शादी.कॉम-17

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  “ तुम सिखा रहे हो,तुम सिखा रहे हो
   जिस्म को हमारे रूहदारियां……
   काफिराना सा है,इश्क़ है या क्या है।।”

  गाने के बोलों के साथ ही राजा के मन में भी बांसुरी बजने लगी।।
    कॉफ़ी खतम कर बाँसुरी और निरमा उठ खड़े हुए घर वापसी के लिये।।
    राजा और प्रेम दोनों को छोड़ने बाहर तक आये_

” बंसी आज तुम्हें मेसेज करेंगे,फोन अपने पास ही रखना,तुम इधर उधर रख कर भूल जाती हो।”

  राजा की बात का जवाब बाँसुरी की मुस्कान ने दिया,उसने हँस के सिर हिला के हामी भर दी,और हाथ हिला के बाय करती हुई चल दी।

    घर पहुंचते ही बांसुरी ने फोन को चार्ज पे लगा दिया।।नीचे माँ के साथ रसोई का काम निपटाते भी उसका पूरा ध्यान फोन पर ही था,उसने दो तीन बार अपनी अम्मा से पूछा भी__” अम्मा हमारा फोन बजा क्या”

” नही लाड़ो हमें तो ना सुनाई दिया।”

आखिर सब्र की इन्तिहा हो गयी,बाकी दिनों में  रात के खाने के बाद भी घंटों अपनी माँ के साथ इधर उधर की बतकही करने वाली बांसुरी आज खाना निपटते ही तुरंत ऊपर अपने कमरे में चली गयी।।

  रात के नौ बज चुके थे,पर राजा का कोई मेसेज अब तक नही आया था__” हद दर्जे का भुलक्कड़ है, खुद ही बोला मेसेज करूंगा और गायब है।”
   बांसुरी ने राजा का लास्ट ऑनलाइन चेक किया वो भी शाम का 5 बजे दिखा रहा था,मतलब उसके बाद से राजा ने फोन छुआ तक नही।दिल बहलाने के लिये बंसी ने एक किताब खोल ली,और बिना रूचि के भी उसे पढ़ने के लिये प्रयास करने लगी।पर घूम फिर कर दिमाग फ़ोन की तरफ ही जा रहा था।।
   उसने एक बार फिर फोन उठाया ,साधारण टेक्स्ट मेसेज चेक किया,वॉट्सएप्प चेक किया,कहीं कुछ नही था,समय देखा नौ बजकर दस मिनट हुए थे।।
     ऐसा कैसे हो सकता है ,क्या सिर्फ दस मिनट पहले ही फ़ोन देखा था,पर ऐसा लग रहा जैसे एक घंटा बीत गया हो,उफ्फ आज घड़ी ही पिछड़ गयी है या मैं ही कुछ ज्यादा उतावली हो रही। ऐसा सोच के बंसी को खुद पर थोड़ी शर्म सी आयी और उसने यही सोचा कि इस द्वंद से बचने का उपाय है कि चादर को तान कर आराम से सो लिया जाये,जब मेसेज आयेगा देखा जायेगा।।

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   बांसुरी खिड़की की ओर करवट किये लेट गयी,पर आंखों में नींद कहाँ __ जिन आंखों में सपने बसते हैं उनमें फिर नींद नही रुकती।।
    खुली आंखों से पूर्णमासी का चांद देखते हुए मन ही मन कोई गाना गुनगुनाती बन्सी बड़ी देर तक चंदा को निहारती रही,फिर उसे महसूस हुआ कि अब बहुत रात बीत चुकी है,अब कोई मेसेज नही आने वाला,अब उसे सच में सो जाना चाहिये,पर सोने से पहले पानी पीने को उठी बांसुरी ने सोचा मेसेज तो नही पर हाँ समय कितना हो रहा ये जानना आवश्यक है,उसने मोबाईल पे दिखा रहे समय पे नज़र डाली__ साढ़े नौ

