शादी.कॉम-14

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       फेरे पड़ गये,,भान्वर हो गई….वर वधु ने पण्डित जी का आशीर्वाद लिया और अपने गृहस्थ जीवन के शुरुवाती सोपान पर कदम रख दिया।।

     ब्याह निपटने के बाद मन्दिर से नीचे उतर के सभी विमर्श में जुटे कि अब आगे क्या किया जाये।।
  लड़कों का कहना था कि लल्लन के घर जाया जाये,परन्तु अब तक अँग्रेजो के खिलाफ लड़ने वाले क्रान्तिकारियों सी धमक दिखाने वाला लल्लन अब एकदम ही सहमी भीगी बिल्ली बना बैठा था,अब रह रह के उसको गुस्से में चीखते हाँफते अपने बाऊजी और रोती मिमियाती अपनी माँ का करुण चेहरा दिख रहा था,उसकी घर जाने की बिल्कुल हिम्मत नही हो रही थी,उसने प्रस्ताव रखा __

” हम सोच रहे लखनऊ निकल जाते हैं,दो दिन बाद वैसे भी हमारी जॉईनिन्ग है,अम्मा को कह देंगे प्रिंस के साथ कमरा खोजने और बाकी काम निपटाने आये हैं,और अब जॉईनिंग के बाद ही वापस आयेंगे।”

” और बाद में का कहोगे लल्लन?”

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” बाद में कह देंगे काम बहुते जादा है अम्मा,कुछ समय बाद ही घर आ पाएँगे।।”

” कानपुर लखनऊ में दूरी ही कित्ता है,जैसे मथुरा की लड़की वृंदावन ब्याही,बस वैसा ही।।।तुम नही गये तो तुम्हारी अम्मा आ जायेगी तो,तब का करोगे??”

प्रिंस के इस विचारणीय प्रश्न पर सभी सोच में पड़ गये।।

” हमें तो लगता है,लल्लन और रेखा तुम लोग पहले जाओ राजा के घर ,वहाँ सब का आशीर्वाद लो और वहाँ से युवराज भैय्या को साथ लेकर लल्लन के घर जाना,,बड़े भैय्या को सभी मानते हैं,वो जायेंगे तो लल्लन के घर भी कोई परेशानी नही होगी,क्यों ठीक बोले ना राजा।।”

बांसुरी के इस आइडिया पर राजा ने भी हामी भर दी

” ई पनौती फिर बोली,,ई जब जब अपना आइडिया देती है तब तब कोनो का बंटाधार होता है,लिखवा लो हमसे प्रिंस।” प्रेम फुसफुसाया

” अबकी ना होगा,,सही बोल रई बांसुरी!! लल्लन राजा भईया के साथ निकल लो गुरू,अब जादा सोच बिचार में ना पड़ो ।।”

बहुत सारी हिम्मत जुटा के लल्लन रेखा के साथ राजा के घर को निकला,राजा ने बांसुरी को भी साथ ले लिया,प्रिंस और प्रेम पीछे अपनी फटफटी फटफटाते चले आये।।

घर पे पहले ही रूपा के बाऊजी पधारे हुए थे,उनकी अगुआनी में रूपा ऊपर नीचे हो रही थी,तभी दरवाजा खोल के राजा अन्दर आया,आते ही दुबारा उसने भाभी के पिता को चरण स्पर्श किया,और एक कोने में खड़ा हो गया।।

” काहे लल्ला जी,रेखा कहाँ रह गई,आई नई आपके साथ।” रूपा की बात खत्म होते होते बन्सी भी अन्दर आ कर खड़ी हो गई

” अरे इसे ही तो सजाने गई रही,ये यहाँ खड़ी है तो रेखा कहाँ है भई ।।”

रूपा की पृश्नवाचक निगाहों को बांसुरी ने दरवाजे की तरफ घुमवा दिया,दरवाजे से बहुत धीमे से रेखा और उसके पीछे लल्लन आकर अन्दर खड़े हो गये।।

