शादी.कॉम- 16

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       ” ना मोहब्बत ना दोस्ती के लिये,वक्त रुकता नही किसी के लिये।।”

   जिसने भी कहा है या लिखा है,अटल सत्य है!! सब कुछ अपनी गति से चलता रहता है ,समय किसी के लिये नही रुकता,।।
     समय अपनी गति से चलता गया,बांसुरी को जिम जाते पूरे छै महीने बीत गये,अब वो पहली वाली गोल मटोल तबला सरीखी बांसुरी नही रही बल्कि वाकई दुबली सजीली बांसुरी बन गई,बिल्कुल अपने नाम को चरितार्थ करते हुए।।
       राजा भी अपनी परीक्षाओं से फारिग हो गया,इस बार उसने पेपर भी ठीक से लिखे।।पहले तो राजा के साथ ऐसा होता था कि जब वो पढ़ने बैठता था तो हर विषय एक दूसरे से होड़ लेता हुआ बकवास और बोरिंग लगता था,राजा हमेशा सोचा करता था,जब दिल को बहलाने वाले इतने साधन जीवन मे मौजूद हैं ( डम्बल,साईकल, ट्रेडमिल इत्यादी) तो कौन इन्सान होगा जो अपना जीवन किताबों में व्यर्थ करेगा,।
      वो जब कभी इतिहास पढ़ने बैठता तो आधा तो वो समय चक्र में उलझ के रह जाता ।।उसे  BC (before christ)और AD (anna domini) का झमेला बड़ा कठिन लगता,उसके ऊपर से अलग अलग आक्रमणकारी और अलग अलग सभ्यताएं ।
     वो हमेशा सोचा करता कि जब हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता की खुदाई मे सिक्के मिले तो तुगलक ने कौन से सिक्के बदले।।
     ये तो सिर्फ एक विषय था,इसी तरह के कई विषय थे जो पूरी तरह वक्त की बर्बादी थे,नागरिक शास्त्र,भूगोल इत्यादी,,पर धीरे धीरे इन जटिल विषयों की गुत्थि को बांसुरी ने बड़ी सरलता से सुलझा कर रख दिया,बिल्कुल जैसे किसी उलझे हुए ऊन के गोले को कुशल हाथों से एक गृहिणी सुलझा कर अलग अलग बंडल तैयार कर लेती है,वैसे ही।।

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     पहले राजा पेपर बनाने बैठता था तो उसके साथ ये होता था कि एक सवाल नही आ रहा,आगे बढो, अरे दूजा भी नही आ रहा,फिर आगे बढ़ो, तीसरा भी तो नही आ रहा,क्या करना है आगे ही बढ़ना है,,पर चौथा भी नही आ रहा,अब क्लास से ही निकल लो।।।
   पर अबकी बार बांसुरी ने पक्की तैयारी की थी,उसे पता था उसका छात्र अड़ियल है,और इसे अभ्यास के चाबुक से ही सही किया जा सकता है,इसीसे उसने हर विषय के कई कई पेपर तैयार कर राजा से समय अवधि के भीतर पूर्ण करवाये थे,इसीसे इस बार जब राजा परीक्षा मे बैठा तो उसे खुद भी मालूम नही था कि उसके साथ इतना चमत्कार होगा।।
   
                प्रथम प्रश्नपत्र का प्रथम सवाल उसने गणपति को शीश नवा के जब देखा तो उसके आश्चर्य की सीमा ना रही__ अरे ये सवाल तो बनता है,,अगला देखा,अरे ये भी आता है,तीसरा?? हाँ ये भी तो याद है,चौथा सवाल देखा,अरे इसका जवाब तो बहुत अच्छे से आता है,!! ज्ञान और आत्मविश्वास का संगम जहां हो जाता है वहाँ फिर कोई विपत्ति आड़े नही आती।
    
