शादी.कॉम -4

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  ,”पर्मिला अरी ओ पर्मिला,,कहाँ मरी पड़ी है,,हे राम!!! एक तो मरे घुटने के दर्द से चला फिरा नही जाता फिर भी तेरी बेटी के लिये कैसे रात दिन एक किये हूँ,,देख तो सही।।”

  अपने पेट पर के टायरों को संभाले घुटनों को सहलाते बुआ जी प्रमिला को आवाज़ देती भीतर चली आईं, उनकी आवाज़ से प्रमिला रसोई से हाथ पोछती भागी भागी आई और उन्हें प्रणाम किया।।उनकी आवाज़ बिना सुने ही सीढियों से नीचे उतरती बाँसुरी ने जैसे ही बुआजी को देखा वापस ऊपर को जाने लगी पर बुआजी की गिद्ध नजरों से बच ना सकी_
     “अरी लाड़ो तू भी आ जा,तेरे लिये ही तो आती हूँ बिटिया,,देख कैसा हीरो जैसा रिश्ता लेकर आई हूँ,,आ आकर देख तो जा।।”

अभी उनकी बात पूरी भी नही हुई थी कि वीणा अपनी चमचमाती रानी कलर की साड़ी में लसर फसर वहाँ पहुंच गई ।।

प्रमिला ने दोनो के हाथ में बादाम का हलुआ पकड़ा दिया,”जिज्जी पहले इ खा के बताओ ,कैसा बना है,हमरी लाड़ो को बड़ा पसंद है,उसी के लिये बनाया है,बहुत दिमाग का काम करती है रात दिन बेचारी,खटती रहती है किताबों के बीच।।

“बस अम्मा यही सब घी में तर हलुआ पूड़ी ठून्गो अपनी लाड़ली को,दिन बा दिन बरगद बनती जा रही है,अरे  इतना तेजी से महंगाई नही मोटाती जैसी तेजी से तुम्हरी पेटपुन्छनी मुटा रही, कुछ तो रहम करो अम्मा।।”

“अरे तो का भूका मार दे अपनी लड़कोर को, तुम्हे भी तो खिला पिला के पाला पोसा है बड़की ।।

“हमें खिला पिला के पाला है इसे खिला पिला के मुट्वा रही हो,फरक है दोनो में अम्मा।।

“प्रणाम करते हैं बुआजी,और दीदी कैसी हो,गोलू को कहाँ छोड़ आई आज।”

“उसकी दादी के पास छोड़ा है,अरे दादी हैं इतना तो करे अपने पोता के लिये।।”

किसी बात पे बुआजी ने अपना प्रिय राग छेड़ दिया और वीणा भी उनके सुर से सुर मिलाने लगी।।

“करेला उसपे नीम चढ़ा”बाँसुरी ने धीरे से गुनगुना कर कहा।।

“का बोली तुम ,हैं!! ए बांसुरी,हमे नीम बोल रही हो।खुद का सकल(शक्ल) देखी हो आईना में, कोनो साईड से लड़की नही लगती हो,हम तो समझा समझा के थक गये,कि कभी पार्लर भी चली जाओ।”

“ठीक ए बोल रही हो बिटिया,ऐसा करो लड़का वाला आने वाला है बांसुरी को देखने,,….. दुई चार दिन में आ जायेगा,तब तक तुम इसका थोड़ा रंग रोगन करा दो।।”
बुआ जी के इस प्रस्ताव का वीणा ने पूरा पूरा समर्थन किया ,पर बाँसुरी अड़ गई

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“हम वो अदनान सामी के लिये पार्लर नही जायेंगे,,हमको नही पसंद वो मौत का कुआँ मे जाना ।”

“पगला गई हो का,,कौन बोला तुमको ऊ मौत का कुआँ है??हम तो जातें हैं थ्रेडिंग कराने,और फेसियल कराने ।”

“हाँ तो तुम जाओ ना दीदी,हमको नही पसंद वहाँ जाना ।।जब हमारा मन करेगा तभी जायेंगे।।”