    अरे ऐसे कैसे चमत्कार हो रहा,इतनी देर तक लेटी पड़ी रही और अब समय देख रही तो बस साढ़े नौ!!
क्या उसे लेटे हुए सिर्फ बीस मिनट ही बीता है,उसे लगा मोबाईल की घड़ी सही वक्त नही दिखा रही,उसने दीवार घड़ी पर नज़र डाली,संयोग से वही समय उस घड़ी ने भी दिखाया।।अब क्या किया जाये,,बंसी को खुद पर खीझ भी हो रही थी और गुस्सा भी आ रहा था,ऐसा इतना बेताब होने की क्या ज़रूरत है,ऐसा लगा जैसे खुद से ही कोई युद्ध लड़ रही हो,बन्सी ने उठ कर रेडियो पे एफ एम ट्यून किया और खिड़की पर बैठ गयी__

       “नमकीन सी बात है हर नई सी बात में
        तेरी खुशबू चल रही है जो मेरे साथ में
        हल्का-हल्का रंग बीते कल का
        गहरा-गहरा कल हो जाएगा (हो जाएगा)
       आधा इश्क़, आधा है, आधा हो जाएगा
        कदमों से मीलों का वादा हो जाएगा।।

  गाने को सुनते हुए बंसी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी,वहीं लेटे लेटे वो जाने कब सो गयी।।

   अगले दिन सुबह उठते ही सबसे पहले उसे याद आया रात राजा का मेसेज आने वाला था,पर रात जब तक वह जाग रही थी कोई मेसेज नही आया था,उसने लपक के फ़ोन उठाया फ़ोन बन्द पड़ा था….मेसेज देखने की हड़बड़ी में फोन चार्जिन्ग पे लगाना ही भूल गयी।।सुबह सुबह खुद पर ही गुस्सा आने लगा__
       पता नही क्या मेसेज करने वाला था,राजा को भी आजकल क्या हो गया है,क्या ज़रूरत थी ऐसे सस्पेंस क्रियेट करने की,अरे ना बोलता कि रात मेसेज करूंगा,सीधे मेसेज ही कर देता।।

” बंसी ! अरी का बड़बड़ा रही हो सुबह सुबह!! आज तुम नही उठी तो हम ही तुम्हारे लाने चाय बना लाये।।लो पी लो और तैयार हो जाओ,जिम नही जाना का??”

  ” हाँ जायेंगे ना अम्मा!! “

” दस बजे तक तो आ जाओगी ना,तुम्हें नाश्ता करा के फिर हमें गुड्डन के घर जाना है,दस दिन बाद उसका तिलक चढ़ना है,तो आज उसकी अम्मा बुलाई है,सारी तैयारी जोड़ने।।”

” हाँ दस तक तो आ जायेंगे, तुम चले जाना अम्मा  ,हम नाश्ता कर लेंगे, इतनी चिंता ना किया करो।”

  ” अरे काहे ना करे!! अब कुछ दिन में तुम भी बियाह कर चली जाओगी,फिर कहाँ तुम्हारी देखभाल कर पायेंगे,फिर ससुराल वाली हो जाओगी, उनकी मर्ज़ी से आना उनकी मर्ज़ी से जाना, फिर हमारे हाथ में का रहेगा।। अभी अपनी मन मर्ज़ी से तुम्हे खिला पिला तो सकते हैं ।”

” तुम तो ऐसे इमोशनल हो रही हो अम्मा जैसे कल ही हमारा ब्याह हुआ जा रहा??”

  ” सब सकुन साइत सही रहा तो एक महीना में तुम्हरा ब्याह भी हुये जायेगा,तुम्हरे पापा के दोस्त हैं ना वर्मा अंकल उन्होनें एक बहुत अच्छा लड़का बताया है,लड़का रेल्वे में नौकरी करता है,दू जन भाई हैं बस.. ये छोटा है,माँ बाप बड़के  के साथ गांव में रहते हैं ,और ये लड़का यहीं इसी सहर मे रहता है,हमरे लिये भी अच्छा रहेगा तुम यहीं के यहीं बिदा होगी तो।।”

   बाँसुरी सिर झुकाये बैठी चाय पीती रही,अभी इस मौके पे कुछ भी बोलने का उसका जी ना किया,बस बिना किसी कारण के मन खट्टा हो गया।।,उसे चुपचाप देख उसकी अम्मा नीचे गयी और एक फोटो लिये वापस आयी और उसके सामने रख दी…

    ” कैसा है?”

