जीवनसाथी- 118

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  जीवनसाथी – 118




     अस्पताल में बांसुरी के कानों में चुपके से कुछ कह कर पिया वहां से बाहर निकल गई बांसुरी में समर की तरफ देखा वह पिया को ही देख रहा था पिया के जाने के बाद उसने सर झुका लिया।

” क्या हुआ समर सा कुछ उदास लग रहे हैं आप?

“ऐसी तो कोई बात नहीं रानी साहेब! मैं तो बहुत खुश हूं। आपने इतनी बड़ी खुशखबरी दी है मेरे हाथों में।

“तो आप हम सब को कब मौका दे रहे हैं खुश होने का।”

बाँसुरी के सवाल पर समर मुस्कुरा कर चुप रह गया।

“नहीं! अब ऐसे चुप रहने से काम नहीं चलेगा! आपको याद है एक दिन आपने मुझसे कहा था, कुछ गिफ्ट के लिए, और मैंने कहा था वक्त आने पर मांग लूंगी! तो क्या आज मैं अपना तोहफा मांग सकती हूं!”

” आप रानी है हुक्म कीजिये।”

” पहली बात कि आप मुझे बार-बार रानी साहेब कहना बंद कीजिए। मैं आपको अपना देवर मानती हूँ इस लिहाज से आप मुझे भाभी सा कहिये तभी मैं अपना तोहफा माँगूँगी। “

  समर मुस्कुरा उठा..-” ठीक है भाभी साहब! आप बताइए । “

” अब आप भी शादी कर लीजिए। कब तक ऐसे मारे मारे फिरते रहेंगे। आपके राजा साहब अपने अलावा और किसी की तरफ ध्यान देते ही नही। “

” ये बड़ी ज्यादती है। अगर वो खुद किसी बंधन में बंधना नही चाहता तो मैं कैसे उसे पकड़ कर उसकी शादी कर दूं। “
   राजा के जवाब पर समर बाहर की तरफ देखने लगा। उसे देखकर बांसुरी वापस मुस्कुरा कर उसे छेड़ने लगी…-” क्या हुआ कमरे से बाहर की तरफ आप देख रहे हैं? किसी का इंतजार कर रहे हैं या किसी के पीछे जाना चाहते हैं।”

“जी ऐसा तो कुछ भी नहीं है।”

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“क्यों अपने आप से झूठ बोल रहे हैं? अब इस कमरे में आपके राजा साहब और मेरे अलावा कोई नहीं है! आप हम दोनों को तो सच बता ही सकते हैं।”

“कैसा सच भाभी साहब?”

“यही कि आप पिया से प्यार करते हैं!”

“ऐसा किसने कहा आपसे! क्या पिया ने कुछ कहा?”

“जी नहीं आप एक नमूना हैं तो वह डबल नमूना है। उसने भी कुछ नहीं कहा । यही तो मैं कह रही हूं कि ना आप कुछ कहेंगे ना वह कुछ कहेगी और बस इसी अनकही में कहीं यह ना हो जाए कि वह शादी करके उस डॉक्टर का नर्सिंग होम संभालने चली जाए ! तब बैठे रहिएगा अपनी मंत्रीगिरी संभालते हुए यहां।
  और एक बात कहूं! आज नहीं तो कल काकासाहेब आपकी शादी कर ही देंगे ! किसी ना किसी के साथ तो जिंदगी आपको भी बितानी ही है, तो अगर मौका मिल रहा है कि आप अपनी पसंद की लड़की के साथ अपनी पूरी जिंदगी बिता सकते हैं, तो उस मौके को क्यों यूं ही गवा रहे हैं?
  आखिर अब आपको किस बात का इंतजार है? देखिए आपकी सगाई हुई थी केसर से। पर यह हम सब जानते हैं कि वह सगाई कितनी सच थी और कितनी झूठ।
यह आप भी जानते हैं और केसर भी। अगर आप यह सोच कर बैठे हैं कि उस झूठी सगाई के बाद भी केसर की सारी जिम्मेदारी आपके ऊपर है तो यह गलत है। केसर खुद पश्चाताप में  डूबी है कि मुझसे और राजा साहब से बदला लेने के लिए उसने आपको मोहरा बनाया। यह बात आप भी जानते हैं। इसलिए केसर की तरफ से अपने मन में किसी भी तरह का कोई गिल्ट मत रखिएगा ।
  अपनी जिंदगी संवारने का, उसे सजाने का मौका हाथ से मत जाने दीजिए समर सा, क्योंकि अगर आप जिससे प्यार करते हैं वह आपके साथ नहीं है तो जिंदगी बहुत कठिन हो जाती। हमने यह बात बहुत करीब से महसूस की है रेखा को देखते हुए।
और अगर आपने जिससे प्यार किया वह आपका हमसफर बन कर आपका जीवन साथी बन कर आपके ज़िन्दगी के सफर में साथ चलता रहे तो इस जिंदगी के सफ़र से खूबसूरत कोई सफर नहीं रह जाता, यह हमसे ज्यादा और कौन जानता है।