        तीन घन्टे के प्रश्नपत्र में जहां राजा पहले दो ही घन्टे में बाहर निकल जाता था,आज पूरे तीन घन्टे उसे ऊपर नज़र उठाने की भी फुर्सत नही मिली।।
  सिर अपनी उत्तर पुस्तिका मे गडाये हुए वो बस सारे उत्तर एक के बाद एक लिखता गया,पैंतालीस मिनट बीते होंगे कि उसे अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका की आवश्यकता पड़ गई ।।
      अब इतने सालों में शिक्षकों से भी भला परिचय हो चुका था इसीसे जब राजा ने अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका की मांग की तो शिक्षक महोदय को हार्ट अटैक आते आते बचा,वो एक हाथ से अपना हृदय थामे दूसरे हाथ से कॉपी लिये राजा की बैंच तक चले आये
     “का हुई गवा राजा?? ऐसा का लिख डारे बाबू की सप्लीमेंट्री  की जरूरत पड़ गयी।देखो सभी कहते जरूर हैं कि कापी कोई पढ़ता नही किसी फिलिम की कहानी लिख डारो,पर होता नही ऐसा बबुआ,,कोनो पिच्चर विच्चर का कहानी थोड़े ही लिख मारे हो।।”
    
         शिक्षक महोदय ने अपनी बात पूरी करते करते राजा की कॉपी पर सरसरी नज़र भी मार ली,और अबकी बार उन्हें दूसरा हार्ट अटैक आते आते बचा।

  ” ई कैसा चमत्कार भवा,,राजा ही हो ना,,उंगली ना दुखी इत्ता सारा लिख मारे हो,अरे अभी तक पास होने के लाले थे तुम्हारे,अबकी लाने तो तुम गुरू टॉप कर जाओगे ,लग रहा।।

” गुरुजी इस बार पूरी तैयारी कर के आये हैं ,अब चाहे जो हो जाये हमको पास होना ही है।”

और इस प्रकार हर एक विषय के पेपर में अपने गुरूजनों को हल्का फुल्का अटैक देते हुए भैय्या जी ने सारे प्रश्नपत्र बड़ी सुगमता से हल कर लिये।।

   अन्तिम पेपर दे कर राहत और सुकून की सांस लेते हुए जिम की राह पकड़ लिये।।
     जिम पहुंच कर जैसे ही बड़े कांच के लगे स्लाइडिंग डोर को खोल कर भैय्या जी ने भीतर प्रवेश किया,उनके ऊपर पुष्पवर्षा होने लगी।।।पूरा जिम बड़े बड़े गुब्बारों से सजा पड़ा था,दरवाजे के एक किनारे बहुत सुन्दर रंगोली सजी थी,उस गोल रंगोली में एक तरफ डम्बल बने थे और एक तरफ क्रॉसट्रेनर ।।
   
      प्रिंस और प्रेम दौडे चले आये,भैय्या जी ने दोनों को ऐसे गले लगा लिया जैसे अलाउद्दीन खिलजी से चित्तौडगढ़ का किला जीत लाये हो।।बिल्कुल किसी शहंशाह का सा स्वागत हुआ,जिम में आने वाली हर नाज़नीन उस दिन कुछ अलग ही सजी धजी सी मौजूद थी,सभी ने परीक्षाफल आने के पहले ही भैय्या जी की भावी सफलता को आंक लिया था और उसी का जश्न मनाने की तैयारी थी।


   
           ऑफिस के अन्दर से एक बड़ा सा गोल रसमलाई फ्लेवर का केक लिये बांसुरी आई,,राजा ने मुस्कुरा कर केक काटा और सबसे पहला टुकड़ा बांसुरी की ओर बढ़ा दिया ,केक थामते हुए बांसुरी का हाथ ज़रा लड़खड़ा गया और उसने दूसरे हाथ से राजा की कलाई थाम ली__
    ” अरे!! बांसुरी तुम्हारा हाथ तो तप रहा है,तुम्हें तो तेज़ बुखार है,ऐसे मे यहाँ क्यों आई,घर में आराम करना चाहिये था ना।।”

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  ” कुछ नही बस हरारत है,अभी घर जाकर दवा ले लेंगे तो ठीक हो जायेंगे,तुम हमारी चिंता ना करो,तुम्हारे पेपर अच्छे बन गये उसी खुशी में पार्टी है,समझे……”

   बांसुरी अपनी बात पूरी किये बिना ही चकरा के नीचे गिर गई,अचानक उसके शरीर में अकड़न सी होने लगी,शरीर पीछे की ओर झटके के साथ मुड़ने लगा,ऐसे जैसे कोई धनुष!!!