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   बांसुरी का इस बारे में बात करने का बिल्कुल मन नही था पर बात टालने के लिये उसने ” ठीक है” बोलकर पीछा छुड़ाना चाहा और वहाँ से उठ गयी।।उसके बाथरूम में घुसते ही प्रमिला के चेहरे पे हल्की सी मुस्कान दौड़ गयी और फोटो उठाये वो नीचे चली गयी।

             ************************

   इधर बाँसुरी से जाने कैसे राजा बोल तो गया कि मेसेज करेंगे पर रात में अपने कमरे में बैठे जाने कितनी बार हुआ कि राजा  ने मोबाइल उठाया और कुछ लिखा फिर डिलीट किया,फिर लिखा और मिटाया,,यही सिलसिला चल रहा था कि उसकी अम्मा ऊपर चली आयी।।

  ” अरे राजा तुम हियाँ बैठे हो,चलो नीचे तुम्हरी भौजी के बाऊजी आये हैं,रेखा के गमना पे विचार करने ।”

” रेखा के बिदाई से हमारा का लेना देना अम्मा?? हम का करेंगे बड़े बुजुर्गों के बीच??”

   ” तुमको कोनो सलाह मसवीरा के लिये नही बुला रहे,तुम जाओ भाग के पाड़े जी (पण्डित जी) को बुला लाओ।”

  बिल्कुल ही बिना मन के राजा उठा और नीचे उतर गया।
     पाड़े जी को सादर लेकर आया,उन्हें सम्मान पूर्वक घर की बैठक में बैठा कर लम्बे लम्बे डग अपने कमरे की तरफ बढा ही रहा था कि पीछे से बाऊजी ने आवाज़ लगायी __
  
    ” अरे राजा सुनो!! ज़रा चौक से सब के लिये कुल्हड़ वाली रबड़ी ले आओ,समधि जी को बड़ी पसंद है।”

   दिमाग के अन्दर एक ज़ोर का ज्वालामुखी फूटा ज़रूर पर गुस्से का लावा किसी को दिखा नही, चुपचाप अपने मन को समेट राजा वहाँ से जाने लगा तो भाभी के बाऊजी ने उसे आवाज़ लगायी __

   ” राजकुमार!! बेटा रुपये तो हमसे ले जाओ,भई खुशी राजी का मौका है,मुहँ तो मीठा हम ही करायेंगे ना।।”

  ” कैसन बात कर रहे समधि जी, रेखा का हमार बिटिया नही है,जाओ जाओ राजा ,तुम ले आओ।”

  हम रुपये देंगे,हम रुपये देंगे कर के  दोनो समधि उलझे ज़रूर रहे पर पूरे पन्द्रह मिनट भिड़ने के बाद भी किसी की अंटि से अधन्ना भी नही निकला, उन्हें बहस में उलझा छोड़ राजा अपनी बाईक उठा कर निकल लिया,और कुल्हड़ वाली रबड़ी के साथ साथ चौरसिया के यहाँ से बनारसी पान बीड़े का बंडल भी बंधवा लाया,क्योंकि कहीं ना कहीं वो समझ गया था कि इस गोष्ठी का समापन पान के साथ ही होगा।।

    सब कुछ सही हाथों में यानी अपनी अम्मा के हाथों में सौंप के जब राजा ऊपर अपने कमरे में पहुंचा तो देखा बड़े भैय्या उसके कमरे में अपने ब्याज के रुपैये के देयक लोगों की लिस्ट थामे राजा का ही इन्तजार कर रहे थे,उसे देखते ही उसके सामने हिसाब का बही खाता शुरु कर दिया,किसने कितना चुका दिया,किसने कुछ और समय की गुजारिश की ,सब कुछ बड़े भैय्या को समझा बुझा के संतुष्ट करने में लगभग डेढ़ घन्टे और बीत गये।।

