शादी.कॉम-7

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     राधेश्याम जी के घर पे पूरा त्योहार का माहौल हो गया था,शाम को समधि जो आने वाले थे,राधे श्याम और उनके छोटे भाई सीता राम अपने अपने काम धन्धे से जल्दी वापस आ चुके थे लेकिन युवराज अपने पैट्रोल पम्प पर ही था,जाहिर है वो उनका दामाद ठहरा उसे तो अपने ससुराल में ये दिखाना ही है कि वो कितना व्यस्त रहता है,इसी से आज वो पूरी तन्मयता से पेट्रॉल पम्प,फिर एजेन्सी सब जगह घूम घूम कर मुआयना कर रहा था।।

   घर की महिलायें सुबह से रसोई मे जुटी थीं ऐसे जैसे मास्टर शेफ उन्हें ही चुनने आ रहें हैं,खैर उनकी परीक्षा परिणाम का समय आ गया,गिरिधर शास्त्री मय बेटा पधारे –

  “का हो समधि जी ,सब कुशल मंगल??ऐसा प्रस्ताव लाएं हैं कि आप खुशी से नाच उठोगे।”

“अरे आईये आईये !!! आपके आने से ही प्रसन्न हैं, बताईये कौन प्रस्ताव लाये हैं आप??”

“अरे बहू कुछु मीठा उठा पानी वानी लाओ भाई।।”

  “जी बाबूजी अभी लाये,,,आप कैसें है पापा और मम्मी कैसी है??”

  “सब कुशल है बिटिया !! ये लो सब तुम्हारी मम्मी भेजी है तुम्हरे लिये।।”
   रुपा अपने पिता का लाया सारा सामान समेट जल्दी से रसोई में आ गई,उसे चाय चढ़ाने से ज्यादा जल्दी अपने लिये भेजी साड़ी  देखने की थी,और साथ ही उसे बैठक में चल रही बातचीत सुनने की भी हड़बड़ी थी,,इसी सब चक्करों में जल्दी जल्दी चाय चढ़ाने मे लगी थी,तभी उधर से रुपा के चाचा ससुर की लड़की पिंकी गुजरी _”अरी ओ पिंकी हियाँ आओ ज़रा,इ देखो हम पानी खौलने रख दिये हैं,तुम तनिक पत्ती शक्कर दूध डाल डुला के छान लायोगी।”

“तो साफ साफ कहिये ना भाभी कि हम चाय बना दें।”

“अरे चाय बनाने कहाँ कह रहे हम !! हम तो बस ज़रा सा देख लो कह रहे,ना करना चाहो तो जाओ ,हम तो बहु हैं,हमे तो करना है,हमे कहाँ छुटकारा है इस घर गिरस्ती से,तुम तो भैय्या राज्कन्या हो,जाओ जाओ लाड़ो आराम करो।।”

“अरे भाभी इतनी सी चाय के लिये बात कहाँ से कहाँ पहुंचा दी आपने,जाइये मैं चढ़ा दूंगी चाय।”

“हाय सच्ची! देखो हमारे लिये बस इत्ती सी छानना,हम अभी आये।।”और रूपा लपक झपक भागी वहाँ से,और जाकर अपने कान दीवानखाने की दीवार से लगा कर खड़ी हो गई,बीच बीच में देखती भी जाती थी,कि कोई देख ना ले,उसे अपनी बुद्धि मे जितनी बात समझ मे आई उसका सार ये था कि पिंकी के लिये उसके मायके के पड़ोसी श्यामू चाचा के लड़के का रिश्ता उसके पापा उसके ससुर को बता रहे थे,श्यामू चाचा का बीड़ी पत्ते का करोबार था,अच्छे खानदानी रईस आदमी थे,उनके बेटे पप्पू को उसने बचपन में देखा था एकदम गोल मटोल गोलू गप्पू सा था,अब बड़ा होकर वो भी अपने बाबूजी का हाथ बंटा रहा था,,अच्छा है मालदार और बड़े घर चली जायेगी तो बार बार पलट कर मायके नई आयेगी,ननंद के ब्याह लगने से रूपा को अन्दर ही अन्दर प्रसन्नता ही हुई,वैसे पिंकी का जो स्वभाव था उससे इस घर के किसी सद्स्य को कभी कष्ट नही पहुंच सकता था।।

