घरवाली

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            “अरे कहाँ व्यस्त हो भाई लोग ,,सब के सब ऐसा क्या देख रहे कम्पयूटर पे…जरा हम भी तो देखें ।।””
    ” अरे कुछ नही रवीश ,ये मेरी एक दोस्त है ,उसने अपनी पार्टी की फोटो पे मुझे टैग किया है ,फेसबुक पे,तो बस वही देख रहे ,हम दोनो।”
     रवीश भी देखने लगा। कुछ आठ दस लड़कियों का ग्रूप फोटो था,सबने अजीब आढे टेढे मुहँ बना रखे थे,सबसे बीच मे एक निहायत ही खूबसूरत लड़की खड़ी थी ,फ्लाइंग किस करती।
 
       रवीश की आंखे अटक गई ,घूम फिर के बार बार वही चेहरा देखने का मन कर रहा था।
     रवीश एक 25  26साल का सॉफ़्टवेयर इंजीनियर है ,पुणे मे वाकड़ मे खुद का फ्लैट ले चुका है,दिखने मे भी ठीक है,घर वाले अब चाहते हैं,वो शादी कर ले……आज तक उसे अपनी आजादी बहुत प्यारी थी,हफ्ते मे 5दिन काम करो,और 2दिन आराम से दोस्तों के साथ पार्टी करो
  घर मे पानी की बोतल से ज्यादा बीयर की बोतलें पड़ी होती हैं, कोई टोकने वाली तो है नही।
  सामने वाली करंजकर आंटी की बाई आकर साफ सफाई कर जाती है।खाना कभी कैंटीन मे खा लेता है,कभी मैगी से काम चल जाता है।बिल्कुल राजा महाराजा सा जीवन है……पर आज एक अदद फोटो ने सारा खेल बिगाड़ दिया।

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      आज अचानक रवीश को अपने आप पर बहुत तरस आने लगा,कोई नही है ,जो फ़ोन करके पुछे,घर कब आ रहे…..अच्छा सुनो खाने मे क्या पका लूं ….बेचारा! इतवार की रात का कितना भी हैंगओवर हो अगले दिन सुबह खुद ही उठ के नीम्बू पानी बनाना पड़ता है।
      अब उसकी भी उमर हो रही है,उसे भी अब शादी कर के घर बसा लेना चाहिये,हर चीज़ वक्त पे हो जाये तभी अच्छा है….
           आज रवीश को अपनी आज़ादी बहुत खल रही है ।
        एक बार फिर तस्वीर पे उड़ती सी नज़र डाली और अपने क्यूबिक मे आके बैठ गया।

       ऐसा नही था की रवीश की जिन्दगी मे कभी कोई लड़की नही आई,स्कूल कॉलेज मे छोटे मोटे अफेयर हो चुके थे,पर दोनो ही पक्ष बहुत सीरियस नही थे….हाँ दो साल पहले ऑफ़िस मे एक नई लड़की आई थी,रूही…..वो उसे बड़ा भा गई थी।
         वो अक्सर अपने काम के लिये रवीश की राय लेती थी,कभी कभी दोनो साथ ही लंच भी किया करते थे…..उसे रूही अच्छी लगने लगी थी।
     एक शाम तो वो बाँका ज्वेलर्स भी पहूंच गया था,हीरे की अंगूठी लेने,सोचा अंगूठी देके ही प्रोपोस करूंगा ,पर तभी नासपीटे लोकेश का फ़ोन आ गया।
     “यार कहाँ है तू,जल्दी आ जा,,आज तेरी भाभी अपनी बहन के घर रुकेगी….अमित और विक्की भी आ रहे…party करेंगे।”
     “बस यही  ‘पार्टी करेंगे’ एक ऐसा शब्द है जिसे सुन के मरता हुआ लड़का भी जी उठे,और यमराज से लड झगड़ के अपने मित्रों के पास पहुंच जाये।
     बस वही रवीश के साथ हुआ,,हीरे की अंगूठी तो कभी भी आ जायेगी,पर भाभी जी रोज रोज तो मायके जाती नही,बेचारा लड़का पार्टी की तैय्यारियो मे चला गया।
         फिर एक शाम टी ब्रेक मे रूही और रवीश कैन्टीन मे थे -“अरे रवीश तुम्हे मैने बताया नही ना….मेरे मॉम डैड मक्का जा रहे”।
     “मक्का ! वहाँ क्यों? वहाँ तो मुस्लिम जातें हैं ना ?”
    “हाँ तो ! मैं मुस्लिम ही तो हूँ,मेरा पूरा नाम नही पता क्या?  रूही अंसारी।”
   “या अल्लाह! रवीश त्रिपाठी जी किस दुनिया मे रहतें हैं आप ! “
       रवीश चुपचाप मुस्कुराता रहा,चाय पीता रहा।उसे एक महिने मे कभी पता ही नही चला की रूही मुसलमान थी,,अच्छी बहुत लगती थी पर इतना भी नही की अपने घर वालों से शादी के लिये लडता झगड़ता।
     “यार लोकेश बचा लिया यार तूने, 38000बह जाते अंगूठी मे।”
        अभी 6महिने पहले हंसती खिलखिलाती रूही उसे अपने निकाह का कार्ड थमा गई तब उसकी जान मे जान आई,हालांकी रूही के मन मे ऐसा कभी कुछ नही था,फिर भी कार्ड पाके उसे बहुत खुशी हुई।

