जीवनसाथी-117

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            जीवनसाथी -117

     
    
  उनके सवाल पर समर एक किनारे खड़ा मुस्कुराता रहा… उसने पीछे देखा, कोर्ट रूम के दरवाजे पर एक आदमी अपना चेहरा आधा ढके खड़ा था उसने आंखों ही आंखों में समर को अभिवादन किया समर ने भी धीरे से बाकियों की नजर बचाकर उसके अभिवादन को स्वीकार किया और मुस्कुराकर ठाकुर साहब की तरफ देखने लगा।
   यह वही आदमी था जिसे समर ने 1 दिन पहले फोन करके ठाकुर साहब को कोर्ट तक पहुंचाने की बात कही थी……
….

     ठाकुर साहब का वकील एक तरफ चुप बैठ गया था। वो अब एक बार फिर नए सिरे से अपने कागज़ देख रहा था कि किस तरह अब कोर्ट में पहुंच चुके ठाकुर साहब को बचाया जाए। इसी बीच ठाकुर साहब को पुलिस ने कस्टडी में लिया और एक तरफ को लेकर आगे बढ़ गए, इसके साथ ही समर की जिरह भी शुरू थी।
     ठाकुर साहब के गुस्से का वारापार नही था। समर ने कहना जारी रखा….-“मैं अदालत में इनके काले कारनामों के सबूत पेश कर ही चुका हूँ। इसके साथ ही इन्होंने अपने कार्यालय से निकलते समय रानी बाँसुरी पर जो हमला करवाया उसकी भी तस्वीरें मेरे पास मौजूद हैं, जिन्हें मैं आपके समक्ष प्रस्तुत करने वाला हूँ।
    मारने काटने में ही तो इन्होंने पी एच डी कर रखी है न्यायधीश महोदय। जब जहाँ जी किया किसी पर उठा कर गोली चला दी। ये राजा अजातशत्रु के कार्यक्रम में भी इसलिए ही आये थे कि वहाँ इन्हें मार दिया जाए लेकिन इन्हें पहले ही राजमाता ने देख लिया। अब चूंकि इन्हें उस समय जेल में होना चाहिए था लेकिन ये जेल से फरार थे इसलिए राजमाता समझ गयीं की ये आदमी कुछ तो गड़बड़ करने के उद्देश्य से ही वहाँ आया है। उन्होंने ध्यान से देखा तो इनके हाथ की गन भी नज़र आ गयी , और उसी समय इन्होंने गन निकाल कर राजा अजातशत्रु पर निशाना साधा और राजमाता बीच में आ गईं और उन्हें गोली लग गयी जिसके बाद उनका देहांत हो गया। तो महोदय इन पर दो बार राजा अजातशत्रु पर हत्या के प्रयास और राजमाता की हत्या का आरोप लगता है…”

  समर की बात बीच में ही काट कर बचाव पक्ष का वकील कूद पड़ा…-” हत्या नही गैर इरादतन हत्या का प्रयास कहिये।”
” जी वो सारे चार्जेस तो अभी लगेंगे ही। वैसे भी जितने सबूत हमारे पास मौजूद हैं अब ठाकुर साहब को फांसी से बचा पाना आपके लिए बहुत मुश्किल होगा वकील साहब। आप ज़रूर कह रहे थे कि आप आज तक कोई केस नही हारे हैं, लेकिन अब ये केस आपके हाथ से निकलता दिख रहा है। मुझे तो समझ में नही आ रहा कि आपने इतने पारदर्शी और साधारण से केस को क्यों इतना घुमाया। ठाकुर जैसा लीचड़ और गिरा हुआ आदमी इस लायक ही नही की आप जैसा बुद्धिमान व्यक्ति इनकी पैरवी करे, और…
   समर की बात पूरी होने से पहले ही ठाकुर साहब ने पास खड़े पुलिस वाले कि गन निकाल कर राजा अजातशत्रु की तरफ मोड़ दी। उन्हें ऐसा करते देख उनका वकील ज़ोर से ” ऐसा मत कर दीजिएगा ठाकुर साहब ! आप अदालत में खड़े हैं, आपको कोई नही बचा पायेगा।” कहते उनकी तरफ भागे की हड़बड़ाहट में ठाकुर साहब का हाथ सामने से आते वकील साहब की ओर घूम गया।
   ठाकुर साहब का हाथ ट्रिगर पर ही था, उनके हाथ से गन चल गई लेकिन उतनी ही देर में किनारे खड़े समर ने वकील साहब को एक ओर खींच कर दूसरे हाथ से गन उन तक उछाल दी।
   ये सब इतनी जल्दी जल्दी हुआ कि किसी के कुछ सोच समझ पाने से पहले ही वकील साहब के हाथ में आई गन उन्होंने चला दी और गोली ठाकुर साहब को जा लगी।
   गोली ठाकुर साहब के माथे के ठीक बीचों बीच जाकर लगी और वो वहीं ढेर हो गए। उनका वकील कुछ समझ पाता कि तब तक पुलिस उन तक चली आयी।


