जीवनसाथी – 115

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     जीवनसाथी 115

   वकील साहब ने अपनी जिरह समाप्त करने के बाद एक सबूतों का लिफाफा न्यायाधीश महोदय की तरफ बढ़ा दिया, लेकिन सुबह से चल रही जिरह में कोर्ट का समय समाप्त हो चुका था। उन सबूतों को कोर्ट में ही संभाल कर रख लिया गया। और न्यायाधीश महोदय ने कोर्ट की समय समाप्ति की घोषणा कर दी। केस की अगली तारीख दो दिन बाद के लिए तय करके न्यायाधीश महोदय ने उस दिन के समापन की घोषणा कर दी।

   राजा समर और आदित्य के साथ बाहर चला आया। यह तीनों लोग हवेली के लिए निकल गए….
आदित्य के चेहरे से नजर आ रहा था कि वह बहुत गुस्से में था । उसने समर की तरफ देखा और बोलना शुरु कर दिया…-” हद दर्जे का बदतमीज वकील था। जिस तरह से भाभी साहेब के लिए उल्टा सीधा कह रहा था मुझे तो डर था कहीं राजा भैया उठ के वही उसका मुंह ना तोड़ दें।”
” राजा अजातशत्रु हैं यह! हर काम अपने पद की गरिमा अनुरूप ही करते हैं। “
समर के जवाब पर राजा मुस्कुराने की कोशिश करने के बावजूद मुस्कुरा नहीं पाया…-” तुम सही कह रहे हो आदित्य! बांसुरी पर लगाए झूठे आरोप सुन सुनकर मुझे भी बहुत बुरा लग रहा था। लेकिन कोर्ट की कार्यवाही के बीच  मेरा कुछ भी कहना सही नहीं होता।”
राजा की बात पर आदित्य ने हां में सिर हिला दिया…-” जी आप सही कह रहे हैं भैया! लेकिन समर अब क्या सोचा है आगे इनके लिए?”
“तुम परेशान मत हो आदित्य! इनकी एक-एक बात झूठी और खोखली है। इनकी बातों का कोई साक्ष्य कोई सबूत इनके पास नहीं है। इसलिए बड़ी चालाकी से वकील साहब ने कोर्ट रूम की समय समाप्ति तक उल्टी सीधी दलीलें देकर समय को खींचा, और उस समय अपने सबूत पेश किए जिस वक्त कोर्ट के पास सबूत देखने का वक्त ही नही बचा।
  इसका कारण यही है कि वकील के पास कोई सबूत हैं ही नही। लेकिन इतनी लंबी चौड़ी कहानी के साथ सुबूत तो देने ही पड़ते हैं। सो दे दिये , अब जब अगली तारीख पर सबूत खुलेंगे, तब ये वकील साहब एक बार फिर वहीं नाटक करेंगे जो आज ठाकुर साहब की अनुपस्थिति के लिए किया …
  इनका कहना होगा कि मैंने तो रखे थे, जाने सारे सबूत गायब कहाँ से हो गए?”
   आदित्य ध्यान से समर की बातें सुन रहा था!
” लेकिन ये तो बहुत बड़ा रिस्क ले लिया वकील साहब ने। क्योंकि अगर जज साहब लिफाफा खोल लेते तो?”
” अगर उसी वक्त लिफाफा खुलता तब भी ये वहाँ यही एक्टिंग करते कि अरे सबूत कहाँ गए? मैंने तो यहीं रखे थे। ये सब इनकी चाल है और इनकी ही चाल से हमें इन्हे मात देनी है। वैसे भी सोच कर देखो उनके पास किस बात का सबूत होगा? जब उनकी कोई बात तथ्यपरक है ही नही…
         न रानी बाँसुरी की आई ए एस की परीक्षा पर उन्होंने सच बोला! न उनके और राजा साहब के विवाह पर। खैर एक बात जरूर उनकी सच थी, लेकिन अफसोस की बात है कि उसके लिए भी उनके पास सबूत नही है। “
   बातों ही बातों में वो लोग हवेली पहुंच चुके थे..
“उनकी कौन सी बात सच थी समर? “
आदित्य के सवाल पर समर मुस्कुराने लगा…. -” पहले कुछ खा पी तो लीजिये राजकुमार आदित्य ! फिर आपको सारी बातें बता दूंगा। “
राजा भी आदित्य की तरफ देखने लगा जैसे उसे भी समर की कोई बात समझ में न आई हो ….
समर मुस्कुरा कर एक तरफ बैठ गया…-” हुकुम सुबह से आपने भी कुछ नही खाया पिया है। मुझे लगा नही था कि ठाकुर साहब का वकील बात को इतना लंबा खींच लेगा। आपको वहाँ तकलीफ हुई उसके लिए माफी चाहता हूँ। आप लोग जल्दी ही कुछ खा पी लीजिये फिर आप लोगों को किसी से मिलवाना है।”
   आदित्य और राजा आश्चर्य से उसे देखने लगे… केसर और प्रेम भी आ चुके थे।
राजा कुछ और पूछ पाता कि बाँसुरी का फ़ोन आ गया, उसका हालचाल लेने के बाद उसने फोन ज़रूर रख दिया लेकिन उसके चेहरे से ज़ाहिर हो रहा था कि उसे इस वक्त बाँसुरी के साथ न रह पाना मन ही मन कितना साल रहा है। सबका खाना पीना निपटते ही आदित्य एक बार फिर समर की तरफ देखने लगा…- “छोटे कुंवर सा उतावले बहुत हैं। “और समर मुस्कुरा कर अपनी जगह पर खड़ा हो गया.. आदित्य की समझ से परे था कि इतने खराब दिन के बावजूद समर मुस्कुरा कैसे ले रहा है?
   -” आइये हुकुम आपको और बाकी लोगों को मुझे कुछ दिखाना है? आप सभी के लिए तोहफा है। “

