शादी.कॉम -8

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    हनुमान गली का गुड्डा असल में गुड्डा नही गुण्डा था,एक नम्बर का मवाली और नकारा गुड्डा अपने मोहल्ले ही नही सारे शहर का सर दर्द था।।
  मोहल्ले में घूम घूम के दुकानदारों को सताना और चिढ़ाना उसका प्रिय शगल था।।
     “काका कचौरी वाले” की दुकान हो या चौरसिया का पान ठेला सभी जगह उसकी उधारी की किताब के पन्ने भरते चले जा रहे थे,और वो ऐसे ताव से सब जगह से वसूली करता फिरता जैसे फ़्री में खाने का उसने लाइसेंस ले रखा हो।।
    उसके ताऊ हवलदार थे,जिनके नाम का डर दिखा कर वो हर किसी पर अपना रौब मारता था। एक बार ऐसे ही मंदिर के बाहर किसी बुज़ुर्ग से गलती से लगी ठोकर के बदले जब गुड्डा ने उस बुज़ुर्ग का गला पकड़ लिया और उन्हें एक पर एक बड़ी बड़ी गालियों से नवाजने लगा तभी जाने कहाँ से हवा में लहराता एक थप्पड़ आया और उसकी कनपटी को झनझनाते हुए निकल गया।।।
      दस सेकंड के लिये उसके कान में सिर्फ मख्खी भिनभिनाने की आवाज़ होती रही,अपनी आंखों को अच्छे से झटक के उसने नेत्र गोलकों को सही जगह टिका कर चेहरे को उस ओर घुमाया जहां से थप्पड़ पड़ा था,सामने ब्लू जीन्स और ब्लैक टी शर्ट में राजा भैय्या खड़े थे।।
            दायें हाथ के मणिबंध में रुद्राक्ष की माला लपेटे,माथे पर अगुरू चंदन का तिलक लगाये, आंखों पे गुची का चश्मा लगाये भैय्या जी बिल्कुल महादेव शिव शंकर का मॉर्डन अवतार लग रहे थे।।
   
    उन्हें देख कुछ 2 सेकंड के लिये गुड्डा  अपने थप्पड़ की तिलमिलाहट भूल कर उन्हें प्रनाम करने ही वाला था कि उसे याद आ गया कि इन्हीं चौड़े तगड़े हाथों ने कुछ समय पहले उसके चौखटे का भूगोल बिगाड़ने की कोशिश की थी।।
      तैश में आकर उसने उन्हें मारने को अपना हाथ उठाया जिसे बड़ी आसानी से अपने बाएं हाथ से ही पकड़ कर भैय्या जी ने मरोड़ कर रख दिया।।।
     दोनों तरफ की सेना मुहँ बाये ये सीन देख रही थी,जो बिल्कुल किसी पुरानी फिल्म की याद दिलाता सा लग रहा था,जिसमें सुनील दत्त ने आशा पारेख का हाथ मरोड़ दिया और वो बेचारी छटपटाते हुए गीत गा रही”मैं तुझसे मिलने आई मन्दिर जाने के बहाने”।।

   इस पहली मुलाकात के बाद गुड्डा ,भैय्या जी से खार खा बैठा।।।अब वो कोई ऐसा मौका  छोड़ना नही चाहता था जहां भैय्या जी की  नेकनामी को बदनामी में बदल सके पर ईश्वर इच्छा बलवती, आज तक उसे ऐसा कोई सुनहरा मौका नही मिला था।।
      परसों शाम जब बनवारी की टपरी पे बैठा अपनी पच्चीसवी मुफ्त की चाय गटक रहा था तभी उसका चेला भागा भागा आया,और उसे अपने मोहल्ले की निरमा और प्रेम को साथ  साथ देखे जाने की खबर दे दी।।
    गुड्डा का मन बल्लियों उछलने लगा ,पर उस वक्त शाम हो चुकी थी,इसलिए मन मार के अगली सुबह का इन्तजार किया,और अगले दिन सुबह उठते ही भैय्या जी के जिम पहुंच गया,,हालांकी वहाँ भी उसे निराशा ही हाथ लगी,क्योंकि प्रिंस ने बड़ी ढिठाई से उसे बोल दिया”भैय्या जी नई हैं,कल आना।।”

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“अबे साले हम भिकारी है का बे!! जो बोल रहे कल आना,,जाके अपना भैय्या जी को बोल देना ,अगर हमरे मोहल्ला की लड़की की तरफ आँख उठा कर देखा तो हम सीधा सरिया आँखी में घुसा देंगे।।समझे!”