    ठाकुर साहब के वकील ने समर की तरफ लाचारगी से देखा समर में दोनों कंधे ऊपर उठाकर ना में सर हिला दिया और राजा अजातशत्रु की ओर देख कर मुस्कुरा दिया।
कोर्ट ने अपनी कार्यवाही आगे बढ़ाने के पहले तुरंत ही डॉक्टर को तलब किया डॉक्टर ने आते ही ठाकुर साहब की जांच करके उन्हें मृत घोषित कर दिया! उनके वकील को पुलिस कस्टडी में ले लिया गया और यह सब देखते हुए कोर्ट ने तारीख आगे बढ़ा दी। राजा अजातशत्रु समर और आदित्य के साथ बाहर निकले ही थे कि फोन की घंटी बजने लगी…… फोन राजा के बड़े भाई युवराज का था…-” कहां हो कुमार?
” जी बस अभी अभी कोर्ट से बाहर निकला हूं आप बताइए क्या बात है भाई साहब?”
” तुम्हें मुबारकबाद देने के लिए फोन किया था। तुम पापा और हम बड़े पापा बन गए हैं। बांसुरी ने एक छोटे राजा अजातशत्रु को जन्म दिया है। मां और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं अब जितनी जल्दी हो सके उड़कर यहां पहुंच जाओ।”

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   खुशी के अतिरेक में राजा से कुछ कहा ही नहीं गया। खुश होकर उसने अपने बाजू में खड़े समर की तरफ पलट कर देखा, समर और आदित्य उसे प्रश्नवाचक निगाहों से देख रहे थे? और राजा के चेहरे की मुस्कान ही गायब नहीं हो पा रही थी, कि समर ने फोन लेकर युवराज भैया से ही बात कर ली।
   खुशखबरी सुनते ही समर भी खुशी से उछल पड़ा लेकिन उसने राजा से कितना भी प्रेम किया हो उसके मन में राजा के लिए सम्मान बहुत अधिक था। इसलिए अपने संकोच में वह आगे बढ़कर राजा के गले से नहीं लग पाया लेकिन अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए उसने साथ खड़े आदित्य को गले से लगा लिया…-” बधाई हो दोस्त हम चाचा बन गए हैं!”,
आदित्य को अब जाकर माजरा समझ में आया उसने झट आगे बढ़कर राजा के पैर छूकर उसे बधाई दे डाली। राजा ने आगे बढ़कर आदित्य और समर दोनों को गले से लगा लिया…-” अब यहां मेरा मन नहीं लगेगा, अब तुरंत वापस चलो समर।”

“लेकिन राजा साहब! केस अभी खत्म नहीं हुआ भले ही ठाकुर साहब नहीं रहे तो क्या हुआ पर उन पर लगे आरोपों को सिद्ध करके….”