“एक और भी कोई है जो यह बात जानता है।”

राजा की बात पर बांसुरी मुस्कुरा कर वापस समर को देखने लगी…-” देख लीजिए अपने राजा साहब को और हमें!
क्या हम दोनों की जोड़ी देखकर आपको यह नहीं लगता कि आपकी भी ऐसी ही एक जोड़ी होनी चाहिए! अभी भी वक्त है जाइए और रोक लीजिए अपनी पिया को, वरना वह इतनी ज़िद्दी है, कि अगर आपने उसे नहीं रोका तो वह वाकई उस लड़के से सगाई करके शादी करके आप की दुनिया से दूर चली जाएगी।”

” जाने दीजिए! अगर वह जिद्दी है, तो मैं उससे बड़ा जिद्दी हूं।”

“अगर आपकी ज़िद से किसी का फायदा होता तो मैं आपको इस ज़िद से पीछे हटने नहीं देती। लेकिन आप दोनों की यह फिजूल तानाशाही और यह फिजूल की सनक एक दूसरे की जिंदगी बर्बाद कर देगी। इतना कहने पर भी आप मेरी बात नहीं सुन रहे हैं इसका मतलब है, कि आपकी जिंदगी में मेरी कोई अहमियत नहीं है। चलिए कोई बात नहीं अगर आप नहीं चाहते तो मैं आपको बिल्कुल भी फोर्स नहीं करूंगी।”

“यह क्या कह दिया आपने भाभी साहेब। हुकुम का और आपका स्थान मेरे जीवन में मेरे माता-पिता के समान है! आपकी आज्ञा मेरे सर माथे। मैं अभी जा रहा हूं ,उसके पीछे।  उसे पकड़ कर वापस आपके सामने पेश करता हूं।”

“जी नहीं! उसे इस तरह से पकड़ जकड़ कर मेरे सामने लाने की जरूरत नहीं है। आज उसकी सगाई है आप जाइए उसकी सगाई होने से पहले -पहले उसके घरवालों से उसका हाथ मांग लीजिए।
लेकिन उसके पहले मेरी एक बात सुनिए।”

“जी आज्ञा दीजिए आप।”

“आप वाकई पिया से प्यार तो करते हैं ना?”

समर बांसुरी से नजर चुरा कर इधर-उधर देखने लगा और उसे इधर उधर देखते हुए बांसुरी खिलखिला कर हंस पड़ी…-” देखिए यह हमारा छोटा शैतान भी खुश हो रहा है अपने चाचा को शर्माते हुए देखकर। वैसे एक बात कहूं आप की बोलती कोई बंद नहीं करा पाता है। एकमात्र पिया है जिसके सामने आप चुप खड़े रह जाते हैं और वह सरपट बोलती चली जाती है। मैंने तो पहली बार ही आप दोनों को देख कर समझ लिया था कि यह राम मिलाई जोड़ी है।”

“देखा समर कितनी समझदार है हमारी हुकुम। दूसरों के सब मामले में इनकी समझदारी ऐसे ही फूट-फूटकर बहती है, और हमारे मामले में इन्हें मुझसे मिलने के बाद यह समझ आने में कि मैं ही इनका जीवन साथी हूं महीनों लग गए।”

“होता है ऐसा भी हो जाता है कभी-कभी!
वैसे समझ में तो तब भी मुझे आ गया था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। और खासकर आपका यह बड़ा सा महल देखने के बाद तो रही सही थोड़ी सी हिम्मत भी चूक गई थी।”

“चलो अब हम दोनों बातों में नहीं लगते समर कि यहां से छुट्टी करते हैं जिससे वह जाकर अपनी जीवनसंगिनी को रोक सके ! “
राजा की बात पर बांसुरी ने हां की मुहर लगाई और समर को उन दोनों ने वहां से बाहर भेज दिया।

समर कमरे से बाहर निकल कर गाड़ी की तरफ बढ़ा और जैसे ही ड्राइविंग सीट पर दरवाजा खोलकर अंदर बैठा बाजू वाली सीट पर प्रेम आकर बैठ गया। उसी वक्त पीछे के दोनों दरवाजे खुले और आदित्य और विराट भी अंदर आकर बैठ गए। समर उन सब को चौक कर देखने लगा…-” आप सब अचानक एक साथ यहां कैसे?”