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   समर के पीछे सभी उठ गए …
हवेली बहुत पुरानी बनी थी। उस ज़माने में हवेली जितनी सतह से ऊपर नज़र आती थी उतनी ही भीतर भी होती थी। एक तरह से तहखाने की शक्ल में ! समर आगे सीढियां उतरता तहखाने की तरफ बढ़ गया…-“कहाँ लेकर जा रहे हो समर?” राजा के सवाल पर वो मुस्कुरा उठा…-” आप सभी के सवालों के जवाब से मिलवाने!”
   तहखाने में अलग अलग कई कमरे थे। एक कमरे के बाहर मोटे कांच की दीवार थी जिसके उस पार बाहर खड़ा इंसान तो देख सकता था लेकिन भीतर रहने वाले को कुछ नज़र नही आता।
    ऐसी ही एक दीवार के सामने समर खड़ा हो गया। उसके पीछे आये सभी उसके आसपास खड़े आश्चर्य से कमरे के अंदर का हाल देख रहे थे।
  अंदर ठाकुर साहब बैठे मज़े से खाना खा रहे थे..-” ये क्या समर? तो इसका मतलब ये यहाँ हैं। इसका मतलब इनका वकील सही कह रहा था कि इन्हें हम लोगों ने किडनैप कर रखा है। “
” अब जो सोच लीजिये आप लोग। हमने किडनैप कर रखा है या ये खुद अपने शौक से यहाँ है!”
” क्या मतलब ? समर मैं भी तुम्हारी बात नही समझा?” राजा के सवाल पर समर ने एक नज़र ठाकुर पर डाली और बोलने लगा…-” ठाकुर साहब को साथ लेकर पुलिस वाले जब दून आ रहे थे। तब हम सभी जानते ही थे कि वो पुलिस कस्टडी से भागेंगे ही। इसी तरह वो भी जानते थे कि हम उन्हें भागने नही देंगे। तब उन्होंने एक पुलिस वाले को पैसों का लालच देकर अपनी तरफ मिलने का ऑफर दिया। उन्हें इसमें सफलता मिल गयी। उस पुलिस वाले ने उनसे हाथ मिला लिया। जब ठाकुर साहब ने उससे कहा कि दूर जाते समय वह किसी भी तरह बीच रास्ते से भाग निकलेंगे तब उस पुलिस वाले ने एक मोटी रकम के बदले उनसे वादा किया कि वह उनके भागने में उनकी पूरी मदद करेगा।
ठाकुर साहब यही चाहते थे क्योंकि उन्हें मालूम था अगर वह पुलिस कस्टडी में रहेंगे, तो उन पर केस भी बनेगा और कोर्ट में उन्हें पेश भी होना पड़ेगा।  ऐसे में सारे सबूतों के आधार पर कोर्ट उनके खिलाफ ही  फैसला देगी। क्योंकि  जिस वक्त ठाकुर साहब पुलिस के द्वारा पकड़े गए उस वक्त भी वह राजा अजातशत्रु के ऊपर गोली चलाने के लिए ही वहां खड़े थे ,और उनकी चलाई गोली से राजमाता की मृत्यु हो गई थी। तो असल में पहला मुद्दा कोर्ट पर पेश करने का तो यही है क्योंकि इस केस में राजमाता की मृत्यु भी हुई है। इसलिए वह सीधे-सीधे हत्या के आरोपी कहलाते हैं । इसके अलावा रानी बांसुरी के तैयार किए गए केस भी उन पर चलने ही थे। इन सभी से एक साथ बचने का उपाय उन्हें यही लगा कि वह पुलिस की कस्टडी से भाग जाएं और कहीं गुमनाम ज़िन्दगी जियें। जब मामला ठंडा पड़ जाता, तब वह एक बार फिर अपने कारनामों में लिप्त हो जाते ।