   समर अपनी बात पूरी करता इसके पहले ही राजा ने उसकी बात आधे में ही काट दी …-“वह सब अब मैं कुछ नहीं जानता! तुम वकील हो अब तुम जानो तुम्हें क्या करना है? तुम्हारे पास सबूत भी हैं और गवाह भी लेकिन अब मुझे मेरे घर पहुंचना है।”
समर ने मुस्कुराकर हां में सर हिलाया और आगे बढ़कर गाड़ी का दरवाजा खोल दिया।
गाड़ी में पीछे बैठते ही राजा ने तुरंत बांसुरी के फोन पर रिंग कर दी।
थोड़ी देर फोन बजने के बाद फोन उठा लिया गया.. राजा ने धीरे से अपने मन की बात कह दी..-” थैंक यू सो मच हुकुम! आई लव यू अ लॉट!”
“आई लव यू टू कुंवर सा। आपकी हुकुम नहीं बल्कि आपकी भाभी रूपा बोल रहे हैं हम। कभी हमें भी याद कर लिया कीजिए हमसे भी बातें कर लिया कीजिए।’

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“भाभी साहब आप तो ह्रदय में बसती है आप छोटी मां है हमारी।”
“बस बातें बना लीजिए! आप आप दोनों भाइयों को और आता क्या है? वैसे हम आपका ज्यादा समय खराब नहीं करेंगे, लीजिये हम फोन बांसुरी को दे देते हैं।”
रूपा ने बांसुरी के सामने फोन रख कर फोन स्पीकर में डाल दिया राजा ने शरमाते हुए बांसुरी को थैंक यू कहा और आगे की बात उसे बताने लगा…-” मुझे लगा फोन तुम ने उठाया है और मैं भाभी साहब को जाने क्या-क्या कह गया? पता नहीं वह भी क्या सोच रही होंगी?”
“क्या सोच रही होंगी, यही सोच रही होंगी कि राजा साहब बावले हो गए हैं खुशी के मारे।”
“बात तो सौ टका सच है! राजा साहब खुशी के मारे बावले ही हो गए हैं। लेकिन बावजूद मैं कुछ का कुछ बोल गया और भाभी साहब ने सब सुन लिया।”
“साहब !  भाभी साहब तो अभी भी सब कुछ सुन रही हैं। आपका फोन स्पीकर में है, और इस कमरे में मेरे अलावा भाभी साहब, निरमा और पिया तीन और लोग भी हैं। और इन तीनों के अलावा आपका छोटा सा राजकुमार भी टुकुर टुकर पलके झपकाते हुए आपकी सारी बातें सुन रहा है।”
“तुम भी हद करती हो बांसुरी! मैंने फोन किया और तुमने स्पीकर में डाला हुआ है। मैं रख रहा हूं फोन।”

“अरे मैंने स्पीकर में नहीं डाला बाबा! भाभी साहब ने स्पीकर में डाल कर दिया, लेकिन सुनो तो सही बेबी मेरी गोद में है! मैं फीड कराने की कोशिश कर रही हूं उसको। अब ऐसे में आप फोन करोगे तो मैं कैसे बात करूं भला?”
“ओ ओ एम सॉरी! यह बात है तो पहले बताना चाहिए था ना। तुम्हें तो बड़ी मुश्किल हो रही होगी, चलो फोन रखो मैं बस जल्दी से तुम्हारे पास पहुंचता हूं।”
“कैसे बताती? बताने के लिए भी तो फोन उठाना ही पड़ता और फोन उठाते ही आपने आई लव यू की जो झड़ी लगाई कि भाभी साहब शरमा कर पानी पानी हो गई और उन्होंने फोन मेरी तरफ कर दिया।”
राजा ने शरमा  कर हंसते हुए फोन रख दिया। समर ने गाड़ी सीधे एयरपोर्ट की तरफ घुमा ली और फोन पर ही प्रेम को केसर को साथ लेकर एयरपोर्ट आने कह दिया।