“भाई दुल्हन लेने जा रहे हो तो बाराती तो साथ चलेंगे ना।

प्रेम की बात पर समर एक बार फिर चौन्क कर प्रेम को देखने लगा। प्रेम भी उसे देखते हुए हंस दिया….-” अरे पहली बार जा रहे हो बात करने उनके घर, अकेले जाना शोभा देता है क्या? हम सब तुम्हारे भाई बनकर मिलेंगे उनसे, और जब बातचीत पक्की हो जाएगी तब काका और काकी से मिलवा देना।”

प्रेम की बात पर हामी भरते हुए आदित्य और विराट भी हंसने लगे।
“समर गाड़ी तुम चलाओगे या मैं चला लूं? वैसे दूल्हा खुद ड्राइव करता हुआ जाए ये अच्छा नहीं लगता। तुम पीछे आ जाओ मैं ड्राइविंग सीट पर आता हूं ।”
समर में एक नजर आदित्य को देखा और वापस गाड़ी गियर में डाल दी।
“मैं देख रहा हूं जैसे ही किसी की कोई नाजुक रग दूसरों को पता चलती है सब बड़े मजे लेने लगते हैं।’

“हम सब तो मजे लेंगे ही, तुम हो ही ऐसे कमाल के। पूरी दुनिया को सुधारने चले हो और अपनी जिंदगी का कबाड़ कर रखा है। अरे जब अच्छी-खासी लड़की मिली हुई है ,तो उससे शादी करने की जगह उसे प्रपोज करने की जगह तुम दून जाकर में कोर्ट केस में जिरह कर रहे हो।”

“वह भी तो जरूरी था दोस्त।”

समर की बात पर आदित्य ने हंसकर ठप्पा लगा दिया ….-“और यह भी बहुत जरूरी है।”

हंसते मुस्कुराते चारों लड़के पिया के घर पहुंच गए।
पिया के घर के सामने समर ने जैसे ही गाड़ी रोकी प्रेम तिरछी नजरों से समर को देखने लगा …-“अच्छा तो तुम्हें घर भी पता है।”

“अरे यार अब इसमें कौन सी बड़ी बात हो गई, घर तो पता होगा ही।”

समर की बात सुन पीछे बैठा आदित्य भी दिल खोल कर हंसते हुए बोलने लगा…-” और क्या प्रेम भैया आप तो ऐसे पूछ रहे हैं? अब इतनी बार आना जाना हुआ होगा तो समर सा को घर तो याद होगा ही।”

समर ने एक नजर मुड़ कर आदित्य को देखा और गाड़ी से उतरकर मेन गेट की तरफ बढ़ गया। मेन गेट पर बैठे गार्ड से समर ने ऊपर पिया के फ्लैट में जाने के लिए बताया तो गार्ड ने उल्टा उन्हें अचंभित कर दिया…..-” नहीं साहब ! प्रिया मेम साहब के घर पर तो इस वक्त कोई नहीं है सब लोग शादी भवन गए है।”

“शादी भवन ! लेकिन वहां क्यों गए हैं?”

“आज पिया मैडम की सगाई है ना।”

गार्ड से पता ठिकाना पूछ कर वह चारों वापस गाड़ी में जा बैठे! आदित्य एक बार फिर समर को छेड़ने लगा……-” शादी भवन गए हैं, सुनकर तो मुझे लगा पिया सगाई छोड़ कर सीधे शादी करने को ही तैयार हो गई है। वैसे भी समर बाबू ने जितने झटके दिए हैं, उस हिसाब से अगर मैं पिया की जगह होता तो आज सुबह ही शादी कर चुका होता । वह तो बेचारी अब तक बैठी राह देख रही होगी।”

विराट भी आदित्य के साथ जुगलबंदी में लग गया….-” ठीक कह रहे हो आदित्य! मुझे भी यही लगा कि कहीं पिया की शादी तो नहीं हो रही । फिर जब गार्ड ने कहा सगाई है, तब मेरी सांस में सांस आई। और मैंने देखा समर ने भी बहुत चैन की सांस ली।”

“मैं देख रहा हूं आजकल तुम दोनों की कुछ ज्यादा ही नजर है मुझ पर।”

एक तो पिया की हरकतों से समर वैसे ही नाराज था। दूसरा आदित्य और विराट उसका इतनी देर से मजाक उड़ा रहे थे। उसका गुस्सा और बढ़ता जा रहा था कि तभी समर की बात पर प्रेम चहक उठा।

“उन दोनों की ही नहीं मेरी भी नजर है तुम पर।”

प्रेम के ऐसा बोलते हैं आदित्य और विराट जोर से हंस पड़े….

“ज्यादा हंसिए मत आदित्य बाबू अब इसके बाद आपकी ही पारी है।”

विराट की बात पर समर ने भी हामी भर दी और आदित्य खिड़की से बाहर देखने लगा! उसी वक्त प्रेम के फोन पर घंटी बजने लगी प्रेम ने फोन उठाया फोन निरमा का था।

“सुनिए कहां है इस वक्त आप ?”

“मैं जरा काम से बाहर था बोलो क्या हो गया ?”

