शादी.कॉम-3

राजा भैय्या के भलमनसाहत के किस्से जितने फेमस थे उससे कहीं ज्यादा भैय्या जी के कातिल रंग रूप के चर्चे थे मोहल्ले की लडकियों के बीच।।।।
      क्या कुंवारी कन्यायें और क्या शादीशुदा ,सभी सुबह सुबह भैय्या जी एक झलक पाने को किसी ना किसी बहाने अपने द्वारे खिंची चली आती,कोई खिड़की से झांक लेती कोई छत से,कोई उसी समय अपने कुत्ते को टहलाती ,कोई अपनी गाय का सानी भूसा करती, सब चोर नजरों से राजा भैय्या को एक झलक देख कर ही तृप्त हो जाती,और भोले भंडारी राजा भैय्या इन सब बातों से बेखबर सुबह सुबह अपने जिम पहुंच जाते।।

     नीले रंग का  ट्रैक सूट पहने  अपनी रेशमी ज़ुल्फे उड़ाते राजा भैय्या जॉगिन्ग ट्रैक पे दौड़ते हुए जाने कितने कन्या रत्नों का हृदय अपनी मुट्ठी में भींचे दूर तक दौडे चले जाते….. और पीछे रह जातीं उनकी अनन्य प्रशंसिकायें।।।

   लेकिन इसके बावजूद राजा भैय्या को अपनी किसी खूबी का कोई गुमान ना था,वो तो बेचारे रात दिन इसी जुगत में रहते कि कोई भगवत कृपा हो जाये और वो बारहवीं किसी तरह पास हो जायें।।
  स्कूल तो वो दो साल पहले ही त्याग चुके थे,अभी दो बार से प्राईवेट एग्ज़ाम दिलाने पर भी जाने शनी की कैसी साढ़े साती उनके बोर्ड एग्ज़ाम पे तिर्यक दृष्टी लगाये बैठी थी कि बेचारे अपने फेल होने के बोझ तले दबे जा रहे थे।।

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  वैसे तो हर माँ की तरह प्रमिला को भी अपनी बेटियों पे नाज़ था,पर बाँसुरी में उसके प्राण बसते थे,बसे भी क्यों ना एक तरफ जहां वीणा अपनी ही सज धज में लगी रहती वहीं घर भर में सिर्फ बांसुरी ही थी जो अपनी माँ की सबसे ज्यादा कदर किया करती….शायद ही किसी घर की बिन ब्याही कन्या ऐसा करती होगी जैसा बांसुरी करती नित्य सुबह अपनी माँ से पहले उठ कर रसोई को पोंछ पाछं कर माँ के जागने पे उनके हाथ गर्मा गर्म चाय पकड़ ,अपनी चाय लिये छत पे चली जाती और पढ़ने में लग जाती।।,दिन भर में सिर्फ यही एक काम बांसुरी करती पर उसी एक काम से प्रमिला को दिन भर अपनी गृहस्थी में जुते रहने की खुराक मिल जाती, जाने क्यों प्रमिला को हमेशा ऐसा लगता कि कभी ना कभी उसकी इस बावली छोरी के लिये कही से कोई राजकुमार ज़रूर आयेगा।।
     उसे अपनी बिटिया की बुद्धिदीप्त चमकती आंखों पर बड़ा नाज़ था,पर आजकल कुछ दिनों से उसकी राजकन्या के लिये बुआ जी जैसे आड़े तिरछे नकटों के रिश्ते ला रही थीं,कहीं ना कहीं अब उसके भी मन में विवाह को लेकर सन्देह की स्थिति उत्पन्न होने लगी थी।।

  “लाड़ो !! ले चाय पी ले,बड़ी शाम हो गई,तू क्या पढ़ी जा रही ,इतना ना पढ़ा कर,चश्मा ना लग जाये।”

“अरे मम्मी हमें कोई चश्मा वश्मा नही लगेगा,और सुनो बहुत पढ़ने से चश्मा नही लगता ,समझी !! देखो हम ये जो इत्ता सारा पढ़ते हैं ना,इससे हमारी नौकरी लगेगी बैंक में,फिर पहले अपने दिमाग से बैंक का वारा न्यारा करेंगे और बाद मे बैंक हमारा।’