   कई सारे टी वी सीरियल और फिल्मों में नायक नायिका के भाग के शादी करने वाले सीन देख चुकी रुपा ने जब रेखा को फूलों की लम्बी वरमाला पहने और माथे पे पीला सिन्दूर लगाये देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।।।आज तक अपनी सास के सामने अपने खानदानी होने और संस्कारी होने की बड़ी बड़ी डीँगे हाँकने वाली रूपा का मुहँ रुआंसा हो गया।।

” रेखा!!!” बस इतना बोल कर अपने सर को पकड़े रूपा धम्म से नीचे गिर पड़ी,हालांकि इस गिरने में बराबर चोट ना लगे इस बात का ध्यान रखा गया, सोफे पर पसरने के बाद रूपा ने आंखे पलट दी,, आसपास के सभी लोग दौड़ पड़े,राजा की दादी जिनका दीवान खाने में एक ओर पर्मानेंट अड्डा था, घबरा कर चीखी__ ” अरे दांत ना जुड़ जई,देखो रे “

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  राजा की अम्मा और शन्नो मौसी पानी की कटोरी लिये दौडे ,जल्दी जल्दी रूपा की तीमारदारी मे लगी, घर की मुहँ लगी नौकरानी अपने राग मे थी __ ” अम्मा जी जूता सूंघा दौ,अब्भी उठ बैठेगी बहुरिया।”

” अरे मुह्नजली!! इन्ने मिर्गी ना आई है जो जूतो सूंघाने बोल रई,चकरा गई है तनिक, अभी पानी का छींटा से ठीक हो जायेगी।”

बेहोश पड़ी रूपा के कानों में जब जूता सून्घाने की बात पड़ी तो वो घबरा के थोड़ा कसमसाई पर दादी की बात कान में पड़ते ही उसे संतोष हुआ कि जूता नही सुन्घाया जायेगा,और वो फिर चित पड़ी रही।

इधर रूपा के पिता का बी पी रेखा के नये नवेले दूल्हे को देख बढ़ ही रहा था कि रूपा अचानक चक्कर खा गई,वो बेचारे जब तक कुछ समझ पाते ,समधन अपनी पायल चूड़ी बजाती दौड़ी चली आई और वो बेचारे रिश्ते के सम्मान के मारे एक किनारे खड़े रह गये,उतनी ही देर में घर के बड़े लड़के युवराज का पदार्पण हुआ।।
    अपने कमरे में आये दिन रूपा की ऐसी नौटंकी से परिचित युवराज ने आगे बढ़ कर रूपा की नब्ज थाम ली __
      ” अरे नब्ज तो बड़ी धीमी हो गई है,राजा वो क्या नाम है तुम्हारी डॉक्टर सहेली का?? हाँ रानी,ज़रा फ़ोन घुमाओ उसे,कहना बड़ा वाला विटामिन का इन्जेक्शन लेती आये,,इन्हें सुई ही लगवानी पड़ेगी।”

राजा को बड़े भैय्या की बात समझ नही आई,वो तुरंत अपनी जीन्स से मोबाइल निकालने लगा, उसका हाथ पकड़ बन्सी ने इशारे से उसे फोन करने से मना कर दिया,अपने पति की सुई वाली बात सुन रूपा को भी होश आने लगा,उसने धीरे से अपनी आंखें खोल दी__” कहाँ हैं हम?” हमेशा फिल्मों में होश मे आने के बाद नायिका द्वारा बोला जाने वाला पहला डायलॉग बोल कर आंखे फाड़ रूपा युवराज को देखने लगी,तभी उसे रेखा और लल्लन याद आ गये,और वो अपने पूरे फेफड़े फाड़ के दम लगा के चिल्ला के रो पड़ी ।।

  पूरे घर मे हाहाकार मच गया,ये ऐसा समय था जब लल्लन को अपने किये पे दिल से अफसोस होने लगा,उसे वहाँ से निकल भागने की राह नही सूझ रही  थी,जो महिला जैसे सुना सकती थी,वैसे सुना रही थी,चाहे राजा की दादी हो या रूपा,यहां तक की शन्नो मौसी को भी मौका मिल गया था,वो भी पानी  पी पीकर आज के नौ जवान छोकरे छोकरियों की विवाह प्रगती पे अपने विचार प्रकट कर रही थी,

” एक हमारा समय था,शकल सूरत तक ना देखी शादी होने तक,और एक आजकल के लड़के लड़कियाँ हैं,हद बद्तमीज़ी है।।”

” ठीके रहा तुम्हरे समय सकल ना देखे बनी ,नही तुम्हे कौन ब्याह  ले जाता सन्नो??” राजा की दादी के कथन पर शन्नो मौसी का पारा और चढ़ गया,सब नाराज थे,पर एक कोई ऐसी भी थी वहाँ जिसके मन में लड्डू फूट रहे थे!!!