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   पिंकी राधेश्याम जी के छोटे भाई की इकलौती कन्या थी,और इस घर की अकेली   राजकुमारी !!!  ,वैसे उससे पहले उसका एक भाई भी था जो थैलेसिमीया की भेंट चढ़ गया जब मात्र 2साल का था!!! उसके जाने के और 2 साल बाद पिंकी का जन्म हुआ था,इसीसे घर भर की अत्यधिक लाड़ली थी,पर राजा भैय्या के तो जिगर का टुकड़ा थी उनकी ये छोटी लाड़ली बहन ,पूरा घर पिंकी पिंकी की पुकार से गुंजायमान रहता था,और पिंकी घर के किसी कोने या छत पे बैठी अपनी यू पी एस सी की किताबों में खोई रहती।।
    अपने प्रथम प्रयास में ही पिंकी ने मेन्स तक की यात्रा बिना किसी रुकावट के पार कर ली थी,तीव्र बुद्धि की स्वामिनी पिंकी बांसुरी की सीनियर भी थी और उसकी गाइड भी।।
   पिंकी ने अभी शादी ब्याह जैसे समय व्यर्थ करने वाले परिश्रम की तरफ सोचा भी नही था,अभी उसका एकमात्र सपना था प्रशासनिक अधिकारी के पद पर आसीन होकर लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूमना।।
      वैसे तो यू पी और बिहार दोनो ही ऐसे राज्य हैं जहां हर दूसरे घर का लड़का यू पी एस सी ही निकालना चाहता है,पर अब लड़कियाँ भी इन मामलों में पीछे नही है।।
   चाय छानकर बाहर लेकर जाती पिंकी से रूपा ने आकर ट्रे अपने हाथ में ले ली और बैठक में जाकर धीरे धीरे सब को चाय पकड़ाने लगी जिससे और कुछ देर वहाँ की बातें स्पष्ट रूप से सुन सके ।।।
     अन्ततः उसके कान जो सुनने को तरस रहे थे, उस बात की अमृतवर्षा से उसके तृशार्त कान सिक्त हो उठे।।

“देखिए समधि जी जादा घुमा फिरा के बोलने की हमारी आदत नही है,हम सीधे सच्चे आदमी हैं।”
गिरिधर के ऐसा कहते ही राधेश्याम जी बिना बात मुस्कुरा उठे-“इसमें कोनो दो राय नही वकील बाबु, जो कहना चाहतें हैं,कह दीजिये,एकदमे स्पस्ट ।।”

“हां तो हम कह रहे ,अगर श्याम त्रिपाठी के लड़का के लिये आप पिंकी का रिश्ता हाँ बोल देते हैं तो आपके राजा के लिये हमरी रेखा की भी हाँ ही होगी,  देखिए समधि जी आपका लड़का सुन्दर सुसील(सुशील) तो है पर का है ना हम ठहरे वकील ,हमे थोड़ा पढ़ाई लिखाई से कुच्छो जादा ही लगाव है,हमरी रेखा तो दिल्ली तक से जाके पढ आई है,बस यही बात है।।”

“अरे कैसी बात करते हैं समधि जी हमरे राजा के लिये एक से बढकर एक पढ़ा लिखा लडकियों का रिस्ता आ रहा है,ऊ कोनो कलेक्टर से कम दिखता है का??”अपने बेटे के बारे में सुन माँ का हृदय चिन्घाड़ उठा।

“बहन जी कलेक्टर दिखना और होना में बहुतै फरक होता है, हमे राजा पसंद है ,हम ये थोड़े कह रहे कि राजा और रेखा की सादी नही करेंगे ,हम तो बस कह रहे एक हाथ दे एक हाथ ले।”

“तुम भीतर जाओ ,खाना उना की तैय्यारी करो,हम हैं ना यहां बैठे,इ सब बात व्यवहार हम देख लेंगे।।”

