शादी.कॉम-18

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      ” नैना नु पता है, नैना दी खता है
       सानु किस गल दी फिर मिल दी सज़ा है
       नींद उड़ जावे, चैन छड  जावे
       इश्क़ दी फ़क़ीरी जद लग जावे
                 ऐ मन करदा है ठगी ठोरिया
                 ऐ मन करदा हैं  सीना ज़ोरियां
                 ऐने सिख लियाँ दिल दियां चोरियां
                 ऐ मन दियां ने कमज़ोरियाँ “

   एक के बाद एक गाने बजते रहे,गानों की ताल पे ताल मिलाता राजा गाड़ी चलाता रहा,बांसुरी पीछे से राजा को देख देख मुस्कुराती रही,पर राजा के ठीक बाजू में बैठी सुशीला का फिर किसी काम में मन नही लगा।।

     ऐसा नही था कि सुशीला को “लव मैरिज” से शिकायत थी ,अपनी बेटी जैसी पिंकी के लिये भी कुछ हल्की फुल्की ना नुकुर के बाद उसने खुद ने हामी भर दी थी……पर बेटों के नाम पर जाने क्यों उसका हृदय एक अजीब सी ममता से छलक उठता था,इस भाव में प्रेम था तो आधिपत्य भी था,स्नेह था तो एकाधिकार भी था।।
        वैसे भी शादी के बाद लड़का उतना माँ का कहाँ रह जाता है,और अगर शादी  खुद की मर्ज़ी से की हो तब तो पूछो मत !! माँ तो ऐसी शादियों में अमूमन ललिता पवार का किरदार निभाने लगतीं हैं।    

 

    वैसे सुशीला को पारंपरिक बहुओं को सताने वाली सास बनने का शौक भी नही था,इसीसे वो रूपा के लिये बिल्कुल माँ जैसी सास ना होकर भी एक  अच्छी सास तो थी ही, पर राजा के केस में बात अलग थी,यहाँ राजा किसी लड़की को पसंद करने लगा था,हालांकि अभी तक बांसुरी के लिये ऐसी कोई इच्छा उसने अपनी माँ के सामने जाहिर नही की थी पर पूरे नौ महीने अपने पेट में रख के अपने ही रक्त मांस से सींच कर उसे पैदा करने वाली जननी क्या अपने बालक के हृदय की अधीरता से इस हद तक अंजान रह सकती थी।।
       छठी इंद्रि के एंटीना द्वारा बार बार भेजी जा रही सूचनाओं को व्यर्थ भी नही माना जा सकता था ।।

       बिदाई के नियत मुहूर्त से कुछ पहले ही अवस्थी परिवार मय बांसुरी शास्त्री जी के घर पहुंच गया, आवश्यक आवभगत के बाद दोनो समधिने यहाँ वहाँ की तैयारियों में जुट गयी,रूपा बांसुरी को साथ लिये रेखा को सजाने में लग गयी,,सभी किसी ना किसी कार्य में व्यस्त थे।।

     घर के बीचो बीच बने बड़े से दालान में लोगों की आवाजाही लगी हुई थी,रूपा का कमरा ऊपर था जहाँ बांसुरी थी…..काफी देर से बांसुरी को राजा का कोई हाल समाचार नही मिला था,बांसुरी के भेजे सन्देश भी राजा ने व्यस्तता के कारण नही देखे थे, ऐसे में अपनी अधीरता से स्वयं परेशान बांसुरी ने रूपा से पानी पीने के बहाने नीचे जाने की आज्ञा ली और कमरे से निकल चली,लोगो से बचते बचाते नीचे को जाती गोलाकार सीढ़ियाँ उतर ही रही थी कि किसी काम से ऊपर को जाते राजा से टकरा गयी__

  ” कहाँ गायब हो सुबह से?? नज़र ही नही आ रहे,, और इतना काहे में बिज़ी हो गये की मेसेज तक देखने का समय नही मिला।”

  ” क्या मेसेज करी रही।”

  ” खुद ही देख लो,बताना होता तो लिखने में आँख काहे फोड़ते।”

  ” ये भी बात सही है,,यार इत्ता भन्नायी काहे हो,देख तो रही हो शादी ब्याह का घर है,अब भैय्या तो ठहरे जमाई ,उनको कोई काम नही बता रहा,हम ही सबसे छोटे हैं,हमी पेराते हैं हर जगह।।”

  ” हम काम करने मना कर रहे क्या?? पर एक तो हम किसी को जानते नही,तुम एकदम ही छोड़ कर चल दिये तो गुस्सा तो आयेगा ना,का करें बोलो।”

  ” हम तो सोचे थे आराम से तुम और हम कहीं बैठ के बातें करेंगे पर यहाँ तो इत्ता काम फैला रखा है इन लोगों ने,ऐसा लग रहा सारा काम हमारे लिये ही बचा रखा था कि राजा आयेगा और करेगा सब।।”

” अच्छा वो सब छोड़ो,ये बताओ अम्मा जी से बात हुई क्या??”