” चलो फिर ठीक है,थोड़ा अपने लड़कों को भेज वसूली करा लेना टाईम पे,,हम अब जाते हैं रात बहुत हो गया है,तुम भी सो जाओ,हम देखे ज़रा ससुर जी का क्या व्यवस्था करना है।”

राजा ने हाँ में सिर हिला दिया,भैय्या के जाते ही समय देखा साढ़े ग्यारह हो चुके थे,फिर भी बड़ी आस से राजा ने मेसेज करने फ़ोन निकाला कि नीचे से बड़के भैय्या की आवाज़ आयी।।

” राजा गाड़ी निकालो ज़रा!! पापा जी अभी ही घर निकलने कह रहे,रुकने मना कर रहे,,चलो उन्हें छोड़ आते हैं ।।”

  ” आया भैय्या।”

      लक्ष्मण ने भी कभी राम को किसी काम के लिये मना किया है भला!!

           राजा को पता था कि भाभी का घर लगभग 45 किलोमीटर दूर था,आना जाना मिला कर डेढ़ दो घंटा तो लग ही जाना था,फिर भी बड़े भैय्या की आज्ञा शिरोधार्य कर दोनों भाई समधि जी को छोड़ने निकल गये।।
      वापस आने के बाद थकान से कब नींद लग गयी ध्यान ही नही रहा,सुबह नींद नही खुली और राजा जिम नही जा पाया।।

            ***********************

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    “पहले मैं समझा कुछ और वजह इन बातों की
    लेकिन अब जाना कहाँ नींद गयी मेरी रातों की
    जागती रहती हूँ मैं भी, चांद निकलता नही
    दिल तेरे बिन कहीं लगता नही,वक्त गुज़रता नही।    क्या यही प्यार है….. हाँ यही प्यार है।।”
  

    जिम में ट्रेड मिल पे चलते चलते बांसुरी को 20 मिनट हो गये,वो बार बार पलट कर दीवार घड़ी पे नज़र डाल लेती,समय गुज़रता जा रहा था,जिम की भीड़ बढ़ती ही जा रही थी,सब आ रहे थे बस एक वो ही नही था।।

     एक बार बंसी ऑफिस में भी झांक आयी,पर राजा वहाँ भी नही था,,कल शाम के बाद से कोई बात नही हुई थी,जाने कैसी बेचैनी थी जो रह रह कर गुस्से में बदलती जा रही थी।।
  
    ” क्या यही प्यार है” गीत को सुबह से जाने कितनी दफा प्रिंस से रिवाइंड करवा करवा के सुना जा रहा था,पर भीड़ बढ़ने के साथ ही बंसी ने गाने को वापस बजाने से मना कर दिया।।

  सिर्फ बीस मिनट में ही बंसी बेइंतिहा बोर होने लगी, और ट्रेड मिल से उतर कर ऑफिस रजिस्टर में अपने नाम के आगे साईन कर वहाँ से जाने लगी।।
       
    ” का हुआ बंसी ?? आज और कुछ नही करोगी का?? जल्दी निकल ले रही हो।।”

    ” हाँ प्रिंस!! तबीयत खराब लग रही,इसलिये आज मन नही कर रहा,घर जाकर आराम करेंगे।”
 
   बंसी दरवाजे तक पहुंची ही थी कि दरवाजा खोल राजा सामने खड़ा था।।

   ‘ ये बचपन का प्यार अगर खो जायेगा
     दिल कितना खाली खाली हो जायेगा
     तेरे ख़यालों से इसे आबाद करेंगे
     तुझे याद करेंगे जब हम जवां होंगे जाने कहाँ होंगे’

   गीत के बोल सुनने के साथ दोनो कुछ देर एक दूसरे को देखते रह गये।।

” कल मेसेज काहे नही किये।”

” काहे तुम रस्ता देख रही थी क्या??”