   राजा की अम्मा थी जो बार बार रूपा को ना रोने और जो हुआ उससे समझौता करने की सीख दे रही थी,आखिर थक कर वो वहाँ से उठी और चुपके से अन्दर खिसक गई,दस मिनट बाद एक हाथ में पूजा की थाली और दूसरे हाथ में मिठाई का थाल उठाये राजा की अम्मा वापस आयी।।बांसुरी ने आगे बढ़कर उनके हाथ से एक थाल ले लिया।।
   रेखा रूपा के पैरों के पास उसे मनाने मे लगी थी,युवराज और राजा वकील बाबु को समझा रहे थे, दादी और शन्नो मौसी अपने राग दरबारी मे व्यस्त थे, वहीं प्रिंस और प्रेम में से एक दादी का तो एक मौसी का पक्ष ले आग मे घी डालने का काम कर रहे थे, इस पूरे सीन से विलग लल्लन एक किनारे खड़े खड़े अपने घर पे मिलने वाले सत्कार के बारे मे सोच सोच परेशान हुआ जा रहा था,,,उसे आज तक का अपना पूरा जीवन अपने सामने रील सा चलता दिख रहा था, बचपन में माँ को सताना,बाऊजी का मार मार के गिनती पहाड़ा रट्वाना,बड़े भईया की जेब से चुराये पैसों से पहली सिगरेट खरीद कर पीना,हर राखी पे दीदी के लिये कैसे भी कर के गिफ्ट खरीदना,इत्ती सारी खुशनुमा यादों को उसने खुद अपने हाथों कुएं में बहा दिया था,एकाएक उसे अपना निर्णय जल्दबाजी में किया गया फैसला लगने लगा था, पर अब समय उसके हाथ से रेत सा फिसल चुका था,वो अभी अपनी उधेड़बुन मे था कि राजा की अम्मा पूजा की थाली लिये आई ।।
     बाँसुरी ने आगे बढ़ दीवार से लग कर खड़े लल्लन को हाथ पकड़ कर आगे खींच लिया और रेखा के बाजू में बिठा दिया,अम्मा ने आगे बढ कर नवयुगल का तिलक किया और आरती उतारी,मुहँ मीठा करा दिया।।

    गुस्से मे बडबड करती रूपा रोती धोती अपने कमरे में चली गई,,युवराज ने लल्लन को बैठा कर उसके घर परिवार नौकरी चाकरी का हिसाब लेना शुरु किया,पढ़ाई लिखाई बताने के बाद जैसे ही लल्लन ने अपनी ताजा ताजा लगी सरकारी नौकरी का जिक्र किया,वहाँ उपस्थित सभी के चेहरों पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया दिखने लगी,औरतों की खुसफुसाहत कुछ और मुखर हुई,वकील बाबु के चेहरे पर भी सन्तोष की झलक आ ही रही थी कि राजा के बाऊजी भी पिछले दालान से निकल बाहर आये,और आते ही उन्होनें अपना सबसे प्रिय सवाल छेड़ दिया__

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       ” किसके लड़के हो वैसे तुम,हमार मतलब कौन जात हो??”