“आते वक्त याद से मीठी के स्कूल के क्राफ्ट के लिए क्राफ्ट का सामान लेते आइएगा। भूलिएगा मत। कल भी आप निकले थे, तब भी आपको मैसेज किया था और आप भूल भाल कर घर वापस आ गए थे।”

“सॉरी बाबा नहीं भूलूंगा।”

“बस कहते तो ऐसा है जैसे एक मेरे और मीठी के अलावा दुनिया में आपको कुछ याद नहीं, और हम ही दोनों की सारी चीजें आप भूल जाते हैं। अभी के अभी लिखकर रख लीजिए कि नहीं भूलना है, वरना अगर आज बिना भूले वापस आए ना तो।”

“तो क्या खाना नहीं दोगी?”

“खाना तो दूंगी, लेकिन अकेले सोना पड़ेगा।”

प्रेम के गले में कुछ अटक गया और उसे हल्की सी खांसी आ गई….” चलो रखता हूं अभी आसपास लोग हैं।”

प्रेम के फोन रखते ही एक जोर का ठहाका गाड़ी में गूंज उठा और चारों लड़के मंगल भवन की तरफ आगे बढ़े चलें।

   मंगल भवन बाहर से बहुत खूबसूरती से सजा था। गेंदे और गुलाब की मालाओं से सजा हुआ था , जिनमें बीच बीच में रोशनी की झालर लगी थीं।
इतनी खूबसूरती से पूरा परिसर बाहर से सजा सँवरा दिख रहा था की एक पल को समर को लगा कि यहां आकर कोई गलती तो नहीं हो गई ।उसने प्रेम की तरफ देखा प्रेम ने उसे कंधे थपथपा कर इशारा किया और खुद आगे बढ़ गया समर ने बड़ी हिम्मत करके कदम आगे बढ़ाया।
    मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ बड़े-बड़े कलसो में पानी भर कर रखा था जिनमें गुलाब की पंखुड़ियां तैर रही थी। सामने फूलों से सुस्वागतम लिखा हुआ था। और एक बड़ी सी फूलों की रंगोली बनी थी। एक तरफ बड़े से पानी के कलसे मैं खूब सारी खुशबूदार मोमबत्तियां जल रही थी। सब कुछ बहुत सुहावना लग रहा था। लेकिन मन ही मन समर को अजीब सा डर लग रहा था कहीं इतनी सारी तैयारियां के कारण इतने सारे लोगों के बीच पिया ने उसका साथ देने से मना कर दिया तो?
इतने सारे लोगों के बीच पहले से तय सगाई को तोड़ने की हिम्मत पिया कैसे कर पाएगी? यह कोई फिल्म तो है नहीं कि हीरो मौके पर पहुंचा और हीरोइन ने अपनी सगाई तोड़ दी, और हीरो के साथ चली गई!
ऐसा सिर्फ फिल्मों में कल्पनाओं में और कहानियों में होता है वास्तविक जिंदगी ऐसी तो नहीं होती ना।

यही सब सोचकर वह दरवाजे से ही वापस जाने लगा कि प्रेम ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया…-” क्या हुआ समर अब भी किसी सोच विचार में हो?”

“मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं सही कर रहा हूं या गलत।”

“क्यों इसमें क्या सोचने वाली बात है?”

“सोचने वाली बात यह है कि आज तक ना मैंने, ना पिया ने एक दूसरे से प्यार का इजहार किया। और मैं आज अचानक यहां उसकी सगाई में चला आया। अब अगर मैं उससे यह कहूं भी कि पिया मैं तुमसे प्यार करता हूं तुमसे शादी करना चाहता हूं। तो वह उस लड़के को इनकार करके आखिर क्यों मेरी बात मानेगी? और चलो एक बार को पिया मुझे स्वीकार भी कर ले, तब भी इस सब में उस लड़के का क्या कसूर? अगर मैं सही समय पर पिया से अपने मन की बातें नहीं कर पाया , और पिया ने जल्दबाजी में उस लड़के से शादी के लिए हां कह दी तो इस सब में वह बेचारा तो बुरी तरह से फंस गया? अब वह और उसका परिवार यहां इतने तामझाम के साथ सगाई करने आए हैं .. ऐसे में अगर पिया उस लड़के को ठुकरा देती है तो वह बेचारा क्या करेगा कहां जाएगा?

“और तुम! तुम्हारा क्या होगा ? तुम अपने बारे में भी तो सोचो ना।” आदित्य ने समर से ही उल्टा सवाल कर दिया

“मेरा क्या है दोस्त !मैंने तो आज तक कभी शादी के लिए सोचा ही नहीं था। ऐसा तो है नहीं कि मेरे जीवन में कभी लड़कियां थी नहीं। पर मैं शादी ब्याह कर जिम्मेदारी से भरी जिंदगी जीने वाला लड़का हूँ ही नहीं।  मेरे लिए यह सगाई शादी यह सारे चोंचले नहीं बने।