इतनी मोटी धमकी जिसके मूर्तरूप में परिणत होने के कोई आसार नही थे,दे कर अपना सीना चौड़ा किये गुड्डा वहाँ से निकल गया,प्रेम की तलाश में!!

    प्रेम का मिलना असम्भव था!!!वो यहाँ जिम मे छिपा बैठा था,जो राजा भैय्या के हत्थे चढ़ चुका था।।

“अबे इधर आओ बे!! का गदर मचा रक्खे हो !! जिसे देखो साला हमे धमकाने चला आ रहा है तुम्हरे कारन !! का है गुरू?? इसक उसक में पड़ गये हो हम सुने!! कौन है भाई ,कुच्छो बताओगे।।”

  प्रेम जो अब तक चुपचाप जिम के बाथरूम में गुड्डा के डर से दुबका बैठा था,उसे राजा भैय्या की बड़ी बड़ी आंखे देख एक बार फिर से प्रेशर आ गया,वो वापस पेट पकड़ कर बाथरूम जा ही रहा था कि भैय्या जी ने पीछे से कन्धे पर हाथ रख उसे रोक दिया__”अब साले जो आ रहा है तुमको ,यहीं करो!! पर पहले बताओ का माजरा है ई ,वर्ना ऐसा धोबी पछाड़ लगायेंगे ना कि सीधा देवरिया जा कर गिरोगे अपन मामा घर!! समझे।।”

“भैय्या जी दुई मिनट दे दो ,बस हल्का होके आके सब बतातें हैं ।।”

  प्रेम जैसे ही वापस लौटा जिम में 4जोड़ी आँखो को खुद को घूरता पाया।।

*********************

  प्रेम ने जवानी में कदम रखते ही अपने नाम को बड़ा सीरियसली लेना शुरु कर दिया था,पुराना दिलजला था,और ऐसा दिलजला था की छांछ से भी मुहँ जलाता फिरता था।।

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   पण्डित रामसनेही दुबे डिग्री कॉलेज में पहुंचते ही जैसे प्रेम के अरमानों को पंख लग गये थे,जो लड़की सामने दिख जाती ,वही दिल को भा जाती,और पूरा दिन प्रेम उसके सपनों में काट देता।।
   फिर एक दिन जब प्रेम अपनी हीरो हौंडा को कॉलेज की पार्किंग में खड़ा कर “कमला पसंद” को निगलने ही जा रहा था,कि अचानक उसकी गाड़ी से किसी की टक्कर हुई और उसकी बाईक आगे वाली और आगे वाली उसके भी आगे वाली बाईक को लेकर गिरती चली गई,गुस्से में गाली देने ही वाला था कि मिसरी जैसी आवाज़ कान मे घुल गई_
     “सॉरी हम जान बूझ के नई गिराये।।”

  पलट के देखा तो देखता ही रह गया,वो और भी कुछ कुछ बोलती रही पर प्रेम के कानों में एक ही गाना सुनाई देता रहा_ एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ……
     “जैसे खिलता गुलाब,जैसे शायर का ख्वाब
       जैसे उजली किरण,जैसे बन मे हिरण
        जैसे चांदनी रात जैसे नरमी की बात
         जैसे मन्दिर में हो एक जलता दिया !!!!

   जब तक गाने का प्रथम अन्तरा समाप्त हुआ, लड़की जा चुकी थी,परन्तु प्रेम को अपना पहला प्यार मिल गया था।।
     अगले दिन सारी खोज बीन कर ली,राजकीय कन्या इंटर कॉलेज से आई सकीना डिग्री कॉलेज में बी ए फाइनल इयर की छात्रा थी।।
 
“साला आधा साल खराब कर दिये इस कॉलेज में,आज तक हमारा नजरे नई पड़ा,और जब पड़ा तो सीधा प्यारे होई गया।।”प्रेम की इस बात पे नन्हे ने चुटकी ली

“तो परपोस करे दो फिर बेलेन्टाईन आने में तो अभी समय है।।”

