शादी.कॉम -15

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  “ शाही जोड़ा पहन के आई जो बन ठन के वही तो     
मेरी स्वीटहार्ट है,  शरमाई सी बगल में जो बैठी है दुल्हन के….”

   जिम में  मस्ती के मूड़ में गाना बज रहा था,सभी अपने अपने क्रिया-कलापों में व्यस्त थे,राजा कभी किसी को कुछ बताता,कभी किसी को।।कभी किसी की स्पीड सही करता,कभी किसी के वेट सही करता इधर से उधर चक्कर लगा रहा था,साथ ही घड़ी पर भी नज़र डाल लेता,,आज 9.30 हो चुके थे पर समय की पाबंद बांसुरी अब तक जिम नही पहुंची थी।।
     ऐसा तो वो कभी नही करती थी,इन चार पांच महिनों में राजा इतना तो बन्सी को जान ही गया था, अगर कभी उसे ना आना हो,या कोई काम हो तो वो बाकायदे राजा को मेसेज कर के बता देती थी, पर आज बिना कुछ बोले बताये ही गायब थी।।

   एक एक कर पूरे दो घन्टे बीत गये,पर बांसुरी नही आई।।अब राजा सोच मे पड़ गया,कुछ तो बात है।।

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    वो पूरा दिन सिर्फ सोचने सोचने में ही बीत गया।
जब कभी दोस्ती प्यार में बदल जाती है तब दिल तो मजबूर होता है पर दिमाग कुछ अधिक कार्य करने लगता है,दिमाग का ध्यान सारा समय इसी बात पे रहता है कि दिल की कमजोरी किसी के पकड़ मे ना आ जाये,और इसी अतिरिक्त सतर्कता के कारण जो बात किसी ने सोची भी ना हो सब के सामने आ जाती है।।
    ऐसे किसी भी बात पे चट से बाँसुरी को फ़ोन करके पूछने वाले राजा भैय्या ने उस दिन बार बार चाहते हुए भी बांसुरी को फ़ोन नही लगाया।।

” का हुआ भैय्या जी आज बांसुरीया नही आई।” प्रेम के पूछते ही राजा भड़क गया

” अबे हमे का पता बे,तुम तो ऐसे पूछ रहे जैसे वो हमे सब बता के ही करती है,,कॉलेज वॉलेज में काम होगा,नई आ पाई,इतना काहे बखेड़ा बना रहे।”

” हमने कहाँ  बखेड़ा बनाया,हम तो पूछ रहे बस।आज तो कॉलेज भी नही गई रही।”

” तो हम का करे,नही गयी तो नही गयी।।तुम हमारा सर काहे खा रहे।।”

” नै भैय्या जी हम बता रहे बस,,आपने कहा ना कॉलेज वॉलेज में काम होगा,इसिलिए बता रहे कॉलेज तो गई ही नही।”

” प्रेम तुम्हें कैसे पता।” प्रिंस को राजा की हालत का कुछ कुछ आभास हो चला था

” अरे हम अपनी वाली के चक्कर में जाते तो हैं ही ना,तो आज वहीं कॉलेज में निरमा अकेली ही दिखी हमे,,बांसुरी कॉलेज गयी होती तो दोनो जनी साथ ही होतीं ।”

भैय्या जी ने सामने तो बिल्कुल यही दिखाया की उन्हें कोई विशेष फर्क नही पड़ा इस जानकारी से,पर मन ही मन में उथल पुथल मच गई कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो बांसुरी ना ही जिम आयी और ना कॉलेज गई ।।

  इसी उधेड़बुन में वो दिन बीत गया,उसके बाद के दो और दिन बीत गये,पर इन कुल जमा तीन ही दिनों में राजा को ये समझ आ गया कि बांसुरी अब सिर्फ एक दोस्त,एक गाइड या एक जिम स्टूडेंट भर नही है, बल्कि वो उससे कहीं अधिक विशिष्ट स्थान रखती है।।जाने अनजाने राजा को पता ही नही चला कि कब सांवली सलोनी बांसुरी उसके हृदय आसन पर अपने समस्त आयुधों के साथ विराजमान हो गयी।