” हम !! तुम्हारे मेसेज का रास्ता देखेंगे,और कोई काम नही है क्या??”

” तो पूछी काहे?”

” ऐसे ही पूछ लिये भई ,कोई पाप हो गया क्या”

” नही नही,कोई पाप नही हुआ,तुम इत्ती जल्दी कहाँ चल दी,चाय तो पी लो।।”

” भैय्या जी बंसी का तबीयत खराब था,इसीसे घर जा रही बेचारी आराम करने।।आईये आपके लिये चाय तैय्यार है।”

राजा ने तबीयत की बात सुन बंसी को देखा और आंखों ही आंखों में हाल पूछा,बंसी ने भी सिर हिला के सब ठीक है कहा और राजा के पीछे पीछे ऑफिस में प्रवेश कर गयी।।

दोनो साथ साथ चाय पीते रहे….फिर राजा ने ही बात छेड़ी __

     “बंसी तुमको पता है ,जैसा तुम हमे सोचती हो ना हम वैसे सीधे सादे लड़के नही हैं ।।बहुत दुर्गुन हैं हममें ।।”

बाँसुरी राजा की बात सुन खिलखिला कर हँस पड़ी

” जैसे?? कोई एक आध दुर्गुण बताओ,हम भी तो जाने।।”

  राजा सिर नीचे किये थोड़ी देर अपना हाथ अपने बालों पे फिराता रहा फिर बड़ी हिम्मत जोड़ के बोलना शुरु किया__

    ” लोगों को डरा धमका के वसूली करते हैं,बड़के भैय्या के ब्याज के पैसों की।।और इस सब में कई बार गाली गलौच सब करना पड़ता है,जवान बुज़ुर्ग किसी को नही छोड़ते,हमारे लिये ब्याज की लिस्ट का एक एक आदमी हमारा दुसमन हो जाता है,।।
पढ़ाई लिखाई का हमारा हाल तो तुमको पता ही है,और इसके अलावा एक और बात है…..”

  ” बोलो राजा!! हम सुन रहे हैं ।”

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   ” हम जब स्कूल में थे ना तब एक लड़की हमे बहुत भा गयी थी,बहुते जादा,उस टाईम तो लगने लगा था उसके बिना जिंदा नही रह पायेंगे पर वो स्कूल बदल कर चली गयी,और हम यहीं रह गये……शायद हम अपनी स्कूल की जिंदगी छोड़ना ही नही चाहते थे इसिलिए फेल होते रहे और स्कूल में ही पड़े रहे,स्कूल में हर जगह उसकी यादें थी।। ,हमे तो अभी कुछ समय पहले तक यही लगता था कि हम अब भी उसिसे प्यार करते हैं,पर कुछ दिन पहले हमें समझ आ गया की वो बचपना था हमारा,,वो तो अपनी जिंदगी में बहुत आगे बढ़ चुकी है,और हमें भी बढ़ जाना चाहिये,तुम जानती हो हम तुम्हें ये सब क्यों बता रहे??”

बांसुरी ने बिना कुछ कहे ना में सिर हिला दिया

” क्योंकि हम चाहते हैं तुम्हारे हमारे बीच कोई बात छिपी ना रहे,तुम्हे सब मालूम होना चाहिये।।
    
        बाँसुरी तुम्हारी आदत सी पड़ गयी है हमें,तुम दो दिन भी जिम नही आती तो जिम ऐसा सुनसान लगने लगता है,जैसे कोई है ही नही यहाँ ।।हमें  पता है तुम्हारे घर वाले तुम्हारे लिये रिश्ता देख रहे,हमारे घर वाले भी!! हमने सोचा किसी अंजान से शादी करोगी उससे अच्छा है हमसे ही कर लो,हम तुम्हारी पढ़ाई लिखाई किसी चीज़ को नही रोकेंगे।।पर हम चाह रहे थे पहले हम अपनी अम्मा से तुम्हरे बारे में बात कर लें ।।
      अगर अम्मा हाँ बोल दी तो ठीक है वर्ना जैसे पहले दोस्त थे वैसे दोस्त ही बने रहेंगे,,क्या बुराई है इसमें ।।”