   जैसा जैसा उन्होंने प्लान किया था सब कुछ वैसा ही होता गया। उन्होंने उस पुलिस वाले की सहायता से अपने कुछ आदमियों से बात की और एक जगह निश्चित कर उन्हें उनका इंतजार करने को कहा। उसी वक्त पर अपने प्लान के मुताबिक वह ट्रेन से उतर कर भाग गये। पुलिस वाले ने वाकई उनकी बहुत मदद की थी । तयशुदा जगह पर ठाकुर साहब के आदमी अपनी गाड़ी में उनका इंतजार कर रहे थे। ठाकुर साहब उन दोनों आदमियों को पहचानते तो नहीं थे, लेकिन उन्हें अपने आदमियों पर पूरा विश्वास था। वह निश्चिंतता के साथ उनकी गाड़ी में बैठकर निकल गये। ठाकुर साहब को मालूम नहीं था कि शुरू से उनके इस प्लान में मैं उनका साथ दे रहा था, क्योंकि मैं चाहता था कि वह पुलिस कस्टडी से भाग जाएं।
  वह पुलिस वाला जिसने ठाकुर साहब की मदद की, असल  में मेरा आदमी था। ट्रेन से उतरने के बाद ठाकुर साहब को भागने में मदद करने वाले सारे लोग मेरे ही थे । ठाकुर साहब के आदमी उन्हें उन्हीं के अनुसार खुफिया जगह पर ले आए।
    आज भी ठाकुर साहब यहां बड़े मजे से हैं। उनके आदमियों ने उन्हें यही कहा है कि सुरक्षा कारणों के कारण ही उन्हें ऐसी खुफिया जगह में रहना पड़ रहा है। इस जगह की सबसे अच्छी बात यह है कि ठाकुर साहब के पास मोबाइल होते हुए भी उनका नेटवर्क यहां पर काम नहीं करता , लेकिन आप लोगों का नेटवर्क काम नहीं कर रहा है ऐसा नहीं है। उनके नेटवर्क को मैंने जाम कर रखा है। ठाकुर साहब को यह नहीं लगना चाहिए कि मैंने उन्हें किडनैप किया है। उन्हें अब भी यही लगता है कि वह अपने आदमियों के साथ हैं, और पूरी तरह सुरक्षित हैं। और उनका हम लोग कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते।
  यहां पर बैठे ठाकुर साहब अपना मास्टर प्लान बना रहे हैं।  और वह यह नहीं जानते कि उनका मास्टर प्लान असल में मेरा मास्टर प्लान है।”
” पर वह इन अनजान लोगों पर भरोसा कैसे कर बैठे?”
” भरोसा ना करने का कोई कारण ही नहीं बनता। एक तो इन लोगों में से दो-तीन लोग उनके पुराने खास हैं। जिन्हें मैंने अपनी तरफ मिला लिया था। बाकी के लोग मेरे हैं, जिनके बारे में ठाकुर साहब को यह लगता है कि यह नए रिक्रूट किये बंदे हैं।
हुकुम मुझे माफ कीजिएगा मैं जानता हूं आप सारी लड़ाइयां नियम कायदे कानूनों में रहकर लड़ना चाहते हैं। लेकिन कुछ ऐसे लोग आज भी जमाने में हैं जिनके लिए हमें भी नियम कायदों से अलग हट कर चलना पड़ता है।
” वह तो ठीक है समर लेकिन इन्हें इस तरह यहां रखने का क्या औचित्य है? मेरा मतलब है इससे हमें क्या फायदा होगा?”
” कोर्ट की अगली तारीख पर आप लोगों को फायदा भी समझ में आ जाएगा। आइये तब तक बाहर चलतें हैं। “
” पर समर तुमने ये सब किया कब और क्यों? “राजा के सवाल पर समर मुस्कुरा उठा…-“बस कर लिया हुकुम! आप राजा हैं। आपके लिए नीति नियमों का पालन करना आवश्यक है लेकिन मैं मंत्री हूँ, मुझे बस मेरे राजा के हितों को ध्यान में रख कर काम करना होता है। और मैं उसके लिए किसी भी हद तक जा सकता हूँ। आपके लाभ के लिए मुझे कुछ भी करने से परहेज़ या गुरेज नही है। आइये अब हम सब ऊपर ही चलतें हैं। अगली तारीख पर मुझे मौका मिलेगा मेरी बात रखने का। तब आप लोग समझते जाएंगे कि मेरे ऐसा करने के पीछे क्या कारण है। तब तक चलिए आप लोग भी आराम कीजिये….