बहुत कठिनाई से खुद को समझा बुझा कर राजा ने रात मे निश्चित किया कि कल सुबह किसी बहाने से बांसुरी के घर जाना ही पड़ेगा,ऐसा सोचते ही एक सुखद अनुभूति के साथ राजा के चेहरे पे मुस्कान बिखर गयी और वो उसे याद करते करते सो गया।।

  जो काम दोस्ती के समय बहुत आसान होते हैं वही प्रेम का आभास होते ही अति दुष्कर होने लगते हैं ।
 
       जो राजा कभी किसी भी समय बांसुरी को फ़ोन कर लेता था,कभी भी मुहँ उठाये उसके घर पहुंच जाता था,वो आज ना तो उतनी आसानी से फ़ोन कर पा रहा था,और ना ही उसके घर जा पा रहा था।।
प्रिंस जो सदा राजा के साथ छाया सा लगा डोलता था,उसे राजा की अवस्था समझने में बिल्कुल भी देर नही लगी,वो अपनी बुद्धि अनुसार सब सही करने की कोशिश करने लगा।।

” भैय्या जी हमको लगता है बन्सी की तबीयत सही नही है,आपको क्या लगता है??”

” अरे हमे क्या मालूम,हम कोई ज्योतिष हैं जो बिना बताये सब जान ले।”

” नही भैय्या जी हमारे कहने का मतलब था कि एक बार क्यों ना बांसुरी के कॉलेज चल के उससे मिल लिया जाये,क्या है ना हम घर भी जा सकते हैं,पर बंसी की बुआ आपपे कुछ जादा ही फिदा है,इसिलिए हम कह रहे कॉलेज चलने की,हो सकता है थोड़ी बहुत बीमार हो ,जैसे सर्दी वर्दी तो उसमे कॉलेज जा रही हो,पर जिम नही आ रही।।”

” तुम्हें बड़ी चिंता हो रही मुटल्लो की,हैं काहे भई ?”

प्रेम के कटाक्ष पे प्रिंस भड़क उठा _ ” काहे नही होगी बे !! बहन मानते हैं उसको।।इत्ती अच्छी लड़की से बिना मतलब जले भुने बैठे हो, चले भैय्या जी।”

” अब तुम इत्ता जिद कर रहे हो प्रिंस तो चलो !! पर हमें काम बहुत सारा है,चलो कोई बात नही,अब तुम्हे चिंता हो रही तो देख ही आते हैं ।।”

रॉयल एनफील्ड में पीछे बमुश्किल प्रिंस और प्रेम को ऐडजस्ट कर राजा ने राजकीय कॉलेज की तरफ बुलेट भगा दी।।

फेडेड ब्लू डेनिम और सफेद शर्ट पे दोसा कबाना के गॉगल्स चढ़ाये राजा भैय्या ने जब कॉलेज के अन्दर बाईक पे एन्ट्री मारी तो बिल्कुल धूम वाला समा बान्ध दिया,ऐसा लगा जैसे बैकग्राउंड पे गाना बज रहा हो_

       “Dhoom again and run away with me on a roller coaster ride
        dhoom again and see your wildest dreams slowly come alive……dhoom machaale….”

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   लड़कों की आंखों मे जलन थी,तो लड़कियों की आंखों में तारीफ और उत्सुकता कि आखिर इतना हैंडसम बंदा मिलने किससे आया है।।

  प्रेम उस कॉलेज का ना होकर भी कॉलेज के चप्पे चप्पे से वाकिफ था,वो पार्किंग में गाड़ी खड़ी करवा कर भैय्या जी को लिये कैन्टीन में आ गया।।
   निरमा के मामा जी को नाना जी की बीमारी के कारण वापस जाना पड़ा,और निरमा एक बार फिर बांसुरी के साथ कॉलेज आने जाने लगी थी,पर कॉलेज के अलावा कहीं भी निकलने की मनाही के कारण निरमा जिम नही जा पा रही थी।।

  एक तयशुदा समय पर निरमा और बांसुरी कैन्टीन आते थे,पहले कैन्टीन में भकाभक समोसे आलू गुंडे पेलने वाली बांसुरी आजकल सिर्फ वर्जिन मोइतो ( नीम्बू पानी) से काम चला रही थी,आज भी दोनो अपने तय समय पर कैन्टीन को चल दी।।