   राजा को समझते देर ना लगी,एक दिन पहले ही एलो वेरा जूस का टिन खोलते समय बांसुरी के हाथ में लगी चोट ही मांसपेशियों की जकड़न और दर्द का कारण बनी थी, बचपन से उसने धनुषटँकार नामक बीमारी का उल्लेख सुन रखा था,कि कैसे जंग लगी धातु से खरोंच लगने पर टीटनस हो जाता है अगर समय रहते टीका ना लगवाया जाये तो।।
    
    बांसुरी के चेहरे और गरदन की पेशियों पे कसावट बढ़ने लगी,सभी किसी ना किसी दिशा में दौड़ पड़े, ऐसा अक्सर होता है,जब भी कभी कही कोई आपातकालीन स्थिति बनती है तो अमूमन भगदड़ मच जाती है,और इन भागते चीखते लोगों में से पचास प्रतिशत लोगों को तो पता भी नही होता कि वो क्यों भाग रहे हैं,और उन्हें कहाँ जाना है,वैसा ही कुछ जिम में हुआ,जिन्होनें बांसुरी को गिरते देखा वो तो उसकी सहायता को भागे लेकिन जिन्होने नही देखा वे भी उतनी ही तत्परता से भागते हुए ,काम करने वालों के रास्ते में व्यवधान उत्पन्न करने लगे।।  तभी सहसा राजा भैय्या ने सबको बांसुरी से दूर किया,और उसे अपने दोनों हाथों से उठा कर जिम से बाहर की ओर चल दिये, किसी ने पीछे से आवाज़ भी दी_
       ” अरे कमजोरी से सर घूम गया होगा,इत्ती सी बात के लिये कहाँ लिये भाग रहे हो राजा??”

  ” कमजोरी तो नही लगती,हमे तो लगता है कोई भूत परेत का चक्कर तो नही ना है।”

  किसी की बात पे कान दिये बिना राजा बांसुरी को लिये बाहर निकल गया।।

  राजा बांसुरी को लिये जब तक अस्पताल पहुंचा तब तक में बाँसुरी का दर्द और एँठन और बढ़ चुका था,ज्वर की बेहोशी टूटी नही थी,,बिल्कुल अवधूत रुद्र जिस प्रकार सती की अचल देह लिये क्रोध में कांपते पृथ्वी को नापते चले,कुछ वैसे ही अवतार में राजा बांसुरी की देह समेटे अस्पताल पहुँचा।।
    बाँसुरी को तुरंत इमरजेन्सी में भर्ती कर लिया गया,सीनियर जूनियर डॉक्टरों की टीम अपने काम में जुट गई।।

    लगातार दो दिन तक डॉक्टरों के किये अथक प्रयास से आखिर तीसरे दिन बांसुरी ने आंखें खोल दी।।इन दो दिनों में बांसुरी के हैरान परेशान परिवार का संबल बना राजा जैसे खाना पीना भी भूल गया था,हर दवा हर इन्जेक्शन के लिये दौड़ लगाता राजा अपने नाम की पद गरिमा को जैसे भूला बैठा था।

       इसी बीच बेटा घर क्यों नही आ रहा ये जानने माता जी ने प्रिंस से चर्चा की तो उन्हें बांसुरी की बीमारी और राजा की अवस्था का पता चला,बेटे से मिलने अस्पताल पहुंची अवस्थिन को वहाँ बेटे का एक अनोखा ही रूप देखने मिला,,घर पे पानी का एक गिलास स्वयं ना लेने वाला उनका लाड़ला यहाँ तो हर काम खुद करने की जिद पे अड़ा था,डॉक्टरों से चर्चा करने से लेकर हर छोटे बड़े काम की जिम्मेदारी राजा की ही थी।।
       
          जिसे किसी वस्तु की ज़रूरत होती फट राजा की पुकार मचती,बांसुरी की अम्मा तो ऐसे घुली मिली सी राजा से सिर भिड़ाये चर्चा करती की एक बारगी लगा राजा इनकी नही उनकी ही संतान है।।
      अपने कोखजाये को उन परायों के लिये इतना घिसते देख माँ के सीने में सांप लोट गये,कैसे भी हो इस लड़की और इसके परिवार से अपने राजकुमार को उन्हें बचाना ही होगा,जाने क्या घुट्टी पिला दी है इन लोगों ने_