“तो इतना खेती काहे बढ़ा डाली हो आँखी के ऊपर , कम से कम थ्रेडिंग ही करा लो।।”

“हम काहे करायें,वो लड़का तो हमारे लिये कुछ नही करा रहा।।”

“हाय राम!! मैं कहाँ जाके मरूं,अरे लड़के कभी थ्रेडिंग कराते हैं क्या?? कैसा पागल समान बात करती हो बंसी।।””

“जानती हो दीदी लड़के काहे थ्रेडिंग नही कराते जिससे उनका बात सही साबित हो जाये कि ‘ मर्द को दर्द नही होता’ अरे जब तक औरतों वाले काम करोगे ही नही तब तक दर्द पता कैसे चलेगा।।

“अरे सुन ना हमको पता है तू बहुतै ज्ञानी है,अभी चल हमारे साथ कम से कम क्लीन अप करा ले लड़की!!!चल बुआजी की बात का लाज रख ले………..अम्मा तुम आज रात के खाने पे आलू टिक्की बना लो,जिससे हमारी धमल्लो खुस हो जाये,चल अब टिक्की के नाम पे चल पार्लर।।”

जाने क्या सोच बाँसुरी वीणा के साथ चली गई,लौटते में उसे जिम में रुकना था भैय्या जी को सुबह 7:30 पे ज्यादा कुछ पढा नही पाई थी इसीसे शाम 4 का समय फिर से दिया था,,4बजे निरमा वहीं पहुंचने वाली थी।।
   
        पार्लर से लौटते हुए बांसुरी ने जैसे ही जिम में रुकने की इच्छा जाहिर की,वीणा का मन मयूर नाच उठा,अपने मोहल्ले की परिपाटी को निभाते हुए वो भी किसी ज़माने में भैय्या जी की फैन हुआ करती थी,पर नारी सुलभ शील संकोच ने खिड़की से झांक लगा के रोड पे जॉगिन्ग करते भैय्या जी को देखने से ज्यादा की अनुमती नही दी और फिर सरकारी नौकरी करते यू डी सी का आया चमचमाता रिश्ता उसके घर वालों ने लपक लिया,और कभी भैय्या जी को बड़ी अदा से राजकुमार बुलाने वाली वीणा भी संसार के सुर में सुर मिलाती भैय्या जी बोलने लगी।।
   
        पर आज बांसुरी की इच्छा सुन उसके मन में सोया प्यार जाग उठा,,अरे अपने प्रथम प्यार को एक झलक देख लेना पतिदेव से चीटिँग थोड़े है !! वो तो बस ऐसे ही………जैसे लगातार चलते बोरिंग से सीरियल के बीच सलमान खान का तूफानी ठंडा एडवरटाइजमेंट ……….जैसे थाली भर बेस्वाद खिचड़ी के साथ भरवा लाल मिर्च का अचार!!! हाय !!
  
       “ठीक है चलो फिर बंसी!! हम भी तुम्हारे साथ जिम चले चलतें हैं ।”

  “काहे?? तुम क्या करने जाओगी दीदी??”

  “अरे तो तुम का करने जा रही हो,,पतला होने का भूत सवार हो गया क्या??”

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भैय्या जी नही चाहते थे कि उनकी ट्यूशन वाली बात जिम से बाहर लीक हो इसिलिए उन्होनें अपनी आदत के अनुसार बांसुरी को ‘मम्मी की कसम’ खिला दी थी,अब उस कसम के बोझ तले दबी बाँसुरी ने असल कारण नही बताया- “हाँ दीदी हम सोच रहे थोड़ा जिम वीम करें,बहुत हट्टी कट्टी हो गये हैं …… नही!!”