इन्तजार का फल मीठा होता है,ये राजा को अपने जीवन मे उस दिन पहली बार समझ आया।।पूरे तीन दिन के बाद उसे बांसुरी दिखाई दी थी,दूर से पीले कुर्ते पे गुलाबी दुपट्टा ओढ़े नीचे सर किये चुपचाप आती बांसुरी को देख पहले पहल तो राजा को ज़ोर का गुस्सा आ गया__” कॉलेज आने का समय है,इधर उधर जा सकती हैं मैडम पर जिम आने का समय नही!!! अरे कुछ काम है ना आओ! पर एक फ़ोन करने में भी महारानी जी का हाथ दुख गया।”
पर प्रकट में राजा ने ऐसा कुछ नही कहा,हाँ ध्यान से देखने पर उसे बांसुरी बहुत थकी सी दुखी सी लगी।।

  बांसुरी और निरमा के वहाँ पहुंचते में प्रेम कूद कर निरमा तक पहुंच गया,दोनो आंखों ही आंखों मे मुस्कुरा उठे,उन्हें सादर अपनी सीट तक लाकर निरमा के लिये एक कुर्सी खींच प्रेम उसके बाजू वाली कुर्सी पर बैठ गया,तब जाकर कहीं बांसुरी ने राजा को देखा__” अरे राजा तुम यहाँ कैसे??कॉलेज में कुछ काम था क्या?”

” अरे कहाँ?? भैय्या जी तो तुम्हे ही…..” प्रिंस की बात को आधे मे ही काट कर राजा ने अपनी बात बांसुरी के सामने रख दी।।

” हाँ वो एक लड़के के एडमिशन की बात करने आये थे,तो सोचा तुम्हारा भी हाल चाल ले लें ।कैसी हो बाँसुरी ??”

राजा के “कैसी हो बांसुरी “पे जाने क्यों बांसुरी की आंखें छलक आईं जो राजा के सिवा कोई ना देख सका।।
     जब कोई रोता होता है तब उस समय अगर कोई सांत्वना से भरा हाथ कंधे पर रखे और चुप कराने की कोशिश करे तो आंसू और भी ज्यादा ज़ोर शोर से बहने लगते हैं,वैसे ही जब कोई सबसे बड़ा शुभचिंतक हितैषी ऐसे समय पर हाल पूछे जब वाकई हाल अच्छा ना हो तो दिल का दर्द आंखों के रास्ते बहना लाजिमी है।।बस वही बन्सी के साथ हुआ।।
   पर बांसुरी दिल की कच्ची लड़की नही थी,उसे अपना दुख दुनिया को दिखाना सख्त नापसंद था,इसिलिए उसने निरमा से भी अपने दिल का हाल नही बताया था,पर आज राजा को एकबारगी सब कुछ बताने को वो व्याकुल हो उठी,पर यहाँ कैन्टीन में सबके सामने उसके लिये कुछ भी बोलना बताना बहुत कठिन था,उसने एक पूरी नज़र राजा पे डाली,  राजा ने आंखों से ही बन्सी के मन की बात पढ़ ली,वो समझ गया कि बांसुरी उसे कुछ बताना चाह रही है।।
    
        इतनी देर में एक दूसरे में खोये प्रेम और निरमा अपनी बातों में लगे थे,निरमा अपने घर पर उसके ऊपर हो रहे अत्याचारों को बढ़ा चढ़ा कर प्रेम से बता रही थी,कि कैसे वो जब भी शाम को छत पर प्रेम की एक झलक पाने के लिये चढ़ती है तो पीछे से उसकी अम्मा ठीक उसी वक्त सूखे कपड़े निकालने छत पर पहुंच जाती है,कैसे जब निरमा रेडीयो पर__

    “ आते जाते हँसते गाते सोचा था मैंने मन में कई बार,वो पहली नज़र हल्का सा असर करता है क्यों इस दिल को बेकरार…..” सुनते हुए प्रेम को याद कर कर के मुस्कुराती है तो उसकी अम्मा आ कर रेडियो पे भजन वाला चैनल सेट कर जाती है__

  “ राधे राधे रटो चले आयेंगे बिहारी।।”
 