“ऐसा तुम्हें लगता है, समर पर ऐसा है नहीं। शादी सिर्फ जिम्मेदारियों को उठाना नहीं होता। अगर तुम सामने वाली की जिम्मेदारी उठा रहे हो, तो वह लड़की भी तो तुम्हारी जिम्मेदारी बराबरी से उठाती है। यह क्यों भूल जाते हो। शादीशुदा जिंदगी हर हाल में एक कुंवारे की जिंदगी से कहीं बेहतर है। एक बार जी कर तो देखो अपनी जिम्मेदारियों से मत डरो। अगर आज तुम पिया से बिना मिले यहां से निकल गए तो याद रखना जिंदगी भर पछताओगे।
   अगर तुम ने सच में कभी भी उससे प्यार किया है तो एक बार जाकर उसे बता दो। फिर जो होगा उसे अपना नसीब मान लेना। “

   प्रेम की बात मान कर समर एक बार फिर अंदर की ओर बढ़ चला, उसके पीछे ही वो तीनों भी बढ़ गए। लेकिन दरवाजे पर पहुंचकर उसकी हिम्मत फिर चूकने लगी वह वापस मुड़ा ही था कि प्रेम ने उसे पकड़ लिया …-” इतना घबराओ मत समर। अपने जीवन के समर में तुमने अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। फिर अपने प्रेम के समर में पीछे क्यों हट रहे हो?

  समर कोई जवाब देता है इसके पहले ही दरवाजे से उसे किसी ने आवाज लगा दी….
“आइए आइए ! आप सभी तक चले आइए आप लोगों का स्वागत है।”

पिया के माता-पिता अभ्यागतों के स्वागत के लिए दरवाजे पर ही खड़े थे। उन लोगों ने उन चारों को आते देख कर रोक लिया और अंदर बुला लिया। अब समर के पास अंदर जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। वह चारों जैसे ही अंदर की तरफ प्रवेश करने लगे, पिया की मासी और उनकी बेटी ने उन लोगों के ऊपर गुलाब जल छिड़क कर चारों के माथे पर कुमकुम का तिलक लगा दिया।
    “यहां कुछ ज्यादा ही स्वागत नहीं हो रहा है?” विराट ने धीरे से आदित्य के कान में कहा जिसे समर और प्रेम ने भी सुन लिया कि तभी पिया की मां हाथ में थाली लिए चली आई और समर की आरती उतारने लगी। समर ऐसा होते देख हड़बड़ा कर एक कदम पीछे हट गया।

“अरे घबराइये मत बेटा हमारे यहां ऐसे ही आगंतुकों का स्वागत किया जाता है। आइये अब आप चारों अंदर पधारे।”

अंदर की रौनक देखते ही बन रही थी। समर ने आज तक पिया के रहन सहन की तरफ ध्यान नही दिया था, उसे हमेशा उसकी सादी कुर्तियों और जीन्स के पहनावे को देख यही लगता था कि वो एक मध्यमवर्गीय परिवार की सीधी सी लड़की है। इतना तामझाम और चकाचौंध देख उसे अपने महल के कार्यक्रमों की याद आ गयी। तभी उसकी नज़र सामने से आते युवराज पर पड़ गयी….-” युवराज सा आप यहाँ ?”

“हाँ क्यों ? हम नही आ सकते यहाँ। “

युवराज के सवाल पर समर खिसिया गया तभी रूपा भी चली आयी…-” हम तो पूछने वाले थे आप यहाँ कैसे? “

समर रूपा की बात का क्या जवाब देता? क्योंकि उसके मन में खुद यही उथल पुथल थी कि युवराज और रूपा को पिया भला कैसे जानती है?

वो अभी क्या कहूँ सोच रहा था कि रूपा ने जैसे उसके मन की बात ताड़ ली…-“आप शायद यह सोच रहे की हम लोग यहाँ कैसे? “

” हाँ बिल्कुल मैं यही…” अपने उतावलेपन पर समर एकाएक बोलते बोलते रुक गया… उसकी ये हालत देख रुपा को हंसी आ गयी…- पिया आपकी माँ यानी काकी सा की जांच और इलाज के लिए महल आती थी न तभी उससे हमारी जान पहचान हुई थी। इसलिए उसने अपनी सगाई में हमें बुलाया। और हम ही क्या काकी सा भी आयीं हैं।”

समर पर एक के बाद एक बम फूट रहे थे। उसके लिए ये बहुत आश्चर्य की बात थी कि उसकी माँ जो महल के अलावा बाहरी किसी कार्यक्रम में कभी शामिल नही होती वो भी पिया के बुलावे पर यहाँ चली आयीं हैं।
वो इधर उधर अपनी माँ को ढूंढ रहा था कि प्रेम ने उसे एक तरफ इशारा कर दिखा दिया। उसकी माँ आराम से सोफे पर बैठी किसी औरत के साथ बातचीत में लगी थीं।
समर को पिया के ऊपर एक बार फिर गुस्सा आने लगा…-” हद करती है ये लड़की। एक तो किसी और से सगाई कर रही उस पर मेरे सारे खानदान को बुला रखा है। और अब जाने कहाँ छिपी बैठी है। ये भी नही हो रहा कि बाहर आ जाये। “