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   अगली सुबह भी समर कुछ कामों में व्यस्त था.. उसका फ़ोन लगातार बज रहा था लेकिन किसी भी तरह का व्यवधान न आये इसलिये उसने फ़ोन को साइलेंट में रखा हुआ था।
  पिया ने उसे मेसेज भेजा था , जिसे अब तक समर ने नही देखा था… -”   मैं जानती हूँ, तुम मुझे जानबूझ कर अवॉयड कर रहे हो ना! मैंने तुम्हारा मेसेज समय पर नही देखा, इसलिए तुम भी मेरे साथ वही कर रहे हो ना।
  समर प्लीज़ मेरा कॉल तो उठा लो।”

  कोर्ट केस के पेपर्स ,वकील साहब के सिलसिलेवार जवाब तैयार करने में समर अपने फ़ोन पर ध्यान ही नही दे पाया। उसका एक और नम्बर था जो सिर्फ राजमहल के लोगों को मिलता था और जिससे राजमहल के लोगों से सम्पर्क में रहा जा सकता था! ये नम्बर सुरक्षा कारणों से बाहर वालों को नही दिया जाता था। इसी नम्बर पर फिलहाल समर ने अपनी माँ से बात कर उन्हें अपनी जानकारी दे दी थी। लेकिन पिया को बताना उसके दिमाग से निकल गया था। फ़ोन चार्ज नही होने के कारण पिया के इक्कीस मिस्ड कॉल्स के साथ ही समर का फोन बंद हो गया और समर पिया के मैसेज भी नही पढ़ पाया।
   पिया भी कुछ अधीर थी, अपना फ़ोन उठाये जाते न देख कर उसने एक आखिरी मेसेज और भेज दिया…
“अब अगर तुमने मेरे इस मैसेज का भी कोई जवाब नही दिया तो मैं उसी लड़के को शादी के लिए हाँ कह दूँगी जिसे उस दिन मेरे साथ देख कर तुम जल भुन गए थे।
   प्लीज़ समर एक बार तो फ़ोन उठा लो। आखिर किस बात की इतनी नाराज़गी है। “

   पिया ने मेसेज भेजने के बाद कई बार देखा जांचा लेकिन समर का कोई जवाब नही आया। पिया को लगा नाराज़गी में समर जवाब नही दे रहा।
आखिर वो भी कब तक रास्ता देखती गुस्से में उसने अपनी माँ को फ़ोन लगा लिया….- ” मम्मी आपने जिस लड़के के लिए मुझे कहा था न ,उसके लिए मैं तैयार हूँ। “

पिया की माँ की आंखे आश्चर्य से खुली रह गयीं। उन्होंने नही सोचा था कि उनकी नखरीली इतनी आसानी से उनके पसन्द किये रिश्ते के लिए हाँ बोल देगी….-” क्या ? तू सच तो बोल रही है ना? फिर कहीं ये मत कर देना की मैं लड़के वालों के घर हाँ बोल दूँ और तू मुकर जाए। “
” नही माँ ! तुम हाँ बोल दो। अब नही मुकरना मुझे। बस अब ज़िन्दगी तुम्हारे फैसलों के हिसाब से चलेगी।”

” क्या हुआ पिया ? तू कुछ परेशान लग रही है। वहाँ अस्पताल में कुछ हुआ क्या?”