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” अजीब बात करती हो यार तुम!! देख रही हो मरने का भी फुर्सत नही है राजा के पास ,और पूछ रही अम्मा से बात हुई का!! अरे कहाँ से करे,अम्मा यहाँ वहाँ उड़ती जो फिर रही हैं ।”

” ना करो!! हम कौन सा मरे जा रहे कि तुम अम्मा जी से बात करो और उसके बाद हमको आई लव यू बोल दो।”

” रुको रुको! क्या बोली तुम!! क्या बोल दें।”

” हम कहाँ कुछ बोले?? हम तो कुछ नही बोले।।”

” अच्छा बाबू!! हम से चालाकी,अभी अभी तो बोली ना कि अम्मा से बात करके…..

दोनों एक दूसरे की आंखों में खोये एक दूसरे को ताने उलहने दे रहे थे कि राजा की अम्मा की गगनभेदी आवाज़ हवाओं में घुल गयी

” राजा ए राजा!! तुम हियाँ खड़े हो,वहाँ तुम्हारे बाबूजी कब से तुम्हें आवाज़ लगा रहे,,लड़के वाले निकले की नही पता करो जरा,उसके बाद जनमासा भी देखे आओ एक बार,सब ब्यब्स्था ठीक ठाक है की नही??”

” अम्मा बिदाई ही तो है,उसमें जनमासा की का ज़रूरत।”

“काहे अब तुम हमें बताओगे कि का नियम करना है और का नही।।कुंवर कलेवा करने के पहले दूल्हा का हाथ मुहँ नौआ कहाँ धुलायेगा,ईहे घर मे?? बिदाई के पहले दोनो का कोहबर पुजाई कहाँ  होगा?? बोलो? औ सबसे बड़ा बात कि यहाँ से रेखा को जनमासा  तक बिदा करके बापस ले आयेंगे औ एक बार फिर बिदाई कर देंगे तो गमना भी संगे संग निपट जायेगा। नही तो इतना महंगाई के जमाना में बिदाईये मा दुई तीन लाख रुपिया बकील बाबू का निपटा जायेगा, समझे।।हमसे बाते बनाएँगे ,जाओ हो लाला जल्दी करो,और ए सुनो तुम ,का नाम है तुम्हारा??”

  सुशीला ने बिल्कुल ऐसा अभिनय किया जैसे उसे सच में बांसुरी का नाम याद नही आ रहा हो,बांसुरी ने सिर झुका कर धीरे से अपना नाम बता दिया__” बाँसुरी “

  ” हाँ  हाँ बांसुरी!! जाओ देखो दुलहीन तैयार भई की नही।उसे नीचे लाना ,तब तक वहीं बैठो।।”

  बहुत प्यार से हां मे सिर हिला के बांसुरी ऊपर को वापस मुड गयी पर जाते जाते उसने आंखों के इशारों से राजा को अम्मा जी से बात करने को बोल ही दिया,जिसे राजा ने सर झुकाकर मान लिया,इस सारे प्रसंग को देख कर सुशीला के तन बदन में आग लग गयी।।
     उसे अपने लाड़कुंवर और इस छोकरी के बीच चल रही “आंखो की गुस्ताखियाँ ” माफ करने का बिल्कुल भी जी नही किया।।

   बिदाई के पहले होने वाली छोटी मोटी  रस्में चलती रहीं,सब रस्मों रिवाजों का आनंद ले रहे थे पर प्रेमी युगल अपने में ही मगन था,भले ही राजा पुरूषों की तरफ और बांसुरी औरतों के तरफ बैठी थी पर रह रह कर दोनो की आंखें आपस में टकरा ही जाती थी, और इस टकराहट में निपट जाते थे दुनिया भर के उलाहने,ताने,मान मनौव्वल,रूठना मनाना।।और इन सब बातों की साक्षी बनती जा रही थी सुशीला।।