    ” काहे राजा घर दुवार भुला गये हो का,दू दिन से उधर फिरे ही नही,तुम्हरे बाऊजी परेसान हो रहे थे,तब आज प्रिंस से पूछताछ कर तुम्हें ढूंढते आये हैं हम।”

” काहे अम्मा बड़के भैया नही बताये का?? हम तो जिस दिन बांसुरी को यहाँ ले के आये,तुरंते भैय्या को फोन लगा के बता दिये रहे कि बांसुरी को टिटेनस हुआ है, हमको अस्पताल में  ही रुकना पड़ेगा।।”

   बात सत्य थी,युवराज ने अम्मा को कुछ नही बताया था,बल्कि उल्टा अपने किसी कर्मचारी के हाथ राजा के पास कुछ पैसे भिजवा दिये थे।।

  अब तो माताजी का पारा और उबल पड़ा,दोनो लड़के मनमर्जी कर रहे,अपनी अम्मा से बताने की जरुरत ही नही समझी।।पर समझदारी उनमें कूट कूट कर भरी थी,उन्हें भली प्रकार ज्ञात था कहाँ क्या बोलना,किस शब्द से कब घात की जा सकती है और कब चाशनी में लपेट के परोसना है__

       ” अच्छा है बाबू,अम्मा की कोनो चिंता ही नही, कम से कम एक बार हमें भी बोल देते, किसी बात के लिये मना तो करते नही हैं,उल्टा हम घर से खाना पीना भिजा देते,जाने यहाँ का मिला होगा खाने को।”

  राजा के प्राण अपनी माँ में बसते थे,इन दो दिनों में बासुँरी की तीमारदारी में राजा जैसे खुद को ही भूल गया था,माँ को कुछ बताना कहाँ याद रहता,पर माँ की कही भावुक पंक्तियों ने मन में क्लेश और अफसोस जगा दिया,उससे वाकई बड़ी चूक हो गई थी,वो वहीं माँ के पैरों के पास ज़मीन पर बैठ गया, अपना सिर माँ की गोद में टिका कर आंखें बन्द कर ली__
      ” बस माँ का बतायें??,सब कुछ इत्ता अचानक हुआ कि कुछ समझ ही ना आया,बस बचपन की तुम्हारी बताई बात ही याद रही,उसी के लाने बन्सी को उठाये दौडे चले आये,लगा कि नही लाये तो जान ना बचेगी बेचारी की।”

  माँ अपने बेटे के बालों में हाथ फिराती सुनती रही, मन में बवंडर उठ रहा था,बांसुरी बंसी कब बन गई? बित्ते भर की छोकरी ने उसके लल्ला का दिमाग फिरा दिया,पर ऊपर से कुछ ना बोली__

” राजा ! हियाँ बैठे हो,चलो ना उधर डाकटर साहब बुला रहे,बोल रहे कल बंसी की छुट्टी कर देंगे।। नमस्ते बहन जी!! हम बाँसुरी की अम्मा !! अगर आपका राजा ना होता तो हमारी बांसुरी भी ना होती,बेचारी के प्राणों पे संकट पड़ गया था,भला हो राजा बाबू का समय रहते अस्पताल ले आये,सारी भाग दौड़ कर के भर्ती करा दिया तब हमें खबर की।”

  राजा तो बांसुरी की अम्मा की आवाज़ सुनते ही झट उठ कर बांसुरी के कमरे की ओर लपक लिया,और राजा की अम्मा के कलेजे पे सांप लोट गये।।पहले से जली भुनी बैठी थी कि ताबूत पे आखिरी कील ठोंकने बांसुरी की अम्मा स्वयं उपस्थित हो गई।।।अरे साफ साफ तो दिख रहा कि लड़का हाथ से निकला जा रहा अब ई तिवारीन काहे जले पे नमक छिड़क रही।।
 