  बांसुरी अचरज से राजा का मुहँ देखती रह गयी,ये कैसा प्रपोसल था,अगर अम्मा हाँ बोली तो हाँ वर्ना फिर से दोस्त!!! एक बार एक दूसरे को अपने दिल की बताने के बाद क्या वापस पहले जैसी दोस्ती सम्भव है??

बांसुरी बिना कुछ कहे ही उठ गयी और ऑफिस से बाहर निकल गयी,राजा उसके पीछे भागता चला आया__
     ” क्या हुआ बांसुरी?? कोई बात बुरी लगी क्या??हम कुछ गलत बोल गये क्या??”

  ” नही राजा!! तुम्हारी भावनाओं की कद्र करते हैं,तुम बात कर लो अम्मा जी से,क्या बोलती हैं बताना!! हम आज रात तुम्हारे मेसेज का इन्तजार करेंगे।।आज भूलना मत मेसेज ज़रूर करना ।”

” अरे हम तो कल भी नही भूले थे,वो तो घर वाले एक के बाद एक काम पकड़ाते चले गये कि समय ही नही मिला,पर सुनो आज हम अम्मा से बात कर ही लेंगे।।”

दोनों बात कर ही रहे थे कि भैय्या जी का मोबाइल थामे प्रिंस दौडता चला आया__

” भैय्या जी रेखा दीदी का फोन आ रहा है।”

” हेलो!! हाँ रेखा,हाँ साथ ही है,हाँ बोल देंगे,अच्छा लो तुम्ही बोल दो।”

राजा ने फोन बांसुरी को पकड़ा दिया,लगभग पांच मिनट की बातचीत के बाद बांसुरी ने फोन वापस कर दिया__

  ” कल रेखा की बिदाई है,उसीके लिये बुला रही है।”

” तो चलो ना हम सब भी तो जायेंगे कल,तुम भी हमारे ही साथ चलो।”

” और अम्मा जी??” बांसुरी के सवाल पर राजा मुस्कुरा दिया__

” अम्मा तो जायेंगी ही,भई अब तुम्हें रहना तो उन्हीं के साथ है।”

” ओहो हीरो जी इतना उड़िये मत!! अभी उन्होनें हाँ नही की है,,अगर उनकी ना हुई तो हम पहले जैसे सिर्फ दोस्त ही रह जायेंगे,इसलिये थोड़ा जज्बात पे काबू रखिये।।”

   मुस्कुराती हुई बांसुरी घर चली गयी,राजा जिम की ओर पलटा तो प्रिंस खड़े खड़े मुस्कुरा रहा था और प्रेम हाथ बांधे खड़े राजा को घूर रहा था।।

  दोनो से नज़र बचाते हुए राजा अन्दर ऑफिस में चला गया,,कुछ ज़रूरी काम निपटाने के बाद बांसुरी को ” घर पहुंच गयी या नही?” का मेसेज किया और जैसे ही उधर से जवाब आया,एक नया सवाल भेज दिया……दोपहर हुई फिर शाम ढली और रात हो गयी पर राजा और बाँसुरी के सन्देशों का अथक आदान प्रदान चलता रहा।।

    जब एक बार किसी रिश्ते को प्यार की राह में कुछ आगे बढ़ा दिया जाये तब वो वापस दोस्ती के चौक पर पुन: वापसी नही कर पाता,,इस बात से अंजान दोनो नये नवेले प्रेमी शाम भर और फिर रात भर अपनी ही बातों में खोये रहे।।
     बचपन की बातें,घर परिवार की बातें,दोस्तों की बातें,अम्मा ,बड़के भैय्या,रूपा भाभी,वीणा जिज्जी, बुआ जी,पापा का ऑफिस, पिंकी की पढ़ाई, रतन का किस्सा ,निरमा और प्रेम की बातें …..उफ्फ कितनी सारी बातें थी दोनो के बीच।।रात में एक मौका ऐसा भी आया जब दोनों को ही फ़ोन को चार्जींग में लगाये लगाये ही बात करना पड़ा …..
    पर वो रात गुजरते गुजरते दोनो को एक नयी सुबह दे गयी।।