“बिटिया एक काम और कर लिया करो,ये देखो तुम्हरे लिये का लाए हैं ।”

“का रखी हो दिखाओ, हैं ये क्या फेयर ऐण्ड लवली।”

“हाँ लाड़ो,हम जानते हैं तुम्हे चेहरे पे कुछ लगाना पसंद नही,पर देखो आजकल की सब लड़कियाँ इहै लगा रही,और टी वी में देखी हो,कैसी कोयला रहती हैं औ ये लगा के कैसी फकफका के गोरिया जाती हैं ।

“अरे मम्मी तुम भी बच्चों जैसी बात करती हो यार! वो लड़कियाँ ऑलरेडी गोरी होती है,उनको तो पहले काला बनाते हैं,मेक’प वाले,अब हमारे को तो कान्हा जी ही काला बना के भेजे हैं,अब इसपे और का रंग चढाये,बताओ।।”

“अरे वीणा की अम्मा ,हम भी आफिस से आ गये हैं,हमें भी कुछ चाय वाय दे दो,या दोनो माँ बेटी लगी रहोगी गप्पे मारने में ।”

“सुनो बांसुरी कम से कम एक काम तो कर लिया करो,रोज ना लगाओ पर बिटिया कही आने जाने के टाईम तो लगा ही सकती है,महंगी क्रीम है भाई खरीद के लाएं हैं तुम्हरे लाने,औ तुम मुहँ बिचका रही हो।”

बांसुरी ने अपनी अम्मा के हाथ से फेयर ऐंड लवली का डिब्बा लेकर अपनी टेबल पे रख लिया और मुस्कुरा दी,अम्मा भी खुशी से नीचे उतर गई

“अरे जाते जाते बताती तो जाओ ,रात के खाने में का बना रही हो मम्मी।।”

“कढ़ी,गुलगुला बना रहे हैं,ठीक है।”

“ठीक है!!”कढ़ी के नाम पे बांसुरी का खराब से खराब मूड भी बन जाता था।।

    बाँसुरी ठीक सुबह 8 बजे अपनी सहेली निरमा के साथ कॉलेज जाती और 1बजे तक वापस आ जाती।।निरमा का घर पीछे वाले मोहल्ले में था,और उसी तरफ के रास्ते से उनका कॉलेज पड़ता था,पर इसके बावजूद निरमा पहले बाँसुरी के घर आती,वहाँ चाय नाश्ता कर दोनो सहेलियां कॉलेज के लिये निकलती ।।
       बाँसुरी की अम्मा वाकई बहुत स्वादिष्ट भोजन बनाती थी,इसका जीता जागता इश्तेहार स्वयं बाँसुरी थी,और इसीसे बाँसुरी को लगता था की उसकी अम्मा के हाथ का स्वाद नाश्ता सुबह सुबह निरमा को उसके घर खींच लाता है,पर बाँसुरी का ऐसा सोचना सर्वथा गलत था।।

    निरमा और बांसुरी के कॉलेज के रास्ते पे राजा भैय्या का जिम भी पड़ता था,और सुबह के समय राजा भैय्या अपने चेले चपाटो को सलमान खान जैसी बॉडी बनाने की ट्रेनिंग दिया करते थे,उनकी ईमानदार टुकड़ी में एक ऐसा भी बंदा था ,जो इतनी सुबह कसरत के इरादे से ना आकर निरमा को ताडने के इरादे से वहाँ आता था,और जिम के बाहर बनी सीढिय़ों पे बैठा निरमा के वहाँ से निकलने का इन्तजार किया करता था,निरमा के वहाँ से निकलते ही जिम में जाकर थोड़ा इधर उधर कुछ समय खराब कर घर को निकल जाता था….पर ऐसा नही था कि वो अकेला ही दोषी था,,आग दोनो तरफ बराबर लगी थी।।
     निरमा और प्रेम पिछले कुछ समय से एक दूसरे को पसंद करते थे,पर राजा भैय्या के सामने कुछ भी बोलने की प्रेम की हिम्मत नही थी इसिलिये उसने एक उपाय सोचा और रमा को अपना आइडिया बता दिया।।

   “हम सही कह रहें हैं बंसी,तू एक बार सोच के देख ना।””