कई बार जीवन में हर गुत्थी सुलझ जाए ऐसा नहीं होता। ठाकुर साहब के केस की गुत्थी उनकी अचानक मृत्यु से अनसुलझी रह गई थी। लेकिन हर गांठ अपने वक्त पर सुलझ जाए ऐसा हर बार संभव नहीं होता। ठाकुर साहब का केस पेचीदा था कठिनाइयों से भरा था। बावजूद समर ने जी-जान लगाकर उस केस को इमानदारी से लड़ने की कोशिश की। यह जानते हुए भी कि ठाकुर साहब का ईमानदारी से कोई दूर-दूर तक नाता नहीं है। उन्होंने शुरू से लेकर अपने जिंदा रहते तब हमेशा हर एक इंसान का फायदा उठाने की कोशिश की, चाहे वह उनकी पत्नी हो उनकी पुत्री हो या उनका भांजा।
   इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए समर यह जानता था कि ईमानदारी से ठाकुर साहब के खिलाफ अगर वह केस लड़ने गया तो सदियां लग जाएंगी। लेकिन केस निपटेगा नहीं। हालांकि इससे ना राजा का कुछ बिगड़ना था, ना बांसुरी का। लेकिन मन में अशांति और वैमनस्य तो उपजता ही है।
    इसीलिए समर ने शुरू से कोर्ट केस को इस ढंग से तैयार किया कि ठाकुर साहब और उनके वकील को लगे कि केस उनके पक्ष में जा रहा है। और बाद में हुई गड़बडियाँ इसी बात की लिए थी कि ठाकुर साहब हड़बड़ा कर कोई ऐसा कदम उठाएं कि अपने आप को बचाते हुए कोई उन्हें गोली मार दे।

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     समर केस के बीच के ब्रेक में मौका लगते ही  ठाकुर साहब के वकील के कान इसी बात से भरे की ठाकुर साहब बेहद सनकी, जिद्दी और घमंडी इंसान हैं। उनका कोई भरोसा नहीं है अगर वह बौरा गए तो भरी सभा में किसी पर भी गोली चला सकते हैं। इन बातों को बार-बार सुनकर ठाकुर साहब के वकील के दिमाग में यह बैठा हुआ था कि अगर ठाकुर साहब के हाथ में गन आ गई, तो हो सकता है वह अपने गुस्से के कारण अपने ही वकील पर भी गोली चला दे।  इसी बात से भयभीत वकील साहब ने जैसे ही ठाकुर साहब के हाथ में गन देखी घबरा कर उन्हें रोकने के लिए भागे और इस भागमभाग का फायदा उठाते हुए समर ने पहले से अपने पास छुपा कर रखी गन उनके हाथों में उछाल दी। उनके हाथ में गन देखते ही ठाकुर साहब के हाथ से ट्रिगर चल गया और खुद को बचाते हुए उनके वकील ने ठाकुर साहब पर गोली दाग दी। किया कराया सब कुछ समर का था। गोली तो असली में समर ने चलाई थी बस गन किसी और हाथ में थी।

   “मान गए समर सा आपकी बुद्धि और आपकी विद्वत्ता को।” आदित्य की इस बात पर केसर उसे सवालिया नजरों से देखने लगी तब आदित्य ने केस की उस दिन की सारी कार्यवाही प्रेम और केसर को कह सुनाई।
  प्रेम सब कुछ सुनने के बाद समर की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा…-” यह इनकी की हुई पहली कारस्तानी नहीं है! यह इसी तरह के वकील है जो केस शुरू होने से पहले ही केस की हर चाल तय कर लेते हैं। अपनी तरफ की भी और विपक्षी की भी। उसके बाद सारी चाले समझने के बाद इस ढंग से अपनी गोटियां चलते हैं कि सामने वाला उन चालों को काटने के लिए अपने प्यादों को इस ढंग से चले कि समर की चाही हुई चाल सामने वाला खुद ब खुद चल जाए और सामने वाले को बिना यह समझ में आए कि वह हार रहा है वह हारता चला जाए।”

  “वह सब तो ठीक है पर आप लोगों ने सुबह से कुछ खाया पिया नहीं है अब कुछ खा पी लीजिए।” केसर की बात पर राजा मुस्कुरा के खिड़की से बाहर देखने लगा…-” अब तो हम अपने छोटे से राजकुमार का मुंह देखने के बाद ही कुछ खाएंगे पिएंगे।”