   दोनो में कितना कम सम सा था,और कितनी अधिक थी विषमताएं!! पर फिर भी एक वस्तु थी जो दोनों के पास लगभग बराबर थी!! एक दूसरे के लिये अपार प्रेम और असीम सम्मान!!उस एक कच्चे धागे ने ऐसी मजबूती से दोनों को बान्ध लिया कि अब हर स्वतंत्रता पे ये बंधन भारी पड़ गया।।

             **********************

  ” अब तक सोये पड़े हो लल्ला!! उठो राजू !! देखो समधि जी के घर जाना है आज रेखा का बिदाई है ना,उठो उठो बेटा आठ बज गया है,लो चाय पियो और जल्दी से तैयार हो जाओ।”

    भोर में चार बजे तो प्रेमी जोड़ा थक कर सोया था,आठ बजे अम्मा की आवाज़ सुनते ही राजा उठ बैठा।।आज सुबह भी अलग ही रंग में रंगी थी, मुस्कुरा के अम्मा के गले में बाहें डाले झुलते हुए राजा कुछ गुनगुनाने लगा।।

” बस बस ,लड़ियाओ नही,जाओ बिटवा नहा धो लो।”

” अम्मा तुमसे एक बात पूछनी थी।”

” हां पूछ लेना बाद में,हम जा रहे अभी तैयारी देखने।।” राजा की बात पूरी सुने बिना ही माता जी काम निपटाने भागती चली गयी।।

  नौ बजे तीन तीन गाड़ियों पे सवार अवस्थी परिवार समधियाने की ओर निकल पड़ा, राजा ने पहले ही रूपा को रेखा द्वारा बांसुरी को बुलाये जाने के बारे में बता दिया था,और रूपा को बांसुरी को अपने साथ बैठाने के लिये मना भी लिया था,अपनी गाड़ी में बांसुरी के लिये एक सीट रिसर्व रखे राजा ड्राईविंग सीट पर बैठा खुश था कि अम्मा जी बड़ी सी मिठाई की टोकरी संभाले राजा की गाड़ी के निकट चली आयी ।।

  ” खोलो दरवाजा,,ए राजा ,सुन नही रहे का।’

” अम्मा तुम इसमें बैठोगी क्या?? तुम उसमें भैय्या के साथ बैठ जाओ,बाऊजी भी उसिमे हैं।”

” हाँ पता है तुम्हरे बाऊजी उसमें बैठे हैं तभी तो तुम्हारी गाड़ी में आ गये,खाली तो है एक सीट ।”

  ” अरे अम्मा जी वो बांसुरी है ना लल्ला जी की सहेली वो भी जायेंगी हमारे साथ!! उन्ही के लिये लल्ला जी ….

” अरे बाँसुरी के लिये कब बोले हम भाभी,आप भी कुछ भी बोलती हैं,आओ बैठो अम्मा!! बाँसुरी पीछे भाभी के साथ बैठ जायेगी।।”

  तभी युवराज राजा की गाड़ी के पास चला आया__
” कोई परेशानी छोटे?? क्या बाँसुरी को भी लेना है क्या?? तो ऐसा करो ये रधिया और श्यामा को हम अपनी गाड़ी में ले लेते हैं,चलो तुम दोनो वो फल फुल की टोकरी में उठा के हमारी इनोवा में आ जाओ।”

  एक बार फिर  बड़के भैय्या  अपने लाड़ले छोटे भाई के लिये संकटमोचन बन अवतरित हुए और उसकी उलझन को निपटा चलते बने।।