   ” इरिगेशन में हमारे बाऊजी आफीसर है,बाबुलाल सूर्यवंशी।।”

लल्लन का ये वाक्य वकील बाबू के सीने मे घूंसे के समान लगा,उस समय उन्हें ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी ने हाथ अन्दर डाल उनके फेफडों को जोर से मसल दिया हो,ऐसी प्राणान्तक पीड़ा मिली वो भी समधि के घर जहां ना वो खुल कर बोल पा रहे थे,और ना चिल्ला पा रहे थे।।आज तक वकील बाबू के लिये उनकी वकालत सबसे ऊपर थी,पर अदृश्य और अपरोक्ष रूप से उनकी वकालत के उपर था उनका ‘ ब्राम्हणत्व ‘।
     उन्हें सदा ही लगता आया था कि वो स्वयं ब्रम्हा की संतान हैं,इसीसे और कोई माने ना माने उन्होनें खुद को समाज में सबसे ऊपर स्थापित कर रखा था, उनके अनुसार उनके नीचे आने वाली हर जाति के लिये विभिन्न कार्य बनाये गये थे,और वो बने थे सबसे ऊपर बैठ कर सबके कार्यों का निर्धारण करने के लिये।।
      हालांकि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनकी सोच और उनका स्थान बिल्कुल उलट हो चुका था,पर इसके बावजूद वो तन मन से इस नई व्यवस्था के खिलाफ थे,वो खिलाफ थे अन्तर्जातीय विवाह के।।उन्होनें अपने बच्चों के मन की मिट्टी को  भी सदा से जाति पाति के जटिल खाद और पानी से ही सींचा था,पर जाने कैसे ये कुलबोरनी अपने सारे संस्कार गंगा जी में बहाये आयी।अभी उनके हाथ में दुनाली होती तो ये नये नवेले जोड़े को सीधा परलोक पहुंचा देते पर एक तो समधि का घर दुजा वो मन ही मन युवराज का भी थोड़ा अधिक ही लिहाज करते थे,उनकी नज़र में उनकी जिंदगी भर की असली कमाई उनका दामाद युवराज ही था,लड़के तो शादी के बाद अपनी अपनी घर गिरस्ती में लीन थे,बस यही एक हीरा था जिसकी चमक से उन्होनें अपने तन मन को रोशन कर रखा था।।

   अपनी मर्मांतक पीड़ा को दबाते हुए उन्होनें बड़े कष्ट से युवराज को अपने पास बुलाया और तुरंत घर निकलने की इच्छा जाहिर की।।
      अपने श्वसुर के कट्टर स्वभाव से परिचित युवराज ने उनकी मंशा जानते ही राजा को गाड़ी निकालने का आदेश दिया और बैठ कर उन्हें सरकारी नौकरी के फायदे गिनाने लगा।।पर पल पल बदलते ससुर के चेहरे के रंगों का कुछ असाधारण होना युवराज को खटक रहा था कि वकील बाबू ने अपना सीना अपने हाथों सा पकड़ लिया__” क्या हुआ बाऊजी,कुछ तकलीफ है क्या??”

” हाँ,,कुंवर जी,लग रहा जैसे कोई कलेजा मरोडे दे रहा।।”
    बोलते बोलते ही वकील बाबू दर्द से कुम्हला कर एक ओर को झटक गये।

   युवराज और राजा ने आनन फानन उन्हें उठाया और बाहर गाड़ी में डाल तुरंत अस्पताल को दौड़ चले।। रूपा ने जैसे ही सुना की उसके बाऊजी को अस्पताल ले जाना पड़ा वो और हाथ नचा नचा के रेखा को सुनाने लगी_

  ” और कर लो लब मैरिज,अब पड़ गई कलेजे को ठंडक!! इत्ते में मत रुकना,बाऊजी को मार के ही दम लेना तुम,,कहे दे रहे रेखा ,आज के बाद हमे अपनी सकल ना दिखाना ,समझी।”

बहुत देर से चुप चाप खड़ी रेखा के लिये भी अब सब कुछ असहनीय हो गया,आखिर वो भी बिफर पड़ी

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” अरे शादी ही तो किये हैं,अपनी मर्ज़ी से कर लिये तो इतनी हाय तौबा काहे मचा रहे सब,और सुन लो दीदी बाऊजी भी अच्छे हो जायेंगे,तुम्हे ज्यादा चिंता करने की ज़रूरत नही है।” रेखा वहाँ से लल्लन का हाथ पकड़े बाहर निकली ही थी कि रूपा ने उसे रोक दिया__” कोई ज़रूरत नही तुम्हे अस्पताल जाने की।