“हाँ हो तो गयी हो एकदमी टुनटुन लगने लगी हो।।”

“अब इतना तारीफ भी मत करो दीदी,हम सोनाक्षी सिन्हा जैसे फिगर के हैं ।”

“ओह्हो बड़ी आई सोनाक्षी!! तो अब का करीना बनने का विचार है।।”

“अब यही मान लो दीदी,बचपन से हमे जानती हो,जो ठान ली तो फिर कर के रह्ते हैं,है ना!!, अब तुम जाओ,हम एक घंटा में घर आ जायेंगे।”

बड़े बेमन से जिम में झांकती फाँकती वीणा घर की तरफ मुड़ गई,उसे बाँसुरी पे पूरा पूरा विश्वास था,कि  चाहे प्रलय आ जाये राजा भैय्या उसकी छुटकी बहन जैसी रूपवती पे कभी दृष्टिपात नही करेंगे, इसी विश्वास पे अडिग बाँसुरी को वहाँ अकेली छोड़ वो घर चली गई ।।

   बाँसुरी वहाँ पहुंची तो निरमा और प्रेम एक ट्रेड मिल पे बैठे गप्पे मार रहे थे,भैय्या जी ज़मीन पे योगा मैट बिछाए किताबों के जाल मे उलझे बौराये बैठे थे,,दो चार छुटभैये इधर उधर वर्जिश करने की बहुत बुरी एक्टिंग कर रहे थे ।।
         हड़बड़ाती हुई बांसुरी अन्दर गई और भैय्या जी के पास पहुंच के बैठ गई,और किताबें देखने लगी

“अरे इत्ता सारा किताब काहे ले आये,आपको सिर्फ बारहवीं पास करना है,कोई आई ए एस थोड़े ही बनना है अभी।।”

“हमारे पास जो जो रख्खा था,हम सब उठा लाये,काम की तो सभी है ना।।”

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“नही!! आपके काम की कोई नही….आप मान लिजिये कि आप गधे पैदा हुए हैं,स्कूल मे भी गधे ही रहे और कॉलेज में भी गधे ही रहेंगे।।’

“भैय्या जी आपका लिहाज करके चुप हैं,समझा दीजिये इस लड़की को,कहीं हमारा दिमाग सटक गया तो हमारे हाथ से खून ना हो जाये इसका।”
एक गपोड़ी चिल्लाया

   भैय्या जी ने बिल्कुल सरकार वाले अमिताभ की स्टायल मे उसे हाथ दिखा के चुप करने का इशारा किया और बाँसुरी से बोले-“काहे हमरा इतना बेज्जती करती हो बात बात पे!! क्या मज़ा आता है इसमें ।”

“अरे तुम्हारी बेइज्जती नही कर रहे भई!! बस इत्ती सी बात कह रहे कि इतना सब किताब को मारो गोली,बस एक किताब पकड़ो नाम है ‘ युगबोध’!! और उसमें भी सब पढ़ने का ज़रूरत नही है,हम पिछले दस साल का पेपर देख के महत्वपूर्ण सवाल टिक कर देंगे,बस उसी उसी को तुमको रट्वा देंगे,,समझे।।”इतना सब किताब पकड़ के रट्टा मारोगे,हाथ में और दिमाग में दर्द हो जायेगा,समझे।

“देखा भैय्या जी ई लड़की फिर आपका बेज्जती कर रही,अरे भैय्या जी मर्द हैं ,उनको किताब पकड़ने से दर्द नही होता।।”

“का नाम है तुम्हारा ??”

“प्रिन्स!! प्रिन्स नाम है हमारा।”चेले ने सीना ठोक के जवाब दिया,उसे नही पता था कि उसने कैसी चतुर बिलाई से पंगा ले लिया था।।

“तो प्रिन्स तुम मर्द नही हो??”