कैसे जब निरमा खिलती चांदनी में खिड़की पर खड़ी होकर चांद मे अपने प्रेम का चेहरा देख देख शर्माती है तब उसकी अम्मा आ कर खट से खिड़की बन्द कर जाती है, कैसे जब लौकी और तोरी की सब्जियों को देख कर निरमा मुहँ बनाती है तो अम्मा ताना मार जाती है कि ‘ हाँ अब हमरे हाथ का कुछु काहे भाये,जो बना रहे चुपचाप खा लो,जब अपना घर अपनी गिरस्ती होगी तो पका लेना अपने मन का।।”इसी तरह के तानों उलाहनो के बीच जीवन कैसा कठिन हुआ पड़ा है और अब प्रेम ही है जो निरमा के जीवन के बिखरे रंग समेट कर उसके जीवन के कैनवास को एक खूबसुरत तस्वीर मे बदल सकता है।।
  
   ये प्रेमी जोड़ा अपने में लीन, दीन दुनिया से बेखबर था,राजा भैय्या ने ये नोटिस कर लिया ,उन्होनें प्रिंस को पानी की बोतल लाने भेजा और अपनी कुर्सी बांसुरी की तरफ खींच ली।।

” अब बताओ क्या हुआ?? जिम क्यों नही आ रही आजकल??”

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राजा की गहरी आवाज़ और उससे भी गहरी ये बात सुन कर बांसुरी विहल हो गई

” यहाँ नही बता पायेंगे।।”

” फिर कहाँ?? बोलो,, कहीं बाहर मिलना चाहती हो।”

बांसुरी ने आंखें उठा कर राजा को देखा और हाँ मे सर हिला दिया

” कहाँ?? रॉयल पैलेस आ जाओगी अकेले??

बांसुरी ने फिर हाँ में सर हिला दिया।।बांसुरी की चुप्प्पी ने राजा के मन मे हाहाकार मचा दिया,आखिर ऐसी कौन सी गुम चोट खा ली जो इतनी चुपचाप सी हो गई,कहाँ तो बांसुरी को अधिक बोलने पर टोकना पड़ता था और कहाँ आज हाँ भी बोलने के लिये मुहँ नही खोल रही।।
       राजा का मन ऐसे कचोटने लगा कि कुछ भी कर के बांसुरी के दुख को दूर करना ही है,उसे ऐसी गुमसुम नही देख सकता।।प्रिंस के पानी की बोतल लेकर आते ही राजा उठ गया।

” ठीक है फिर हम चलते हैं अभी!! अपना ध्यान रखना बांसुरी ।।”

” अरे जिस काम से आये थे,वो तो कर लो।।एडमिशन ऑफिस उधर है।” बांसुरी ने एक तरफ को इशारा कर दिया,उसकी उंगली की दिशा में देखने के बाद मुस्कुराते हुए राजा ने बांसुरी को देखा_

” हम जिस काम से आये थे,वो हो गया बांसुरी,कल शाम 4 बजे मिलतें हैं फिर,,आ तो जाओगी ना।।”

हाँ मे सर हिला के बांसुरी चुपचाप खड़ी राजा को जाते देखती रही।।

रात में राजा अपने कमरे की खिड़की पे खड़ा बाहर खुले आसमान में चमकते चांद को देख सोच रहा था,हो सकता है बाँसुरी भी इस वक्त अपनी खिड़की पे खड़ी चांद देख रही हो,चलो अच्छा है इसी चांद के बहाने ही सही निगाहें तो मिल रही हैं ।।
   कहीं दूर एक गाना बज रहा था_

    “ सुनो किसी शायर ने ये कहा बहुत खूब ,
      मना करे दुनिया लेकिन मेरे मेहबूब
      ही जाता है जिस पे दिल आना होता है
       हर खुशी से हर गम से बेगाना होता है।
       प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है….”

 
       ******************************

  ” राजा!! उठो, आज बड़ी अबेर कर दी उठने में,ऐसे तो रोज़ भोरे उठ के दौड़ लगाने चले जाते हो आज सात बज गया ,अभी तक सो रहे,तबीयत तो ठीक है ।।” ऐसा कहते हुए राजा के माथे पर उसकी अम्मा ने हाथ रख कर ठेठ हिन्दुसतानी स्टाइल में बेटे का बुखार चेक किया।।

  शरीर का ताप हो तो पकड़ भी आये,मन के ताप का कहाँ निपटारा!!!