” अरे अभी बखत नही है तुम दोनो का बिल्ली बन लड़ने का ,जल्दी अस्पताल चलो!! देखें वहाँ बकील बाबू को हुआ का है,भोले भंडारी रक्षा करे उनकी, समधन को भी खबर करना होगा।।”
  सबके सब बाहर निकले,प्रिंस और प्रेम अपनी बाईक में पहले ही राजा भईया की गाड़ी के पीछे निकल चुके थे,राजा के बाऊजी राजा लोगों के साथ निकल चुके थे,,अब बची थी घर की औरतें,बाँसुरी और लल्लन …..और बाहर खड़ी थी राजा की एस यू वी।।रेखा ने लल्लन को देखा __” हमें चलानी नही आती रेखा,हम बस आज तक वैगनार चलायें हैं,हम रोड पे एस यू वी नही उतार पायेंगे।”

  अभी लल्लन अपनी गाड़ी चलाने की योग्यता बता ही रहा था कि बांसुरी गाड़ी स्टार्ट कर गियर में डाल हॉर्न देने लगी,,

” चला तो लोगी ना,,बोज तो ना दोगी कहीं नाले वाले में ”  रूपा के सवाल पर बांसुरी ने मुस्कुरा कर नही में सर हिला दिया __” राजा सिखाये हैं हमें गाड़ी चलाना,बहुत सेफ ड्राइव करते हैं हम,,आप सब लोग  निश्चिंत होकर बैठिए।।

  सभी को लिये बांसुरी जब तक अस्पताल पहुंची तब तक वकील बाबू को इमरजेन्सी में भर्ती कर लिया गया था,कॉरिडोर में ही युवराज और राजा मिल गये,अभी सब मिल कर विचार विमर्श कर ही रहे थे कि डॉक्टर ने बाहर आकर एक परचा राजा को थमाया,और सारी दवाइयां जल्दी से जल्दी लाने की ताकीद की।।
   राजा के फोन पर रानी भी वहाँ पहुंच चुकी थी, वो भी अन्दर डॉक्टरों की टीम के साथ लगी हुई थी।।
  डॉक्टर और नर्सों की टीम भाग भाग कर अपने काम को अंजाम देने में लगी थी,लगभग दो ढाई घन्टे की मशक्कत के बाद एक सीनियर डॉक्टर बाहर आये __
         ” मरीज के साथ कौन है”  युवराज के आगे बढ़ते ही उन्होनें वकील बाबू के कमजोर हृदय का लेखा जोखा युवराज को थमा दिया

   ” देखिए इन्हें अटैक आया है,अभी तो हमने इमरजेन्सी दवाईयां दे दी हैं,पर आप लोग इनका एन्जियोग्राफ करवा लिजिये,जिससे ब्लॉकेज का परसेंटेज पता चल सके, अभी 4 दिन अस्पताल में ही रहना होगा,उसके बाद आप इन्हे लखनऊ मेडीकल कॉलेज ले जा सकते हैं ।”

इतना सुनते ही रूपा का पूर्वाभ्यासित रोने का कार्यक्रम शुरु हो गया,युवराज के बार बार समझाने पर भी उसने अपने राग तार सप्तक में ही छेड़े हुए थे, तभी वहाँ रानी आई__” अरे भाभी आप इतना परेशान मत होईये।।अभी अंकल ठीक है,आराम है उन्हें ।।लेकिन आगे चलकर कहीं वापस दुबारा अटैक आ गया तो बड़ी मुसीबत होगी इसिलिए डॉक्टर कह रहे कि एन्जियोग्राफी करवा लिजिये,उसमें अगर ज्यादा ब्लॉकेज आता है,तो आप एंजियोप्लास्टी करवा लीजियेगा,उसके बाद अंकल बिल्कुल स्वस्थ और सुरक्षित रहेंगे।।”

” ये सब का कारन ई कलमुही है,ना ये ऐसा भाग भगा के सादी करती ,और ना बाऊजी को हार्ट अटैक आता।”

” ऐसा नही होता भाभी,अंकल को शुरु से ब्लॉकेज रहा होगा,जो आज वेन्स को चोक कर गया और अटैक आ गया,आप बेवजह किसी को ब्लेम ना करें।”