    बरातियों के स्वागत सत्कार भोजन पानी के बाद बिदाई कार्यक्रम प्रारंभ हुआ__
    
“कैसे भूल पाऊँगी मैं बाबा ,सुनी जो तुमसे कहानियाँ छोड़ चली आँगन मैं मैय्या ,बचपन की निशानियाँ
सुन मेरी प्यारी बहना, सजाये रहना ये बाबुल की गली, सजन घर मैं चली ……”

     बरातियों के साथ आयी धुमाल पार्टी ने ऐसा मर्मस्पर्शी गीत पृष्ठभूमि में बजा दिया कि वहाँ खड़े कई उम्रदराज पुरूष भी अपनी अपनी दुहिताओं की बिदाई याद कर सिसक पड़े …..
        रेखा को शादी ब्याह की हर रस्म से बहुत प्यार था, पर उसकी शादी जिन हिसाबो में हुई उसे अपनी कल्पनाओं को साकार करने का कोई अवसर नही मिल पाया था,इसीसे आज उसने अपने एक मात्र सुख स्वप्न को पूर्ण करने शहर की सबसे बड़ी और महंगी चर्चित ब्युटिशियन “नीता जी “को अच्छी मोटी धनराशि दे कर बुक कर लिया था।।

    रेखा के पीछे पीछे रूपा भी ब्यूटी सलून की गंगा नहा आयी__” बस हमारा ज़रा सा जूड़ा सेट कर देना, ये कौन सी लिपस्टिक है थोड़ा सा हमें भी लगा देंगी नीता दीदी,ज़रा सा आपका वाला फेस पाउडर भी मार दो ना चेहरे पे।”
     इस तरह की टुच्ची हरकतों से परेशान होकर डिग्निफाईड,वेल मैनर्ड सुपर स्मार्ट ब्युटिशियन नीता जी ने अपनी असिस्टेंट को रूपा का टच’प करने का इशारा किया और खुद रेखा को सजाने में लग गयी।

      अपने कुशल चितेरे हाथों का कौशल दिखाती
ब्युटिशियन ने रेखा के साधारण रूप को ऐसे असाधारण रंगो से सजा दिया कि रूपा भी चकित हो देखती रह गयी….अब ग्यारह हज़ार खरच कर कराये इत्ते सुन्दर मेक’प को क्या बिदाई के आँसूओं में बहाया जा सकता था।।
       भले ही सारी मोहल्ले की औरतें ज़ार ज़ार रो रही थीँ पर दोनो बहनों के आंसू नदारद थे,,,जग दिखायी को दो एक आंसू रूपा ने बहा भी लिये,बहन को गले से लगाये बचपन की यादों को दुहराती रूपा ने धीमे से रेखा के कान में मन्त्र फूंक दिया__” दो आंसू बहा दो,बिदाई मे नही रोने से अपसकुन होता है।”

  ” मेक’प सारा बह जायेगा जिज्जी।”  रेखा की बात पर बन्सी ने चुपके से उसके कान के पास मुहँ ले जाकर कहा__
           ” वाटर प्रूफ मेक’प है ‘मैक’ का,आपकी ब्युटिशियन बोल रही थी,विदेशी कंपनी है,जा के नहा भी लेंगी ना तब भी चेहरा ऐसे का ऐसा ही दिखेगा।। बेझिझक रो लिजिये।”

  रेखा ने इशारे से बन्सी से पूछा ” पक्का??”
  
   बंसी ने आंखों से ही रेखा को आश्वस्त किया,और रेखा अपनी जिज्जी के गले से लगी रो पड़ी ।।

  लल्लन के पट से बंधी अपनी चुनरी की गांठ सहेजती रेखा अपने दोनों हाथों से लावे उलीचती आगे बढ़ कर कार में जा बैठी,उसके पीछे सभी को सादर नमन करता लल्लन भी अपनी नवेली पत्नि के बाजू में जा बैठा,,उनकी कार अपने पहिये से नारियल को दबाती धीरे धीरे आगे बढ़ धूल उड़ाती चली गयी।।।

     बिदाई के बाद सभी मेहमान खाना पीना निपटाने में लग गये, रूपा के साथ बैठी बांसुरी भी बिना मन आड़े टेढे कौर जैसे तैसे निगल रही थी।।

   जिसने भी ये कहा है कि प्यार होने के बाद भूख प्यास मर जाती है ,नींदे उड़ जाती है  …शत प्रतिशत सत्य कहा है,,उस बन्दे को वाकई ये सुखद अनुभूति ( पहले और सच्चे प्रेम की) कई कई बार हुई होगी।।