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“अरे नई कर सकते भैय्या,हमार महतारी नई मानब!! सकीना की जगह सुसीला ,सीला,कबिता उबिता होती तो अलगे बात होता,,छोड़ो हटाओ।।”
  इस प्रकार प्रेम का पहला प्यार उसके सीने में दफन हो गया,अभी वो देसी दारु और चना चटपटी के साथ अपने गम को अच्छे से भुला भी नही पाया था कि ,उसके जीवन में फिर से एक बार प्यार ने दस्तक दी।।

  अबकी बार दस्तक उसके दरवाजे पे हुई,उसिने दरवाजा खोला__ “नमस्ते!! हम ई पड़ोस वाले घर में आये हैं,कल ही शिफ्ट हुए हैं,थोड़ी चीनी मिलेगी,हमें चाय बनानी है।।”

अभी बातचीत चल ही रहा था,कि अम्मा बाहर निकल आई __”अरे चीनी भी ले जाना,पहले बैठो और चाय पी लो”।

   प्रेम का दूसरा प्रेम अम्मा के संग चाय पीते बतियाता रहा पर प्रेम को कुछ और ही सुनाई दे रहा था__  “एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा………..
          जैसे सुबह का रूप,जैसे सर्दी की धूप।
          जैसे वीणा की तान जैसे रंगो की जान
           जैसे बल्खाये बेल जैसे लहरों का खेल
           जैसे खुशबू लिये आई ठंडी हवा।।।

जब तक दूसरा अन्तरा समाप्त हुआ ये लड़की भी जा चुकी थी,पर बेचारी चीनी लेने आई और भूल कर चली गई,उसके जाने के बाद अम्मा ने प्रेम को कटोरी पकड़ा दी कि नये पड़ोसी को चीनी दे आये।

   मुहँ धो के मर्दों की गोरेपन वाली क्रीम लगा कर बालों को भीगा कर अच्छे से ज़ुलफे संवार कर ,खूब पर्फ्यूम डियो डाल कर पूरी तैय्यारी से प्रेम शक्कर की कटोरी लिये चला।।
 
  “अरे का हमरी पतोहू लेने जाई रहे हो जो अतका सज धज मचा दिये,जल्दी जल्दी आओ,हिया सिलिंडर मरा खतम हुई गवा है,ई टाँकी को अपना फटफटी मा पीछे रख के बदला लाओ।।”

  प्रेम तो खुद मे खोया सा था,अम्मा की इतनी गैर-जरूरी बातें सुनने का उसके पास वक्त ही नही था।।पड़ोस के दरवाजे पे बिल्कुल जेंटलमैन स्टायल में खड़े होकर उसने बेल बजाया,दरवाजा खुला और
ये तो कोई उसकी ही उमर का लड़का खड़ा था_

“जी कहिये!! किससे मिलना है??”

“जी वो !! हमको लग रा हम गलत घर मा आ गये,वो थोड़ी देर पहले सक्कर मांगने…….प्रेम की बात पूरी भी नही हुई कि अन्दर से वही रूपसी जो सुबह चिनी माँगने गई थी ,बाहर आई__
     “बेबी !! ये हमारे पड़ोसी हैं,मै अभी इन्ही के घर से चाय पीकर आ रही हूँ,देखो आंटी जी इस सो स्वीट ,मै भूल गई तो उन्होनें खुद चीनी भेज दी।
  आप अन्दर आईये ना भैय्या!! इनसे मिलिये ये मेरे पति है अतुल शर्मा,और मै आभा।।”

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अच्छा हुआ दिल टूटने की आवाज़ नही होती वर्ना उस नाज़नीँ के मुहँ से भैय्या सुन के प्रेम का दिल जो चाक हुआ था कि बेचारा चीनी उन्हें बमुश्किल थमा भागा वहाँ से।।

  बेचारा प्रेम !!! माँ ने सलमान सोच कर नाम रखा पर किस्मत प्रेम चोपड़ा वाली हो गई ।।एक तो फष्ट इयरे मा लटक गये उसपे लडकियों का सनिचर !!
     इसिलिए जब अम्मा बोली चलो सनी देब  के मन्दिर मा मन्नत का तेल ऊल चढ़ा आये तो प्रेम तुरंते मान गया।।

    सनी देब में तेल चढ़ाया ,सत्ती गुड़ी में रोट चढ़ाया,बस वहीं माता का चमत्कार भवा!!!
   