   रात बड़ी देर तक जागती आंखों के सपनों में विचरते हुए राजा को सोने में देर हो गई,सुबह सुबह रोज़ का अलार्म बन्द कर वो वापस सो गया,और सोता ही रह गया,वो तो अम्मा की आवाज़ से नींद टूटी,सुबह सुबह अम्मा को अपने कमरे में देख उसके चेहरे पे एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी,अम्मा के हाथ से चाय लेकर वो चुपचाप पीने लगा।।

” का हुआ लल्ला? आज बहुते खुस लग रहे,कोई हड़बड़ी भी नही है तुम्हें जिम जाने की।।”

” जायेंगे अम्मा जायेंगे!!! सुबह सुबह तुम्हरे दरसन हुए, तुम चाय लिये सीधा कमरे में चली आयी ,ये सब खुशी का कारण नही हो सकता का??” हँसते हुए राजा पलंग से उतर बाहर निकल गया।।

  जिम में ऑफिस में अपना काम निपटाता राजा मन ही मन खुश था ,आखिर बांसुरी की उदासी का कारण पता चलेगा तो उसे दूर करने का कुछ उपाय भी कर पायेगा।।सुबह से जाने कितनी बार अपने हाथ में बंधी राडो पे समय देख चुका था,पर भई घड़ी चाहे रिको हो टाइटन हो या राडो दिखायेगी तो एक ही समय!!
      दिल ही दिल में एक हल्का सा डर भी था कि जाने क्या बात होगी जो बांसुरी जैसी दुरुस्त दिल लड़की ऐसी गुमसुम हुई पड़ी थी।।
    अपने विचारों में खोया राजा अपना काम निपटा रहा था कि दरवाज़े पे हल्की सी दस्तक हुई__

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” हम अन्दर आ जायें राजा!!”

राजा ने सर उठा के देखा सामने बांसुरी खड़ी थी

” अरे पूछने की क्या ज़रूरत ,,आओ आओ अन्दर आओ,,बैठो ।।”
  बाँसुरी आ कर राजा के सामने बैठ गयी,दोनो ही लोग बात शुरु करने का बहाना ढूँढ रहे थे,आखिर बांसुरी ने ही चुप्पी तोडी__

” राजा तुमसे कुछ कहना चाह रहे थे,कल तुमने पूछा था ना,उसी बारे में …..बस सोच रहे कि कैसे बोलें ।”

” कैसे मतलब? अरे जैसे बोलते हैं बतियाते हैं वैसे ही बताओ,,बात क्या है आखिर?? तुम इतनी उदास चुपचाप सी क्यों हो?”

” राजा तुम्हें भास्कर सर के बारे में बताया था ना? हमारे गणित के लेक्चरर!!जिन्हें हम पसंद करते थे।”

” हाँ हाँ!! क्या हुआ उन्हें ” राजा का दिल ज़ोर से धड़कने लगा

” उन्हें कुछ नही हुआ,,बिल्कुल ठीक हैं वो”

” फिर?”

” कैसे बतायेँ राजा!! वो भास्कर सर हैं  ना,वो असल में शादीशुदा निकले!!” ये बोलते ही बांसुरी का चेहरा मुरझा गया उसकी आँख से दो बूंद आंसू लुढ़क कर उसके गालों तक चले आये।।और राजा के दिल में सरगम बजने लगी।।

    “अपने आप को सम्भालो बांसुरी!! हमे तो नाम सुन कर ही ये लड़का तुम्हारे लिये ठीक नही लगा था,अब ऐसा भी क्या बन सँवर के कॉलेज आना कि मासूम नादान लडकियों को यही ना समझ आये कि सामने वाला शादीशुदा है,,ये तो सख्त बदतमीजी है नामुराद की।”

‘” अरे तो लड़कों का समझ भी कैसे आयेगा,वो ना तो सिन्दूर लगाते ना मंगलसूत्र पहनते।”

” तो क्या हुआ,पर चेहरा लटका हुआ तो रहता है ,घर से बीवी की डांट खा के जो निकलते हैं,,खैर वो सब छोड़ो,तुम खुद पे ध्यान दो ,इतनी अच्छी हो तुम्हे सच बहुत अच्छा लड़का मिलेगा।।” बांसुरी को समझाने के साथ ही राजा ने सामने लगे आदमकद आईने में खुद को देखा और मुस्कुरा दिया,,उसके मन में जलतरंग बज उठी।।
     