“अरे हम क्या सोचें,अगर उसे ट्यूशन पढना ही है,तो आके हमसे बात करे,हम थोड़े ना खुद जायेंगे ,, कभी सुनी हो क्या कि गुरू खुद चेला के पास जा रहें हैं कि आओ बबुआ तुम्हें पढ़ा दें,और फिर निरमा हम सुने हैं ओ राजा बहुतै गधा है।”

“हाय हाय राजा भैय्या के लिये ऐसा कैसे बोल रही हो,जानती नही कितना परोपकारी हैं बेचारे।”

“अरे तो परोपकार से उनका गधापन छुप जायेगा ? गधा है तो है, वैसे विषय क्या लिये हैं,तुम्हारे राजा भैय्या??

“आर्ट्स वालें हैं ,,वकील बनना चाहतें हैं ।”

“हम्म,अच्छा किये आर्ट्स ले लिये क्योंकि कहीं गलती से गणित लेके पास हो जाते और इंजीनियर बन जाते तो सोचो क्या होता,,जो पुल बनाते उसमें तो ससुरे धनिया बो आते,और चारे दिन मे वो पुल जो भरभरा के गिरता जाने कितनों को स्वर्ग के द्वार पहुँचा देता।।
       डॉक्टर बन जाते तब तो साक्षात यमराज को उतरना पड़ जाता पृथ्वी पे कि राजा भैय्या इतनी फास्ट डिलीवरी ना भेजिए,हमारा भैंसा ढो नही पा रहा,और आप दनादन लोगों का स्वर्ग का टिकट काट रहे हैं ।।
     बताओ वकील बनना चाहतें हैं,अरे वकालत आसान है क्या,पर चलो वो तो बाद की बात है, अभी इनको आर्ट्स पढा के बारहवीं की नैय्या तो पार लगाएं ।।
   फिर कुछ सोचते हुए बाँसुरी ने कहा -“ठीक कह रही हो यार,उस दिन बाबूजी का स्कूटर खराब हो गया था तो यही बिचारा खींचता हुआ पहुंचाया था घर तक,,चलो ठीक है,तुम्हारी मान के चलते हैं,पूछ लेते हैं,पढना चाहेगा तो हम बिना फीस के पढ़ा देंगे।।”

   प्रेम ने ही निरमा को ये आइडिया दिया था,इसी बहाने उसे लगा जब तक राजा भैय्या जिम में पढ़ाई करेंगे ,वो और निरमा साथ साथ बातें कर लेंगे और किसी दिन अच्छा सा मौका देख के भईया जी को सच्चाई से अवगत करा देंगे,अब इधर निरमा ने तो बाँसुरी को पढ़ाने के लिये मना लिया पर प्रेम की इस बारे में राजा से बात करने की हिम्मत ही नही हुई।।
    कॉलेज के लिये कुछ जल्दी निकल कर बाँसुरी निरमा के साथ जिम पहुंच गई

“ए राजा इधर आओ,सुनो हमारी बात।”

बाँसुरी की इतनी तीखी पुकार सुन सारी चंडाल चौकडी के कान खड़े हो गये,उनमें से एक लपक के सामने आया।।

“ए मोटी!! तुमको का बात करने का तमीज नई है, सब्बे भूला गई हो का,भैय्या जी का अईसे नाम पुकार रई हो।”

“तो और कैसे पुकारें तुम्हारे भैय्या जी को।?”

“राजा भैय्या बोलो जैसे सब बोलते हैं,समझी।”

“काहे बोलें,हम तो नाम ही लेंगे।”

“अरे ए धमल्लो,भईया जी कम से कम तुमसे दस बरस बड़े होंगे।।”ये दूसरा अनुचर चिल्लाया।।

तब तक में भैय्या जी बांसुरी तक पहुंच गये।।

“हां तो होने दो दस साल बड़े,कक्षा में तो हमी सीनियर हैं,तो इस हिसाब से इनको हमें मैडम बोलना चाहिये,समझे घसियारों !!!!,कभी स्कूल कॉलेज जाओगे तभी तो सीनियर जूनियर पता पड़ेगा।।