वो इधर उधर पिया को ढूंढ रहा था कि उसकी नज़र अपनी माँ से मिली उन्होंने भी उसे उसी वक्त देखा और हाथ के इशारे से अपने पास बुला लिया।

वो भारी कदमों से उन तक पहुंच गया… – ” ये मेरा बेटा है समर! समर इनके पैर छुओ बेटा ये पिया की दादी हैं। “
समर आश्चर्य से उन्हें देख उनके पैरों में झुक गया। उन्होंने भी उसे आशीर्वाद देने के बाद हाथों से ही उसकी बलैय्या ले लीं..-” बहुत सुंदर है आपका बेटा !”
समर को ऐसे अपनी तारीफ सुनना बड़ा अजीब लग रहा था, वो वहाँ से खिसकने के बहाने सोचने लगा…-” पापा साहेब भी आये हैं क्या?”
“हाँ फिर !हम अकेले किसके साथ आते?”

समर का जी कर रहा था चीख चीख कर पूछे जब कहीं और नही जाती तो यहाँ अपने बेटे का तमाशा देखने का ही क्या शौक चढ़ा था? लेकिन वो बिना कुछ बोले एक तरफ को जाने लगा कि उसकी माँ ने उसे हाथ पकड़ कर रोक लिया और एक तरफ इशारा कर कुछ दिखाने लगी….- ” वो देख! ऑर्केस्ट्रा आया है, जा न तू भी कुछ गा ले।।”

समर को अब अपनी माँ के बचपने पर गुस्सा आने लगा था। जिसे देखो वही खुश नजर आ रहा था लेकिन जिसके लिए ये सारा तामझाम था वही कहीं नजर नही आ रही थी।
उसे ढूंढता समर आगे बढ़ रहा था कि सामने से आती एक दुबली सी लड़की उससे टकराते बची…-” ओह्ह सॉरी जीजू!” लेकिन दूसरे ही पल समर को देख वो जीभ काट कर रह गयी..
” जीजू?” समर के ऐसा बोलते ही उस लड़की ने एक किनारे बने स्टेज की तरफ इशारा कर दिया। वहाँ दो चार लड़के खड़े थे।
समर को उस लड़की का इशारा समझ में नही आया। उसकी आँखों में सवाल देख वो लडकी जल्दी जल्दी बोलने लगी…-“मैं पिया दी कि मासी की बेटी हूँ। अभी हड़बड़ी में मुझे लगा मैं मेरे जीजू से टकरा गई , यानी उनसे । फिर चेहरा देखने पर समझ आया कि आप तो कोई और है।”

समर को समझ आ गया कि यह पिया की छोटी बहन है और यह ही इस वक्त पिया का पता बता सकती है। वह जाने लगी तो उसे आवाज देकर समर ने रोक लिया…-” सुनो एक मिनट! क्या तुम मुझे बता सकती हो कि पिया इस वक्त कहां मिलेगी?”

उस लड़की ने भौंहे चढ़ाकर समर को देखा..-” आप उनसे मिलना चाहते हैं?”

“हां! कुछ बहुत जरूरी काम है!”

“ओके! यह पीछे वाली सीढ़ियां चढ़कर ऊपर चले जाइए। पहला ही कमरा पिया दीदी का है। वह अपने रूम में सगाई के लिए तैयार हो रही है।”

आगे बिना कुछ सुने समर सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया। अपने बालों पर हाथ फिराते हुए यही सोच रहा था कि पिछले 1 घंटे से तो वो इस हॉल में इधर से उधर भटक रहा है। जाने और कितना पिया तैयार होने वाली है? ऊपर पहुंच कर उसने पहले वाले कमरे के दरवाजे पर लगी बेल बजा दी…

” एक मिनट रुको अभी आई।”


अंदर से पिया की आवाज आई और कुछ देर में ही दरवाजा खुल गया। पिया ने समर को देखा, समर ने पिया को और दोनों कुछ देर के लिए एक दूसरे को देखते रह गए। पिया की आंखों में आंसू झिलमिलाने लगे…-” अब क्या यही खड़े रखोगी। अंदर भी नहीं आ सकता मैं?”

पिया एक एक तरफ हो कर खड़ी हो गई। समर अंदर चला आया, पिया ने दरवाजा बंद किया, और समर से आगे बढ़ गयी।
” पिया बिना मुझसे कुछ बोले तुमने ऐसे कैसे सगाई के लिए हां कर दी?”

बिना किसी भूमिका के समर सीधे मुद्दे पर चला आया….

“तुमसे क्या पूछना और क्या बोलना था समर?'”

“तुम्हें सच में इस बात की जरूरत नहीं लगी, कि एक बार मुझे बता दो कि तुम सगाई करने जा रही हो!”