   बांसुरी के घर के आगे अपनी गाड़ी रोके राजा ने बंसी को फ़ोन लगाया ही था कि प्रमिला दरवाजा खोले बाहर चली आयी,सबको सादर अभिवादन कर उसने बड़े प्रेम से राजा की अम्मा को प्यारा सा उलाहना दिया__
        ” बाहरे से चल देंगी जिज्जी,भीतर नही आयेंगी, सुदामा की  कुटिया में भी जरा चरण फिरा दीजिये।।”

   प्रमिला के स्वभाव में ही मिसरी घुली थी,इससे अंजान सुशीला को यही लगा कि ये अस्वाभाविक माधुर्य सिर्फ और सिर्फ उसके सजीले बेटे को फांसने के लिये ही है,इसिलिए उसने अपने चेहरे को यथासम्भव कठोर दिखाते हुए कड़े शब्दों मे अपनी व्यस्तता की दुहाई दे डाली__

   ” ऐसे जगह जगह रुकते रहे तो बडी अबेर हो जायेगी,आप जल्दी से लड़की को भेजिए,फिर हम निकले।”

  ” चाय पी लेती जिज्जी , बस 5 मिनट ही लगेगा।”

  प्रमिला की विनम्रता सुशीला के तन बदन को सुलगा रही थी

” नही ! अभी तो हो ही नही सकता।” इतने में बांसुरी आसमानी रंग के लहन्गे में सजी संवरी चली आयी, उसे देखते ही राजा के चेहरे पे लजीली मुस्कान चली आयी,होंठों की नाचती कोर अम्मा से कैसे छिपी रह सकती थी,आते ही बांसुरी ने सुशीला को प्रणाम किया __
” हाँ! बस बस!! खुस रहो,,पीछे बैठ जाओ।।

   एक दूसरे में खोये ताज़े ताज़े प्रेमियों को ये रुखाई नज़र नही आयी पर पीछे कोई और भी थी जिसे ये सारा सब कुछ समझ आने लगा था और जो भविष्य में घर में छिड़ने वाले महायुद्ध की प्रस्तावना को मन ही मन तैयार कर आनंदित हो रही थी।।

” हियाँ आ जाओ बंसी !! हमारे पास।” रूपा की चाशनी  पे सास की जलती हुई नज़र भी कडवाहट ना ला पाई

  बांसुरी ने आंखों ही आंखों में राजा से इजाज़त ली, राजा ने पलकें झपका कर इजाज़त दी और बांसुरी पीछे चली गयी…..कुछ देर पहले का पुत्र की बगल वाली सीट पर विराजमान होने का मातृ विजय गर्व चकनाचूर हो गया।।

    इत्ता सुन्दर गोरा चिट्टा सजीला सा लड़का!!!
  कुछ सोच समझ कर ही सुशीला ने अपने दोनों लाड़लों का नाम रखा था,दोनो ही तो दिखने सुनने में राजा राजकुमार ही लगते थे….जैसे उंचे पूरे वैसा ही गठीला कसरती बदन,उसपे बिल्कुल पिघले हुए सोने सा लपटें मारता रंग…..राजा को इस सांवली सी बित्ते भर की लड़की में क्या भा गया ऐसा,ठीक है बामण घर की छोकरी है,पर है तो सरजूपारीन, राजा के बाबूजी कभी ना मानेंगे,कहाँ हम कानपुरिया बीस बीसवां कान्यकुब्ज बामण और कहाँ ये लड़कोरि।।
  किसी भी कीमत पर अपने लल्ला को इस बिदेसिनी से बचाना ही पड़ेगा।।

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    सुशीला अपनी सोच में मगन थी,,राजा ने गाड़ी में गाने बजा दिये….

   ” जब से तुम्हारे नाम की मिसरी होंठ लगायी है
      मीठा सा गम है और मीठी सी तन्हाई है….
      रोज़ रोज़ आंखो तले एक ही सपना चले…”

    गाड़ी अपनी गति से गन्तव्य की ओर बढ़ती चली गयी।।।

क्रमशः

aparna..

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

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