  श्रीमती जी सनसनाती हुई रसोई में चली गई,जो लड़की उन्हें निपट नापसंद थी,और जिसके  लिये वो पतिदेव के सामने अपनी नाराज़गी  जाहिर कर चुकी थी,उसी लड़की के लिये उनके राजा और पिंकी का ऐसा मोल भाव उस सरल हृदय सरला नारी को कचोट गया,,कैसा आदमी है रिश्तों का भी मोल भाव तैय्यार कर रखा है,,मन मे इतना गुस्सा समेटे भी बेचारी ऊपर से खुशी दिखाती हुई पूरियां छानती रहीं,रसोई में ही रूपा भी थी जो जल्दी जल्दी हाथ चलाती खाना परोसने में लगी थी,उसके सामने कुछ भी कहना आफत मोल लेना था।।
   
                पिंकी की माँ नही थी,और उन्होनें अपने दोनो लड़कों और पिंकी में कभी भेदभाव नही किया था, उन्हें भी पिंकी के ब्याह की जल्दी थी,पर उन्हें ऐतराज गिरिधर शास्त्री के लाये रिश्ते के कारण अधिक था।।
    रूपा ने सारी थालियां टेबल पर सजा कर सभी बड़ों को बुला लिया और सबका भोजन कार्यक्रम शुरु हो गया,इस कार्यक्रम के मध्य ही दामाद बाबु युवराज का भी आगमन हो गया जिन्हें देखते ही गिरिधर शास्त्री का मुखमंडल प्रसन्नता से चमक उठा।।
      अब युवराज भी उस गोष्ठी का हिस्सा था,उसे उसके साले साहब ने सारी बातें सविस्तार समझाई और नये जमाने के व्यापारी युवराज ने सहर्ष सभी बातों के लिये हामी भर दी,वैसे हामी भरने के पहले उसने एक गहरी दृष्टी अपने बाऊजी की ओर फिराई और आंखों ही आंखों में दोनों गुणी जनो ने इस रिश्ते का नफ़ा नुकसान माप लिया ,बाऊजी की तरफ से हरी झण्डी मिलते ही युवराज ने अपनी स्वीकारोक्ती दे दी।।।
      सबका भोजन समाप्त होने के पहले ही राजा भैय्या भी गर्मा गर्म जलेबी संभाले चले आये, जलेबी अपनी अम्मा को पकड़ा कर और मेहमानों को नमस्ते कर भैय्या जी अपने कमरे में चलते बने,उन्हें वैसे भी ऐसी महफिलों में वो रस नही मिलता था,जो उनकी वानर सेना के साथ था।।
    
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    अगले दिन सुबह से रूपा कोयल की तरह कूक रही थी,उसे ब्याह के समस्त क्रियाकलाप के लिये क्या कैसे और कहाँ से करना है की अत्यंत आतुरता थी,और इसी हड़बड़ी में उसने बिना किसी भूमिका के पिंकी को सारी बात कह सुनाई!!

“क्या बात कर रही हो भाभी!!! हमारी शादी ?? अभी से,अरे अभी तो हमे पढ़ना है,किसने तय कर दी हमारी शादी??”

“क्या बात करती हो नंद रानी!! और कौन तय करेगा,घर के बुजुर्गों ने तय की ।।। और पढ़ाई का क्या है,वो तो ससुराल जा के भी हो जायेगी।।इत्ता बड़ा काम है उन लोगों का ,वैसे भी राजरानी बन के रहोगी,का ज़रूरत फिर पढ़ाई लिखाई का।।”

“देखिए भाभी आपसे हमें बहस नही करनी,बड़ी अम्मा कहाँ हैं,ये बताओ!! उन्होनें कुछ नही बोला?? और राजा भैय्या??”

“किसी ने कुच्छो नई बोला,सब बड़े खुस हैं,और तुम भी हो जाओ,,लाखों का दूल्हा है,मिट्टी के मोल मिल रहा है समझीं,,उनका करोबार देख कर एक से एक बड़ा घर का रिस्ता आ रहा है,वो तो हमारे पापा के साथ अच्छे संबंध हैं इसिलिए तुम्हें हमारे कारण मांग लिया,वर्ना कमी है क्या उनके पास??”