” अरे फेल होने से का होता है,बड़े तो हैं ही उमर में,जितने के भैय्या जी हैं इतने उमर में तो बड़के भैय्या का ब्याह भी हो गया रहा,ऊ तो भैय्या जी कसम खा के बैठ गये कि बारहवीं पास कर के ही ब्याह करेंगे,वर्ना तो हम लोग अभी तक इनका लड़का बच्चा खिला रहे होते।।”

“बस करो तुम लोग ,,सालों कितना बेज्जती कराओगे हमारी।” इस बार राजा भैय्या गरजे

“हां बताईये मैडम जी,कैसे हमारे जिम मे आना हुआ आज आपका , 6महीना का कोर्स करना है आपको,या साल भर का,वैसे 6महीना का कोर्स कठिन होगा।।”

“अरे हम काहे का कोर्स करेंगे भई ।”

बाँसुरी ने पूछा –
     “हमें लगा आप पतले होने के लिये आई हैं ।”

राजा के ऐसा बोलते ही बाँसुरी हिल हिल के हंसने लगी।।

“अरे नही हो राजा बाबू,हम यहाँ आपको पढ़ाने आये हैं,ट्यूशन !!वो भी बिना फीस के,अब समझे।।”
अब कितने साल लुढ़कते रहोगे,हमारे मोहल्ले की नाक का सवाल है,पर एक बात बोलें शकल से तो इतने गधे नही लगते हो,अरे नकल कर के ही पास हो जाते,नकल करना भ्रष्टाचार थोड़े है,नकल करने से देश की अर्थव्यवस्था पे भी कोई असर नही पड़ता,फिर काहे इतना ईमानदारी दिखाये भई ।।”

राजा भैय्या के गोरे चेहरे पे जैसे किसी ने मुट्ठी भर अबीर बिखेर दिया,बेचारे लजा के गुलाबी पड़ गये ,फिर धीमे से बोले-

“ऊ हम एक बार कोशिश किये थे,नकल मारने की, पर फुर्रे में जो लिख के ले गये थे उसको जल्दी जल्दी में मोजे के अन्दर डाल दिये और स्कूल जाते समय भूल गये और रास्ते में भरे पानी में छलांग लगाते स्कूल पहुँचे,जब वहाँ पेपर देख के अपना पर्ची ढूँढे तो वो पूरा गीला होके पूरा लिखा मटिया मेट हो गया रहा ।”

“धत ऐसे भी कोई चीटिंग करता है,तुमको तो चीटिंग करना  भी नही आता राजा।”

“अरे सुनो तो एक बार और कोशिश किये थे,हमारी ये बड़ी बड़ी ज़ुल्फों के भीतर पिंकी की हेयर पिन से फुर्रा छुपा लिये थे।।

“फिर,फिर क्या हुआ?”

“फिर का,वहाँ क्लास में पिन बाल मे ऐसा फंसा कि हम थक गये पिन निकाल निकाल के ,पिन निकले ही नही,हमको इ सर्कस करता देख के आचार्य जी आये बेचारे वो भी पूरा मेहनत किये,फिर उनके साथ और दो लड़के मिल के ओ पिन निकाले ,पिन तो निकल गया पर फुर्रा आचार्य जी के हाथ में,!!!    ऊ देखे उसको उल्टा पुलटा कर के,पुछे चीटिँग करने लाये थे बबुआ??
   हम सर झुकाये खड़े रहे ,फिर फुर्रा हमारी ओर उछाल दिये बोले बेटा कर लो चीटिँग बन पडे तो।।।हम खुस……..।।देखे तो ऊ पर्ची का चिन्दी चिन्दी हो गया था,,ऐसा रोना आया की हम कसम खा लिये कि अब भले जीवन भर पास ना हो पाये पर नकल नही करेंगे।।”

“तुम कसम बहुत जल्दी खा लेते हो राजा, तुम्हारी अम्मा खाना नही देती का।”ऐसा बोल के बाँसुरी फिर हिल हिल के हंसने लगी।।

“ए बाँसुरी देखो हम तुम्हारा मजाक नई उड़ाते तुम भी हमरी अम्मा तक ना जाओ।।”

“अच्छा ठीक है,तो सुनो, राजा !!हम ठहरे गणित वाले ,और तुम हो आर्ट्स वाले,हम तुमको आर्ट्स पढायेंगे वो भी मैथ्स के स्टायल में,समझे।।”

“नई समझे,इत्ते  समझदार होते तो पास ना हो जाते।”