    बांसुरी की अम्मा प्रमिला के मन में शुरु से अवस्थी परिवार के लिये एक विशेष सम्मान की भावना थी,मौके बेमौके राजा की भलमनसाहत वो देख भी चुकी थी,अवस्थी परिवार का नाम भी बहुत था,इसीसे वो खुद से आगे बढ़ कर राजा की अम्मा से खुले दिल से राजा की स्तुति कर गई, पर ऐसा करने से पहले ये नही सोच पाई की उनकी इस प्रशंसा के अर्ध्य को सामने वाली कैसे लेगी।। साफ मन और स्वछ हृदय से की गई प्रशंसा को राजा की माँ ने किसी और ही ऐनक से देखा और चोट खा बैठी।।

          ***********************

  बांसुरी को स्वस्थ हुए दिन बीत गये,वापस जीवन अपने ढर्रे पर चलने लगा।।कॉलेज के इम्तिहान भी निपट गये,अब बांसुरी का अधिकतर समय घर पर ही गुजरने लगा।।
       ऐसे में बुआ जी वापस अपने पुश्तैनी काम में जी जान से जुट गई,,घर बैठी जवान लड़की उनकी नज़र में सबसे बड़ी बोझ थी,जैसे भी इस छोकरी को भी पार लगाना था और अपने भाई भावज के लिये गंगा स्नान का मार्ग प्रशस्त करना था।।
   
    पहले बांसुरी मोटी थी अब पतली हो चुकी थी,लेकिन उसकी इस अवनति  से बुआ जी पर कोई विशेष प्रभाव नही पड़ा,वो अभी भी चुन चुन के ऐसे ही रिश्ते सहेज के भाभी के सामने परोसती की प्रमिला को उबकाई आ जाती पर रिश्ते के सम्मान को निभाने वो ननंंद के सामने चुप रह जाती।


     
             बांसुरी अब पहले की तरह अपनी तीखी ज़बान के प्रहार से बुआ को लहू-लुहान नही करती, बल्कि जैसे ही उसका विवाह प्रसंग छिड़ता वो उठ कर अपने कमरे में किसी किताब को खोल उसमें दुबक जाती।।एक शाम ऐसे ही बांसुरी जब बुआ जी के वार्तालाप से ऊब कर ऊपर चली गई तो उसके कुछ देर बाद प्रमिला भी ननंद को चाय का कप पकड़ा कर बाँसुरी की चाय लिये उसके कमरे में चली आई

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” का हुआ बंसी ,देख रहे हैं आजकल ब्याह का बात सुन के बड़ी अनमनी हो जाती हो,,कुछ मन मे चल रहा का??”

” अरे नही अम्मा,हमारे मन में का चलेगा।।पहले सोचा करते थे बैंक की परीक्षा देंगे नौकरी करेंगे पर अब सोच रहे जैसा बुआ और तुम सब ठीक समझो वही कर लेंगे।”

” अरे काहे वही कर लोगी!!! तुम्हरी बुआ तो सादी कराने पीछे पड़ी हैं,तो कर लोगी किसी से भी सादी।।”
   
बांसुरी ने चुपके से हाँ में सिर हिला दिया,अपनी बड़बोली बांसुरी को ऐसे चुपचाप देख प्रमिला का कलेजा मुहँ को आने लगा__

   ” अगर मन में कोई और है तो बता दो बंसी ,हम तो माँ हैं तुम्हारी,,कभी तुम्हरे साथ कुछ गलत ना होने देंगे।।
     तुम कहो तो राजा के घर सन्देसा भिजाये का।”

” काहे का सन्देश माँ?? जैसा सोच रही हो वैसा कुछ नही है।।राजा और हम सिर्फ दोस्त हैं ।”

अभी माँ बेटी अपनी बातों में लगी थी कि निरमा ने कमरे में प्रवेश किया__” प्रनाम चाची।”

” खुस रहो बिटिया!! आओ बैठो,तुम लोग बातें करो हम चाय भेजते हैं तुम्हारे लिये।”

  निरमा हंसते हुए आकर बांसुरी के पास बैठ गई ।

  ” क्या बात है छुपी रुस्तम!! क्या बोल रही थी चाची?? राजा भैय्या के घर रिश्ता भेजा जा रहा है हमारी राजकुमारी का,वाह वाह क्या बात है।”

  ” पगला गयी हो क्या निरमा,कुछ भी बोलती हो?”