“तो जब उनके लड़के मे कमी नही है तो अपने जैसी या आपके जैसी सर्वगुण सम्पन्न लड़की ढूँढ लें हमें काहे फंसा रहे,उनके बीड़ी पत्ता के गोदाम में बैठ के पढेंगे क्या हम,खैर छोडिए आप ये बताईये राजा भैय्या कहाँ हैं,सुबह से दिखे नही।।”

“लल्ला जी तो सबेरे ही जिम निकल गये,वहीं मिलेंगे तुम्हें ,,अरे रुको तो कहाँ भागी जा रही हो,चाय तो खतम कर लो।।”भाभी की बात खतम होने से पहले ही पिंकी जिम को निकल ली।।

“हे भगवान!! इ भगवान ने थोड़ा सा बुद्धि का दे दिया रानी जी खुद को जाने का समझ बैठी हैं,अरे ऊ तो हमारा सादी हो गया नही तो हम भी कलेक्टरनी नई भी बनते तो कम से टीचर उचर तो बनी जाते।”

“सही कह रही हो बहु जी!! आपका तो कदर इ नई करता ई घर का लोग,कहाँ आप अऔ कहाँ ओ।”

“चल चल बस कर !! जल्दी जल्दी हाथ चला,ढ़ेर सा काम पड़ा है यहाँ,मुझे तो सांस लेने की भी फुर्सत नही।।” घर की मुहँ लगी नौकरानी नागेश्वरी को काम समझा अपनी चाय उठा रूपा वहाँ से चली गई ।।

  उधर पिंकी जिम पहुंची तब राजा भैय्या सभी महिलाओं को कसरत करवा रहे थे।।

“अरे पिंकी तुम यहाँ?? घर पे सब ठीक तो है??” प्रिंस ने पिंकी को देखते ही पूछा

“राजा भैय्या कहाँ है?? जल्दी बुलाओ उन्हें ।।”

“हां हम बुला रहे,तुम इधर भैय्या जी के ऑफिस में आ जाओ,वहाँ बैठो,हम भैय्या जी को भेजते हैं ।”
  
  पिंकी जैसे ही ऑफ़िस में घुसी वहाँ बाँसुरी बैठी राजा के लिये नोट्स तैय्यार कर रही थी।।

“बंसी तुम यहाँ??”

“हाँ हम भी थोड़ा दुबला होना चाहते हैं, पर आप इस समय यहाँ कैसे दीदी।।बांसुरी ने मुस्कुराते हुआ जवाब पे सवाल दाग दिया।।

तभी राजा भी दरवाजा खोल अन्दर आ गया,और उसके पीछे से प्रिंस 3कप में चाय लाकर रख गया।

“प्रिंस तुम बाहर जाओ ,हमे राजा भैय्या से कुछ प्राईवेट बात करनी है।”प्रिंस के साथ बांसुरी भी उठने लगी –“अरे तुम बैठी रहो बंसी,तुमसे हमे कोई परहेज नही।।

“बोल छुटकी ऐसा क्या हो गया,कि तू सुबह सुबह यहाँ दौड़ी आई??”

“राजा भैय्या आपको पता भी है घर मे क्या चल रहा है।।

“क्या चल रहा है,तू ही बता दे।”

“हे भगवान !! मेरे भोले भंडारी भैय्या!! आपके रिश्ते की बात चल रही ,और मेरी भी।।
   भाभी के पड़ोसी के अनपढ़ लड़के के साथ हमे बान्ध देना चाहते हैं ,और भाभी की बहन के साथ आपको,कुछ पता है आपको??”सब आटा बाटा, अदला-बदली चल रही है।।”

“अरे मेरी प्यारी छुटकी बहना शादी तो करनी ही है ना,तो कर लो जिससे अम्मा बाऊजी कह रहे।।”

“आप कर लेंगे रेखा से शादी??”