“बात तो सही कह रहे तुम!!  अच्छा सुनो देखो हम कुछ पते की बात बताते हैं,,देखो विद्यार्थी दो तरह के होते हैं-पहला वो जो विद्या के सही अर्थों को जान ले समझ ले और अपने ज्ञान से संसार को तृप्त कर दे जैसे हम यानी बाँसुरी तिवारी ।।
  और दूसरे वो जो विद्या की अर्थी निकाल दे जैसे तुम यानी राजकुमार अवस्थी।।
तो बेटा राजा बाबू तुम अब कुछ जादा ही फेल हो लिये हो,तुम्हारा ये तकलीफ अब हमसे देखा नही जा रहा,वो क्या है ना ,जैसा तुम दुनिया को स्वस्थ बनाने का जिम्मा लिये हो,वैसे ही हम दुनिया को साक्षर बनाने का जिम्मा ले लिये हैं,अपने इन
नाजुक कंधो पे।।
   बस एक छोटी सी शर्त है हमारी,हफ्ते में एक दिन तुम हमें समोसा खिलाओगे,ठीक है?”

“खिला देंगे उसमें कौन बड़ी बात है? हम तो ई अटरम शटरम नई खाते पर तुम्हारे लिये हफ्ते में एक बार हमरे जिम में हम पार्टी कर देंगे ,एक दर्जन समोसा मंगाने मे का जायेगा हमरा?”

“काहे ?? हम अकेले खाएंगे का,ई बाकी के तुम्हारे घसियारे भी समोसा नई खाते का??”

“एक दर्जन तुम सब के लिये ही बोल रहे हैं भाई।”
राजा भैय्या की बात सुन बाँसुरी फिर हिल हिल के हँस पड़ी-“अरे एक दर्जन तो हम सिर्फ दसै मिनट में गप कर जाते हैं राजा बाबू,खैर चलो वो सब तो बाद में देख लेंगे ,अभी तुम्हें और कुछ ज़रूरी बात बता दे।”

“रुको तुम सब ज़रूरी बात बता देना पहले हमको
एक बात बताओ,तुम्हरे मन मे अचानक ये परोपकार कैसे जागा,हमे पढ़ाने कैसे चली आईं,हमारे बाबूजी कुछ बोले का तुमसे,या बडे भैय्या।।”

“नही !!!
       ना तुम्हारे बाबूजी ना बड़के भैय्या,हमे साक्षात सरस्वती मैय्या सपने में आ के बोली कि बाँसुरी तुम बुद्धि का पिटारा हो और तुम्हारे मोहल्ले का एक सांड लगातार फेल होता जा रहा है, और बोली की जाओ उस नादान की मदद करो,उसे पढ़ाओ,तो बस देवी मैय्या की इच्छा पूरी करने हम आ गये।।”

भैय्या जी प्रभावित !! नतमस्तक हो उन्होने बाँसुरी को नमस्कार किया।।

“सुनो राजा ,कुछ ज़रूरी पॉइंट!!! पढ़ने से पहले दिमाग में ये रखो की तुम्हें कैसे पास होना है,पढा तो हम देंगे पर पास होना ना होना तुन्हारे हाथ है।।
हम पहले भी बताये ना ,जो हमारे जैसे विद्यार्थी हैं वो पढ़ाई का भला करने पढ़ते हैं,पढ़ाई और किताबें हमे देख कर खुश होतीं है,पर जैसे ही तुम जैसों के हाथ आतीं हैं सौ सौ आंसू बहा के रोती है बेचारी।।
तो इसका मतलब ये है कि तुम्हरे पढ़ने से किसी का कोई फायदा नही है,तुम्हारे जीवन का एक मात्र लक्ष्य होना चाहिये पास होना।।।

साम दाम दण्ड भेद जिस तरीके से पास हो सको वैसे कोशिश करो और पास नही हो पाओ तो कोशिश करो की पेपर ही कैन्सिल हो जाये।।

“अब आज के लिये इत्ता सारा ज्ञान बहुत है,हम कल सुबह 7:30पे आयेंगे,अपनी सब किताबें ले कर आना,रख्खे तो हो ना किताबें की, कबाडी को बेच आये हो।”