    रोट चढ़ा के प्रेम मन्दिर की सीढिय़ां उतर अपनी चप्पल ढूँढ ही रहा था कि एक  नाज़ुक नवेली की साईकल की चेन उतर गई ,,अब किसी लड़की को  इतना बड़ा प्राब्लम हो और प्रेम अपनी चप्पल ढूँढता रहे शोभा देता है क्या?? बेचारा नंगे पैर गर्म तवे से जलते रोड पे खड़ा होकर चेन बनाता रहा,और लड़की अपनी गुलाबी चुन्नी से अपना आप को हवा झलती रही!! दो मिनट में चढ़ने वाली चेन भी उस दिन पूरा इक्कीस मिनट में चढ़ी,खैर चेन चढ़ा कर प्रेम ने नजरें ऊपर उठाई,लड़की ने प्रेम को देखा ,प्रेम ने लड़की को देखा ,और पहली बार दोनो दिलों में एक साथ घंटी बजी!!!

     पर ना ये घंटी जो दोनो को संग संग सुनाई दी ये सत्ती माता की आरती की घंटी थी,पर दोनो के हृदय ने एक दूसरे को चीन्ह लिया,,निरमा ने धीमे से कहा-” थैंक यू ….. अबकी बार प्रेम को अन्तिम अन्तरा सुनाई दिया जो सार्थक हो गया__
     “एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ….
          जैसे नाचता मोर,जैसे रेशम की डोर
          जैसे परियों का राग,जैसे संदल की आग
          जैसे सोलह सिंगार जैसे रस की फुहार
          जैसे आहिस्ता आहिस्ता चढता नशा ।।

    अभी निरमा का नशा प्रेम पे चढ़ने ही वाला था कि बाँसुरी अपनी साईकल हाथ से खींचती चली आई__”तुम यहाँ कहाँ अटक गई,क्या हो गया निरमा??”

“हमारी साईकल का चेन उतर गया था,इन्होने ठीक किया।।”

“तो अब तो ठीक हो गया ना चेन,,अब चलो ,देर हो रही कॉलेज को।।”

  निरमा बाँसुरी के साथ चली गई और छोड़ गई प्रेम के दिल पे अपनी छाप!!!

   ये प्रेमप्रताप पाण्डेय की सम्पूर्ण जीवन गाथा थी जिसमें से सुविधानुसार प्रेम ने अन्तिम अंतरे वाली लड़की वाला अपना किस्सा वहाँ मौजूद सभी को कह सुनाया।।।
               सदियों से होता आ रहा कि किस्से कहानियाँ हम कानों से सुनते हैं लेकिन जाने क्यों हमारी आंखें फैल जाती हैं सुनते हुए,,वहाँ मौजूद सभी के साथ वही हुआ।

“अब करना क्या है गुरू?? सादी वादी का विचार है की नही।”प्रिंस के ऐसा पूछते ही प्रेम ने जवाब दिया

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“हैं काहे नही बे!! शादी तो निरमा से ही करना चाहतें हैं,पर हमारी अम्मा भी कसम खाये बैठीं हैं,कहती है ,वा वर्माइन हमार  बहुरिया ना बनी,, नही ता हम जहर खा ले और मर जाब, ,,अब बोलो का करें,भैय्या जी आप ही कुछ रस्ता सुझाओ।।अभी तक अम्मा से डरे बैठे थे,अब ई गुड्डा और आ गया चौधरी बन के,हम भी कोनो डरते नई हैं,हम तो साले के पनही न पनही लगाते पर आपका और जिम का लिहाज कर के चुप रह गये।।”

“तुम चुप नही रहे बल्कि छुप गये ,अब जादा बतियाओ ना ,नही  हम तुमको सही का पनही (चप्पल)धर देब।।लल्लन के ऐसा बोलते ही प्रिंस के बंमपिलाट दिमाग में एक खतरनाक आइडिया आया

  “हम तो कहते हैं,तुम निरमा को ले कर देवरिया निकल जाओ,हम फ़ोन पे तुम्हें यहाँ का सब खबर देते रहेंगे ,जब मामला ठंडा हो जायेगा तो सादी उदी कर के वापस आ जाना।।”प्रिंस की इस बात का जवाब दिया बांसुरी ने