  ” अरे तो बुराई क्या है राजा भैय्या में?? तुम जबर्दस्ती का ये सीरियसनेस का चोला जो ओढे बैठी हो ना,उतार फेन्को।।बहुत हुआ समझी ,वो भास्कर सर का शोक मनाना बन्द करो अब।।”

   ” तुमसे किसने कहा हम शोक मना रहे।”

   ” तुम्हारी शकल बता रही,अभी नीचे तुम्हारी बुआ जी मिली थी,मुझे एक से बढ़कर एक वाहियात लड़कों के फोटो दिखाने लगी__ बोलती हैं ये देखो कैसे हीरा मोती छाँट के लायी हूँ अपनी बंसी के लिये।मेरा मन किया बोल दूँ कद्दू !! इत्ते पसंद आ रहे तो किसी एक को चुन के आप ही फेरे फिरा लो,,पर संस्कार रोक देते हैं हमें,कुछ जादा बोलने से।”

  निरमा की बात सुन बांसुरी हँस दी__” देखो निरमा शादी तो करनी ही है,पापा चाह रहे उनके रिटायर होने के पहले पहले हमारा ब्याह भी हो जाये,हमारे लिये चिंता करते रहते हैं बेचारे! इसिलिये हमने भी अम्मा को शादी के लिये हाँ कह दिया है।।अगर हमारी किस्मत में पढ़ना और नौकरी करना बदा होगा तो शादी के बाद भी पढ़ लेंगे और कर लेंगे नौकरी।”

” बंसी तुम तो एकदम ही बदल गयी हो!!,अच्छा सुनो बड़े दिनों के बाद हमें घर से निकलने का मौका मिला है,चलो ना जिम चलते हैं प्रेम हमारा रस्ता देख रहा वहाँ ।।”

    बांसुरी ने मुहँ धोया कपड़े बदले और फेयर ऐण्ड लवली लगा कर तैयार हो गयी

” क्या बात है बंसी ,,पहले तो ये सब क्रीम वीम तुम्हे ढ़कोसला लगता था,अब क्या राजा भैय्या के चक्कर मे,हैं??”

” जी नही हमारी अम्मा के चक्कर में ये पोत रहें हैं आजकल!! हमारी गोरी नारी अम्मा को अपनी कलूटी बिटिया पे बड़ा तरस आता है,इसिलिये ये खरीद लायी,अब वो लायी है प्यार से इसीलिये लगा लेते हैं,अब चलो,वर्ना तुम्हारी अम्मा तुम्हें ढूँढते यहाँ चली आयेंगी।”

     जिम में शाम के पांच बजे की रौनक पसरी हुई थी,राजा अपने ऑफिस में बैठा था कि निरमा के साथ बांसुरी ने प्रवेश किया।।बांसुरी और राजा में पहले से ही तगड़ी दोस्ती थी पर अब कुछ हल्का फुल्का दुराव छिपाव भी ना रहा था।।
  
      अपनी तबीयत फिर परीक्षाओं के कारण कुछ समय के लिये जिम से अवकाश लेने वाली बांसुरी अब तक जिम मे वापसी नही कर पायी थी।।

  ” हाँ तो जिम कबसे शुरु करने का विचार है बंसी। दुबली हो गयी तो छोड़ दिया जिम ??”

  ” अरे नही राजा,तुम्हें बताया तो था परीक्षाओं में लगे थे,अभी एक हफ्ता तो हुआ है सब निपटे,बस अब कल से शुरु कर देंगे,हम ज़रा एक राउंड घूम कर आते हैं,जिम का चक्कर लगा लें,तुम बैठो निरमा।”

  निरमा प्रेम और राजा को वहीं छोड़ बंसी बाहर निकल गयी।।

” राजा भैय्या आपसे एक बात कहें ,हमें लगता है अब बांसुरी ज्यादा दिन तक जिम नही आयेगी,उसके घर में तो उसके लिये खूब जोर शोर से रिश्ता देख रहें हैं ।”

  ” अच्छा,,तो?? बांसुरी भी तैयार है क्या शादी के लिये,वो तो पढ़ना लिखना नौकरी करना चाहती थी।”