“अरे काहे नही है,,हम भी हैं ।”

” जल्लाद देखे हो कभी?? कैसा दिखता है।”

“नही असली का नही देखे,,हम पिच्चर वाला जल्लाद देखे हैं ,अरे वही मिथुन चक्रवर्ती वाला जल्लाद।”प्रिन्स के चेहरे पे अभूतपूर्व ज्ञान की छटा फहर रही थी।।

“ब्यूटी पार्लर जानते हो?? वहाँ जो काम करती है ना, असल में वो जल्लाद होतीं हैं,समझे !!! भयानक खून की प्यासी!!
       पीपल पे उल्टी लटकी चुड़ैल भी इन पार्लर वालियों से बहुत डरती हैं ।।”

“आपको  कैसे पता बाँसुरी मैडम जी ।।”भैय्या जी ने अपनी भोली मुस्कान बिखेरते हुए पूछा ।।

“अरे कभी टी वी पे किसी भूतनी को मेक’प किये देखे हैं क्या?? सब बाल बिखराये पगलाये घूमती हैं ।।”

“आप मजाक बहुत करती हैं,हैं ना!!” भैय्या जी हँसते हुए बोले

“नही मजाक नही कर रहे,,आज ही दोपहर को हमारी दीदी और हमारी बात हो रही थी,मर्द और औरत की बराबरी के बारे मे….हम बोले मर्द कभी औरत का बराबरी कर ही नही सकते,जितना दर्द औरत झेल सकती है ,मर्द झेल पायेंगे भला??”

“ए बांसुरी तुम बहुत जादा बोलती हो,कहाँ हम मर्द और कहाँ तुम औरतें ।।।प्रिन्स की बात सुन बाँसुरी ने अपनी बीन बजानी चालू रखी

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  ”  तो प्रिन्स बाबू इतने बड़े मर्द हो तो आ जाओ अखाड़े में ब्यूटी पार्लर के ,और फिर हम देखेंगे तुम्हरी मर्दानगी ….एक कुर्सी मे बैठा दो एक लड़की को और दूसरे में तुम्हें या किसी भी मर्द को ,हम लिख के दे रहे हैं बाबु  , जब यमराज जैसी शकल की दो ब्युटिशियन हाथ में धागा पकड़ी भौंहो को नोचने आयेंगी ना तब तुम ससुरे मर्द ज्यादा जोर से चिल्लाओगे ।।
     अरे थ्रेडिंग तो सबसे सिम्पल दर्द है।।।जब दो खतरनाक खूनी खेल खेलने वाली नागिन आयेंगी तुम्हारे सामने और उनमें से एक तुम्हारा खरीफ की फसल से लहलहाता खेत वाला  हाथ पकड़ के उबलता हुआ वैक्स पलट देंगी और उसके बाद अपनी आंखों से आग उगलते हुए एक बोरी का टुकड़ा तुम्हारे हाथ पे बिछा के उसको जमा के जोर से सटाक !!!खींचेंगी ना तब कसम से कह रहे तुम्हें तुम्हरी अम्मा के साथ साथ नानी भी याद नही आ गई ना तो हमारा नाम बदल देना,,एक बार सह के देखो वो दर्द बबुआ और फिर बोलो मर्द को दर्द होता है कि नही….ऐसे बिलबिला के भागोगे ना कि सीधा मंगल यान से उड़ान भरोगे फिर चाहे कोई कितना  भी आवाज़ दे ले रुकने वाले नही  तुम मर्द!!!
          बड़े आये मर्द!!! खुद को कुच्छो नई कराना और हम सलगे ज़माने का दर्द झेले इनके लिये।।

“और सुनो ये फेशियल से चेहरा चमकाने का दावा करने वाली नागिने सबसे पहले चेहरा साफ कर चेहरे पे ब्लीच पोत देती हैं,वो कभी चेहरे पे पुतवा के देखो,रोंम रोम से ऐसे अंगारे फूटेंगे की जीते जी नरक की दावग्नी का स्वाद चख लोगे बबुआ।।
     ये सब करा लो उसके बाद हमसे कहना कि मर्द को दर्द नही होता।।”

“अरे बंसी !! हुआ क्या?? इत्ता काहे भरी बैठी हो।।”निरमा के पूछते ही बाँसुरी का ध्यान गया कि वो पढ़ना पढाना छोड़ कर बस इधर उधर की बतकही में लगी है।।