“अरे उसमें का बवाल हो गया ,,अम्मा कहेगी तो ज़रूर कर लेंगे ,बस हम पहले पास हो जायें,उसके बाद जो बड़े भैय्या अम्मा बाऊजी कहेंगे हम कर लेंगे।।”

“हाँ तो आप कर लिजिये,हम नही कर सकते,ऐसे किसी ऐरे गैरे से शादी,इतनी मेहनत से पढ़ाई किये हैं …..अभी पिंकी की बात पूरी भी नही हो पाई थी कि राजा भैय्या बोल पड़े-

“अरे तो तुम्हारे ससुराल वाले तुम्हरी पढ़ाई के खिलाफ है क्या??हम दो मुक्का मार के अभी सीधा कर देंगे ससुरों को।।”

“नही भैया बात वो नही है!! असल में हम किसी और को पसंद करते हैं,उसका नाम है रतन !! पूरा नाम रतन मराबी।।”

“अरे दीदी ये तो हमारे स्कूल वाले भैय्या है ना जो बारहवीं मे हेड बॉय थे,आपकी कक्षा में ही थे ना।।”
बांसुरी चहकी

“हाँ बंसी वही रतन!! स्कूल के बाद वो बी ई करने चला गया और हम बी एस सी।।उसिने हमे यू पी एस सी के लिये प्रेरित किया,,हम दोनो ने साथ ही सारी पढ़ाई करी है भैय्या,और अब हम रतन को पसंद करने लगे हैं ।।”

“का गजब कर रही हो छुटकी,हमारे यहाँ आज तक किसी ने अपनी मर्ज़ी से शादी ब्याह नही किया!! बाऊजी तो तुम्हारे साथ हमे भी मार डालेंगे।।”

“दीदी तो रतन भी मेन्स निकाल चुके हैं??”बांसुरी ने पूछा।।

“हां बंसी!! और इंटरव्यू के रिजल्ट के बाद ही हम लोग घर में बात करने वाले थे,उसके पहले ही ये सारा काण्ड हो गया,हम नही जानते भैय्या ,आपको बडी अम्मा और बड़े भैय्या से बात करना ही पड़ेगा,वर्ना??”

“वर्ना का करोगी तुम,घर से भाग जाओगी??”
भैय्या जी के ऐसा बोलते ही पिंकी ने उन्हें घूर के देखा।।

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“नहीं वर्ना हम खुद ही बात करेंगे!! हमे लगा पहले आप से बात करनी चाहिये,भैय्या आप तो कम से कम अपनी छुटकी की बात मान जाओ,रतन बहुत अच्छा लड़का है,आप एक बार मिल लो खुश हो जाओगे।।”

“अरे बौड़म हमारी खुशी तो तेरी खुशी में है,पर हमे बाऊजी से बहुत डर लगता है,इन सब मामलों में, अच्छा पूरा नाम का बताया लड़के का।।”

“तुम अभी तक क्या सुन रहे थे राजा!! मराबी है सरनेम,यही जानना चाहते थे ना,तो सुन लो रतन ब्राम्हण नही है।।”बांसुरी इतना बोल के मुस्कुराने लगी।।

राजा आँखें फाड़े कभी बाँसुरी को कभी पिंकी को देखने लगा,वो पहले ही परेशान हो रहा था कि घर पे कैसे बात की जाये अब ये जाति वाला मामला हल निकालने की जगह बात को और बिगाड़ गया।।

“नही हो सकता !! ये बिल्कुल नही हो सकता छुटकी ।। अम्मा की  कसम, बाऊजी तुझे और मुझे गोली से उड़ा देंगे ,उनके गोली मारने के पहले अम्मा हम दोनो को जहर देके मार डालेगी ,और कहीं इन दोनों से बचे तो भाभी के ताने जान ले लेंंगे।।भूल जा छुटकी ,तू भूल जा उस लड़के को।।”

“नही भैय्या हम नही भूल सकते,और ना आपको भूलने देंगे,अब इस मुसीबत से आप ही हमे निकालेंगे और आप ही हमारी शादी रतन से करायेंगे।।”

“राजा !!! एक बात बताओ ,तुमने डर के मारे सबका नाम लिया बस बड़े भैय्या का नही,,इसका मतलब तुम्हारा सब कॉन्शियस माइंड कहीं ना कहीं ये जानता और मानता है कि बड़े भैय्या हमारी मदद करेंगे।।”
          बांसुरी ने अपना ज्ञान दिया,जो राजा भैय्या के लिये काला अक्षर भैंस बराबर था।।

“का बोली तुम बांसुरी??कौन सा माइंड??”
राजा भैय्या के इस सवाल का जवाब दिया पिंकी ने