“वाह ! प्रिंस जवाब नही क्या आइडिया दिये हो” अपनी तारीफ सुन प्रिंस चौड़ा हो गया,तब बांसुरी ने अपनी बात आगे बढ़ाई

“काहे तुम क्राईम पैट्रोल बिल्कुल ही नई देखते क्या?? अरे भागने वालों का फ़ोन नम्बर सबसे पहले ट्रैक करती है पुलीस,उसके बाद इन लोगो का गला पकड़ कर पुलीस लायेगी और दोनो के घर वालो के हवाले कर देगी,उसके बाद मुश्किल से एक महीना मे निरमा की शादी उसके समाज में हो जायेगी और प्रेम यहाँ जिम मे चदरिया झीनी रे झीनी सुनेगा,और हम सब को सुनाएगा।।”

राजा ने बांसुरी को देखा और पूछा__”फिर तुम ही बताओ का करना चाहिये।।”

  “हां हम बताते हैं एक नम्बर आइडिया देंगे जिसका फेल होने का चांस बस फिफ्ती परसेन्ट है।”और बांसुरी हंसने लगी__”सुनो राजा तुम जाओ प्रेम के घर और उसकी अम्मा से बात करो,और हम जायेंगी निरमा के घर उसकी अम्मा से बात करने।।एक बार दोनो घर के गृहमंत्री तैय्यार हो गये तो प्रधान मंत्री को मनाना आसान हो जायेगा।।”

  “लेकिन बंसी अगर हमारी अम्मा नई मानी तो,का करेंगे फिर।””निरमा ने पूछा

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“अगर ऐसा हुआ निरमा तो तुम फिर वही करना जो तुम्हरी अम्मा कहेंगी,क्योंकि एक बात याद रखो अपना अम्मा से ज्यादा तुमको कोई प्यार नही कर सकता ई प्रेम भी नही।।।अपनी जिद अपनी इच्छा अपने घर वालों को बताओ उन्हें मनाने की भी कोशिश करो पर जीने मरने की धमकी मत देना,,अगर प्रेम प्यार से मान गये तो अच्छा है नही तो तुम लोग उनकी बात मान जाना,उसी मे सब का भलाई है निरमा,,आज तुम भले हमारा बात ना समझो पर एक दिन हमारा बात तुम्हारा भेजा में घुस जायेगा।।”

  जिम में सन्नाटा छा गया ,तभी पिंकी ने आगे बढ़ कर बंसी को गले से लगा लिया___प्राउड ऑफ़ यू बंसी !! अब तुम और राजा भैय्या पहले इस प्रेम के प्रकरण को सुलझाओ फिर इसके बाद हमारे लिये काम करना है तुम दोनो को।।है ना।।”

“हां दीदी!!! बड़के भैय्या मान जायेंगे,और बस एक बार वो मान जाये फिर घर वाले भी ।।”दोनो सखियाँ एक साथ मुस्कुराने लगी

“राजा भैय्या अब हम घर जाते हैं,आप भी इस प्रेम का गणित बैठा के जल्दी से घर आ जाओ।।।”

जाते जाते पलट के पिंकी ने राजा को देखा और बोली__”अरे हाँ रेखा को भी फ़ोन कर लेना ,उसका फ़ोन आपने उठाया नही था।।और ज़ोर से खिल्खिलाती हुई पिंकी जिम से बाहर निकल गई ।।

प्रिंस और प्रेम शातिर मुस्कान के साथ भैय्या जी को देखने लगे वहीं लल्लन मन ही मन सोच मे पड़ गया कि बताओ क्या किस्मत है राजा भैय्या की होने वाली दुल्हीन और हमारी गर्ल फ्रेंड का एक ही नाम है।।सोचते सोचते वो भी मुस्कुराते हुए प्रिंस और प्रेम के साथ भैय्या जी को छेड़ने मे लग गया कि तभी उसके फ़ोन की रिंग बजने लगी__

  “हाँ बेबी!! बोलो …..बोलते हुए लल्लन बाहर की ओर निकल लिया।।।

उसके पीछे से एक ज़ोर का ठहाका उसका पीछा करता चला आया।।।
 
  क्रमशः

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

2 विचार “शादी.कॉम -8” पर

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