“मुझसे यह सवाल पूछने से पहले अपना फोन चेक करके देखो।”

“उस वक्त व्यस्त था मैं। फोन नहीं उठा पाया। फोन चार्ज भी नहीं कर पाया ,और मेरा फोन बंद हो गया था। लेकिन तुम एक मैसेज तो डाल ही सकती थी मुझे।”

“क्या फर्क पड़ जाता समर, क्या तुम अपना काम छोड़कर मेरे लिए आ जाते?”

“नहीं आता! लेकिन तुमसे मेरा इंतजार करने तो कह देता।”

“देखा !! अभी भी तुम्हारी अकड़ कम नहीं हुई ना। अभी भी मुझसे ज्यादा तुम्हें तुम्हारे काम से प्यार है।”

समर मुस्कुराने लगा। उसने आगे बढ़कर पिया को पकड़ लिया…-” मतलब मानती हो ना कि मुझे तुमसे प्यार है!”

समर की बात सुन पिया गुस्से में दूसरी तरफ मुंह फेर कर खड़ी हो गई।

“अब यह नाराजगी कैसी ? मैं जानता हूं ,तुम मुझसे प्यार करती हो।”

“पर मैं नहीं जानती कि तुम मुझसे प्यार करते हो या नहीं?”

“करता हूं यार बहुत प्यार करता हूं । लेकिन हर बात बताने की तो नहीं होती ना। लेकिन तुमने हड़बड़ी में आकर यह जो निर्णय ले लिया क्या यह तुम्हें सही लग रहा है।”

“अब मैं सही हूं या गलत लेकिन यही मेरी किस्मत है।”

“मैं जानता हूं तुम जिद्दी हो! अपनी बात से पीछे नहीं हटोगी । लेकिन बस यह कहना चाहता हूं कि एक बार सोच लो जिंदगी बहुत खूबसूरत हो जाती है, अगर वह उसके साथ गुजरे जिसे आपने सबसे ज्यादा प्यार किया हो।”

“किस ने सिखा कर भेजा यह सब मंत्री जी! क्योंकि आप तो बही-खाते हिसाब वकालत इनसे ज्यादा कुछ बोल ही नहीं पाते।”

“जब अपने प्यार को अपने अलावा किसी और का जीवन साथी बनते देख रहा हूं तो सब कुछ बोलना आ ही गया। बस एक मौका दे दो पिया मुझे। मैं तुम्हें कभी निराश नहीं करूंगा । तुम्हारी जिंदगी के सुख-दुख, हर मोड़ पर, हर ऊंचाई और हर गहराई पर तुम्हारे साथ रहूंगा। बोलो पिया मेरी जीवन साथी बनोगी?’

समर ने पिया की तरफ हाथ बढ़ा दिया, पिया ने धीरे से उसके हाथ में हाथ रख कर कहा…-” लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है मंत्री जी। अब कुछ नही हो सकता।”

“तुम हां तो कहो मैं सब सही कर लूंगा।”

पिया कुछ कह पाती उसके पहले ही दरवाजे पर किसी ने दस्तक देनी शुरू कर दी। पिया घबराकर दरवाजा खोलने जा ही रही थी कि, समर ने पीछे से पकड़ कर उसे अपनी बाहों में ले लिया। उसके कानों के पास जाकर एक बार फिर गुनगुनाना गया…-” सोच लो पिया किसी और की बाहों में मुझे याद करती रहोगी उससे बेहतर है कि मेरी बाहों में जिंदगी भुला दो।”



“अब तुम पागल हो रहे हो छोड़ो मुझे।” समर की बाहों से खुद को छुड़ा कर पिया ने दरवाजा खोल दिया। सामने उसकी मौसेरी बहन और बाकी सहेलियां खड़ी थी सब उसे लेने आई थी। चहचाहती हुई सारी की सारी पिया का हाथ थामे उसे बाहर ले गईं।
समर उस कमरे में अकेला रह गया। कुछ देर वहीं बैठने के बाद वह फिर तेज कदमों से कमरे से निकलकर सीढ़ियां उतरता नीचे हॉल में पहुंच गया….
आखिरी सीढ़ी पर उसका कदम जैसे ही पड़ा सारे हॉल की बत्तियां बुझ गयीं। और वो एकदम से चौक कर इधर-उधर देखने लगा कि, यह हुआ क्या ? तभी एक गोल रोशनी का घेरा सिर्फ उसके ऊपर पड़ने लगा। उसे कुछ समझ में आता तभी एक दूसरा गोल रोशनी का घेरा हॉल के दूसरी तरफ खड़ी पिया के ऊपर उसी तरह पड़ने लगा।
उसने पिया को देखा वो मुस्कुरा कर उसी की तरफ देख रही थी।
पिया धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी, उसे अपनी तरफ आते देख समर भी उसकी तरफ बढ़ने लगा।
दोनों के एक दूसरे के सामने आते ही एक गुलाब की पंखड़ियों से सजी प्लेट उनके सामने किसी ने कर दी। उसमें दो अंगूठियां रखी थीं ।
पिया ने मुस्कुरा कर एक अंगूठी उठा ली और बड़ी हसरत से समर की ओर देखने लगी। समर उसे देख रहा था कि समर के कानों में उसकी माँ की आवाज़ पड़ी..-“अब तुम भी उठा लो अंगूठी। और पहना दो हमारी होने वाली बहु को।”
समर ने चौन्क कर देखा, उसके ठीक बाजू में उसकी माँ खड़ी थीं।
समर ने अंगूठी पिया की उंगली में पहनाई और पिया ने समर की उंगली में।
तालियों के शोर के साथ ही कमरे में रौशनी की चकाचौंध फैल गयी…
दोनों के ऊपर ढेर सारे गुलाबों की पंखुड़ियां बरसने लगी। पिया ने आगे बढ़ कर समर के माता पिता के पैर छुए तब कहीं जाकर समर को होश आया कि यहाँ क्या हो रहा है।
उसने भी अपने माता पिता के साथ ही बाकियों का आशीर्वाद लिया और युवराज सा के पैर छूने के बाद प्रेम की ओर बढ़ गया। प्रेम के पैर छूने वो जैसे ही पिया के साथ झुकने को हुआ कि प्रेम ने उसे उठा कर सीने से लगा लिया…- ” पैरों में नही तुम्हारी जगह यहाँ हैं।”