” काहे ना करें,हमार बहिनी है,तुम्हारे पेट में काहे दरद हो रहा,ए लल्ला जी समझाओ अपनी डाक्टर्नी को,जादा चपर चपर ना करे,हम भी सब समझते हैं।।
बड़ी आई हमे समझाने वाली।”

कुछ ही देर में रूपा की माँ और भाई भी दौड़ा चला आया,अपनी माँ को देखते ही रूपा ने फिर एक बार रूदाली रूप धर लिया और आंखे और हाथ नचा नचा के रेखा के सर मत्थे सारा ठीकरा फोड़ दिया।।
  पर रूपा की माँ रूपा सी गंवार ना थी,समय की नज़ाकत को भांपते हुए उसने रूपा को समझा बुझा के शांत  कराया और रेखा के पास जाकर उसे अपने सीने से लगा लिया।।
    दुख की इस घड़ी मे,ऐसी अपार विपदा में जहां पति जीवन मृत्यु के बीच पीन्गे भर रहा था,बेटी का जात से बाहर जाकर शादी करना माताजी को कमतर दुखी कर पाया।।और शायद इसिलिए अपने दुख को दूर करने उन्होनें आगे बढ कर बच्चों को माफ कर दिया।।

  औरत ही औरत की पीड़ा समझती है,राजा की अम्मा ने आगे बढ़ कर समधन को गले से लगा लिया,दोनो औरतें साथ बैठी घंटों टन्सुये बहाती रहीं, अंत में रो धो कर फुर्सत पाई तो पति से मिलने की इच्छा जाहिर की,जिसे उस वक्त डॉक्टरों ने ठुकरा दिया।।

    शाम चार पांच बजे तक में मरीज की हालत स्थिर हुई,और सभी को उनके कक्ष में उनसे मिलने की इजाज़त मिल गई।।

   इतनी देर में राजा ने फ़ोन पे लल्लन के बड़े भाई को सारी जानकारी दे दी थी,राजा के फोन के बाद घर पे सोच विचार कर लल्लन का भाई,उसके बाबूजी और अम्मा भी अस्पताल चले आये।।
    आते ही लल्लन की अम्मा ने राजा की अम्मा से दुआ सलाम की और रेखा की अम्मा से मरीज का हाल पानी जानने लगी,वहीं लल्लन के पिता और भाई भी युवराज और बाकी पुरूषों से बाकी का हाल समाचार लेने लगे।।लल्लन को अपने पिता और भाई का तो उतना डर नही था जितना उसे अपनी अम्मा का डर सता रहा था,उसने आगे बढ़ कर पहले बाऊजी,भैय्या और फिर अम्मा के पैर छू लिये।।
   बाऊजी ने उसके सर पर हाथ फेरा तो लल्लन की आंखों की कोर भीग गई पर अम्मा ने आशीर्वाद की जगह दुसरी ओर मुहँ फेर लिया,और तो किसी को कुछ समझा नही पर कोखजाये ने अपनी जननी का दर्द उसकी पीड़ा समझ ली,पर अब क्या हो सकता था?? चुपचाप उठ कर लल्लन ने इशारे से रेखा को भी पैर छूने को कहा और एक तरफ खड़ा हो गया, रेखा ऐसी बातों को समझ कर भी कई बार नासमझ बन जाती थी,बांसुरी ने रेखा से मुहँ खोल कर कहा

” अपने सास ससुर की चरण धूलि तो ले लो रेखा, बड़ों का आशीर्वाद तुम्हारे भविष्य  को सफल बनाएगा,,चिंता ना करो सब ठीक हो जायेगा।।”

शाम ढलते ढलते सभी के चेहरों से चिंता की लकीरें भी छंट गई,रो के हँस के जैसे भी हो पर लल्लन और रेखा के विवाह को आखिर दोनो परिवारों की सहमती मिल ही गई।।
    वकील बाबू को भी हृदय मे उठी मर्मांतक पीड़ा  में जीवनरक्षक औषधियों ने ऐसा चमत्कार किया कि  अपने कष्ट से मुक्ति पाने के बाद वो यथासम्भव विनम्र होते चले गये,उन्होनें अपने मन की भावनाओं को समेट कर अपने नये जमाता को गले से लगा लिया।।

