखिर कार्तिक ने भी एक तराना सुप्रिया को देखते हुए छेड़ ही दिया__

    ऐसी ही रात, भीगी सी रात
हाथों में हाथ, होते वो साथ
कह लेते उनसे दिल की ये बात
अब तो ना सताओ, ओ हो …
खोया-खोया चांद खुला आस्माँ…

तभी एक वेटर ने सुप्रिया के हाथ मे एक पर्ची पकड़ा दी__” आज भी तुम्हारी राह देख रहा हूं,अगर तुम्हारी हाँ है तो कोई इशारा कर दो बस,,मैं आकर तुम्हारा हाथ थाम लूंगा….कार्तिक।।”

   सुप्रिया ने आगे बढ़ कर माईक अपने हाथ मे ले लिया और बहुत धीमे से शर्माते हुए गाना शुरु किया__

     बहार बन के आऊँ कभी तुम्हारी दुनिया मेगुज़र न जाएं ये दिन कहीं इसी तमन्ना में
तुम मेरे हो, हाँ तुम मेरे हो आज तुम इतना वादा करते जाना चुरा लिया … चुरा लिया है …

कार्तिक की खुशी का ठिकाना नही रहा ,वो तुरंत कूद कर सुप्रिया के पास पहुंच गया और उसके हाथ से हौले से माईक लेकर गाने को पूरा कर दिया__

   सजाऊँगा लुट कर भी तेरे बदन की डाली को
लहू जिगर का दूँगा हंसीं लबों की लाली को
  है वफ़ा क्या, इस जहाँ को एक दिन दिखला दूँगा मैं दीवाना चुरा लिया… चुरा लिया है …

और कार्तिक ने सुप्रिया का हाथ थाम लिया,सुप्रिया ने शरमा कर आंखे झुका ली ।।
   कार्तिक ने अपने जेब से एक रिंग निकाली और सुप्रिया से आंखों ही आंखों में पहनाने को पूछ लिया सुप्रिया के हाँ कहते ही उसने वो अंगूठी उसे पहना दी।।

   तभी किसी ने माईक लेकर एक नया तराना छेड़ दिया__

     इशारों इशारों में दिल लेने
वाले बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ से
निगाहों निगाहों में जादू चलाना
मेरी जान सीखा है तुमने जहाँ से ….

aparna…


लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

15 विचार “हमारे दरमियां….” पर

  1. बहुत ही प्यारी कहानी ,,पढ़ कर मुझे भी अपने school के friendsकी याद आ गई , हमारे टाइम पर मोबाइल फोन नहीं होते थे ,और लैंडलाइन टेलीफोन भी किसी के घर नहीं थे , पता नहीं सब किधर है 😔😔

    Liked by 1 व्यक्ति

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