“सही कहा बंसी!! अब राजा भैय्या को बड़के भैय्या को पटाना पड़ेगा,अगर वो मान गये तो फिलहाल हमारे इंटरव्यू के रिजल्ट तक के लिये शादी टल जायेगी या कैन्सिल हो जायेगी,और बस उसके बाद हमारे दोनो भाई मिल कर हमारे लिये रास्ता बना देंगे।।”

दोनो सखियाँ एक दूजे को देख मुस्कुराने लगी और राजा भैय्या सर पकड़ के बैठे रहे ,तभी प्रिंस ने दरवाजा खोला और भैय्या जी को आवाज़ दी–

“भैय्या जी ऊ पुडुष वाली (घोष) आंटी तो रिलेक्सर से उतरे नई रई हैं,और उनके पीछे सब आंटी लोग उसी में चढ़ने के लिये अपना पारी का रस्ता देख रही है,का करे हम।।”

“सर फोड़ लो अपना,और हमारा भी।”भैया जी का बौखलाया जवाब सुन के प्रिंस वापस भाग गया।।

तभी भैय्या जी का फ़ोन खनखनाया “नमो नमो श्री शंकरा”
रेखा का नाम देख भैय्या जी का मुहँ बन गया,बड़ी लाचारी से उन्होनें पिंकी को देखा

“उठाओ उठाओ,अब काहे नई उठा रहे,आपकी होने वाली बीवी का फ़ोन है।”

“अरे !! अभी हुई थोड़ी ना है,पहले तुम्हारे पचड़े से बाहर तो निकलें तब जाके अपना बारे मे सोचेंगे।।”

“अच्छा,तो मतलब तैय्यार बैठे हैं आप रेखा से शादी के लिये,भैय्या जी सुन लो ,ना मेरी उस बीड़ी वाले से शादी होगी और ना आपकी इस बिलाई से मै होने दूंगी।।”

पिंकी की बिलाई वाली बात में बांसुरी को इतना रस मिला की वो हो हो कर हंसने लगी,और उसे हँसते देख राजा भैय्या को भी हँसी आ गई,तीनों के सम्मिलित ठहाकों से बाहर खड़े प्रिंस को थोड़ी राहत मिली और वो एक बार फिर अन्दर झाँका–

“भैय्या जी !! एक बात बोलनी थी।।”

“अबे बोलो बे!! तुम तो साले मरे जाते हो ,हम ना रहे तो।।ऐसा का आफत हो गया अब।।बोलो।”

“भैय्या जी वो हनुमान गली वाला गुड्डा है ना चार पांच चेलों को लिये आया था,आपको पूछ रहा था,हमने बोल दिया ,आप नई हैं अभी।।”

“हमे काहे पूछ रहा था बे,,पूछे नही तुम??”

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“पूछे ना ,तो बोलता है ,प्रेम उनकी गली की किसी लड़की को पटा लिया है,इसिलिए प्रेम के हाथ पैर तोड़ने से पहले आपको चमकाने आया था,कह रहा था,बोल दियो अपने राजा भैय्या से हमरी गली की तरफ आँख उठाया तो सरिया घुसा देंगे आँखी में।”

“हे शिव शंकर!! आज का दिन दिखा रहे हो परभू ,, एक के बाद एक नारियल हमारे ही सर फोड़ रहे हो।
  अब ई प्रेम कौन सी लड़की को फंसा लिया यार।।
तुम ठीके कहती हो बांसुरी!! हम बहुतै बड़े बौड़म है।।”

“हम समझ गये कौन है वो लड़की”बांसुरी के ऐसा कहते ही प्रिंस राजा पिंकी सब उसकी तरफ देखने लगे__
         “निरमा!! हाँ 100% निरमा ही है।।”

तभी बाहर से कुछ हल्ले गुल्ले की  आवाज़ आयी और चारों के चारों बाहर की ओर लपके।।

क्रमशः

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aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

3 विचार “शादी.कॉम-7” पर

  1. बेहतरीन
    प्रेम निरमा की जोड़ी को पूर्ण तो आपने जीवन साथी मे किया है वो भी बेहतरीन तरीक़े से🙂
    जीवन साथी के अगले भाग का बेसब्री से इंतजार है

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