“अब हम तो इत्ते साल से देखे ही नही,अम्मा से पूछना पड़ेगा किताब रख्खी हैं हमारी कि बेच डाली ,वैसे अम्मा को नही हमारे बाबूजी को ऐसे चिन्दी बेच के पैसे जमा करने का अजीबै शौक है।।
घर भर का पेपर रद्दी सद्दी जमा करेंगे और उसको चौक के ऊ पार नत्थू कबाड़ी के वहाँ बेचने जायेंगे, हम बोलतें भी हैं कि हमारे फ़ोन करने से वो घर आ जायेगा लेने तो बोलतें है घर आता है तो कबाड़ का दू रुपैय्या कम देता है,अब का बोले,इ बुढ़ापे में स्कूटर पे घिटर पिटर जातें हैं ।।”

“अर्र्रे राजा !!! बाबूजी को बोलना स्कूटर में चार रुपैय्या का तेल जला देते हो चौक तक जाके उससे तो कम नुक्सान है ना नत्थु घर आके ले जायेगा तो।।”

राजा भैय्या को आज पहली बार बड़के भैय्या से भी कहीं ज्यादा तेज़ दिमाग का कोई मिला था,अन्दर ही अन्दर वो बाँसुरी के पैने दिमाग का लोहा मान चुके थे,उन्होनें अपने नये नवेले गुरू को प्रणाम किया,बांसुरी मुस्कुरा कर कॉलेज निकल गई,और भैय्या जी उसकी बातों और विचारों को सोचते सोचते क्रॉस ट्रेनर पे चढ़ गये।।

            *********************

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   इधर बाँसुरी और निरमा कॉलेज पहुँचे ,आज निरमा  की खुशी संभाले नही संभल रही थी,अब उसे और उसके पहले प्यार को एक पर्मानेंट अड्डा मिल गया था,जहाँ दोनो अपने प्रेम को साकार कर सकते थे,ढेरों बातें कर सकते थे,एक दूसरे को नज़र भर देख सकते थे,अभी दोनों कॉलेज में प्रवेश कर ही रही थी कि गेट पे खड़े मजनुओं की टोली में से किसी ने बड़े सुरीले स्वरों को छेड़ दिया-

“वॉशिंग पाउडर निरमा,वॉशिंग पाउडर निरमा!!  ढूध सी सफेदी निरमा से आई,रंगीन कपड़ा भी खिल खिल जाये,सबकी पसंद…..”

अभी गायक अपने गायन को चरम पे पहुंचाता उसके पहले ही बाँसुरी पहुंच गई

“काहे बहुत गाना फूट रहा है,क्या बात है??”

“हम तो गाने में ही बता दिये का बात है,तुमको जलन तो नही ना हो रही कि तुमको नही छेड़े ।”

इतना कहते ही सब खी खी हंसने लगे

“तुम्हारा औकात भी नही है,हमको छेड़ने का समझे,अभी एक हाथ देंगे ना बत्तिसी बाहर आ जायेगी,,फिर हम भी वो वाला विज्ञापन है ना, का हो राजू तुम्हारे दांत तो मोतियों जैसे चमक रहे हैं,वही गा गा के सुनायेंगे।समझे बेटा,।।”

“एक्सक्यूज़ मी!! क्या चल रहा है यहाँ ।”बहुत भारी गहरी सी आवाज़ सुन बाँसुरी के साथ सभी आवाज़ की दिशा में पलट के देखने लगे

आवाज़ देने वाले ने बहुत शालीनता से बाँसुरी को देखा और पूछा-“क्या ये लोग आप लोंगो को परेशान कर रहें हैं?”

“हां कर रहे हैं बे!! बोलो का करोगे?? जादा चौधरी ना बनो,समझे।”उनमें से एक कूद पड़ा

“नही समझे,आप समझा दीजिये,कि अगर मैं बीच में बोला तो आप महानुभाव क्या करेंगें।”

“तुम्हारा चौखटा बिगाड़ देंगे घूंसा मार के,वैसे तुम हो कौन बे,जो इतना चपड़ चपड़ कर रहे हो।”

“हम इस महाविद्यालय के एक छोटे से अदना से लेक्चरर हैं,गणित पढ़ाने आये हैं,नाम है भास्कर शुक्ला।”