   अब इस आनंद उदधि में राजा और बांसुरी डुबकी लगा रहे थे ,जहां उनकी भूख प्यास सुख चैन सब खो चुका था,और कुछ बचा था तो बस एक सुकून __ एक दूसरे की आंखों में खोने का।।

   राजा अपनी प्लेट सजाये बांसुरी की तरफ बढ़ ही रहा था कि सुशीला ने आकर बीच में ही उसे रोक लिया__” लाला जा बेटा अपने बाऊजी को थाली दे आ!! वो कहाँ यहाँ बुफे उफे में घुसेंगे,और सुन पानी का गिलास भी रख आना,खाने के बीच उन्हें पानी लगता है,और सुनो मिर्ची का भजिया ना ले जाना , खाने को खा तो लेंगे फिर रात भर पेट मा जलन बोल के परेसान करेंगे,मीठा उठा अच्छे से ले जाना,वही तो चाव से खाते हैं मिठखौवा बामण ।।”

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   अम्मा की बात सुन राजा वापस मुड़ के अपने बाऊजी की तरफ चला गया,उन्हें थाली पकड़ा के निकल ही रहा था कि शास्त्री जी ने उसका हाथ थाम वही बैठा लिया__
 
    ” आज एक और जिम्मेदारी से मुक्त हो गये हम! अब हमारे सलगे लड़िका बच्चा अपने अपने ठौर को लग गये,,अवस्थी जी आप जैसा समधि पाकर सच हमने गंगा नहा ली ,, युवराज बाबू जैसा दामाद, आपका जैसा परिवार किस्मत से मिलता है भई !! अब देखो !! राजा ने कितना भाग दौड़ किया है,हमको तो लगता है जैसे राजा हमारे ही कोनो जनम का लड़का है।।
      अब एक पते की बात बताते हैं,हमारे एक साढू हैं, बलिया के रहवासी है,खूब खेती खार है,पुराने गोंटिया है जमीन जायदाद की कोनो कमी नही ,,इत्ता रुपया जोड़े रक्खे हैं कि सात पुश्ते आराम से बैठ के खा सकतीं हैं ……एक इकलौती लड़की है बस !! मालती!! अपने राजकुमार के लिये एकदम फिट रहेगी।।खूब माल दबा के रक्खा है मिसिर( मिश्रा) जी ने,मोटे आसामी है….इक्कीस लाख तो तिलके चढ़ा देंगे,पांच – सात में बरीक्षा निपटाएंगे।।
      गिरस्ती का पूरा समान,कार और पांच एकड़ का खेती भी देने बोल रहे।।हमरी बड़की के ब्याह में उन्होनें राजा को देखा रहा,अब जब वो देखे कि हमरी रेखा भी निपट गयी तब अपने मन की बात रक्खी हमारे सामने।।
      समधि जी इससे बढ़िया रिस्ता नही मिलेगा।”

” पापाजी लड़की पढ़ी कहाँ तक है।”

” दामाद बाबू अब ईहे मत पूछो,लड़की गोरी नारी सुन्दर है,अब बचपन से राजकुमारी बना के पाले, स्कूल में एक दिन कुछ जबाब गलत दे दी रही तो गणित की बहन जी ने वहीं दो लप्पड़ धर दिये अब लड़की डर गयी और घर आके ऐसा कोहराम मचाई कि फिर कोनो उसको स्कूल नही भेज पाया।”

“दसवीं तो पास होगी??”

” चौथी के बाद पाठसाला का दरसनो नही पायी लड़की पर काम काज में एकदम चतुर!! हमरी रूपा  का दूजा रूप समझो ।।।

” तब तो गये काम से ” युवराज की चिकोटि पे बिना ध्यान दिये उसके ससुर भावी पुत्रवधु के गुणों का व्याख्यान करते रहे।।

   महिलायें बिना वजह ही बतकही के नाम पे अधिक बदनाम है वर्ना पुरूष भी इधर उधर की गप्पे हाँकने में कहीं से पीछे नही रहते,,दस मिनट में समाप्त होने वाली पूरी कचौरी पूरे डेढ़ घन्टे तक थाली में अपने उदरस्थ होने की प्रतीक्षा करती रही।।
   