” चाहती थी! पर अब शादी के लिये तैयार है,ये देखिये ये फोटो, बंसी की बुआ जी की नज़र बचा के हम ले उड़े ,कैसा उजड़ा चमन लड़का है!! तानपूरा भी नही लग रहा और हमारी बांसुरी से शादी करेगा।।”

  फोटो देख कर राजा का चेहरा लटक गया__” इससे तो अच्छे हम हैं ।”

  ” कुछ कहा राजा भैय्या आपने।” निरमा के सवाल पर हड़बड़ा कर राजा ने फोटो निरमा को वापस कर दिया

  ” नही! कुछ नही।”

” वैसे बंसी की अम्मा तो उससे आपके बारे में भी पूछ रही थी,कि आप बंसी को कैसे लगते हैं ।।”

  ” क्या बात कर रही हो निरमा?? “

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  ” हाँ हम सच कह रहें हैं,पर हमारी बंसी है एक नम्बर की गंवार , कुछ नही बोली मुहँ में कुल्फ़ी जमाई बैठी रही।।हम भी सोचे भुगतो फिर,,जब इत्ते अच्छे रिश्ते को सुन के भी चुप बैठी रहेगी तो मिलेगा ऐसा ही कोई साम्बा और कालिया,हम क्या करें।”

  राजा नीचे सिर किये कुछ सोचते हुए मुस्कुराता रहा

  ” भैय्या जी! अब बस मुस्कुराने से कुछ नही होना जाना है।।आपको ही पहल करना पड़ेगा वर्ना बाद में पछताने के कुछ हाथ ना लगेगा।”

  ” निरमा तुम तो पीछे ही पड़ गयी हो,अरे अगर भैय्या जी के मन मे कुछ होगा ही नही तो वो बेचारे का करें।।तुम तो जबरिया उतर आयी हो यार।।चुप भी करो अपना बांसुरी पुराण,भैय्या जी बस दोस्त समझते हैं,और कुछ नही समझीं।क्यों भैय्या जी ठीक कहे ना??”

   ” अच्छा ऐसा है तो काहे उस दिन जैसे ही बन्सी चक्कर खा के गिरी तो सीधा उसे लिये अस्पताल भागे,काहे इत्ता उसकी बात सुनते हैं,काहे उसकी हर बात मानते हैं ।”

   ” क्योंकि भैया जी किसी का एहसान भूलते नही इसलिये,वो पढ़ाई है ना भैय्या जी को इसलिये उसकी मदद करते हैं,और कोई बात नही है,प्यार व्यार बहुत दूर की बात है,भैय्या जी तो उस मुटल्लो से बात कर लेते हैं ढंग से,वही बड़ी बात है।।

  ” अरे झगड़ा बन्द करो तुम दोनो यार!! हम देख लेंगे क्या करना हमें ।।वैसे प्रेम हमें लगता है निरमा सही कह रही…..यार एक बात बोलें हमे लगता है हमे बांसुरी की आदत सी पड़ गयी है,वो जिम नही आती तो जिम मे मन नही लगता,हमारे हर काम में उसकी राय लेना हमें अच्छा लगता है,और ये भी लगता है कि वो कभी गलत राय नही देगी,,हम भी सोच रहे कि एक बार बंसी से बात कर ही लेते हैं ।”

राजा अपनी बात पूरी कर भी नही पाया था कि बन्सी अन्दर आ गयी।।

  ” किस बारे में हमसे बात करने की सोच रहे राजा?”

  ” कुछ नही बंसी बाद में बताएंगे,, आओ लो कॉफ़ी पी लो,,आज तुम सब के लिये इंडियन कॉफ़ी हाऊस से कॉफ़ी मँगवाई है।।”

  ” क्या बात है राजा !! आज बड़े खुश लग रहे जो कॉफ़ी पिला रहे हम सब को।”

  चारों मुस्कुराते हुए कॉफ़ी का मज़ा लेने लगे बाहर जिम में गाने की पंक्तियाँ सुनाई दे रही थी।।

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तुम सिखा रहे हो,तुम सिखा रहे हो,जिस्म को हमारे रूहदारियां …….काफिराना सा है ,इश्क़ है या क्या है।।”

क्रमशः

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aparna..

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लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

3 विचार “शादी.कॉम- 16” पर

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