” तो तुम सब कुछ जानते थे न प्रेम ?”

समर के सवाल पर प्रेम ही नही बाकी लोग भी मुस्कुरा उठे, की प्रेम के पीछे से राजा अजातशत्रु भी आगे निकल आये…-“हुकुम आप यहाँ? “

” क्या करें? तुम्हारी भाभी सा का हुक्म था कि समर की सगाई का सारा ड्रामा उन्हें लाइव देखना है। तो बस यहाँ खड़े खड़े उन्हें सब कुछ लाइव दिखा रहे थे। “

समर मुस्कुराने लगा …-” अब तो कोई बता दो की ये सारा माजरा क्या है? और अब उस लड़के का क्या होगा जिससे पिया की सगाई…”

समर की बात आधे में ही काट कर पिया ने उसकी बाहें थामते हुए उसका चेहरा स्टेज की तरफ घुमा दिया…- ” जिनसे मेरी सगाई होने वाली थी, उन्हें कल रात मैंने सारी बातें कह सुनाई। वो हमारे रास्ते से हटने को तैयार थे कि मौसी जी ने अपनी बेटी की शादी का प्रस्ताव उनके जीजा और जीजी के सामने रख दिया। वहीं तुरन्त दोनों का मिलना और बातचीत हुई और दोनो ने ही एक दूसरे को पसन्द कर लिया।
अब स्टेज पर उन्हीं दोनो की सगाई है। “

समर ने देखा स्टेज पर वही लड़कीं थी जो कुछ देर पहले उससे टकरा कर उसे सॉरी जीजू बोल गयी थी।
सारी बातें समझ में आते ही समर ने पास खड़ी पिया को देखा और धीरे से उसे अपनी बाहों के घेरे में समेट लिया…

क्रमशः

दिल से …

क्या करूँ भाग इतना लंबा हो रहा था कि इसे अंतिम भाग नही लिख पायी। एक और भाग लिखवाना चाहतें हैं अजातशत्रु जी।
तो इंतज़ार रहेगा आपको भी और मुझे भी अगले भाग का।
जल्दी ही मिलतें हैं…!!

aparna …







  



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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

59 विचार “जीवनसाथी- 118” पर

  1. शानदार पार्ट डाक्टर साहिबा
    पर अब आने वाला पार्ट लास्ट होगा ये पढ़कर मन के अंदर कुछ टूट सा गया । राजा और बांसुरी मेरे जीवन के अभिन्न अंग बन गए है पता नहीं उनसे मिले बिना समय कैसे कटेगा।

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  2. बहुत शानदार सरप्राईज मिला समर बाबू को। ज़रूर यह प्लानिंग बांसुरी से करवाई होगी। चलिए कुछ तो बना उनका। अब केसर और आदित्य की जोड़ी भी बन जाए तो राजमहल में भी फिर से खुशियों की जगमगाहट हो।

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  3. बहुत ही रोचक रहा आज का भाग , पूरा भाग समर और पिया के ऊपर केंद्रित था। अपनी चालो से विरोधियों के छक्के छुड़ाने वाले समर के आज प्यार के मैदान में पसीने छूट गए। अंत तक उसे पता ही नहीं चलने दिया पिया और समर के परिवार ने की पिया की सगाई उसी से होने वाली है। आखिकार पिया और समर एक हो ही गए सच ही कहा बांसुरी ने की अगर हम जिसे चाहते है वही हमारा जीवनसाथी बन कर जिंदगी के सफर में हमसफर बन जाये तो जिंदगी का मुश्किलों भर सफर आसान हो जाता है।
    दिल को ये जानकर बहुत तसल्ली हुई कि ये अंतिम भाग नही था पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त…..

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