“ओह हो हो पण्डित जी क्षमा करें “बोल के सारे लड़के गिरते पड़ते भास्कर की चरण धूलि ले लेकर वहाँ से भाग खड़े हुए।।

भास्कर मुस्कुराते हुए अपनी रॉयल एनफील्ड पे बैठ के कॉलेज के भीतर चला गया और जाते जाते बाँसुरी के नाज़ुक से दिल को भी अपने साथ ले गया।।

बाँसुरी के हृदय पर आज तक किसी के नाम की तख्ती नही लगी थी,इसका कारण लड़कों का उसमें रूचि ना लेना नही अपितु खुद बांसुरी का किसी लड़के को अपने लायक ना समझना था।।
    कॉलेज जाने वाली लडकियों पे अगर सर्वे किया जाये तो 70%लड़कियाँ लड़कों के लुक्स की जगह उनके स्वभाव और उनके दिमाग से प्रभावित होती हैं,उन्हीं 70% में बांसुरी भी थी।।। अपने प्रेम के योग्य पाना तो बहुत दूर की बात वो किसी लड़के को खुद से बात करने योग्य भी नही पाती थी।।
      जहां एक ओर मोहल्ले की सारी लड़कियाँ राजा भैय्या की दिवानी थी वही भैय्या जी के किलर लुक्स भी उसके हृदय में बसंत खिलाने में अक्षम रहे थे।।

    पर आज अचानक भास्कर को देख के बांसुरी की चिर प्रतीक्षा को विराम मिला,उसके हृदय को नया आयाम मिला,लम्बा चौड़ा छै फुट का लिवाईस की जीन्स और एरो की ब्लैक शर्ट पहनने वाला, रे बैन के ग्लासेस और वूडलैंड के जूते पहनने वाला इत्ता  हैंडसम लेक्चरर!!!
      उसपे रॉयल एनफील्ड का टशन!!! उफ्फ!!! क्या ऐसे भी पढ़ाने वाले होते हैं,,ऐसा टीचर हो तो कॉलेज की हर लड़की गणित ले कर ही पढना चाहेगी ,फिर चाहे वो एम एस डब्लयू वाली ही क्यों ना हो,और उसे दो और दो पूछो तो जवाब चार की जगह बाईस देने वाली ही क्यो ना हो।।”

  बांसुरी को मम्मी की फेयर ऐंड लवली की याद आ गई,आज तक नहाने के बाद उसने चेहरे को किसी तरह के पृलेप से दूषित नही होने दिया था,आज उसकी वही कमनीय त्वचा फेयर ऐंड लवली के स्पर्श को आतुर होने लगी,उसने कुछ सोच कर निरमा से कहा-

“निरमा हम सोच रहे,जब राजा को पढ़ाने जायेंगे ही तो थोड़ा बहुत व्यायाम कसरत भी कर लिया जाये क्या,तुम क्या सोचती हो इस बारे में?”

“हाँ हाँ क्यों नही,ये तो अच्छी बात है,हम भी कर लेंगे कुछ”

“अरे तुम तो ऐसे ही मरकट्टी रेगड़ी हो एकदम सुखी बिलाई लगती हो,और कितना दुबराओगी, हम थोड़ा ज्यादा ही हरे भरे लगते हैं,है ना ?”

“अरे नही बंसी तुम ऐसे ही प्यारी लगती हो,पर हाँ अगर थोड़ा कम हो जाओगी तो और प्यारी लगोगी,अच्छा बात है ये तो।”

“तो ठीक है,कल राजा को पढ़ाने के बाद पूछेंगे की क्या क्या करना है हमको।”

“नेकी और पूछ पूछ,कल तक काहे रुक रही,आज ही यहाँ से लौटते में पूछ लेना।।”

“अरे नही भई,आज सुबह सुबह हम बहुत सारा ज्ञान दे डालें हैं,अब शाम को पहुंच जाये कि हमको पतला कर दो,ये हमे शोभा नही देता,,कल जब पढ़ाने जायेंगे तब थोड़ा घुमा फिरा के स्टायल से बोलेंगे,,समझी।।”

“हाँ मेरी माँ समझी।।”दोनो सहेलियां खिलखिलाती हुई आगे बढ़ गई ।।।

क्रमशः

aparna…
  

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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