******

एयरपोर्ट से राजा की गाड़ी महल की जगह अस्पताल की ओर ही मुड़ गयी। अस्पताल ने भी राजा जी के स्वागत की पूरी तैयारी कर रखी थी……
    फूलों गाजों बाजों के साथ राजा का स्वागत हुआ और राजा समर प्रेम आदित्य केसर सारे लोग एक साथ अस्पताल में अंदर पहुंच गए।
   केसर कुछ थकी हुई थी और साथ ही मन ही मन बांसुरी का सामना करने के लिए शायद डर भी रही थी! उसने धीरे से आदित्य की तरफ देखा आदित्य उसकी मन की बात समझ गया…-” राजा भैया अगर आप बुरा ना माने तो हम केसर को महल छोड़कर फिर वापस आ जाते हैं। “
  राजा के दिमाग में इस समय सिर्फ और सिर्फ बांसुरी से और अपने बेटे से मिलने की ललक थी। उसे ना तो कुछ सुनाई दे रहा था ना दिखाई दे रहा था उसने आदित्य से तुरंत “हां” कहा और तेजी से अंदर की ओर बढ़ गया! आदित्य केसर को लेकर बाहर से ही महल की ओर निकल गया। समर और प्रेम राजा के पीछे पीछे ही कमरे तक चले आए।


    राजा ने कमरे के दरवाजे पर थाप दी। अंदर से “चले आइए” की आवाज सुनकर राजा ने दरवाजा खोला और भीतर दाखिल हो गया।
    बांसुरी की ठीक बगल में उसका नन्हा राजकुमार लेटा हुआ था।  बाँसुरी की आँख लग गयी थी। रूपा कुछ देर पहले ही महल लौटी थी। निरमा भी रात से ही बाँसुरी के साथ होने के कारण मीठी को देखने घर गयी हुई थी। बाँसुरी की दो सहायिकाओं के साथ ही पिया उस वक्त बाँसुरी की दवाओं का जायज़ा लेने वहीं मौजूद थी।
   राजा को देख उसने मुस्कुरा कर उसका अभिवादन किया कि उसकी नज़र राजा के ठीक पीछे खड़े समर पर पड़ गयी, और अब तक कि सारी बातें भूल उसे बस समर का सीधे मुहँ बात न करना ही याद आ गया और उसने समर को पूरी नज़र देखे बिना ही प्रेम की तरफ मुहँ फेर लिया…-” नमस्ते भैया। “
    बाँसुरी को सोते देख एक झलक नन्हे राजकुमार को देख कर प्रेम तुरंत ही बाहर मुड़ गया। उसके पीछे ही समर भी बाहर जाने को हुआ कि बाँसुरी की आंख खुल गयी…
   राजा अब तक धीमे से अपनी उंगलियों से अपने बेटे के चेहरे को टटोल रहा था… वही नाक, वही माथा और वही गोल गोल पलकों के साथ काली मोटी मोटी आंखे।
   उसी का तो रूप था हूबहू। राजा की आंखों में खुशी के आँसू छलक आये ….
  राजा ने झुक कर उसका माथा चूम लिया..-” गोद में ले सकते हैं आप इसे साहब!”
  बाँसुरी की आवाज़ सुन राजा ने आंखें उठा कर उसे देखा…-“अरे तुम जाग गयीं।”
” मैं तो रास्ता ही देख रही थी,पता नही कब आंखें लग गईं। “
पिया ने धीरे से बच्चे को उठा कर कोमलता से राजा के हाथों पर रख दिया। राजा अपनी बाहों में अपने कलेजे के टुकड़े को समेटे विस्मित सा खड़ा था…-” आज तक बहुत से बच्चों को गोद में लिया है और सच कहूं तो दुनिया का हर बच्चा बहुत प्यारा होता है। लेकिन अपने खुद के बच्चे को अपने अंश को अपनी बाहों में लेना अद्भुत है। इससे सुंदर एहसास आज तक नही महसूस किया। किन शब्दों में तुम्हें थैंक्स कहुँ बाँसुरी। यूँ लग रहा मेरा बचपन तुमने मुझे वापस कर दिया।”