   
            “आ मैं तेरी याद में सबको भुला दूँ
    दुनिया को तेरी तसवीर बना दूँ
            मेरा बस चले तो दिल चीर के दिखा दूँ
    दौड़ रहा है साथ लहू के प्यार तेरा नस-नस में
ना कुछ तेरे बस में जूली ना कुछ मेरे बस में
      दिल क्या करे जब किसी को किसी से प्यार हो जाये।।”
 
  उसी समय दरवाजा खोल कर दो कप चाय लिये प्रिंस भीतर आया ,,अन्दर आते ही उसे आभास हुआ की जिम में  ‘ दिल क्या करे बज रहा है’ वो चाय रख वापस मुड़ गया_
         ” भैय्या जी अभी गाना बदल देतें हैं ।”

  ” काहे बे,,काहे बदलोगे गाना,इत्ता सुरीला गाना बदल दोगे,ससुरे तुम भी एक नम्बर के बकलोल हो।

  प्रिंस को कुछ समझ नही आया,वो अपना सर झटकता बाहर चला गया,राजा बाँसुरी की तरफ घूम गया,वो अभी भी गुमसुम सी थी,पर राजा की खुशी संभाले नही संभल रही थी,उसने अपने मन के भावों को मन तक ही सीमित रख अपनी ज़बान को भरसक उदास करते हुए बांसुरी को सांत्वना देना शुरु किया।।

” अरे तो का हुआ बांसुरी,शादीशुदा हैं तो इसमें कौन बड़ी बात हो गयी ।”

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” अच्छा तो ये तुमको बड़ी बात नही लग रही???” अरे बुद्धू राम ! अब जब उनकी अपनी घरवाली है तो वो हमे काहे देखेंगे,चाहे हम कितनी भी सज धज मचा लें, उन्हीं के लिये दुबली होना चाहते थे,इसिलिए जिस दिन पता चला उसी दिन से जिम आना बन्द कर दिये,पर ….”

” पर क्या बांसुरी??”

” पर ये कि अब हमको भी तुम्हारे जिम की थोड़ी थोड़ी आदत सी लग गयी है,,अब दो तीन दिन वर्क आउट नही करते हैं तो अच्छा नही लगता,,कल कॉलेज में तुमसे मिल कर घर लौटने के बाद हम सोचते रहे और फिर ये फैसला किया कि हम तुम्हारा जिम नही छोडेंगे।।”

” वाह बहुत ही अच्छा सोची,पर ये बताओ कि जिम नही छोड़ोगी या भैय्या जी का जिम नही छोड़ोगी?

प्रिंस के सवाल पर बांसुरी ने घूर के प्रिंस को देखा और __” ना तुम्हारे भैय्या जी को छोडूंगी ना उनका जिम ।।अब तो जब तक राजा लॉ पास कर के लॉयर ना बन जाये मैं ये जिम नही छोडून्गी।।

” ये हुई ना बात” प्रिंस की तालियों से ऑफिस गूँज गया।।।

राजा भैय्या के मन की खुशी पूरे उत्साह से उनके चेहरे को अबीरी कर गई ।।

” तो बाँसुरी फिर शाम का क्या प्लान है??”

” शाम का प्लान?? वही है 4 से 5 तुम्हें पढायेंगे,और क्या??”

” अरे नही!! हम तो होटल में मिलने के बारे में पूछ रहे थे।”

” अब यहीं तो सब कुछ बता दिये,अब क्या ज़रूरत होटल में मिल के पैसे उड़ाने की,अब तुम्हारे एग्ज़ाम को भी समय कम बचा है,,पढ़ाई पे पूरा पूरा ध्यान देना है,समझे!! ये घुमाई फिराई थोड़ा बन्द करो अब।।जब देखो तब फटफटी में उड़ते फिरते हो।।”

राजा  नीचे सर किये हाँ में सर हिलाता मुस्कुराता रहा,दोनो ने अपनी अपनी चाय उठाई और मुस्कुराते हुए पीने लगे।।

बाहर जिम में नया ट्रैक बज रहा था__

   “ शुद्ध देसी देसी देसी रोमांस …..हाय रे!!
      हाय रे क्रेज़ी क्रेज़ी क्रेज़ी रोमांस …..

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क्रमशः

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

3 विचार “शादी.कॉम -15” पर

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