        पर इस बार बात हर बार से अलग थी,लड़की ऐसी थी की जिसके लिये सारे संसार से लड़ा जा सकता था,इस बार उसे जाति धर्म कुछ नज़र नही आ रहा था।
         बड़ी हिम्मत करके उसने अमित से उस लड़की के बारे मे पूछ ही लिया।
    “मुझे नही पता यार,वो तो रेणू मेरी स्कूल की दोस्त है,उसिने फोटो भेजी थी।”
    “हाँ तो उसी रेणू से पूछ ले”।
“पागल हो गया है क्या,,मरवायेगा तू….रेणु मेरी और मेरी बीवी दोनो की दोस्त है,उससे कुछ पूछा ना तो मेरे घर जाके आग लगा आयेगी।”
   “यार अमित अपने भाई के लिये इतना नही कर सकता तू।”
“और कहीं फिर से लड़की मुसलमान या किरिस्तांन निकली तो?? तेरे अन्दर का पण्डित फिर जाग जायेगा।”
    “नही भाई ,इस बार मुझे सच मे प्यार हो गया है,प्लीज उसका पता कर दे,तेरा अहसान जिंदगी भर नही भूलूंगा।”
       दो दिन बाद अमित ने रवीश को एक फ़ोन नम्बर दे दिया।
     “देख यार,रेणु खुद उस लड़की के बारे मे कुछ नही जानती,रेणु की पार्टी मे उसकी किसी सहेली के साथ ही ये आई थी,,नाम तक नही पता।अब तू जान ,कैसे बात करेगा,क्या करेगा।”

      खुशी से अमित को गले से लगा लिया रवीश ने ,घर जाते समय उसकी कार मे ‘लम्बोर्गिनी ‘बज रहा था,उसने ट्रैक बदल दिया और सोनू निगम का “अब मुझे रात दिन तुम्हारा ही खयाल है” सुनते सुनते घर पहुँचा।
          घर पहुच्ंते ही नम्बर सेव किया और वॉट्सएप्प पे तुरंत डी पी देखा।
     उफ्फ ,कैसा सलोना चेहरा है,कितनी मासूम है,
कितनी प्यारी मुस्कान है,,चेहरे से तो ब्राम्हण ही लग रही,पर चलो नही भी हुई तो भी कोई बात नही।
    अब शादी तो इसी से करनी है,चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाये……बहुत हिम्मत कर के अपने दिल को समेट के रवीश ने उसे मैसेज किया
  “हेल्लो ,कैसे हो आप।”
   “Sorry …who is this ?
” hi ,myself Raveesh …मै अमित का दोस्त हूं ।”
   “कौन अमित “?
“आपकी दोस्त है ना रेणु ,,उसी रेणु का दोस्त है अमित।”
“ओह्ह्ह्ह अच्छा आप रेणु के दोस्त हैं।”
“हांजी ,ऐसा ही समझ लिजिये,,क्या मै आपसे कुछ देर बात कर सकता हूँ,आप फ़्री हैं अभी?”
  “असल मे मै,मेरे बेटे का होमवर्क करा रही हूँ,तो अभी तो बात नही कर पाऊंगी।”
   “अच्छा ,बेटा भी है आपका।”और पति ?
  उफ्फ घबराहट मे ये क्या बोल गया….
“Obviously, पति भी है,और बेटा भी।आपको अगर कोई ज़रूरी काम नही है तो हम बाद मे बात करते हैं।”
   रवीश बेचारा रो पड़ा,तुरंत फ़ोन काटा और नम्बर डिलीट किया…..
      उसे बहुत बहुत ज़ोर का गुस्सा आ रहा था,थोड़ा सा रोना भी आया,पर हद है…..लड़कियों को शादी करने  का भी बड़ा शौक है,और शादीशुदा नही दिखने का भी।
         कहीं से भी फोटो मे समझ ही नही आ रहा की कम्बख्त बाल बच्चों वाली है…..पहले का समय अच्छा था कम से कम देख के समझ तो आता था की लड़की शादीशुदा है,किसी की घरवाली है।
            बेचारा रवीश !अपना गम गलत करने एक बार फिर अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने चल दिया।।।।

aparna ….

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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

17 विचार “घरवाली” पर

  1. ‘सबकुछ ठीक चल रहा था पर एक अदद फोटो ने सारा खेल बिगाड़ दिया ‘..’हद है अब! लड़कियां ऐसे रहती है कि लगती नहीं कि शादीशुदा या बाल बच्चों वाली है ”पहले का जमाना ही सही था’ 😂😂😂…वैसे मुझे ऐसा लग रहा है रविश को बेवकूफ बना दिया लड़की ने। ‘बेटे को होमवर्क करवा रही हूं ‘ 😅😅

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