     वैसे भी मृत्यु के मुख से लौटे इन्सान को अपना जीवन और अधिक मूल्यवान लगने लगता है,वैसा ही कुछ वकील बाबू के साथ हुआ,और उन्होने हृदय से सबकी गलतियों को क्षमा कर दिया ।।

    रात मे अस्पताल में रूपा का भाई रुका,माँ को समझा बुझा कर रूपा अपने साथ ले गई,,शादी ऐसी जल्दी मे हुई परन्तु विदाई बिना परछन कैसे कर दे,ऐसा बोल रेखा को भी उसकी माँ अपने साथ ले गई,इधर लल्लन को उसके दोस्त बिना गाजे बाजे ही बाराती बने,, राजा भैय्या की गाड़ी में हँसी ठिठोली करते बिना दुल्हन ही उसके घर पहुँचा आये।।
    प्रेम प्रिंस और राजा भैय्या के साथ जैसे ही लल्लन अपने घर की चौखट लान्घने जा रहा था कि उसकी अम्मा की आवाज़ ने उसे वहीं रोक दिया, वो जल भरा कलश और आरती की थाल लिये चौखट पे आई,और पानी भरे कलसे को सात बार लल्लन के चारों ओर घुमा कर,बाहर निकल उस पानी को बहा आई__
       ” सादी बिना पूछे कर आये तो अब का हर जगह मनमानी चलेगी तुम्हारी,,अरे हल्दी नई चढ़ी तो का भवा,दूल्हा तो बनी गये,अब नैके दूल्हा का नज़र उतारे बिना,उसकी आरती उतारे बिना अन्दर कैसे ले लें,बोलो।।”

    नज़र उतार ,आरती कर,अम्मा ने लल्लन के मुहँ मे शगुन का गुड़ डाला और उसे अपने आंचल तले ढांप के घर के मन्दिर में ले चली।।
    कुल देवी के आगे प्रणाम कर लल्लन ने अपनी अम्मा के पांव छुए और अम्मा के आंसू लल्लन के चेहरे को भिगोते चले गये__” एक बार पूछने की ज़रूरत भी ना समझी लल्ला,आज तक किस बात के लिये रोका तुझे जो आज रोक लेती।।”

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” गलती हो गई अम्मा!! माफ कर दे।।” लल्लन अपनी अम्मा के गले से लगा रो पड़ा,,माँ बेटे के इस पावन मिलन के बीच घर के किसी सदस्य ने आने की जुर्रत नही की,राजा इसी बीच जाकर अपनी गाड़ी में बैठा प्रिंस और प्रेम का रास्ता देख रहा था,कि  बांसुरी का मेसेज आ गया ” वहाँ लल्लन के घर पे सब ठीक है ना??” जवाब में राजा ने भी लिख दिया _” हाँ सब ठीक!!”

  ” क्या भाई,चाय पीकर ही टरोगे तुम दोनो??” लल्लन की दीदी के सवाल पर प्रिंस हड़बड़ा गया

” नहीं दीदी!! बस जाते हैं हम दोनो।।” दोनो बाहर को भागे,देखा राजा भैय्या ड्राइविंग सीट पर अपना मोबाइल पकड़े मुस्कुरा रहें हैं ।।

” का बात है भैय्या जी,बड़ा मुस्कुरा रहे हैं,किसका मेसेज आ गया ??”

” अबे किसी का नही बे!! जल्दी चलो ,,घर जाये कुछु खाये पिये,,आज तो लल्लन की शादी के चक्कर में पानी तक नसीब नही हुआ,फिर भाभी के बाऊजी की तबीयत बिगड़ गई,,अब तो पेट मे चूहे रेस लगा रहे हैं,अम्म्मा जाते जाते इशारा कर गई थी कि आज हमारी पसंद की प्याज की कचौड़ी बना रही हैं,तो चलो जल्दी से चले और खाये पियें।”

” चलिये भैय्या जी फिर भगा लिजिये गाड़ी,किसका इन्तजार है।।”

तीनों साथ बैठे राजा के घर को निकल चले।।

क्रमशः

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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

3 विचार “शादी.कॉम-14” पर

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