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  “अरे कुछ नही निरमा आज हमें दीदी जबर्दस्ती पकड़ के पार्लर ले गई थी,और बस ये ही कोई काम बिना मर्ज़ी के करना हमे पसंद नही।।”

“अरे कोई बात नही मैडम जी !! पर एक बात है,,आज आप अच्छी भी लग रही हैं ,कुछ कुछ सोनक्षी सिन्हा जैसी  ।।” राजा भैय्या के ऐसा बोलते ही बांसुरी मुस्कुरा पड़ी -” पर राजा हमें सोनाक्षी नही पसंद,हमें तो श्रीदेवी पसंद है,भले ही हमारी मम्मी के जमाने की हेरोइन है पर पसंद वही है।।”

  राजा भैय्या का मुहँ खुला रह गया क्योंकि दिल ही दिल में उनके भी ख्वाबों की शहजादी श्रीदेवी ही थी।।उनके आसमान के बादल श्रीदेवी के दम पे थे और उस आसमान की बिजलियां थी श्रीदेवी की अंगड़ाई ।।

“तो क्या हुआ आप बन सकती हैं श्रीदेवी !! अगर आप चाहें।”

“वो तो ठीक है पर तुम हमें ये आप आप क्यों कहते हो,तुम हमें बाँसुरी ही कहा करो,जैसे हम तुम्हें राजा कहते हैं ।।”

“ठीक है,,अच्छी बात है,तो अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहें बांसुरी,तुम जिम शुरु कर दो।।तुम हमें पढ़ा दिया करो,और हम तुम्हें कसरत करवायेंगे, बस छै महीने मे तुम पूरी श्रीदेवी बन जाओगी।।”

“हाय !! सच्ची”

“और का! चाहे तो हम मम्मी की कसम खा लेते हैं ।”

“अरे नई नई कसम ना खाओ,,चलो तो फिर कल सुबह से हम आते हैं ,सुबह व्यायाम और शाम को पढ़ाई,ठीक है??”

“ठीक है।”राजा भैय्या ने मुहर लगा दी।।

बाँसुरी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और राजा भैय्या ने अपनी मैनिक्यूर्ड (मैनिक्यूर की हुई जैसी दिखती)
उंगलियों से उसका हाथ थाम लिया।।

    एक तरफ जहां राजा भैय्या बांसुरी की बुद्धिप्रद कुशाग्र बातों में आकन्ठ डूबते जा रहे थे ,वही बाँसुरी को भी भैय्या जी की भोली हरकतों मे कम से कम बात करने लायक मित्र की झलक मिलने लगी थी।।

  बांसुरी ने जाते जाते पलट के प्रिन्स को बुलाया, प्रिन्स जो अभी तक ब्यूटी पार्लर के स्केरी हाऊस के डर के साये मे कांप रहा था,चुप चाप आकर उसके सामने खड़ा हो गया।।

“ए सुनो!! इतना ना डरो ,तुम्हे इस जनम पार्लर नही जाना पड़ेगा।।और एक बात कहें??”

“जी बांसुरी जी !! कहिये।।”

“ये जो शर्ट के दो बटन खोल के सिंघम बने घूमते हो ना कुछ नही होने वाला बबुआ,एक तो दिखते हो जैसे टी बी का मरीज एकदम सुख्खड़,,और उसपे बटन खोले और अपनी सच्चाई दिखा देते हो….
बन्द करो वर्ना लड़कियाँ तुम्हरे फेफड़े की हड्डियां गिन डालेंगी,और फिर शर्त लगाएंगी ,एक बोलेगी 12थी रे तो दुजी कहेगी नही मैनें तो 14 गिनी।।

हँसते हँसते बांसुरी और निरमा घर निकल गये।।

क्रमशः

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aparna..

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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

2 विचार “शादी.कॉम -4” पर

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