” हाँ यही समझ लो । अब बहुत परेशान हो गईं हूँ। वहीं बीमारियां, उदासियां, कलपते तड़पते लोग। मैं भी कितना सहूँ , मेरी भी तो सहनशीलता की एक सीमा है ना। मैं अब थकने लगीं हूँ माँ। हो सके तो मेरे पास आ जाओ। “
” ठीक है बेटा! तू परेशान न हो मैं और तेरे पापा कल ही तेरे पास आ जातें हैं। पंडित जी से मुहूर्त निकलवा कर आऊंगी, जिससे वहीं तेरी सगाई भी निपटा लें। अपना ख्याल रखना पिया।”
      मन में समर से नाराज़गी थी और उसी नाराज़गी में पिया ने बिना सोचे समझे इतना बड़ा निर्णय ले लिया।
   समर क्या सोच रहा है, उसने क्यों फ़ोन नही उठाया, उसने क्यों किसी मेसेज का जवाब नही दिया, बिना सच जाने पिया ने अपना रास्ता ही बदलने का फैसला ले लिया था। और उसके इस फैसले से अनजान समर वहाँ अपने केस की तैयारियों में लगा था….

क्रमशः

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दिल से….

   प्यारे दोस्तों आप सभी के मुझ पर प्यार और विश्वास ने मुझे खुद पर भरोसा करना भी सीखा दिया। आप सबने जिस तरह मेरे ब्लॉग पर आकर मेरा हौसला बढ़ाया है उसके लिए वाकई मेरे पास शब्द नही है। देखा जाए तो असली सुपर फैन्स के टैग आप सभी को मिलता है।
  हम जब किसी मज़बूत प्लेटफॉर्म पर लिखते हैं तब हमें काफी सारी चीज़ें वहाँ अपने आप मिल जाती हैं लेकिन जब हम अपना पर्सनल ब्लॉग लिखना शुरू करतें हैं तब काफी सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन आप सब के साथ ने मुश्किलों को बहुत आसान कर दिया।
जिसके लिए आप सब की शुक्रगुज़ार हूँ।
एक और बात आप सब से कहनी थी, वो ये की अब मेरे ब्लॉग के बारे में मैं प्रतिलिपी पर चर्चा नही कर सकती लेकिन आप सब तो स्वतंत्र हैं क्योंकि आप वहाँ के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है । जी हाँ क्योंकि आप पाठक हैं। और एक पाठक के बिना न लेखक का कोई अस्तित्व है और न ही किसी लेखन प्लेटफार्म का।
  आपको ज्यादा कुछ नही करना है। अगर आपको मेरा ब्लॉग पर लिखना गलत नही लगता तो आप अपने बेहद करीबी दोस्तों से भी मेरा ब्लॉग लिंक शेयर कर सकतें हैं।
   आप लगभग 250 लोग हैं , अगर आप सब 5-5 लोगों को भी जोड़ सकें तो काफी लोगों को यहाँ पहुंचने में मदद मिल सकती है।
प्रतिलिपी नही छोड़ना चाहती क्योंकि वहाँ भी पाठक हैं और कुछ ऐसी आदरणीया पठिकाएँ  भी हैं जो नए नए एप पर आकर मुझे नही ढूंढ सकती।
  इसलिए लिखती वहाँ भी रहूंगी लेकिन सबसे पहले सारी रचनाएं सिर्फ मेरे ब्लॉग पर ही प्रकाशित होंगी।
  एक बार फिर आप सभी का हृदयतल से आभार व्यक्त करती हूँ।

आपकी
aparna…..

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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

59 विचार “जीवनसाथी – 115” पर

  1. कम्युनिकेशन गैप का यह सटीक उदाहरण है ।
    आपस में बातचीत न होने से कितना ज्यादा कन्फ्यूजन हो जाता है कि गुस्से में जीवन से सम्बंधित निर्णय को भी गुस्से की बलिबेदी पर चढ़ा दिया …..
    💐💐💐💐💐
    🙏🙏🌴🙏🙏

    Liked by 1 व्यक्ति

  2. आज का भाग बहुत ही बेहतरीन रहा। समर आखिर में बीरबल से भी तेज निकला। उसके पास दुश्मन की हर चाल का जवाब पहले से तैयार होता है।
    लेकिन इन्हीं कारणों से वो अपनी पर्सनल लाइफ पर ध्यान नही दे पा रहा और पिया ने गुस्से में आकर एक अलग ही समस्या खड़ी कर दी है।

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