    तभी छन छन पायल छनकाती सुशीला वहाँ आयी और थोड़ी दूर से ही आवाज़ लगा दी__

   ” अजी सुनिये!! अब निकलना भी पड़ेगा,घर पहुँचते पहुँचते रात हो जायेगी,,बो तो अच्छा है फूलमणि को घर छोड़ आये थे तो सांझ का दिया बाती हो जायेगा।।”

” हाँ हाँ!! ठीके कह रही हो,चलो युव की अम्मा,निकलते हैं अब।।”

  अबकी बार सुशीला पूरी तैयारी में थी,कौन किस गाड़ी में सवार होगा,कहाँ बैठेगा उसने मन ही मन पूरा खाँचा खींच रखा था,उसने महिलाओं के बीच खड़ी बांसुरी और रूपा को ठेल ठाल के युवराज की गाड़ी में बैठा दिया,और खुद प्रिंस प्रेम और एक दो नौकरों को लिये राजा की गाड़ी में जा बैठी।।

    राजा जब शास्त्री जी की चरण वन्दना कर अपनी गाड़ी पे आया तो बाँसुरी को वहाँ ना पा कर असमंजस में प्रिंस को देखा,प्रिंस ने त्वरित गति से बड़े भैय्या की गाड़ी की ओर इशारा कर दिया, बड़े भैय्या की गाड़ी में बांसुरी को बैठे देख राजा को आश्चर्य हुआ __ :कि ये वहाँ कैसे चली गयी: पर प्रत्यक्ष में बिना कुछ कहे चुपचाप आकर ड्राईविंग सीट पर बैठ गया।।

   उधर अम्मा जी के कड़े तेवर देख बिना ना नुकुर किये बांसुरी चुपचाप युवराज भैय्या की गाड़ी में जा बैठी थी,रूपा भाभी से भी कम ही मिलना हुआ था उसका और उसे उनकी स्वप्रशंसा की बातें पसंद भी कम ही आती थी इसीसे मन ही मन उदास बांसुरी अपने ही मन के आगे लाचार हुई जा रही थी।।

    कैसा द्वंद उसके मन में चल रहा था,दो दिन पहले तक जिस राजा से सिर्फ जिम मे एक डेढ़ घन्टे की मुलाकात ही काफी होती थी आज उसके बिना पांच मिनट भी काटना कितना मुश्किल लग रहा था।। उसे पता था कि राजा की गाड़ी भी उसके आगे या पीछे ही चलेगी फिर भी कैसा खालीपन सा मन में भर गया था,जैसे बहुत सारे बादल छा तो गये हैं,पर बरस नही रहे…..तभी गाड़ी का सामने का दरवाजा खोल राजा अन्दर आकर बैठ गया__

  ” अरे राजा तुम यहाँ कैसे?? तुम्हारी गाड़ी कौन चला रहा बाबू??”

  ” भैय्या वो प्रिंस चला रहा,हमारा हाथ में ज़रा दर्द था तो प्रिंस को चलाने बैठा दिये,बाऊजी को उसी गाड़ी में बैठाए,काहे अम्मा नही तो अकेली हो जाती ,अम्मा बोली भी कि बाऊजी आपकी गाड़ी में बैठेंगे,तो हम बोल दिये हम चले जाते हैं भैय्या के पास,और यहाँ चले आये…अम्मा आवाज़ भी दी ,हम बोले चिंता ना करो अम्मा ,हम दोनो भाई समय से पहुंच जायेंगे घर।।ठीक है ना भैय्या।।”

   ” ठीके है छुटके ।चलो फिर गाड़ी भगायी जाये।।तुम्हरी भौजाई को अपना मायका गावँ का चाट भी खिलाना है,और उनको यहाँ तालाब पार शिव मन्दिर का दर्शन भी करना है,तो ये सब करते चलते हैं….काहे बांसुरी तुमको कोनो जल्दी तो नही है ना?”

  ” नही भैय्या जी कोई जल्दी नही,,हम मम्मी को फोन करके बता देते हैं ।”

    गाड़ी चारों को लिये सरपट कानपुर की ओर दौड़ चली।।

     तैनु ले के मैं जावांगा,दिल दे के मै जावांगा
      तेरे नाल मैं आवान्गी,ससुराल मैं जावान्गी।।।

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क्रमशः

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aparna …

लेखक: Aparna Mishra

दिल से लेखक हूँ... मेरे किस्सों में आप खुद को ढूंढ सकते हैं... 80aparna.mishra@gmail.com

6 विचार “शादी.कॉम-18” पर

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