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” सही कह रहे हो कुमार! अब इसमें हम सब को तुम्हारा बचपन वापस जीने मिल गया।” युवराज ने कमरे में प्रवेश किया और राजा को आगे बढ़ कर गले से लगा लिया। अब तक राजा के हाथ से बच्चे को गोद में लेकर समर उसे देख मुस्कुरा रहा था कि रुपा पिया को वहाँ खड़ी देख चौन्क गयी…-“अरे डॉक्टर साहिबा आप अब तक यहीं हैं? आज शाम तो आपकी सगाई थी ना। आप गयीं नहीं अब तक। हम तो हमारी सगाई वाली शाम में सुबह से ही पार्लर में थे। “
  रुपा ने हंसी हंसी में अपनी बात कही और सहायिकाओं की सहायता से सबके लिए नाश्ता और चाय निकलवाने चली गयी, लेकिन सगाई वाली बात सुनते ही समर ने तुरंत पिया की ओर देखा और पिया संकोच में उसकी तरफ देख ही नही पायी। किसी ने समर की गोद से बच्चे को लेकर बाँसुरी को दे दिया। समर पिया से सब कुछ जानना पूछना चाह रहा था लेकिन पिया उससे नज़रें चुराती धीरे से बाँसुरी के कान में कुछ कह कर बाहर निकल गयी….

क्रमशः

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दिल से….

  त्योहारों की व्यस्तता के कारण इस भाग में देर हो गयी,लेकिन अब मेरी सारी कहानियां अपनी गति से आगे बढ़ती जाएंगी। समिधा और मायानगरी भी।
   जीवनसाथी का अगला भाग इस पूरी कहानी का सार सम्पूर्ण भाग होगा।
  मुझे पढ़ते रहने के लिए आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ

aparna….



लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

60 विचार “जीवनसाथी-117” पर

      1. Sachi,wow 🤗🤗🤗🤗🤩lekin na aap prem or nirma ka yahi naam or personality rakhna Mr. And Mrs. Prem singh chandel .
        In dono ki iss story mein ek alag hi feel hai jo or kisi ko bhi padkar nahi aata ekdum ……speechless
        Nirma or prem,prem or nirma🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰😍😍😍😍😍😍😍😍😘😘😘😘😘😘♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️

        Liked by 2 लोग

  1. अति सुन्दर , हंसी-खुशी हर्षोल्लास के साथ समापन की ओर ।।।
    लेकिन दिल में एक टीस भी कि अब कहानी आगे पढ़ने को नहीं मिलेगी ….
    💐💐💐💐💐
    🙏🙏🌴🙏🙏

    Liked by 1 व्यक्ति

  2. Wow part is so awesome and beautiful 😍❤♥
    कैसा खुबसूरत अहसास होता है जब खुद के अंश को अपनी हथेलियों में थामने पर 🥰🥰🥰🥰
    पूरा पार्ट पढ़ते वक्त चेहरे पर बड़ी सी smile थी
    But लास्ट line पढ़ने के बाद झटका लग गया कि next कहानी का अंतिम भाग होगा, ये तो पता था कि कहानी अपने अंतिम की ओर अग्रसर है but जिस situation में आपने बताया 🤔🤔 एक तरफ खुशी हुई छोटे नबाव का सुन के और एक तरफ थोड़ा सा अच्छा नहीं लगा अंत का सुन कर।

    Liked by 1 व्यक्ति

    1. अभी तो बहुत कुछ बाकी है समर पिया का जीवन और भी बहुत कुछ बाकी सा लग रहा हैं! आपसे निवेदन है कि अभी इस तरह से लास्ट न करे! इतना प्यार हो गया है इस स्टोरी से सब कुछ पढ़ने पर भी कुछ बाकी सा रहता है! तो धीरे धीरे ही सही कुछ पार्ट आने दे !अभी बंद न करे इसे !यही अनुरोध है आपसे डॉक्टर साहिबा ! बहुत बहुत धन्यवाद आपको 🙏🙏❤️❤️🙏🙏

      Liked by 1 व्यक्ति

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